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Transcript

Chapter 1

आप सुन रहे हैं कुछ वॅार शुभानंद की लिखी किताब अंतर्द्वंद और मैं हूँ और ऍम सुने । जो मन चाहे प्रारंभ वर्तमान समय से तीन साल पहले सन दो हजार लखनऊ उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रलिस्ट फोन इट साहनी के बंगले के अंदर स्टडी रूम में उसके साथ धीरज ने की । उपस् थित था । देर रात का समय था । स्टडी लैंप से निकलती पीले रंग की रोशनी उजागर थी । दोनों कुर्सियों पर आमने सामने बैठे थे । मेज पर एक बडा सामने खुला हुआ था । साथ ही लेपटॉप, कागजात और पासपोर्ट वगैरह रखे हुए थे । सारी तैयारी हो गई । साहनी ने पूछा था बस समझ लो, एक हफ्ते बाद में अंडर ग्राउंड हो जाऊंगा । उसके बाद तुम से कॉन्टेक्ट करने का क्या जरिया रहेगा? अभी कुछ कह नहीं सकता । देखते हैं प्लान क्या है? साहनी सोचने वाली मुद्रा में हथेली पर अपनी थोडी दिखाते हुए बोला ये बहुत बडा रिस्क लग रहा है । अभी भी समय सोच लेते हैं । जिस लेवल का काम हम करने जा रहे हैं उसके हिसाब से देखें तो ये कुछ भी नहीं है । सिर्फ पेशंस रखना होगा । बहुत सारा पेशन तो बताओ आईएसआई वाले क्या कर रहे हैं? उन्होंने मुझे उस मॉल मिनाज के जरिए साजिश में फंसाना शुरू कर दिया है । फसने का नाटक में कर रहा हूँ और उन्हें क्या मालूम तो हो रहे हैं । हमारे प्लान है । हाँ तो उनकी बनाई साजिश में फंसे चले जाना । उन्हें लगेगा तो उनकी हाथों की कठपुतली हो । एक बार जब वो तो मैं पूरी तरह से फंस लेंगे । फिर वो लोग तुम्हें मास्टरमाइंड प्लैन में जरूर इन्वॉल्व करेंगे । मुझे यकीन है वो तुम्हारी कंपनी की सहायता से यहाँ हथियार पहुंचाना चाहेंगे । मैं तैयार हूँ फंसने के लिए बस एक बार खाली तक पहुंचने का मौका मिल जाएगा । मेरा जीवन सफल हो जाएगा । तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी होगी यादव बचपन में जब हम ये सब सोचते थे साहनी रहते हुए बोला तब लगता नहीं था कि ये कभी सच हो सकेगा । क्या करेंगे, कैसे करेंगे कुछ भी पता नहीं था । पर ये होता था कि कुछ न कुछ करेंगे । हमारे परिवार वालों के साथ जो हुआ उसका बदला तो लेना ही था । साथ ही समाज में पनप रहे गंदे खेडों को खत्म भी करना है । आगे का प्लान किया है । अगर सब कुछ ठीक रहा और हमने खलीली के ऊपर फतह कर ली तो उसके बाद किस तरह से आगे बढे । इतनी बडी जिम्मेदारी हम कैसे उठाएंगे । भारत के मित्र देश तुरंत हमारे ऊपर एक्शन लेंगे । नहीं मुस्कुराया हूँ तुम्हारा सोचना एकदम ठीक है हमारी इतनी भी साथ नहीं की । एक समूचा देश एकदम से अपने कब्जे में कर पाए । तुम यकीन नहीं मानोगे हमारे पीछे कितनी बडी बैकिंग हैं । बहुत शक्तिशाली बैठेंगे कैसी की और ये तो मुझे आज बता रहे हो । साहनी आंदोलित होते हुए उठ खडा हुआ । देखो मैं इंतजार कर रहा था, सही वक्त का नहीं । उसी तरह इत्मीनान से बैठे बैठे बोला वो तो अभी तक तुम पूरी तरह से मुझ पर विश्वास नहीं कर पा रहे थे, अपने बचपन के दोस्त पर भी नहीं । जिसके अगर पर मैं चला हूँ उस पर मैं कभी कभी अपनी परछाई को भी शक की निगाह से देखता हूँ लेगी । शून्य में खोलते हुए बोला उसकी आंखों में दार्शनिक से भाव थे । कौन है वो तो गैस करो तो अपने देश से ज्यादा शक्तिशाली अपनी देश से ज्यादा शक्तिशाली साहनी सोचते हुए बोला कई गुना ज्यादा शक्तिशाली इतना शक्तिशाली की वक्त आने पर अमेरिका और रूस को भी जवाब दे सकेगा । साहनी ने हैरानी से उसकी तरफ देखा । तुम कहना क्या चाहते हो, कोई दूसरा देश में बैठ कर रहे हैं । नहीं नहीं मुस्कुराते हुए उस की तरफ उंगली का इशारा किया, एकदम सही कहा है कौन कौन से देश नेगी ने उत्साह के साथ मैं इसपर खुले । मैं आपकी तरफ उंगली बढाई और फिर एक देश के मानचित्र के ऊपर रखती साहनी अचंभित सा उस मानचित्र को देखता रह गया ।

Chapter 2

अंतर्द्वंद क्यूँ कुछ ज्यादा ही चाहकर भी बुलाई नहीं जाती हूँ । कभी कभी हम खुद को किसी दूसरे इंसान के इतना करीब महसूस करते हैं कि उसके जाने के बाद भी हर पल उसके अपने पास होने का एहसास होता रहता है । लखनऊ में बारिश का मौसम था आए गए मतलब बे मतलब बारिश हो रही थी । अभी शाम को अचानक हुई बारिश से एक तरफ लोग सेर पर किसी आसरे की तलाश में भाग दौड रहे थे और दूसरी तरफ सीक्रेट सर्विस का एजेंट अमर वर्मा अपने खयालों में खोया बारिश में भीगता हुआ पैदल चला जा रहा था । आज एक महीना बीत चुका था । खाली के मास्टरमाइंड प्लैन को असफल हुए हैं । आज एक महीना हो चुका था उस दिन को जब देश की खातिर सीक्रेट सर्विस राॅक सीबीआई और इंडियन आर्मी ने संयुक्त होकर देश के खिलाफ रची गई अब तक की सबसे बडी आतंकवादी साजिश को नेस्तेनाबूत किया था । साथ ही आज एक महीना हो चुका था पुनीत सानी धीरज नहीं की और रिंकी सेन्को मरे हुए हैं । रेंकी अमर की आंखों के सामने उसका मनमोहक चेहरा घूम गया । वो एक रॉ एजेंट थी जो अमर का प्यार बन गई थी । उसे अपना सोलमेट मानने लगी थी । पर चेस्टेन उस प्यार का इजहार उसने अमर से क्या वही दिन नियति में उसका आखिरी दिन साबित हुआ आपने? सिरफिरे भाई पुनीत साहनी को खुद अपने हाथों से मारने के अपराधबोध से बोझिल उस लडकी ने अपना पिस्टल खुद अपनी कनपटी पर लगाकर ट्रिगर पर दबा दिया था । क्यों? क्या तुमने ऐसा आखिर क्यों किया का ऐसा ना हुआ होता? तो आज हम दोनों साथ होते हैं क्या? कुछ नहीं हो सकता था । जिंदगी में हम साथ मिलकर अपना अपना मिशन पूरा कर सकते थे । किसी मिशन में भले ही तुम्हें कुछ हो जाता तो शायद इतना हम न होता, जितना तुम खुद अपनी जान देकर गई हो । कैसे एक बार के लिए भी तुम्हारे हाथ नहीं हिचके तो एक बार भी तुमने नहीं सोचा कि तुम्हारे भाई के अलावा भी अब तुम्हारी जिंदगी में कोई और है, उसका क्या होगा? वो कैसे जिएगा? तो मैं तो जाने से पहले आखिरी शब्द तक नहीं बोले । मेरी तरफ एक आखिरी बार देखना भी जरूरी नहीं समझा । अगर देखा होता ना तो शायद तुम ऐसा सेल्फिश कदम कभी नहीं उठाती । अब जब चली ही गई हो, अब जब चले ही गए हो तो अभी बार बार मेरे खयालों में मेरे सपनों में आकर ये बोलने का क्या मतलब है कि मैं अपना ख्याल रखना और तुम्हें फूल जाऊँ । ये तुम्हारे लिए आसान था, पर मेरे लिए नहीं हो पा रहा है । मैं ये सोचने के लिए मजबूर हूँ कि क्या वाकई तुम मुझसे प्यार करती थी या सिर्फ मेरा दिल बहलाने के लिए ऐसा बोल दिया था? नहीं । अमर ने याद किया सोहनगढ माइंस के बाहर बिताये उन लोगों को जब रिंकी ने अपने प्यार का इजहार किया था और ये कहा था कीअमर उसका सोलमेट है । इसमें कोई शक नहीं सोचते सोचते अमर अपने घर पहुंच गया । उसने मेन गेट खोला तो हमेशा की तरह बिंगो दुम हिलाते हुए उसका स्वागत करने लगा । अमर ने धीरे से एक बार उसकी पीठ सहलाई और फिर अन्दर की तरफ बढ गया । बिंदु असंतुष्टि से उसको जाता देख पूंछ हिलाते हुए ऍम करने लग अमर अंदर पहुंचा । इमरती लाल ने उसके बुझे हुए चेहरे पर नजर डाली । उसे सब पता था जावेद और जॉन ने उसे सब बता दिया था और खास हिदायत दी थी कि अमर पर नजर रखे उसका खयाल रखें क्योंकि अमर जॉन के कई बार आग्रह करने के बाद भी उसे घर में आकर रुकने नहीं दे रहा था । वो निरंतर यही बोलता रहा कि उसे एकांत चाहिए । इसे एक महीने के दौरान वो ऑफिस भी नहीं गया था । चीफ अभय कुमार ने उसे ब्रेक लेने को कहा था । खाना लगाने बाबू इमरती लाल ने पूछा नहीं मन नहीं, दोपहर में बहुत खा लिया था । कहाँ बहुत खा लिए थे । दो रोटी ही तो खाए थे । थोडा तो खालो तुम्हारी पसंद की मखनी दाल और चावल बनाया है । नहीं सही में मूड नहीं बाबू मूड के लिए थोडी न खाते हैं । देखो अब थोडा बियर पी हो तो खाना भी खा लो वरना नुकसान करेगा । अमर ने मुस्कुराकर उसे देखा और कहा अच्छा ठीक है । लगा दो । खाना खाने के बाद अमर बैठक में पहुंचा । उसे याद आया । एक बार रिंकी उससे वहाँ पर सिगरेट मांग रही थी । उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई । वो उस कमरे में पहुंचा जोकि रिंकी का उसके घर में परमानेंट कमरा बन गया था । उसकी नजर टेबल पर गई जहाँ रिंकी का लेपटॉप और उसके अनगिनत उपकरण रखे थे । कितनी सहजता और कम्फर्ट के साथ वो इस कमरे में रहती थी जैसे बचपन से ही रह रही हूँ । अमर के चेहरे पर मुस्कान आ गई । वो पलंग पर जाकर बैठ गया । फिर कुछ सोचते हुए तकिया लगाकर लेट गया और चादर ओड ली । जैसे कि वो रिंकी कोर्स बैठ पर महसूस करने लगा । अमर ने आंखें बंद कर ली । न जाने के उसके चेहरे पर मुस्कान थी । रिंकी की मीठी यादें उसके मन को गुदगुदा रही थी । हमारे ऍम कोई प्यार से उसका नाम तो कर रहा था अमर हमारे अमर ने आंखें खोली तो उसने पाया रिंकी उसके बगल में बैठ पर बैठी थी और उसने लैप्टॉप अपनी गोद में रखा हुआ था । दुबली पतली प्यारी सी स्कूल गाल जैसी देखने वाली जिनकी जिसके चेहरे पर मुस्कान और मुस्कान के कारण गालों में गड्ढे दिखाई देते थे । तुम मेरे बेटा क्यों हो रही हूँ? उसने पूछा अमर ने हैरानी से उसे देखा, वह सब पकाकर पीछे हो गया । क्या हुआ जिनकी खेल खिलाकर हस्ती मैं कुछ दिन बाहर क्या थी? तुम्हें मेरे कमरे पर कब्जा कर लिया । ये कैसे हो सकता है? अमर उठ खडा हुआ ऍर इनकी हँसी तुम यहाँ कैसे हो सकती हूँ तो तुमने क्या सोचा था इतनी आसानी से मुझ से पीछा छुडा लोगे कहकर उसने लैप्टॉप साइड में रखा और सरककर उसके पास आ गई । अपनी बाहें अमर के गले में डालकर वो उसकी आंखों में देखने लगी । मैं जिंदा हूँ पर सिर्फ तुम्हारे लिए मुझे कुछ समझ नहीं आना । मैंने अपनी आंखों के सामने तो मैं मारते अमर आगे वाक्य पूरा न कर सका । उसके होट फड फडा उठे वो संस्था पर मैं अभी भी जिंदा हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए । प्लीज मुझे छलावे में मत रखो । मेरी सपने से निकल जाओ मैं तो मैं भूल जाना चाहता हूँ । सच में तुम यही चाहते हो । अमर उससे नजरे नहीं मिला सका । अच्छा ठीक है । मैं तुम्हारी सपनों में आना छोड देंगे । पर तो में कुछ करना होगा क्या? नूर के बारे में और पता करो तो अभी तक समझ नहीं पाए कि मरते वक्त मैं कितने बडे सदमे में थी । अपनी जान से प्यारे भाई की असलियत जानकर विश्वास नहीं कर पा रही थी कि ये हकीकत है या कोई सपना । इसलिए उस वक्त मैं कुछ और नहीं सोच सकें । मेरा भाई एक हैवान बन चुका था । मुझे इतनी हिम्मत नहीं थी कि उसे अरेस्ट होते हुए कोर्ट में खडा देख सकूँ । उस वक्त में खत्म हो चुकी थी । मैं मानती हूँ मैंने तुम्हारे साथ गलत किया । स्वार्थी हो गयी तो तुम्हारे ऊपर क्या बीतेगी? नहीं सोच सकी मुझे उसके लिए माफ कर दो । प्लीज इस तरह डिप्रेशन में रहने की जगह वो काम करो जो मैं ना कर सकें । पुल के बारे में और पता लगा हूँ । मुझे यकीन है अपना देश अभी भी भारी खतरे में हैं । ठीक है अमर उसकी आंखों में झांक रहा था । पर क्या तुम वापस नहीं आ सकती? काशी मुमकिन होता पर अब तो मुझे प्रॉमिस करो कि तुम ये काम करोगे? अमर ने बेमन से सिर हिलाया । अच्छा अब सो जाओ । अब मैं तो मैं परेशान नहीं करूंगी । वो उसे एक तक देखता रहा । फिर अचानक ही रिंकी कहीं गायब हो गई । क्या अमर नींद से उठा इतनी बढिया और गहरी नींद उसे एक महीने बाद आई थी । वो पूरी तरह से फ्रेश महसूस कर रहा था । उसने कमरे में चारों तरफ देखा पर दिन की कहीं दिखाई नहीं । अलविदा वो मन ही मन बोला । उसने महसूस किया कि वह दुखी नहीं था । उसकी यादे उसके जहन में अभी भी ताजा थी । पर अपने अंतर्मन से अब वो आंदोलित नहीं हो रहा था । वो मुस्कुराते हुए बैठ से उठा और पूरे जोश के साथ उसका दिन चालू हुआ । कुछ देर में गाना गुनगुनाते हुए वह शिव बना रहा था । उसे इस तरह देखकर इमरती लाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । इतने समय बाद लगातार उसे चुप और उदास देखते देखते उसका मन भी खट्टा हो गया था । का बात है बाबू, आज तो बहुत ही खुश हो और सुबह सुबह कहाँ की तैयारी है । अरे ऑफिस जाना है इतना दिन हो गया । जाने कितना काम पेंडिंग हो गया होगा । चलो जल्दी से नाश्ता बना तो बहुत भूख लगी है । मैं यहाँ कराता हूँ । इमरती लाल बहुत खुश हुआ । उसने फटाफट ला जवाब आलू के पराठे बनाए जिन्हें चाव से खाकर अमर घर से निकला । आधे घंटे के अंदर वो सीक्रेट सर्विस के ऑफिस पहुंच चुका था । हाथ में कार की चाबी न चाहते और कोई गाना गुनगुनाते हुए वो तेजी से ऑफिस में प्रवेश हुआ । पर वहाँ के माहौल में कुछ अजीब सा सन्नाटा महसूस करते ही वह ठिठककर रुक गया । उसने चारों तरफ देखा, सभी लोगों से ही देख रहे थे और फिर काफी लोग उठकर खडे हो गए और एक एक करके धीरे धीरे सभी ताली बजाने लगे । अमर मुस्कुराया और सभी की तरफ देखकर सिर झुकाने लगा । ऍम भीनी मुस्कान के साथ फिर वो अपनी डेस्क पर पहुंचा । कुछ ही देर में श्रीनिवासन उसके पास पहुंचा हूँ और हाथ मिलाते हुए गर्मजोशी के साथ बोला ऍम, फॅमिली और क्या हाल? चाल सब ठीक ऍम आपको काफी मिस कर रहे थे हम लोग । आप के बिना तो ऑफिस में कोई रौनक नहीं रहता है । अच्छा आते ही मेरी खिंचाई शुरू हो गई । सर हम कहाँ का खिचाई कर सकता है? आप कौन सा रबर बैंड आपको की जा जाएगा और आप किस से चले जाएगा? वा श्री निवास क्या बात कही है चलो इसी बात पर काफी हो जाएगा । बिल्कुल अमर सर आप तो जब से ऑफिस नहीं आया हमारा तो कॉफी पी नहीं छूट गया । अब इतना भी मत को यार अच्छा अमर ने खडे होते हुए कहा । और फिर दोनों पैंट्री की तरफ बढ गए । वहां पहुंचकर दोनों ने कॉफी मशीन से अपने लिए कॉफी बनाई और वहीँ खडे होकर धीरे धीरे गर्म कॉफी की चुस्की लेने लगे । और क्या चल रहा आजकल ऑफिस में चीफ खाएँ और मेरी जान जावेद की दरें आप किसी के कॉन्टेक्ट में नहीं गया । नहीं मैंने तो कई दिन से फोन वोन सब बंद करके रखा हुआ था । आॅडर सेंसर यह काफी मुश्किल समय आप के लिए अमर कुछ पल शून्य में घूमता रहा । फिर बोल कोई नहीं हर किसी की लाइफ में मुश्किल समय आता ही है । जावेद ने भी कितनी मुश्किलें झेली हैं पर देखो अब इतने सालों बाद उसे कुछ आशा की किरण तो नजर आई । उसकी फैमिली शायद जिंदा है और ये कितनी खुशी की बात है ऍम और आजकल जावेद और जॉनसर उसी सिलसिले में लगा हुआ है । आज भी दोनों लापता फ्लाइट तीन सौ एक के जांच पडताल के चक्कर में निकला हुआ है । दो । वाइसी

Chapter 3

छह साल पहले दो हजार तेरह महानगर कॉलोनी लखनऊ उस वक्त रात के ग्यारह बजे हुए थे जब जावेद कि मारूति एट हंड्रेड उसके घर के अंदर कोर्च में आकर रुकी । गाडी से उतरकर उसने मेन गेट बंद किया और अंदर पहुंचा । हॉल में उसे सोफे पर बैठे उसकी बीवी सरीना और छह साल की बेटी फलक दिखाई दी । सरीना ने उसे देखते ही नजर दीवार घडी पर डाली और फिर नजरें वापस टीवी पर डाली । हालांकि उसे देखते ही फलक सोफे पर से होते हुए जावेद की तरफ थोडी गरीब गरीब मेरी वो आपने अब बाकी गले आ लगी मेरी प्यारी बच्चे । जावेद उसे गोद में लेकर गालों को चूमते हुए बोला गहरी मिला मिला मिला तो बंद हो गया । मेरी जान पर डैडी अपनी जान के लिए कुछ लेकर आए हैं ऍम वह स्वच्छंद भाव से सोफे पर चढकर कूदने लगी । जावेद ने पीठ से बैग उतारा और उसमें से गुडिया निकली । फल अपने खुशी से किलकारी मारते हुए गुडिया थाम ली । मेजर साहब सरीना तुनक कर बोली छह बज गए । जावेद से कुछ बोलते ना बना । वह सोफे पर बैठ गया और सरीना के कंधे पर बाहर रखने की कोशिश कर रहा था कि उसने उसका हाथ परे धकेल दिया । सॉरी अचानक ही नया कैसा गया? हाँ तो पूरी सीक्रेट सर्विस में आप तो अकेले ही एजेंट है ना । जावेद फलक को देखने लगा । हफ्ते में एक ही दिन होता है छुट्टी का और जब वो दिन भी ऑफिस में ही बिताना पसंद करते हैं । अरे मैं निकली रहता पर चीफ ने अरे मुझे ना सही अपनी बच्ची को तो वक्त दीजिए सिर्फ खिलाने देकर कब तक उसे खुश करते रहेंगे । अरे बाबा, कल नेट चला जाऊंगा, सुबह चलेंगे मिला सुबह कौन मिला जाता मुझे नहीं जाना । अरे बाबा फलक के स्कूल से वापस आने के बाद जहाँ बोलो चलेंगे हूँ । सरीना ने मुझे फिर लिया और फिर रिमोट सोफे पर पटक कर उठ खडी हुई खाना खाएंगे वो भी ऑफिस में ही हो गया । ऐसा कभी हुआ है रहने दीजिए । बहुत बार हो चुका है । आपकी यादाश्त उम्र के साथ कमजोर हो रही है । किचन की तरफ बढते हुए वो गुस्से में भुन बुलाया जा रही थी । जावेद ने जवाब नहीं दिया और फलक के साथ खेलने लगा । ऍम क्या मैं स्कूटियां को प्लेन में ले जा सकती हूँ? था बिल्कुल फॅमिली नानु की यहाँ जब हम जाएंगे तो मैं अपने सारे खिलोने ले जाउंगी । सारे नहीं बच्चा प्लेन में थोडा थोडा सामान ही ले जा सकते हैं । ऍम होता है उसमें तो बहुत जगह होती है । वो हाथ फैलाकर सोफे पर घुटनों के बल खडे होते हुए बोली जावेद उसकी नानी पर मुस्कुरा दिया और उसमें बहुत सारे लोग जाते हैं ना और प्लेन की मशीन भी बहुत बडी बडी होती है तो जगह कम बचती है । फलक गंभीर मुद्रा में सोचने लगी फिर मैं कौनसे खिलोने ले जाऊँ । अपनी बेस्ट खिलानी बनी वाले बैग में रख लेना । उसमें जितने भी आ जाए बहुत के वह प्रफुल्लित होते हुए सीढियों की तरफ भागी जो दूसरी मंजिल में उसके कमरे की ओर जाती थी । जावेद ने रिमोट उठाया और टीवी पर चैनल बदलने लगा । न्यूज चैनल पर आकर वो रुका । पिछले महीने मलेशिया के गायब हुए प्लेन को लेकर अभी तक न्यूज में काफी सरगर्मी थी । काफी खोजबीन के बाद अभी तक उस प्लेन का कुछ पता नहीं चला था । कई लोग अपनी अपनी थ्योरी दे रहे थे । कोई से हाईजैकिंग का मामला करार दे रहा था तो कोई ऍम का । कुछ लोगों का ये भी मानना था कि प्लेन किसी वैज्ञानिक फिनॉमिना के चलते गायब हो गया । फिलहाल न्यूज पर कहा जा रहा था मलेशिया की गैर हुई फ्लाइट फाइव फोर जीरो को लेकर फिलीपींस के एक साइंटिस्ट का दावा है कि प्लेन टाइम टेबल के एक्सपेरिमेंट का शिकार हुआ है । आई आपको दिखाते हैं उनका क्या कहना है । फिर स्क्रीन पर एक इमारत के बाहर चश्मा लगाए एक बूढा एशियन एक रिपोर्टर के साथ दिखाई दिए । वह फिलिपीनो में बोल रहा था जिसका हिंदी अनुवाद सबटाइटल्स में लेकर आ रहा था । लेकिन मैं आप से पूछना चाहता हूँ कि टाइम ट्रैवल मुमकिन है और मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर आज की तारीख में कोई इस मुकाम तक पहुंच चुका हो और अब उसे मुमकिन कर दिखाया पर अगर प्लेन टाइम टेबल के चक्कर में फंस गया है तो उसके कुछ अवशेष कैसे मिल रहे हैं? रिपोर्टर ने पूछा, देखिए, टाइम ट्रेवल के लिए प्लेन किसी चक्रवात के सामने तेजी से घूमा होगा जिससे ऐसा होना संभव है । पर कोई प्लेन जैसी चीज के साथ ही अपना एक्सपेरिमेंट क्यों करेगा? ये तो उसके ऊपर है, उसके उपकरण के ऊपर है । शायद हवा में उडती चीज पर ऐसा करना आसान होगा । छोटे लेवल पर शायद वो पहले ही टेस्ट कर चुका होगा । अच्छा कुछ लोग कह रहे हैं कि इंडियंस का काम है । मुस्कुराकर बोला बिलियंस दरअसल कोई और नहीं हम इंसानों का ही भविष्य का रूप है । आज से लाखों साल बाद जब इंसान एवॉलूशन के चलते बदल चुका होगा तो क्या मुमकिन है कि इंडियंस का ही काम है । फिर अचानक उसने रिपोर्टर से विदा ली और अपनी कार की तरफ पड गया ।

Chapter 4

वर्तमान समय इंडियन एयरलाइंस कार्यालय लखनऊ अतीत के भवन से निकलते हुए जावेद ने चौक कर उसे देखा । शहर पानी हाथ में ट्रेन लिए हुए एक बैरे ने मुस्कुराकर कहा । जावेद ने पानी का ग्लास ले लिया । वो जॉन के साथ इस वक्त इंडियन एयरलाइंस के ऑफिस में मौजूद था और वो दोनों उन के एक उच्च अधिकारी का इंतजार कर रहे थे । जावेद के हाथों में प्लास्टिक के जिपलॉक के अंदर सुरक्षित फोटो थी जिससे पिछले महीने से वो अनगिनत बार देख चुका था । दिन में रात में सोते हुए उसकी नजरें अपनी बीवी और बेटी के साथ पीछे बहते समुद्र पर भी थी । वहाँ की रेत पर थी, दूसरे इंसानों पर थी । वो चाहता था कि कोई टोकलो मिले जिससे उनकी लोकेशन के बारे में कुछ पता चल सके । तुम दोनों जिंदा हूँ, तुम्हारे पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं । कुछ कहा । जॉन ने अपने फ्रेंड लिस्ट कश्मीर को नाक पर चढाते हुए पूछा । जावेद ने इंकार में सिर हिलाया हूँ । मैं शर्त लगाने को तैयार हूँ । अभी और फलक एकदम ठीक ठाक होंगे । जावेद ने हामी भरी है । आम तौर पर उसे अपनी काबिलियत और अपने काम के लिए कभी किसी दूसरे के आश्वासन की जरूरत नहीं पडती थी । पर इस मामले में वाकई तो मन से चाहता था कि हर कोई उसे ये आश्वासन दें कि उसकी बीवी सरीना और बेटी फलक ठीक ठाक होंगे । इतने सालों से उनके दोबारा मिलने की आशाएं पूरी तरह से खो चुकने के बाद पिछले महीने सोहनगढ माइन्स में आईएसआई के के नेता खलीली के दिए इस फोटो और जानकारी के बाद उसके जीवन में फिर से उम्मीद जाग उठी थी । चीफ अजय कुमार भी बखूबी इस बात को समझता था और उसने जावेद को पूरी छूट दी थी कि किसी भी और केस पर ध्यान न दें और फिलहाल लापता फ्लाइट तीन सौ एक के केस पर पूरी तरह से लग जाए । आना की ये कि सिर्फ जावेद के लिए व्यक्तिगत महत्व नहीं रखता था बल्कि ये पूरे विश्व के लिए एक बहुत बडी मिस्ट्री थी क्योंकि पूरा का पूरा एयरप्लेन गायब हो गया था । वो भी एक नहीं दो बार पहले मलेशिया का एक विमान और कुछ ही दिनों बाद भारत का दोनों का ही कोई भी सुराग आज तक कभी किसी को नहीं मिला था । सभी तरह की टेक्नोलॉजी प्रयोग कर ली गई । पूरे समुद्र को छान मारा गया लेकिन नतीजा सिर्फ और सिर्फ सिर्फ निकला पर अब खाली की दी हुई जानकारी से ये तो साबित हो गया था कि कम से कम वो भारतीय प्लेन क्रैश तो नहीं हुआ था । अन्यथा जावेद की बीवी और बच्चे जिंदा कैसे होते हैं । किसी समुद्र तट पर खडे कैसे होते हैं । ये फोटो कोई ऐसी भी नहीं थी कि जिससे पता चले कि टेक्नोलॉजी यूज करके कृतिम फोटो बनाई गई हो क्योंकि जावेद उसमें सरीना और फलक के भाव देख सकता था । फलक की बढी हुई उम्र देख सकता था । कहने को तो ये भी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से किया जा सकता था पर फिर भी एक बहुत दूर का शौक था जिस पर विश्वास करना मुश्किल था । आसान यही था की खलीली ने जो कहा था वो सच था । एयर प्लेन का युग गायब हो ना इत्तेफाक नहीं था वो एक साजिश थी और वह साजिश क्या थी जानना बहुत जरूरी था । ये सिर्फ जावेद की बीवी और बच्चे के लिए ही नहीं था बल्कि उन तमाम पैसेंजर्स के लिए था जो दुर्भाग्यशाली फ्लाइट में सवार थे । साथ ही ये देश की सुरक्षा का मामला था क्योंकि अब इस मामले में आतंकवादियों के शामिल होने की संभावना प्रबल हो गई थी । पर फिर भी ये रहस्य समझ में नहीं आ रहा था की अगर प्लेन हाईजैक किया गया तो उसके बदले में कोई मांग क्यों नहीं की गई । अगर टेरेरिस्ट प्लॉट के तहत किया गया तो किसी ऑर्गनाइजेशन ने इसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं ली । तो क्या ये हाईजैकिंग किसी और बडी साजिश का हिस्सा थी जो कि खाली द्वारा रचित मास्टरमाइंड ट्रैन से संबंधित थी या ये कोई और ही साजिश थी? बहरहाल सच किया था इस पर सिर्फ अटकलें लगाई जा रही थी सबूत कुछ भी नहीं मिला था । पिछले कई दिनों से अब है जावेद और जॉन के बीच निरंतर मीटिंग हो रही थी और इस केस पर आगे बढने के बारे में रणनीति बनाई जा रही थी । तो अब शुरुआत यहाँ से हुई थी कि पता किया जाए कि फ्लाइट के दो पायलट कौन थे । उनका बैग्राउंड कैसा था । इसी काम के लिए आज जावेद और जॉन इंडियन एयरलाइंस के ऑफिस पहुंचे थे तभी ऑफिस में वो उच्चधिकारी प्रविष्ट हुआ । उसने एक नजर जावेद और जॉन की तरफ डाली और फिर उन्हें इशारा कर के अपने कैबिन की तरफ बढ गया । जावेद और जॉन उसके पीछे कैबिन में दाखिल हुए हैं तो अधिकारी जिसका नाम श्रीपत था । औपचारिकता निभाने के बाद जल्दी से बोला देखिए एक बहुत पुराना कैसे और इस से पहले ही बहुत हाईलाइट किया जा चुका है । मीडिया परेशान करती रही हैं । इसकी छानबीन भी की जा चुकी है । मुझे समझ नहीं आ रहा है अब इतने सालों बाद में आपको क्या नया बता सकता हूँ । देखिए, मैं समझ सकता हूँ कि इस केस को लेकर आप को काफी परेशानी हुई है । जावेद बोला, पर इसे फिर ओपन इसलिए किया गया है क्योंकि अब हालात बदल चुके हैं । अभी तक तो ये माना जाता रहा था कि प्लेन क्रैश हुआ होगा । पर कुछ नए सबूत सामने आए हैं जिनसे पता लगा है कि प्लेन के कई यात्री किसी अज्ञात जगह सुरक्षित उतारे गए थे और वो शायद अभी भी जिंदा है । इसका मतलब ये है कि ये एक सोची समझी साजिश थी ना कि कोई दुर्घटना । अब जबकि ये साबित हो चुका है तो इन्वेस्टिगेशन एक नए सिरे से शुरू करना बेहद जरूरी है । श्रीपद्म जनता जबसे जावेद की तरफ देखा मैं ये तो वहाँ कई चौंका देने वाली बात पता लगी है । जावेद ने जेब से वह फोटो निकाल कर सामने टेबल पर रखती है । श्रीपद्म गौर से फोटो को देखा जावेद बोला इस फोटो में फ्लाइट के पैसेंजर हैं कुत्ता जबसे फोटो देखने लगा रिपोर्ट हम कई बार पढ चुके हैं पर फिर भी की आप हमारी नॉलेज के लिए एक बार फिर वह क्या बता सकते हैं । जॉन बोला समझे बिल भी हेल्पफुल भाई जो आप पढ चुके हैं उसके अलावा कुछ भी नया में शायद ही बता सकते हैं । अब तेईस मार्च दो हजार तेरह को दोपहर ढाई बजे फ्लाइट लखनऊ से मुंबई पहुंची और फिर वहाँ से कतर के लिए शाम छह बजे रवाना हुई । सात बजकर छह मिनट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका लास्ट कम्युनिकेशन हुआ था । उसके दस मिनट बाद अचानक उसका रुख दक्षिण की तरफ हो गया । इस बीच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से कई बार मैसेज भेजे गए, पर कोई जवाब नहीं मिला । जोडते हुए मालदीव के ऊपर से गुजरा । ग्यारह बजे वहाँ के रेडार स्क्रीन से गायब हो गया । उसके बाद भारतीय नेवी का रेडार उसे हिन्द महासागर की तरफ ट्रैक करता रहा । रात बारह बजकर चालीस मिनट पर वह नेवी के रेडार से भी गायब हो गया । उसके बाद से आज तक ऑफिशियली तौर पर प्लेन को कभी नहीं देखा गया । नहीं उसकी लोकेशन का पता चला थैंक्स जॉन ने का । हम चाहते हैं कि आप हमें उस फ्लाइट के पायलट के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दें । देखिए अगर आप फिर से पायलट पर शक कर रहे हैं तो मैं आपको बता दूँ कि पिछली बार भी खुफिया इंटेलिजेंस को पायलट के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला था । अगर आप फिर से पायलट पर शक कर रहे हैं तो मैं आपको बता दूँ कि पिछली बार भी खुफिया एजेंसी इसको पायलट के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला था । विक्रम और अजय दोनों का बैग्राउंड क्लीन था और उनकी मानसिक हालत भी एकदम ठीक थी । उनके खिलाफ कुछ भी पता नहीं चला था । मैं आपको और क्या नहीं जानकारी तो सब कुछ तो पहले बताया जा चुका है । मानसिक हालत तो ठीक ही होगी क्योंकि अब पता चला है कि ये साजिश थी न कि किसी पायलट का सुसाइड मिशन । इसका मतलब पायलट के बॉल होने की संभावना नकारी नहीं जा सकती । जॉन ने कहा मंच को नहीं लगता श्रीपद ने नकारात्मक ढंग से सिर हिलाते हुए कहा । पर जावेद उसकी बात बीच में ही काटते हुए बोला जैसा कि आप ने कहा कि प्लेन ने जैसे ही अपनी दिशा बदली, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका कॉन्टेक्ट टूट गया था । हाँ सही है ऐसा पायलट्स ने जानबूझकर क्या हो सकता है । हाईजैकर्स ने भी क्या हो सकता है, पायलट से जबरदस्ती करवाया हो सकता है या तकनीकी खराबी भी हो सकती है । मैं समझ सकता हूँ आप अपने पायलट का पक्ष ले रहे हैं । मैं दोनों से परिचित हूँ इसलिए ऐसा पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कह रहा हूँ और जब सीबीआई को भी उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला तो मेरा ये विश्वास यकीन में बदल गया था । जावेद ने फोटो जिपलॉक सहित अपनी शर्ट की ऊपरी जेब में रखा और कहा अगर ये सच है तो वह दोनों पायलट्स ही आज बाकी पैसेंजर्स के साथ कैद होंगे । मामला और भी संगीन हो चुका है क्योंकि अब हमारे सामने चुनौती है इन सभी को सुरक्षित वापस लाने की । पर अगर ये सभी जिंदा है तो अभी तक इनके लिए कोई फिरौती क्यों नहीं मांगी गई? ये भी एक रहस्य है । हो सकता है वह किसी मुकम्मल वक्त का इंतजार कर रहे हैं । हमें ये सब पता करना है और हम शुरुआत कर रहे हैं । पहले पायलट बेगुना हूँ पर उनकी खोजबीन सेन रहस्यों से पर्दा उठ सकता है । मैं समझ सकता हूँ मैं आप का पूरा साथ दूंगा क्योंकि अमर बहुत दिनों बाद ऑफिस आया था । फिलहाल उसके पास कोई काम नहीं था । चीफ अजय कुमार ने उससे फोरी तौर पर एक मुलाकात की और हालचाल लिया । ये भी कहा कि जब तक पूरी तरह से ठीक नहीं लगे ऑफिस ना आए पर अमर ने कहा वाह ठीक है और नियमित रूप से ऑफिस आएगा । अमर फिलहाल किसी नए की इसमें हाथ डालने के मूड में नहीं था । हाल में हुए वाकई अभी तक उसके अंतर्मन को झंझोड रहे थे । खाली के मास्टर प्लान के बाद से काफी लोगों का यही हाल था । भारत की सभी खुफिया एजेंसी अब पहले से बेहद ज्यादा सजग थी । रिक्रूटमेन्ट बढा दिया गया था । फिर चाहे वह बाहर देशों की हरकतों पर नजर रखने वाली रहो या फिर अंदरूनी मामलों को संभालने वाली सीक्रेट सर्विस, सीबीआई, आईबी आदि । अमर ने जॉन को कॉल किया और उसने कॉल रिसीव नहीं की । उसके मन में खाली ली और उसके प्लान से जुडे कई सवाल कौन रहे थे और उस बारे में किसी के साथ बात करना चाहता था । कुछ देर बाद उसे जॉन का मैसेज आया कि वह केस के सिलसिले में जावेद के साथ अभी दिल्ली की फ्लाइट पड रहा है । उसने कुछ देर व्हाट्सऐप पर आए मैसेज को देखा । फिर जॉन की प्रोफाइल पिक देखने लगा जो उसने हाल ही में बदली थी । उसमें वो सफेद टीशर्ट पहने था और सामने देखते हुए मुस्कुरा रहा था । अमर उसे देखकर मुस्कुराया । उसने सोचा कि वाकई वह बहुत खुशकिस्मत है जो उसे जॉन जैसा दोस्त मिला । उसके हर गलत कदम से पहले ही अक्सर जॉन उसे आगाह कर देता था । मुसीबत का कोई भी ऐसा पल नहीं होगा जब वो उसके साथ खडा ना रहा हूँ । उसने कहा था रिंकी के चक्कर में मंदिरा जैसी भली लडकी को नागवार क्या वो ठीक कह रहा था? आखिर में कैसे इतनी आसानी से रिंकी के प्यार में पड गया? मुझे हुआ क्या था? क्या वाकई वो प्यार था या वो किसी सम्मोहन के वर्ष में था? आखिर रिंकी ने उससे प्यार क्यों किया? उसके साथ नजदीकियां बढाने में रिंकी का ही स्वार्थ था । उसे किसी तरह से सीक्रेट सर्विस के सहारे खाली तक पहुंचना था और वो इसमें सफल भी हूँ । पर फिर वक्त से पहले ही क्यों अपने राज उसने हम पर खोल दी है? क्यूँ आपने भूत की दिल दहला देने वाली कहानी सुनाते वक्त उसने मेरा सहारा लिया । उसकी आंखों में उन्होंने वो भाव तो प्यार और अपनापन नहीं, वो झूठ नहीं तभी फोन की घंटी ने उसे आकर्षित किया । उसने मोबाइल की स्क्रीन देखी । मंदिरा का नाम दिखा अमर स्क्रीन को देखता रहा । कॉल बस्ती रही, फिर कुछ देर में बंद हो गई । अमर ने फोन एक तरफ रख दिया और फिर सिर पर हाथ रखकर कुर्सी में रिलेक्स होकर बैठ गया । तभी अब है उसकी डेट्स पर पहुंचा अमर उसे देख कर एकदम से चौका इस तरह है किसी एजेंट की डेस्क पर खुद चलकर आए । ये कभी कभार ही होता था । अमर वो उतावलेपन के साथ बोला हमें दिल्ली चला होगा । दिल्ली हाँ, तुम फिलहाल कुछ कर रहे हो । नहीं, कुछ भी नहीं तो चलो अभी सीधे एयरपोर्ट चलते हैं । ठीक है लेकिन हुआ क्या? सर सीबीआई ने तलब किया है । खाली संबंधित कुछ पूछताछ करना चाहते हैं । हालांकि हम लोग अभी रिपोर्ट पर काम कर ही रहे हैं और उसमें काफी वक्त लगने वाला है । पर कुछ ऐसे मसले हैं जिन पर वो इंतजार नहीं कर सकते हैं । कुछ ऐसे सवाल हैं जो अंतरराष्ट्रीय फोरम पर पूछे गए हैं । इसलिए उन का तुरंत जवाब देना जरूरी हो गया है । इस मिशन में तुम्हारी अहम भूमिका थी इसलिए तुम्हारा चलना महत्वपूर्ण होगा । चलिए कहकर अमर उठ खडा हुआ । दोनों तेज कदमों से बढते हुए हैड क्वाटर्स से बाहर निकले । हम अमर और अब है नई में लोधी रोड स्थित सीबीआई के हेड क्वार्टर में इंटरपोल ऑफिस पहुंचे । उन्हें सिर्फ दस मिनट इंतजार करना पडा और फिर मीटिंग रूम में उनकी मुलाकात इंटरपोल ऑफिस के इंचार्ज एसपी राज निकेतन और एक एक्सपर्ट मनोज रामचंद्रन से हुई । चारों मीटिंग रूम में पडी विशाल का इमेज के आमने सामने बैठ गए । हमारे आग्रह पर तुरंत यहां पहुंचने के लिए थैंक सब है नंबर राज ने कहा अब और अमर ने सिर्फ सिर हिलाया । आप समझ सकते हैं कि खाली के प्लान को विफल करने में आप और आपकी एजेंसी की अहम भूमिका रही है । एस प्लान की चर्चा आदेश विदेश के हर फोरम पर आजकल हो रही हैं । हमारी आपकी एजेंसी के साथ विदेश की खुफिया एजेंसियां भी हैरान परेशान है कि इतनी बडी साजिश कैसे किसी की नजर में नहीं आई । थोडा बहुत नजर आए भी तो इसके इतना खतरनाक होने का अंदाजा कैसे नहीं लगा । मतलब न्यूक्लियर वेपन । वही ड्रोन पर कमा मिलिट्री भी अभी तक ऐसी तकनीक पर काम नहीं कर सकी है और ये आतंकवादी खैर इन सभी मसलों पर छानबीन चल रही है और आप भी उसका हिस्सा है । पर आज आपको यहाँ इसलिए बुलाया गया है ताकि इंटरपोल से आ रहे सवालों पर उत्तर दिया जा सके । उन्हें अभी तक यही कहकर डाला जा रहा था की रिपोर्ट बन रही है । अभी समय लगेगा पर वो होम मिनिस्ट्री से दबाव जलवा रहे हैं । मुझे लिया उनसे रोज होना रहे हैं । आयोग अब मेरी पोजीशन समझ सकते हैं । बखूबी समझ सकते हैं । मिस्टर आज । इसलिए तो मैं यहाँ मार के साथ तुरंत पहुंचा हूँ । ऐसे खतरनाक मिशन रोज नहीं होते हैं । सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में इसके बाद बहुत कुछ बदलने वाला है । पूछे जो भी घोषणा बस इसमें कैबिनेट रहेगा कि इसे प्रीलिमनरी जवाब माना जाए । कैसे प्रीलिमनरी जवाब ही माना जाए । अंतिम उत्तर तो सीबीआई और सीक्रेट सर्विस की जांच पूरी होने के बाद ही भेजा जाएगा । बिल्कुल है हमारे उत्तर में ये लाइनें पहले ही बोल मैं लिख दी जाएंगे । अब आप दोनों को मुद्दे पर लाता हूँ । आप जानना चाहेंगे कि क्यों इंटरपोल इंतजार नहीं कर पा रहा । क्यों हमारी सरकार पर तुरंत जवाब देने का दबाव बना रहा है तो उसका जवाब है धीरज नहीं की । वो एक इंटरपोल अफसर था और वो इनलैंड का सिटीजन था । वो भारत में आतंकी हरकतों की जानकारी लेने आया था । राम तौर पर ऐसा नहीं देखा गया कि इंटरपोल का कोई ऑफिसर किसी मिशन पर काम करे या फिल्म ोत्र अब है । बोला, आप ने बिलकुल सही कहा । फील्ड वर्क करना इंटरपोल का काम नहीं । वो सिर्फ एक नेटवर्क है जो सिर्फ देशों को ज्यादातर इस तरह के क्राइम में मददगार साबित होता है । जहाँ अपराधी देश छोडकर दूसरे देश भाग गया हूँ । ऐसे केस में वो देश इंटरपोल से उस अपराधी के खिलाफ रेड नोटिस जारी करवाने की मांग कर सकता है । जैसा की आप जानते ही हैं कि खाली के खिलाफ कई देशों ने रेड नोटिस जारी करवा रखा था । फिर धीरज ने की किस कपैसिटी में भारत आया था? क्योंकि मामला ऍम का था, उसे यहाँ भेजा गया था । इसके लिए हमारी गवर्नमेंट से विशेष अनुग्रह किया गया था । इसमें किसी का नुकसान नहीं था तो उसे आने दिया गया । तो क्या ये पहले से मालूम था कि खाली भारत में है, ये आने वाला है? देखिए सिर्फ एक अनुमान था बहुत हल्का साइंट । ऐसा कोई बडा प्लान है, इसकी कोई भनक नहीं थी । फिर नेगी कैसे खाली के गुप्त अड्डे पर मौजूद था? अचानक अमर बोला, मैं बस उसी मुद्दे पर पहुंच रहा हूँ । राज हल्की सी मुस्कान के साथ बोला वेल धीरज ने की । करीब सात साल पहले भारत आया था । जैसा कि इंटरपोल करता है । उसका काम सिर्फ टेस्ट वर्क था । ऍम जानकारियाँ इकट्ठा करना । वो यही इसी ऑफिस में बैठा था । यहाँ बिल्कुल इंटरपोल ऑफिसर के लिए । यही तो ऑफिसर भारत में आई नो । अब मैंने कहा यानी फील्ड पर काम करना । वैसे भी उसके जेडी में नहीं था बिल्कुल और उसका तो पर्सनल एजेंडा था । अमर भेदभरी मुस्कान के साथ बोला, अचानक ही राजकीय आंखों में चमक उभरी । बस यही वजह है जिसके कारण मैंने अभय को कहा कि तुम्हें साथ लेकर आए । अमर ने सहमती में सिर हिलाया । मैं समझ रहा हूँ सोहनगढ माइन्स में उसने अपना राज्य अगला था । उस वक्त में भी वहाँ था । और और अब वहाँ मौजूद लोगों में सिर्फ मैं जिंदा हूं । बोलता है राज उत्साह के साथ बोला । अब समझा है क्यों आपको अपने ब्रेस्ट मैन में गिनते हैं? अभय गर्व के साथ हमार की तरफ देखा सब है सर से ही सीखा है । अमर बोला तो फिर देगी नहीं । यहाँ कितना समय निकाला मुश्किल से छह महीने । उसके बाद अमर ने पूछा वो अपने देश वापस चला गया । अमर के चेहरे पर शातिर मुस्कान आ गई यानि सिर्फ पेपर पर । हाँ, अपने देश और काम पर वापस ना पहुंचने पर इंटरपोल ने उसे ढूँढा नहीं । बिल्कुल होना और उसका कुछ पता नहीं चला । उसने लंदन का टिकट निकाला हुआ था । इमिग्रेशन का स्टैम्पिंग भी करवाया हुआ था । उसके बावजूद भी वो असल में भारत से कभी नहीं निकला । अब समझा उसने कहा था कि उसने चार साल आईएसआई का एजेंट बनने में लगाए थे । मुझे राज ने पूछा और उसके इशारे पर मनोज ने अपने लैप्टॉप पर टाइप करना शुरू किया । फिर आईएसआई ने उसे गुप्त मिशन पर लगा दिया । वो मिशन था सोहनगढ माइंड का निर्माण । यानी एक तरह से वो खाली ले के लिए काम करने लगा था का और उसे खलीली के मिशन की जो भी जानकारी मिलती थी वह से पुनीत सहानी और नूरमोहम्मद के साथ शेयर करता रहा । रिंकी से भी उसके बारे में जानते थे । अमर ने गहरी सांस ली और फिर कहा रिंकी किस तरह से उसके साथ बॉल थी । मुझे लगा हम नेगी के बारे में बात करने वाले हैं अमर राज और फिर अब है की तरफ देखते हुए बोला सब इंटरलिंक है यू नो हाॅट राजनीति हाथ फैलाए । रिंकी पुणे सहानी की बहन थी और दोनों मिलकर खाली से बदला लेना चाहते थे । अमर बोला होगा । उनकी बैक स्टोरी के बारे में पता चला । काफी इंटरेस्टिंग लगा तो ये दोनों भाई बहन नेगी की मदद ले रहे थे का अब हम बात है ये जानना कि नेगी के क्या इरादा है । रो खलीली के प्लान को फेल करके अपना प्लान लागू करना चाहता था । वो क्या था देश को प्रस्तुत गवर्मेंट से मुक्ति दिलाना अमर ने बहुत है, उसका कर कहा और ऐसा वह खलीली के ही उपकरणों के इस्तेमाल से करना चाहता था । हाँ, अब हमें इन सभी बातों को प्रमाणित करने के लिए कुछ सबूत भी पेश करने होंगे । अब है तुरंत बोला हम बोल सकते हैं । अभी इन्वेस्टिगेशन चल रही है । फिलहाल जो सीक्रेट सर्विस से जवाब मिला है उसके आधार पर उत्तर दिया जा रहा है क्या? वो तो बोल रही है और मैं फिलहाल ये समझने की कोशिश कर रहा हूँ कि कि क्या उस दौरान हमें उसके खिलाफ कोई प्रमाणिक तथ्य मिला था । उसके कन्फेशन के अलावा मुझे उम्मीद तो नहीं कि हमने उसके कन्फेशन की कोई रिकॉर्डिंग की । उसने आशापूर्ण निगाहों से अमर को देखा । अमर ने इंकार में सिर हिलाया फिर कुछ सोचते हुए अमर बोला । वो पुनीत, सानिया और रिंकी के टच में था तो उसके फोन, ईमेल आदि से शायद कुछ पता चल वो ऑन गोइंग इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा है । अब बोला ओके राज बोला मनोज निरंतर टाइप कर रहा था । अब खाली के कंट्रोल रूम में हुए उन लोगों में पहुंचते हैं । जब नेगी उसे अपने अधीन लेने की कोशिश कर रहा था । उस वक्त के बारे में बताइए । मेगी मालिक चाचा के रूप में खरीद ली के संगठन यानी आईएसआई के के बीच काफी लोकप्रिय था । उसे विश्वास था कि खाली की मौत के बाद उसे उन का लीडर बनने में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी । तो अगर ये कहा जाए कि वह खुद आईएसआई के का लीडर बनना चाहता था तो कुछ गलत नहीं होगा । अमर ने कुछ सोचते हुए कहा हाँ पर उसके इरादे । हाँ, वो कुछ क्रांति लाना चाहता था, वो भी आतंकवादी बन कर । सब बकवास क्या तो नहीं मानते । वो सिर्फ बकवास कर रहा था । अारक्षण का शिकार तसर बदले की भावना ने उसे भटका दिया था । राज मनोज से कहा, ये मतलब ना फिर आगे झुककर व्यंगात्मक भाव के साथ अमर से बोला हमारी फील्ड में इमोशन की, वो भी क्रिमिनल के लिए कहाँ कुछ अहमियत होती है हमारे? हाँ मैं बस ये नहीं राज सख्ती से उंगली उठाकर बोला । फिर अब है की तरफ पालता अम् जी आप बोलिए । अभय चुप रहा । देखिए अगर हम आतंकवादी से उसके बनने की परिस्थिति और उसके हालत समझने में लग गए, उसके साथ हमदर्दी रखने लगे तो फिर हमारा काम हो चुका है । अमिन मेरा वो मतलब नहीं था । अमर तेजी से बोला तो एजेंट अमर वो तेज स्वर में बोला मुझे सिर्फ सीधे जवाब दीजिए । मुझे ये रिपोर्ट बनाकर होममिनिस्टर को दिखानी है और उसके बाद लियोन और ब्रिटिश गवर्नमेंट की रिपोर्ट पहुंचानी है और उसके बाद लियोन और ब्रिटिश गवर्नमेंट की रिपोर्ट पहुंचने वाली है । आप इसकी अहमियत समझ रहे ना । अमर ने सहमती में से नहीं लाया नहीं शायद आप इस मामले की गंभीरता समझ नहीं रहे । यहाँ हमारा देश इस बात का जवाब दे रहा है कि इंटरपोल का एक अवसर भारतीय जासूस के हाथों क्यों मारा गया । इसलिए हमें ये नहीं बताना है कि वह जो कुछ करने जा रहा था उसके पीछे उसका कोई बहुत बडा मानवता भरा मंतव्य था । यहाँ सिर्फ ये बताना है कि कैसे वो एक आतंकवादी था । कैसे उसके इरादे हमारे देश के लिए बेहद खतरनाक थे । कैसे वो देश के लिए खाली की तरह ये घातक टेरेरिस्ट था । समझ रहे हो ना? अमर ने हामी भरी गार्ड इसी में आप की हमारी और हमारे देश की भलाई है । हम दूसरे देश से ये नहीं कह सकते की एक अंतरराष्ट्रीय एजेंट को हमने बिना सबूत बिना सोचे समझे मार दिया । इसलिए आपकी इन्वेस्टिगेशन में और किसी के खिलाफ पुख्ता सबूत उभरना उभरे लेगी के खिलाफ जरूर भरने चाहिए । हम इसका पूरा ध्यान रखेंगे । राज अब बोला मनोज राज बोला तो मैं कुछ पूछना है अमर का ध्यान मनोज की तरफ गया जो कि गोल फ्रेम का चश्मा लगाए था । उसके बाद तेल से चिपके हुये थे जिससे कि वो एक सीबीआई अफसर से ज्यादा पढा को विद्यार्थी दिख रहा था । उसकी भूमिका अभी तक सिर्फ टाइपिस्ट की रह गई थी । पर अब अपना चश्मा ठीक करते हुए वो बोला मैं आपसे ये जानना चाहता था कि लेगी पर गोली चलाने के अलावा क्या कोई और विकल्प मौजूद था । अमर संभलते हुए बोला मुझे नहीं लगता है चिंता मत कीजिए, राज बोला होगा ये बात आगे नहीं जाने वाली । हम दूसरे देश को ऐसा कोई इशारा नहीं देने वाले जिससे आप या हम मुश्किल में पड जाए । वो न्यूक्लियर वेपंस एलोडी ड्रोन पार्लियामेंट के लिए लॉन्च करने जा रहा था । इस बार अमर कुछ तेज स्वर में बोला उसे तुरंत रोकने के लिए मुझे उस वक्त यही तरीका समझाया । उससे पहले वो काम खाली करने जा रहा था । उसे भी रोकने के लिए यही करना पडता हूँ । मेरी जगह होते तो क्या करते हैं । बिल्कुल वही करता हूँ । राज बोला हूँ । मनोज तुरंत बोला हूँ आपने शक्तियां देश को भारी विपत्ति से बचाने के लिए जो भी कदम उठाए वो सराहनीय है । आपके साहस की बदौलत हजारों लोग आज भी सांसे ले रहे हैं । आप नेशनल हीरो है ऍम और जब इन्वेस्टिगेशन रिजल्ट पेश किए जाएंगे तो हमें इस तरह के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा । फाइटिंग कमर ये बात समझता है । अब बोला इसलिए उन परिस्थितियों के बारे में बता रहे हैं । खाली लिया कोई भी अगर उस वक्त देश पर न्यूक्लियर बम गिराने की साजिश में भाग ले रहा होता तो उसे रोकने के लिए यही मुनासिब कदम था । ऍम मनोज बोला, हम सब एक ही साइड हैं, पर इंटरपोल को जवाब देने के लिए हमारे पास माइनस में नेगी ने जो कुछ किया, उसका कोई सबूत नहीं है । कम से कम फिलहाल तो नहीं है और वहाँ आर्मी रेड और बॉलिंग के बाद तो और भी मुश्किल है इसलिए उसके खिलाफ माइंस के बाहर सबूत मिलने बहुत जरूरी है । ऐसी अब ये बोला ऍम तो चल रही है और देगी से संबंधित सबूत भी ढूंढने जाएंगे क्योंकि उससे जुडे और लोग अभी भी खुले घूम रहे हो सकते हैं । ये सिर्फ इंटरपोल की जवाबदेही के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि अगले किसी ऐसे मिशन को रोकने के लिए भी जरूरी है । बाकी रही बात सोहनगढ माइनस में वो वाकई की तो आप लोगों कोई लिखना जरूरी है कि भारत उस वक्त युद्ध के हालातों में था, एमरजेंसी में था और युद्ध में दुश्मन को मारने के लिए ज्यादा सोचा नहीं जाता । ऐसे राज ने बोलना चाहा पर अभय ने इस बार उसे मौका नहीं दिया । मैं समझ सकता हूँ हम सिर्फ यह कहकर पल्ला नहीं जा सकते पर हमें उन्हें वह परिस्थिति बतानी जरूरी है जिससे अमर को उसे शूट करना पडा । आई अग्री विडियो अब है । राज ने कहा, पर आप समझ सकते हैं कि इस जवाब के बाद ये जांच खत्म नहीं होने वाली है । जब तक की लियोन और लंडन दोनों सेटिस्फाइड नहीं हो जाते ये जारी रहेगी । ऍम फिर कुछ देर बाद अमर नहीं । उन्हें सोहनगढ माइन्स में घटी घटनाओं और हालातों का विवरण दिया । नेगी और साहनी के बीच पार्टनर्शिप के बारे में बताया । जहाँ तक संभव हुआ रिंकी के बारे में वो एक सकारात्मक छवि ही प्रस्तुत करता रहा । शाम सात बजे मुलाकात कांड हुआ । मीटिंग रूम की टेबल पर चाय कॉफी के कई खाली कप इकट्ठा हो गए थे । इलाज मनोज अब और अमर उठ खडे हुए थे । राज्य वैसे प्राइवेट में कुछ बात करने के लिए उसे कोने में ले गया । अमर ने मनोज की तरफ देखा । मनोज बोला आपका नंबर मिल सकता है । मिस्टर अमर लगता है । मेरे बयान से आप अभी भी संतुष्ट नहीं अमर बोला लेकिन कहकर उसने अपना नंबर बताया । मनोज ने उसका नंबर अपने मोबाइल पर अंकित किया और फिर उसकी तरफ देकर रहस्यमय स्वर में बोला मैं आपको कॉल करूंगा । अमर ने कुछ सोचते हुए हामी भरी । उसे मनोज की आंखों में कुछ अजीब स्वभाव दिखा । ऐसा लग रहा था जैसे वो उसे कोई संकेत देना चाह रहा है ।

Chapter 5

वर्तमान समय से सात साल पहले सन दो हजार बारह इंडस्ट्रियल एरिया ऍम दिल्ली के इंडस्ट्रियल क्षेत्र के कोने में स्थित वो इमारत की गुजरे जमाने में फैक्ट्री हुआ करती थी । पर आज की तारीख में वह वीरान थी और लोग उसे प्रेत ग्रस्त समझते थे । आस पास के गांव वाले तो उसके आस पास भी भटकने की जरूरत नहीं करते थे । खास कर के अंधेरा ढलने के बाद । और इस वक्त इमारत के अंदर एक कोने में तीन शख्स मौजूद थे । उनमें से एक जमीन पर बैठा था । उसकी आंखों पर पट्टी थी और मुझे ऊपर डाॅ का हुआ था । बाकी दो शख्स उसके सामने मौजूद थे जो कि इमारत के अंधेरे में किसी प्रेत की तरह प्रतीत हो रहे थे । उनमें से एक ने लाइटर चलाया जिससे उसका चेहरा दृष्टिगोचर हुआ । उसकी आंखें गड्ढों में धंसी हुई थी । जैसे उसे चैन की नींद महीनों से नसीब नहीं हुई है । चेहरे पर सख्त भाव थी, वो धीरज नहीं था । उसने सिगरेट सुलगाई और अपने साथी को बंधक की तरफ बढने का इशारा की । वो आगे बढा और चुप कर बोला, मैं तुम्हारा मुंह खोले जा रहा हूँ । हम बस तुम से बात करना चाहते हैं । अगर तुमने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो हमारे पास साइलेंसर युक्त रिवॉल्वर है । यहाँ तुम्हारी लाश में खोजने कोई नहीं आएगा समझाएँ । बंधक ने हामी भरी, उसने उसके मुंह से दक्षिण में बता दिया । बराक आँखों की पत्ती हटाने का कोई उपक्रम नहीं किया । यू खोलते ही वो बोला मुझे इस तरह यहाँ लाने का क्या मतलब? तो मैं जवाब मिलेंगे । पहले हमें कुछ जवाब दो । सिगरेट का कश लेते हुए ने कि नहीं कहा बंधक ने अपना चेहरा उसकी तरफ पडता है तो मुझे क्यों मारना चाहता हूँ? कितना किसी मैं किसी को नहीं मानना चाहता हूँ । क्या बात करें? आप देखोगे हम कोई पुलिस वाले नहीं । इतना ही कानून के अंदर रक्षक तो हम जो करना चाहते हो, ऐसा नहीं पर हम उसे आसान बना सकते हैं । बशर्ते हमें तुम्हारा मंतव्य समझाए तो तुम लोग विधायक जोगेंद्र कुमार के अभी होना । वो गुस्से से बोला नहीं देखो मैं तो किसी सवाल का जवाब नहीं हो । नहीं की नहीं । गहरी साथ ही और सिगरेट अपने साथी को पास की । फिर बंधक के सामने झुककर उसके चेहरे के नजदीक आकर बोला । दो साल पहले विधायक जोगेंद्र कुमार के साले जोगिन्दर ने तुम्हारी बीवी को अगवा करवाया था और फिर एक फॉर्म हाउस पर एक हफ्ते तक उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और फिर हत्या । वो एक सीधी सादी औरत थी जिसने घर से निकलकर नौकरी करके अपने परिवार को सपोर्ट करने की हिमाकत की थी । क्या ये उसकी गलती थी? या फिर उसने अपने कार्यालय में दबंगई करते हुए जोगिन्दर उसके गुर्गों को शांत रहने के लिए आग्रह किया । ये उसकी गलती थी । गिरीश का गला भर आया था तो तो सब या उसकी गलती थी कि वह एक औरत ही खूबसूरत थी । रात में भी अकेले ट्रेवल करने की हिम्मत रखती थी । ऐसे होने देंगे अगर वो रात को अकेले निकलती है । इसका मतलब वह खोला शिकार है जिस पर कोई भी अपना खेल खेल सकता है । ऍम हो जाओ वो लडकी डाउट था । ये उसकी गलती है कि एक औरत होकर उसने ऐसा दुस्साहस किया । उसे सिर्फ सिर झुकाकर सिर पर पल्लू डालकर घर की चारदीवारी के अंदर रसोई और बैड रूम के अंदर कैद रहना चाहिए था । पर उसे तो मॉर्डन होने का हुआ था । अकेले घूमने फिरने की हिम्मत रखने लगी थी । इसका तो यही मतलब है कि वह किसी भी मर्द के लिए अवेलेबल थी, हूँ ऍम हूॅं गिरीश चीख पडा फिर रोने लगा । वो ऍम तो हो तो वो जो के लिए हूँ हूँ । उसने उसका कंधा थपथपाया तो हम दो साल से केस लड रहे हूँ । पहले छह गवाह है, अब सिर्फ एक बच्चा हैं वो भी कुछ दिनों में पीछे हट जाएगा । जोगेंदर और उसके दोस्तों को क्लीनचिट मिल जाएगी । ऐसा तो नहीं चाहते हो गया हूँ कानून के अलावा और कहाँ किससे न्याय मांगूं । जब कानून न्याय ना दे सके तो तुम खुद कानून बन जाओ अपने हाथों से उसे सजा तो तो अभी तुम है । सही मायने में तृप्ति मिलेगी क्या? तो मैं लगता है मैंने ऐसा सोचा नहीं । दिन रात उठते बैठते थे, बस मन करता है कि जानता हूँ । मन तो काफी हद तक बना चुके हो तो क्या मतलब उसको मुस्कुराया । जब हमें इतना कुछ तुम्हारे बारे में जानते हैं तो क्या तो मैं नहीं लगता तुम्हें हाल में जो ट्रेनिंग शुरू की है उसके बारे में हमें खबर नहीं होगी । गिरीश सिर झुकाकर बोला मैं थक गया हूं । कोर्ट के चक्कर लगा लगाकर मेरी नौकरी भी चली गई क्योंकि मैं ऑफिस में काम पर ध्यान नहीं दे सका । तो तुम्हें लगता है तुम जोगेंदर के घर के सामने खडे रहोगे और उसके निकलते ही उसे अपने देसी तमंचे से शूट कर दोगे और वह मर जाएगा । वो निषद हो गया । जो तमंचा तुमने खरीदा है कभी उस से चलाकर देखा है उसका निशाना सटीक नहीं होता और कई बार तो गोली निकलते ही नहीं, तमंचे के अंदर ही फट जाती है । जरा सोचो जोगिंदर अपनी कार से बाहर निकला तो मैं उसे देखकर गोली चलाई । गोली अंदर यह नहीं वह तो मैं देख रहा है । फिर गोली तुम्हारे हाथ में ही फट गई । जोगिंदर तो ऊपर हंस रहा है हैं । तुम चाहते हो फॅालो मैं तुम्हें न्याय दिलाना चाहता हूँ । तुम है अपनी बीवी के साथ हुए अमानवीय कर्मों का बदला लेते देखना चाहता हूँ मैं चाहता हूँ तुम जोगेंदर और उसके गुर्गों को तडपा तडपाकर मारो पर आप ये क्यों सुनो गिरी है अब तक तुम समझ गए होगे की मैं कोई कानून का रक्षक नहीं । पर अगर तो मुझ पर विश्वास करोगे तो मैं भी तुम पर करूंगा और तुम पर कोई आंच नहीं आने दूंगा । पर मैं ये काम तुम्हारे लिए फ्री में नहीं करूंगा । पर मेरे पास नॅशनल पैसे तब तुम चिंता मत करूँ । मुझे तुमसे पैसे नहीं उससे भी बडी चीज चाहिए । मैं चाहता हूँ तुम हमारे मिशन में सात तो ऍम मिशन अंतर तुरंत ये क्या है? अंतर्द्वंद यानी आंतरिक संघर्ष या इंग्लिश में डिनर कॉन्फ्लिक्ट । एक ऐसा मिशन जिसमें हमें अपने देश में का अंदरूनी लडाई, लडनी, करप्शन को जड से उखाड फेंकना है । लोगों में ऐसी दहशत पैदा कर देनी है कि कोई भी गलत काम करने से पहले उसे डर रहे । पुलिस और कानून से अगर बच गया तो मिशन अंतर्द्वंद वाले उसे नहीं छोडेंगे । तो क्या आप मुझे नहीं जरूरी नहीं तो मैं इसके लिए पेशेवर हत्यारा ही बन जाना पडेगा । किसी भी मिशन में बहुत से काम होते हैं जो की ब्लॅक ट्यूशन में विभाजित होते हैं तो मन में से अपना पसंदीदा काम उठा सकते हो । जब भी कोई काम होगा तो मैं ईमेल आएगा और गुप्त रूप से किसी लोकेशन पर आने के लिए कहा जाएगा जहाँ तुम्हें मिशन संबंधित निर्देश दिए जाएंगे । कहने की जरूरत नहीं है की तो मैं इस बारे में कभी भी किसी को कुछ बता सकते हो, नहीं, इसका दुरुपयोग कर सकते और साथ ही तुम इसका दुरुपयोग भी नहीं कर सकता । अगर तो मैं कहीं कोई ऐसा टारगेट मिलता है तो तुम ईमेल करोगे, उसे जांचा परखा जाएगा । फिर प्लानिंग के साथ काम होगा । कभी कोई काम घुसते में आवेश में नहीं किया जाएगा । अरे एक्शन सोच समझ कर लिया जाएगा । हमें ये मिशन बहुत आगे तक ले जाना है । इसमें लोगों को जोडते जाना है । इसलिए कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना जिससे मिशन खतरे में आ जाए हूँ । बनना चाहोगे इस मिशन का हिस्सा देखिए मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए । जो समय है अभी है तुम्हारे पास । यहाँ से निकलने के बाद तुम फिर कभी हमारे बारे में नहीं सुनोगे । क्या चाहते हो तुम अपनी लडाई खुद से लडते रहना या फिर हमारे मिशन में शामिल होकर तो में है जॉइनिंग बोनस में जोगेंदर मिलेगा एक कमरे में निहत्था तो हमारे अधिकार में तो है । जो हथियार चाहिए हो मिलेंगे तो उस पर जो कहर गिरना चाहोगे, गिरा सकोगे दोनों गिरीश कुछ पहले असमंजस में मौनधारण किये रहा । फिर दृढ स्वर में बोला मुझे मंजूर है ।

Chapter 6

वर्तमान समय नहीं दिल्ली इंडियन एयरलाइंस के गुमशुदा पायलट विक्रम सिंह का घर दिल्ली के राजौरी गार्डन में था । दिल्ली पहुंचते ही जावेद और जॉन उसके घर पहुंचे । इस समय दोपहर का वक्त था और विक्रम के माता पिता घर पर मौजूद थे । उनसे बात करके पता चला कि विक्रम उस वक्त सिर्फ छब्बीस साल का था जब विमान गायब हुआ था । अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी । विक्रम उनकी अकेली संतान थी और आज भी वो उसके वापस आने की उम्मीद लगाए हुए थे । गुमशुदा फ्लाइट तीन सौ एक के कई सवारियों के परिवार वालों की तरह पिछली जांच में विक्रम की गर्लफ्रेंड का जिक्र था । उसका नाम कंचन था और विक्रम के माता पिता उसे कुछ खास वाकफियत नहीं रखते थे । उनसे बात करते हुए उन्हें कोई नई जानकारी नहीं मिल पा रही थी । विक्रम की छवि एकदम साफ प्रतीत हो रही थी । उन्हें उम्मीद है कि उसकी गर्लफ्रेंड और दोस्तों से बात करके शायद को एक काम की बात पता चले । उन्होंने उसकी गर्लफ्रेंड कंचन को फोन किया । इत्तेफाक से वो दिल्ली में ही मौजूद थी और फिलहाल कनॉट प्लेस स्थित अपने ऑफिस में थी । पहले तो उसने वर्किंग डे और बहुत सारा काम होने की दुहाई दी । पर फिर विक्रम के दोबारा मिलने की उम्मीद पर वो जॉन और जावेद से मिलने के लिए तैयार हो गई । वो लोग कनॉट प्लेस में कॉफी शॉप में मिले । कंचन के सामने जॉन और जावेद बैठे थे । तीनों का ऑर्डर भी मेज पर मौजूद था । वो पच्चीस छब्बीस साल की सुंदर नैन नक्ष वाली करियर ओरियंटेड लडकी देख रही थी । उसने स्लेटी रंग की पैंट और सफेद कमीज पहनी हुई थी । मेहंदी की रंगत लिए बाल कंधों तक लटके हुए थे और चेहरे पर अच्छा खासा । मैं कब था? देखिए विक्रम से अब की पहली बार मुलाकात कब हुई थी । जॉन ने पूछा कोई आज से चार साल पहले एक फ्रेंड की मध्य पार्टी में हूँ । कंचन अतीत के खयालों में खो गई ही बहुत सो स्माॅल । हम दोनों के बीच फोन नंबर एक्सचेंज हुए और वो किस तरह का इंसान था । यानी वेल अगर आपको उसकी पर्सनालिटी चंद शब्दों में बयां करने को कहा जाए । जावेद बोला काफी कॉन्फिडेंट, फुल ऑफ एक्साइटमेंट ऍम और साथ ही बहुत कैरी और फॅमिली कंचन विक्रम को याद करते हुए जैसे गुजरे वक्त की गैर कर रही थी । आमतौर पर विक्रम का उठना बैठना किन लोगों के बीच था । उसके फ्रेंड सर्कल में मेरे साथ ज्यादा समय तो उसका ऑनर ही रहता था । आप उसके साथ देश विदेश ट्रेवल करती होंगी । वो थोडा झिझकी देखिए, जो भी है खुलकर बताइए आपकी पर्सनल बातें हम से आगे कहीं नहीं जाने वाले । हम इनके द्वारा विक्रम को समझने की कोशिश कर रहे हैं । उसने हामी भरी फिर वहाँ से स्वर में बोली हूँ । मैं कई बार उसके साथ गई थी । मुझे अभी भी उम्मीद है कि वह एक दिन वापस आएगा हूँ । वो वापस आएगा । उन्हें लगा वह होने वाली है जावे । जल्दी से बोला देखिए उम्मीद पर कायम रही हैं । हमें कुछ ऐसे क्लू मिले हैं जिनसे पता चला है कि तो फ्लाइट के कुछ लोग जिंदा है हूँ । सच हाँ, इसीलिए तो हम पूरे जोर शोर से फिर से इन्वेस्टिगेट कर रहे हैं । अच्छा कहाँ होंगे वो लोग? इस समय ऍम यही तो सबसे बडी पहेली है । लोकेशन अगर उनमें से कोई भी मिल जाए तो बहुत कुछ पता चल जाएगा और इतने सालों से किसी की कोई खोज खबर नहीं । इससे पता चलता है कि वह सभी कहीं एक साथ कैद हैं । पर भला कोई उन सबको कैद क्यों करेगा? ये भी अभी सिर्फ एक सवाल है और इसका जवाब किसी के पास नहीं है । जॉन ने कहा आपको थोडा ब्रेन के न्यूरोन्स को दौडाना है और विक्रम के साथ बताए हर पल को याद करना है कोई भी थोडी सी अजीब बात जो आपके मन में स्ट्राइक की हो । विक्रम से संबंधित कोई भी अजीब वाकया या अजीब इंसान से मुलाकात जो मन में स्ट्राइक की हो अमेजॅन कंचन सोच में पड गई उसके हाव भाव से लगा वाकई वो पुरानी यादें ताजा करने की पूरी कोशिश में है । अच्छा हाँ, अगर विक्रम की लाइफ से जुडी अजीब चीजों के बारे में सोचती हूँ क्यूँ मुझे उसका एक अजीब सा दोस्त याद आता है कौन? निक ने कौन है बहुत ही अजीब सा लडका था कम कद का बॉडी बिल्डर जैसा छोटी छोटी आंखें सिर पर एक भी बार नहीं । बात बात पर जापानियों की तरह सिर झुकाता रहता था कहते हुए वो हँसी चिंकी था । जावेद ने पूछा हाँ जापानी ही तो नहीं ना । जॉन ने पूछा करीब नहीं नहीं कहाँ से था विच स्टेट दिल्ली का था ये तो पता नहीं ओरिजनली कहाँ से था । पर हिंदी एकदम हम लोगों की तरह ही बोलता था और बहुत अजीब अजीब आतें करता था कहते हुए उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई । जैसे कभी विक्रम को पायलट की नौकरी छोडकर कुछ बिजनेस शुरू करने का आईडिया देता था तो कभी कहता था कि किसके रॉक बैंड में शामिल हो जाए । क्योंकि उसका ऍम हाँ कुछ तो मुझे तो उसके सिर दर्द म्यूजिक में कोई दिलचस्पी नहीं थी, पर विक्रम ना जाने की उसकी तारीफ करता रहता था । मुझे आज तक समझ नहीं आया कि उसका दोस्त बना कैसे, कब से दोस्त था वह विक्रम का तो ये तो नहीं पता पर मुझे पहले से जानता था वो विक्रम को कहाँ पाया जाता है या नहीं । जावेद ने पूछा दिल्ली में ही रहता है तो मुझे नहीं पता और फोन नंबर है कहकर उसने अपने फोन में देख कर नंबर उन्हें दिया । फिर बोली विक्रम के यू गायब होने के बाद अक्सर उससे बात होती थी । हम दोनों ने एक दूसरे को वादा किया था कि विक्रम के बारे में कोई भी जानकारी मिलते ही फोन करेंगे । पर फिर ऐसा कोई मौका ही नहीं । उसके चेहरे पर मासूमियत छा गई, कभी मुलाकात नहीं हुई । नहीं विक्रम का कोई और खास दोस्त कहने को तो बहुत थे पर निक के अलावा अजय ही उसका खास व्यवस्था जो कि उस की तरह ही पायलट था । शायद आप जानते ही होंगे जो उसी फ्लाइट दूसरा पायलट जॉन ने अपना चश्मा अजस्ट करते हुए पूछा । हाँ, उन दोनों की दोस्ती के बारे में बताई है । जैसे कि विक्रम ने मुझे बताया था । दोनों पहली बार फ्लाइंग स्कूल में मिले थे । फिर वहाँ से उन्होंने इससे मैं लाइन्स जॉन्की । काफी फ्लाइट्स । अक्सर उन्होंने साथ में उडाई । अजय के घर आना जाना और उसका विक्रम के घर आना जाना होता ही होगा । हाँ, हम लोग अक्सर मिला करते थे अजय के बारे में और बताइए । अजय अकेला था । उसकी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं थी । बातें बहुत करता था । घूमने फिरने का शौकीन था । अलग अलग ग्रुप के साथ न जाने कहाँ कहाँ घूमता फिरता था । वो कहाँ रहता था । त्रिवेणी में फॅस घर में कहकर उसने अपनी घडी की तरफ देखा । मुझे ऑफिस चलना चाहिए । एक मीटिंग अभी याद आया । जरूर आपने हमारी मदद के लिए जो समय निकाला उसके लिए थैंक्स जॉन मुस्कुराकर बोला । यकीनन आप से मिली जानकारी बहुत मददगार साबित होगी । जावेद बोला आयोग आई चु ली हो, आपके पास मेरा नंबर है । कुछ और जानकारी चाहिए हो तो फिर कुछ और जानकारी चाहिए हो तो फील । फ्री टू कॉल मी कुछ और जानकारी चाहिए हो तो फिर फ्री टू कॉल मी यार । उसके बाद कंचन ने उनसे विदा ली । उसके जाते ही हम भी चले । जॉन ने वेटर को बिल लाने का इशारा करते हुए पूछा, हाँ चलो चलते हैं नहीं को फोन करता हूँ । चलो चलते चलते निक को फोन करता हूँ । दोनों बिल चुकता कर कॉफी शॉप से निकले । सीबीआई हेडक्वॉर्टर से अमर और अब है । सीधे एयरपोर्ट के लिए निकले टैक्सी में अमर ने अभय से पूछा जॉन और जावेद भी दिल्ली में है ना? एयर प्लेन इन्वेस्टिगेशन के सिलसिले में? ऍम हाँ, ये तो है । अब बोला क्या मुझे उन को जॉइन करना चाहिए तो हम उनके साथ लौटना चाहो तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है । लेकिन मुझे लगता नहीं है कि इस काम में तीन लोगों की जरूरत है । वो दोनों भी एक दो दिन में वापस आई जाएंगे । ओके लेकिन अब इतनी दूर आये हैं तो सोचता हूँ कि उन से मिलूँ । काफी समय हो गया मिले । मुझे कोई ऐतराज नहीं । वैसे भी अभी तुम्हारे पास कोई केस नहीं बोलो । कहाँ छोडा जाए तो बस अगले स्टॉपर उतर जाता हूँ । मैं वहाँ से बस या टैक्सी ले लूंगा । ठीक है अगले बस स्टॉप पर । अब मैंने टैक्सी रुकवाई और फिर अमर ने उस से विदा ली और अपना कैरी बैग लेकर उतर गया । अमर ने वहाँ से सरोजनीनगर जाने वाली बस पकडी । बस बीस मिनट में सरोजनी नगर पहुंच गई । वहाँ से एक रिक्शा लेकर वह श्री विनायक मंदिर पहुंचा । वह मंदिर के बाहर एक कोने में खडा हो गया । उसकी नजरें लगातार अपने फोन पर थी । अपनी लोकेशन उसने मैसेज करके उसे बता दी थी जिससे वहाँ मिलने वाला था । कुछ ही देर में उसे एक युवक उस तरफ फायदा हुआ नजर आया । अमर पर एक सरसरी नजर डाल कर वह तेजी से मंदिर के अंदर प्रवेश कर गया । अमर भी कुछ देर में मंदिर के अंदर आ गया । उसे वह युवक भगवान की प्रतिमा के सामने हाथ जोड के खडा आंखे बंद किए हुए पूजा करता दिखाई दी । अमर उसकी बगल में आकर खडा हो गया और उसी की तरह हाथ जोडकर खडा हो गया । फिर धीरे से बोला ऍम वह युवक आंखे बंद करे ही बोला मेरे फ्लैट पर चलना है । पूजा की थाली में चाबी रखूँ तो मैं से लेकर पहुँच मैं कुछ देर में पहुँचता हूँ । ठीक है । युवक ने पूजा की थाली में पांच रुपये के सिक्के के साथ एक चाबी रखती है । अमर ने भी जेब से सिक्का निकाला और पूजा की थाली में रखते हुए चाबी उठा ली । युवक ने उसे आंखों से जाने का इशारा किया । अमर भगवान के सामने नतमस्तक हुआ और फिर मंदिर की घंटी बजाकर बाहर निकल गया ।

Chapter 7

अमर फ्लैट के अंदर कुर्सी पर बैठा युवक का इंतजार कर रहा था । उसके सामने मेज पर पिस्टल, मोबाइल फोन, वॉलेट और घडी रखी हुई थी । उसने मोबाइल पर जीपीएस ऑफ कर दिया था । करीब आधे घंटे के इंतजार के बाद दरवाजा खटखटाया गया । अमर ने उठकर कि होल से देखा और फिर दरवाजा खोल दिया । युवक अंदर आ गया और फिर दरवाजा बंद कर लिया गया । अंदर आकर उसने अमर को गले लगाया और मुस्कुराकर बोला, ऐसे हो मेरे मुँह, बस ठीक ठाक हूँ । अमर कुछ रूके स्वर में बोला तो हम कैसे हो? नितिन दो कहते हुए उसने ध्यान से अमर को देखा, जबकि अमर उसे देख रहा था । नितिन अमर की ही उम्र का नौजवान था । उसके बाद छोटे छोटे थे । शरीर बलिष्ठ और चेहरे पर तेज तर्रार भाव थे । अब बताओ प्रॉब्लम क्या है? नितिन पूछा, मैं सीबीआई हेडक्वॉर्टर आया था । चीफ के साथ के सिलसिले में मेरे ऊपर केस बन रहा है । इंटरपोल के ऑफिसर को मारने का नितिन ने चकराकर अमर की तरफ देगा । अमर ने उसे संक्षिप्त में सबकुछ समझाया । पूरी बात सुनकर नितिन गहरी सोच में डूब गया । ये देखो मुझे तुमसे कुछ ज्यादा नहीं चाहिए । सिर्फ इन दो लोगों के बारे में अगर हो सके तो जानकारी दो एक तो धीरज ने की जो कि इंटरपोल ऑफिसर था और वहीं सीबीआई ऑफिस में बैठा था और दूसरा मनोज जोकि अब नेगी की मौत के ऊपर इन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट बना रहा है । मनोज के बारे में तो मैं बता सकता हूँ इस नेगी के बारे में फिलहाल अभी तक तो सुना नहीं और अब सीबीआई में ही बैठता था तो फिर कुछ तो जानकारी निकाल हुआ मनोज के बारे में क्या कहते हो? मनोज बहुत इंटेलिजेंट ऍम काम से काम रखता है और जो असाइनमेंट मिलता है उसमें गहराई तक जाता है तो मेरे खिलाफ की इस पर काम कर रहे हैं । पर साथ ही मुझसे प्राइवेट में बात करना चाहता है । उस पर भरोसा किया जा सकता है । देखो एक जासूस के तौर पर तो तुम भी जानते हो और मैं भी जानता हूँ कि फेस वैल्यू पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता । मेरे ख्याल से तुम उससे बात करके देखो । शायद पता चले कि उसका मतलब क्या है । बाकी मैं अपनी तरफ से कोशिश करूंगा, उस पर नजर रखें । यानी अभी तक उस की हिस्ट्री क्लीन है । भाई वो सीबीआई ऍम उसकी इस में क्या गडबड होगी? हाँ, अमर चुप रहा तो बहुत ज्यादा टेंशन ले रहा हूँ । मुझे समझ नहीं आ रहा है कि किस पर विश्वास करूँ, किस पर न करूँ और जिस तरह से ये लोग पूछ ताछ कर रहे हैं मुझे तो ऐसा लग रहा है कि सब कुछ मेरे खिलाफ है । मेरे पास कोई सबूत नहीं है ये साबित करने के लिए कि जिन हालातों में मुझे पुलिस साहनी को मारना पडा उसमें उसके अलावा कोई और चारा नहीं था । पर अगर ये साबित होता है कि खाली एक आतंकवादी था तो फिर तुम्हारा के स्ट्रांग हो जाएगा ना । यही तो साबित करना मुश्किल है क्योंकि नेगी का प्लान सिर्फ उसके साथ यानी पुनीत साहनी को पता था और पुनीत साहनी का घर जांचने के बाद उसका संबंधों आईएसआई कैसे स्थापित होता था पर नहीं की के खिलाफ किसी तरह का कोई सबूत नहीं मिला था । नेगी सीबीआई में काम कर रहा था और इस बात की जानकारी जैसा की तुमने का शायद मनोज को भी रही होगी मेरे खयाल से । इसलिए वह तुम्हें अलग से कुछ जानकारी देना चाहता है । मेरे खयाल से उससे मिलने में कोई हर्ज नहीं है । तो मुलाकात करूँ, मैं नजर रखूँ । कोई साइट होगा तो मैं आगाह कर दूंगा ठीक है । अमर ने कहा, अमर की मनोज के साथ उस रात ही मीटिंग फिक्स हो गई । दोनों डिनर के लिए एक होटल में मिले । उन्होंने एक कोने वाली टेबल पकड ली और खाने का ऑर्डर दे दिया । होटल में नितिन भी मौजूद था । उनसे काफी दूरी बनाए । एक टेबल पर बैठा था । उसके पास अमर और मनोज के बीच के वार्तालाप सुनने का पूरा इंतजाम था । मेरे लिए इस समय निकालने के लिए थैंक्स अमर ने कहा, आपको थैंक्स कहने की कोई जरूरत नहीं है । अपनी फील्ड के लोगों की मदद हम लोग नहीं करेंगे तो और कौन करेगा? अमर मुस्कुराया मैं आपको आगाह करना चाहता था कि ये आपकी रिपोर्ट जो बन रही है उसका रुख आपके फेवर में कमी दिख रहा है । लीओन हमारी सरकार पर बहुत दबाव डाला है । हम लोग रिपोर्ट तो आपके सपोर्ट में दिखाते हुए ही भेजेंगे लेकिन पता नहीं वहाँ से क्या उत्तर आएगा । मैं आपसे सच बोलूंगा । मुझे आशा काम ही है कि वह किसी बहकावे में आने वाले हैं । पुख्ता सबूत के बिना वो लोग किसी दलील पर ध्यान नहीं देते हैं । तो इस मामले में क्या बुरा हो सकता है? अमीन वक्त के सिनैरियो क्या है आप पर इंटरनेशनल कोर्ट में केस चल सकता है । वो निराशा भरे भाव में बोला ऍम अमर चौका । इसका मतलब गवर्मेंट मुझे इंटरनेशनल कोर्ट के सामने किसी क्रिमिनल की तरह भेज देगी । अगर ये साबित हुआ कि धीरज नेगी का एजेंडा आतंकवाद से जुडा था और आपके पास उसे शूट करने की कोई अहम वजह मौजूद थी, तो इन्वेस्टिगेशन तो चल रही है । हाँ और इस मामले में भारत अपनी मनमानी कार्यप्रणाली के हिसाब से नहीं चल सकता । उसे इंटरपोल जरूर कुछ सीमित समय देगा । कोई बडी बात नहीं अगर वो हमारी इनवेस्टिगेशन से असंतुष्टि जाहिर करें और ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी से कोई इन्वेस्टिगेशन करने यहाँ आ जाए । ऐसा होना तो नहीं चाहिए । हम लोग अपनी इन्वेस्टिगेशन में कुछ न कुछ उसके खिलाफ निकाल ही लेंगे । हम सभी के लिए यही अच्छा होगा कि आपके साथ ही जासूस पूरी कोशिश करें । हम लोग धीरज नेगी के बारे में खोजबीन कर ही रहे हैं, जरूर कुछ सबूत जल्द ही हाथ आएंगे । जाहिर है, उसने इतना बडा प्लान बनाया था तो ऐसा तो नहीं हो सकता कि उसके खिलाफ कोई सबूत ना मिले । जी हाँ, अब सब आपके साथ ही जासूसों के ऊपर डिपेंड करता है । अब बार बार मेरे साथ ही जासूसों के बारे में क्या बोल रहे हैं । अब इस केस में मैं भी इन्वेस्टिगेट करना शुरू करूँगा । मनोज के चेहरे पर खेदपूर्ण भाव आए लगता है आपको बताया नहीं गया क्या? बताया नहीं गया । नहीं कुछ नहीं बेहतर होगा की ये आपको आपके सीनियर से ही पता चलेगा । क्या कहना चाहते हो तुम बोलो अमर उपन् पडा । मनोज ने चारों तरफ देखा । वेटर चौकर उन्हें देख रहा था । उसे डालने का इशारा करके मनोज बोला देखिए आप के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन चल रही है तो आपको उसे इन्वेस्टिगेशन में इन्वॉल्व करने का सवाल ही पैदा नहीं होता । आपको क्या लगता है हम लोग रिपोर्ट भेजेंगे कि जिसके खिलाफ इन्वेस्टिगेशन हुई उसी ने उसमें भाग लिया । कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रस्ट भी कुछ होता है । अमर को ना चाहते हुए भी हंसी आ गई । तुम कहना क्या चाहते हो? अरे मेरे खिलाफ इन्वेस्टिगेशन हो रही है । वो अलग बात है पर धीरज नहीं की से मेरे सेवा उस वक्त किस का आमना सामना हुआ था और कौन सा हम अपनी रिपोर्ट में इन्वेस्टिगेशन कर रहे अफसरों के नाम भेजते हैं । किसी को अब इस बात का फैसला तो आपके चीज ही करेंगे । मनोज शांत स्वर में बोला कहना क्या चाहते हो अब मेरा नाम नहीं ले सकते हैं । मैं आपका पहला चाहता हूँ इसलिए आपको आगाह कर रहा हूँ क्योंकि सीबीआई ने खुद इस बात पर एमफेसिस दिया कि आपको इस इन्वेस्टिगेशन से दूर रखा जाए । अमर सोच में पड गया । अचानक उसे याद आया कि चीफ ने भी उससे कहा था कि फिलहाल उसके पास कोई केस नहीं है । आमतौर पर चीफ किसी को खाली बैठ नहीं नहीं देते । फिर उन्होंने इतने आराम से ऐसा कैसे कह दिया? तो क्या इसका मतलब अमर अब परेशान मत हुई है । ये सिर्फ नॉर्मल प्रोटोकॉल है, सब सही हो जाएगा पर आपको कुछ मेहनत तो करनी होगी । अमर ने अपना सिर पकड लिया । अब इन हालातों में मैं क्या कर सकता हूँ? जब कुछ भी मेरे हाथ में नहीं है आप कर सकते हो और इसीलिए मैं आपसे अलग से बात करना चाहता था । मनोज आगे झुककर बोला, दरअसल में धीरज ने की को जानता था क्योंकि वो यही काम करता था । हमारे ही ऑफिस में और कुछ चीजों में मैं उसका सहायक था । मुझे बेहद महत्वपूर्ण बात पता है जो आपको धीरज नहीं कि कि असलियत तक पहुंचने में मदद कर सकती है । तो अगर तुम ये बात जानते हो तो फिर मीटिंग में क्यों नहीं बताया उसके सहारे इन्वेस्टिगेशन की जा सकती है । नहीं वो मैं नहीं बोल सकता । उससे मेरे ऊपर सवाल उठेंगे । फिर तुम मुझे वो बताने का इस क्यों ले रहे हो? जानकारी कोई बहुत बडी नहीं है । उसको बताने से मेरे ऊपर कोई बहुत बडा रिस्क नहीं है । पर मैं उसे इस तरह ऑफिशियली नहीं बोल सकता । मुद्दे पर आता हूँ । सीधी बात बस ये है कि मेरे पास एक लू हैं जिससे आप धीरज नेगी के बारे में और जान सकते हैं । क्या है वो? धीरज नहीं की की गर्लफ्रेंड अमर ने उसे आश्चर्य से देखा था । सौम्या नाम था उसका, तुम्हें ये जानकारी कैसे मिली? मैंने धीरज नेगी के साथ थोडा बहुत काम किया था तो मेरी उसके साथ थोडी बहुत जान पहचान हो गई थी । वो यहाँ पर एक दम अकेला था इसलिए कभी कबार चाय सिगरेट पर मुझे अपना कुछ पर्सनल मैटर शेयर कर लेता था । मुझे बस इतना पता था कि वो एक इंटरपोल ऑफिसर है और यहाँ पर लियोन से आया है । इससे ज्यादा मुझे उसके बारे में कुछ नहीं पता था और उसने बातों बातों में ही शहर किया था कि उसकी गर्लफ्रेंड इंडिया में है और उसका नाम सौम्याय सौम्या के बारे में मुझे जो थोडी बहुत जानकारी है वो ये कि वह पांच फुट पांच इंच लंबी खूबसूरत लडकी है जिसका घर हिमाचल प्रदेश में है और नेगी बीच बीच में उससे मिला करता था । ऍम काफी जानकारी है तो अमर व्यंग मिश्रित मुस्कान के साथ बोला कुछ जानकारी तो है । मनोज बोला हूँ तो मैं उसका कद कैसे पता चला? अमर ने उसे घूमते हुए पूछा नेगी के पास उसका एक फोटो था उससे अंदाजा लगाया तुम्हारे पास फोटो नहीं है, होता तो अब तक भी देता है पर तुम ने उसे देखा तो है । मैं समझ सकता हूँ आप क्या कहना चाहते हो कहकर उसने अपना मोबाइल ऑन किया और कुछ देर में एक स्क्रैच दिखाया । अपनी याददाश्त के हिसाब से मैंने कल ही उसका एक स्केच बनवा लिया था क्योंकि मुझे पता था कि ये आपके काम आएगा । ब्लूटूथ वन करिए । मैं भेजता हूँ किसी और के माध्यम से तो तस्वीर भेजना ठीक नहीं रहेगा । ये बहुत मददगार रहेगा । अमर अपने मोबाइल में ब्लूटूथ ऑन करते हुए बोला अरे भाई मैं आपकी मदद ही करना चाहता हूँ । मैं नहीं चाहता की किसी विदेशी जासूस जो कि भारत का अहित करने आया था के चक्कर में हमारा कोई होनहार जासूस फंसे । मैं वाकई खुशकिस्मत हूं कि तुम ने ऐसा सोचा । बातें करते करते वो दोनों डिनर लगभग खत्म कर चुके थे । वेटर मिल गया मुझे दो । अमर ने उसे उठाने की कोशिश की पर मनोज ने उसे तुरंत झटक लिया । अरे मैं देता हूँ ना । अमर ने आग्रह किया मेरी मदद को इस बिल से चुकता करने की कोशिश करें । ऑफिसर मनोज हसते हुए बोला अरे नहीं ऐसी बात नहीं है । आप दिल्ली आए हो । हमारे मेहमानों कभी लखनऊ आएंगे तो आपको भी मौका देंगे । कहते हुए मनोज ने अपना क्रेडिट कार्ड बिलबुक में रखा और वेटर की तरफ बढा दिया । होटल से निकलने के बाद अमर ने मनोज से विदा ली और एक रिक्शा क्या उसमें बैठते ही उसने नितिन को फोन किया । तुमने सुना सब हाँ सुना । मैंने नितिन बोला हूँ क्या लगता है? अमर ने व्यग्रता के साथ पूछा । सुनने में तो यही लग रहा है कि वह तुम्हारी मदद करना चाहता है । फिर भी तो मुझे एक दो दिन का समय तो मैं जरा मनोज की कुंडली निकालता हूँ । ठीक है अमर ने फोन रखा और विचारों में खोते हुए बाहर देखने लगा

Chapter 8

तेईस मार्च चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट लखनऊ हूँ । जावेद ने कार पार्किंग में रोकी चलिए मौसन सामान उतरवाई जावेद अपने साले से बोला नौसेना सत्रह साल का दुबला पतला किशोर था जिसमें टीशर्ट और जींस पहनी हुई थी और उसके कानों में ईयरफोन लगा था जो कि उसके आईफोन से जुडा था । जावेद को एहसास हुआ कि उसने उसकी बात नहीं सुनी तो उसने उसका ये फोन निकाला और बोला उतरो सामान दारू ऍम टाइम से इतना पहले आ गए । सरीन अपना हैंडबैग और मोबाइल संभालते हुए खेदपूर्ण स्वर में बोली, आपको तो खुश होना चाहिए जान । जावेद उतरकर डिक्की खोलते हुए बोला वक्त से पहले आ गए ताकि एयरपोर्ट के सारे काम आराम से निपट जाएगा । सरीना नीचे उतरी और जावेद को घूमते हो, बोली बहुत जल्दी आपको हमें विदा करने की फालतू की बातें करना तो कोई आपसे सीखे । हमारे अच्छे काम को भी शक की नजरों से देखती है । शाहर जाजूस हो तो कुछ आदतें आना मुमकिन है । कहकर वह हस्ती जावे भी उसे देखते हुए हस दिया । वो उसके खूबसूरत चेहरे को प्यार से देखता रहा । मुझे जिंदगी से बैग उतारने लगा । सरीना ने फलक को नीचे उतारा फिर वो चारों एयरपोर्ट की तरफ बढ गए । मौसीन आगे था बाकी लोग पीछे चलते हुए जावेद ने सरीना का हाथ थाम लिया अपना खयाल रखियेगा मेजर सही बात आप भी अपना ख्याल रखेगा । मैं जैसा हमारी गैर हाजरी में दिन रात ऑफिस महीना बैठे रहेगा । वक्त पर घर आइयेगा और खाने के लिए फातिमा को बोला है टीफिन आ जाएगा । अरे क्यों ने परेशान करती हो? वो कहे होने लगी । परिषद आपको तो अपने सगे बेटे से बढकर मानती । अब अब बाहर के खाना खाने के लिए दीवाने हुए जा रहे हैं तो अरे नहीं हमें सब पता है । कल रात ही अमर भाईजान आपसे क्या बोल रहे थे कि आज शामिल टुंडे कबाब और बिरयानी पार्टी होगी । उन के घर पर कहते हुए सरीना ने आंखें तरेर करो से देखा । जावेद के चेहरे पर चोर के पकडे जाने के भाव आए । अरे वो तो पहले से ही पार्टी का कुछ प्लान है । हमें सब पता है उन्हें पार्टी के लिए तो बनाना चाहिए । चलिए हुआ यहाँ पर रोज रोज नहीं द्वारा । कुछ ही देर में वो एयरपोर्ट के गेट पर पहुंचे । बार बार डेरी कहते हुए अचानक की फलक होने लगी । आज मेरी बच्ची आज हूँ । जावेद ने उसे गले लगा लिया । बताओ रोटी क्यूँ फॅमिली फिर तो डैडी खुद ही लेने आएंगे ना आपको नानु की यहाँ से जावेद ने देखा सरीना की आगे भी नाम थी । अरे मेजर साइबा आप भी शुरू हो गई । जावेद ने उसकी पीठ पर हाथ रखा और फिर दोनों का बारी बारी माथा चूम लिया ।

Chapter 9

वर्तमान समय नई दिल्ली जावेद की आंखें नम थी । उसने वॉश वेशन की नल से पानी लिया और अपना चेहरा धोया । अपने परिवार के मिलने की आस रह रहकर उसके मन को अतीत की यादों में धकेल रही थी । इस वक्त वो जॉन के साथ एक रेस्टोरेंट में लंच के लिए पहुंचा था । उन को ढूंढ रहे थे । दूसरे पायलट अजय का कोई रिश्तेदार दिल्ली में मौजूद नहीं था । उसके माता पिता का कुछ साल पहले ही देहांत हो चुका था और जो रिश्तेदार थे वह कानपुर, मुंबई और बेंगलुरु में ही थे और वह सभी दूर के रिश्तेदार थे जिनसे शायद ही कोई ठोस जानकारी हासिल होने वाली थी । फिर भी उन्होंने सीक्रेट सर्विस की शहरी ब्रांच को उनसे मिल कर पूछताछ करने का निर्देश दे दिया । का जो एड्रेस कंचन से मिला था वो जेएनयू के पास का था पर वहाँ जाकर उन्हें पता चला कि वहाँ नहीं रहता था । वहाँ से वो आगे कहाँ गया था । उसके मकान मालिक को नहीं पता था । इस दौड भाग में दोपहर हो गयी जावे । जब टेबल पर वापस पहुंचा तो उन का ऑर्डर आ चुका था । खाना खाते हुए वो अपने आगे की जांच पडताल की रणनीति पर विचार विमर्श करने लगे । खाने के दौरान जावेद को चीफ का फोन आया । उसने तुरंत फोन उठाया । बोलिए सर, अमर दिल्ली में हैं क्या? तो मैं जानता हूँ आप दोनों ही दिल्ली आए थे ना? सीबीआई से किसी पूछताछ के लिए आपने ही मैसेज डाला था । पर क्या तो मैं खबर है कि वो अभी भी दिल्ली में है क्या? उसने तो मैं जॉन को कांटेक्ट करने की कोशिश की । जावेद ने जॉन की तरफ देखा । जॉन को चीफ का सवाल सुनाई दे गया था । उस ने ना में सिर हिलाया, जावेद में उत्तर दिया नहीं हमें तो कांटेक्ट नहीं किया तो तुम उसे कॉन्टेक्ट करो और उससे मिलों और जब वो मिल जाए तो उसे कहीं जाने मत देना । जल कह रहे सर, मैं फोन पर डिटेल नहीं समझा सकता है । बस इतना समझ लो कि तुम दोनों को अमर को कैसे भी पकडना है । जी सर, मेरी समझ में कुछ आ नहीं रहा है । अब क्या बात कर रहे हैं उसे पकडना । वो क्या कहीं भागने की कोशिश कर रहा है और किस लिए देखो अभी तो कोशिश नहीं की होगी पर कर सकता है । माजरा क्या है सब पता चल जाएगा । फिलहाल तो उसे कॉन्टेक्ट करो और उससे मिलते ही मुझे फोन करुँ । ठीक है सर कहकर जावेद ने फोन कर दिया और असमंजस भरे भाव के साथ जॉन की तरफ देखा । अमर दिल्ली में रुक गया और उसने मुझे मैसेज तक नहीं किस फिराक में घूम रहा है और चीफ उसे पकडने का ऑर्डर दे रहे हैं । ये सब चल क्या है? कुछ समझ में नहीं आ रहा है । ऍम मैं अमर को फोन करता हूँ । गृहकर जावेद ने अमर का नंबर लगाया । अमर की आवाज तुरंत दूसरी तरफ से आई हलो हमारे क्या जल सब ठीक हो गया । अब दिल्ली में ही हो तो मिल भी लो । दूसरी तरफ से कुछ अंतराल के बाद आवाज आई तुम कहाँ पर हो भाई? क्या जॉब भी तुम्हारे साथ है? हाँ मेरे साथ ही है । मुझे तो चीज से पता चला कि तुम दिल्ली में हूँ । उन्होंने बोला कि कम में कुछ मदद लगे तो अमर से पूछ लेना । दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया । हेलो भलो । जावेद को लगा कि फोन कट गया तो दोनों कहाँ पर हो? अचानक अमर ने पूछा हम लोग जैनियों के पास एक रेस्टोरेंट में बैठे हैं तो अच्छा अपनी लोकेशन भेजो में पहुँचता हूँ । ठीक है मैसेज करता हूँ । जल्दी पहुंच जावेद ने फोन रखा और मैथ्स खोलकर लोकेशन ढूंढने लगा । उस ने नजर उठाकर जॉन की तरफ देखा और पूछा क्या लगता है वो आएगा जब कर क्या हैं? जो भी है उसकी आवाज में सतर्कता ज्यादा नहीं । मुझे ऐसा लगा जैसे किसी अजनबी से बात कर रहा हूँ । सीबीआई ने चीफ और अमर दोनों को बुलाया था शायद सोहनगढ में हुए मामले की रिपोर्ट के सिलसिले में हाँ तो वही थी । पर न जाने आगे ऐसा क्या हुआ जो अब अमर को पकडने की बात कर रहे हैं । आने दो से सब पता चल जाएगा । जॉन अभी कॉफी की सिर्फ ले रहा था कि उसकी नजरें सामने गई । जावेद ने भी पलट कर देखा । पीछे अमर खडा था वो चुप चाप एक कुर्सी खींचकर उनके पास बैठ गया । फिर बिना कुछ कहे बारी बारी से दोनों को देखने लगा । हाँ, घूम रहा मेरे आम । जॉन ने पूछा जिंदगी बडी एडवेंचरस होती जा रही आजकल अमर फेंकी । मुस्कान के साथ मेज पर रखे एक कप को घूमते हुए बोला चल कर रहे हैं सीबीआई वाले क्या बोल रहे हैं? जावेद ने पूछा । चीफ ने बताया नहीं नहीं, बहुत जल्द मुझे इंटरनेशनल कोर्ट में पेश किया जाएगा । वट जॉन हैरानी से बोला देश पर हमला करने वालों को मारने के लिए हम जैसे जासूसों के लिए नई स्कीम निकाली है । हमारी सरकार ने कहकर अमर ने तीन बार जोर जोर से ताली बजाएंगे । रेस्ट्रॉन्ट में बैठे कुछ लोग उनकी तरफ उत्सुकता से देखने लगे । क्या वो नेगी के खिलाफ सबूत मांग रहे? जॉन सोचते हुए बोला, क्योंकि वो इंटरपोल ब्रिटिश अमर ने उसे मुस्कुराकर देखा और कहा, मेरी जान तेरा दिमाग तो कंप्यूटर को मार देता है तो इसमें परेशान होने की क्या बात है? इन्वेस्टीगेशन चल रही है । जल्दी ही कोई फायदा नहीं । अब तो चीफ ने भी मन बना लिया है मेरा करियर खत्म करने का । मुझे नहीं लगता चीफ ऐसा जावेद ने कहना चाहा, पर अमर ने सख्ती के साथ उसकी बात काट दी । ऐसा ही है । चीफ अपने ही एजेंट को बात नहीं कर रहे हैं । उन्होंने मेरे इन्वेस्टिगेशन पर रोक लगा दी है और सिर्फ नहीं की के मामले पर ही नहीं कोई भी नया केस नहीं देना चाहते हैं । उन्होंने जरूर सोचा होगा की कि अमर तो अब जेल जाएगा । उसे नया केस देकर क्या फायदा टोमॅटो करेंगे? जावेद बोला तो मैं इतने दिनों से छुट्टी पर भी तो हैं । मैं क्या मैं क्या पहली बार छुट्टी पर गया था । पहले तो चीफ छुट्टी पर भी मुझसे केस के ऊपर अपडेट लेते थे । नाॅट देते थे । फिर अब क्या हो गया? मेरे ऑफिस वापस आते ही मुझे सीधे सीबीआई के पास ले जाएगा । जो हुआ वो एक एंगल से देखें तो ऐसा लग रहा है पर असलियत यह नहीं । जॉन बोला चीफ हमेशा तेरह साथ ही देंगे । पागल अचानक अमर उठ खडा हुआ किसी और पर तो नहीं पर मैं तुम दोनों पर विश्वास करता हूँ । नेगी को मैंने मारा था और अब उस की कभी भी में ही खोल दूंगा और फिर खुद पर लगे दाग मिट आऊंगा । उसके बाद इस घटिया नौकरी से बाइज्जत इस्तीफा दूंगा । अमर उससे सोपन रहा था । भाई गुस्सा होकर कोई गलत कदम न उठा । जॉन ने उसके कंधे पर हाथ रखा । हम तुम्हारे साथ हैं । जावेद बोला तो चलो मेरे साथ कहाँ लेगी की कब्र खोदने जरूर जरूर । जावेद उसे आश्वासन देने की कोशिश करते हुए बोला, पर सब कुछ ऑफिशियल ढंग से ही तो सही रहेगा । मैं चीज से बात करूंगा । उनसे बात करने का कोई मतलब नहीं । अमर वी रिजनेबल हम तीनों जिम्मेदार सरकारी मुलाजिम है । मैं नहीं हूँ किस कर वह बारी बारी से उन दोनों को देखते हुए बोला, आॅल मेरा साथ कोई नहीं देखा । तुम दोनों भी नहीं । अरे मना किसने किया मेरे आम? जॉन बोला पर ऍम राइट कहते हुए अमर खडा हुआ मैनेज कर लूंगा क्या मैनेज करोगे? जावेद ने पूछा । सब कुछ कहते हुए वह पालता ही था कि जावेद चेतावनी भरे स्वर में बोला अमर तो नहीं जा सकते हैं । अमर मुस्कुराया उनकी तरफ मोडे बिना ही वो बोला क्यूँ चीफ ने मुझे अरेस्ट करने का ऑर्डर दिया है तुम को हम मिलकर चीज से बात करते हैं । अमर बिना कुछ कहे चल दिया । जावेद उठा और उसने लपक कर उसका कंधा पीछे से पकडा । तभी अमर ने घूम कर एक एक चावेज पर जमादि जावेद लडखडा गया और अविश्वास के साथ अमर को देखने लगा । अमर निडरता के साथ उसे देख रहा था । जावेद की आंखों में भी क्रोध उभर आया । अचानक ही अमर ने अप्रत्याशित ढंग से भागना शुरू कर दिया । ऍम जावे चीखा और उसके पीछे लग का । जॉन ने जेब से पांच सौ का नोट निकालकर मेज पर रखा और वह भी उन दोनों के पीछे दौड पर फुटपाथ पर उन्हें यू दौडता देख लोग हैरान रह गए । जोर जोर कोई अमर को दौडता देखूँगी चिल्लाने लगा । कई नजरिया उसकी तरफ उठी । शोर सुनते ही उस कांस्टेबल के कान खडे हो गए जो किनारे खडा एक चाट के ठेले पर पानी पूरी खा रहा था । वो भी अमर की दिशा में भागने लगा । वो लडका लेकर रास्ते के बीच खडा हो गया । अमर दौडते हुए उसके पास पहुंचा । कांस्टेबल ने तेजी से लटको माया अमर ने लपक कर लेट पकड लिया और कांस्टेबल के पेट में कोहनी दे मारी । वो चीज का हुआ । एक तरफ जाकर गिरा लठ्ठमार के हाथ में आ गया जिसे लेकर वह फिर भागने लगा । जावेद और जॉन दस बारह कदम पीछे ही थे । निरंतर दौडते हुए एक जगह अमर अचानक रुका और उसने लाट रास्ते के बीच दो ठेलों पर टिकाकर रास्ता ब्लॉक कर दिया । इस काम के लिए वह सिर्फ पल भर रुका था और फिर दौडने लगा । पीछे आता जावेद झोंक में लाट से जा टकराया जो हमने उसे संभाला । दोनों फिर दौड पडे । पर इस व्यवधान से अमर को फासला बढाने का मौका मिल गया । आगे चौराहा दिखाई दे रहा था । अमर ने देखा पैदल पारपथ के लिए ट्रैफिक लाइट हरी थी और सिर्फ दो सेकंड बाकी थे । वो पूरी जान लगाकर भागा और लाइट बंद होते होते सडक तक पहुंच गया और गिरते पडते उसे पार भी कर गया जावे । थोडा ही पीछे था और उसके सडक पर पहुंचते ही गाडियाँ चल पडी और वो उनके बीच जा फंसा । कई बार सवार उसे यू सडक के बीच खडा देख गालियां देते हुए निकलने लगे । वो किसी तरह बचते हुए वापस आ गया । जॉन किनारे ही था । उन दोनों ने अमर को एक रिक्शा में सवार होते देखा । रिक्शा में बैठकर उन्हें अमर का हाथ बाहर निकलते दिखा और फिर उनकी तरफ बीच की उंगली ऊपर उठती नजर आएगा । उन दोनों ने भी एक रिक्शा कर लिया पर सिग्नल खुलते खुलते बहुत देर हो गई थी । अमर परीक्षा उन्हें कहीं दिखाई नहीं दिया ।

Chapter 10

वर्तमान समय से सात साल पहले सन दो हजार बारह अज्ञात जगह एनसीआर वो एक सीलबंद कारखाना था । दोपहर का वक्त होते हुए भी कहीं से भी बाहर की रोशनी अंदर नहीं आ पा रही थी । जगह जगह पीले बल्बों का मध्यम प्रकाश विराजमान था । वर्ष के बीचों बीच एक शख्स बैठा हुआ था । उसके कपडे फटे हुए थे । ऊपर पट्टी थी । हाथ पीठ के पीछे रस्सी से बंधे हुए थे । वजह से चारों तरफ देख रहा था । तभी किसी तरह से दरवाजा खुलने और फिर बंद होने की आवाज आएगी । वर्ष पर बैठे शख्स को दरवाजा तो देख नहीं रहा था, पर अब उसे पदचापों की आवाज सुनाई देने लगी । कुछ देर में एक शख्स उसके सामने आकर खडा हुआ । उसे देखकर वो चौंका । फिर आपने बंधन खोलने के लिए कसमसा आने लगा । कैसे हो जोगिन्दर? उसने पूछा हैरान हो गए । मुझे देखकर तुमने कभी सोचा नहीं होगा कि तो मैं इस तरह से मेरे शिकंजे में आपस हो गए । जोगिंदर कसमसाता रहा । इस तरह तो मजा नहीं आएगा । जब तक तुम्हारे मन में क्या चल रहा है, ये पता नहीं चलेगा । तब तक तो मैं मारने में मजा भी नहीं आएगा । कह कर उसने उसके मुंह पर चढी टेप हटा दी । साले मुझे खोलते ही जोगिन्दर हो रहा है तो उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे बडी गलती कर दिया । मुझे उठाने की हिम्मत की तूने अपनी औकात से ज्यादा उड गया जो अब तो बच्चे कह रहे हैं मेरी फिक्र छोड तो ये बता तू कैसे बचेगा? गिरीश तेरह पूरा खानदान खत्म करवा दूंगा अच्छा और ये तो बता तेरे मरने के बाद ऐसा होगा कैसे कहकर उसने बेहद निर्दयी ढंग से सीधे उसकी नाक पर घूंसा मार दिया । प्रहार जबरदस्त था । जोगिंदर डकारकर रह गया । उसकी नकसीर फट गई । आंखों के सामने तारीख दिखाई देगा । अरे एक ही घूसा मारा अभी तो जितनी ताकत धमकाने में लगा रहा था, उसकी आधी भी असलियत में नहीं है । तेरे शरीर में जोगिंदर ने खून होगा । फिर मुस्कुराते हुए बोला बंधे हुए आदमी पर ताकत आज मारा है । धन है तो हाथ खोल मेरे गिरीश ने इस बार जूते की ठोकर उसके सीने पर मारी । वो पलट कर गिरा हूँ । फॅस तो खोखला गिरीश इसलिए तो अपनी बीवी को भी नहीं बचा पाया । कमीने उसके बारे में एक शब्द नहीं बोलेगा तो गिरीश क्रोध से थरथराते हुए बोला क्यों ना बोलो बीवी जैसी तो मेरी बन ही गई थी जो काम तो उसके साथ करता होगा वो मैंने भी तो महत्व देखते हुए गिरीश कूदकर उसके सीने पर सवार हो गया और उसका गला दबाने लगा । उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी । इसका डर कि उसका पूरा शरीर कांपने लगा । जोगिंदर उसकी गिरफ्त में छटपटाने लगा । उसकी सांसे रुकने लगी । आंखे बाहर उबलने को होने लगी । अचानक गिरीश रुक गया । वो से आप अलग देखे जा रहा था । नहीं इतनी आसान मौत नहीं दूंगा तुझे एक हफ्ते तक यात्रा दी थी ना तुम । हरामी से तो भी एक हफ्ते से पहले नहीं मरेगा । कहकर गिरीश उठा और तेजी से वापस गया । कुछ देर बाद लौटा तो उसके हाथ में मटन काटने वाला चौपर था । उसे देखकर जोगिन्दर के चेहरे पर खौफ मंडराया । फिर गिरीश ने उसे सीधा बैठाया और उसके हाथ खोलने लगा । तभी वहां एक आवाज गूंजी, उसके हाथ मत खोला । गिरीश गिरीश ने छत की तरफ देखा । आवाज एक स्पीकर से आ रही थी । आप चिंता ना करो, कुछ नहीं होगा । गिरीश ने जवाब दिया और जोगिंदर के हाथ खोल दिए । आठ खोलते ही उसने गिरीश के पैर खींच लिए । वो गिर पडा पर गिरे गिरे ही । गिरीश ने उसके पेट में ठोकर जल्दी जोगिन्दर चीखा पर खुद को संभालते हुए उठ खडा हुआ । गिरीश उसे घूरते हुए उठ खडा हुआ । उसने चौपर फर्श पर रखा और फिर उसकी तरफ दौडा । जोगिन्दर ने उसे रोकने की कोशिश की, पर वह से लिए पीछे दीवार से जा टकराया । फिर उसके बाद उसने उस पर लाभ घूंसों की बरसात कर दी । जोगिंदर की हालत पस्त थी । वो निर्जीव सा दिख रहा था । वह फिर नीचे के फर्श पर बैठ गया । अपना हाथ सामने फर्ज पर रख गिरीश ने कहा, जोगिंदर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । गिरीश ने जबरन उसका हाथ फर्श पर रखवाया और फिर चौपर उठाया । जोगिंदर ने सहमते हुए हाथ वापस खींच लिया । नहीं तो इससे तेरी गर्दन पर कुमार होगा नहीं, ऐसा मत कर क्यों? क्या हुआ? एक मिनट क्या बोला तू? गिरीश उसकी आंखों में झांकते हुए बोला । प्लीज बोला माफी मांग रहा है । वो भी तो तो मेहमानों के सामने गिडगिडाई होगी । उसने भी दया की भीख मांग होगी । पर तुम लोगों पर असर हुआ तो लोगों ने तो उसके साथ ऐसी अमानवीय हरकतें की की उसे अपने औरत होने पर अधिकार हुआ होगा । बोल कैसे माफ कर दो मैं तुझे गिरीश जोगिन्दर की आंखों में झांकते हुए बोला । उसकी आंखों में आंसुओं की झलक मिल रही थी । अपनी प्रेयसी को खोने की वेदना दिख रही थी । जोगिंदर उसकी आंखों में झांकता ही रह गया । जबकि तब तक गिरीश का चौपर वाला हाथ घुमा और उसका फल उसकी उंगलियों पर पडा । उसके मुख से हृदय विदारक चीख निकल गई । वो फर्श पर गिरकर छटपटाने लगा । उसकी तीन उंगलियां बीच से कट कर अलग हो चुकी थी । अब कल मिलेंगे कहकर गिरीश उठ गया और से योगी तडते हुए छोडकर वापस चला गया । अगले चार दिन जोगिन्दर के लिए कयामत के दिन की तरह निकले । छठे दिन जब गिरीश वहाँ आया तो उसने पाया फर्श पर जगह जगह खून से सने उसके हाथ पैरों के निशान थे । जोगिन्दर एक कोने में पालता हुआ पडा था । उस की सारी उंगलियां और एक पैर कटा हुआ था । एक आंख फूटी हुई थी, लेकिन उसके हर जख्म पर पट्टी की हुई थी ताकि वह फोन बहने से ही ना मर जाए । गिरीश ने उसे पालता आया उसका चेहरा निर्जीव मालूम पड रहा था । उसने उसके चेहरे पर पानी की छींटे मारी और उसे होश मिलाया और जोगेंदर तेरे बर्ताव से बहुत खुश हूँ । ऐसा लग रहा है तुझे अब अपनी गलतियों का पछतावा हो रहा है । उसने कमजोर ढंग से स्वीकृति में सिर हिलाया फिर कमरे में नहीं की और उसका एक साथ ही पहुंचे । कितने की बोला आज तो उससे क्या प्रवास के बारे में पूछा जाएगा । अच्छा और तो उसके लिए सही सही जवाब देगा । अच्छा बर्ताव रहा तो जी जीवन से मुक्त कर दिया जायेगा । तेरे कर्मों का पश्चताप इस जीवन में हो जाएगा और तू अगला जन्म लेकर । एक अच्छे इंसान की जिंदगी जी पाएगा तो तैयार है । उसने हामी भरी फिरने की के साथ ही ने फोन से वीडियो बनाना शुरू किया जिसमें सिर्फ जोगिन्दर दिख रहा था । नेगी ने चेहरे पर एक मास्क पहना जिसके मोह के भाग पर धातु से बना गोलाकार छिद्रों वाला यंत्र था । वो जब बोला तो एक अलग ही मोटी सी आवाज नहीं तो उन ने अपने साथियों के साथ मिलकर दो साल पहले नंदनी में तल नाम की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार करके उसकी हत्या की थी । कैमरे में देखते हुए जवाब दो नेगी ने दोबारा सवाल किया । इस बार उसने कैमरे में देखते हुए जवाब दिया तो मैं अब क्या लग रहा है? ऐसा काम तो मैं करना चाहिए था नहीं । मैंने गलत किया ताकत के नशे में नहीं करना चाहिए था । मैंने पाप किया । किस किस ने उसके साथ बलात्कार किया? सबके पूरे नाम बताओ जोगिंदर ने पांच लोगों के नाम उसका मॉडर कैसे? क्या उसमें कौन कौन शामिल था? उसने पूरा वर्णन दिया । क्या ये सही काम था? ऍम ये बहुत बडा अनर्थ किया मैंने । मेरे अंदर न जाने कौन सी वैश्य आ गई थी । मैं तो पागल हो गया था । कहते हुए वह विक्षिप्तों की भांति रोने लगा । नेगी ने उसकी पीठ थपथपाई, कोई बात नहीं । तुम जानते नहीं तो हमारे इस बयान से कितने लोग सुधरने वाले हैं । तो मैं एक महान मिशन में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हो तो सबसे बडी बात है कि तुम मैं अपने किए थे । वाकई पछतावा नेगी के इशारे पर गिरीश ने उसे पानी पिलाया । फिर नेगी ने पूछा अपने साथियों को क्या संदेश देना चाहते हो तुम? मैं तुम सबसे कहना चाहूंगा कि अपने जुर्म को मान लोग और पुलिस को सब सच बता दो । फिर मास्क पहने नेगी कैमरे पर आया, नहीं तो तुम्हारा हृदय परिवर्तन करने के लिए मैं आना होगा अपने आप को स्वीकार लोग जैसा जोगिन्दर ने कहा खुद आगे आकर समर्पण कर दो । बाकी लोगों से भी आग्रह है कि जागरूक हो जाए । स्त्रियों को इंसान ही समझाएँ । खेलो ना नहीं । अगली बार किसी लडकी पर गलत नजर डालने से पहले याद रखना हमारी नजर अब पर हो सकती है । आप करेंगे तो आपके पापों से आपको मुक्त करने की जिम्मेदारी हम लेंगे । हम यानी मिशन अंतर्द्वंद के सेवक जो भारत जैसे महान देश को अपराध और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए तत्पर हैं । फिर नेगी ने अपने साथी को वीडियो बंद करने का संकेत दिया । इस वीडियो का करेंगे क्या? गिरीश ने बोला इस वक्त वो यूट्यूब पर डाल देंगे । वहाँ से ये टीवी चैनलों पर खुदबखुद पहुंच जाएगा । पर फिर तो सब यही समझेंगे कि ये काम में नहीं किया । पुलिस टोमॅटो भी कर लेगी । गिरीश ने हैरानी से उसे देखा पर उन्हें तो हमारे खिलाफ कुछ नहीं मिलेगा । तो मैं एक हफ्ते से मुंबई में वहाँ तुम्हारी अलग भाई पहले ही मौजूद है । तो मामाजी मुंबई निकलोगे और जब पुलिस तो मैं पकडेगी तो मैं अपनी मुंबई में मौजूदगी की पूरी कहानी बता नहीं होगी । हमारा वकील तो मैं बेल पर छोडा लेगा । गिरीश के चेहरे पर चमक आई पर आपको क्या लगता है इसके साथ ही आत्मसमर्पण करेंगे? मुश्किल है मैं ऐसे एक और को मुक्त करना होगा । उसके बाद शायद अब कर दें । क्या उन्हें भी मैं नहीं तो मैं उसके बाद रिस्क नहीं ले सकते हैं क्योंकि फिर तुम पुलिस की निगरानी में रहोगे । इस बीच जब तक हम नहीं चाहे तो हम किसी को कॉन्टेक्ट नहीं करोगे । पर मेरे पास वैसे भी कोई जरिया ईमेल भी नहीं । मैं समझ गया अब सही है । नेगी ने फर्श पर बैठक जोगिन्दर की तरफ नजर डालकर का इसका क्या करना है? गिरीश ने उसके ऊपर दया के साथ एक नजर डालिए, मैं ऐसे सजा दे चुका हूँ । मेरा बदला पूरा हो गया । मुझे अभी से मारने की कोई इच्छा नहीं समझ सकता हूँ और इसका हक बनता है कि अभी से आसान मौत मिल जाए । कहकर नेगी ने एक इंजेक्शन तैयार किया और फिर जोगिंदर के सामने झुका तो मैं बहुत अच्छा बर्ताव की तो हम अपने बुरे कर्मों से खुद को मुक्त समझो । अब तुम अपने नए जन्म की तरफ बढ जाओ । जहाँ तो मैं एक ने एक फरिश्ते जैसी जिंदगी बिता हो गए । जोगिंदर के चेहरे पर संतोष भरे भाव आ गए होने की को देख रहा था । ऐसे जैसे किसी फरिश्ते को देख रहा हूँ । उसने खुद अपनी बहुत आगे बढा दी । आप महान है, मैं मुक्त हो जाना चाहता हूँ । नेगी ने वो इंजेक्शन उसकी बाह में लगा दिया । कुछ ही पल में जोगिन्दर हमेशा के लिए हो गया ।

Chapter 11

मार्च फ्लाइट तीन सौ एक अरब सागर का वायुमंडल फलक क्लीन की खिडकी के बगल वाली सीट पर मौजूद थी । वो उत्साह से बाहर के नजारे देख रही थी । मोहसीन उसके बाजू में था, जो उसे कहीं दूर आसमान में बादल दिखा रहा था । वो फल ऊॅट वहाँ थोडी ना हम क्लाउड । अरे नहीं वो वर्ष का पहाड माउंट एवरेस्ट मम्मी देखो मामू झूठ बोलने सरिना मैग्जीन पड रही थी । उसने मोहसीन पर नजर डाली और सर हिलाते हुए मुस्कुरा दी । टीचर ने बताया माउंट एवरेस्ट नेपाल हूँ । आपकी टीचर ने आपको इतना भी नहीं सिखाया । अच्छा बहुत बोलने लगी है । कहकर मोहसीन उसके गुदगुदी करने लगा । अलग बुरी तरह से हंसने लगी । ऍम सेरेना डाटते हुए बोली, ज्यादा मस्ती नहीं सीधे बैठो । तभी प्लेन वह तरफ धीरे धीरे झुकने लगा । एयर होस्टेस तो फिलहाल पैसेंजर्स को चाय कॉफी सर्व कर रही थी । लडखडा गई । मोहसीन हंस कर बोला जी जी, जब लेनी सीधा नहीं चल रहा तो हम कैसे सीधे बैठें । गलत भी दान दिखाते हुए हंसने लगी । प्लेन में सीटबेल्ट्स पहनने के निर्देश जारी हो गई थी । प्लेन में अधिकतर लोग सामान्य ढंग से बैठे थे, पर कुछ जरूर थे जो व्यग्र होने लगे थे । एक संभ्रांत बिजनेसमैन सा प्रतीत होता । व्यक्ति खडे होकर एयर होस्टेस से पूछने लगा ये प्लेन मूड हो रहा है । कोई इमरजेंसी गया सर आप अपनी सीट पर बैठ जाए और सीट बेल्ट लगाए । कभी कबार खराब मौसम के कारण रूट चेंज करना पडता है । वो व्यक्ति बैठ हो गया पर फिर भी रोष भरे स्वर में बोलता गया हूँ । मुझे मत सिखाइए । मैं हजारों बार प्लेन में ट्रैवल कर चुका हूँ । जिस तरह से ये प्लेन बडा है लग रहा है इसने पूरा नाम का कोड है, पता करिए और इस दिशा बदलाव की क्या वजह है? उसकी प्लेन में घोषणा करवाई है । जरूर ऍम पायलट जल्दी घोषणा करेंगे । एयर होस्टेस जिसका नाम है ना था । तेजी से आगे बढते हुए बिजनेस क्लास पहुंची फिर उसे पार करते हुए कॉकपिट के दरवाजे पर पहुंची । मुख खडे एक स्टीवर्ड और एयर होस्टेस से मुखातिब हुई । वो दोनों परेशान से नजर आ रहे थे । क्या हुआ प्लेन निदेशक बदली टीना ने पूछा अच्छा हम भी यही पता करने की कोशिश कर रहे हैं । दूसरी एयर होस्टेस बोली तो क्या कर रहे ऍम अंदर से कोई जवाब मिले तो ना कहते हुए स्टीवर्ड ने कॉकपिट के बाहर लगे टचपैड का पास को डाला पर दरवाजा फिर भी नहीं खुला । सेना ने दरवाजा धकेलने की कोशिश की । लगता है कोई टेक्निकल फॉल्ट है, दरवाजे में हूँ हूँ । दूसरी एयर होस्टेस सहमे हुए स्वर में बोली उसका चेहरा गर्मी सफेद पड गया था । बिना दरवाजे पर नौ करने लगी पर अंदर से कोई प्रतिक्रिया हासिल नहीं हुई । कहीं दोनों ही पायलट को तो कुछ नहीं हो गया । स्टीवर्ड बोला काम दूसरी फॅमिली दोनों पायलट्स को एक साथ कोई चांस नहीं । क्यों नहीं ऐसा पहले तो हो चुका है । तो मैं वो सिपरस से ग्रीस वाली फ्लाइट के बारे में नहीं पता । उसने नाम से रहना है । तभी उस फ्लाइट में कैबिन प्रेशर सिस्टम गलती से मैनुअल पर रह गया था और प्लेन हवा में उठने के बाद अंदर प्रेशर गिरता चला गया और प्लेन में दोनों पायलट की मौत हो गई । ऊॅट फिर क्या हुआ? फिर क्या सब कुछ होने के बाद भी किसी को शायद नहीं सुलझा की प्रॉब्लम कहाँ है? अंत में एक अटेंडेंट ने कॉकपिट में आकर प्लेन संभालने की कोशिश की, पर फॅस के चेहरे पर हाहाकारी भाव थी । प्लेन पहाडों में क्रैश हो गया । सब मारे गए । तीस दिन बोली जवाब नहीं हम शोर दरवाजे में कुछ प्रॉब्लम है । इसे फिर से चाय करूँ । अरे कितनी बार स्टीवर्ड ने नंबर पाँच क्या पर नतीजा सिफर निकला । उसने दरवाजे को खटखटाकर गहरी सांस ली । जरूर कैप्टन विक्रम या अजय में से किसी एक को कुछ हुआ है । हिना चिंतित स्वर में बोली तो वो अकेले क्या कर लेंगे? निर्वाचन खोलना चाहिए । स्टीवर्ट बोला तीन की दिशा बदलना फिर भी जस्टिफाई नहीं होता । दूसरी एयर होस्टेस बोली बिना चिंतित मुद्रा में कॉकपिट के दरवाजे को देखती रह गई ।

Chapter 12

वर्तमान समय नहीं । दिल्ली शाम ढल रही थी । अमर बस में पीछे से तीसरी सीट पर खिडकी के पास बैठा था । अमर अपनी छोडी हथेली पर टिकाई । वो बाहर देखते हुए खयालों के भवन में फंसा हुआ था । बस तेजी से शहर से बाहर निकलने के लिए अग्रसर थी । नौकरी फिजूल, देशभक्ति, फिजूल और यारी दोस्ती । फिर तो किस पर शक करें और किस पर यकीन? क्या ये दिन देखने के लिए सीक्रेट सर्विस जॉन की थी? ये जिल्लत तो नहीं सही जाएगी कि कोई क्रिमिनल की तरह पूछताछ करें । इंटरनेशनल कोर्ट में पेशी के लिए भेजते हैं । अमर ने फोन की तरफ हाथ बढाया । उसे वो पहले ही एयरप्लेन मोड पर डाल चुका था । उसने वो उसके अच्छा निकाला । सौम्या नहीं की की गर्लफ्रेंड आखिरी सहारा आखरिया पता नहीं कहाँ मिलेगा । स्कैच से किसी को ढूंढना मुश्किल है पर असंभव नहीं । खासकर की अगर वह कोई भगोडा मुजरिम ना हो । असल में वह खोदे भगौडा बन चुका था । संभावित है कि क्रिमिनल डेटाबेस को एक्सेस करने के जरिए उसे अभी तक हासिल थे । अब उन का प्रयोग करने में उसे मुश्किलें आनी थी । फिर भी कहीं न कहीं से जुगाड करना बडी बात नहीं होगी । पर वह तभी कारगर साबित होगा । जबकि सौम्या मुझे अगर वह काम लडकी हुई, जिसकी संभावना ज्यादा लग रही है तो क्रिमिनल डेटाबेस में उसकी कोई इंफॉर्मेशन उपलब्ध नहीं होगी । इंटरनेट पर तो वह से कल से ही सर्च कर रहा था और जैसा की उम्मीद ही नतीजा सिफर ही था । फिलहाल शिमला जाना उसे सही फैसला लगा । लडकी हिमाचल की थी तो उसके वही मौजूद होने के आसार ज्यादा थे और न ही हूँ तो उससे संबंधित कुछ बातें तो पता चलेंगे । जैसा कि मनोज ने कहा था कि नहीं कि उससे मिलने हिमाचल जाया करता था । इसका मतलब लडकी खुद उससे मिलने कहीं बाहर नहीं निकलती नहीं । फिर जब दो तीन साल तक नहीं सोहनगढ माइनस में रह रहा था तो वैसे ही उनका आपस में मिलना जुलना कभी नहीं हो पाया होगा, पर नहीं कि कभी तो उसे कॉन्टैक्ट करता होगा । माइनस में इंटरनेट था नेगी कि इंटरनेट एक्टिविटी से काफी कुछ पता चल सकता है, पर इन सब कामों के लिए रिसोर्सिस चाहिए थे । अमर ने फोन जेब में डाला और फिर कुर्सी रिलेक्स करके आंखें मूंद ली । जावेद और जहाँ इस वक्त अपने होटल में बैठे चीफ के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल पर थे, मुझे डर था यही होने वाला है, अब है की आवाज आएगी । जावेद बोला, सर, हम सब जानते हैं कि जो अमर ने सोहनगढ माइनस में क्या वो एकदम जायज था? उसकी जगह कोई और होता चाहे पोलिसी, आर्मी या हम में से कोई और होता तो भी यही करता । अगर आपके देश पर कोई न्यूक्लियर मिसाइल गिराने जा रहा होगा तो उसे रोकने के लिए मारना पडे तो ये कोई जुर्म नहीं । हम जानते हैं अभी कुछ उत्तेजित स्वर में बोला अमर ने जो किया उसमें हमें भी रत्तीभर आपत्ती नहीं । पर हमारे सामने एक सिस्टम है । हमें साबित करना होगा कि वो इंटरपोल का एजेंट आतंकवादी धारणाएँ रखता था । अगर उसकी जगह मरने, उस वक्त खाली पर फायर किया होता तो आज कोई सवाल पूछने वाला नहीं होता । पर वो एक ब्रिटिश सिटीजन था । एक इंटरपोल एजेंट था, धीरज नहीं की । गुप्त रूप से आतंकवादी था । ये किस को पता है, पता भी है तो सबूत किसके पास है सर सबूत मिल जाएंगे । इन्वेस्टिगेशन चल रही है तो थोडा और जोर शोर से धीरज नेगी के बैग्राउंड पर काम करेंगे तो पता चल जाएगा । हम भी यही चाहते हैं तो मैं क्या लगता है । हमारी इच्छा है कि हम अपने एजेंट को इंटरनेशनल कोर्ट को सौंप देते हैं । प्रोटोकॉल के तहत जिसके खिलाफ इन्वेस्टिगेशन चल रही है उसको आॅन करना पडता है । ये हम कोई और तरीका अपना लेते उसे हाउस अरेस्ट वगैरा जैसा कोई और इंतजाम कर लेते हैं । पर उसे देखो कितना अनप्रोफेशनल बिहेवियर है किसी मुस्लिम की तरह वहाँ क्या? इस बार जॉन बोला सर, उसके ऊपर क्या बीत रही है, ये भी समझने वाली बात है । इस वक्त उसका इमोशनल स्टेटस बहुत सेंसिटिव चल रहा है और स्टेशन में वो रिंकी के बहुत करीब आ गया था । उसे अपना सोलमेट मानने लगा था । उसकी मौत के बाद उसका क्या हाल था? मैंने और जावेद नहीं देखा था । मुझे पता है जॉन जितना अच्छे से तुम दोनों अमर को समझते हो उतना ना सही पर काफी कुछ । मैं भी अपने एजेंटों के बारे में समझ रखता हूँ । देश के खिलाफ बहुत बडी साजिश चल रही है और बहुतों की जाने गए हैं । इस वक्त हम जैसे लोगों को ही मजबूत रहना होता है । मिशन के बाद अमर किस हाल में था वो हम समझते हैं इसलिए उसे छुट्टी दे रखी थी ताकि वो अपने पर्सनल प्रॉब्लम से उभर सकें । उसे साइड फॅमिली दिलवाने की कोशिश की थी । ऍम हो तो उसकी जिसके कारण कामयाब हो सके । मुझे लगता है वो इस वक्त सही सोचने की दिशा में नहीं, कुछ टाइम अकेला रहेगा फिर वापस आ जाएगा । जावेद बोला हम ये सब अंदाजा नहीं लगा सकते हैं । अमर भले ही इमोशनली कभी कबार बहत जाता है, पर वह हेड स्ट्रोंग है । अगर उसने भागने का फैसला किया है तो कुछ सोचा होगा । शायद अपने ऊपर लगे इल्जाम हटाने के लिए निकला होगा और ये उस की बेवकूफी है क्योंकि वो अकेला है, ये काम नहीं कर सकता । जो मदद हम लोग कर सकते हैं वो उसे कहाँ मिलेगी और हम तो इन्वेस्टिगेशन किसी भी सूरत में करने वाले हैं । तो फिर क्यों ना फटाफट नेगी के बारे में कुछ सबूत निकले जाएँ ताकि अमर को सीबीआई, इंटरनेशनल कोर्ट या कहीं भी भेजने की जरूरत ना पडे । जॉन ने कहा, अब रात हो रहा तो सब कुछ हो नहीं सकता हूँ । तुम लोग भी प्लेन हाईजैकिंग केस में लगे हो जो ज्यादा महत्वपूर्ण है । जावेद बोला कोई बात नहीं सर, दोनों काम साथ में भी हो सकते हैं और जैसा आपने बताया नहीं कि की पोस्टिंग सीबीआई ऑफिस में ही थी तो इन्वेस्टिगेशन तो वहीं से शुरू होनी चाहिए । यानी तो हम सीबीआई में ही इन्वेस्टिगेट करोगे जी सर, अभी हमें उसके खिलाफ सबूत निकालने के लिए उसके पास को इनवेस्टिगेट करना है तो शुरुआत वहीं से करनी होगी । सीबीआई में उसका ऑफिस और वह यहाँ रुका था । अधिक ठीक है, मैं राजनीति तुमसे बात करूंगा । इधर सीबीआई सरकार को एक्शन के रूप में ये दिखाना चाह रही है कि अमर को पूछताछ के लिए अरेस्ट किया गया है और साथ में इन्वेस्टिगेशन चल रही है । अब उसके गायब होने से हमारे ऊपर सवाल उठेंगे और अगर हम ये बताएंगे कि अमर इस तरह से भाग गया तो फिर उसके ऊपर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं और उन हालातों में हम लोग भी उसकी मदद नहीं कर पाएंगे । मेरा तो यही सजेशन है कि सीबीआई से कुछ दिन की मोहलत ली जाए । ये कहकर कीअमर अभी जिन असाइनमेंट्स पर काम कर रहा है उनको फ्रैंड ओवर देने में टाइम लगेगा । इसलिए कुछ समय बायन कर लिया जाए । ये सब बातें कौन समझेगा? मिनिस्ट्री तक जब ये बात पहुंचेगी तो वह सीधे बोल देंगे । उसके सारे काम किसी और को तुरंत और से भेजो । पर सर हमें तो यही पहलू रख कर कोशिश करनी होगी । कुछ क्षण शांति के बाद अब है बोला शायद इसके अलावा और कोई चारा नहीं है । पर फिर हमारा एक और काम बढ जाता है । अमर को ढूंढकर वापस लाना क्योंकि वो क्या करने निकला है और कितने समय में वापस आएगा? हमें बिल्कुल नहीं पता । अब उसे ढूंढने के टॉस पर किसको लगाया जाए । अब मैंने कहा और उसके बाद सन्नाटा छा गया । वाकई इस परिस्थिति में इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं था । फिर अचानक अब है । खुशमिजाज स्वर में बोला तुम दोनों से बेहतर उसे कोई और कन्वेंस नहीं कर सकता सर, ये काम मैं कर सकता हूँ । जॉन बोला तो मुझे कन्वेंस जरूर कर सकते हो और मैं नहीं चाहता उसे ढूंढने और पकडकर लाने के चक्कर में तुम दोनों के बीच की दोस्ती खराब हो जाएगा । साथ ही अब प्लेन हाईजैकिंग के साथ तो हम दोनों ने की के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन करोगे इसलिए ये मुमकिन नहीं होगा । कुछ पल और शांति रही । फिर अभय बोला मैं सोच रहा हूँ किसी को उस पर लगाने के लिए और जब जरूरत पडे तो तो मुझे रिमोट लिया टेस्ट करना और ऍम जॉन ने कहा ठीक हैं । फिर मैं कोशिश करता हूँ सीबीआई से कुछ समय लेने के लिए और साथ ही नेगी के बारे में पूछताछ के लिए समय देने के लिए ऍम बाइक सर जॉन और जावेद ने संयुक्त स्वर में कहा ।

Chapter 13

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश रात तक अमर शिमला पहुंच चुका था । अंतिम पडाव पर बस के रोकने के बाद सैलानी नीचे उतरने लगे । अमर भी अपनी सीट से उठा और चल दिया सामान के नाम पर । उसके पास सिर्फ एक हैंडबैग ही था । वो बस से बाहर आया । मौसम ठंडा था । अगस्त के महीने में बहुत ज्यादा तो नहीं और फिर भी हिल स्टेशन होने के कारण ठंड तो थी । बस स्टॉप से बाहर निकलना भी नहीं हुआ था कि होटल एजेंट ने जैसे उस पर हमला कर दिया । एक एजेंट से होटल के कमरे के दम पर मूलभाव करते हुए अमर को खयाल आया । अभी डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड प्रयोग करने पर भी उसे ट्रेस किया जा सकता है । उसने अपने बटुआ में चेक किया । उसके पास करीब पांच हजार रुपये कैसा था । उसे लगा उसने गलती की । उसे दिल्ली से ही एक अच्छा खासा कैश निकाल कर चलना चाहिए था । उसने फिर इस बारे में ज्यादा सोचने की फिलहाल जरूरत नहीं समझी और एक एजेंट के साथ हो लिया । जो से सस्ता रूम दिलाने का वादा कर रहा था । उसे एक सस्ते कमरे की ही तलाश थी । कोई सैर सपाटे पर तो निकला नहीं था । ऐसे मौके पर अपनी कार की बहुत याद आ रही थी । देशभर में दूर दूर तक काम के सिलसिले में अक्सर वो अपनी कार ले जाना पसंद करता था । फिर चाहे जॉन की कंपनी हो या अकेले । हालांकि उसे पता था प्रस्तुत हालातों में कार साथ होना उसके लिए मुसीबत बन सकता था । वो सफर से थका हुआ था । होटल में चेक इन करके उसका थोडा बहुत हल्का खाना खाकर सोने का इरादा था । एजेंट के पीछे चलते चलते वो सडक पर आ गया । एजेंट ने उसे अपनी बाइक के पीछे बैठा लिया और चल दिया । शिमला में अधिकतर नौजवान दंपत्ति या फिर फैमिली वाले दिखाई दे रहे थे । कई नवविवाहित जोडे भी उन में शुमार थी । अगस्त के महीने में भी अच्छी खासी चहल पहल थी । आखिर शिमला उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक जो था । अमर एजेंट के बताए होटल में पहुंचा तो वहां अपनी एक नकली आइडी से उसने चेक इन किया और खाने का ऑर्डर देकर सीधे कमरे में पहुंच गया । बाथरूम जाकर फ्रेश होने के बाद वह आराम से बैठ पर लेट गया । उसका दिमाग रेस के घोडे की तरह दौडने लगा था । आखिर शुरुआत कहाँ से हूँ? अभी तो ये भी नहीं पता कि फिलहाल नेगी गलफ्रेंड यानी सौम्या हाँ शिमला तो क्या हिमाचल में भी थी कि नहीं । फिर उसे खयाल आया कि इस बात पर तो पहले भी विचार कर चुका था । कहीं से तो शुरूआत करनी है । पर अब शुरुआत किस तरह से हो? लडकी का इसके अच्छी एक जरिया था और उसको इस्तेमाल करने के लिए किसी ना किसी कि मदद तो जरूर लगेंगे तो खाना गया । उसने जल्दी से उसे निपटाया । फिर कमरे से जुडी बालकनी में आकर रात के अंधेरे में देवदार के पेडों का दीदार करते हुए उसने एक सिगरेट सुलगा ली । ये काम तो कोई पुलिस वाला भी कर सकता है और अपनी कंपनी में काफी जान पहचान भी है । पर ध्यान रखना होगा कि किसी ऐसे पुलिस वाले को कंटेंट न करूँ जिसके द्वारा सीक्रेट सर्विस तक खबर पहुंचा । कुछ देर सोचने के बाद उसे एक नाम ध्यान में आ गया । राजस्थान में फॉरेंसिक एक्सपर्ट था जय पालीवाल, जिसके साथ एक पुराने केस में उसकी ट्यूनिंग अच्छी जमीन थी । पालीवाल काम में तो अच्छा था ही, काम निकलवाने में भी माहिर था । उसने अमर कि आउट ऑफ वे जाकर काफी मदद की थी । वही इस काम के लिए सही रहेगा । पर अगर लडकी क्रिमिनल बैग्राउंड की नहीं हुई और क्या किया जाएगा वो सोच में डूब गया । उसने खत्म होती सिगरेट को अंदर आकर ऐश ट्रे में बुझाया और फिर लेट गया । कुछ ही पल में नींद ने उसे अपनी आगोश में ले लिया । वह सुबह जल्दी ही उठ गया और टहलता हुआ पोर्टल के बाहर निकल आया और इस चाय की दुकान पर बैठकर अखबार पढते हुए चाय पीने लगा । इस वक्त वो हिमाचल की राजधानी में था और उसे एक लडकी की तलाश थी जिसका उसके पास सिर्फ स्केच मौजूद था । उसका नाम जरूर मालूम था और उसके अलावा कोई और जानकारी नहीं थी । अमर ने सौम्या नाम से हिमाचल में फेसबुक और इंटरनेट पर लडकियां पहले ही तलाश की थी और ये बोझ में सो ढूंढने जैसा काम था । उसने कई लडकियों के प्रोफाइल देखें । कईयों पर कोई फोटो ही नहीं था । ये किसी सिलेब्रिटी का फोटो लगा हुआ था । उसे हंसी आ गई थी । इस तरह तो असली सौम्या का प्रोफाइल सामने होते हुए भी वह से नहीं पहचान पाएगा और दूसरी संभावना ये भी हो सकती है कि उसने अपना प्रोफाइल डिलीट कर दिया हूँ । क्या जय पालीवाल से स्क्रैच धुलवाना काम आएगा? कोशिश करने में कोई हर्ज तो नहीं और उसमें रिस्क भी काम था । क्योंकि जय पालीवाल तक मेरे भागने की खबर पहुंचना मुमकिन नहीं था क्योंकि मैं सीक्रेट सर्विस नहीं । इसलिए मेरे बारे में ये खबर मीडिया में आसानी से नहीं आने वाले हैं । ये सोचते हुए उसने वहाँ एक लैंड लाइन फोन से जय का नंबर लगाया और स्कैच की लडकी के बारे में पता करने का आग्रह किया । फिर उसे अपने ताजा बनाए ईमेल द्वारा स्क्रैच भेज दिया । हालांकि उम्मीद कम थी पर कोशिश करने में क्या जाता था । लडकी क्रिमिनल ना सही अगर गुमशुदा भी हुई तो भी पता चल सकता था । चाय पीने के बाद अमर होटल में वापस जाने की बजाय शहर में घूमने लगा । ठंड में उसे सुस्ती महसूस हो रही थी, जिसे भागने के लिए और अपने दिमाग को निरंतर दौडाते रहने के लिए उसे घूमते रहना बेहतर लग रहा था । ठंड अच्छी खासी थी । उसने जैकेट कीजिए, ऊपर तक बंद कर ली और हाथ जेबों में डालकर तेजी से चलने लगा । सडकों पर लोग बात बेहद कम दिख रहे थे । यकीनन सैलानी अभी भी अपने अपने होटलों में बिस्तरों की आगोश में थे । अमर के मन में अनेकों विचार तेज नदी के प्रवाह की तरह बहते चले जा रहे थे तो नेगी को याद कर रहा था । उसके मन में ये सवाल कौन रहा था कि क्या वाकई उसने नेगी को जान से मारकर सही कदम उठाया था । मैं उसके पैर हाथ पर भी फायर कर सकता था । उसे जान से मारने की जगह इतना घायल कर सकता था की उसके कदम रूप चाहते हैं । वो कोई बुरा इंसान नहीं था । वो अपनी जान पर खेलकर दो साल से माइंस में रह रहा था और खलीली और उसके प्लान के खिलाफ ही काम कर रहा था । हालांकि खलीली से बडा मास्टरमाइंड तो वो था जो वक्त रहते पासा पलटने की फिराक में था । पर एक बात समझ में नहीं आ रही की अगर नहीं की भी इस बात से सहमत था कि भारत के अंदर न्यूक्लियर हमले हूँ तो फिर उसने खलीली को रोका ही क्या शुरू से ही उसका यही प्लान था या फिर उसी वक्त उसे यह खयाल आया नहीं । सब कुछ पहले से प्लान था क्योंकि ये बात साहनी भी जानता था और वो प्लान का भागीदार था नहीं की की कहानी सुनकर लगा था । उसने लाइफ में काफी कुछ झेला था । उसका बचपन आसान नहीं था और उस नाजुक उम्र में हुए कुछ आज से मन को इस तरह प्रभावित करते हैं कि इंसान की सोच समझ कुछ अलग ही हो जाती है । कुछ ऐसा ही नेगी के साथ हुआ था । उसके पिता की मौत का उसके मनोभाव पर बेहद गहरा प्रभाव हुआ था और ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है । वो उसे रोक सकता था, उसको बाद में समझाया जा सकता था । सच में अगर देखा जाए तो उसे मारने के बाद से मेरे साथ कुछ भी अच्छा नहीं हुआ । उसके तुरंत बाद ही मैंने रिंकी को खो दिया और अब तो साला करियर दांव पर लगा हुआ है । शायद मुझे मेरे कर्मों का फल मिल रहा है । शायद जो कुछ बुरा मेरे साथ हो रहा है, मैं उसका हकदार सोचते सोचते अमर दौडने लगा । उसका मन उद्वेलित था तो अपने मन में कौंधते । उन विचारों को अपने शरीर के विकसित जैसे पछाड देना चाहता था । कुछ देर लगातार दौडने के बाद उसकी सांसे फूलने लगी और वह रुककर तेज तेज सांस लेने लगा । नहीं मैंने जो किया सही किया । पसवक में देश का आम नागरिक नहीं । एक सैनिक जिसे हर हालत में देश की रक्षा करनी थी, भले ही किसी की भी बलि चढ जाते हैं, सैनिक दुश्मन पर गोली चलाने से पहले ये नहीं सोचता कि उसके दुश्मन का भी परिवार हैं । उसकी भी एक जिंदगी हैं । उसकी ड्यूटी होती है कि अपने देश के दुश्मन को खत्म करें । दुश्मन को मारना पाप नहीं होता । अमर शायद खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था, पर उसे अपने मन को दिलासा देना मुश्किल हो रहा था । आपने उद्वेलित मान और तेज सांसों को नियंत्रित करते हुए वो सडक किनारे बेंच पर बैठ गया । कुछ देर वहाँ सुस्ताने के बाद वो उठा और वापस होटल की तरफ बढ गया । होटल पहुंचकर कुछ देर टीवी देखने के उपरांत दोपहर उसने जय पालीवाल को फोन किया । उसने तुरंत फोन का जवाब दिया अम् रवाई कुछ पता चला । आप पता चला है एक बात बताओ आपकी जानने वाले तो नहीं थी । क्यों? क्या हुआ जो खबर में लिए वो अच्छी नहीं है और मुझे लगता प्रोफेशनली ही से ढूंढ रहे होंगे । तुम्हारा सोचना सही है । जाने वाली बात होती तो मैं उसके बारे में पूरी तरह से जीरो नहीं होता है । अब बताओ क्या पता चला ये बात भी ठीक है । दरअसल यह लडकी पहले गुमशुदा थी और फिर उसकी लाश पाई गई थी । अमर की मुझसे अफसोस भरा स्वर निकला हुआ क्या था? लडकी ने नदी में कूदकर सुसाइड कर ली थी । अच्छा कब की बात है । अभी पिछले महीने की अमर निशब्द हो गया । यकीनन ये नेगी की गर्लफ्रेंड ही थी जिसने उसकी मौत की खबर मिलने के बाद खुदकुशी कर ली । किस शहर की रहने वाली थी और कहाँ हुआ? यहाँ मंडी की रहने वाली थी और मंडी में ही है । ऐसा हुआ था आगे बढने का जो एक सहारा था वो भी गया । अब क्या किया जाए जाकर देखना होगा डूबते को तिनके का सहारा ही काफी है । शायद मंडी जाकर कुछ पता चल सके । क्या हुआ भाई कुछ और आदेश मुझे उसका ड्रेस वगैरह बताऊँ । जय ने बताया जिससे अमर ने अपने फोन में लिख लिया । फिर दुआ सलाम के साथ कौन समाप्त की । फोन रख कर वह कुछ पल होटल के काउंटर पर ही ढाका सा खडा रह गया । मेरी वजह से सिर्फ ही नहीं बल्कि बेगुनाह की मौत भी हो गई । अगर नहीं की आज जिंदा होता भले ही जेल में होता है तो वो भी जिंदा होती है । क्योंकि जेल जाने के बाद भी उसके वापस आने की आस होती कुछ नहीं तो उसे मुस्लिम जानकर छोड देती । भुला देती भी जिंदा होती ऍम काउंटर बॉय की आवाज ने उसका ध्यान आकर्षित किया । हाँ, कुछ सेवा की जाए, बिल बना दो, चेकआउट करना है । उसने अमर के इस अप्रत्याशित निर्णय से चौक कर उसे देखा । पर अमर का ध्यान कहीं और था । वो किसी गहरी उधेडबुन में खोया हुआ था ।

Chapter 14

तेईस मार्च दो हजार फ्लाइट तीन सौ एक अरब सागर का वायुमंडल फ्लाइट को अपने निर्धारित पद से मुझे हुए एक घंटा हो गया था । प्लेन के पैसेंजर्स परेशान होने लगी थी । कई लोग अपनी सीटों से खडे हो गए थे और कुछ अब कॉपरेट के पास पहुंच गए थे । उन्हें अभी अज्ञात हो गया था कि कॉकपिट के अंदर कोई नहीं जा पा रहा । फ्लाइट अटेंडेंट्स अब उन्हें समझाने बुझाने में असफल हो रहे थे । जब खुद ही इन परिस्थितियों से आशक्त थे तो दूसरों को कब तक समझाते हैं । फिर भी वह प्रयास कर रहे थे सर, कभी कभी ऐसा होता है । एयर, करंट, चक्रवात जैसी चीजों से प्लेन को अपनी दिशा बदलनी पडती है । आप लोग तीस अपनी सीट पर बैठ जाएगा । कुछ ही देर में प्लेन अपनी सही दिशा में पडेगा । अब देखेगा बिना बोले जा रही थी ऍम वो सब ही जाएगा । वो बिजनेसमैन बोला जिसने प्लेन के मोडने पर सबसे पहले आशंका जताई थी । पर पायलट कोई अनाउंसमेंट क्यों नहीं कर रहे हैं? आप लोगों से बात क्यों नहीं कर रहे? इतनी सी बात तो फ्लाइट में तुरंत बता दी जाती है । सर! कभी कभी कम्युनिकेशन फेलियर हो जाता है । अरे तो आप कॉकपिट के अंदर जाकर क्यों नहीं पूछते? दरवाजा नहीं खुल रहा है । कुछ प्रॉब्लम है सर । दूसरी एयर होस्टेस ने नर्वस भाव से कहा ये तो हद हो गयी । वो एक सहयात्री की तरफ देखते हुए बोला सारी प्रॉब्लम्स एक साथ हो रही है और ऐसा कहीं होता है । एक दूसरा गंजा आदमी अपनी पतली आवाज में बोलने लगा मैं नाम हमें जानना है, चल कराया है । कहीं प्लेन हाईजैक तो नहीं किया जा रहा है । बस उसके मुंह से हाईजैक शब्द निकला नहीं कि लोगों में दहशत की लहर दौड गई । हाईजेक ओ माई गॉड बिजनेस क्लास में एक अधेड विदेशी महिला, जो अभी तक इत्मीनान से बैठी मैग्जीन पड रही थी, उसके मुंह से चित्कार निकली । पल भर में हाईजैक शब्द जंगल की आपकी तरह प्लेन के बिजनेस क्लास इकनॉमिक क्लास की अंतिम पंक्ति तक पहुंच गया । यात्री जो अभी तक सिर्फ हैरान परेशान थे, अब सहम गए थे । आप कुछ भी क्यों कह रहे हैं बिना बोलिए प्लीज इस तरह बाकी पैसेंजर्स को डरा । ये नहीं रिक्वेस्ट यू सर, अभी कमाल करते हैं । तीन हाईजैक हो रहा होता तो कोई हाईजैकर दिखाई तो देते । स्टीवर्ट ने कहा अमेरिका पता ये प्लान किसका है? पायलट का भी हो सकता है । अरे भाई साहब, मुझे तो लगता है ये पूरा स्टाफ मिला हुआ है । गंजा फिर से अपनी पतली आवाज में बोला । तभी एक वरिष्ठ आदमी उठा और सभी को शांत रहने का इशारा करते हुए बोला प्लीज आप लोग शांत हो जाइए, ऐसा कभी नहीं होता है । आपने कभी देखा है कि एयर प्लेन का स्टाफ प्लेन हाईजैक करें और सर जी कुछ पता भी तो लगे । ऐसा कैसे? कोई कुछ बता नहीं पा रहा है । लेना जाने का थोडा जा रहा है । बिजनेस मैन बोला इधर सरीना भी अन्य यात्रियों की तरह खौफ ज्यादा थी । मोहसिन और फलक सामने लगी स्क्रीन में कार्टून वीडियो देखते हुए हस रहे थे चुका हूँ सरिना झुंझलाते हुए जी जी क्यों रही हो? मोहसीन बोला कुछ नहीं हुआ है लेकिन हवा में उडने के लिए ही तो बनाया है । कभी तो लेफ्ट राइट होगा पर इतना शोर शराबा की हो रहा है । कोई कह रहा है कि प्लेन हाईजैक हो गया । वो ऐसा और कोई आए जाकर तो नहीं दिख रहा । याला शहर रखना वहाँ के बंद कर बढ बनाने लगे । आप ने कहा कि परेशान हो रही हैं । मैं देख कर आता हूँ । वो उठने की कोशिश करते हुए बोला चुपचाप बैठ रही है । सरीना ने उसे डांटा । कॉकपिट के बाहर का माहौल बिगडता जा रहा था । कई पैसेंजर्स उठ खडे हुए थे । इकनॉमी सेक्शन से भी कुछ लोग उस तरफ आ गए थे । प्लेन का स्टाफ अब उनको संयमित रख पाने में असफल हो रहा था । स्टीवन जिसका नाम रोहित था, उसके पसीने छूटने लगे थे कि तभी वो चौका कॉकपिट के दरवाजे के पास लगे । स्पीकर से आवाज आई, रोहित उसकी तरफ आकर्षित हुआ । साफ साफ ऍम कैप्टन रोहित डिसाइड बोलिए, क्या हो गया था हम कब से दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे हैं? मैं जब भी वह कोशिश कर रहे हैं और कुछ भी फंक्शन काम नहीं कर रहा है । दरअसल ऐसा लग रहा है कि पूरा प्लेन किसी और के कंट्रोल में है । ये ये आप क्या बोल ऍम, ऐसा कैसे हो सकता है? क्या पैर कंट्रोलर से भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं? कुछ भी काम नहीं कर रहा तुम प्लीज और अचानक विक्रम की आवाज आनी बंद हो गई । स्पीकर पर सन्नाटा छा गया हूँ । ऍम रोहित स्पीकर पर हाथ मारते हुए ठीक है । विक्रम की आवाज सारे स्टार्स के साथ कुछ पैसेंजर्स को भी सुनाई दी थी । ये सब साजिश है । गंजा व्यक्ति बोला ऐसा कैसे हो सकता है? सुरज फॅमिली कोई टेक्निकल प्रॉब्लम है । टीना बोली हम शोर कुछ ही देर में सब कंट्रोल में होगा । अरे मैडम, तभी बिजनेस क्लास का एक पैसेंजर बोला ऍम सब उसकी तरफ बडे । वो अपनी सीट पर आराम से बैठा हुआ था । उसने पोलो शर्ट पहनी हुई थी, जो उसके कसरती बदन पर खूब फब रही थी । उसके गेहूँ चेहरे पर फ्रेंचकट दाढी थी और उसकी आंखों पर काली फ्रेम का चश्मा था । वो बोला ये इलेक्ट्रॉनिक हाईजैकिंग हो सकती है । किसी ने प्लेन के सॉफ्टवेयर को हैक कर लिया है सर, प्लीज जैनी नामक दूसरी एयर होस्टेस बोली इस तरह वही ना फैलाएं । ऐसा पॉसिबल नहीं है । बिल्कुल पहुंॅच । मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक हूँ । ऍफ आॅल राइट । विदेशी महिला बोले आॅड सबसे ज्यादा बोलने वाला बिजनेसमैन जिसका नाम अरुण खुराना था, वो सभी बिजनेस क्लास वालों पर बारी बारी से नजर डालने लगा । फिर वो आगे बढकर उस लडके के पास पहुंचा जो खिडकी वाली सीट पर बैठा निरंतर अपने लेपटॉप पर लगा हुआ था । उसमें सिर पर अपनी जैकेट का हो डाला हुआ था । एक क्योंकि उसकी सीट के पास आकर बोला क्या कर रहे हो? लडके के हाथ की बोर्ड पर रुक गए । उसने चौंककर उसकी तरफ देखा । लडकी की दाढी मुझे बढी हुई थी । उसकी आंखों में थकान साफ दिखाई दे रही थी । फिर तुम कर क्या रहे हो? अरुण ने फिर से पूछा काम कर रहा हूँ । डाॅ । उसने हाथ फैलाते हुए पूछा प्लेन में इतनी अफरा तफरी मची हुई है । प्लेन शायद हाईजैक हो गया है । न्यू तो क्या मैं भी खडा होकर चीखने चिल्लाने लगेंगे । नॉट नेसेसरी पर कोई ऐसे माहौल में काम कैसे कर सकता है? तब तक वहाँ वो सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक भी पहुंचा । उसका नाम अब्दुल था । ऍम क्या मैं तुम्हारा लेपटॉप देख सकता हूँ । उसने अपना चश्मा एडजस्ट करते हुए पूछा ऍम, मेरी कंपनी का लेपटॉप है और मैं कॉन्फिडेंशल कोर्ट पर काम कर रहा हूँ । मैं ऐसे नहीं दिखा सकता हूँ । अरुण बोला ॅ नॉर्मल हालत नहीं, पर नहीं क्यों ऍम बारी बारी चल कीजिए । जरूर देखेंगे । पहले आपको लग रहा मैं यहाँ से बैठकर प्रेम को आइडिया करूँ ऍम यहाँ बिना किसी नेटवर्क के मैं कैसे प्रेम के सिस्टम में घुस सकता हूँ? पॉसिबल है अगर पहले से पूरी प्लानिंग के साथ आया जाए । अब्दुल ने कहा ऍम, मैं अपना लेपटॉप नहीं दिखाऊंगा । अरुण और अब्दुल उसे घुटने लगे । फिर अचानक अब्दुल उस पर झपट पडा । दोनों के बीच लेपटॉप को लेकर छीना झपटी होने लगी । दो और पैसेंजर्स अब्दुल को लेपटॉप छीनने में सहायता करने लगे । फिर वो अब्दुल के हाथों में था । वो उसने गाली दी, फिर निश्चिंत स्वर में बोला देख लो इतना चले को अगर कुछ मिले तो मुझे बताना हो । अब्दुल्ला लेपटॉप को जांचना शुरू कर दिया ।

Chapter 15

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश होटल से चेकआउट कर के अमर बस स्टॉप पहुंचा । वहाँ पर उसे मंडी के लिए बस मिल गई । बस द्वारा वो चार घंटे के अंदर मंडी पहुंच गया । मंडी पहुंचकर उसे ठंड से कुछ राहत महसूस हुई क्योंकि मंडी शिमला की तरह ज्यादा ऊंचाई पर नहीं था । जहाँ शिमला में इस वक्त कडाके की ठंड पड रही थी । मंडी में मौसम खुशनुमा था । सिर्फ स्वेटर में भी अमर का काम चल रहा था । जैकेट की फिलहाल जरूरत नहीं पड रही थी । बस स्टॉप पर उतरने के बाद पहले तो अमर ने बाथरूम में घुसकर अपना हुलिया बदला । काफी दिनों से उसने शिव नहीं की थी तो उसने अपनी गाडी और मुझे बडी ही रहने दी । उसके अलावा कुछ और मेकप करके उसने अपनी शक्ल में काफी बदलाव कर लिया । फिर एक बजट होटल में चेक इन करने के बाद वो शहर में निकला । मंडी शहर में काफी चहल पहल थी जहाँ शिमला ज्यादातर टूरिस्ट की आवाजाही से भरा पडा था । उसके विपरीत मंडी कारोबारी गतिविधियों से ओतप्रोत था । कारोबार की दृष्टि से ये शहर हिमाचल प्रदेश का मुख्य स्थल था । स्वामी हाँ की इन्वेस्टिगेशन करने के बारे में अमर के दिमाग में एक प्लैन था जैसा कि जय पालीवाल से उसे पता चला था कि उसका केस देवली स्थित पुलिस थाने में दर्ज था । वह देवली पुलिस थाने पहुंचा । उसने ड्यूटी ऑफिसर से मिलने की मांग की । वो एक महिला पुलिस थाना था और वहाँ यू अमर को देखकर कुछ महिला पुलिस कांस्टेबल हैरान थी । क्या गाना एक ने अमर से पूछा मैं सीक्रेट सर्विस हूँ । अमर अपना आयकर तेजी से दिखाते हुए बोला, उसे मालूम था सीक्रेट सर्विस नाम सुनते ही पुलिस वालों को अलर्ट हो जाना था । कोई भी उसका आईडी कार्ड ध्यान से देखने की जरूरत नहीं समझता और नहीं वो ऐसा मौका देने वाला था क्योंकि उसने आइकार्ड पर लगे फोटो के विपरीत काफी मेकप क्या हुआ था और अपना असली नाम बताना तो वैसे ही सीक्रेट सर्विस वाले के लिए जरूरी नहीं था । वो थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर सुनीता पुजारी से मिला । ऍम कैसे आना हुआ? वो कुछ नर्वस भाव से बोली । अमर को महसूस हुआ कि उसका किसी सीक्रेट सर्विस वाले से पहली बार पाला पड रहा था । देखिए, मैं सौम्या नाम की एक लडकी की मौत के इन्वेस्टिगेशन के सिलसिले में आया है । सुनीता सोच में पड गई । फिर याद करते हुए बोली कोई जिसने नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली थी था वही अच्छा सर पर वो तो सीधा सादा खुदकुशी का केस था । उसके लिए आप यहाँ पर कुछ बेहद गंभीर मुद्दा जुडा हुआ है उस लडकी से फॅमिली नहीं पर किसी और के तो इसलिए मेरे लिए ये सब पता करना बहुत जरूरी है कि उस लडकी ने खुदकुशी क्योंकि साथ ही उस लडकी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी निकालनी है । ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है । सुनीता के चेहरे पर नर्वस भाव कुछ और बढ गए इस छोटे से थाने में बैठकर आज से पहले उसने शायद ही कभी इतने गंभीर मुद्दे के बारे में सुना था हूँ में आशा करता हूँ की आप मेरी पूरी मदद करेंगे । जी सर बिलकुल करेंगे । जो भी हो सकेगा करेंगे । मैं आपको उसकी फाइल दिखाती हूँ केलकर उसने कांस्टेबल से स्वामी की फाइल मंगाई । मैं कुछ समय के लिए फाइल पढना चाहता हूँ । अमर ने कहा जी जरूर परिसर के लिए चाहिए आपको थैंक्यू इस केस की इन्वेस्टिगेशन आप नहीं की थी बिलकुल सर । ये लडकी कॉलेज के बाद काफी समय से दिल्ली में नौकरी कर रही थी । अभी कुछ दिन पहले ही घर वापस आई थी । परिवार वालों का कहना है कि काफी दुखी थी । नौकरी छोडकर आ गई थी और उसका कारण उसने किसी को नहीं बताया । बस यही कहा कि अब नौकरी अच्छी नहीं लग रही थी । घर वालों ने भी कहा कि ठीक है । लडकी कम नौकरी से भर गया तो अब उस की शादी करा दी जाएगी । हालांकि उन्होंने लडकी पर कोई प्रेशर नहीं डाला था पर फिर इसने खुदकुशी कर ली । यानी खुदकुशी की वजह तो पता ही नहीं चलेगा । जी नहीं पता चलेगा परिवार वालों को तो इससे ज्यादा कुछ नहीं पता था । पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट से भी लडकी के साथ कुछ गलत हुआ हो या फिर वह प्रेग्नेंट रही हो तो वैसे भी कोई जानकारी नहीं पता चली । और अगर लडकी दिल्ली में ही नौकरी कर रही थी वहीं पर रह रही थी तो ये सब जानकारी तो वहीं पर पता चल सकती थी । हूँ जी के है तो आप सही रहे हैं पर इस दिशा में अपने कोई कोशिश क्यों नहीं? वो निरुत्तर हो गई । चलिए कोई बात नहीं वो मैं पता करवा लूँगा । इस रिपोर्ट में क्या लिखा है? ये कहाँ नौकरी करती थी । वो रिपोर्ट में झांकने लगी । कोई बात नहीं मैं देख लूंगा । इस रिपोर्ट की फोटोकॉपी निकलवा दीजिए और उसके पेरेंट्स का एड्रेस मुझे दे दीजिए जी जरूर पुलिस थाने से अमर सौम्या के परिवार वालों से मिलने पहुंचा हूँ । वो एक मध्यम दर्जे का घर था । सौम्या के माता पिता काफी बूढे हो चले थे । कुछ झिझक के साथ उन्होंने अमर का स्वागत किया । आपके परिवार में और कौन कौन है? कुर्सी पर बैठते हुए अमर ने पूछा हम दो है और हमारा बडा बेटा है । वो चेन्नई में काम करता है । अच्छा सौ में से कितना बडा है । चार साल बडा है । अपनी फैमिली के साथ वहीँ सेटल है । अभी तीन दिन पहले ही वापस गया । सौम्या ने जो कुछ किया उस से हम सभी अभी तक शब्द हैं । हमें तो विश्वास नहीं हो रहा है । वो इस तरह हमें छोडकर चली गई । बहुत होनहार लडकी थी । हमारी कम बोल दी थी । पर ऐसा तो हमें कभी नहीं लगा कि उसे कोई बहुत बडी दिक्कत है परिवार में वो आप में से किसके सबसे ज्यादा करी थी । साहब लाडली तो हम सब की थी पर वो बहुत शर्मीली थी । बचपन से ही अपने मन की बातें खुद ताकि सीमित रखती थी । इस बार सौम्या की माँ ने कहा दिल्ली में क्या काम करती थी । उसने कंप्यूटर का कोर्स किया था । उसके बाद से दिल्ली में ये पांच साल से नौकरी कर रही थी । घर आती जाती थी ना आप लोग भी उससे मिलने जाते थे । हम तो बस शुरू में गए थे । बाद में तो वही आती थी । अब इस उम्र में हम दोनों से कहीं ज्यादा आना जाना होता भी नहीं । अमर ने सहमती में सिर हिलाया । उसकी कंपनी का नाम बताइए । उससे संबंधित कोई डॉक्यूमेंट आपके पास हो तो दिखाइए । अपने सारे डॉक्यूमेंट तो वो अपने साथ ही रखती थी । यहाँ उसका कमरा है । पुलिस ने वो चेक किया था, कुछ खास तो नहीं मिला । आप चाहें तो देख सकते हैं । अमर ने सौम्या का कमरा देखा । हमने उसके सामान के साथ ज्यादा छेडखानी नहीं किया । वैसे भी उसका यहाँ पर कोई खास सामान नहीं और वो सामान जो दिल्ली में हाँ उसकी दोस्त जब घर आएगी तो साथ लेकर आएगी । वो मंडी की ही रहने वाली है । उसका नंबर, उसका नाम और नंबर आपके पास हो तो मुझे दे दीजिए । पल्लवी नाम है । उसका हेलो नंबर लिख लो कहकर उन्होंने अपने मोबाइल में नंबर ढूंडा और फिर अमर को बताया । कुछ देर और बात करने के बाद अमर ने उनसे विदा ली और फिर वहाँ से सीधे अपने होटल आ गया । होटल आते आते आठ बज गए थे । रात हो गई थी पर अब वहाँ भी ठंड बढ गई थी । उसने खाने का ऑर्डर दिया और खाना कमरे में ही भेजने का निर्देश दे दिया । कमरे में पहुंचने ही उसने सौम्या की फाइल का अध्ययन शुरू कर दिया । पुलिस के मुताबिक एक सीधा साधा किस था । उस दिन सौम्या सुबह सुबह ही गायब हो गई थी । बिना बताए घर से कहीं निकलना उसकी आदत नहीं थी । फिर चार घंटे बीतने के बाद घर वालों ने पडोसियों से पूछा और फिर किसी ने पुलिस को बताने की सलाह दी । पुलिस ने जब पूछताछ शुरू की तो पता चला वो सुबह अकेले ही ब्यास नदी के किनारे गई थी । नदी के पास किसी ने इस बात की पुष्टि की कि वो लडकी नदी के पास चलती हुई दिखाई दी थी । पुलिस को शक हुआ कि शायद वो नदी में गिर गई है इसलिए नदी में खोजबीन चालू की गई और फिर दो दिन बाद उसकी लाश नदी प्रवाह में काफी दूर एक जगह पत्थरों में अटकी हुई पाई गई । पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के मुताबिक उसके शरीर पर किसी ऐसी चोट का निशान नहीं था जिससे उसके कत्ल होने का शक बनता कुछ छोटे थी जो कि शर्तिया नदी के पत्थरों से लगी थी । उसके अलावा सब कुछ ठीक था । फेफडों में पानी भरने की वजह से मौत हुई थी । यही पोस्टमॉर्टम का निष्कर्ष था । बॉल्कनी में आकर अमर ने सिगरेट सुलगा ली और फिर सोच में डूब गया । इतनी दूर जिसको ढूंढते हुए आया, जिससे उसे नेगी की जानकारी मिलने की उम्मीद थी । वही अभी इस दुनिया में नहीं थी । अब आगे कैसे बढा जाए? फिलहाल उसके पास एक जरिया था, वो भी उस की दोस्त पल्लवी, जिसका नंबर उसे हासिल था । अगर वो उसकी करीबी दोस्त थी तो जाहिर है उसकी पर्सनल लाइफ की जानकारी भी रखती होगी । ये सोच कर अमर नीचे लैंड लाइन फोन इस्तेमाल करने के लिए पहुंचा । पहली बार रिंग जाती रही । किसी ने फोन नहीं उठाया । अनजान नंबर के साथ आजकल ऐसा ही होता है । दूसरी बार जब उसने फोन मिलाया, तब दूसरी तरफ से एक लडकी की आवाज आई हेलो! आप पल्लवी बोल रही है । हाँ जी, आप कौन? मैं एक सीक्रेट सर्विस ऑफिसर बोल रहा हूँ । आपकी दोस्त सौम्या की मौत की इन्वेस्टिगेशन चल रही है । उसी सिलसिले में आपसे बात करनी थी । फोटो बोलिए, मैं क्या मदद कर सकती हूँ । उसके स्वर में कुछ घबराहट उभरी । आप मंडी कब आने वाली है? मैं सोच रहा था । अगर आप इधर आ रही हैं तो बैठकर आराम से बातचीत हो जाएगी । जी, अभी तो कुछ दिन पहले या कर गई हूँ । अब दोबारा तो अगले महीने ही आना होगा । अच्छा कोई बात नहीं । फिलहाल मैं आपसे फोन पर ही बात करके काम चला लूंगा । आप उसकी कंपनी में काम करती हैं । नहीं जी, मैं दूसरी जगह काम करती हूँ । फिर सौ में से दोस्ती कैसे हुई? दोस्ती तो मंडी में ही हुई थी । हम एक ही कॉलेज में थे । दिल्ली में शुरू में हम साथ में रहते थे । फिर मेरी शादी हो गई और मैं उसी सोसाइटी की दूसरी बिल्डिंग में क्लैट में अपने हस्बैंड के साथ शिफ्ट हो गई । अच्छा यानी आपके फैट आस पास ही है । हाँ, फिर तो रोजाना मुलाकात हो जाती होगी । रोज तो नहीं, पर अक्सर तो सौम्या फिलहाल अकेली रहती थी । हाँ, क्योंकि मुझे सौम्या की पर्सनल लाइफ के बारे में जानना है क्योंकि यहाँ पुलिस से जो जानकारी मुझे मिली है उसे उसकी सोसाइटी कोई स्पष्ट वजह समझ में नहीं आई है । जी, ये तो मुझे भी नहीं पता । जहाँ तक मुझे पता है उसकी यहाँ नौकरी ठीक कर चल रही थी । रचाना की उसने नौकरी छोड दी और कहा कि अब घर जा रही है तो मैंने उससे पूछा क्या हुआ तो उसने बस यही कहा कि बस अब मन नहीं लग रहा है । हाँ अगर जाऊंगी अच्छा क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड था हो? चुप हो गई । देखिए मुझे कोई बात नहीं हो पाई है । जवान लडकी ने खुदकुशी की है । इसलिए ये सब चीजें मेरे लिए जाना बहुत जरूरी है । लडकियाँ तो अक्सर अपनी दोस्त है । ये सब बातें शेयर करती हैं । आपको जो पता है मुझे बता दीजिए आपको कोई दिक्कत नहीं होगी । देखिए सौम्या बहुत ही कम बोलती थी । मैं उसकी बचपन से दोस्त जरूर थी पर वो हर चीज मेरे साथ शेयर नहीं करती थी । मेरे ख्याल से उसका बॉयफ्रेंड जरूर था क्योंकि दिल्ली में जब उससे मिलती थी तो उसे अक्सर किसी के फोन या मैसेज आते थे और उसके हावभाव से ये अंदाजा तो मैंने लगा लिया था कि उसका किसी के साथ अफेयर चल रहा है । एक बार वो जरूर बोली थी कि उसका कोई फॅार्म में मैं हमेशा बोलती थी कि वह जरूर तेरा बॉयफ्रेंड है, वहाँ उसका डाल देती थी और साफ मना कर देती थी । आपने फोटो देखा होगा उसका हाँ एक बार दूर से दिख गया था । उसने दिखाया नहीं था उसका तो यही कहना था की उसके ऐसे बहुत से फ्रेंड शायद वो जिस कंपनी में काम करती थी वो उनका क्लाइंट था । इसलिए उसका यही कहना था की प्रोफेशनल टाइप की दोस्ती है तो मैंने भी फिर कभी ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सौम्या का ईमेल आईडी तो आपके पास होगा वो मुझे बता दीजिए । पल्लवी ने बताया अमर नौ से नोट कर लिया और फिर बोला जरूरत पडने पर मैं आपको दोबारा फोन करूँगा जी जरूर । अमर ने फोन काटा और वापस अपने कमरे में आ गया । खाना आ गया था । खाना खाते हुए वह यही सोचने लगा कि सौम्या के ईमेल आईडी और फोन नंबर से जानकारी किस तरह निकलवाई जाएगी । सीक्रेट सर्विस के ऑफिस में बैठ कर ये सब काम करवाना, चुटकियों का खेलता पर एक भगोडे जासूस को ये सारी सुविधाएं कहाँ हासिल होती हैं । खाना खाने के बाद वो कमरे में ही टहलने लगा तभी दरवाजे पर दस्तक हुई । अमर को लगा बेहरा बर्तन लेने और बिल पर साइन लेने के लिए आया होगा । उसने तुरंत दरवाजा खोल दिया । दरवाजा खुलते ही उसने अपने सामने एक नकाबपोश को खडा पाया जिसके हाथों में छोटा सा पिस्टल मौजूद था । नकाबपोश अंदर आ गया । उसका पूरा चेहरा काली नकाब से ढका हुआ था । सिर्फ आंखें चमक रही थीं जिनमें खतरनाक भाव थे । अमर के हाथ सोता ही ऊपर उठ गए और वह पीछे हटता चला गया । अमर नैना का पोष के पीछे झांकर चौंकने का अभिनय किया पर नकाबपोश पर इसका कोई असर नहीं हुआ । उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और फिर अचानक ही पिस्टल चेन में रखा और हाथ फैलाकर कराते की मुद्रा में आगे अमर को आश्चर्य हुआ । इस तरह का अक्सर फिल्मों में ही देखा जाता था । पिस्टल होते हुए भी वो उसे मारने की जगह लडने का मौका दे रहा था । इसका मतलब ये कोई ऐसा व्यक्ति था जो उससे नफरत करता था और मारने से पहले उसकी पिटाई करना चाहता था । या फिर कोई ऐसा था जो उसकी जान लेने का जोखिम नहीं लेना चाहता था । वो जो भी था उसे पहचानता था । ऐसा कौन है जो यहाँ मंडी में मेकप के बावजूद मुझे पहचान गया? अभी अमर सोची रहा था कि नकाबपोश ने तेजी से अमर के ऊपर हाथ घुमाया । अमर ने उसे अपने हाथों से रोक लिया और जवाब में मार्शल आर्ट का रंग दिखाते हुए पैर घुमाया जो नकाबपोश के मुंह पर जाकर लगा और वह पीछे जा गिरा । वो आश्चर्य से उसे देखते हुए उठा । शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि अमर इस तरह से लडने का हुनर भी जानता होगा । क्या बात है भाई मार्शल आर्ट सीखने आए हो गया । देखो ट्रेनिंग देने की फीस लगती है । फ्री में तो ये काम ना इस बार नकाबपोश अमर पर हाथ पैरों से कराते के अंधाधुंध वार करने लगा । अमर कुछ को डिफेंड कर पाया और कुछ उसे झेलने पडे । वाकई नकाबपोश प्रोफेशनल था पर अमर भी । आपने मार्शल आर्ट का कौशल दिखाते हुए उसके साथ जूझ रहा था । जब नकाबपोश को ये अहसास हो गया कि अमर पर काबू पाना मुश्किल है तो उसने फिर से अपनी जेब से पिस्टल निकाली और अमर पर तांती तभी दरवाजे पर जोर जोर से दस तक होने लगी । इसमें कोई आश्चर्य नहीं था कि जिस तरह उन दोनों ने कमरे में उठा पटक मचा रखी थी, उसकी आवाज होटल में बाकी लोगों तक पहुंची न हो । पल भर के लिए नकाबपोश का ध्यान हटा । अमर ने उसका पूरा फायदा उठाते हुए उसके पैरों की तरफ डाइव लगा दी । वो पिस्टल नहीं चला पाया और उन्हें मूड सामने की तरफ किराए पर गिरते ही इस बार वह फुर्ती से उठा और तेजी से बेल करने की तरफ दौड पडा । देखते ही देखते वह बॉलकनी से नीचे कूद गया । अमर ने आश्चर्य से उस तरफ देखा और उठ कर बालकनी में पहुंचा । वो कमरा तीसरी मंजिल पर था । नकाबपोश बालकनी से लटक कर नीचे ग्राउंड फ्लोर पर बने टॉयलेट की छत पर कूद कर और फिर वहाँ से नीचे उतरकर होटल के बाहर पहुंच चुका था । बाहर निकलते ही वह तेजी से भागने लगा । अमर ने नीचे की तरफ देखा पर उसे लगा ऐसा कोई स्टैंड भारी पड सकता है । मैं जाने किस मिट्टी का बना अमर वापस कमरे में आया और उसने दरवाजा खोला । कमरे के बाहर होटल का मैनेजर, एक वेटर, वह दो तीन लोग और थी । सब उससे कुशल मंगल पूछने लगे । अमर ने बताया कि नजाने कौन था जिसमें हमला किया । मैनेजर ने उसे पुलिस को रिपोर्ट करने की सलाह दी पर अमर ने इंकार कर दिया । अमर ने कहा, वह शायद उसका लैपटाप आदि चोरी करने के इरादे से आया था । उसने ये बात नहीं बताया कि उसके पास हथियार भी मौजूद था । उसके बाद सब अपने अपने काम पर चले गए और अमर ने कमरा अंदर से बंद कर दिया । उसने बॉलकनी अंदर से बंद कर ली और फिर सोचने लगा उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई । हमले से इस बात की पुष्टि हो गई है कि मैं सही ट्रैक पर हूँ । मंडी आते ही मुझ पर हमला हुआ । सौम्या के घर जाने और उसके केस के बारे में जानकारी निकालते ही हमला हुआ । मतलब उसकी मौत में जरूर कोई ऐसा रहस्य छिपा है तो ये लोग उजागर नहीं होना देना चाहते हैं । जो भी हो सौम्या की मौत खुदकुशी नहीं थी ।

Chapter 16

दूसरे दिन अमर उठा और फिर नाश्ता करते हुए सोच में डूब गया । उसके दिमाग में सिर्फ सौम्या घूम रही थी । अचानक ही उसके दिमाग में एक विचार कौंधा और वह भागकर नीचे पहुंचा । फिर उसने लैंडलाइन से पल्लवी का नंबर लगाया । पल्लवी ने कुछ ही देर में फोन उठाया । अमर व्यग्रता के साथ बोला, सुबह सुबह ज्यादा समय नहीं लूँगा, सिर्फ एक सवाल पूछना था । जरूर पूछे साथ क्या? तो मैं मालूम है कि सौम्या दिल्ली । पल्लवी कुछ याद करते हुए बोली हाँ । उसने बताया था छह तारीख को सुबह निकल रही है । कितने मजे शायद बताया होगा । अमर ने आशापूर्ण लहजे में पूछा, नहीं, इस समय तो नहीं बताया था पर आठ बजे की बस से ही निकली होगी हमेशा की तरह और दिल्ली से मंडी आने में कितना समय लगता है करीब नौ घंटे यानी अगर सुबह उसने साढे आठ की बस ली होगी तो मंडी पहुंचते पहुंचते शाम के पांच छे बच गए होंगे । हाँ, अब सही है । मैं भी अक्सर सुबह साढे आठ की बस ही लेती हूँ । वो शाम छह बजे तक पहुंचा ही देती है । ठीक है फॅमिली के हुए उठा और चल दिया है । पैदल चलते हुए ही वह कुछ मिनटों में सौम्या के घर पहुंचा । सौम्या के माँ बाप घर पर ही मिले । वहां पहुंचते ही उसने सीधे सवाल पूछा, सौम्या दिल्ली से किस दिन और कितने बजे घर आई थी? क्या हो गया? उसके पिता ने चौंकते हुए पूछा प्लीज बताइए ये जानना मेरे लिए बहुत जरूरी है । सोमनाथ के पिता उलझन में पड गए । उसने अपनी बीवी की तरफ देखा । वो मोबाइल में देखने लगी । शायद मैसेज देख रही थीं तो वो सात तारीख को आई थी । ये देखिए । सात को सुबह सुबह उसका मैसेज आया था कि मैं दिल्ली से निकल गई हूँ । अमर की आंखें चमक उठीं । मुझे इसी बात का अंदेशा था । क्यों? क्या हुआ इससे क्या पता चला? उसके पिता ने उलझन भरे भाव के साथ पूछा हाँ, असलियत में सौम्या दिल्ली से छह तारीख को चली थी । सात को नहीं । ऐसा कैसे हो सकता है । सौम्या की माँ ने पूछा अगर वह छह को चली होती तो छह को ही मंडी पहुंच जाती और घर आ जाती है । पर वो तो सात कि शाम को आई थी । इसका मतलब सात की सुबह ही दिल्ली से चली होगी । आपका कहना सही है । अगर वह सात को चली होती तो वो छह तारीख को कहाँ गई । अगर ये पता चल जाए तो काफी रहस्य खुल सकते हैं । दोनों अमर को इस तरह से देख रहे थे जैसे उसके सिर पर सिंह हो गया हूँ । हमें चलता हूँ आपसे बाद में मिलूंगा है । अरे मगर सोमया के पिता बोलते ही रह गई पर अमर अपनी धुन में तेजी से वहाँ से निकल गया हूँ । फिर उसने पब्लिक फोन पकडा और किसी को फोन किया । दूसरी तरफ से आवाज आती ही वो बोला केशरी मैं अमर बोला हूँ, तुम्हारे लिए काम है जो मैं मुझे आज ही कर के देना है । पाय लागू उमर सर आप तो सर्वव्यापक हैं । आप सर्वशक्तिमान ए आप एक काम कीजिए पे? श्री बोली वेराइटी प्रोफेशनल थी जो कि अकसर सीक्रेट सर्विस के काम आती थी । अमर तुरंत बोला देखो तो मैं ईमेल आईडी दे रहा हूँ । कैसे भी करके तो मैं उसे हैक करना है और है करके मुझे उसका एक्सिस देना है । अमृतसर ये तो एक मामूली सा कम है तो जानते हैं मैं कितनी टैलेंटेड हूँ । कोई बडा काम दिया कीजिए तभी मजा आएगा । तुम ये काम तो करो बडे काम भी दूंगा देंगे ना? पक्का हाँ हाँ पक्का सीक्रेट सर्विस में परमानेंट नौकरी दिलवा देंगे ना सीक्रेट सर्विस में परमानेंट नौकरी भी दिलवा देंगे ना । अरे आज अमर बडबडा आगे कभी कोई ओपनिंग निकली तो सबसे पहले ही नाम दूंगा । मुझे आप पर पूरा भरोसा है । मर्जर मुझे देश के लिए कुछ करना है । ये प्राइवेट नौकरी में कुछ नहीं रखा । अंग्रेजों की गुलामी है । बस आॅडियो युवर फॉर आवर कंट्री आॅफ हो । आप तो अच्छा चल ठीक है । अब देखो जी मैं करती हूँ आपको पासवर्ड भेजती हूँ । नहीं मैं नहीं करना । मेरे फोन में कुछ प्रॉब्लम है । मैं की मिल देता हूँ छोड कर इस पर मिलना होके पायला को अमरसर अमर ने फोन काट दिया । उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई । काफी दिनों बाद उसने कुछ हल्का महसूस किया था । लगता है सही दिशा में बढ रहा हूँ । एक बार ईमेल अकाउंट हाथ में आ जाए काफी कुछ पता लग सकता है । वहाँ से अमर सरकारी अस्पताल पहुंचा जहां पर सौम्या की लाश का पोस्टमॉर्टम हुआ था । वहाँ भी अमर ने उसी तरह से फटाफट अपना आईडी दिखाया और डॉक्टर से भेंट की । वो एक नौजवान डॉक्टर था जिसका नाम मनीष खुराना था । अमर उसके साथ केफेटेरिया में चाय पर बैठा दो डॉक्टर मनीष अमर बोला । मैंने पुलिस की रिपोर्ट में अटेस्ट पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट देखी थी । फिर भी कुछ अनसुलझे सवाल थे इसलिए मुझे लगा कि मुझे आपसे मिलना चाहिए । शायद उनके जवाब मिल सके । जी, मैं जवाब देने की पूरी कोशिश करूंगा । मनीष बोला वेरी गुड । सबसे पहले तो मैं ये जानना चाहता हूँ कि आपने सौम्या की शिनाख्त कैसे की? ये आप कैसी बातें कर रहे हैं । शिनाख्त करना तो पुलिस का काम होता है । मैं तो डॉक्टर हूँ । मेरे पास तो डेड बॉडी आ गई और मैंने पोस्टमार्टम क्या हाँ मैं अच्छी तरह से जानता हूँ । आप ने यही किया होगा । पर पुलिस ने रिपोर्ट में लिखा था की लाश दो दिन तक पानी में पडे रहने की वजह से बुरी तरह से फूल गई थी और लडकी का चेहरा पहचानना मुश्किल था । ऐसे में अक्सर मेडिकल साइंस की मदद से डेडबॉडी की पहचान की जाती है । मैं बस ये जानना चाहता हूँ क्या आप के द्वारा ऐसी कोई कोशिश की गई थी? जी नहीं, मुझसे जितना कहा गया मैंने वही किया । मैंने सिर्फ पोस्टमॉर्टम किया था । चलिए बहुत अच्छा ये बात साफ हो गई । दूसरी बात ये जानना चाहता था कि उसकी मौत का सही समय किया था जी मनीष ने आंखें फैलाए अक्सर पोस्टमॉर्टम में मौत का वक्त भी बताया जाता ना? मनीष बगले झांकने लगा । दरअसल उस की तो जरूरत समझी नहीं गयी, डूबकर मारी थी । अब कितने बजे मारी थी ये बताना तो बहुत मुश्किल होता है । फिर भी टाइम रेंज तो दी जाती है । जी मुझे माफ करिए पर किसी ने इतनी डिटेल नहीं पूछी थी । शायद जरूरत नहीं समझेंगे तो अमर निराशाजनक स्वर में बोला सच कहूँगा यहाँ की पुलिस प्रणाली देखकर काफी दुख हुआ है । मैं तो इस काम में नया हूँ । यहाँ कोई एक्सपीरियंस डॉक्टर है नहीं जो पुराने है भी तो ये काम करना नहीं चाहते हैं । कोई बात नहीं मैं समझ सकता हूँ । फिर भी अगर आपको सोचना पडे तो आपको क्या लगता है? लाश पानी में कितने समय से पडी रही होगी जी अब उसमें क्या सोचना? लडकी दो दिन से गायब थी वो भूल जाओ । इस बार अमर ने सख्ती के साथ उसकी बात काटी । बस ये सोचो की लाश मिली हैं । अब ये बताओ कि उसका मुआयना देखकर क्या लगा था । कितने दिनों से पडी थी पानी में मनीष असमंजस में पड गया, विचार करने लगा । देखिए पुख्ता तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता । पर लाश अच्छी खासी फूली हुई थी । जैसे कि कई कई दिन तक पानी में पडी रहने के बाद हो जाती है हूँ । यानी दो दिन से काफी ज्यादा राइट अच्छा । शायद मैं सिर्फ अनुमान ही लगा सकता हूँ । डूबी हुई लाश देखने का ज्यादा अनुभव नहीं है । मेरे पास कोई बात नहीं, मेरे पास है वो अनुभव तो हादसे देखा हूँ । कितनी बोली थी, कितना बडा चाहता था उसका । मनीष ने उसे अजीब नजर से देखा । फिर अगल बगल देखते हुए हाथ मिला है । पहले कुछ ज्यादा फिर कुछ सोचते हुए काम किया । फिर एक नाक पर रुकते हुए बोला इतनी होगी एक अमर ध्यान से देखते हुए बोला अच्छा ठीक है । ये बात बहुत सही बताई । मजा आ गया । मनीष ने अमर को इस तरह से देखा जैसे उसे हैरानी हुई होगी । किस बात पर अमर को मजा आ गया? मनीष सुविधा लेकर अमर शहर में निकला और योगी घूमने लगा । शाम के वक्त जब अमर अपने होटल में आराम कर रहा था तब उसे तीसरी का ईमेल आया । तब उसे तीसरी का ईमेल आया । उसने ईमेल में ही लिखा था अमरसर लीजिए । आपका पासवर्ड वोट कर बैठ गया और फिर उसने अपने फोन पर जीमेल खोलकर सौम्या के ईमेल आईडी को तीसरी के लिए पासवर्ड से लॉग इन किया । लॉगइन सफल रहा । अमर की आंखें चमक उठीं । वो उसकी ईमेल देखने लगा । अधिकतर प्रोफेशनल टाइप की मेल देखी । फिर उसे बैंक स्टेटमेंट देखिए और बस टिकट के ईमेल भी देखे हूँ । यही तो चाहिए था । अगर ऑनलाइन टिकट बुक ना क्या होता तो मुश्किल आती । उसने टिकट का ईमेल खोला तो ये था किस्सा छह तारीख का जो टिकट उस ईमेल में था वो दिल्ली से धर्मशाला का था । अमर मुस्कुराया तो ये बात है सोमयाजी पहले गए तीन दिल्ली से धर्मशाला और मंडी पहुंची वह सात कि शाम को । यानी असल में वो धर्मशाला छह कि शाम को पहुंच गए थे । वहाँ उसने छह की रात गुजारी और सात की सुबह भी और दोपहर करीब मंडी के लिए निकली । अब आगे सवाल है कि नेगी की मौत से उस चने की वजह से ही वह नौकरी वगैरह छोडकर दिल्ली से रुखसत हुई, पर घर जाने की जगह धर्मशाला जाने का क्या मतलब है? क्या धर्मशाला से नेगी का कुछ कनेक्शन है? अब क्या किया जाए? धर्मशाला जाऊँ पर धर्मशाला जाकर करूंगा । क्या सिर्फ इतना ही पता चला है कि ये लडकी छह तारीख की शाम को धर्मशाला पहुंची थी । उसके बाद कहाँ गई, उसके सिर कहाँ से मिलेंगे? कैसे मिलेंगे । सोचते हुए अमर ने बेल करनी में पहुंचकर सिगरेट सुलगा ली है । अचानक उसे नकाबपोश की याद आई । वो चारों तरफ देखने लगा । काश की वो ना का पोशी दोबारा हमला करते हैं तो उसे दबोचकर कुछ पता किया जाए । अमर ने लंबा कश लिया और ढेर सारा धुंआ छोड दिया ।

Chapter 17

चौबीस मार्च दो हजार रात्रि एक बजे फ्लाइट तीन सौ अब्दुल ने उस लडके का लेपटॉप वापस कर दिया था । उसे उसमें ऐसी कोई संदिग्ध बाद दिखाई नहीं दी जिससे ऐसा लगे कि वो प्लेन के सॉफ्टवेयर सिस्टम को हैक कर रहा हूँ । मैंने पहले कहा था वहाँ के तहरीर कर बोला । लेपटॉप वापस मिलते ही वो एक बार फिर उस पर काम करने के लिए बैठ गया । कमाल है अरुण उसे देखकर बुदबुदाया, कोई इतना निश्चिंत कैसे हो सकता है? मिस्टर अब्दुल, मिस्टर अब्दुल प्लेन और किस तरह आई जय? हो सकता है सबसे ज्यादा कन्वीनियंट तो पायलट के लिए ये वो तो एक संभावना है ही । पर जैसा यूसेट्स इलेक्ट्रॉनिक हाईजैकिंग और क्या तरीका हो सकता है । प्लेन बनाने वाली कंपनी के अंदर ही किसी ने सॉफ्टवेयर को मैंने प्लेट क्या हो सकता है । लेकिन फिर उसे कंट्रोल कैसे किया जा रहा है? बहुत आसान है । तभी कॉकपिट की तरफ से चीखने की आवाज में उन्हें आकर्षित किया । उस तरफ फीवर, रोहित और पतली आवाज वाले गंजे के बीच हाथापाई होने लगी थी । ये तुम लोगों की साजिश है तो उन सब मिले हुए हो । वो चीज रहा था । लोगों ने बीच बचाव करके दोनों को अलग किया तीस आप लोग समझने की कोशिश क्यों नहीं करते हैं? टीना चिल्लाने लगी हम भी आप ही लोगों की तरह फंसे हैं । गंजे को जबरदस्ती एक सीट पर बैठा दिया गया । भाई साहब भाई साहब आराम से लडाई जगह से क्या फायदा होगा? उसके पास बैठा पैसेंजर बोला मुझे क्या बोल रहे हैं? ये प्लेन के लोग ही उडा रहे हैं और नहीं नहीं पता प्लेन कहाँ जा रहा है? कब से प्लेन हो रहे हैं । अब तक तो खता क्या लंदन पहुंच जाते । इन लोगों की साजिश है अब देखना अब ये कहीं लैंड होगा और उसके बाद ये भारत सरकार से पैसों की मांग करेंगे । चुप रहो और बकवास की तो रोहित उसकी तरफ लपका । पर बाकी लोगों ने उसे रोक लिया तो क्या करेगा मारेगा मुझे तो उन सब पर केस करूंगा ना सर प्लीज अरुण उसके पास पहुंचा हूँ । अभी तो हमें ये भी नहीं पता कि ये प्लेन ठीक ठाक लाइन होने वाला है भी कि नहीं हूँ । विश्व भी यूनाइटेड हमें मिलकर इस मुसीबत से बाहर निकला होगा । प्लेन काफी देर से एक ही दिशा में उड रहा है । अब्दुल बोला जिस तरह का डायवर्जन इस ने लिया था इस की दिशा साउथ की तरफ होगी रात के एक बच गए । अब तक तो ये श्रीलंका के आस पास कहीं होगा । राइट सोचने वाली बात है । जिसने भी प्लेन आई जा क्या है, इसको कहाँ ले जा रहा है? चाहे मॉरिशियस कोई बोला श्रीलंकाई जा रहा होगा । वहाँ एलटीटी ऍम तब चल रहा है । उन का लीडर ही मारा है ऍम इंडियन ओशन में कई आईलैंड हैं । एक वरिष्ठ बोला इनलैंड करने के लिए और से भी होनी चाहिए । पर हर आइलैंड में इतना बडा प्लेन लैंड करने के लिए भी तो होनी चाहिए । अब्दुल बोला उनमें से कुछ ब्रिटिश टेरिटरी हैं, वहाँ ऐसी स्टेट मिलेंगी, ब्रिटिश क्यों करेंगे? अचानक अरुण बोला अगर प्लेन हाईजैक फिरौती की नियत से किया गया है तो लैंडिंग के बारे में जरूर सोचा गया होगा । और अगर ये ऍम के लिए किया गया हो तो अब्दुल शून्य में घूमते हुए गंभीर स्वर में बोला फिर फॅस के लिए कोई इशू नहीं होगा तो इसे इंडियन ओशन में कहीं भी क्रैश कर सकते हैं । उस की इस बात से सभी पैसेंजर्स के बीच भाई की लहर दौड गई । सभी निशब्द थे तो

Chapter 18

वर्तमान समय नई दिल्ली अभय कुमार ने फिलहाल अमर के लिए सीबीआई से और होम मिनिस्ट्री से बात कर के समय मांग लिया था । उसका यही कहना था की जब तक सीक्रेट सर्विस नेगी की इन्वेस्टिगेशन पूरी नहीं कर लेती है वो अमर को नहीं सौंप सकते । क्योंकि अमर खाली के मिशन में अहम एजेंट था इसलिए उसका इन्वेस्टिगेशन में होना अनिवार्य था । अभय के दिए इन तर्कों को सीबीआई मानना तो नहीं चाहती थी पर होम मिनिस्ट्री ने अनुमति दे दी और फिर भारत सरकार ने उसी हिसाब से लियोन को भी जवाब दिया यानी दो महीने इंतजार करने के लिए कह दिया गया । साथ ही अभय ने राज से इस बारे में भी बात की । जिंदगी के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन के लिए सीक्रेट सर्विस के एजेंट सीबीआई ऑफिस आएंगे । पहले तो राज थोडा झिझका । उसने कहा कि इस की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वह पहले ही जांच पडताल कर चुके हैं और नेगी के खिलाफ यहाँ ऐसा कोई तथ्य मौजूद नहीं जिससे वो आतंकवादी साबित हो । पर अब मैंने कहा क्योंकि उसके खिलाफ सबूत एकत्रित करने का जिम्मा सीक्रेट सर्विस को है तो ये उन्हें करना ही होगा । राज ने फिर ज्यादा हुज्जत नहीं दिखाई, राजनीतिक ज्यादा हुज्जत नहीं दिखाई । जावेद और जॉन ने सीबीआई ऑफिस आने से पहले राज को फोन करके अनुमति ले ली थी । राज ने उन्हें सीबीआई के इंटरपोल विंग में पहुंचने को कहा जो कि सीबीआई की लोधी रोड स्थित ऑफिस के ब्लॉक नंबर पांच में हुआ करता था । वहाँ उन्हें मनोज रामचंद्रन से मिलने को कहा गया । उन्हें कुछ देर गेट पर इंतजार करना पडा । फिर मनोज ने गेट पर आकर उन्हें एस्कॉर्ट किया और एंट्री करवाने के बाद अंदर ले गया । देखिए, मैं आपको सीधे इंटरपोल ऑफिस ले चलता हूँ । कहते हुए वह राहदारी में तेजी से आगे बढता चला गया । कुछ देर बाद वो एक भव्य दरवाजे पर पहुंची जिसपर नेशनल सेंट्रल ब्यूरो इंडिया लिखा हुआ था । मनोज एक्सिस कार्ड के सहारे अंदर दाखिल हुआ । अंदर अच्छा खासा ऑफिस था । काफी सारे लोग काम कर रहे थे । वहाँ छोटा मीटिंग रूम था । उसने चाबी से उसका लॉक खोला । फिर अंदर आकर लाइट जला दी । अंदर कुछ कुर्सी, कम्प्यूटर, टेबल फोन, प्रिंटर आदि मौजूद थे । इसी कमरे में तीन साल पहले नहीं की काम क्या करता था? उसके साथ कौन काम क्या करता था? जो हमने पूछा वैसे तो वो ज्यादातर इंडिपेंडेंटली काम करता था पर कभी कभी मैं उसे असिस्ट करता था । आप किसी ऑफिस में पोस्टेड आम बतौर एनॉलिस्ट लेगी । इनमें से किसी सिस्टम पर काम क्या करता था था? जॉन वहाँ रखी कंप्यूटर देखते हुए बोला, नहीं, उसका खुद का लेपटॉप था तो उसी पर काम करता था । प्रिंटआउट वगैरह । उसके गायब होने पर हम ने सब कुछ किया था तो अपने पीछे कोई सुराग नहीं छोड दिया था । जॉन ने हामी भरी । ऑफिस में आप के अलावा और किसी से उसकी बातचीत होती थी । जावेद ने पूछा, नहीं मेरे से भी सिर्फ काम के काम । मतलब की बात वो करता था । कोई पर्सनल बाद उसने कभी नहीं वो रहता कहा था, सरकारी गैस था । उसमें वहाँ भी पूरी जांच की गई थी । वो अपने पीछे रत्तीभर किलो भी नहीं छोड गया था । तो उसके तीन साल अनाधिकृत रूप से गायब रहने के बारे में इंटरपोल क्या बोलता है? जावेद ने पूछा, क्या तीन साल किसी एजेंट के गायब रहने के बाद भी इंटरपोल उसे अपना एजेंट मानता है? लेकिन ये लियोन आउटलुक है । पर मैं समझ रहा हूँ आप क्या कहना चाहते हैं । अगर कोई इतने लम्बे अरसे गायब रहे तो उसे वैसे ही नौकरी से बर्खास्त माना जाना चाहिए । फिर उस दशा में इंटरपोल का इतने सवाल पूछने का अधिकारी नहीं बनता और मामला कोई आम नौकरी का हो तो फिर भी चल जाता । पर यहाँ आतंकवाद जैसे संगीन मामले उसकी गुमशुदगी के साथ गुत्थमगुत्था थे तो इंटरपोल अवश्य उससे हर जानकारी निकलवाता । उससे ये अंश और करता है कि उसने इंटरपोल की जानकारियों का कोई गलत प्रयोग तो नहीं की आदि । यानी वो मानते हैं कि नेगी का लिंक आतंकवादी गतिविधियों से था । जॉन ने आंखों में चमक के साथ कहा ये सवाल उसके कहने के अंदाज से लगा कि उसने मनोज से न करके खुद से किया हूँ । बिना सबूत के वो कुछ नहीं मानने वाले । उसे आखिरी बार कब और किसने देखा था? जावेद ने पूछा इस ऑफिस से तो देर रात निकलता था । गार्ड ने पुष्टि की थी कि निकलते वक्त उसके पास लेपटॉप बैग था और वहाँ से अपनी सरकारी कार में गैस्ट हाउस गया था और गेस्ट हाउस में फॅर पहुंचा जरूर था तो दूसरे दिन किसी को नहीं मिला । रात में वो कब निकला, कैसे निकला? किसी को खबर नहीं है । यानी वो हवा हो गया । उस वक्त उसे ढूंढने कोई लियोन से क्यों नहीं आया? जॉन ने पूछा आई देना पर यहाँ इन्वेस्टिगेशन से यही लगा कि वह भारत से लंदन वापस चला गया । वो तो उसकी यहाँ मौत के बाद अब सब को समझाया कि वह कभी भारत छोडकर गया ही नहीं था । आईसीसी कुछ देर और बात करने के बाद जॉन और अमर वहाँ से रुखसत हुए ।

Chapter 19

सीबीआई कार्यालय से निकलने के बाद जावेद और जॉन ने अलग अलग दिशा में निकलने का फैसला किया । जॉन उसके रेस्ट हाउस पर जांच पडताल के लिए निकला जहाँ नेगी रुका था और जावेद ने के बारे में पूछताछ करने जेएनयू की तरफ चल दिया । जेएनयू के पास स्थित निक्की ठिकाने के आसपास पूछताछ करने पर जावेद को उसके कुछ दोस्त मिले जोकि निक के साथ वाकफियत रखते थे । सबका यही कहना था की दो साल से उन्होंने निक के बारे में कुछ भी नहीं सुना था । वो किसी को कोई जानकारी दिए बगैर अचानक ही गायब हो गया था । उससे पहले वो अक्सर जेएनयू के विद्यार्थियों के साथ और अपने बैंड के मेंबर्स के साथ देखा जाता था । उसके रॉक बैंड के बारे में भी इन्वेस्टिगेट करते हुए जावेद को उनके बैंड के एक मेंबर के बारे में पता चला जो फिलहाल दिल्ली में ही था । वो आखिर तक निक के साथ था और बैंक का रेग्युलर मेंबर था । वह ड्रमर हुआ करता था और फिलहाल एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था । उसका नाम कुलदीप सिंह स्कूल था जो लम्बा चौडा सरदार था । जावेद उससे उसकी कंपनी के पास एक रेस्टोरेंट में मिला । चाय पीते हुए जावेद ने पूछा तो आखिरी बार तुमने के साथ कब परफॉर्म किया था? अजीब दो साल से ज्यादा हो गए । हाँ जी, दो साल से ज्यादा हो गए । अभी तो याद नहीं आ रहा । मुझे लगता है और नहीं फॅमिली । हमने सीएपी कॉलेज के कल्चरल फेस्टिवल में जाकर एक शो किया था । वो शो के बाद में एक से एक ही बार मिला और वही लास्ट मुलाकात थी । उसके बाद में जॉब में बिजी । फिर वो भी कहीं बिजी, कभी कॉन्टेक्ट नहीं किया । फिर एक बार जब याद आया तो फोन किया । उसका फोन ही नहीं मिल रहा था । उसके घर का एक चक्कर लगाया तो वहाँ से भी वो जा चुका था । पता नहीं किधर गायब हो गया । वो कुछ ज्यादा बोलने वाला शख्स लग रहा था इसलिए जावेद ने उसे काटकर अगला सवाल किया । लेकिन फोटो तो होगी तुम्हारे पास देखो आज ही बोर्ड होता है एक क्या बहुत ही वो हम लोगों ने शुरू के दो सालों में तो इतनी परफॉर्मेंस दी थी । आपको परफॉर्मेंस की फोटो दिखा देता हूँ । कहो तो कॉलेज की फोटो दिखा दूँ । कहते हुए वो अपना फोन खोलकर गैलरी में दो साल पुराने फोटो दिखाने लगा । फिर उसने अपने रॉक बैंड के फोटो दिखाए जिसमें कम कद का छोटी छोटी आंखों वाला एक शख्स गिटार बजाता देख रहा था । यही है देख लीजिए आपको भेजता हूँ आप अपना नंबर बता हूँ । जावेद ने बताया कुलदीप ने जावेद ने बताया कुलदीप ने कई फोटो फॉर्वर्ड कर दिए । तुमने से फिर ढूंढने की कोशिश नहीं की । जी बताया तो उसके घर गया था । वहाँ पर नहीं था । अब और कहाँ घूमता । वैसे भी वो एक जगह देखने वाला बंदा तो था नहीं । उसकी बातों से लगता था । कहीं हवा में उडना चाहता था । कभी कुछ तो कभी कुछ । न जाने कौन कौन से बिजनेस करता था । नौकरी तो कभी उसने कोई की नहीं हो सकता है । कोई लंबी फिराक में कहीं निकल गया हूँ । बता कर तो कुछ गया भी नहीं । आपका कोई और ऐसा परिचय जिनसे वो अक्सर मिलता जुलता हूँ । एक तो उसका वह पायलट दोस्त था कौन? विक्रम हाँ ऍम अक्सर हमारी परफॉर्मेंस इसमें आया करता था । ड्रेसिंग रूम में ही डायरेक्ट एंट्री मारता था । काफी गहरा यार था उसका । उसके अलावा कोई कुलदीप इधर उधर देखते हुए सोचने लगा आराम से सोच कर जवाब दो । जावेद बोला अब ये बताओ चक्कर क्या जी एक तरह से समझ लो कि निक गायब हो चुका है । जावेद समझाते हुए बोला और उसका गायब हो ना! इतनी गहरी साजिश से ताल्लुकात रखता है जिसका संबंध देश की सुरक्षा से जुडा है । मैं उसने आंखें फाडकर देखा, वो कैसे? फिलहाल वो तो मैं नहीं समझा सकता । फिलहाल यही समझो की निक्का जल्द से जल्द मिलना बेहद जरूरी है । आज ही आप सही कह रहे हो अभी इस तरह से किसी का गायब हो जाना भी तो ठीक नहीं होता । उसका आगे पीछे भी कोई नहीं था । फिर भी दोस्त तो बहुत ऐसे कहाँ गायब हो गया । तो सोचो कुलदीप सोचने लगा उसके और परिचित कौन थे उसका कोई और खास दोस्त उसकी कोई गर्लफ्रेंड उसने इंकार में सिर हिलाया । लडकियों को बस लाइन मारता था । फ्रेंड बनाने तक की नियत तो उसकी कभी रही नहीं । एक बार तो एक लडकी को सीधा प्रपोज भी कर दिया है । लडकी ने पलट कर हाँ बोल दिया तो ये बोला मैं मजाक कर रहा था कहकर कुलदीप हंसने लगा जावे । चुप चाप उसे देखता रहा । फिर उसने पूछा हाँ ध्यान से याद करो । खोल दी तो मकसर उसके साथ बैंड में रहते थे तो फॉर्म करते थे । कोई और खास शख्स जो अक्सर उससे मिलता था या वो मिलने जाता था । सोचता हूँ उससे मिलने वाला कोई ऐसा शख्स जो तुम्हें कुछ अजीब सा लगा हूँ । कुलदीप अपनी कनपटी पर हाथ सक्कर टेबल की तरफ देखने लगा । मानव सोचने का भरसक प्रयास कर रहा हो ऐसा कोई शख्स तो याद नहीं आ रहा है और वो अपने अजीबो गरीब बिजनेस के लिए अक्सर कुछ जुगाड लगाकर बडे लोगों से मीटिंग करता रहता था । अब समझ रहे ना ऊपर तक पहुंच वाले लोगों के साथ इस तरह का कोई हाइप्रोफाइल शख्स ज्यादा है जिससे वो अक्सर मिलता था । एक बार किसी मिनिस्टर के सेक्रेटरी से मिलने की बात कर रहा था । कह रहा था उसकी मदद से उसको बिजनेस डील भी मिल रही है । नाम बताओ सेक्रेटरी या मिनिस्टर का कोई नॉर्थ, इसका नाम कमजोर । शायद नाम याद नहीं आ रहा है । ऍम तो नहीं । जावेद ने कहा था शायद कौन जान लो ले नहीं था वो तो केंद्रीय मंत्री जॉइंट दुखी का सेक्रेटरी है जो मिंटो की यानि कि साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर इंटरेस्टिंग आखिर बिजनेस था करने का कुछ तो आईडिया लगा होगा । आपको एक बिजनेस रहा हो तो बता हूँ पता नहीं क्या क्या करता था । एक बार तो कुछ इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट की डीलरशिप ले ली थी मुझे भी बोल रहा था पैसे लगाने को पर मैंने मना कर दिया । इस तरह के कई नये नये बिजनेस ट्राय करता रहता था । ज्यादा डिटेल तो मुझे नहीं पता । कोई बात नहीं । जावेद बोला तो जो मिंटू की का नाम तुमने कब सुना? कुछ और याद करो इस बारे में यही करीब तीन साल पहले की बात है । उसे फोन आया था काॅन् का हमारी बैंड प्रैक्टिस के बीच में मैंने पूछा भाई इतना अर्जेंट किसका फोन है? तो गर्व से बोला कि सेंट्रल मिनिस्टर जॉइन तुकी के सेक्रेटरी का है, जो मिन्टू की नाम मैंने पहली बार सुना तो मैंने यहाँ बाकी बैंक के मेंबर्स ने कोई और सवाल उससे क्या? नहीं तो ये बात बाद में कभी हुई नहीं । इसके अलावा और कोई बात अगर बाद में ध्यान आए तो मुझे कॉल करना जरूर सर जी । फिर जावेद ने कुलदीप से विदा ली । उसने जॉन को फोन किया वो फ्री हो गया था । जावेद उसे रेटेड कार से जाकर फिर कब? क्या उसने जॉन को फोन किया वो फ्री हो गया था । जावेद ने उसे रेटेड कार से जाकर पिकप क्या जॉन की कार में बैठते ही जावेद बोला पायलट के कनेक्शन निक से और ऍम से और ऍम का कनेक्शन केन्द्रीय मंत्री से पता चला है । कहकर उसने गेयर में डालकर गाडी आगे बढा दी और फिर कुलदीप से हुई पूरी बात बताई । ये नहीं जो भी है बहुत इम्पोर्टेन्ट किरदार बनता जा रहा है । जॉन बोला उसका मिलना बिल्कुल जरूरी हो गया । उसका फोटो में हेड क्वार्टर भेज रहा हूँ । तुरंत सर्विलांस पर लगवा दिया जाएगा । वो तो है पर फिलहाल काॅपर भी हार डाला जा सकता है । अच्छा पर ये काम आसान नहीं होगा । बहुत मुश्किल भी नहीं होने वाला । जावेद आक्रामक स्वर में बोला ये कोई आम मामला नहीं है । भारत का विमान गायब हुआ है और अगर इस साजिश में पॉलिटिशियंस की कोई मिली भगत है तो उन पर भी हार डाला जाएगा । तुम सही कह रहे हो? जॉन बोला चीज को बोलते हैं कि काॅन् से मीटिंग अरेंज करवाएँ । मेरे खयाल से होम मिनिस्ट्री हमारा ये काम आसान करवा देगी । कहते हुए जॉन ने मोबाइल पर अभय का फोन लगाया और सारी स्थिति से अवगत क्या? अब मैंने सारी बात सुनकर कहा तो बहुत जल्दी ऍसे । तुम लोगों की मीटिंग अरेंज करवाता हूँ । फोन काट कर जॉन ने गहरी सांस छोडी । जावेद ने पूछा गैस का उस पर कुछ पता चला वहाँ का स्टाफ तो एकदम टिपिकल सरकारी टाइप था । कुछ भी काम की बात पता नहीं चली । मैंने उनका कमरा भी खुलवाया था । दो साल में तो कई लोग उसमें रुक कर गए होंगे । टू वहाँ कुछ भी पता नहीं चल सका । मुश्किल है हर बार भाग्य साथ नहीं दे सकता । पुराने के सुलझाने में जैसे तुमने लंबे अरसे से बंद पडे मिनास के फ्लैट से सबूत ढूंढ निकाले थे तो एक मर्डर के साथ । इसलिए चांस बीते कुछ मिलने के । अब हमें सोचना पडेगा कि गेस्ट हाउस से गायब होने के बाद नेगी के कदम कहां कहां पडे हो सकते हैं । उसने कहा था कि आईएसआई का एजेंट बनने के लिए उसने चार साल लगाए थे और दो साल वो माइंड के अंदर था । हमें उसके हिसाब से सोचना होगा कि उसने क्या किया होगा । उसने खुद को आईएसआई का एजेंट कैसे स्टेबलिश क्या होगा? क्या उसने खुद को नए एजेंट के रूप में भर्ती किया या किसी और की जगह ले ली । जावेद सामने ट्रैफिक की तरफ देखते हुए गहन सोच में था । तभी रजा मालिक वो एक अधेड उम्र के एजेंट के रूप में था । आईएसआई में मौजूद हमारा कोई मोल इस बारे में बता सकता है गुड आईडिया ऍसे बात करता हूँ कहकर जॉन ने इल्यास नामक उस डबल एजेंट को फोन किया जो कि आईएसआई में सीक्रेट सर्विस का जासूस था । जरूर ऍम एक मैसेज करने वाला हूँ । उसकी कुछ जानकारी निकालने की कोशिश करूँ । करोड कहकर उसने फोन काट दिया । जॉन ने उसे एसएमएस में रजा मालिक लिखने जाता हूँ । फिर वो दोनों वहाँ से सीधे अपने गैस हाउस पहुंचे । ऍम

chapter 20

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश अमर बॉलकनी में ही खडा था । उस वक्त हो गया जब उसे होटल के ठीक सामने सडक के किनारे एक खास व्यक्ति दिखाई दिया । उसे वो खास इसलिए लगा क्योंकि उसकी दृष्टि बार बार चोरी छिपे अमर कि होटल की तरफ जा रही थी । उसने भूरे रंग का स्वेटर पहना हुआ था और कानून और गले को ढकने के लिए मफलर बांध रखा था । अमर को साफ लगा कि वहाँ किसी और के कारण से नहीं बल्कि होटल की निगरानी करने की नियत से ही खडा है । ऐसा उसे अपनी ट्रेनिंग और तजुर्बे से पता करना बडी बात नहीं थी । वो व्यक्ति अखबार पढने का नाटक कर रहा था जब की उसका ध्यान पूरी तरह अखबार में नहीं था । चोरी छिपे वो बार बार होटल की तरफ देख रहा था । आखिर ये चाहता क्या है? मेरी निगरानी कर रहा है या किसी और की पता करना देगा । अमर कमरे में लौट आया । उसने जैकेट पहनी और पिस्टल उसकी जेब में छिपा ली । कमरे की लाइट ऑन छोडकर वो बाहर निकल आया । वो होटल से नीचे उतारा और सामने से निकलने की जगह पीछे किचन की ओर से निकलकर बगल वाली इमारत के प्रांगण में कूदकर आ गया । फिर उस इमारत से बाहर निकलने लगा । उसे यकीन था कि उस व्यक्ति की नजर होटल पर ही होगी । मुझे सावधानी बरतते हुए इमारत से बाहर निकला और सडक पर आ गया । सडक की दूसरी तरफ उसे पूरे स्वेटर वाला अभी भी दिखाई दे रहा था । अमर विपरीत दिशा में आगे चला गया और फिर सडक पार कर के उस तरफ आ गया जिस तरफ पूरे स्वेटर वाला था । वो सावधानी से उसकी तरफ चलने लगा । उसे देखा भूरे स्वेटर वाला अब विपरीत दिशा में जा रहा था । अमर भी तेजी से उसके पीछे चलने लगा । दोनों तेजी से चल रहे थे । दौडने की कोशिश कोई भी नहीं कर रहा था । फिर अचानक नकाबपोश ने परीक्षा हुआ है और उसमें बैठकर रिक्शा वाले को कहीं जाने का निर्देश दिया । तब तक अमर भी दौड कर वहां पहुंचा और जबरन रिक्शा के अंदर बैठा । रिक्शा वाले और पूरे स्वेटर वाले दोनों ने हैरानी से उसे देखा और रिक्शा मैंने पहले देखा था । अमर बोला देखा होगा और मैं पहले बैठ गया तो मतलब वो पूरे स्वेटर वाले ने धमकी भरे स्वर में कहा, चलो कुछ दूर जाना है । आधे पैसे मैं घुमा रिक्शेवाले ने पलटकर भूरे स्वेटर वाले को देखा उसने अनमने भाव से अमर को देखा । रिक्शा वाले को सहमती दी । रिक्शा आगे बढ गया । दोनों विपरीत दिशा में बाहर देख रहे थे । कुछ ही पल बाद अमर ने पूछा किसी ढूंढने आए थे क्या? वो अमर की तरफ पडता ऍम पर नजर रखे हुए थे । कौन बोला तो तुम्हारी आंखें तुम हॅूं क्यों? फालतू मुझ से बढ रहा हूँ । मैं कौन हूँ? वो तो तुम जानते ही हो गए पर तुम कौन हो ये भी तो मुझे पता होना चाहिए । कहते हुए अमर ने अपना पिस्टल निकाला और आराम से जांच पर रख लिया । बहुत ये क्या है जो बुरी तरह से चौका पहली बार देखा है । अचानक ही उसने अमर पर कोहनी से प्रहार किया और चलते रिक्शा से ही कूद गया । अमर दर्द से चीजों को था । वो इसके लिए तैयार नहीं था । होने का जबरदस्त प्रहार उसके चेहरे पर हुआ था । उसका पिस्टल नीचे गिर गया था । उसने उसे उठाया । तब तक रिक्शा वाले ने ब्रेक लगा दिए थे । अमर तेजी से बाहर निकला । रिक्शा चालक में पिस्टल देख लिया था इसलिए वह फिर वहाँ रुका नहीं हूँ । पूरे स्वेटर वाला रिक्शा से कूदकर रास्ते पर गिरा जरूर था और उसके बाद वह फुर्ती के साथ उठा और दौडते हुए एक गली में प्रविष्ट हो गया था । अमर भी सडक पार करते हुए उस गली की तरफ थोडा गली के अंदर पहुंचने पर अमर को व्यक्ति कहीं दिखाई नहीं दिया । कभी गली के अंत की तरफ से कूदने की आवाजाही अमर दौड कर उस तरफ पहुंचा । गली के अंत में एक छह फीट ऊंची दीवार थी । अमर उस पर चढ गया । दूसरी तरफ कुछ दे रहा था और एक का दुख का अंडरकंस्ट्रक्शन इमारतें थी । वो सावधानी के साथ उस तरफ उतर आया । मुख्य सडक से आने का रास्ता काफी आगे दिखाई दे रहा था । इतनी जल्दी तो वो उस तरफ से भाग नहीं पाया होगा । उस तरफ काफी धूल मिट्टी थी । शायद कंस्ट्रक्शन के कारण अमर की नजर नीचे गई । उसे तलाशती कदमों के निशान की पर वहाँ अनगिनत निशान थे । शायद दिन में उस तरफ काम करने वाले मजदूरों की वो नीचे झुक कर निरीक्षण करने लगा । बारीकी से देखने पर उसे एक तरफ की धूल कुछ हवा में उडती नजर आई । उस दिशा में एक मकान दिखाई दिया जो अंधेरे में डूबा हुआ था । अमर सीधे न जाते हुए छिपते हुए घूमकर मकान के पीछे जा पहुंचा । फिर पीछे घूमते हुए उस की खिडकियों के पास जा खडा हुआ ताकि अगर अंदर कोई हो तो उसे आहट मिल सके । किसी तरह का संकेत ना मिलने पर उसने जमीन से जितना गोलपत्थर उठाया अपना पिस्टल साधा और घूमते हुए सामने की तरफ आ गया और फिर दबे पांव दरवाजे की तरफ पडने लगा । उसने मुख्यद्वार को धीरे से धकेला तो पाया वह खुला हुआ था । शायद वो एक वीरान पडा मकान था जहाँ कोई सालों से नहीं रह रहा था । अमर ने पत्थर लिया और फिर मकान के फर्श पर अन्दर की तरफ लोड करा दिया । वो तेज आवाज करते हुए अंदर लुढकता चला गया और उसी समय हम दौड कर बाहर की तरफ भागा और रोड में छुट गया । दूसरे ही पल अमर की चाल काम आए । मकान से उसका विरोधी दौडते हुए बाहर आया जैसे कि अमर ने चाल चली थी । शायद उसे लगा के अंदर कोई बम लुढकाया गया है । उस पर नजर पडते ही अमर ने उस पर हमला कर दिया । उसने विरोध करना चाहा उसके हाथ में भी पिस्टल था । अमर ने पहले उसका हाथ झटक कर उसे गिराया और फिर जमकर उसकी धुनाई की । जब बेहाल होकर जमीन पर गिर गया तब अमर ने पूछा बोल कौन है तो केस विराट में था । किसने भेजा था तो वो चुप चाप जमीन पर पडा रहा । अमर ने उसे ठोकर मारी फिर झुककर उसकी जेब टटोलने लगा । उसने विरोध किया तो फलस्वरूप उसके मुंह पर एक सबर दस्त कोनसा रसीद क्या जेब से कुछ रुपये और रसीदों के सिवा कुछ नहीं मिला । बोलना शुरू कर अगर पुलिस के सामने ही बोलने वाला है तो ये भी सही है । अगर पुलिस के सामने ही बोलने वाला है तो ये भी सही है मैंने क्या किया है? जो मैं पुलिस रुपये वो निर्भीक स्वर में बोला । एक पल को अमर भी सोच में पड गया । आखिर वह सिर्फ उसके होटल के बाहर खडा निगरानी कर रहा था । जासूसी भी एक जुर्म होता है । अगर दूसरे देश के खिलाफ की जाए मैं महसूस नहीं । अब इसका फैसला तो पुलिस ही करेगी । फिर अमर उसे लेकर उस तरफ की गली से होते हुए मुख्य सडक पर पहुंचा । वो अभी किसी रिक्शा या टैक्सी की रह ही देख रहा था कि अचानक उसे अपने पीछे किसी का आभास हुआ ऍम सर्द लहजे में आवाज आई किसी को पता भी नहीं चलेगा । चलो अब अपना रिवॉल्वर अपनी जेब में रखो । अमर ने अपनी पिस्टल जो छिपाकर मफलर वाले के पेट में लगा रखी थी, को आज्ञाकारी ढंग से अपनी जेब के हवाले कर लिया । अगले ही पल उसके सिर पर पीछे से जबरदस्त प्रहार हुआ । वह चकराकर नीचे जा गिरा । अमर को जब होश आया तब सडक सुनसान पडी थी तो अपने सिर को सहलाते हुए उठा चोट हो गई । सही लीड मिली थी पर हाथ से निकल गयी । पर अब ये तो साफ हो गया है कि यहाँ बहुत बडी साजिश चल रही है और ये लोग नहीं चाहते कि मैं उसकी तह तक पहुंच । मैं सौम्या के घर गया । पुलिस स्टेशन गया हॉस्पिटल गया । यानी इस दौरान मुझ पर इन लोगों की नजर थी और वो मेरे हर कदम पर नजर रख रहे थे । सोचते हुए अमर उठा । उसने अपने कपडे झाडे और धीरे धीरे होटल की तरफ चल दिया । उसने जैकेट की जेब में हाथ डाला । पिस्टल मौजूद थी । गनीमत है कि पिस्टल लेकर नहीं जैकेट की दूसरी जेब में उसे कुछ कागज महसूस हुए । उसने उन्हें निकाला । उसे याद आया कि कुछ रुपये और कागज मफलर वाले की तलाशी में उसे मिले थे । उसने रुपये वापस जेब में डालें और एक एक करके कागजों को देखना शुरू किया । दो । रेस्ट्रॉन्ट के खाने के बिल थे । वो मंडी के ही रेस्ट्रॉन्ट थे । फिर उसे एक बस का टिकट दिखाई दिया । वो धर्मशाला से मंडी का तीन दिन पहले का टिकट था हूँ । सौम्या भी दिल्ली से धर्मशाला गई थी और ये भी स्पेशल मिशन पर । धर्मशाला से यहाँ इस साजिश की जडें धर्मशाला तक फैली है । उसे कागज और मिला । वो धर्मशाला के किसी आश्रम में दिए दान की रसीद थी । जासूस तरीके लोगों का आश्रम में क्या काम लगता है, वहाँ जाना ही पडेगा ।

chapter 21

वर्तमान समय नई दिल्ली अगले दिन शाम को जावेद और जॉन कुंजुम लोलैंड ऑफिस में थे । उस से मिलने के लिए उन्हें आधा घंटा इंतजार करना पडा । फिर चपरासी ने उन्हें कैबिन में जाने का इशारा किया । जावेद और जॉन कुमकुम लालन के कैबिन में दाखिल हुए हैं । काम जम लोलैंड औसत ऊंचाई गोरे रंग का पचपन की उम्र का होने के बावजूद एक फिट व्यक्ति था जिसकी आंखें छोटी छोटी थी जिन पर एक फॅमिली चश्मा चढा था । सफेद शर्ट और पैंट पहने हुए वो कुर्सी पर बैठा किसी फाइल में व्यस्त था । उन दोनों के अंदर आते ही बिना नजर उठाए उन्हें बैठने का इशारा कर के वो वापस फाइल में डूब गया । जावेद और जॉन ने आसन ग्रहण किया जावे निरंतर उसे घूरे जा रहा था जबकि जॉन ऑफिस के अंदर चारों तरफ नजर घुमा रहा था । करीब पांच मिनट उनका समय खराब करने के बाद कोम जम लोलैंड ने फाइल बंद की और उनकी तरफ देखा । सीक्रेट सर्विस का हमारे ऑफिस में आज पहली बार कदम पडा है । बताइए क्या सेवा की जाए उसकी साफ हिंदी सुनकर जावेद और जॉन चौकी फिर जावेद बोला, हम लोग लापता फ्लाइट तीन सौ एक की इन्वेस्टिगेशन करें तो याद है । हमें रह गई । एक अजूबे से कम नहीं था तो पूरा का पूरा प्लेन गायब हो गया और आज तक उसका कुछ पता नहीं चला । बहुत अच्छा कर रहे हैं आप लोग, उसका पता लगना चाहिए । उसी सिलसिले में आपकी मदद चाहिए । जरूर गोली, मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी आपके किसी काम आ सकी तो इससे ज्यादा गर्व की बात क्या होगी? हमारे लिए सुनकर अच्छा लगा । फिलहाल सिर्फ आपकी मदद ही मिल जाए तो काफी होगा । जावे । बोला जरूर आ गया कीजिए । आप निक नाम के किसी लडके को जानते हैं नहीं । जॉन ने अपने मोबाइल में निक्की तस्वीर निकालकर उसके सामने रख दी । तुम हमने फोन उठाया और अपना चश्मा उतारकर बेहद गौर से उसे देखने लगा । जाना पहचाना सा लग रहा है । पर कुछ याद नहीं आ रहा जाय जायेगा । करीब तीन साल हो चुके हैं । जॉन बोला हमने इसकी फोन हिस्ट्री निकलवाई दी और उसमें से और उसमें आपसे हुई कॉल्स की डिटेल पता चली है तो अच्छा फिर तो जान पहचान वाला ही होगा । तभी फोन पर बात हुई होगी । तेरे को मैं अपने फोन में देखता हूँ, उसका नंबर उसका नंबर क्या है? आप बताएंगे । जावेद ने नंबर बताया कुमकुम लोलैंड ने अपने फोन में टाइप किया और फिर बोला, अच्छा हाँ । निक ऍम नाम के किसी नई कंपनी का मालिक ता अब हमें उसका प्रोफेशन करवाना चाहता था और वह हमें उसका प्रमोशन करवाना चाह रहा था । किसी साइंस ऍम बुलाकर और जहाँ तक हमें याद आ रहा है उस एग्जिबिशन में हम नहीं जा पाए थे । उसके बाद हमने प्रमोट करने के लिए उसे लिखित रूप में कुछ हुआ के लिख कर दिए थे । उसके बाद हमने प्रमोट करने के लिए उसे लिखित रूप में कुछ वाक्य लिख कर दिए थे । बस इतनी वाक्य थी जावेद और जॉन से ध्यान से देख रहे थे । इसका मतलब आप उससे कभी फेस टू फेस नहीं मिले । जॉन ने पूछा, नहीं मिलने का मौका ही नहीं है । फोन पर ही कनेक्शन बना था । लडका अच्छा था । उसका बिजनेस मॉर्डल अच्छा था तो हमने उसको प्रमोट करने के लिए जो हो सकता था वो क्या? वैसे क्या मैं जान सकता हूँ की इस लडके का फ्लाइट गायब होने से क्या रिश्ता है । हम लोग वही पता करने की कोशिश कर रहे हैं । जब से इस इन्वेस्टिगेशन में लगे हैं । घूम फिर कर इस लडके पर ही पहुंचते हैं । इसलिए ये हमारी इनवेस्टिगेशन का हम किरदार बन गया है । मामला और दिलचस्प हो गया है क्योंकि अभी लडका कुछ समय से गायब है और इसका कोई ठौर ठिकाना पता नहीं चल पा रहा है । जॉन ने कहा, वाकई काफी हैरानी वाली बात है, जैसा कि आपने कहा तो कुछ ना कुछ कनेक्शन तो जरूर होगा । आपको उसके बारे में कोई और जानकारी है जो हमारे काम आ सके । जावेद ने पूछा, जो मैं जानता था मैंने बता दिया, कभी उस से मुलाकात भी नहीं हूँ । मुझे दुख है कि आपके ज्यादा काम नहीं आ सका । कहकर कोम झूम लालन ने आंखों से ऐसा इशारा किया कि जावेद और जॉन को उससे विदा लेने के लिए उठना पडा । आपके समय के लिए बहुत बहुत शुक्रिया । जावेद ने कहा और नमस्कार की मुद्रा में आ गया । जो हमने भी वैसा ही क्या ऍम ने मुस्कुराकर आगे जब कहीं जावेद और जहाँ उसके ऑफिस से बाहर निकले और फिर बाहर जाती हुई राहदारी में आ गए । अब क्या करना है? जॉन ने पूछा इस पर नजर रखने का इंतजाम करना पडेगा । वीआईपी आई तो फिर वीआईपी इंतजाम करना पडेगा । जावेद सामने देखते हुए बोला

chapter 22

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश अगली सुबह ही अमर ने धर्मशाला कि बस पकड ली । उसे पता था उसकी मंजिल वही है । आठ बजे की निकली बस दोपहर बारह बजे से कुछ पहले ही धर्मशाला पहुंच गई । वहाँ का नजारा मनमोहक था । दूर दूर तक बर्फ से ढकी धौलाधार श्रृंखला दिखाई दे रही थी । हरे भरे पेडों से परिपूर्ण उस शहर का मौसम सुहावना था । दोपहर होने के बावजूद मंडी की अपेक्षा धर्मशाला का तापमान ठंडा था । बस से उतरकर अमर नहीं । बस अड्डे पर ही खाना खाया । फिर टैक्सी से उस आश्रम की तरफ चल दिया । वह आश्रम धर्मशाला के छोटे से उपनगर मकलोडगंज में स्थित था, जोकि एक तरह से तिब्बतियों की भारत में राजधानी मानी जाती थी । वहाँ आने को बौद्ध मॉनेस्ट्री थी । इसके अलावा सीनों धर्म के कुछ आश्रम भी थे । कुछ ही मिनटों में वो अपनी मंजिल यानी ओसा का आश्रम पहुंच गया । वो पहाडी के ऊपर निर्मित था, जहाँ जाने वाली सडक संकरी थी । फिर भी कार्य रिक्शा द्वारा आराम से ऊपर तक पहुंचा जा सकता था । आसाराम की इमारत लाल पीले रंग की थी, जो कि वृताकार थी और वह तीन मंजिला थी । ऊपर के माले छोटे होते जा रहे थे और सबसे ऊपर एक छोटा सा नुकीला गुंबद बना था । पीछे की ओर बर्फ से ढकी धौलाधार श्रृंखला थी जिसके दर्शन से अंतर मन में एक सुखद अहसास होता था । अमर को आश्रम में प्रवेश करते ही बेहद अच्छा लगने लगा । काफी समय बाद मन में सकारात्मक भाव आ रहे थे । वहाँ चारों तरफ भव्य कपडे धारण किए दुबले पतले पहाडी लोग घूम रहे थे । उनके सिर पर मात्र छोटी चुटिया भर के बाल थे । जिस किसी की भी नजर अमर पर पड रही थी वो उसका सिर झुकाकर अभिवादन कर रहे थे । शायद वहाँ नए मेहमान का सभी इसी तरह स्वागत करते थे । आसाराम निवासियों के अलावा वहाँ कई और आगंतुक भी थे जो कि आश्रम के दर्शन करने आए थे । भारत के पडोसी सीनों देश से उपजे तीनों धर्म के कई अनुयायी भारत में भी थे और उत्तर व पूर्वोत्तर भारत के पहाडी क्षेत्रों में इनकी काफी ज्यादा थी । आश्रम में घूमते हुए एक पत्थर पर लिखी इबारत पढकर अमर को पता चला कि ये आश्रम धर्मगुरु ओसाका ने नौ साल पहले स्थापित किया था और इसका उद्घाटन तत्कालीन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा हुआ था । आश्रम में एक हॉलनुमा पूजा स्थल था जहाँ बडे बडे पानी के कलेशों के बीच टीवी चल रहे थे । दीवारों पर सीनों भाषा के बडे बडे अक्षरों में विभिन्न मंत्री लिखे हुए थे । अनुयायी पूजा करते हुए उन मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे, जिनका गुंजन हॉल में व्यापक हो रहा था । अमर उस परिवेश में मंत्र मुग्ध सा हो रहा था । यहाँ पहले ही क्यों नहीं आया? कुछ देर में पूजा समाप्त हुई और वह हॉल से बाहर आया । उसे याद आया कि वह यहाँ किसी उद्देश्य से आया था । पूछताछ के लिए उसके पास मफलर वाले की कोई फोटो भी नहीं थी । फिर उसे कुछ खयाल आया और उसने फोन में सौम्या की फोटो निकली । असली उद्देश्य तो यही है । उसने वो फोटो आश्रम निवासियों को दिखाने शुरू की । कुछ लोगों ने साफ मना कर दिया । फिर उसने वो फोटो वहाँ उपस् थित औरतों को दिखाई । उन्होंने अमर को को जवाब तो नहीं दिया पर वो उसे उपेक्षित नजरों से देख रही थी । कुछ नहीं । तीनों भाषा में उससे कुछ कहा जिसका मतलब तो वह नहीं समझा । पर भाव से समझ गया कि वह से वहाँ से जाने को बोल रहे हैं । तभी वहां उपस् थित एक जवान लडकी उठकर उसके पास पहुंची । वो शकल से शहरी लग रही थी । किसी ढूंढ रहे हो । उसने अमर से पूछा । अमर ने उसकी तरफ देखा । उसने भगवे लंका कुर्ता पायजामा पहना हुआ था । उसके मुख से साफ हिंदी सुनकर अमर को कुछ सुकून महसूस हुआ । देखिए, इस लडकी को ढूंढ रहा हूँ । इसका नाम सौम्या है, तुम्हारी रिश्तेदार हैं । अमर ने हामी भरते हुए कहा, इसके माता पिता बेहद दुखी हैं । मेरे साथ आओ । उसने कहा और एक तरफ बढ गई । एक कोने में सीढियाँ थी । वो उन पर चढती चली गयी । ऊपर राहदारी थी जिसपर किसी छात्रावास की तरह कई कमरे नजर आ रहे थे । वो कमरे में प्रविष्ट हुई । वहाँ एक लडकी कुर्सी पर बैठी खिडकी के बाहर पर्वतों का नजारा देखते हुए स्वेटर बुन रही थी दीपिका । उसने उसे पुकारा, वो पलटी । उसने लडकी को देखा और फिर स्वतः ही उसकी नजर उसके पीछे खडे अमर पर चली गई । अमर उसे ध्यान से देखते हुए धीरे धीरे उसके पास पहुंचा । पहले तो उसे देख कर उसे लगा कि शायद कोई धोखा हुआ है । उस ने कई बार मोबाइल पर सौम्या की फोटो देखी और फिर उस लडकी को देखा । लडकी की शकील मिलती जुलती तो लग रही थी और फिर भी नए नक्ष कुछ बदले हुए थे । वो लडकी उठ खडी हुई और कुछ सहमे से स्वर में बोली कौन हैं आप? तुम सौम्या हूँ नहीं, मेरा नाम देती है तो मंडी की रहने वाली हो? नहीं, तुम दिल्ली में नौकरी करती थी, नहीं तो तुम धीरज ने की को जानती हूँ । नहीं लगता है आपको कोई गलतफहमी हुई है । अमर ने एक बार और मोबाइल पर सौम्या की फोटो देखी और फिर उस लडकी पर नजर डाली । वाकई दोनों अलग थी और फिर इस लडकी को कैसे धोखा हुआ । उसने पलट कर उससे सवालिया दृष्टि से देखा और फोन दिखाया । एक बार को तो देखने पर ये बिल्कुल दीपिका जैसी लग रही है । मैं भी धोखा खा गई । वहाँ सी आप यहाँ कब से रह रहे हैं? अमर में दीपिका से पूछा अभी कुछ ही दिन हुए हैं, आपके शहर से हैं, धर्मशाला से ही अनाथ हो । पहले एक अनाथ आश्रम में रहती थी । कुछ समय पहले इस आश्रम के बारे में सुना और क्योंकि मैं तीनों धर्म में शुरू से ही विश्वास रखती थी तो यहाँ पर आ गई । अमर कुछ पल वही खा रहा । अपने अगले कदम को लेकर वह विचारता रहा । फिर अचानक बोला, आपको कष्ट देने के लिए सौरी आपकी शती काफी मिलती जुलती है । सौ में ऐसे दरअसल यह लडकी मंडी से गायब है । इसके मामा बेहद परेशान है । मैं प्रार्थना करूंगी वो आपको जल्दी मिल जाए । थैंक्स । अमर ने कहा फिर वापस नीचे की तरफ चल दिया । उसके साथ आई लडकी वहीं रुक गई । अमर नीचे आ गया । ऐसा लग रहा था कि मंजिल मिल गई । पर लगता है अभी मंजिल काफी दूर है । नीचे आकर वापस पूजा हॉल में आ गया । एक जगह पालथी मारकर बैठकर उसने आंखें मूंद ली । यू तो अमर शायद ही कभी किसी मंदिर गया । पर आज इस आश्रम में आने के बाद उसे कुछ अलग महसूस हो रहा था । उसका मन उद्वेलित था । वह मन ही मन रिंकी की आत्मा की शांति की प्रार्थना करने लगा । वो इस बात के लिए भी प्रार्थना करने लगा कि उसे अपने ऊपर लगे इल्जामों से बडी होने के लिए सही मार्गदर्शन मिले । कुछ देर बाद उसने आंखें खोली । उसने हॉल की दीवार पर आलोकित हो रहे मंत्रों की तरफ देखा । अचानक उसकी नजर उसके सामने रखे फूलों पर कहीं । उसने देखा की पूजा करते हुए लोगों के सामने पुजारी पुजारी ने प्रसाद की तरह फूल रख रहे थे । उसने दूसरों का अनुसरण करते हुए फूल उठा लिया । तभी उसने देखा फूलों के बीच एक छोटा सा नोट था । उसने पढा एक घंटे बाद आश्रम के बाहर मिलेगा । अमर ने हैरानी से चारों तरफ नजर घुमाई उसे पीछे दीपिका लोगों के सामने अपनी डेलिया से फूल रखती नजर आई । उसने अमर को अनदेखा कर दिया । अमर ने मुस्कुराते हुए फूल और नोट अपनी जेब में रखे और आश्रम से बाहर की तरफ चल दिया । आसाराम से बाहर कुछ दूरी पर एक पान की दुकान से सिगरेट का पैकेट हासिल करने के बाद अमर यूँ ही सडक किनारे समय व्यतीत करने लगा । करीब एक घंटे बाद दीपिका बाहर निकलती नजर आई । अमर के पास से निकलते हुए उसने एक सरसरी नजर उस पर डाली और आगे बढ गई । अमर उसके पीछे चल दिया । कुछ दूर जाने के बाद वो सी पहाड कुछ दूर जाने के बाद वो उस पहाडी के कोने पर आ गए जोकि एक सनसेट पॉइंट था । फिलहाल वहाँ ज्यादा चहल पहल नहीं थी । दीपिका खाई के किनारे रेलिंग के पास जाकर खडी हो गई । सामने ऊंचे ऊंचे पर्वत थे और उन के नीचे स्लेटी रंग के बादल तैर रहे थे । अमर उसके पास आकर खडा हो गया और सामने देखते हुए बोला तो तुम ही सौम्या हो । उसमें स्वीकृति में सिर हिलाया, तुम यहाँ क्या कर रही हूँ? मैं किसी आश्रम में रहती हूँ । क्या तुम्हारे माँ बाप को इस बारे में पता है? उसने इंकार में सिर हिलाया । उसके चेहरे पर पीडा के भाव उभर आए । पापा मम्मी कैसे हैं तो हमारे पेरेंट्स है । बुजुर्ग हैं तो मैं मालूम होना चाहिए । आप आप कौन हैं? एक सरकारी जासूस मैं तुम्हें तलाशते हुए अब तक तकरीबन पूरा हिमाचल घूम चुका हूँ । मुझे क्यों तलाश रही थी? धीरज ने की के लिए उसने पलटकर अमर को ध्यान से देखा । अमर को उसकी खूबसूरत आंखों में दुख के भाव देखें । यहाँ आप भी उस की टीम थी । कौन सी धीरज के मिशन की थी नहीं, पर मुझे उसके बारे में जानना है । धीरज तो मर चुका है । अब आप लोगों को और क्या चाहिए? वो लडते हुए शब्दों में बोली शायद इस को पता नहीं है की नीति की मौत मेरे हाथों ही हुई थी । अगर पता चला तो धीरज के मिशन के बारे में पूरी जानकारी जानना देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है । मुझे उम्मीद है कि तुम उसके बारे में जो कुछ जानती हो, सच सच मुझे बताओगे बताने की नियत न होती तो यू आपसे मिलने नाती सौम्या उसे गौर से देखते हुए बोली तो मुझे पहचान नहीं पाए थे । वापसी चले जाते ना । अमर चुप रहा । सौम्या पलट कर नीचे वादियों की तरफ देखने लगी और बोली, इन गहरी वादियों की तरह ही गहरे रहते थे उस शख्स के जिससे मैंने प्यार किया था । कभी सोचती हूँ अगर वो मेरी जिंदगी में नाया होता हूँ तो आज मेरी जिंदगी कितनी अलग होती है? ऍम शायद भगवान को यह मंजूर नहीं था कि मैं एक साधारण जिंदगी जियो । देखिए, मैं दिल्ली में का आईटी कंपनी में नौकरी कर रही थी, वहीं धीरज नहीं की । यू के में हमारा क्लाइंट था वो अक्सर काम के लिए उससे मेरी बातें होती थी । धीरे धीरे हम दोस्त बन गए और फिर दोस्ती कम लगाव में बदल गयी । पता नहीं चला । मुझे बिलकुल भी नहीं पता था कि धीरज मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने के अलावा एक इंटरपोल एजेंट भी था । हालांकि उसने मुझे अपनी फैमिली के बारे में सब सच सच बता दिया था । उसके फादर की कैसे करप्शन के हाथों बलि चढी और फिर उसकी माँ ने दूसरी शादी की और यूके शिफ्ट हो गई । इस तरह हम दोनों के बीच लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन बन गया । आज से करीब पांच साल पहले उसने मुझे बताया कि वो इंडिया आने वाला है । मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि अब हम पहली बार फेस टू फेस मिलने वाले थे । वो इंडिया आ गया और क्लाइंट क्रिकेट के बाद हम दोनों कंपनी के बाहर मिले । दिल्ली में सात दिन सात खून में । फिर हम दोनों के बीच प्यार का इजहार हो गया । फिर उसने मुझे बताया कि असलियत में वो एक इंटरपोल एजेंट था । मल्टीनेशनल की नौकरी तो सिर्फ दिखावा थी और इस वक्त वो एक मिशन पर भारत आया था और सीबीआई में उसके लिए का ऑफिस उपलब्ध था । कुछ ही दिन में वो एमएनसी की नौकरी छोडकर पूरा समय मिशन को देने वाला था । मैं हैरान रह गई पर मैं खुश थी कि धीरज एक बहुत अच्छा काम कर रहा था । मेरे लिए उसके प्रति प्रेम और सम्मान दोनों बढ गए क्योंकि वो दिल्ली में ही था । हम अक्सर मिलते रहते थे । मैंने कई बार उसे अपने साथ मंडी चल कर मेरे परिवार वालों से मिलने के लिए कहा पर वो टालता रहा । उसके मिशन का काम बहुत ज्यादा था और उसके मुताबिक वो छुट्टी अफोर्ड नहीं कर सकता था । आज सोचती हूँ तो लगता है कि वह महज मुझे डाल रहा था । शायद मिशन पूरा होने तक वो किसी सीरियस रिलेशनशिप में नहीं बंधना चाहता था । मैंने उससे मिलना कम कर दिया । वो भी कहीं मशरूम था । फिर एक दिन उसने मिलने का आग्रह किया । उसका कहना था की मिलना बेहद जरूरी है क्योंकि उसके बाद वो काफी समय तक नहीं मिल सकेगा । उस रात हम मिले और उसने बताया कि वह अंडर ग्राउंड होकर काम करने वाला है और इस बीच उसका किसी से कोई संपर्क नहीं हो सकेगा । इस काम में कुछ साल लग सकते थे । उस रात में उससे लिपटकर बहुत हुई थी । ऐसा लग रहा था की अब मैं धीरज से कभी नहीं मिल सकेंगी और और देखो मेरा सोचना कितना सही था । वाकई उस रात के बाद मैं उस से कभी नहीं मिल सके । कहते हुए सौम्या फफक फफककर रोने लगी । उसकी कहानी सुनकर अमर का दिल भी पसीज आया । आखिर क्या जरूरत थी नेगी को किसी लडकी की जिंदगी बर्बाद करने की जबकि वो जानता था कि जिस रहा पर वो चल रहा है वहाँ कुछ भी हो सकता है । किसी जंग पर गए फौजी की बीवी की तरह मैंने दो साल उसका इंतजार किया । फिर एक दिन अचानक उसका व्हाट्सएप्प कॉल आया मैं बेहद खुश हुई । मुझे लगा धीरज वापस आने वाला है । पर उसने मुझसे कहा कि उसका मिशन अब बेहद क्रिटिकल मोड पर पहुंच । मुझे लगा धीरज वापस आने वाला है और उसने मुझसे कहा कि उसका मिश्राना बेहद क्रिटिकल मोड पर आ पहुंचा है । आगे कुछ भी हो सकता है । अगर उसे कुछ हो गया तो मैं तैयार रहूँ क्योंकि उसके बाद मैं भी सेफ नहीं रहूंगी । पर उस दशा में मुझे मदद मिलेगी । फिर क्या हुआ रहस्य से रोमांचित होते हुए अमर ने पूछा । उसके बाद मुझे समाचार मिला की वो नहीं रहा । मिशन के दौरान उसकी डेथ हो गई । उसकी आंखों से आंसुओं का सैलाब बहता ही जा रहा था । समय समय समय ॅरियर लॉस पर निकी भटक गया था । बदले की भावना के चलते हैं । उसने गलत राह पकड ली थी । उसने मिशन पर बेहद अच्छा काम किया था और उसने जो अपने ही देश से बदला लेने की प्लानिंग की हुई थी वही उसे महंगी बढ गई । जिस धीरज को मैं जानती थी वो एक कर्मनिष्ठ और सच्चा इंसान था । मैंने उससे प्रेम किया था । उसे अच्छी तरह से जानती थी तो मैं मैं तो मैं कोई प्रवचन नहीं देना चाहता पर धीरज और मेरे जैसे जासूसों की अच्छी खासी ट्रेनिंग होती है । हम लोग अपने मोटिव कभी आम इंसान पर जाहिर नहीं होने देते हैं । धीरज भी एक जासूस था और तुम जानती थी कैसे? वह दिखावे के लिए मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहा था । क्या उसकी असलियत कोई और जानता था? वो तुम से प्रेम कर बैठा तो उसने खुद के बारे में तुम्हें काफी कुछ बताया । पर क्या उसने अपने मिशन के बारे में तुम्हें कभी कुछ बताया? नहीं ना एक जासूस ये बातें आम इंसान के साथ शेयर नहीं करता और अपने असली मिशन के बारे में तो तो वैसे भी तुम से कभी सच नहीं बोलता क्योंकि उसके बारे में जानकर तो मुझसे नफरत करने लगती है । क्या था उसका? इसलिए मिशन और रहस्य में फंसे हुए स्वर में बोली वो अपने ही देश यानी भारत के अंदर न्यूक्लियर मिसाइल गिराकर क्रांति लाना चाहता था? नहीं ऐसा नहीं हो सकता । पर ऐसा ही हुआ है । मैं नहीं मान सकती हैं । मैं नहीं मान सकती तो तो ऐसे बोल रहे हो जैसे वो कोई टेरेरिस्ट था और मैंने भी न्यूज वालों की है । मैं जानती हूँ ये न्यूक्लियर हमले का मिशन तो आईएसआई के का था । अमर ने ना में सिर हिलाया वो सच है । पर धीरज नेगी कमीशन भी यही था । तुम जानते क्या होगा? वो रोज भरे स्वर में बोली तुम झूठ बोल रहे हो ना यही तुम जासूसों का काम होता है ना । अभी तुम ही ने बोला था ना धीरज के खिलाफ मेरे मन में नफरत पैदा करके मुझ से क्या हासिल करना चाहते हो? मैं तो वैसे भी तुम्हें सब कुछ सच सच बता रही हूँ । देखो मैं तुम्हें किसी गलतफहमी में नहीं रखना चाहता हूँ । तुम जानती होगी उसके पिता के साथ क्या हुआ था । उसी का बदला वो पूरे देश से ले रहा था । सौम्या वापसी अमर को देखती रही । उसके चेहरे पर आश्चर्य और विश्वास के मिश्रित भाव थे । मैं जानता हूँ लेगी के साथ ही तुम्हें अब तक प्रोटेक्ट करते आए होंगे । इसलिए तो मैं सच नहीं पता हूँ । मुझे नहीं पता हूँ सौम्या झुंझला उठे हैं वो और मुझे ये जरूर पता है कि उसके ऊपर क्या बीती थी । उसका बचपन कैसा था, वो कैसा इंसान था तो हम नहीं जानते । पर वो एक बेहद सेंसिटिव इंसान था और कैसे होता है जब एक छोटे मासूम बच्चे को अपने पिता की दर्दनाक मौत के बारे में पता चलता है । क्या तुम समझ सकते हो, उसके मन पर क्या असर होता है । हो सकता है उन कारणों से उस की थिंकिंग बदल गए हो । हाँ हो सकता है, पर इससे देश पर हमला करने की कोशिश तो जस्टिफाई नहीं की जा सकती । अचानक ही उसके चेहरे के भाव बदले । तुम जरूर जानते हो । वो हमर के नजदीक आ गई और बोली तो मैं पता है उसकी मौत किन हालातों में हुई तो मैं जरूर पता है उसे किसने मारा हूँ? बताओ मुझे तुम ये जानकर क्या करोगी? पता नहीं पर मुझे हक है ये जानने का तो हमारे देश की सुरक्षा बल में से एक फॅमिली के हाथों मारा गया था । अमर उसकी आंखों में झांकते हुए बोला, सौम्या के चेहरे पर भावुकता छाई हुई थी । बडी मुश्किल से उसके मुंह से शब्द निकले । क्या उसे फिर हमारी रोका नहीं जा सकता था? ऍम शायद से कभी सही काउंसलिंग नहीं मिली । शायद साइकैट्रिस्ट हेल्प मिलने के बाद वो सही हो जाता है । अमर नजरें चुराते हुए बोला जिन हालातों में देश की सुरक्षा दांव पर लगी हो और एक पल में फैसला करना हो, सुरक्षाबल इसी तरह से फैसला करती हैं । जैसा की जंग के मैदान में आर्मी वाला दुश्मन को देखते ही गोली चला देता है । उनके पास सोचने का समय नहीं होता । अपने देश को तबाही से बचाने के लिए अगर किसी ने कदम उठाया तो ये सही कदम था । जब न्यूक्लियर हमला होता है ना तो उसके परिणाम लोग कई सालों कई पीढियों तक भुगतते हैं । क्या तुम नहीं जानती जापान में क्या हुआ था? सौम्या चुपचाप सुनती रही तो फिर लेगी की मौत के बाद तुमने क्या क्या अमर ने पूछा । न्यूज मिलने के बाद दो दिन बाद ही मुझे कुछ लोगों ने अप्रोच किया और फिर पूरा प्लैन बनाया गया । शायद नेगी को पहले से ही अंदेशा हो गया था कि दुश्मनों को पता चल सकता है कि उसका मेरे साथ संबंध है इसलिए उसने मुझे बचाने का पूरा इंतजाम कर रखा था । फिर प्लान यही बना कि मैं दिल्ली से तुरंत अपने घर चली जाऊँ और फिर वहाँ मेरी मौत का नाटक करके हमेशा के लिए मुझे गायब कर दिया जाएगा । पर तुम्हारे परिवार वालों पर जो बीत रही हैं तुम जानती हूँ अच्छा मैं जानती हूँ । उन्हें पता है मैं जिंदा हूं क्या अमर ने चौंककर उसकी तरफ देखा हूँ । ये सच है । फिर तो मानना पडेगा तुम्हारे पेरेंट्स का काफी अच्छी एक्टिंग करते हैं । दरअसल उनकी एक्टिंग नेचुरल इसलिए भी हुई, दरअसल उनकी फॅमिली इसलिए भी हुई है क्योंकि जब मैं गायब हुई थी तो वाकई उनको यही खबर मिली थी कि मैं मर गई और उसके कुछ दिन बाद मैं उनसे गुप्त रूप से मिली और मैंने सब कुछ बता दिया । तो तो तुम्हारा प्लान क्या है? यहाँ कब तक रहोगी? मैं यहाँ किसी प्लान के तहत नहीं रह रही हैं । मेरी मौत के नाटक के बाद नहीं की के साथियों ने मुझे नई जिंदगी शुरू करने के लिए कई आईडिया दिए थे । पर मैं तीनों धर्म को पहले से मानती थी । मेरे साथ जो हुआ उसने मुझे धर्म की तरफ और भी समर्पित कर दिया । उन्होंने मुझे मेकप के सहारे शक्ति बदलना सिखाया और नया नाम और नई आईडेंटिटी दिलवाई । इसलिए तो मुझे पहचान नहीं सके थे । नहीं तो इसलिए जब तुम दिल्ली से चली थी तो पहले धर्मशाला आई थी और उसके बाद मंडी गई । तुम्हें कैसे पता चला? उसने चौंककर पूछा तो भूल गई हूँ । मैं एक सीक्रेट सर्विस का एजेंट हूँ । इस तरह के सीक्रेट पता करना मेरा जवाब है तो उस वक्त धर्मशाला आने की क्या वजह थी? धीरज के दोस्तों को पता था की दुश्मन मुझे गायब पाकर दिल्ली से ढूंढते हुए सीधे मंडी ही पहुंचेंगे । इसलिए दिल्ली से सीधे धर्मशाला आकर ही सारी प्लानिंग की गई । अच्छा तो यहाँ किसके साथ रुकी थी? कौन थे वो लोग उससे तुम्हें क्या मतलब? मैं उन लोगों के बारे में कुछ नहीं जानती । चेहरे तो पहचानती ही होगी । देखो मैं जितना कुछ जानती थी तो मैं सब कुछ बता दिया । अब तो हर क्या चाहते हो? जिन लोगों ने मेरी मदद की, मैं उनके खिलाफ नहीं जा सकती । देखो अब तुम जान चुकी होगी । धीरज नेगी गलत राह पर था तो उसके साथ ही भी गलत राह पर हो सकते हैं । तुम्हें कैसे पता जो तुम्हें खोजते हुए आने वाले थे । वो देश के दुश्मन थे । वो मेरे जैसे जासूस भी हो सकते हैं जो देश का हित चाहते हैं । सोमया के चेहरे पर असमंजस के भाव आ गए । ऑटोमिक सीधी साधी लडकी तो मैं जो बोला गया तो उन्हें सच समझ लिया । अच्छा ये बताओ, मैं तो यहाँ से लौटकर जा रहा था । फिर तुम खुद आगे बढकर मुझसे की मिलेगी । मुझे अपनी असलियत की बताई तो मेरे मम्मी पापा का जिक्र किया था । इसलिए मुझे चिंता हो गई थी और मुझे लगा शायद तुम भी नेगी के दोस्तों में से एक हो हूँ । अमर मुस्कुराया कितनी आसानी से तुमने मुझपर भरोसा कर लिया । अगर मैं तुम्हारा नुकसान करने की नियत से आया होता तो? सौंफ यानी शंकित ने कहा उस पर डाली, पर तो मैं ऐसे लगते तो नहीं । यही तो बात है । आप किसी की शकल से उसकी इंटेंशन नहीं बता सकते हैं, लेकिन मैं तुम्हारे लिए अच्छा ही निकला और अगर सब ठीक रहा तो तुम्हें इस तरह की गुमनाम जिंदगी नहीं बतानी पडेगी और बदले में तुम उन के बारे में जानना चाहते हो, जिन्होंने बुरे वक्त में मेरी मदद की । तुम जानना चाहते हो मैं उन लोगों की जानकारी तो मैं दे दूँ, जिन्होंने मेरी जान बचाई । तो क्या मुझे इस हद तक खुदगर्ज समझते हो? तुम चाहे मेरे साथ कुछ कर लो उन लोगों के बारे में? मैं तो मैं कुछ भी नहीं बताउंगी । तुम्हें क्या लगता है सोहनगढ माइंड में जो कुछ हुआ उसका परिणाम सिर्फ तुम भुगत रही हो । बहुतों ने अपनों को खोया है । एक कर्तव्यनिष्ठ कमिश्नर हुआ करता था । उसे उसकी बेटी ने अपनी आंखों के सामने जिंदा जलकर मारते हुए देखा था । एक भाई बहन प्रतिशोध की आग में जल रहे थे, पर दोनों ने अलग तरीका चुना । एक ने कानून के साथ और दूसरे ने कानून को हाथ में लेकर तुम किसकी बात कर रहे हो? नेगी के मिशन में उसका एक पार्टनर था । फोन इंसानी और नूरमोहम्मद तो असल में एक इंडस्ट्रलिस्ट था और गुप्त रूप से नेगी के साथ मिशन पर लगा था । उसकी बहन एक जासूस थी । जब उसे पता चला कि उसका भाई एक आतंकवादी बन चुका है और उसे रोकना नामुमकिन हो गया तो उसे खुद अपने हाथों से उसकी जान लेनी पडी । पर इस अपराधबोध के चलते वो खुद भी जीवित नहीं रह सकी और उसने मेरी आंखों के सामने अपनी कनपटी में गोली मारी । सुन्नियों से देखती रही तो उस वक्त वही थी । उसने पूछा हाँ, अमर को अचानक लगा कि उसे शीर्षक उतारने के चक्कर में वो कुछ ज्यादा ही बोल गया । धीरज कैसे मारा था? अमर चुक रहा है । प्लीज मुझे बताओ । मैं जानना चाहती हूँ मैंने तुम्हें बताया तो था एनएसजी । मैंने तुम्हें बताया तो था एनएसजी मतलब उसे कहाँ गोली लगी थी? क्या वह दर्द से तडप रहा था क्या? क्यों तुम अपने हम को बढाना चाहता हूँ । तीस । मेरे लिए जानना जरूरी है । वो न्यूक्लियर मिसाइल चलाने जा रहा था । तब मैंने जी ने उसे चेतावनी दी पर फिर भी वह नहीं रुका तो उस पर फायरिंग कर दी । गोली ठीक उसके सर में लगी थी । वो तुरंत ही मर गया था । सौम्या ने आंखे बंद कर ली । उनमें से आंसू टपक पडेंगे । कुछ पल बाद खुद को संयमित करते हुए वो बोली मैं मानती हूँ की हिंसा में कुछ नहीं रखा है । मेरिसा जो हुआ सो हुआ । पर अब मैं शांतिपूर्वक अपना जीवन बिताना चाहती हूँ तो मैं आप लौट चाहते नेगी के बारे में यहाँ तो मैं इससे ज्यादा कुछ और पता नहीं चलेगा । मैं तुम्हारी तरह जासूस ना सही पर लोगों की पहचान मुझे भी है । जिन लोगों ने मेरी मदद की वह शांतिप्रिय लोग शान्तिप्रिय इलाज किसकी थी? कौन सी जिसे तुम्हारी बताकर केस बनाया गया था उससे क्या फर्क पडता है? फर्क नहीं पडता है । अभी तो तुम हिंसा के खिलाफ थी और वो लोग शांतिप्रिय हैं । किसी की जान लेकर ये स्वांग रचाया गया और कुछ फर्क ही नहीं पडता । तुम्हें क्या लग रहा है? किसी का मर्डर किया गया था । ऍफ हॉस्पिटल से अरेंज की गई थी । गुमशुदा लडकी मरी हुई मिली थी तो मैं क्या बताऊँ तो मैं खुद थोडी ना अरेंज की होगी नहीं और मुझे पता है तो तुम चाहो तो मंडी के हॉस्पिटल जाकर पता कर लेना । लाश अरेंज करना आसान नहीं था, पर जब अरेंज हो गए उसके बाद प्लान बनाया गया । ऐसा नहीं था कि कहीं से रेंडम लडकी पकडी और उसे मारकर मेरी जगह डाल दिया गया । ये लोग दरिंदे नहीं, निर्दोष लोगों को इस तरह मरने का नाटक करके अपनी आइडेंटिटी खत्म नहीं करनी पडती है । तुम समझ नहीं रहे हो समझ तुम नहीं रही । वो लोग शायद नहीं चाहते कि तुम सरकार के हाथ लगाओ । उन्हें डर होगा कि तुमसे नेगी की कोई इंफॉर्मेशन लीक हो सकती है । अगर ऐसा होता तो वो मुझे वाकई मार ही नहीं देते । तर्क अच्छा है, पर मैं जानता हूँ । नेगी की दुश्मनी भारत के आम नागरिकों से नहीं बल्कि सरकार से थे । शायद उसके साथियों की धारणा भी कुछ ऐसी थी, लेगी को तो नहीं बचाया जा सका । पर अगर तुमने मदद की तो इन लोगों को जिंदा पकडकर सही रास्ते पर लाया जा सकता है । सौम्या के चेहरे पर ऐसे भाव आएँ जैसे अब अमर की बात उसे समझ आने लगी हो । अगर तुम वाकई मानती होगी धीरज और उसके साथ ही अच्छे लोग हैं तो उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मुझे दो ताकि उन्हें आतंकवादी की उपाधि ना मिले, बल्कि उन्हें सिर्फ गुमराह नवयुवक माना जाए । सौम्या बेचैनी से इधर उधर देखने लगी है । मैं जब तक तुम्हारे इन रहनुमाओं से नहीं मिलने जा तब तक विश्वास नहीं कर सकता कि वह देश के रक्षक हैं या भक्षक । मैं तो मैं उनसे नहीं मिला सकती । तुम है मुझे किसी से मिलवाने की जरूरत नहीं । वो लोग जहाँ मिल सकते हैं वो लोकेशन और उनके कॉन्टेक्ट नंबर मुझे दे दो । देखो मेरे पास कोई जानकारी नहीं है । वो लोग खुद मुझ से मिलते थे और कांटेक्ट करते थे । फोन का कभी इस्तेमाल नहीं किया । परसों उनमें से कोई मिलने आया था । यहाँ पूछते हुए अमर ने उसे मफलर वाले का हुलिया बताया । हाँ आया था क्या नाम है उसका? मैं उसे रघु के नाम से जानती हूँ । क्यों मिलने आया था तो उसने मुझे सतर्क रहने के लिए कहा था । उसका कहना था की कोई मुझे मंडी में ढूंढू कहते हुए सामने आ जाना की रोक नहीं अमर मुस्कुराया और फिर बोला अब समझे ना एक जासूस देश के रक्षक से सतर्क रहने के लिए कह रहे थे वो अगर उनकी नियत अच्छी थी तो ऐसा क्यों करते हो । हो सकता है वह तुम्हारी असलियत ना जानती हूँ । बस ये देख रही हूँ कि कोई मुझे ढूंढ रहा है । अमर ने उसे प्रशंसात्मक भाव से देखते हुए कहा, मानना पडेगा तो उनके बारे में गलत सोचने के लिए तैयार ही नहीं । जिन्होंने हमेशा मदद की हो, उन पर इतनी आसानी से भरोसा कैसे टूटेगा? ॅ पर उन्होंने मुझ पर जानलेवा हमला किया था तो उन्होंने अगली बार अपनी असलियत बता देना । शायद वो सहयोग करें । अचानक वो चारों तरफ पडती । भीड देखकर कुछ उद्वेलित हो गई । शाम होते ही लोग घूमने फिरने उस तरफ आने लगे थे । अब मैं चलती हूँ । बहुत देर हो गई । तेजी से पलटते हुए वो लडखडा गई । अमर ने लगभग कर उसे गिरने से बचाया । फॅस उसकी आंखों में देखते हुए कुछ शर्माते हुए बोले, ऍम तो मैं तो मैं करना चाहता हूँ तो मैं कैसे भी सही पर मुझ पर विश्वास करके इतना कुछ बताया तो तुम्हारा नाम क्या है? अमर शर्मा अमर बोला, अमर मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगी । पर प्लीज मैं अपने जीवन में कोई नए ट्विस्ट नहीं चाहती । चिंता मत करो, सब सही हो जाएगा । अगली बार जब उन में से किसी से मुलाकात होने वाली हो तो क्या, तो मुझे बताओगे वो हिचकी अगर वाकई शांति चाहती हो तो ये जरूरी है । उसने सहमती में सिर हिलाया, देखो मुझे इस नंबर पर कॉल करना । अमर ने कागज पर उसे एक नया मोबाइल नंबर लिख दिया जो उसने हाल ही में हासिल किया था और अगर कॉल ना लगे तो मैं से छोड देना । आशा करता हूँ तुम्हारे पास फोन है हो गया मैं अमर ने उस से विदा ली और फिर दोनों संसद पाँच से अलग अलग दिशाओं में बढ गए । सूरज धीरे धीरे पहाडों की ओर में छिपने को अग्रसर था ।

chapter 23

वर्तमान समय नई दिल्ली जॉन और जावेद सीक्रेट सर्विस की दिल्ली ब्रांच के गेस्ट हाउस में अपने कमरे में शाम बिता रहे थे । जब जॉन को इल्यास का फोन आया बोलो लिया । फॅमिली के बारे में कुछ कुछ पता चला है । उसे दिल्ली में ही रिक्रूट किया गया था । उससे पहले वह पुरानी दिल्ली में उठाईगिरी चोरी चकारी क्या करता था । फिर उसने दो मर्डर किए जिससे आईएसआई काफी इम्प्रेस हुआ और फिर उसे रिक्रूट किया गया । वो कहाँ रहता था? काफी समय पुरानी दिल्ली में ही रहा था । एड्रेस मिलेगा, कोशिश करता हूँ उसको अच्छे से जानने वाला कोई और पता चले तो भी बताना जी जरूर । फोन रखकर जॉन बोला उम्मीद है जल्दी उसके बारे में कुछ सबूत मिल जाए । जावेद ने सहमती में सिर हिलाया । इस वक्त उसने लेपटॉप पर एक लिस्ट खोल रखी थी । क्या देख रहे हो फ्लाइट तीन सौ इक्कीस पैसेंजर लिस्ट इन सभी पैसेंजर्स के बारे में जानना जरूरी है क्योंकि इन्हीं में से कोई पैसेंजर इस हाईजैकिंग या विमान गायब होने की वजह हो सकता है । अब कोई एक पैसेंजर है या नहीं यह पता लगाने वाली बात है । जॉन भी लिस्ट देखने लगा तो ठीक कह रहे हो तो जो जांच पहले हुई थी, उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? उस रिपोर्ट में सभी पैसेंजर्स के बारे में लिखा हुआ था । कोई भी ऐसा वीआईपी नहीं था जिसकी वजह से पूरा प्लेन हाईजैक कर लिया जाए । ज्यादातर राम नागरिक थे, कुछ बिजनेस मैन, तीन पॉलिटिशियंस के रिश्तेदार इत्यादि । और इनमें से कोई भी ऐसा है हम पर इन में से कोई भी ऐसा अहम इंसान नहीं था जिसकी वजह से कोई इतना बडा अभियान रखें । पॉलिटिशन के रिश्तेदार क्या तुमने देखा? कौनसे पॉलिटिशन थे? हाँ, मैंने देखा था । अलग अलग पॉलिटिशन थे । कोई बहुत बडा नहीं था । सब स्टेट लेवल तक के पॉलिटिशन थे । दो पैसेंजर्स अलग अलग नेताओं के बेटे थे और एक कि बीवी थी । तीनों ही पॉलिटिशियन सिया । उनके इन तीन रिश्तेदारों का आपस में दूर दूर तक कहीं कोई रिश्ता नहीं था । ऐसे भी कोई फिरौती नहीं मांगी गई थी । जॉन सोच में डूबता हुआ बोला, हाँ वही तो पर अब मेरा ध्यान उन पांच लोगों पर है जिन पर इस रिपोर्ट में खास तवज्जो नहीं दी गई । ऐसे पांच लोग जो ये फ्लाइट बोर्ड करने वाले थे और उन्होंने बोर्ड नहीं की, उनका रिजर्वेशन था । फिर भी उन्होंने फ्लाइट बोर्ड नहीं की । मेरा ध्यान उन पर हैं हो सकता है । आखिरी मौके पर प्लान चेंज हो गया हूँ । ऐसा अक्सर होता ही है तो लोग फ्लाइट कैंसिल भी नहीं करते क्योंकि पैसा तो उनका पूरा जाता है । तुम्हारी बात ठीक है । पर मुमकिन है कोई दूसरी वजह हो जो हमने जावेद की तरफ देखा और सहमती में सिर हिलाया । ऍम ये पांच लोग जॉन ने पूछा सोचू कि नामक धर्मगुरु और उसके चार शिष्य सूजूकी तीनों देश का वो धर्मगुरू जो तीनों देश से भागा हुआ और भारत ने उसे शरण दी हुई है । हाँ, वही उन के अलावा कोई और भी ऐसा पैसेंजर था जिसने फ्लाइट बोलने की नहीं, यही पांच दिखाई दे रहे हैं । जावेद ने कहा, जॉन स्क्रीन को घूरते हुए बोला इन्हें किस तरह कॉन्टैक्ट किया जा सकता है? मुझे नहीं लगता । उसके लिए कोई विशेष प्रोटोकॉल है । आखिर वो रिफ्यूजी हैं, कोई वीआईपी नहीं । हम लोग अपने मिशन के अंतर्गत आराम से उनसे मिल सकते हैं । ज्यादा दूर भी नहीं है । जॉन बोला हिमाचल में या नाइन का आश्रम का धर्मशाला चलना मिलने चलते हैं । पर ये लोग तो तीनों भाषा बोलते हैं । एक इंटरप्रेटर भी साथ ले जाना पडेगा । उसकी व्यवस्था चीफ करा देंगे । बढिया फिर दो तीन दिन में निकलते हैं । जोन उठते हुए बोला तब तक यहाँ जो काम फैलाया उसे निपटा लेते हैं । ऍम रजा मालिक इन तीनों के सिरे देखने हैं । कहाँ जाकर मिलते हैं?

Chapter 24

वर्तमान समय से सात साल पहले सन दो हजार बारह अज्ञात जगह ऍम कमरे में सिगरेट का धुंआ मौजूद था । धीरज नहीं कि अपने दो साथियों के साथ उस कमरे में मौजूद था । उनमें से एक लेपटॉप के सामने बैठा था । दो सर पर हाथ रखकर खडा था वो छोटे कद का छोटी छोटी आंखों वाला बलिष्ठ पहाडी था था । सिगरेट का कश लेकर धूम छोडते हुए नेगी बोला क्या हुआ नहीं टम परेशान क्यों तुमने मेरे प्लान के बारे में सोचा सोचा पर वो प्लैन हमारा नहीं किसी और का है । मिशन अंतर्द्वंद किसी और के टर्म्स पर नहीं चल सकता है । कौन टाॅस बता रहा है । अल्टीमेट ली तो प्लान किसी और का है तो टाइम भी उसी की चलेंगे । ऍम हमें उनके साथ मिलकर बनाना है जो हमारा है । देश को करप्शन से मुक्त करना सिर्फ कहने से क्या होता है? फॅस कर लें । अमीन प्लेन हाईजैकिंग कोई मजाक नहीं और इसके पीछे उनका असली उद्देश्य कुछ और भी हो सकता है । तो मुझ पर विश्वास नहीं, बेटों का सवाल है । जिस तरह तुम्हें मुझ पर विश्वास है उसी तरह मुझे भी उन पर है । मैं जानता हूँ कोई टेरेरिस्ट माफिया नहीं । मैं तुम्हारी उनसे मीटिंग कराता हूँ लेकिन उसे टोका तो बाद में करेंगे । पहले बताओ देश से किया है । इस प्लान के जरिए दो करोड लोगों को ब्लैकमेल किया जाएगा । उससे हजारों करोड की जो धन राशि मिलेगी उसे वापस गवर्मेंट को पहुंचाया जाएगा । सोचो ये बात जब आम पब्लिक तक पहुंचेगी तो हर कोई जाने का की मिशन अंतर्द्वंद वाले क्या कर सकते हैं । हमें माँ सपोर्ट मिलेगा उसका हम क्या करेंगे? हमें इलेक्शन थोडी ना लडना तुम ही कहते हो ना की मिशन के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पता चलना चाहिए । हाँ और प्लेन में कितने बेकसूर लोग होंगे उनकी जान को खतरे में डालना ठीक नहीं है । हाँ, कुछ बडा करने के लिए थोडा तो रिस्क लेना ही होगा और अभी प्लान बनना है । वो हमारे ऊपर है । ऐसा प्लान बनाए कि किसी पैसेंजर को नुकसान नहीं हूँ । प्लेन ही हूँ । उन लोगों को सीधे के ना क्यों नहीं कर लिया जाएगा । वो एक वीवीआईपी से जुडे लोग हैं । उन्हें खास सिक्योरिटी हासिल है । देश में रहकर उन पर हर डालना मुश्किल है । अगर सफल हो भी गए तो सब कुछ होने के बाद कहाँ मांगेंगे । इसलिए प्लेन द्वारा देश के बाहर ले जाकर ये डीलिंग आसान होगी । फिर वो सब उनका है देख है हमें कहीं नहीं जाना होगा नेगी ने सिगरेट का फिल्टर ऐश ट्रे में कुछ ला वो सोच में डूबा था । निक निक ने पहले नेगी को यही लगा कि उसके हाल चाल पता किए जाएं क्योंकि भारत छोडने के बाद से उसके कॉन्टेक्ट में नहीं था । नेगी को पता चला कि बहुत धर्मशाला में किसी धर्म गुरु के आश्रम में रह रहा था और एक से मिलने पहुंचा नहीं तो उसे देखकर चौका फिर उसके गले लग गया हूँ लेकिन उसे आश्रम में रहने का कारण पूछा । निक ने बताया कि उसे पुलिस ने ड्रग्स बेचने के झूठे इल्जाम में फंसा दिया था और तीन साल जेल की सजा काटने के बाद डिप्रेशन से जूझता धर्मगुरु सुजुकी के आश्रम में आ गया था । नेगी उसे आश्रम से बाहर लाया । उसने उस पुलिस वाले के बारे में मिशन अंतर्द्वंद के अंतर्गत पहले नेगी ने उस सब इंस्पेक्टर के बारे में बैग्राउंड चेक किया । पता चला कि वह करप्ट ऑफिसर था । ये पहला मौका था जब नेगी ने किसी वर्दीधारी पर हाथ डाला था पर काम निर्विघ्न हुआ, उसे किडनैप किया गया । उसे टॉर्चर करके उसके सारे कालेधंधे पता किये गए और फिर उसकी लाश उसकी काली करतूतों के सबूत सहित पुलिस थाने के बाहर डाल दी गई । पुलिस ने बहुत हाथ पांव मारे पर हमेशा की तरह मिशन अंतर्द्वंद में कोई सबूत नहीं छोडा था । सब इंस्पेक्टर के सताए हो रही काफी लम्बी थी इसलिए किसी ने नहीं पर शक भी नहीं किया । उसके बाद आश्रम छोडकर निकलेगी के साथ दिल्ली आ गया और मिशन अंतर्द्वंद में उसका अहम साथ ही बन गया । अगर हमें बारिश में कुछ बदलाव लाना है तो इसी तरह से कुछ बडा करना होगा । निक बोला तभी कुछ होगा । अरबों की आबादी में यू कब तक हम एक एक तरफ से इंसान को ढूंढेंगे और सजा देंगे लेकिन चुप चाप शून्य में घूमता रहा । लेपटॉप में मशगूल उसके साथ ही में काफी देर बाद नजरे उठाए और बोला मुझे निक्की बात सही लग रही है लेकिन सहमती में सिर हिलाया ठीक है उन के साथ मीटिंग फिक्स करूँगा । निकने उत्साह से उसकी तरफ देखा फिर अपने मोबाइल की तरफ हाथ बढाया ।

chapter 25

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश पिछली शाम जब अमर ने खुद ही सौम्या को गिराया और फिर संभाला तब उसने उसकी गर्दन पर एक बेहद सूक्ष्म जीपीएस डिवाइस चिपका दिया था । ऐसा डिवाइस जो खाल पर तुरंत चिपक जाता था तो इतना चपटा था कि उसे छूने पर भी किसी को आभास ना हो । वो किसी तेल की तरह सौम्या के गर्दन पर चिपका हुआ था और लगातार उसकी लोकेशन अमर तक पहुंचा रहा था । सुबह आठ बजे जब अमर होटल में नाश्ता कर रहा था उसे सौम्या की लोकेशन आश्रम से बाहर निकलती हुई नजर आई । फटाफट नाश्ता निपटाकर वो उठा और अपने फोन में नजर रखते हुए बाहर निकला हूँ । उसने एक ऑटोरिक्शा किया और आश्रम की तरफ चल दिया । सौम्या की लोकेशन आश्रम की पहाडी से नीचे उतरती हुई दिखाई दे रही थी । तोमर पहाडी पर नहीं गया बल्कि उसने रिक्शा वाले को कुछ मिनट नीचे ही रुकने को कहा । कुछ ही देर में एक रिक्शा वहाँ से निकला । लोकेशन के हिसाब से अमर को समझ आ गया । वो उसी में थी । साथ ही उसे उसकी हल्की सी झलक भी दिखाई दे रही थी । अब वो उसके पीछे लग गया । कुछ दूर जाने के बाद सौम्या रिक्शे से उतर गई और पैदल ये कच्चे रास्ते पर चलने लगी । अमर ने रिक्शा का बिल भुगतान किया और नीचे उतारा । उस वक्त काफी ठण्ड थी । स्वेटर और जैकेट पहने होने के बाद भी अमर को ठिठुरन महसूस होने लगी थी । सौम्या निरंतर चले जा रही थी । चलते चलते काफी समय बीत गया । अमर उचित दूरी बनाकर छिपते छिपाते उसके पीछे था । वह शहर से काफी बाहर आ गई थी । अमर ने रुककर देखा दूर दूर तक बर्फ से ढके पहाड नजर आ रहे थे । जिनके आंचल में वो खडा था । वाकई स्वर्ग से कम नहीं थी । ये जगह फोन में देखते हुए अमर का माथा ठनका । ऐसा लग रहा था सौम्या त्रियुंड की तरफ जा रही है । अमर ने जल्दी से गूगल में देखा । त्रियूंड ट्रैकिंग के लिए मशहूर जगह थी । इस वक्त अचानक अकेले ट्रैकिंग पर जाने का क्या मतलब तो उनमें कोई सौम्या का जानने वाला रहता हूँ । ऐसा भी मुमकिन नहीं क्योंकि वहाँ आबादी तो बस्ती नहीं तो फिर सुबह सुबह उस तरफ जाने का क्या मतलब । तभी रास्ते में दुकान नजर आई । अमर वहां पहुंचा और फिर उसने दुकानदार से पूछा, क्या ये रास्ता मुलुंड की तरफ जाता है? आज शाम बिल्कुल जाता है । आप बैंकिंग पर जा रहा गया । चार घंटा लगता है शाम को जल्दी निकल लेना । वहाँ से अंधेरा हो गया तो थोडी दिक्कत हो सकता है । अरे आपके पास तो ट्रैकिंग का कुछ भी समान नहीं है । अरे भाई हुआ ये कि मेरी गर्लफ्रेंड और मैं दोनों साथ में जाने वाले थे और मैं अलग कर रहा था । सोचा जा रहा था तो वो उठकर अकेले ही निकल गई । इधर से ही निकली होगी तो शायद तुमने देखा भी होगा । कहकर अमर ने मोबाइल में सौम्या की फोटो दिखाई । अरे हाँ आशा तो बोला ये मैडम तो अभी इधर से निकला है पर उनके पास तो सारा सामान था । अच्छा कैसा कपडा पहना था । पीठ पर बैग भी था । हाँ वो पूरी तैयारी के साथ निकली है पर पता नहीं मेरे लिए कुछ सामान रखा भी है कि नहीं । हमेशा मैं आपकी मदद करता हूँ ना । दुकानदार बोला ये दुकान और किस लिए खोला है मैंने आप जैसे टूरिस्ट के लिए तो खुला है । सबकुछ किराये पर उपलब्ध है । आपको ट्रैकिंग शूट लगेगा और आपका इस रैकेट से काम नहीं चलेगा । मेरे पास वह फल वाला गर्म जगह है । वो ले लीजिए मैं आप के पास है नहीं । चलिए बैंक वैसे में किराये पर नहीं देता । पर एक मेरा पडा है, वही ले जाइए । इसमें इंस्टेंट नूडल्स के कुछ पैकेट है । थर्मस में आपको चाय और गर्म पानी रख कर देता है । वाह भाई, सारा इंतजाम है तुम्हारे पास तो यही तो अपना काम चलो, फिर फटाफट दे दो । मैं निकल रहा हूँ कहीं मेरी गर्लफ्रेंड ज्यादा ये आगे ना निकल जाए । कहकर अमर ने जेब से बटवा निकाला उसे पेमेंट करके । अमर ने फटाफट जूते बदले, जैकेट बदला, बैग लिया और त्रियूंड की तरफ चल दिया । सौम्या निरंतर आगे बढ रही थी । अमर उसकी दिशा में चलता रहा । करीब आधा घंटा चलने के बाद उसे कई और सैलानी आगे बढते नजर आए । कुछ एक उसे अपने पीछे आती भी नजर आ रहे थे । कुछ के बैंक बडे बडे थे, जिनमें शायद स्लीपिंग बैठ गया । टेन था उनका । शायद रात वही गुजारने का इरादा था । अगर मुझे भी किसी वजह से रात वहीं बितानी पडी तो टेंट वगैरह कुछ भी नहीं है । ठंड में कुल्फी जम जाएगी । देखा जाएगा । कुछ देर में अमल ट्रैक पर काफी आगे निकल आया । पथरीले रास्ते पर शुरू में चलने में जितना उत्साह हो रहा था, अभी वह दुर्गम लगने लगा था । थकान जल्दी हो रही थी सांस भी तेज चल रही थी । अमर धीरे धीरे आगे बढ रहा था । अब नीचे हरी भरी घाटी और ऊपर बर्फीले पहाडों का नजारा बेहद ला जवाब दिख रहा था । उसे काफी दूर एक लडकी अकेले आगे बढती नजर आई । उसे लगा वहीं सौम्या होगी । उसने पूरे रंग की जैकेट पहनी थी और काले रंग की पैंट, पैरों में ट्रैकिंग शूज और सिर पर फर वाली गोल टोपी । कल उसने उसे भव्य वस्त्रों में देखा था । इस रूप में उसे पहचानना मुश्किल होता । पर अमर समझ सकता था कि इस ट्रैक पर अकेली लडकी सौम्या के अलावा कोई और ये कोई और हो ये मुश्किल था । अमर आगे बढता रहा । सौम्या निरंतर उसकी नजरों में थी । बीच बीच में घुमावदार पहाडी रास्ते के चलते वह गायब ही हो जाती थी । पर कुछ देर बाद फिर दिखाई देने लगती थी । पर अंतिम आधे घंटे में वो काफी तेजी से आगे बढी और दिखाई देना बंद हो गई । वजह यह भी थी कि थकान के कारण अमर की गति मंद पड गई थी । आप ही तुम तो पहाडी घोडी हो, दौडती जाओगे अपना तो तेल निकला जा रहा है । एक जगह सुस्ताते पानी पीते हुए अमर ने मोबाइल स्क्रीन पर नजर डाली सोम्या की लोकेशन है । एक जगह पर स्थिर हो गई थी । लगता है त्रियूंड पहुंच गई । दस पंद्रह मिनट में मैं भी पहुंचाऊंगा । आखिरकार अमर त्रियूंड पहुंचा । पहुंचते ही वहाँ के खूबसूरत नजारों में एक पल को सौम्या को भूल ही गया । बर्फ से ढके पहाड एकदम सामने दिखाई दे रहे थे । चारों तरफ सर्द हवाएं चल रही थी । ठंड बहुत ज्यादा थी । जिस पहाडी पर वो खडा था, वहाँ कई चट्टानें नजर आ रही थी । वहाँ छह सात टेंट लगे हुए थे । एक कोने में छिपने वाली दुकान या रेस्टोरेंट से कुछ दिखाई दे रहा था । अमर का ध्यान सौम्या की लोकेशन ढूंढने पर गया । चलते हुए उसकी लोकेशन पर पहुंच गया । पर सौम्या कहीं नजर नहीं आई । वह पहाड के छोड पर खडा था । जिसके आगे हजारों फुट गहरी खाई थी । उसकी लोकेशन दस मीटर इधर उधर हो सकती है, पर उससे ज्यादा नहीं किधर चली गई? अमर ये सोचते हुए वापस आया कि शायद लोकेशन में कुछ गडबड है । वो उस रेस्ट्रॉन्ट की तरफ आया । वहाँ दस पंद्रह लोग थे । फैमिली वाले भी थे, पर अकेली लडकी कोई नहीं देख रही थी । भूख जबर्दस्त लग रही थी, इसलिए अमर ने वहाँ ब्रेड ऑमलेट का ऑर्डर दे दिया । पेपर प्लेट पर परोसा हुआ ऑर्डर मिलने पर उसे खाते खाते वो बाहर घूमने लगा । वो सभी ट्रेंड्स पर नजर डाल रहा था । अभी दिन का वक्त था तो कोई टेंट बंद भी नहीं था । इसलिए उसे सौम्या के वहाँ होने की पुष्टि करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी । घूमते हुए उसे दूर कोने में पेडों के झुरमुट में एक लडका और लडकी होने की झलक मिली । लडकी वेशभूषा से सौम्या सी लगी अमर पेडों के पीछे छिपता छिपाता उस तरफ पडा लडका लडकी पेड के पीछे क्या कर रहे थे इसका अंदाजा अमर को अब लगने लगा था । क्यों नहीं आखिर रोमेंटिक जगह है बनेगी की मौत को अभी कुछ महीने भी नहीं हुए हैं और सामने अमर इस बार सहजभाव से चलते हुए उनके पास से निकला लडका लडकी को उसका आभास हुआ तो उन्होंने चोर नजर उस पर डाली है । बस उतना अमर के लिए लडकी की शिनाख्त करने के लिए काफी था । वो आगे बढ गया तो लडकी सौम्या नहीं नहीं चक्कर क्या है । अमर ने फिर से ट्रैकिंग ऐप में सौम्या की लोकेशन देखी । वो अभी भी पहाडी के अंत की तरफ ही दिख रही थी और एक जगह पर ही स्थिर थी । जमीन के अंदर घुस गए । क्या अमर वापस पहाडी के छोड की तरफ पड गया । वहां पहुंचकर वह नीचे झांकने लगा । वो इतना आगे आ गया कि नीचे गिरने का भी खतरा होने लगा । उधर कोई भी नहीं था । अब एक ही संभावना थी की लोकेशन बताने वाला डिवाइस या तो सौम्या की नजर में आ गया है और उस ने निकाल दिया या फिर वो खुद ही निकल गया । अत्यधिक पसीना निकलने से ऐसा हो सकता था । अमर को फिर एक ही तरीका सूझा । उसने अपने फोन में सौम्या की फोटो निकली और फिर वहाँ मौजूद विभिन्न सैलानियों को दिखाकर पूछने लगा । एक जोडी को फोटो दिखाते हुए वो बोला, देखिये मेरी गर्लफ्रेंड है, आगे आगे निकल आई थी पर अब यहाँ कहीं दिखाई नहीं दे रही है । कहीं ट्रेकिंग करते हुए और आगे तो नहीं निकल गई? लडकी ने सुझाया हूँ हेलो और आगे किधर? और देखिए स्माॅल होते हुए ना काफी लोग लाॅ इंद्रहर पांच तक जाते हैं । अब ये किधर है? लडकी नहीं इशारा करते हुए कहा उस तरफ से चलते चले जाइए । डेढ घंटे में स्नो पॉइंट कैसे पहुंच जाएंगे तो तेरी डेढ घंटे की ट्रैकिंग और उनका शुक्रिया अदा । अगर अमर ट्रैक की तरफ अग्रसर हुआ । उसने रुक कर एक लंबी सांस लेते हुए सामने दिखाई दे रहे पथरीले रास्तों पर नजर डाली जो सीधे पर्वतों में जाता हुआ प्रतीत हो रहा था । चलो मेरा अमर जोर लगा के हैया अमर अपनी अगली मंजिल की तरफ चल पडा । जीपीएस डिवाइस बंद होने के चलते उसे अब ये नहीं पता था कि उसका इस तरफ जाना किसी काम आने वाला है भी या नहीं । कुछ आगे चलकर उस एक विदेशी अपने बडे से बैग को पीठ पर लादे धीरे धीरे आगे बढता नजर आया । अमर ने उसे मुस्कान दी तो उसने पलट कर उसे हाई बोला । अमर उसके साथ चलने लगा और बातों बातों में उसे पता चला की वो युक्रेन से आया था और उसका नाम ये गोर था । अकेले ट्रैक पर चलने से ये अनुभव काफी अच्छा रहा क्योंकि इससे मन लगा रहा और ट्रैक के सफर की थकान का भी पता नहीं चला और वक्त आसानी से गुजर गया । डेढ घंटे में वो स्नोलाइन कैसे पहुंच गए? जैसे जैसे वो आगे बढते जा रहे थे, नजारे और भी सुखद होते जा रहे थे । वहाँ वो तीन बर्फिली चोटियां देख सकते थे जो थी तो अभी भी काफी दूर पर लगता था । जैसे एकदम सामने ही है । दूसरी तरफ नीचे हरी भरी वादियां और उसमें बस्ती दिखाई दे रही थी । आसमान में बादल थे और कुछ बादल आसपास पहाडी पर भी मंडराते नजर आ रहे थे । उसने ये गोर के साथ मिलकर एक टेंट किराये पर ले लिया । फिर दोनों तिरपाल से ढके उस कैसे में बैठकर नूडल्स और चाय पर इधर उधर की बातें करने लगे । उस सुखद अहसास में कुछ पल तो अमर भूल ही गया कि वह यहाँ किस उद्देश्य से आया था । अमर ने ये गोर से पूछा, अकेले ही इतनी दूर कैसे घूमने आ गए और अपनी टूटी फूटी अंग्रेजी में जवाब देने लगा । हमको अकेले घूमना पसंद है और घुमा खडी यादव इतना ज्यादा है । गलफ्रेंड हमेशा साथ नहीं देता । तुम बताओ तुम अकेले कैसे घूम रहा है? देखो मुझे एक लडकी की तलाश है हूँ वाह वाह, क्या बात है । ये गोल पूरी बत्तीसी दिखाते हुए मुस्कुराया । फिर उसने चाय का कप अमर के कब से किसी जाम की तरह टकराते हुए कहा । छह हर किसी का लडकी का या हाँ है तो एक खास लडकी खुद में बहुत से रहस्य छिपाए रहती है । पहाडों की ही रहने वाले हैं । मेरे खयाल से इसी तरह घुमाते हुए आई है और तुम उसका पीछा कर रहे हो । स्टाकर का ही खाता हूँ । देखो दरअसल बात वो नहीं है । मैं उसके लिए अजनबी नहीं उस से मिला हूँ । उससे बातें भी की है । उसके पीछे आने की वजह यह है कि मुझे लगता है कि वह खतरे में है । मैं उसे इधर आने से तो नहीं रोक सकता था । पर उसका खयाल रखने से मुझे कौन रोकेगा? ऍम काफी रहस्यमयी पसंद है । तुम्हारी लगता है उस की बात है । तुमको अड्रेनलिन रश दे दी है । शायद अमर ने मुस्कुराते हुए चाय की चुस्की ली और उसे खत्म करते हुए उठा । हमने उसको ढूंढने निकलता हूँ । त्रियूंड से वह नजरों से गायब है । मेरे पास ऍफ कम आएगा । ऍम पर ज्यादा दूर नहीं जाना । कुछ ही देर में अंधेरा होने वाला है । अभी एक घंटा और है । संसद में दोनों के ऑफिस से बाहर निकले । टेंट में आकर ये गोल्ड ने उसे बायनाकुलर दिए । अमर ने अपना बैग वहीं रख दिया । पिस्टल पहले ही उसकी जैकेट के अंदर छिपी थी । बाइना किलर्स उसने अपने गले में डाले और चलने को तैयार हो गया । गुडला ये गोड बोला मैं तुम्हारा इंतजार करेगा । बॉनफायर का इंतजाम करता है । डिनर काफी इंटरेस्टिंग होगा जरूर कहकर अमर ने उस से विदा ली और आगे बढ गया । उसके जाते ही एक ओर ने अपना फोन लिया और यूक्रेनियन भाषा में कुछ बोलते हुए खुद का वीडियो बनाने लगा । अमर ने देखा वहाँ करीब आठ दस टेंट लगे थे । अमर टहलते हुए टेंट में रुके लोगों पर नजर डालने लगा । ऐसा भी हो सकता है कि सौम्या आपने किसी सीक्रेट लवर से यहाँ मिलने आई हूँ । क्या पता वो सीक्रेट लवर उन्ही लोगों में से कोई हो जो नेगी की मौत के बाद से उसकी मदद करते आ रहे हैं । पर अगर ऐसा है तो नेगी से उसके रिश्ते की कितनी अहमियत थी? क्या ये वाकई वही सौम्या है जो कि नेगी की गर्लफ्रेंड थी? नहीं वो तो मर तो नहीं । कैलाश मंडी में मिली थी वो असली सौ हो सकती है । क्या पता जो कहानी मैंने सुनाई है वह नकली अमर सोचता जा रहा था और बर्फीली पहाडियों की दिशा में आगे बढता जा रहा था । जैसे जैसे आगे बढता गया चारों तरफ पथरीली चट्टानों का समागम दिखाई देता गया । कुछ दूर चलने के बाद उसे पहाडी नदी दिखाई थी । अमर ने जूते उतारे और उसे पार करने लगा । पानी एकदम वर्ष मिला था क्योंकि वो पास के ग्लेशियर से अभी अभी पिघल कर निकला था । नदी पार करते ही उसे दूर चट्टानों में एक सफेद कपडा चमका । अमर का ध्यान उसकी तरफ आकर्षित हुआ और वह सीधे रास्ते पर जाने की बजाय गीली चट्टानों पर चढते हुए उस तरफ चल दिया । पास आने पर वो एक इंसानी आकृति प्रतीत होने लगी । ऐसा लग रहा था कोई लेटा हुआ है । कुछ ही पलों में अमर उसके पास पहुंचा । उसने देखा वो पहाडी नवयुवक था जिसके सफेद कपडों में लाल रंग का समावेश था । आपको रंग जो कि उस के रखते से उठाया था, अमर उसके पास खडा उसे ध्यान से देख रहा था । उसकी आंखें खुली थी । उसने अमर को देखा तो कुछ बोलने की कोशिश करने लगा । अमर नीचे चुका पानी वो खींच स्वर में बोला । अमर ने अपने कंधे से बोतल निकाली और उसके मुख में पानी की कुछ बूंदे डाली । उसके चेहरे पर कुछ संतुष्टि के भाव आ गए । ये सब कैसे हुआ? अच्छा? वो अमर को निरंतर देखता रहा । अमर ये समझने की कोशिश कर रहा था कि वह कुछ बताना नहीं चाहता या फिर उसमें कुछ भी बोलने का सामर्थ्य नहीं बचा था । अचानक उसकी आंखें शून्य में स्थिर हो गई । अमर ने उसकी नब्ज टटोली रुक चुकी थी । वोट कर खडा हुआ और उसने घूमकर चारों तरफ देखा । दूर दूर तक कोई भी नजर नहीं आया । उस विरानी जगह बस नदी की कल कल लाबा जा रही थी और बीच बीच में पक्षियों की जो अब शाम होने का आभास होते ही अपने अपने बसेरे की तरफ कूच कर रहे थे । इसका जख्म देखकर लगता है किसी धारधार हथियार से हमला किया गया है । जख्म ताजा है । हमलावर ज्यादा दूर नहीं होना चाहिए । वो चट्टानों के बीच आगे बढने लगा । तभी सामने की तरफ से कुछ चट्टानों के बीच कुछ हिलता डुलता दिखाई दिया । चट्टानों के नीचे अंधेरा था इसलिए अमर ये तो अंदाजा नहीं लगा सकता कि वहाँ क्या था पर हिलने डुलने के तरीके से किसी व्यक्ति के होने की संभावना लगी । एक कोने में हमार को नीचे उभरती ये ढलान नजर आई तो उस तरफ बढ गया । कुछ देर में वो उन चट्टानों तक पहुंचा । काले रंग के विशालकाय पत्थरों के नीचे संकरा सा रास्ता था जो के अंदर गुफा के होने का आभास दे रहा था । को झुककर गुफा में दाखिल हुआ । अंदर काफी अंधेरा था और बाहर के मुकाबले ज्यादा ठंड थी । वो कुछ पालने एक जगह बैठा रहा । जब उसकी यहाँ के अंधेरे में देखने में अब व्यस्त हो गए तब उसने चारों तरफ नजर घुमाई । एक कोने में उसे कोई जमीन पर लेता नजर आया । ऐसा लग रहा था कोई सो रहा है । अमर ने उसका चेहरा अपनी तरफ पटाया हो सौम्या थी । उसने उसका चेहरा थपथपाया, पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । शायद वो बेहोश थी । अचानक किसी ने पीछे से अमर को दबोच लिया । हमलावर की पकडा बेहद मजबूत थी । उसने अपने हाथ हमर की बाहों के नीचे से निकालकर उसकी गर्दन पर शिकंजा बनाकर कर दिया । अमर को अपनी गर्दन चटक टी सी महसूस होने लगी । उसे ऐसा लग रहा था कि अगर उसने जरा सी भी ढील दी तो वो उसकी गर्दन तोड देगा । असीम ताकत का मालिक था वो हमलावर करो या मरो की स्थिति में पहुंचते । अमर ने हमलावर का बाजू दोनों हाथों से पकडा और फिर पूरी ताकत लगाकर उसे अपने सामने पढने के अंदाज में घुमाया । हमलावर उछला पर गिरा नहीं । वो अमर के सामने आ खडा हुआ और सर्द नजरों से उसे देखने लगा । अमर भी ध्यानपूर्वक उसका चाय जा लेने लगा । वो सिर्फ पांच फिफ्टीन इंच लंबा परन्तु मजबूत जिस्म का एक टिपिकल पहाडी युवक प्रतीत हो रहा था । उसने सिर पर क्या पहन रखी थी जिसमें उसके कान ढक रखे थे और जिस्म पर काली जैकेट थी । उसका गोरा चेहरा तीन शिव था और आंखे छोटी छोटी थी । क्या कहानी है भाई तुम्हारी? अमर ने पूछा उसने कोई जवाब नहीं दिया और बिना चेतावनी के तेजी से अमर की तरफ के चलाने लगा । अमर पीछे हट गया । उसके लडने का तौर तरीका देखकर साफ पता चल रहा था कि वह मार्शल आर्ट में निपूर्ण था । चलो सीक्रेट सर्विस में मिली मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग आज कुछ काम आएगी । अमर ने साहब के फन की भांति अपने हाथ फैलाए और अपनी तरफ पडते उसके पैरों के प्रहारों को हाथों पर रोक लिया । जैसे ही लडके ने अमर पर हाथ घुमाया उसने एक हाथ से उसका हाथ रोका और फुर्ती के साथ दूसरे से उसके चेहरे पर दनादन घूंसे बरसा दी है । पांच छः जबरदस्त घूसे पढने के बाद भी लडके के हावभाव देखकर लगा नहीं कि उसे कोई हानि पहुंची हो । उसने पलट कर अमर पर किक मार दी । अमर पीछे जा गिरा, अमर फुर्ती के साथ उठा और फिर से अटैकिंग मुद्रा में आ गया । लडका अब पहले से ज्यादा सतर्क दिख रहा था । शायद अमर को देखकर उसने अपेक्षा नहीं की थी कि वो इस कदर लडाई में निपूर्ण होगा । उसने अपनी जैकेट उतारकर एक तरफ फेंक दी । अंदर उसने एक स्किन टाइट फुल शर्ट पहन रखी थी जिसमें उसकी मांसल भुजाएं उजागर हो रही थी । अमर ने उसे ध्यान से देखा हूँ । कुछ और नहीं तो जिस्मानी ताकत में अमर को वो खुद से दोगुना लग रहा था । इस बार वो अचानक ही खुले । सान की तरह तेजी से अमर की तरफ दौडा । अमर ने तरफ फटने का निर्णय लिया पर लडका भी पूरी तरह से सावधान था । उसके हटते ही वो उसकी तरफ घूमा और हवा में उछलकर उसने अमर की पीठ पर जोरदार के चढती अमर सामने जा गिरा । बडी मुश्किल से उसने अपने मुंह को चट्टानों से भिडने से बचाया । बहुत हो गया । अचानक ही हमर के हाथ में पिस्टल चमका जिसे उसने लेटे लेटे ही उसकी तरफ तान दिया था । अमर उस वक्त अवाक रह गया जब उस लडके ने पिस्टल की परवाह किए बगैर उस पर हमला किया । अमर ने फायर किया पर हुआ है । मौके पर बिजली की गति से नीचे झुका और कूदते हुए अमर की छाती पर आ गिरा । उसने अमर का हाथ दबोच लिया । इसमें कोई शक नहीं था कि वह बेहद ताकतवर था । एक बार जो उसने अमर का हाथ पकडा । अमर को एहसास हुआ कि उसे छुडाना नामुमकिन था । क्रिस्टल अमर के हाथ से निकल गयी और उसे उसने कोहनी से तरफ सरकार दिया । फिर अमर की छाती पर सवार होते हुए उसका गला दबाने लगा । अमर ने हाथ बढाने की कोशिश की तो उसने घुटनों के बल उसके दोनों हाथ दबा दिया । अमर को ऐसा लग रहा था जैसे हाथ का बच्चा उसके सीने पर सवार हो गया हो । वो हिल भी नहीं पा रहा था और जिस ताकत से वो उसका गला दबा रहा था उसे अपनी सांसे उखडती हुई महसूस होने लगी है । उसका चेहरा पूरी तरह से लाल हो गया था । अचानक लडके के सिर पर पीछे से वार हुआ । वो बेहोश होकर अमर के ऊपर गिर गया । अमर ने देखा सौम्या हाथ में पत्थर लिए खडी थी । अमर ने लडके को अपने ऊपर से धकेला और बैठकर अपनी ढोकली से चल रही सांसों को संयमित करने लगा । अच्छा हुआ तुमने गोली चलाई । सौम्या बोली वरना मैं बेहोशी पडी रहती है और अब तक तुम भर चुके होते हैं । ऍम और तुम इससे मिलने यहाँ आई थी । पहले तो बताओ तो यहाँ क्या कर रहे हो तो मेरा पीछा करते हुए यहाँ आए थे । अमर ने जवाब नहीं दिया क्यों तो मुझ पर बेवजह शक कर रहे हो । मैं जितना जानती थी तो मैं सब बता चुके हैं । अब तुम इतनी रहस्यमय जगह अकेले घूम फिर होगी तो जानने की कोशिश तो करनी ही होगी । तुम खुद आकर मुझसे पूछ लेते कि मैं कहाँ जा रहे हैं तो मैं भी बता देती । चलो गलती हो गई मुझे । पर इसी बहाने में तुम्हारे काम तो मानती हूँ । थैंक्स वो सब छोडो ये बताओ आखिर ये कौन है और क्या चाहता था तुमसे । न जाने ये कौन है? मुझे लग रहा है कि मुझे यहाँ धोखे से बुलाया गया है । आश्रम में समाज सेवा करते हैं ना । हमारे आश्रम में सुबह एक सेवाकर्ता का फोन आया कि यहाँ कुछ ट्राइबल औरतों को मदद की जरूरत है । मुझे भेज दिया गया । ऐसे कामों के लिए मैं हमेशा खुली खुली आगे रहती हूँ । जब मैं यहां पहुंची तो उसने मुझ पर हमला कर दिया । मैं बेहोश हो गई । मैं नहीं जानती है कौन है और क्या चाहता है । सौम्या बोलती रही और अमर उस युवक की तलाशी लेता रहा । उसकी जेब में कुछ रुपयों और एक बैंक एटीएम के सेवा कुछ और नहीं मिला । अमर ने उसके एटीएम की एक फोटो ले ली । फिर उसके चेहरे की फोटो भी खींच ली । उसे किसी हथियार के मिलने की उम्मीद थी, पर ऐसा कुछ उसके पास नहीं मिला । उसे उम्मीद थी कि बाहर मृत युवक का कातिल यही रहा होगा । पर ऐसा कोई सबूत देखा नहीं । उसके हाथों पर कोई भी फोन के निशान नहीं थे । ऍम हो तो पानी से साफ नहीं किए जा सकते थे । उसने टॉर्च जलाकर गुफा में तलाशी ली । वहाँ कोई और विशेष वस्तु दिखाई नहीं दी । इस इलाके में ट्राइबल औरते हैं तो क्या किसी कुत्ते के देखने की भी उम्मीद कम है? तुम चाय पहाडी कुत्तों को नहीं जानते हैं । दरअसल कुछ और आगे जाने के बाद नीचे बस्ती है । ये मेरे लिए कोई नई जगह नहीं । सौम्या जो भी हो, सच सच बता दो । तुम्हारी ये कहानी पूरी तरह से कप लग रही है । ऐसा है तो यहाँ से वापस जाने के बाद तो आश्रम जाकर पूछ लेना । मैं कहा और किस लिए गई थी । वो क्रोधित स्वर में बोले हो, क्योंकि फॅमिली हो पर कोई इस तरह से तुम पर साजिश करके हमला क्यों करेगा? मैं क्या बोलूँ हो सकता है? ये धीरज के दुश्मनों में से एक रहा हूँ । वैसे भी आजकल लडकियों के लिए कोई जगह सेफ नहीं । मुझे नहीं लगता ये कोई ऐसा वैसा काम करने के लिए यहां आया था । एक अच्छा खासा ट्रेन मार्शल आर्ट योद्धा है । मुझे नहीं पता मैं तो यहाँ आकर फंस गई और मेरे चक्कर में तुम भी बाल बाल बचे हो । तुम्हारी मदद के लिए थैंक्स पर अब मैं तुरंत यहाँ से निकल कर वापस आश्रम जाना चाहती हूँ । इसको ऐसे यहाँ छोडने, इसकी कोई कंप्लेंट नहीं करोगी । अभी इस जगह तो हमें पुलिस मिलने से रही नहीं । मोबाइल की रेंज मिलेगी । लौटते वक्त जब रास्ते में सिंगल मिलेगा तो पुलिस को फोन कर देंगे । पुलिस को यहाँ कल तक आप आएगी तब तक तो ये भाग जाएगा । मुझे नहीं पता । इसको लादकर मैं तो नहीं ले जा सकती है । तो मैं इतनी ताकत हो तो तुम करो कहकर सौम्या उठी और अपने जूते बैग वगैरा उठाकर तैयार हो गई और गुफा से बाहर निकलने लगी । अमर उसे देखता रहा । सौम्या के जाने के बाद अमर उस लडकी को होश में लाने की कोशिश करने लगा । एक बार को तो उस पत्थर जैसे मैंने उसके सिर पर मारा था, का साइज देखकर उसे लगा कि उसे कोई गंभीर चोट आ गई । अमर चट्टानों की गुफा से बाहर निकला तो मैं एक तरफ चलती चली जा रही थी । ऍम रुको कहाँ जा रही हूँ, वो लाया हूँ, वापस जा रही हूँ । अकेले आई तो अकेली थी । तब दिन था अभी रात होने वाली है क्या फर्क पडता है । रुक कहकर अमर उसके पास पहुंचा । फिर बोला देखो ये जो कोई भी हैं इस प्रसाद के पीछे के रहस्य सुलझाने में बहुत काम आने वाला है । पर मुझे अब उसके आस पास रुकने में डर लग रहा है । मैं हूँ तो यहाँ । सौम्या ने उसे घूरते हुए कहा देखा मैंने उसके सामने तुम कितनी देर तक पाए थे । अमर ने सिर्फ हो जाते हुए इधर उधर देखा । फिर बोला आइडिया उसके हाथ पर बात देता हूँ । ठीक है तुम स्नो पॉइंट कैसे पहुंचकर मेरा इंतजार करो वहाँ मेरा एक दोस्त है ये कोर युक्रेन से मैंने उसके साथ एक टेंट किराये पर लिया है । मेरा सामान उसी के पास है तो वहाँ रुक सकती हूँ तो मुझे एक विदेशी लडकी के साथ रुकने की सलाह दे रहा हूँ । सौम्या से हैरानी से देखा हूँ । अरे कुछ देर के लिए फिर में पहुँच जाऊंगा । तब तुम्हारे लिए कुछ और इंतजाम कर लेंगे । लेकिन मैं अपनी देख रेख खुद करने के काबिल हूँ । बिल्कुल हो बस फिलहाल खतरा चारों तरफ है । यहाँ आते वक्त मुझे इलाज भी मिली थी । यहीं पास में उम्मीद तो हट सौम्यम् । ऊपर हाथ रखकर बोली उसे जरूरी सीने हमें उसकी मदद करनी चाहिए । वो मर चुका है । सौम्या का चेहरा पीला पड गया था । वो एक हत्यारा है । पर आखिर क्यों ये लोग इतना खून खराबा वही तो मैं भी जानने की कोशिश कर रहा हूँ । इसलिए कह रहा हूँ तुम खतरे में हूँ । बेस्ट तो यही होगा । कुछ देर मेरे साथ रुखों मेरे पास पिस्टल है । इस बार वह कोई गडबड नहीं तो तुम के उसे मार हो गई । जरूरत पडी तो हाथ पैर पर गोली मार दूंगा । फिर उस की नौबत नहीं आनी चाहिए । उसके हाथ पांव बंद हुआ हूँ । सोमया ने दो पल सोचने में गवाये । फिर स्वीकृति में सेहत । सौम्या ने दो पल सोचने में कब आए । फिर स्वीकृति में सिर हिलाते हुए बोली ठीक है चलो दोनों वापस गुफा की तरफ चल दिए है । वातावरण में शाम के सूरज की लालिमा छाने लगी थी । भूरी गाली चट्टानों पर नारंगी रंग बिखर गया था । दोनों गुफा में पहुंचे । अमर ने टॉर्च जला दी । उसने उसकी रोशनी गुफा में घुमाई तो उसे खाली पाया । उसने तुरंत दूसरे हाथ में पिस्टल थाम लिया और सतर्कता से चारों तरफ देखने लगा । सौम्या सहमते हुए उसके पीछे छूट गई । होश में वो फुसफुसाई बाहर होगा चलो कहकर अमर बाहर की तरफ मुड गया । दोनों बाहर आ गए । अमर ने टॉर्च की रोशनी बंद की है । लगता है चट्टानों के पीछे कहीं छिपा है । मैं देख कर आता हूँ । मजा हो अरे मेरे पास पिस्टल है, वो नहीं आता है तो तुम्हें पता है । वैसे उस ने तुम पर हमला कहाँ किया था रास्ते में पीछे से तो मेरा गला पकड लिया था । मेरा दम घुटने लगा और फिर मैं बेहोश हो गई । मेरे पीछे पीछे चल रहा हूँ कहकर अमर चट्टानों के ऊपर चढने लगा । सौम्या उसके पीछे थी । चट्टानों के ऊपर आकर इधर उधर ताकझांक करने के बाद भी उन्हें कोई नजर नहीं आया होगा । तो यहीं कहीं इतनी जल्दी यहाँ से भाग नहीं सकता । पर कहाँ तक उसे इन चट्टानों में ढूंढोगे अंधेरा हो रहा है । मुश्किलें और बढने वाली मेरे ख्याल से हमें अब यहाँ से निकल जाना चाहिए । अमर ने जैसे कुछ सुना नहीं वो और आगे बढते हुए इधर उधर देखता रहा । दस मिनट बाद जब सूरज की लालिमा आसमान में सिर्फ पश्चिम दिशा में बाकी रह गई । सौम्या अमर का हाथ खींचते हुए बोली अब चलो कल सुबह ढूंढना उसे । कल तक तो उसके पैरों की धूल भी नहीं मिलेगी । अमन बेमन से वापस चलने के लिए मुडा । वो पूरी तरह से सतर्क था और चारों तरफ देखते हुए सौम्या के साथ वापसी के पद पर चल दिया । करीब एक घंटे में मुस्लिम पॉइंट कैसे पहुंचा? तब तक घुप अंधेरा विद्यमान हो चुका था । अमर की टॉर्च रास्ते में बहुत कम आई । वो दोनों टेंट के पास पहुंचे । एक टेंट के पास आग जलाते हुए उन्हें ये गोर दिखाई दिया । अमान मॅन सही टाइम पर आया वापस । फिर उसकी नजर सौम्या पर गई । वो अच्छा हो गया । फिर अमर को प्रशंसात्मक भाव से देखते हुए बोला तब बाल ध्यान आॅएन सक्सेस! अमर ने मुस्कुराते हुए हामी भरी । अमर ने सौम्या से हिंदी में कहा ये समझता है तो मेरी गर्लफ्रेंड होगा हूँ । समझने तो मेरी वो आप के पास बैठ गयी । वो ठंड से काम रही थी । फिर उसने मुस्कुराकर ये गोर की तरफ देखा और कहा हूँ आए ये तो बहुत खुशी का बात है । आप दोनों मिल गया राइट । फिर मैंने उस की तरफ ध्यान नहीं दिया । ये गोल्ड ने अमर के पास आकर उसका कंधा थपथपाया । ऍन कुंवरी फिफ्टी ऍम ऍम रिंग! तो हम वैसे भी लेने वाले थे ये गौर हंसा ध्यान यूअर ब्राइड । फिर ये गोर ने व्हिस्की की एक बोतल निकाली और दो ड्रिंक बनाए । उसने सौ में से भी पूछा पर उसने शालीनता के साथ मना कर दिया । अमर कैसे से सौम्या के लिए जूस ले आया । साथ ही उसे एक टेंट और लगाने को बोल दिया । यह गोल्ड के पास बारबेक्यू करने का सामान भी था । उसने चिकन निकाला और उस पर पैकेट में रखा । गीला मसाला लगाया और आप पर भूलने लगा । पूरी तैयारी के साथ निकले थे । अमर बोला, घूमने निकला और खाने पीने का मसाला ले पाया तो बेकार है । है ना राइट? पहली ड्रिंक के बाद ये गोर बोला तो तुम दोनों थाइमिन बहुत सुन्दर जोडी है । कभी मिला बस तीन दिन हुए हैं । अमर बोला बस समझो अपना रिलेशन स्टेटस है, जस्ट मेट टोमॅटो नहीं किया । अभी तो सिर्फ दोस्ती हुई है । मेरी मानेगा तो इन चीजों में देर नहीं करना पुराने खिलाडी मालूम पडते हो कहकर अमर हजार ये गोल भी ठहाका लगाकर हंस दिया । सौम्या सिर्फ मुस्कुरा दी । बीच बीच में वह अमर को गुस्से से देख रही थी । इस तरह खाने पीने के साथ बातों का दौर देर तक चलता रहा । सौम्या कटेंट लग चुका था और उसने बारह बजे उन दोनों को गुडनाइट किया और सोने चली गई । उसके जाने के बाद ये कौर आंख मारकर बोला कई दोस्त अब अगर तुम भी जाना चाहो तो जा सकता है मेरे लिए मत रखना । अमर हजार भाई है तुम्हारे टेंट में ही होने वाला हूँ । उसने नशे में लहराते हुए आश्चर्य से अमर को देखा रियली आई इंडिया है अभी लडकी को किस करने की स्टेज भी नहीं आई है हूँ आई मीन डेट्स के उठ संस्कारी होना गुड बात है । फॅर जी यार दोनों के गिलास भेडे एक के बाद एक उन दोनों ने भी सोने का मन बना लिया । अमर सोया जरूर पर उसने चार बजे का अलाम लगा दिया था । उसे अंदेशा था की देर रात कुछ गडबड हो सकती है । चार बजे अमर की मोबाइल में अलाम बजा, उसकी नींद खुली और उसने फौरन उसे बंद कर दिया । उसने ये तौर पर नजर डाली । वो गहरी नींद में था । अलाम के शोर का उस पर कोई फर्क नहीं पडा था । वोट कर बैठ गया । आंखे नींद से बोझिल हो रही थी । उसने पानी लिया और मुंह पर कुछ बूंदे छिडक । फिर उसने टेंट के अंदर बनी जिप वाली खिडकी की जिप खोली और बाहर देखा । बाहर के हम सन्नाटा था । कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था । वो टेंट से बाहर निकला । उसने सौम्या के टेंट की तरफ नजर डाली है । सब सामान्य दिख रहा था । वो टेंट के पास पहुंचा और उसका पर्दा हटाकर अंदर झांका । वो चौंक गया क्योंकि सौम्या अंदर मौजूद नहीं थी । कहाँ गई अमर की नगरी चारों तरफ घूमने लगे । इस तरह कोई टेंट में आकर उसे बिना शोर शराबे के उठाकर तो नहीं ले जा सकता है । तभी उसे दौडने की आवाज आई । अमर ने मुडकर उस तरफ देखा । कुछ दूरी पर चट्टानों की तरफ से वो आवाज आई थी । उस तरफ कैंप की रोशनी नहीं पहुंच रही थी और आज रात आसमान में चांद भी न जाने कहां छिपा हुआ था । अमर पिस्टल हाथ में लेकर झुकते हुए उस तरफ दबे पांव पढा । चट्टान के पास पहुंचकर उसे सौम्या लेटी दिखाई दी । अमर ने आंखों से उससे सवाल किया, सौम्या के चेहरे पर खौफ था । उसने उसे झुकने का इशारा किया । अमर झुका, फिर उसके पास ही जमीन पर लेट गया । क्या हुआ वो आस पास ही है और चीनी यहाँ आ गया । हाँ, मुझे तो डर की वजह से नहीं नहीं नहीं आ रही थी । मैंने बीच में खिडकी से बाहर नजर डाली तो वो उस कोने में वो कैंप के दूसरे कोने की तरफ इशारा करते हुए बोली वहाँ खडा था अरे तो तुम्हें शोर मचा देना था, मुझे जगह देना था यहाँ क्या कर रही हूँ मैं । मैं वापस जा रही थी । बट और क्या? तो मैं तो कोई सुबूत है नहीं । मजे से पार्टी कर रहे थे । मुझे तो अपनी जान बचाने थी ना मैडम । मैं पूरी तरह सतर्क था इसलिए अभी उठकर यहाँ पहुंचा हूँ को शांत रही और बेचैनी से कैंप की तरफ देखने लगी । आपको है कहाँ? अमर ने पूछा उसके बाद देखा नहीं । मैं इस तरफ से धीरे धीरे निकलकर वापस पहुंचाऊंगी । मानना पडेगा तो ऐसी अंधेरी रात में तो मैं इस कैंप की जगह सुनसान रास्ते पर चार पांच घंटे पैदल चलकर जाना ज्यादा सेफ लग रहे हैं । जिस कैंप के आस पास कोई मेरा खत्म करने के लिए घूम रहा हूँ उससे तो सेफ है और मैंने की चूडियाँ पहनी है । काम तो दूसरे के टेंट में सो रहे हो । मैं तो अकेली हो ना हो । अमर अविश्वास के साथ बोला हूँ क्या? यानी ये भी मेरी गलती है तो मेरे साथ होना चाहती थी तो पहले क्यों नहीं बोली बकवास बंद करो मैं तुम्हारे साथ नहीं कहते हुए उसे हंसी आ गई तो हूँ अमर फुसफुसाया आई डोंट बिलीव इट । पता नहीं शायद स्ट्रेस की वजह से ऍम मैं बाहर पहरा देता हूँ । ये गुरु को भी जगह घुमा है और यहाँ बहुत लोग हैं । वो इधर हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा । देखो हमें उसके बारे में कुछ नहीं पता । उसके और साथ ही भी हो सकते हैं उनके पास न जाने कैसे हथियार हो । हमको क्या पता उससे अच्छा है, निकल जाते हैं । सुबह तक आश्रम पहुंच जाएंगे । यहाँ ऐसा कोई काम भी नहीं कर रहे जो बहुत जरूरी हो । तो तो रहे थे ना तुम सो जाकर मैं जाती हूँ । तभी उन्हें उकसाया । सौम्या के टेंट की तरफ पडता हुआ नजर आया । दोनों से घूमते रह गए । उसने उसके टेंट का दरवाजा खोल दिया । देखो तो उसकी हिम्मत सौम्या बोली अमर ने उसका निशाना लिया । क्या कर रहे हो, उसके पैर पर गोली मार देता हूँ । वहाँ इतने सारे लोग हैं । किसी और को लग गई तो तो मुझे समझ गया हूँ । अमरनाथ सेगुरा मुझे मेरे निशाने पर भरोसा है । अरे मेरे कहने का मतलब तुमने हुई है और नींद में हूँ क्या बकवास कर रहे हो? कहते हुए अमर ने टेंट की तरफ देखा । अब वहाँ दिखाई नहीं दे रहा था तो मुझसे निपटो मैं जा रही हूँ । सौम्या झुके झुके, आगे बढे वो तुम्हारे पीछे आ गया तो तुम होना यहाँ उसे मार देना तो सोमया बिना कुछ कहे आगे बढती चली गई । कुछ पलंबर सोचता रहा फिर वो भी उस की तरफ चल दिया । टेंट के क्षेत्र से कुछ आगे दूर के बाद ये बेवकूफी है । अमर सौम्या के पीछे पीछे चलते हुए बोला ऐसी सुनसान जगह पर मरने से अच्छा है । उसका मुकाबला किया जा सकता है । तुम कर सकते हो तो रुक जाऊँ हूँ तुम्हें इतनी दूर अकेले कैसे जाने दो कुछ हो गया तो सौम्या कुछ नहीं बोली । वो तेजी से आगे बढती गई । टेंट की तरफ ये गौर नींद से उठा । उसने देखा बगल में अमर नहीं था । वो रेंगते हुए बाहर आया । उसने सौम्या के टेंट में झांका वो खाली था । वो तेजी से वो तेजी से वापस अपने टेंट में आया । फिर उसने अपने बैग को तेजी से खोला और फिर उसमें छिपाई पिस्टल निकालकर अपनी जेब में डाला और बैग लेकर उठ खडा हुआ । फिर वो तेजी से टेंथ से बाहर निकला । अमर और सौम्या धर्मशाला की ओर वापस जाते रास्ते पर चलते चले जा रहे थे । दोनों के बीच कोई बात नहीं हो रही थी । रात अंधेरी थी पर अब आंखें अंधेरे में देखने के लिए अभ्यस्त हो गई थी । अमर को अब लगा कि वापस जाना उतना भी मुश्किल नहीं है जितना लग रहा था । लौटने में चढने की जगह उतरना था जो कि चढने से आसान था और अंधेरा भी इतना नहीं था कि बहुत ज्यादा परेशानी आएगी । हालांकि ठंड जरूर ज्यादा थी उसे अब लगने लगा कि सौम्या का फैसला सही है पर उसके पीछे आने के अपने फैसले पर उसे संदेह जरूर था । उस चीनी को पकडने का एक और मौका हो सकता था । वैसे है वो बेहद खतरनाक और अगर उसके साथ ही भी हुए तो यह काम और मुश्किल होने वाला था । रात का यहाँ अंधेरा अब श नेशन है । होता जा रहा था पूरब की दिशा में आसमान धीरे धीरे हल्का नीला रंग ले रहा था । ठंड अभी भी काफी थी । अमर और सौम्या मैक्लॉडगंज से अब कुछ ही दूर थे । सौम्या व्यग्रता के साथ आगे बढ रही थी जबकि अमर ठंड में ठिठुरते हुए । उसके पीछे था धीरे चलो यार यहाँ ठंड से हालत खराब है । एक बार शहर पहुंचाएं, फिर तुम्हें गरमा गर्म चाय पिलाऊंगी और फिलहाल जितना तेज चल सकते हो । चलते चलो उन लोगों का कोई भरोसा नहीं है । ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम उसे जानती हो तुम? प्लीज अपना जासूसी दिमाग जरा काम चलाओ । कुछ तो बात करते चलो कम से कम ठंड से तो ध्यान हटेगा । सच बताऊँ, कौन था वह वृद्धि? पहलवान सौम्या हस्ती हम दोनों की जान लेने को तैयार था । वो दोबारा मिलेगा तब बताऊंगा उसे जेल की हवा ना खिलाई ना तभी एक शोला चमका । दोनों फुर्ती के साथ झुक गए फायरिंग वो भी साइलेंसर के साथ । अमर पीछे मुडकर देखते हुए बोला लगता है वो लोग आ गए । सौम्या भयभीत होते हुए बोली पर कैसे? अभी तक तो कोई पीछे आता नहीं दिख रहा था । अमर ने अपना पिस्टल निकाल लिया । दोनों एक पेड की ओट में हो गए । अमर झाकते हुए निशाना लेने की कोशिश करने लगा । अंधेरे में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था । हमें आगे बढते रहना चाहिए । सौम्या ने कहा वरना फंस जायेंगे । अमर ने उसका सुझाव स्वीकार दोनों मुख्य रास्ते के किनारे पेडों के बीच होते हुए आगे बढने लगे । तभी अमर चीजों को उठा तुम भी तो सौम्या ने पूछा हाँ चलो अमर लडखडाते हुए बोला और अचानक ही उसका सिर चकराने लगा और वह गिर पडा । अमर अमन, अमन । सोनिया ने उसे टटोला तो उसे उसकी पीठ पर चिपचिपापन महसूस हुआ । उसने अपना हाथ चांद की रोशनी में देखा । वो खून से सना हुआ था ।

chapter 26

वर्तमान समय नई दिल्ली जावेद और जॉन पुरानी दिल्ली के दरियागंज पुलिस स्टेशन पहुंचे । वहाँ मौजूद ऐसे जो जगजीत पंत को अपना परिचय देने के बाद जॉन बोला, ऐसा जो साहब हमें कुछ साल पहले दर्ज एक मॉडर के बारे में जानना है । जरूर जा नाम के इसके बारे में कुछ बताइए । मैं फाइल निकल जाता हूँ । अच्छा शमशेरसिंह नामक एक आदमी को उसके घर में जिंदा जलाकर मार दिया गया था के साथ से करीब पांच साल पहले का होगा । तब तक तो मैं इस जगह पोस्टेड भी नहीं था और फाइल तो मिल ही जाएगी । बहुत ऐसे चोपन तनी एक कर्मचारी को बुलाकर निर्देश दिया । फाइल ढूंढने में करीब आधा घंटा लग गया । फाइल के आते ही वो उसका अध्ययन करने लगे । पता चला कि शमशेरसिंह कोल रात के वक्त पता चला की शमशेरसिंह को रात के वक्त उसके घर के अंदर किसी ने जला दिया था । अपराधी आज तक पकडा नहीं गया पर इस बात की पुष्टि हुई थी कि वहाँ दो आदमी आए थे और उन्होंने पेट्रोल का प्रयोग कर उसे चलाया था । पढते हुए जो हम सोच में पड गया, पेट्रोल से जलाया आखिर क्यों? सुनकर तो दुश्मनी का केस लग रहा है । इतनी बेदर्दी से तो कोई दुश्मनी निकालने के लिए ही मार सकता है । पंत ने सुझाव दिया नेगी के पिता को भी जलाकर माना गया था जून जावेद की तरफ देखते हुए बोला शमशेरसिंह जावेद ने फोन निकाला और गूगल में सर्च करने लगा । कुछ देर बाद बोला तो मैं एकदम सही पकडा । उसके ऊपर कई साल पहले एक आईएएस अफसर को जलाकर मारने का केस चला था, जिसमें हाईकोर्ट से उसे क्लीन चिट मिल गई थी । यानी नेगी ने अपने पिता की मौत का बदला लिया । ऐसा लग रहा है । जावेद बोला मैं उसका घर देखना चाहता हूँ । जॉन बोला, लेकिन अभी पांच साल बाद वहाँ क्या मिलेगा? पंत ने कहा, कभी कभी सबूत के अलावा भी कुछ ऐसी बातें पता चल जाती हैं जिनसे कुछ रहते सुलझाया जा सकते हैं । चलो फिर चला जायेगा कहकर जावेद उठा इस फाइल की कॉपी निकलवा दीजिए । कुछ देर में वह दोनों पंत और एक कांस्टेबल के साथ कबूतर मार्केट पहुंचे, जहां शमशेरसिंह का घर हुआ करता था । मार्केट में जगह जगह मुर्गे, बकरे, खरगोश और न जाने कौन कौन से किस्म के जानवर और पक्षी बिक रहे थे । शमशेरसिंह का घर दुकानों के ऊपर एक दो कमरे की जगह थी । जहां भी कसाई अपने परिवार के साथ रह रहा था । पुलिस को देखकर कसाई और उसका परिवार डर गया । पर फिर पंत ने उन्हें समझाया कि वह किस वजह से वहाँ आए थे । सुनकर वो भी स्तब्ध रह गया क्योंकि उसे भी पांच साल पहले हुए उस हादसे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी । वो लोग कमरे में जा खडे हुए जो कि वही बेडरूम था जहाँ शमशेरसिंह की मौत हुई थी । जॉन और जावे चारों तरफ ध्यान से देखने लगे । कमरे से निकलकर वो छोटी सी बॉलकनी में पहुंचे । बॉल्कनी बगल वाले घर से जुडी हुई थी । दोनों के बीच बस एक छोटी सी रेलिंग थी तो सर रिपोर्ट के हिसाब से शमशेरसिंह बालकनी का दरवाजा खोलकर हो रहा था और कातिल बॉलकनी के जरिए पहुंचे थे तो ये बगल वाला घर किसका सालों से खाली पडा है । मालिक ने अभी तक जगह बेची नहीं और नहीं रैनोवेट करने के बारे में विचार किया । यानी अंदर आना कोई बडी बात नहीं थी । जावेद बोला शमशेर करता क्या था जो हमने पूछा पाँच फाइल देखकर बोला तो इसी मार्केट में पालतू पक्षी बेचता था । कपिल की प्लानिंग के लिए कातिल ने जरूर उसके घर और दुकान विजिट की होगी । वो अकेला काम करता था या उसके साथ कोई और था । इस तरह के काम में कोई न कोई साथ तो होगा ही जावे । बोला पाँच बोला इसमें ललित नाम के किसी बंदे का बयान है तो उसके बिजनेस में साथ ही था । उसका ड्रेस दिया है । यही पास का है । बढिया जॉन बोला उससे मिलने चलते हैं । वहाँ से वो लोग ललित के एड्रेस पर पहुंचे । वहाँ पता चला वह किसी और जगह शिफ्ट हो चुका था । उसके नए पते पर पहुंचकर पता चला कि वह फिलहाल मार्केट में ही काम पर निकला था । उस की दुकान पर पहुंचकर उन्हें ललित मिला । वहाँ कई पिंजरे थे, जिसमें तरह तरह के खरगोश गए थे । ललित चालीस के लपेटे में पहुंचा । एक नाटा सा आदमी था । उसकी दाढी बढी थी । उसने बनियान और पैंट पहन रखी थी तो तुम खरगोश बेचते हो । पाँच पिंजरों को देखते हुए बोला, जी, कई सालों से बेचना होगा । कोई गलती हो गई । मालिक पुलिस को देखकर वह घबरा गया था । तब नहीं । जॉन बोला तुम पहले शमशेर के साथ काम करते थे । शमशेर का नाम सुनकर उसके चेहरे पर कई रंग बदले । सालों पुरानी याद दिला दी साहब अपने जी हाँ, हम दोनों साथ में काम करते थे । इसी मार्केट में, पर शमशेर मेरे को जॉन ने अपने फोन पर कई फोटो दिखाई । वो एक और नेगी की असली और रजा मालिक के भेज में थी । वो सर को जाने लगा । ध्यान से देखो, आराम से देखो पांच साल पहले तुम्हारी दुकान पर जरूर आएंगे । शायद अकेले या साथ में किसी और रूप में हो सकता अच्छे कपडे पहने हूँ । जॉन ने उसे फोन पकडा दिया । वो फोटो बदल बदलकर बार बार देखने लगा । शमशेर की हत्या से शायद कुछ दिन पहले आए होंगे । जावेद बोला उसने नेगी की रजा मालिक के भेष वाली फोटो दिखाते हुए कहा मुझे लग रहा है ये आदमी आया था । दो दिन पहले इसमें खरगोश खरीदा था और सवाल बहुत पूछ रहा था । इसलिए मुझे अभी तक याद है कुछ नहीं तो इसने आधा घंटा बिता दिया था । मेरे और शमशेर के साथ दुकान पर बहुत बढिया कहते हुए जॉन्की नजरे जावेद से मिली । वो दोनों समझ सकते थे कि नेगी के खिलाफ ये पहला पुख्ता सबूत था । उन्होंने बच्चों को उसे थाने ले जाकर उसका लिखित बयान लेने को कहा और फिर वहाँ से निपटने के बाद उन्होंने अभय को फोन किया । बोलो जॉन सर, हमें नेगी के खिलाफ एक बॉर्डर का सबूत मिला है । पूरी बात सुनने के बाद अब बोला लीड तो अच्छा है पर अभी वह कातिल साबित नहीं हुआ है । अग्री पर सर, साथ ही इंटरपोल को उसके आतंकवादी होने के सबूत चाहिए । कातिल होने से कुछ खास फर्क नहीं पडने वाला । बट ॅ उसके आईएसआई में शामिल होने के पुख्ता सबूत मिलना भी कुछ काम आ सकता है । हमारा एक मॉल उसकी जानकारी निकाल रहे पर सबूत करेगा । कुछ फोटो रिकॉर्डिंग ये सब उसके मरने के बाद निकालना मुश्किल है । पर अगर ऐसा कुछ मिल सके तो ये हमारे लिए कामयाबी होगी सर । इस तरह तो सोहनगढ माइनस में उसकी प्रेजेंट खुद ही बडा सबूत हैं । आखिर इंटरपोल की जानकारी के बगैर वो किस कपैसिटी में वहाँ मौजूद था? फिर वहाँ आतंकवादियों के साथ ही के तौर पर मौजूद था । देखो जन ये दलील तो पहले भी दी जा चुकी है, पर बात फिर वहीं आकर रुक जाती है न कि उसे मारने के लिए हमारे पास क्या वजह थी और उस वजह का सबूत दिया था । इसलिए अगर उसके आईएसआई में भर्ती होने का सबूत भी मिल सके तो अच्छा रहेगा । डीजर कोशिश कर रहे हैं और क्या चल रहा है? धर्मशाला कब जाने वाले हो । यहाँ कुछ काम बने फिर वहाँ जाने मेरे खयाल से अभी जहाँ का लीड मिल रहा है, उधर आगे बढना चाहिए । इसमें बॉर्डर पर पुलिस को काम संभालने दो और आईएसआई में अपने मूल को काम करने तो सबूत जुटाने दो तो लोग धर्मशाला में आगे बढो ऍम का क्या रहा तो सिर्फ चार लोगों की टीम काम कर रही है । कुछ ब्रेकरों मिलते ही तुम लोगों को इतना करते हैं तो केसर

chapter 27

रात्रि का समय था । हिंद महासागर में गजब का तूफान आया हुआ था । रह रहकर बिजली कडक रही थी । निरंतर बारिश हो रही थी । लहरें कई कई फीट ऊंची उठ रही थी । ऐसे मौसम में वाकई वह स्टीमर काबिले तारीफ था जो कि किसी तरह उन लहरों में भी पलटने और डूबने से बचाए हुए था । शायद ये उसके चालक की कुशाग्रता थी । लहरों में उठने से पहले ही उन्हें भाग कर वो स्टीमर को नेविगेट कर रहा था । अचानक स्टीमर की लाइट में उसे समुद्र में कुछ चमका । वो एक प्लेट रन कि धातु से बनी कोई चीज थी । उसने स्टीमर को उसकी ओर क्या, पास आने पर उसे उस चीज का बेहतर दीदार मिला तो उसे पहचान गया । वो प्लेन का फीस इलाज था । तो क्या दिन के अंदर गया और जब कुछ देर बाद बाहर आया तो उसके शरीर पर स्कूबा डाइविंग की पोशाक थी । उसने बाहर ही कोने में रखी वह जैकेट पहन ली जिस पर गैस सिलेंडर लगे हुए थे । फिर उसने मास्क धारण किया और नाक की जगह मुंह से सांस खींचने लगा । उसके बाद वो स्टीमर पर लगी सीढियों से समुद्र में उतर गया तथा काले पानी के अंदर वो करता चला गया । उसके मास्क के ऊपर लगी लाइट उसे पानी के अंदर देखने में सहायक अवश्य थी । पर फिर भी रात के इस अंधेरे में कुछ भी देख पाना काफी कठिन था । कुछ और फिट नीचे उतरने के बाद उसे मछलियां नजर आई जो इस आगंतुक को देखकर कुछ भर भी थी । कुछ देर प्रयास करते रहने के बाद भी उसे कुछ खास नजर नहीं आया तो वह सतह की तरफ अग्रसर हुआ । ऊपर आने के बाद उसने देखा वो बोर्ड से कुछ दूर आ गया था । उसने समुद्र की सतह पर दूर दूर तक देखने का प्रयास किया । फिर एक तरफ से कुछ चमका । कुछ कह रहा था । वो उस तरफ बढ गया । कुछ देर तैरने के बाद वहाँ पहुंचा । उस वस्तु के नजदीक पहुंचने के बाद वह हैरान रह गया । वो पानी में तैरते एक लाश थी । उसने ध्यान दिया । उसके बाद लम्बे थे । वो एक बच्ची थी । उसने लाइफ जैकेट पहनी हुई थी, इसलिए वह डूबी नहीं थी । उसने उसका चेहरा अपनी तरफ लटकाया । उसका चेहरा देखते ही वह सकते में आ गया तो अलग नहीं । मेरी बच्चे क्या हो गया, तुझे वो उसके गाल थपथपाने लगा । मैं तुझे कुछ भी नहीं होने दूंगा । मेरी जान उसे खींचते हुए बोर्ड की तरफ करने लगा । कुछ देर बाद वो उसे लेकर बोर्ड पर पहुंच गया । बुरी तरह हफ्ते हुए । उसका शरीर बोर्ड पर लेटा दिया । उसका पूरा शरीर एकदम सफेद पडा था । मानव पूरा खून जल चुका हूँ पर वो उसे जिन्दा करने पर आमादा था । वो उसकी छाती पर हाथों से स्पंदन करने लगा । लडकी के शरीर में काफी पानी भरा था । जो उसके मुंह से निकलने लगा । उससे मेरी जान फलक मेरी बच्ची देखते देखते रेड्डी ने तुझे ढूंढ लिया । उस जब बच्ची तभी पीछे से उसके कंधे को किसी ने थपथपाया । ये मर चुकी है । हौसला रखो, मेरे भाई ऐसे कैसे मार सकती है । अभी तो इसमें ढंग से जिंदगी भी नहीं कुछ नहीं होगा । ऐसे देखना अभी उठकर बैठेगी । वो उसी तरह निरंतर उसकी छाती, पर्स, बंधन करते हुए बोला क्या हुआ? क्या हुआ है तो मैं वो उसे झकझोरते हुए बोला

chapter 28

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश अचानक ही जावेद ने चौक कर रखी खोली । वो प्लेन की सीट पर था । जॉन उसकी तरफ चिंतित मुद्रा में देख रहा था । उसका हाथ उसके कंधे पर था । जावेद ने दो पल उसकी तरफ अचरज से देखा । फिर अपने चेहरे पर हाथ फेरा तो ठीक हूँ । जॉन ने पूछा, जावेद ने हामी भरी । जॉन समझ सकता था आजकल जावेद के मन में क्या चल रहा है? किस तरह के स्वप्न उसे व्याकुल कर रहे हैं । दोनों इस वक्त प्लेन में थे और वह कुछ ही देर में धर्मशाला पहुंचने वाले थे । मैकलोडगंज में धर्मगुरु सुजुकी का आश्रम था । जावेद ने दिल्ली से ही आश्रम में फोन करके वहाँ आने की इच्छा व्यक्त कर दी थी । उसे वहाँ से सकारात्मक उत्तर मिला । उनके साथ विशाल भदौरिया नामक इंटरप्रेटर भी था, जो कि सीनों भाषा में दक्ष था । धर्मशाला के एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद टैक्सी करके वो लोग सीधे आश्रम पहुंचे । आसाराम के अंदर उन्हें कुछ देर इंतजार करने को कहा गया । आश्रम में चारों तरफ भव्य कपडे पहने शिष्य और पुजारी दिखाई दे रहे थे । पूरा आश्रम लकडी से बना हुआ लग रहा था । वहाँ एक मनमोहक सुगंध व्यापक थी और माहौल में मन शांत करने का प्रवाह था । आखिरकार सूजूकी के कमरे का दरवाजा खुला और वो लोग अंदर आ गए । उनके सामने जमीन पर बिछी चटाई पर बैठा एक साल का सीना मूल का वृद्ध बैठा था । उसके चेहरे पर बेहद मनमोहक भाव थे । कोठों पर विद्यमान बरबस मुस्कान से हुए प्रसन्नचित इंसान प्रतीत हो रहा था । उसके सामने लकडी की एक चौखट थी, जिसपर कोई बडी से किताब खुली थी । उसने उन तीनों को अपने सामने विषय कालीन पर बैठने का इशारा किया और उनके साथ आए शिष्यों को वापस जाने का निर्देश दिया । हमें मिलने का समय देने के लिए आपका शुक्रिया जॉन बोला तो विशाल ने अपनी जॉब शुरू कर दी । उसने सीनों में उसका अनुवाद करके गुरु सोनू की को बताया । सुजुकी ने भी पराया उत्तर में उनसे मिलने की खुशी उजागर की । अम् इंडियन एयरलाइंस के एक लापता विमान की खोजबीन में लगे हैं । हमारी जानकारी के मुताबिक आप और आपके चार शिष्य ने भी इस फ्लाइट में बुकिंग कराई थी । पर अंतिम समय में अपने वो फ्लाइट बोर्ड नहीं की । हम उस बारे में जानना चाहते हैं । सूजुकी ने पूछा, आप लोग कब की बात कर रहे हैं? कहाँ से कहा की फ्लाइट थी? करीब छह साल पहले लखनऊ से कतर की फ्लाइट और क्या जाया काम उस वक्त लखनऊ में थे और वहाँ से मुंबई जाने वाले थे । सुजुकी ने बताया, यहाँ ये फ्लाइट लखनऊ से मुंबई और फिर मुंबई से कतर जाने वाली थी । आपकी बुकिंग मुंबई तक का था । आपकी बुकिंग मुंबई तक की थी । सही का आपने? जॉन बोला मुझे याद है अंतिम समय में हमारा प्लैन चेंज हो गया था । आप लोग मुंबई के सिलसिले में जा रहे थे । एक सभा थी तीनों और भारत के संबंधों पर उसमें हमें आमंत्रित किया गया था । फिर आप लोग क्यों नहीं गए? कुछ कारणों से हमें आश्रम वापस आना पडा । हमारे मुख्यपुजारी की तबियत काफी बिगड गई थी । कौन है वो की हम जान सकते हैं क्या वो अभी भी आश्रम में नहीं । वो स्वास्थ्य के करीब एक महीने बाद ही उनकी मृत्यु हो गई थी । तो ये तो बहुत बुरा हुआ । कोई बीमारी थी क्या? उन्हें एक तरह से ये समझ लीजिए की धरती पर उन का समय पूरा हो गया था और परंपरा महेश्वर ने उन्हें बुला लिया । सुजुकी ने संजीदगी के साथ जवाब दिया क्या उम्र क्योंकि साल ओके जॉन चुप हुआ तो जावेद ने पूछा आप भारत में कब से हैं । करीब दस साल हो गए । तीनों में आप क्या करते थे? वहाँ भी हम धर्म गुरु थे और हमारा आश्रम था । हम अपने धर्म का प्रचार करते थे लेकिन तीनों सरकार को हमारे विचार पसंद नहीं आते थे । हमारी उनके साथ तल्खी स्तर पर पहुंच गई थी कि वो हमें मृत्युदंड देना चाहते थे । इसलिए हमें भारत में शरण लेनी पडी । भारत एक महान देश और तरह के धर्म का सम्मान करता है । लेकिन हमारे देश तीनों में ऐसा नहीं है कि आपको बाद में पता चला कि उस प्लेन का हाईजैक हो गया या फिर लापता हो गया और आज तक उस विमान के बारे में कुछ पता नहीं चला जो हमने पूछा । हाँ, हमें ये समाचार मिला था । उसके बाद हमने आश्रम में विशेष पूजा आयोजित की थी । विमान के वापस मिलने और पैसेंजर्स की सकुशल वापसी के लिए आज की आपकी पूजा भगवान ने सुनी होती । जॉन ने गहरी सांस छोडते हुए कहा परमेश्वर की मर्जी के आगे तो किसी की नहीं चलती । आप लोग ने काम कर रहे हैं । शायद कुछ बडी वजह होगी कि आपको ये काम मिला और अब उस विमान को खोने का रहस्य खोलेगा तो जरूर उससे मानवता का भला होगा । हमारी कोशिश तो यही है । जावेद बोला, वैसे आप के आश्रम में और कौन पुजारी है? देखिए हम कुछ और लोगों से बात करना चाहते हैं । आप के साथ जो चार शिष्य उस विमान में बैठने वाले थे उनसे भी बात करना चाहते हैं । आशा करते हैं वो चारों अभी भी आश्रम में ही होंगे था । वो चारों यहीं पर है । आपको उन चारों से आश्रम में किसी से भी बात करने के लिए पूरी छूट है । आप बिलकुल ना हिचकें चाहिए तो आश्रम में ही कुछ दिन बता सकते हैं । आपको यहाँ रहकर अच्छा लगेगा । हो सकता है परंपरा पेशवर आपका मार्गदर्शन करें । मुझे आप के साथ बैठकर पूजा करने में भी खुशी होगी । आपके विचार काफी महान है । जावेद बोला पहले हम चार लोगों से मिल लेते हैं । सूजूकी ने हामी भरी और फिर घंटी बजाई । कुछ ही देर में एक शिष्य अंदर आ गया । सुजुकी नहीं । उसे अपनी भाषा में निर्देश दिया । फिर कहा या कौन चारों से मिलवाने ले जाएगा । उसके अलावा भी अगर आप किसी से बात करना चाहें तो ये आपकी मदद करेगा । कोई भी परेशानी हो तो आप मुझे आकर बता सकते हैं । आपका बहुत बहुत शुक्रिया । जावेद ने कहा, फिर वो तीनों उठ खडे हुए और कृतज्ञता के साथ सुजुकी का सिर झुकाकर अभिवादन करके उस शिष्य के साथ उस कमरे से बाहर निकल आए । कुछ ही देर में आश्रम के आंगन में वह चार शिष्यों के साथ बैठे थे । आसाराम के बाकी लोग उन्हें ध्यान से देख रहे थे, पर उस लंबी शिष्य के इशारे पर वह लोग वहाँ से चले गए । उन लोगों ने उन चारों शिष्यों से कुछ सवाल पूछे, पर उन्हें ऐसी कोई नई बात नहीं पता चली जो सुजुकी ने पहले ही न बता दी हो । फिर जावेद और जॉन ने किसी पुजारी से मिलने की इच्छा जाहिर की । उन्हें पुजारी से मिलवाया गया । उसका नाम जो हमारा था हुए कम कद का वृद्ध था । उसकी लंबी सी नुकीली सफेद आ रही थी और पतली पतली । मुझे थी कि आप मुख्य पुजारी को जानते थे, जिनकी मृत्यु कुछ समय पहले हुई । जॉन ने पूछा, हाँ, बिलकुल जानता था । उन का नाम लिया था । वो एक महान इन्सान थी । मैंने उनसे काफी कुछ सीखा था । तो आपको याद होगा जिस दिन गुरु सुजुकी और उनके चार शिष्य फ्लाइट से मुंबई जाने वाले थे, क्या उसने नचाना की लियांग को कुछ हुआ था? पोस्टेन उस दौरान उनकी तबियत काफी खराब चल रही थी । हम सभी जानते थे वो किसी भी पल परम परमेश्वर की ओर कूच कर जाएंगे । गुरु सुजुकी को शायद अंदेशा था कि कुछ अनिष्ट होने वाला है इसलिए वो वापस आ गए । यानी वापस आने से पहले भी लियांग की तबियत खराब थी । थांग उनकी तबियत काफी समय से खराब चल रही थी । क्या कोई डॉक्टर उन्हें देख रहा था? हमारी वैदेही देख रही थी । अंग्रेजी दवाइयाँ और इलाज हमारे यहाँ कोई लेता नहीं तो क्या उस देना चाहता? कुछ हुआ था दिल का दौरा या बेहोशी या कुछ और? वो लगातार बिस्तर पर ही थे । बहुत ही कमजोर हो गए । नहीं उठ भी नहीं पा रहे थे । आप शायद समझ नहीं रहे । जॉन हाथों का प्रयोग करते हुए अपनी बात समझाने का प्रयास कर रहा था क्योंकि उसे लग रहा था कि हिंदी से तीनों भाषा में सही मैसेज शायद पहुंच नहीं पा रहा था । मैं ये जानना चाहता हूँ की उस दिन अचानक की उनकी तबियत को क्या हुआ की सूजूकी अपना सारा प्लैन कैंसिल करके दौडे दौडे वापस आ गए । विशाल नहीं सवाल को उपयुक्त तरह से सीनों में प्रस्तुत करने की पुरजोर कोशिश की । यू हामा ने ना में सिर हिलाया विशाल बोला सही कह रहे हैं कि इन को नहीं पता वो तो मुझे भी देखा है । जॉन खींचते हुए बोला, पर इसका मतलब क्या हम यह समझें कि उनकी सेहत पर अचानक से कोई प्रभाव नहीं पडा था । उनकी तबियत पहले भी खराब थी और बाद में भी खराब थी । यहाँ कोई ऐसा डॉक्टर भी नहीं था जो ठीक से बता सके कि उनकी डायग्नोस किया सिम्टम्स क्या थे सर, मुझे तीनो की प्राचीन चिकित्सा पद्धति के बारे में थोडी बहुत जानकारी है । लेकिन मानी वो इतनी पिछली भी नहीं जितनी प्रतीत हो रही है । विशाल बोला ऐसा करते हैं कि वैद्य को बुला लेते हैं । जावेद ने सुझाव दिया कन्फर्म हो जाएगा । फिर एक शिष्य को वैद्य को बुलाने के लिए भेज दिया गया । कुछ देर में वैद्य वहाँ पहुंच गया । अब योकोहामा और वैद्य दोनों सामने थे । जॉन ने पूछा आप गुरू लियान को देख रहे थे । ऐसा उनको क्या हुआ था कि गुरु सुजुकी को अपनी ट्रिप कैंसिल करके वापस आना पडा । उनकी तबियत बेहद खराब हो रही थी । स्वास्थ्य निरंतर गिर रहा था और ये तो गुरु सुजुकी को जाने से पहले भी पता होगा ना । जॉन कुछ तेज आवाज में बोला जॉन्की तेज आवाज ने आश्रम के बाकी लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया । एक शिष्य होते से उसे देखने लगा । विशाल ने जॉन को शांत रहने का इशारा किया । जॉन होठों पर जबरन मुस्कान लाते हुए बोला, देखिए मैं बस ये जानना चाहता हूँ कि किन परिस्थितियों में गुरु सुजुकी को आनन फानन वापस आने के लिए बाधित कर दिया । जहाँ तक मेरी समझ में आ रहा है, गुरु लियांग को अचानक ही कुछ नहीं हुआ था । काफी समय से उन की तबियत खराब थी और निरंतर खराब हो रही थी । मैं ठीक समझता हूँ ना । वैद्य ने स्वीकृति में सिर हिलाया और कहा आप शायद समझ नहीं पा रहे हैं । हम लोग कभी कभी अनिष्ट को भांप लेते हैं । आप इसे टेलीपैथी समझ सकते हैं । गुरु सुजुकी को जरूर एहसास हुआ होगा कि कुछ गडबड होने वाली है इसलिए अपनी ट्रिप कैंसिल करके वो वापस आ गई । ऐसा अक्सर होता है कि हमारे पास किसी प्रियजन के साथ कुछ बुरा घट जाता है और आपको बिना किसी के बताया ही इसका आभास हो जाता है । मैं मानता हूँ ऐसा होता है । जॉन बोला और उस वक्त से पहले भी वह बीमार ही थे और उस घटना के एक महीने बाद गुरु लियांग की मौत हुई यानी एमरजेंसी जैसा कुछ नहीं था जो मरणासन थी । वैद्य बोला तबियत ऊपर नीचे होती ही रहती थी । ऐसे में कब क्या होगा कुछ नहीं कह सकते । किसी धर्म संकट की वजह से गुरु सूजूकी वापस आ गई थी । मैं समझ गया । जॉन बोला आप सभी का शुक्रिया । उसके बाद वो लोग सुजुकी के कमरे में वापस पहुंचे । जावेद बोला गुरूजी हम लोग अभी कुछ दिन धर्मशाला नहीं है । अगर जरूरत पडी तो आपसे दोबारा मिलने आएंगे । आशा करते हैं आपको हमारी इस मुलाकात से ज्यादा कष्ट नहीं हुआ होगा । मेरे दोस्त सूजूकी खडे होकर बोले, आप जैसे महान लोगों के यहाँ आने से हमें कभी कष्ट नहीं हो सकता । आप लोग ने एक और देश भक्त हैं, ये आपके हावभाव से ही मुझे पता चल रहा है । आप जब चाहें यहाँ सकते हैं । मैं तो अभी भी बोलता हूँ । आप आश्रम में ही कुछ दिन बताइए, आपको अच्छा लगेगा । आपके इस आमंत्रण के लिए शुक्रिया । पर कुछ वजह है जिसके कारण हमें धर्मशाला में ही रहना पडेगा । धन्यवाद । जावेद ने कृतज्ञ भाव से कहा बहुत बहुत धन्यवाद । जॉन बोला । उनका अभिवादन करके वहाँ से निकले जावेद और जॉन धर्मशाला में स्थित सरकारी गेस्ट हाउस में रुके थे । अभी वो लोग खाना खाने बैठ रही थी कि जॉन को एक फोन आया और फोन पर बात करने के बाद वो जावेद से मुखातिब हुआ । क्या हुआ? जावेद ने पूछा एक ब्रेक थ्रू मिला है क्या? जावेद ने उत्साहित होते हुए पूछा कंचन याद ना वो पायलट विक्रम की? गर्लफ्रेंड हाँ, वही उसे किसी ने विदेश से कॉन्टेक्ट किया है । किस लिए लगता तो उसका बॉयफ्रेंड विक्रम हैं । कंचन का फोन विजल पर रखने का फायदा हुआ । आज ही उसे मोंटेनीग्रो से फोन आया । ऍम तो विक्रम मोंटेनीग्रो में छिपा बैठा है । लगता तो ऐसा ही है । जॉन बोला, पर अब बस ये पता चल जाए कि वह जिंदा है तो अब बस उसे पकडने के दे रहे हैं । पर दूसरे देश से किसी भगोडे को वापस बुलाने के लिए तो लम्बी प्रक्रिया हो जाती है । वो बात भी ठीक है । जॉन बोला अगर ऑफिशियल रास्ते से जाएंगे तो बहुत समय लगेगा । उनका प्लान अब ये है कि उसने फोन पर उनका प्लान अब ये है कि उसने फोन करके कंचन को मोंटेनीग्रो आने को कहा है । उन का प्लान अब ये है कि उसने फोन करके कंचन को मोंटेनीग्रो आने को कहा है । वहाँ पर टूरिस्ट वीजा पर जाएगी और ये महाशय वहाँ उससे शादी करके उसे वहाँ का सिटीजन बना लेंगे । ऐसा पूरा प्लान बनाया हुआ है । एक कंचन भी बेहद चालाक निकली । मेरे खयाल से वो तब से उसके टच में होगा और अब कुछ सालों के अंतराल के बाद उसे लग रहा होगा कि अब मामला ठंडा हो गया । अब पर्सनल लाइफ पर ध्यान दिया जाए । यानी ये तो साफ है कि विमान गायब होने में पायलट की मिलीभगत थी । जावेद अपनी थोडी सहलाते हुए बोला यानी ये तो साफ है कि विमान गायब होने में पायलट की मिलीभगत थी । जावेद अपनी थोडी सहलाते हुए बोला अगर ये विक्रम ही है तो हाँ लेकिन अजय का क्या रोल था ये जानना भी बाकी है । वो भी मिला ही होगा । उसमें कैसा क्या है? जावेद पूरे आत्मविश्वास के साथ बोला नहीं जरूरी नहीं है । प्लेन हाईजैक करने के लिए एक पायलट का मिला होना भी काफी है । विक्रम को मिला लिया होगा । बाद में भले ही अजय को बेहोश या मार के एक तरफ डाल दिया हो और विक्रम से प्लेन गायब करवा लिया होगा । जो भी हो लेकिन हम समझ रहे हो ना । जावेद की आंखों में अनोखी चमक थी । इसका मतलब प्लेन कहीं ना कहीं सकुशल लैंड हुआ है तभी उसमें बैठा पायलट विक्रम अभी तक जिंदा है । इसका मतलब मेरे भाई मुझे पूरा यकीन है । जॉन मुस्कुराकर बोला जावेद के चेहरे पर आई प्रसन्नचित मुस्कान हर रोज नहीं दिखाई देती थी । वो बोला अब हमें आगे क्या करना है? मेरे खयाल से विक्रम को जल्द से जल्द पकडना होगा । उस से काफी कुछ पता चल सकता है । तुम ठीक कह रहे हो पर ये काम बहुत ध्यान से करना होगा । ऑफिशियल तरीके से बहुत लंबा समय लगेगा क्योंकि अब तक तो वहाँ का सिटिजन बन गया होगा । हाईजैकिंग के लिए उसे जरूर बडी रकम मिली होगी जिसके सहारे उसने एक नए देश में नए काम से एक नई जिंदगी शुरू की होगी । मेरे खयाल से इसके लिए हम में से किसी को मोंटेनीग्रो जाना चाहिए तो फिर मैं जाता हूँ । जावेद तत्पर्ता के साथ बोला, मुझे लगता है ये काम मैं बखूबी कर पाऊंगा । देखो भाई मोंटेनीग्रो क्रिश्चियन कंट्री है और मैं क्रिशन । मुझे वहाँ ज्यादा दिक्कत नहीं आने वाली । मैं अपने असली पासपोर्ट पर भी आराम से जा सकता हूँ और तुम्हारे लिए इस मिशन में काफी रेस्ट्रिक्शन हो सकती हैं । मैंने कुछ गलत कहा हो तो माफ करना नहीं । तुम प्रैक्टिकल बात कर रहे हैं और उसमें कुछ भी गलत नहीं है । लेकिन मैं जाना चाहता हूँ देखो भारत में भी मोर्चा संभाला जरूरी है और फिलहाल सुजुकी पर भी नजर रखने के लिए कोई ना कोई तो चाहिए । अभी काम हम दोनों में से किसी एक को करना ही होगा तो अच्छा होगा । मैं आसानी से मोंटेनीग्रो जाकर काम कर सकता हूँ तो मैं चला जाता हूँ । यहाँ का काम तुम संभालो । कुछ देर इसी तरह विचार विमर्श करके यही सहमती बनी कि जॉन मोंटेनीग्रो जाएगा और जावेद फिलहाल भारत में ही रुकेगा । चीफ अब वैसे भी बात हो गई और वो इसके लिए सहमत हैं । तुम यहाँ क्या कर रहे हो? अमर उसकी दिलकश आवाज तुरंत पहचान गया । उसने धीरे धीरे आंकी खोली तो उसे अपने सामने पाया क्योंकि भारतीय नहीं हूँ । इतनी जल्दी कैसे भूल पा होगी । तुम यहाँ क्या कर रही हूँ? अमर ने चारों तरफ देखा वो एक हॉस्पिटल में था । बगल में नर्स और एक डॉक्टर भी था । दूसरी तरफ था वे कपडों में एक सीन गुरु खडा था ये सवाल मैंने तुमसे क्या है? पहले तुम जवाब दो, तुम यहाँ क्या करने आया हूँ? देखिए कुछ सवालों के जवाब ढूंढता हुआ यहां पहुंचा था । अभी तो तुम्हें कई और सवालों के जवाब खोजने हैमर्स अभी तो मैं बहुत इम्पोर्टेन्ट काम कर रहे हैं । किसी पर भी आसानी से विश्वास मत करना ये साजिश बहुत बडी है । इसमें ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं जिनकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं । अमर ने स्वीकृति में सिर हिलाया तो उसे निहारने लगा । उसने रिंकी के चेहरे की तरफ हाथ बढाया । उसके गाल कुछ हुआ । रिंकी ने उसका हाथ चूम लिया । तुम कैसी हो मैं तो मैं बहुत मिस करता हूँ । तुम्हारे बिना जीना बहुत मुश्किल है । रिंकी मुस्कुराई, मुस्कुराते हुए वो एकदम छोटी बच्ची लगने लगी । अमर उसे देखकर भावविभोर हो गया तो भी मुझे बहुत याद आती हो । पर मैं कोशिश करती हूँ तो मैं काम याद करूँ, याद करती रहूंगी तो फिर तुम्हारा जीना मुश्किल हो जाएगा । इसलिए अब अकेले रहने की आदत डालनी है । देखो मैं एक दिन तो हम दोनों का मिलना तय है पर अभी नहीं तो मैं भी देश के लिए बहुत कुछ करना है । लेकिन तुम्हारे बिछडने का गम वक्त के साथ काम ही नहीं होता बल्कि बढता ही जा रहा है । कितना भी मन को मनाता हूं मानता ही नहीं । मुझे दिल से जो प्यार करते हो तो हम हर जन्म के साथ ही इसीलिए मेरे बिछडने का हम मत करो । हमें आगे कई कई जन्मों में साथ रहना है । एक दूसरे के प्रति जो प्रेम है उसकी वजह से हमें अपना कर्म खराब नहीं करना है । तुम्हारा जोकर में उसे पूरा करो । बहुत प्रवचन देने लगी । हो हूँ । आजकल यहाँ सत्संग में ड्यूटी लगी हुई है । अमर हस्तिया अब तुम अपनी ड्यूटी पर जाओ । बहुत मजाक हो गया । अचानक अमर जोर जोर से हाफने लगती क्या हो रहा है ये क्या करेंगे? घर कुछ नहीं सब ठीक हो जाएगा उसे । रिंकी धीरे धीरे किसी प्रतिबंधों में बदलकर हवा में तेजी से उड रहे चक्रवात में सम्मिलित होती हुई नजर आई हूँ और फिर अचानक अमर उठकर बैठ गया । वो पूरी तरह से हाफ रहा था । उसने कंधे पर किसी का हाथ महसूस किया तो ठीक हो वो सौम्या थी । वहाँ एक डॉक्टर और नर्स भी मौजूद हैं । वो लोग एक हॉस्पिटल के कमरे में थी । क्या हुआ था मैं कहाँ पर? अमर बेचैन स्वर में बोला तुम्हारे गम ठीक हो और अभी हॉस्पिटल में हूँ । गोली पीठ पर लगी थी । डॉक्टर बोला देखिए जख्म गहरा है पर आपके वाइटल ऑर्गन्स बच गए । गोली थोडी भी इधर उधर होती तो भारी गडबड हो सकती थी । हमने पुलिस को इत्तिला कर दी है । अभी आप आराम करो, वो लोग बाद में आपका बयान ले लेंगे । मैं पुलिस को बयान दे सकता हूँ । उन का पकडा जाना जरूरी है । अमर वैगरह स्वर में बोला तो फिक्र मत करो । मैंने पुलिस को पहले ही सब कुछ बता दिया है । सौम्या बोली अब आराम कीजिए कहकर डॉक्टर चला गया । अमर ने पूछा तुमने पुलिस को मेरे बारे में क्या बताया? मैंने यही कहा कि तुम हमारे आश्रम में रहते हो । ओसाका गुरु के शिष्य अच्छा क्या कोई पकडा गया? अमर ने पूछा नहीं उस वक्त वो लोग मेरे पीछा रहे थे । तुम्हारी जख्मी होने के बाद मैंने तो मैं वहीं पर छोडा और दौड कर शहर की तरफ पहुंची । कुछ ही दूरी पर मुझे गश्ती पुलिस मिल गई जिनकी सहायता से मैंने तो मैं हॉस्पिटल पहुंचाया । थैंक्यू तुम थैंक्स माँ तो तो मेरी जान बचाई और फिर मेरी वजह से ही तुम इस मुसीबत में पड गए । पर आखिर क्या वजह है जो ये तुम्हारे पीछे पडे हैं । क्या ये नेगी के दुश्मन अभी तुम आराम करो, ज्यादा मत बोलो । फिर नर्स ने हमार को एक इंजेक्शन दिया । अब मैं चलती हूँ । सौम्या ने हल्के से अमर का हाथ दबाया और वहाँ से रुखसत हुई । अमर की आंखों के सामने सौम्या का इस यू से बाहर निकलता हुआ अब धान दिलाता चला गया । दूसरे दिन जॉन मोंटेनेग्रो का वीजा निकलवाने के लिए दिल्ली चलाया । जावेद सुबह से ही सुजुकी के फोन नंबर की सारी हिस्ट्री खोलकर जांच पडताल में लगा हुआ था । आखिरकार दोपहर तक उसे कुछ आगे बढने लायक जानकारी हासिल हुई । एक बार फिर विशाल के साथ सुजुकी के आश्रम पहुंचा । वो एक बार फिर विशाल के साथ सुजुकी के आश्रम पहुंचा । इस बार सुजुकी से मिलने के लिए ज्यादा कठिनाई नहीं हुई । उसके कमरे में पहुंचकर सबसे पहले जावेद ने उसे दोबारा कष्ट देने के लिए माफी मांगी । इसमें कष्ट की कोई बात नहीं है । सुजुकी ने कहा, गुरु जी मैं एक बार फिर आपसे उस वक्त की बात करना चाहता हूँ जब विमान गायब हुआ जिसमें आप और आपकी शिष्य बैठने वाले थे । सुजुकी ने मुस्कुराते हुए सिर को हल्की सी जुंबिश थी । उस वक्त आपको कुछ फोन कॉल्स आए थे । आपके आश्रम के एक नंबर से कई बार और एक और दिल्ली से किसी मोबाइल फोन से हाँ काफी फोन आए थे । उस वक्त हम दिल्ली से आए थे, वहाँ हमारे शिष्य हैं । फिर मुंबई से भी जहाँ हम जा रहे थे । दिल्ली में आपके किसी शिष्य का नाम नहीं था । सूजूकी सोच में बढ गए । जावेद ने फोन निकाला और उसमें निक्का फोटो निकाल कर सूजूकी को दिखाया । सूजुकी ने इंकार में सिर हिलाया । फ्लाइट तीन सौ की बोर्डिंग से मात्र दस मिनट पहले आपको किसी का फोन आया था और आपकी बात सिर्फ दस सेकंड हुई थी, शायद हुई थी । पर मुझे याद नहीं क्या बात हुई थी । सुजुकी ने विशाल की मदद से कहा, देखिए आपको याद करना होगा क्योंकि ये आदमी हमारे लिए वॉन्टेड है । इसलिए आप पता कर के बताइए, इसका आपके साथ क्या कनेक्शन रहा है? जावेद जोर देते हुए बोला, और फिर उसने अपना पैर दूसरे पैर पर इत्मीनान से चढा लिया । जैसे कि जवाब लेने के लिए उसके पास पूरा समय था । मुझे उसका नंबर और फोटो भेज दो, मैं पता कर के बताता हूँ । सूजुकी ने कुछ सोचने के बाद कहा ठीक है तो मैं इस मामले के बारे में पूछताछ करने के लिए कल दोबारा हूँ । अभी ज्यादा दीजिए आपको कष्ट देने के लिए । एक बार फिर से क्षमा जावेद खडे होते हुए बोला सुजुकी ने मुस्कुराते हुए अपने सिर को हल्की सी जुंबिश अमर को होश आ चुका था, अब पहले से बेहतर महसूस कर रहा था । उसने पुलिस को बयान दिया कि वह अपनी आश्रम की दोस्त सौम्या के साथ त्रियूंड घूमने गया था और वहाँ कुछ लडकों ने उसके साथ छेडछाड करने की कोशिश की । वो लोग वहाँ से सकुशल निकल गए, पर वापसी के दौरान उन पर फायरिंग हुई । अमर ने अपनी नकली आइडी की बदौलत खुद का नाम अमन शर्मा बताया, जो कुछ समय से ओसाका के आश्रम में रह रहा था । पुलिस ने बयान लिया और कहा कि कुछ दिन में वह कुछ सस्पेक्ट ढूंढकर शिनाख्त के लिए उन्हें थाने बुलाएंगे । अमर और सौम्या नी सहमती जताई हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद अमर किसी होटल में रुकना चाहता था, पर सौम्या के आग्रह पर वो ओसाका के आश्रम में आ गया । ओसाका के आश्रम के पीछे बर्फीले पर्वतों का खूबसूरत नजारा था, जिसका दीदार अंतर्मन में एक सुखद अहसास दिला रहा था । आश्रम में प्रवेश करते हुए अमर को बेहद अच्छा लगा । वहाँ का माहौल ही कुछ ऐसा था । चारों तरफ लाल कपडे धारण किए शिष्य घूम रहे थे, जिनके सिर पर मात्र छोटी छुट्टियाँ भर के बाल थे । सभी उसका झुककर अभिवादन कर रहे थे । शायद नए मेहमान का सभी इसी तरह स्वागत करते थे । वो लोग सीधे गुरु ओसाका के कमरे के बाहर रुके । कुछ देर में द्वारपाल ने अंदर जाने की अनुमति दी । अंदर उन्हें ओसाका के दर्शन हुए । वर्षीय सपाट वाक, कांतिमय चेहरा, छोटी आंखें, सिर पर एक भी बाल नहीं माथा बेहद चौडा था । इतना कि चेहरे का आंखों से नीचे का हिस्सा माथे से छोटा लगता था । अमर को देखते ही वो उठा और फिर झुककर अभिवादन करने के बाद उसने अमर को गले लगाया । फिर साफ हिंदी में बोला, आपका श्रम में स्वागत है । आपने एक मोदी जी की रक्षा की । आप हमारे लिए ईश्वर के अवतार सामान है । आसाराम की शिष्या मोदी जी कहलाती हैं और शिष्य मोदी । सौम्या ने अमर को बताया, अमर मुस्कुराया और उसने हाथ जोडे । मैंने कोई महान काम नहीं किया है । गुरु जी आप मुझे यहाँ रहने के लिए जगह दे रहे हैं । ये मेरे ऊपर एहसान हैं । उसने अमर के हाथ थाम लिए । ऐसा मत कही । ईश्वर के अवतार का यहाँ रोकना हम सभी का इंसान है । आप यहाँ जितना अधिक समय व्यतीत करेंगे, उतना ही अधिक हम पुण्य कमाएंगे । इससे अपना ही घर समझे जरूर । उसके बाद सौम्या अमर को एक छोटे किंतु आरामदायक कमरे में ले गई । तुम यहाँ आराम करो । मैं कुछ देर में वैद्यजी को भेज दी । उनकी दवा और यहाँ की आबोहवा से देखना तो बहुत जल्दी ठीक हो जाओगे । अमर मुस्कुराया चलो तुम्हारी मदद करने का यह फायदा तो मिला हूँ तो मैं भी मुस्कुरा दी । फिर वो चली गई । अमर ने अपना बैग एक कोने में रख दिया । कमरे में जमीन पर दरी बिछी हुई थी और एक कोने में गद्दा लगा था । अल्मारियों में अधिकतर धार्मिक किताबें थी । सामने एक और दरवाजा था जिसे खोलकर अमर निकला तो राहदारी आ गई । जिसके आगे रेलिंग थी । रेलिंग के सामने पहाडी नजारा था । अमर ने झांककर देखा । रेलिंग के नीचे कुछ दूरी पर पहाड खत्म हो रहा था और उसके आगे गहरी खाई थी । अमर रेलिंग के सहारे खडा होकर काफी देर उन नजारों से सम्मोहन सी अवस्था में खोया रहा ।

chapter 29

वर्तमान समय लखनऊ । अब कुमार इस वक्त सीक्रेट सर्विस के लखनऊ ऑफिस में मौजूद अपने कैबिन में बैठा लैप्टॉप पर किसी रिपोर्ट को पढने में मशरूम था । तभी सीबीआई दिल्ली से राजनीति तन का फोन आया । अलोर आज उसने जवाब दिया, अब मैं हवाई डूबेंगे फॅार यू ऍम और बताओ कैसे याद किया? ऍफ नहीं है । अब है । शांति से सुन रहा था । उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे उसे पहले से ही किसी बुरी खबर के मिलने का अंदेशा था । लियोन ने अगले हफ्ते मंडे मॉर्निंग तक धीरज नेगी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट मांगी है । अब मैंने कैलेंडर की तरफ देखा, आज मंगलवार है यानी आज का दिन मिलाकर सिर्फ छेडे फॅमिली रिपोर्ट न मिलने पर वो एक टीम भारत भेजेंगे । इन्वेस्टिगेशन और पूछताछ के लिए और उन्हें अमर हिरासत में चाहिए होगा । अभय का चेहरा एकदम सपाट था । योगिनियां, मैं यस मुझे उम्मीद है मंडे तक रिपोर्ट बन जाएगी । अब सब कुछ तुम्हारे ऊपर निर्भर है । हम से जो भी मदद चाहिए हो बेज्जत बोलना, शर्ट थैंक्स राज कहकर अब मैंने फोन रखा । कुछ सोचने के बाद उसने जावेद का नंबर मिलाया

Chapter 30

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश शाम के चार बजने में कुछ ही मिनट शेष थे । सूजूकी के आश्रम के मुख्यद्वार की रक्षा करते हुए भव्य वस्त्र पहने दो शीर्षक खडे थे जो कि आते जाते हर इंसान पर नजर रखे हुए थे । वो पहाडी लडका जिसमें सौम्या और अमर पर हमला किया था, आश्रम के द्वार की दिशा में तेजी से चलते हुए आ रहा था । जैसे ही वह द्वार पर पहुंचा दोनों शिष्यों ने उसका रास्ता रोक लिया । वह रोका नहीं । उसने दोनों को बाजू से पकडा और घुमाकर झटक दिया । दोनों एक तरफ जा गिरे । वो अन्दर प्रविष्ट हो गया । दोनों संभाल कर उठे । उनके चेहरे पर आश्चर्य था । फिर आवेश में चीखते हुए दोनों उसके पीछे लपके । इससे पहले की वह से छूट भी पाते । वो हवा में फिर अपनी की तरह घूमा और उसकी की दोनों के सीने पर लगी । दोनों एक बार फिर धरती चुम गए । इस बार के प्रहार ने दोनों को करारी चोट दी थी । वो दोबारा उठने में असमर्थ थे । आसाराम के अंदर कई लोगों ने यह नजारा देख लिया था और चार शिष्य उसकी ओर दौडे । उसने अपने हाथ साफ के फन की तरह फैलाए और फिर चक्रवात की तरह घुमाते हुए उसने सभी पर अपने हाथों और लातों की बौछार कर दी । वो रुक नहीं रहा था । तेजी से आगे बढता जा रहा था । वो आश्रम के एक बडे से कमरे के द्वार पर पहुंच गया । उसने दोनों हाथों से उसकी विशाल दरवाजे धकेलकर खोल दिए । अंदर जमीन पर धर्मगुरु शुरू की । वह दो और वरिष्ठ पुजारी मौजूद थे । एक रक्षक था जो लडके को देखते ही क्रोधित होते हुए उस की तरफ बढा । वो हवा में उछाला तो उसे देख रक्षक भी हवा में उछाला । दोनों ने के घुमाई जो आपस में भिडी और फिर दोनों जमीन पर खडे हुए । फिर वो चक्रवात की तरह घूमा । पर राक्षस उससे न सिर्फ बच्चा बल्कि जमीन पर झुककर उसके पैरों पर ठोकर । जल्दी वह गिर गया । राक्षसो उस पर टूट पडा । उसने उसकी गर्दन अपनी भुजाओं में जगह ली । पर वो सख्त जान था । उसने हाथों से रक्षक की जांघ पकडी और फिर उसे पलट कर गिरा दिया । इससे पहले की रक्षा कुडथा उसमें उस पर लातों की बौछार चला दी । रुक जाओ अचानक सूजूकी चीखा । वो एकदम से रोक गया । सुजुकी उसकी तरफ पढा । उसने नजरे झुका ली है क्या चाहते हो तो हूँ । वो कुछ नहीं बोला । हाथ जोडते हुए उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया । सूजूकी सूझ भरी मुद्रा में उसे देखने लगा । शाम को अमर के कमरे पर सौम्या वैध के साथ पहुंची । वैध अमर को शर्ट उतारने को कहा और फिर उसके गांव पर किसी किस्म की जडी बूटी का लेप लगा दिया । साथ ही उसने एक कटोरी में कुछ दवाएं खोलकर कहे जैसा अर्थ तैयार किया । कुछ देर बाद अब लेप सूख गया है । तुम अपनी शर्ट पहन लोग । वैद्य ने मुस्कुराते हुए कहा वो एक छोटे कद का लम्बी दाढी और पतली मुझे वाला खुशमिजाज व्यक्ति प्रतीत हो रहा था । वो बोला काफी कसरती बदन है तो मारा । बन्दूक की गोली भी अच्छा झेल गए । कोई और होता तो इस वक्त अपने पैरों पर खडा नहीं हो पाता । शायद मैं भी खडा नहीं होता । वो तो मेरी खुशकिस्मती थी कि दीपिका । उस वक्त मेरे साथ ही अमर ने प्रशंसा भरी । नजरों से सौम्या को देखा । सोम्या के गुलाबी होठों पर बरबस मुस्कान आ गई । दीपिका तो हमारे आश्रम की सर्वश्रेष्ठ मोटी है । इस की जितनी प्रशंसा की जाए कम है । प्रभु की वंदना, समाजसेवा, अच्छे कर्म, अच्छी संस्कृति क्या कहूँ इसके बारे में साक्षा देवी है । देवी अब आप कुछ ज्यादा ही प्रशंसा कर रहे हैं । सौम्या छेडते हुए बोली अब तुम ही बताओ क्या मैंने कुछ गलत का वो आंखे फैलाकर अमर से बोला । बहुत नहीं आपने बिल्कुल सच कहा है । वैद्य होकर के हंसने लगा था । अच्छा सुनो मैं एक बडा बनाया है इससे । हर रोज में तो मैं शाम को बना कर दूंगा । इसके नियमित सेवन से एक दो सप्ताह में तुम्हारे सभी घाव भर जाएंगे और कमजोरी भी जाती रहेगी । कमजोरी तो वैसे अभी कोई खास नहीं लग रही है । वो तो तुम्हारी सेहत अच्छी है । इसलिए पर अभी अगर तुम दौड भाग करोगे तब तुम्हें कमजोरी पता चलेगी । और सुनो धूम्रपान और मदिरापान भूलकर भी मत करना, पर मैं छुपने की कोई जरूरत नहीं है । तुम्हारे होठों और आंखों दोनों से ये बातें साफ पता चलती हैं । ठीक है गुरु जी जैसे आप किया गया अमर हाथ जोडकर बोला मैं चलता हूँ प्रणाम प्रणाम । वैद्य ने उठकर मुस्कुराते हुए अमर का कंधा थपथपाया फिर अपना झोला लेकर वहां से चला गया । सौम्या बोली दवा पी लो, थोडी देर में खाना खाने चलेंगे । ठीक है कहकर अमर ने दवा का कटोरा उठाया और एक सांस में भी गया । निहायत ही कडवे स्वास्थ्य । उसने जीत निकालते हुए मुंग बनाया । सौ में खेल खेला उठी । कुछ ही मिनटों बाद अमर को लगा कि वाकई वैद ने सही कहा था दवा के असर से अब उसे अपने शरीर में सूरती का एहसास होने लगा था । आओ चले थोडा खुली हवा में घूमेंगे तो में आश्रम भी दिखा देती हूँ । सौम्या कमरे से बाहर निकली । उसने इस वक्त लाल रंग के भव्य वस्त्र पहने हुए थे और सिर ढक रखा था । अमर उसे ध्यान से देखते हुए बाहर निकला । फिर वो लोग आश्रम के आंगन में पहुंच गए जहाँ कई शिष्या इधर उधर बैठे थे । हर कोई अपने रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त दिखाई दे रहा था । कोई मसाला कूट रहा था तो कोई सूखे हुए कपडे उतार रहा था । अमर को ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी बहुत बडी जॉइंट फॅमिली के घर आ गया हूँ । तो में कभी भी बोरियत महसूस हो तो कोई भी काम बेज्जत पकड लेना । सौम्या मुस्कुराकर बोली जरूर मुझे खुशी होगी । खाली बैठना तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं है । आसाराम के ग्राउंड फ्लोर पर सभी मोतिउर यानी मेल रहते हैं और आश्रम की लडकियां और औरतें यानी कि मोदी जी फर्स्ट फ्लोर पर रहती हैं । पूजा स्थल, गुरुओं का निवास, मीटिंग हॉल आदि सब ग्राउंड फ्लोर पर ही हैं । कोई कितने लोग रहते होंगे करीब एक सौ बीस तीस और ये सभी लोग सीनों देश चाहे थे नहीं । तीनों देश से गुरु ओसाका । वह तीन गुरु जिनमें से एक की मृत्यु हो गई । ये वैद्य और तीन चार लोग और आए थे । दस साल पहले जब सीनों की गवर्नमेंट ने इन सब को मृत्युदंड दिया था, तब ये सभी भाग कर भारत आ गए थे और भारत ने उन्हें यहाँ आश्रय दिया था । उसके बाद धीरे धीरे इन्होंने आश्रम की शुरुआत की और इनके धार्मिक अनुयायी जो कि भारत में भी मौजूद थे, इनसे जुडते चले गए । कुछ अनुयायी जो की पूरी तरह से ईश्वर को समर्पित हो गए और अब संसारी मोहमाया छोडकर सारा जीवन ईश्वर की आराधना में बिताना चाहते हैं को आश्रम में ही रहने लगे हैं । कमाल है मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता । सौम्या ने उसकी तरफ इस तरह देखा जैसे किसी नादान बच्चे को देख रही हो और कोई तुम्हारी तरह स्ट्रांग नहीं होता । उनके पास जीवन में बुरे वक्त को अकेले झेलने की काबिलियत नहीं होती । तो क्या तुम कहना चाहती हो कमजोरी हमें ईश्वर की आराधना करने के लिए मजबूर कर देती । सिर्फ यही कारण है जिसकी वजह से इतने सारे लोग यहाँ मौजूद है क्योंकि उन्होंने सामाजिक जीवन में कुछ स्ट्रगल किये और उन से हारकर यहाँ गए नहीं । इस तरह का निष्कर्ष निकालना तो सिरे से गलत होगा । पर किसी रिलीज की तरफ मुखातिब होने के पीछे कोई न कोई वजह जरूर चाहिए होती है । जीवन में किसी के खोने का अस्सी में दुख, कोई स्ट्रगल यहाँ कोई महत्वकांक्षा भी हो सकती है जो कि आपने सबकुछ झोंक देने के बाद भी पूरी नहीं हो पा रही हूँ । कई बार ऐसा होता ना कि हम किसी चीज के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं । फिर भी वो हमें हासिल नहीं होती । तब हम किस्मत पर सारा कसूर डाल देते हैं । पर ऐसे में ही किसी अज्ञात शक्ति कि मदद अगर हमें मिलती हैं तो ना जाने कैसे उन सपनों को साकार करने के लिए फिर से हिम्मत मिल जाती है । जीवन के दुखों से उभरने की ताकत हासिल हो जाती है । कितना वक्त हुआ तो मैं इस आश्रम में रहते हुए । तुम तो जानते ही हो कि मैं इससे पहले दिल्ली में थी, नौकरी कर रही थी तो यहाँ रहते हुए ज्यादा समय नहीं हुआ । पर मैं गुरु ओसाका की बहुत सालों से अनुयायी हूँ और अक्सर उनके गाइडेंस लेने आश्रम आती थी । सिर्फ मैं ही नहीं, हिमाचल और देश के बाकी भागों में भी आपको बहुत से लोग मिलेंगे, जो गुरु ओसाका को मानते हैं और तीनों धर्म के अनुयायी हैं । बातें करते करते डिनर का समय हो गया और देखते ही देखते आंगन में चटाइयां बच गई और खाने के पत्थर लग गए । वहाँ किसी गांव की दावत जैसा माहौल हो गया । सब लोग बैच में बैठने लगी और दस दस मिनट में खाना खाकर उठने लगे । मोदी और मोदी ही मिल जुल कर खाना खा रहे थे, बातें कर रहे थे । किसी पर कोई रोक टोक नहीं थी । फिर भी सब के कार्यकलाप में एक तरह का अनुशासन दिखाई दे रहा था । सौम्या और अमर भी खाने बैठ गए । खाना शुद्ध सात्विक सा था, पर फिर भी बेहद लजीज था । काफी दिनों से घर से बाहर निकला हूँ । अमर बोला, आज जाकर लग रहा है कि घर का खाना नसीब हुआ । सौम्या मुस्कुरा दी आश्रम में ही रहता हूँ । हमेशा ऐसा खाना मिलता रहेगा । लगता है तुमने पूरा जीवन आश्रम में ही बिताने का निर्णय ले लिया है । इसमें कोई शक नहीं । सौम्या बोली मुझे पहले से ही पता था ऐसा कुछ आगे चलकर होगा, इतनी जल्दी होगा ये तो नहीं पता था पर शायद किस्मत में यही लिखा था । इसलिए मेरे जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घटीं जिन्होंने मुझे आज यहाँ पहुंचा दिया और मुझे इस बात की बहुत खुशी है । तुम यकीन नहीं करोगे कि कुछ महीने पहले जिन बुरी परिस्थितियों ने मुझे डिस्टर्ब कर दिया था जिनके कारण मैंने जीने की आस खो दी थी । आज उन्हें याद करके भी मुझे कोई परेशानी महसूस नहीं होती । अमर चुप चाप खाना खाता रहा जैसे उन लोगों की जानकारी समय से निकली जाए जिन्होंने इसकी आइडेंटिटी खत्म करके यहाँ तक पहुंचने में मदद की । खाने के बाद दोनों टहलते हुए आश्रम के प्रांगण में आ गए । बाहर खुशनुमा ठंडी हवाएं चल रही थी । चंद आसमान में जगमगा रहा था जिसकी रोशनी में बर्फ से ढकी पहाडियां चमक रही थी सौम्या अमर बोला सौम्या ने पहाडों की तरफ देखते हुए सिर्फ कहाँ मैं तुमसे सब साफ साफ बोलूंगा । दिल की बात बोलूँगा मैं अपनी सीक्रेट सर्विस की नौकरी से बेहद प्यार करता हूँ । मैं अपने देश से बेहद प्यार करता हूँ । मैं देशभक्त जासूस हूँ और अपने देश और इस नौकरी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ । इस वक्त मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं वो सिर्फ एक ही दिशा में हट सकते हैं । मैं नेगी के खिलाफ कुछ सबूत निकाल सकूँ लेगी और साहनी के बीच जो पैन रचा गया था उसकी जानकारी हासिल कर सकता हूँ । इसके बाद ही मेरे माथे पर लगा कलंक हट सकेगा । तो तुम क्यों मेरे जख्मों को बार बार छेडते हो? सौम्या उदास स्वर में बोली, मैं ऐसा हरगिज भी नहीं चाहता । सौम्या पर तो में कैसे लगता? अगर तुम मेरी जगह होती अगर तुम जंग में लडी वह सैनिक होती जिसने दुश्मनों को खत्म किया, पर घर वापसी पर तुम्हें हीरो बनाने की जगह दुश्मनों को मारने की वजह पूछी जाती । उनके खिलाफ सबूत मांगे जाते । हीरो की जगह विलन बना दिया जाता है । तुम्हारे ऊपर क्या गुजरती है तो बताओ हूँ स्वामी अमर की तरफ पलटी को ध्यानपूर्वक अमर को देखने लगी मान उसका चेहरा देखकर उसके मन को पढने की कोशिश कर रही हो । मेरी हालत इस वक्त उसी सैनिक की तरह मैं इस तरह नहीं नहीं सकता । मैं अपने माथे पर कलंक लेकर वापस नहीं जा सकता । सौम्या के चेहरे पर करुणा भरे भाव आ गए । अमर मैं समझ सकती हूँ कि शायद धीरज गलत राह पर चला गया था, भटक गया था । ये बात भी सच है कि अगर मुझे पहले ही उसके ये इरादे पता होते हैं तो मैं उससे नफरत करने लगती है । पर मुझे उसके प्लान के बारे में कभी पता नहीं था । कुछ नहीं पता था उसकी किन लोगों के साथ सांठगांठ है । मुझे जब उसने कॉन्टैक्ट किया और सुरक्षित जगह पर जाने को बोला, तब मेरी नजर में एक इंटरपोल एजेंट था । इसलिए मेरी समझ में मेरी मदद करने वाले भी कानून के रक्षक थे । यही तुमने गलती कर दी । अमर बोला, कानून के रक्षक आखिर तुम्हारी मदद इस तरह क्यों करते हैं? तुम्हारी मौत का स्वांग क्यों ना चाहते? क्या तुमने ऐसा कभी देखा है? किसी की जान का खतरा होता है तो उसे मृत घोषित कर दिया जाए? सौम्या छुप रही फिर सोचते हुए बोली मैं इतना नहीं सोच सकती । मुझे नहीं पता । जासूस वार सीक्रेट एजेंट्स किस तरह काम करते हैं । मैं उस पर भरोसा करती थी । उसने मुझे जैसा करने को कहा, मैं करती चली गई तो मैं अभी वक्त है । तुम अहसानफरामोशी की बातें भूल जाओ । जिन लोगों ने तुम्हारी मौत का नाटक किया और साहनी के पार्टनर थे जो कि सिर्फ नेगी कि बदले की भावना का इस्तेमाल करके अपना उल्लू सीधा करना चाहते थे । मुझे उन लोगों तक पहुंचने दो ताकि मैं ये साबित कर सको कि देश को नुकसान पहुंचाने का प्लैन किसी और का था । धीरज नेगी का नहीं तो मुझे बातों में उलझाकर अपना उल्लू सीधा करना चाहती हूँ । सौम्या उसे तीखी नजरों से देखते हुए बोली था मैं अपना उल्लू सीधा करना चाहता हूँ और जो तर्क में दे रहा हूँ वही सच है । अगर तुम इसका कार्ड दे सको तो अगर तो मुझे समझा सको कि अपने ही देश पर न्यूक्लियर मिसाइल गिरना सही भी हो सकता है तो मैं मानूंगा की मैं गलत हूँ और मैं अभी इसी वक्त यहाँ से चला जाऊंगा । तुम चाहते तो जोर जबरदस्ती से भी मुझसे जानकारी निकलवा सकते थे । आखिर तो ऐसा क्यों नहीं कर रहे । देखो तो मैं एक सीधी साधी लडकियों शुरू में मुझे तुम पर शक जरूर था पर मैं समझ चुका हूँ कि तुम्हारे और नेगी जैसे लोगों को इमोशनल करके कैसे लोग अपना चक्रव्यू रखते हैं । मैं नहीं आज नहीं बहुत से मिशन में देखा है । आतंकवाद में क्या होता है, दंगों में क्या होता है? लोगों को इमोशनली ब्लैकमेल करके भडकाकर फोन की नदियाँ बहा दी जाती हैं जिसके सहारे कुछ धूर्त लोग अपने मंसूबे पूरे करते हैं । सौम्या उसे देखती रही । वो गहरी सोच में थी । अमर के चेहरे पर चांद की रोशनी पड रही थी । उसकी आंखों में छिपे भाव वो साफ तौर पर देख सकती थी । सौम्या ने निर्णय लिया और कहा चलो तुम्हारी कमरे में चलते हैं । यहाँ बात करना ठीक नहीं है । अमर अपने कमरे में पहुंचा । सौम्या ने कहा था कि वह कुछ देर बाद वहाँ आएगी । अमर बैठा बैठा बोर होने लगा तो उसने कमरे में रखे किताब उठा ली और उसे पडने लगा । करीब चालीस मिनट बाद दरवाजे पर दस्तक हुई । अमर ने दरवाजा खोला । सौम्या अंदर आ गई और उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और फिर तेजी से कमरे की दूसरी तरफ पहुंचकर राहदारी में खुलने वाला दरवाजा खोला और खिडकी भी बंद कर लिए । फिर जमीन पर चटाई बिछाते हुए बोली आउट यहाँ बैठो । अमर चटाई पर ठीक उसके सामने बैठ गया । सौम्या ने अपना फोन निकाला और फिर एक फोटो दिखाते हुए बोली ये निकले अमर उसे देखने लगा वो मोटा तगडा कम ऊंचाई वाला पहाडी युवक था । अरे ये तो वही है अमर उसे पहचानते हुए बोला हूँ । ये वही है जिसने त्रियूंड में मुझ पर हमला किया था और फिर तुम्हारी इसके साथ हाथापाई हुई थी । तुम इससे पहले से पहचानती थी, इसका फोटो तुम्हारे पास कैसे आया? पेशंस रखो, सब बता नहीं जा रही । इसका नाम नहीं है और ये फिलहाल गुप्त रूप से दूसरे धर्म गुरु के आश्रम में शिफ्ट कर रहा है । कौन धर्मगुरु सूजूकी अब ये कौन है? ये भी ओसाका की तरह सीनों से भागा एक धर्म गुरु है । अरे कमाल है अमर हाथ नचाकर बोला उस दौर में कितने धर्मगुरु भागे थे । सौम्या हस्ती बहुत से भागे थे । शायद वो दौर ही बगावत का था जब तीनों में नहीं गवर्मेंट बनी थी । और फिर पुरानी गवर्मेंट जो कि इन सभी धर्म गुरु को सपोर्ट करती थी, वह पावर में नहीं रही । रातो रात गुप्त रूप से नई गवर्मेंट की कैबिनेट ने इन सभी को अरेस्ट करके मृत्युदंड देने का फैसला लिया था । गैर राज राज ना रहा और कुछ गुरुओं तक ये बात पहुंच गई और उसी रात ये सभी धर्मगुरु वहाँ से भाग निकले । कुछ पकडे गए और कुछ जो लगे थे वह भारत पहुंच गए । ये तो हुई उन के बारे में संक्षिप्त जानकारी तो मैं ज्यादा चाहिए हो तो गूगल कर लेना सब मिल जाएगा । अच्छा ऐसा था तो गूगल से ढूंढ कर्लिंग की दे दी थी । देतो देती पर आगे जो जानकारी देने जा रही हूँ वो गूगल पर नहीं मिलेगी । अच्छा सौम्या आंख दबाते हुए बोली अमर हंस दिया तो सुजुकी उनमें से गुरु हैं और निक उनका शिष्य है । दरअसल ये दोनों तीनों के जासूस हैं । क्या बात कर रही हूँ? अमर चौंकते हुए बोला पर अगर सुजुकी सीढियों से भाग कराया था तो फिर वो उनके लिए जासूसी क्यों करेगा? क्योंकि वहाँ से बहुत साल पहले आया था । उसके बाद से वहाँ की गवर्मेंट में बहुत बदलाव हुए हैं । वो पूरी तरह से धर्मगुरु के सपोर्ट में तो नहीं है पर वहाँ का वर्तमान प्राइम मिनिस्टर किसी वजह से सुजुकी को सपोर्ट करता है । वो क्यों मुझे ये नहीं पता कि कैसे और क्यों पर सूजूकी उसी के इशारों पर भारत में जासूसी कर रहा है और खाली ने जो प्लान बनाया था वो सुजुकी के सहयोग से बनाया था । इस बार तो अमर वाकी चौक करोड खडा हुआ हाँ तुम क्या बोल रही हूँ और तुम्हें ये सब जानकारी कहां से मिली? तुम सोचो कहाँ से मिली होगी? सौम्या भेदभरी मुस्कान के साथ बोली तो मैं नहीं ने बताया उसने सहमती में सिर हिलाया । यानी नेगी को ये सब पता था । बिल्कुल पता होगा । आखिर वो शुरू से इस मिशन में शामिल था । सोहनगढ माइंड में रह रहा था इसका मतलब धीरज नेगी तुमसे हर एक चीज नहीं छुपाता था । नहीं काफी कुछ बता देता था । उसमें सिर्फ अपने इरादे मुझ से छुपाए और उसी की वजह से मुझे सबसे ज्यादा आघात लगा एक तरह से कि मेरे लिए अच्छा हुआ । अगर मेरी स्मृति में वो एक अच्छा इंसान ही रहता तो उसकी मौत का मुझे हमेशा कम रहता । पर अब उसके मिशन के बारे में तुमने जो बताया वो जानकर किसकर सौम्या इच्छुक हो गई । उसका दला भराया मैं समझ सकता हूँ । अमर बोला तो फिर निक्की तुम्हारी दुश्मनी की वजह क्या है? सिंपल सी बात है धीरज नेगी ने उनके साथ धोखा किया । खाली के प्लान यानी कि सुजूकी वह तीनों के प्लान को विफल करा दिया । इसलिए वो उन का दुश्मन बन गया । धीरज तो वही मर गया । जिंदा रहते तो ये लोग उसे नहीं छोड दे । धीरज को पहले ही पता था कि आगे ऐसा होना ही है । इसलिए उसने मेरी सेफ्टी प्लान की हुई थी क्योंकि उसे पता था कि उसके मिशन का खुलासा होने के बाद वो लोग धीरज और उसके शुभचिंतकों के पीछे पडने वाले थे । पर उन्हें मालूम कैसे पडा, तुम्हारे बारे में मुझे नहीं पता । आखिर धीरज को लोग कंट्रोल कर रहे थे । उनके पास कोई न कोई मैकेनिज्म होगा उसके ऊपर नजर रखने का और उन्होंने मेरे बारे में जान लिया होगा । और अब अमर बोला यहाँ पर निकने तुम पर हमला किया । इसका मतलब तुम्हारी मौत का नाटक भी किसी काम नहीं आया । उन्हें पता है कि तुम जिंदा हो । हाँ सौम्या हारे हुए स्वर में बोली, इतना कुछ करने के बाद ही न जाने उन्हें कैसे पता चल गया । अमर के चेहरे पर रोमांच से भरे भाव थे, हुआ है । यानी तो कमाल है । यहाँ भारत में एक ही शहर में दो खेमे बन गए हैं । एक भारत के खिलाफ काम कर रहा है और दूसरा भारत के अनुयायी हैं । हाँ, तो मैं ऐसा कह सकते हो । गुरु ओसाका को भारत का शुभचिंतक माना जा सकता है । अच्छा कमाल है । अमर के मुंह से निकला अब मैं तो मैं वो बात बताती हूँ तो मुझ से बार बार पूछ चुके थे । वो लोग जिन्होंने मेरी मदद की उनमें से एक का नाम था पार्शवनाथ जिसने तुरंत मुझे दिल्ली से निकलने के लिए आगाह किया । ना कोई फोन, ना मैसेज । वो सीधे आकर मुझसे मिला और उसने मुझे दिल्ली से निकलवा दिया । दूसरे दिन ही मुझे उसकी मौत की खबर मिली थी । वो किसी रेलवे ट्रैक के नीचे आ गया था । न्यूज में उसे सोसाइट बताया गया । पर मैं जानती हूँ की ये काम सुजुकी और निक के लोगों का था । दूसरा इंसान था निरंजन । उसने मेरी मौत का स्वांग रचने में पूरी मदद की थी । वो कहाँ रहता है? मैंने कभी नहीं पूछा पर उसका फोटो मेरे पास है । मैं तो मैं दिखाती हूँ कहकर सौंफ यानी मोबाइल में एक और फोटो दिखाया । अमर ने ब्लूटूथ की मदद से वो फोटो अपने मोबाइल में ले लिया । कुछ पल अमर उसका फोटो देखता रहा और सोचता रहा सौम्या घुटनों पर थोडी टिकाकर उसे देखती रही । फिर अमर बोला, मुझे एक बात समझाओ । सब कुछ जानते हुए तुम भागकर उन्हीं की तरफ क्यों नहीं? मतलब जब तुम्हें पता था कि सुजुकी ही धर्मशाला में रहता है तो मैं उसी तरफ भाग कर के कहते हुए अमर ने उसकी तरफ देखा । फिर अचानक चुटकी बजाते हुए उठ खडा हुआ लगता है मैं समझ गया तुम्हारे जैसा इंसान तो समझ जाएगा । मिस्टर जासूस सौम्या मुस्कुराई तुम अपनी आइडेंटिटी बदलकर यहाँ कर निक और सोचो कि को मजा चखाना चाहती थी । अमर चुटकी बजाकर बोला हूँ नीति ताकतवर नहीं पर तुम चाहती तो होगी ही और भले ही तुम ताकतवर ना हो, पर नेगी के सहयोगी तो होंगे । सौम्या ने स्वीकृति में करना नहीं लाये पर कैसे मुझे नहीं पता । वो क्या कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं । पर जिस दिन सोनू की और निक बर्बाद होंगे मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी और यहाँ रहकर में अपनी आंखों से उनका पतन देख सकेंगे । कहकर सौम्या उठ खडी हुई राज काफी हो गई है । अब मैं चलती हूँ । ठीक है । कमरे के दरवाजे की तरफ पढते हुए सौम्या अचानक रुकी और पलट कर बोली अब तुम सोचो और ये बताओ आगे क्या करना चाहती हूँ । मैं तुम्हारा साथ होंगे । हाँ, वही सोचना है तो मैं जो जानकारी दी है वो वाकई विस्फोटक हैं । जिन परिस्थितियों से मैं दूसरी हूँ उसके बाद किसी पर भी आसानी से विश्वास नहीं कर सकती है । इसलिए अभी तक तो मैं पूरा सच नहीं बता पा रही थी । कॅश खूबसूरत चेहरे पर एक मोहक मुस्कान आ गई । एक बात बताऊँ ईरिंग कि कौन है अमर ने चौकर उसे देखा फिर संयमित होते हुए पूछा ऍम की जिसका नाम तुम बेहोशी के वक्त हॉस्पिटल में ले रहे थे का फिर भी कि मुस्कान के साथ बोला जिंदगी में कुछ दर्द हमारे भी हैं, कभी शहर करने का मन करे तो जरूर बताना । अमर ने सहमती में सिर हिलाया । गुडनाइट कहकर वो पलटी दरवाजा खोलकर तेजी से बाहर निकल गई । अमर ने दरवाजा बंद किया फिर चटाई पर ही कम्बल ओढ कर लेट गया और फिर दो तकिया लगाकर वह किताब फिर से पडने लगा । किताब किसी अमीर बिजनेसमैन के ऊपर लिखी गई थी जो कि अपना सब कुछ दिया कर एक साधु बन गया था । अमर उसे खुद से रिलेट करने लगा । ठीक है आखिर क्या रखा है दुनियादारी में माँ का साया तो बचपन में ही सर से उठ गया और उसके बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली । नया परिवार बना लिया जिसका मैं हिस्सा रहा हूँ । ऐसा कभी लडाई नहीं । सौतेली माँ के चेहरे पर हमेशा एक बनावटी मुस्कान देखेंगे और उसके मन में तो हमेशा एक बोझ रहा । इसलिए दसवीं क्लास से ही मैंने बॉलिंग में जाकर पढने की इच्छा पापा से जताई । भले ही ऊपरी तौर पर अच्छे स्कूल में पढने के लिए मैं आतुरता दिखा रहा था पर उन्हें पता था कि मेरा मन था कि उस परिवार से कहीं दूर रहूँ जो कि कभी मेरा नहीं हो सकता था । एक बार जो घर से निकला कभी वापस नहीं आया । स्कूल से निकलकर कॉलेज के हॉस्टल और फिर कॉलेज से जॉब में आने पर किराये के घर हैं । और फिर खुद के घर में आखिरी बार पापा से कब मिला था याद ही नहीं आ रहा है । हाँ, तीन साल पहले जब सौतेली बहन की शादी में पापा और उनकी वाइफ के बहुत आग्रह करने के बाद जाना पडा था । जनरली लाइफ अकेले ही करती है मनपसंद नौकरी के सहारे जॉन और जावे जैसे कुछ दोस्तों के साथ कुछ लडकियों के साथ लापरवाह रिलेशन के सहारे फिर मंदिर आ गई ऍम और मेरे जीवन में सोलमेट तो कोई और लिखी थी जिसके साथ इत्मिनान के दो पल भी ठीक से नहीं गुजार सका और जब वो कई लाइफ में तो कितना बडा वो छूट गई जो कुछ भी करके भर नहीं पा रहा बल्कि हर दिन और बडा होता जा रहा है । सोचते हुए अमर का मन भारी हो गया । उसे सौम्या के शब्द याद आ गए । क्या इस आश्रम की शरण में आकर उसे भी तो दुखों को सहने की ताकत मिली थी तो तो मुझे भी मिल सकती है । ये वाकई कमाल है जो मेरे जैसा अधर्मी ऐसी बातें सोच रहा है पर शायद इंसान तभी धर्मिया स्पिरिचुअलिटी की तरफ पडता है जब लाइफ से कोई बडा दुख दे दी है । मैं भी कोशिश करूंगा बस एक बार खुद को सही साबित कर दूँ हूँ ।

Chapter 31

अमर की नींद बेचैनी के साथ खुली उठते ही उसकी नजर खिडकी पर गई । बाहर अभी भी चांदनी बिक्री हुई थी । उसने घडी देखी । चार बज कर बीस मिनट हुए थे । न जाने क्या सपने देखता रहा था तो मन काफी उद्वेलित महसूस हो रहा था । वोट कर खिडकी के पास आ गया और बाहर देखने लगा । अचानक ही उसके मन में विचार कौंधा । सेना और खलीली ने संयुक्त रूप से मास्टरमाइंड प्लैन बनाया था । कितना बडा रहस्य उद्घाटन है ही विश्व स्तर पर प्रकट होने पर कितने बडे परिणाम हो सकते हैं इसकी वजह से ऍम विश्व स्तर पर कोई भी देश बिना सबूत के कभी कोई बात नहीं माने का और यहाँ तो अभी तक ये भी साबित नहीं किया जा पा रहा है कि धीरज नेगी एक आतंकवादी था पर फिर भी इससे भारत और चीन के बीच तनाव बढ सकता है । सीमा पर गर्मागर्मी हो सकती है, आर्थिक गठबंधन टूट सकते हैं । फिलहाल उसे धीरज नेगी के खिलाफ सबूत जुटाने थे । पार्शवनाथ और निरंजन सिर्फ दो नाम मिले थे जिनमें से एक यानी पार्शवनाथ मर चुका था और निरंजन का फोटो से हासिल था । अभी उसे ढूंढने का काम करना है । साथ ही इस बात की तस्दीक भी करनी है कि निक और सूजूकी वाकई सीन ओके जासूस हैं । अमर का हाथ मेज की दराज में मौजूद सिगरेट के पैकेट की तरफ बढा । उसने एक सिगरेट निकली और खिडकी के पास खडे होकर उसे लाइटर से सुलगाने लगा । इसका मतलब तीनों अपनी विस्तारवादी नीति के चलते हैं । भारत और बडा अटैक करना चाहता है ताकि भारत उसमें होना चाहिए और वो अपने मित्र देश के साथ भारत पर हमला करके अपने मंसूबे पूरा कर सकें । एक तरफ कश्मीर, दूसरी तरफ अरुणाचल क्या नहीं सोच सकता हूँ, पर क्या वर्तमान अंतरराष्ट्रीय नीतियों के तहत वैसा रिस्क लेगा? मुश्किल है । बाकी देश उसकी निंदा करेंगे । उस पर हमला कर सकते हैं, आर्थिक पाबंदियां लगा सकते हैं । फिर इतने बडे लेवल पर ये प्लान चल रहा है तो कुछ तो उन्होंने ऐसा सोच रखा होगा की कि कैसे खुद पर कोई उंगली उठाए बिना उसे एक्जिक्यूट कर सकें । अमर दरवाजा खोलकर पीछे राहदारी में आ गया । उसका मन बुरी तरह से बेचैन हो उठा था । देश पर छाए संकट को देखकर वो अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को एक तरह से भूल गया था । वो वहाँ टहलने लगा । अब तेजी से काम करना होगा । मास्टरमाइंड प्लान तो फेल हो गया पर सीनों चुप नहीं बैठा होगा । प्लैन भी कैसी तैयार होगा । अगले दो घंटे अमर ने बेहद बेचैनी से गुजारे । अपने मन को एकाग्र करने के लिए वह कुछ देर कसरत वह ध्यान करता रहा । छह बजे आश्रम में पूरी तरह से जाग हो गई थी सुबह की पूजा करने के लिए । करीब सात बजे सभी उस बडे हॉलनुमा पूजा घर में एकत्रित हुए । एक घंटे तक पूजा चली । अमर सौम्या को ढूंढ रहा था । पूजा समाप्त होने पर वह हॉल के बाहर खडा हो गया । जब सामने उसे बाहर निकलती देखी तो उसने उसे इशारा किया और बाहर की तरफ चल दिया । वो उसके पीछे पीछे बाहर पहुंची । बाहर बगीचे में पहुंचकर अमर पौधों में पानी देने लगा । सौम्या ने भी उसका अनुसरण किया । काम करते करते अमर बोला मुझे ये बताओ ये निरंजन के बारे में और क्या पता है तो मैं वो मुझे मंडी में मिला था । उसने भी पार्शवनाथ की तरह मुझे कभी फोन नहीं किया । शायद उन के काम करने का तरीका ही कुछ ऐसा था की वह कि वह फोन से कॉन्टैक्ट करना रिस्क मानते थे । पूरी बात बताऊँ । मैं जब घर लौटकर आई उसने एक दिन घर के अंदर एक नोट लेकर फेंका । नोट पर लिखा था डीएम का दोस्त डीएम मैं समझ गई धीरज नहीं कि कि इनिशियल थे । मैं बाहर निकली वहाँ एक और नोट के जरिए उसने मुझे मिलने के लिए मार्केट में बुलाया और वहाँ मिलकर बताया कि मैं यहाँ मंडी में भी सेफ नहीं । धीरज के दुश्मन बडे आराम से पता लगा सकते हैं कि अब मैं दिल्ली की जगह अपने होम टाउन में मौजूद है तो मैंने उससे पूछा की मैं क्या करूँ? उसने कहा कि इसका सिर्फ एक ही इलाज है कि मैं मरने का ढंग करूँ । मैं पहले तो डर गई पर फिर उसकी बातों से कम हो गए । इसके सिवा कोई तरीका नहीं था खुद को सिर्फ कार्ड करने का । उसने मुझे कहा कि तीन चार दिन बाद फिर से कॉन्टेक्ट करेगा । तब तक शायद कोई प्लान बन जाए तब तक अपना ख्याल रखें और कम से कम लोगों को बताऊँ कि मैं अपने घर में मौजूद हैं । मैंने वैसे ही किया । कोई अप्रिय घटना नहीं घटी फिर तीन दिन बाद दोबारा मिला और उसने बताया एक लडकी की लाश का इंतजाम हो गया । मुझे दूसरे दिन सुबह घर से नदी की तरफ निकलना होगा और फिर वहाँ से वो मुझे पिक करके दूसरे शहर ले जाएगा । मैंने उसी रात फैसला कर लिया था कि दूसरे शहर कोई और नहीं धर्मशाला होगा और मैं गुरु ओसाका की शरण में आ जाएंगे । मुझे पता था कि इसी शहर में धीरज के दुश्मन यानी सुजुकी और निक भी मौजूद हैं । शायद वही मुझे मरवाना चाहते थे । पर फिर भी मैंने अपने गुरु की शरण में आना ही तय किया । कभी कभी ये भी सोचती थी धर्मशाला आकर उन दोनों को खत्म कर देंगे । एक तरफ में शांति के मार्ग पर चलना चाहती थी और दूसरी तरफ हिंसक विचार । मेरे मन में एक अंतर्द्वंद पैरा मेरे मन में एक अंतर्द्वंद पैदा कर देते थे । फिर मैंने फैसला किया कि इधर आकर जो भी होगा, अच्छा होगा । उसके बाद निरंजन का प्लान एग्जिक्यूट हो । सुबह नदी की ओर जाते वक्त में जानबूझ कर दो तीन लोगों की नजर में आकर निकली ताकि वह बाद में इस बात की तस्दीक कर सकें कि मैं नदी की तरफ गई थी । प्लैन सक्सेसफुल हुआ और फिर मैं धर्मशाला नहीं । कुछ दिन बाद गुप्त रूप से मैं घर वापस आई और अपने परिवार वालों को सब समझा दिया । वो समझदार हैं और मुझे यकीन है मेरे जिंदा होने की खबर उनके द्वारा लीक नहीं हुई होगी । लेकिन बावजूद इसके उस दिन निकने लगे देश केस में मुझ पर हमला किया । इसके आगे की कहानी तो मैं जानता हूँ । तो क्या? निरंजन उसके बाद तो मैं नहीं मिला? नहीं, वो मैंने पूछा भी था । पर उस ने साफ कहा था कि अब कांटेक्ट करने की कोई जरूरत नहीं है, पर वो लोग मुझ पर नजर रखेंगे । अगर कोई खतरा हुआ तो या कोई और मुझे कॉन्टेक्ट करेगा । ठीक उसी तरह डीएम का एक दोस्त बोल कर और ये जो रघु अभी आया था तुम्हें मेरे खिलाफ सचेत करने उसे मैंने पहली बार देखा था । वो आश्रम आया और कोडवर्ड के सहारे मुझसे मिला और मुझे तुम्हारे खिलाफ सचेत किया । लोग ठीक किसी परिवार की तरह तुम्हारी मदद कर रहे हैं । आखिर क्यों क्यों तुम्हें बुरा लग रहा है? नहीं बुरा लगने वाली बात नहीं है । मैं समझना चाहता हूँ नहीं मर चुका है । उसके बाद ही आखिर ऐसी क्या दोस्ती थी उनके बीच जो उसके मरने के बाद सभी भीष्म प्रतिज्ञा की तरह उसका पालन कर रहे हैं । क्या इसी से ये साबित नहीं होता कि वह हिंसा नहीं बिल्कुल हो सकते हैं? पर अगर वह तीनों के प्लान के बारे में कुछ जानते हैं तो हमारा जानना भी बेहद जरूरी है । देश खतरे में उन का प्लान किया है और उन का अगला कदम क्या होगा, ये जानना बहुत जरूरी है । राइट क्या तुम किसी तरह उस लोगों को नहीं बुला सकती? मैंने तुम्हें उनकी कार्यप्रणाली बताई तो है मेरे पास कोई जरिया नहीं उनसे संपर्क करने का । पर जब भी तुम पर कोई विपत्ति आती है तो आते हैं । इस बार निकाले तुम पर हमला किया तो वह क्यों नहीं आई? सौम्या सोच में पड गई । फिर बोली वो जगह भी एकदम सुनसान थी । हर कोई वहाँ आसानी से नहीं पहुंच सकता था या अगर नजर रखनी रहे होंगे तो उन्होंने तुम्हें मेरे साथ देख लिया होगा हूँ । अमर उसे ध्यान से देखते हुए बोला शायद तुम ही कह रही हूँ तो पहले ही मुझे पहचानना पाया हूँ पर समझ गए होंगे । सौम्या ने सहमती में सिरिल आया फिर मुस्कुराकर बोलिए । और सब तो ये है कि अब तुम मेरे आस पास हो तो मुझे और किसी की भी मदद की जरूरत महसूस नहीं होती हैं । अमर धीरे से हजार स्वामी ऑफिस नहीं भरी नजरों से देख रही थी । अमर को अजीब सा लगा । वो गंभीर मुद्रा में बोला । मुझे लग रहा है कि अब निक और सुजुकी के द्वारा ही कुछ पता चलेगा । सही सोच रहे हो पर उन पर हाथ डालना मुश्किल काम होगा । ऐसा करने से तुम्हें लाइमलाइट में नहीं होगी । वैसे भी फिलहाल तुम छिपकर काम कर रहे हो । सही कह रही हूँ और जासूसों को अच्छी खासी ट्रेनिंग होती है कि कैसे गुप्त रहकर अपना मिशन पूरा किया जाए । तुम्हारा असली चेहरा है या सौम्या । उसे ध्यान से देखते हुए बोली कुछ नकली आप भी हैं और कुछ नकली । हम भी अमर शायराना अंदाज में बोला वेरी फनी चलो अब ऍफ का टाइम हो गया है कहकर सौम्या नहीं । पानी का पाइप एक तरफ रखा और फिर दोनों आश्रम की तरफ बढ गए । नाश्ता करने के बाद अमर गुरु ओसाका से मिलने उसके कमरे में पहुंचा । सुप्रभात बन्दों ओसाका ने अपने कमरे में उसका स्वागत किया । आशा करता हूँ हमारे आश्रम में आप का पूरा खयाल रखा जा रहा होगा । बिल्कुल । मैं आपसे मिलने को आतुर था । मैं आपको बताना चाहता था कि आपके आश्रम और आश्रम के लोगों को देख कर मैं अभिभूत हूं । मेरे जैसा नासिक भी भगवान में विश्वास करने का जी रखने लगा है । जब मैं आप लोगों को देखता हूँ, आप लोगों के चेहरे से ही किसी सुलझे हुए मन वाला व्यक्तित्व लगता है । जबकि मेरे जैसे इंसान के मन में हमेशा एक अंतर्द्वंद्व साहू मारता रहता हैं । तुम जिस फील्ड में हो, वहाँ पर हम लोगों की तरह शांत रहना मुश्किल है । आप जानते हैं मैं इस फिल्म में हूँ । अमर चुका हूँ । अपनी तारीफ खुद नहीं करना चाहता लेकिन अपने जीवनकाल में हर तरह के लोगों से मिला हूँ । सवभाव, शारीरिक बनावट और कई विशेषताओं से पता चल जाता है । क्या है मेरा फील्ड? अमर ने जिज्ञासावश पूछा पुलिसिया सुरक्षाबल संबंधित कमाल है । अमर ने हाथ जोडे फिलहाल में भटक रहा हूँ । अपने माथे पर लगे कलंक को मिटाने आप सही समझे । मैं अपने देश का एक सैनिक ही हूँ जिसने देश के दुश्मन को मारा । लेकिन मुझे अब इसी बात की सजा मिल रही है और मुझे साबित करना है कि वह दुश्मन वाकई दुश्मंथा मैं समझ सकता हूँ । आजकल ये आम समस्या है । खासकर उन लोगों के लिए जो जिम्मेदारी और ईमानदारी से अपना काम करते हैं । अक्सर उनके इमान पर ही प्रश्न उठाए जाते हैं और ऐसे लोग इस तरह के इल्जाम सहन नहीं पाते । आपने ठीक मेरे मन को पढ लिया, तुम सही राह पर हो सच्चे लोगों को इन दिक्कतों का सामना करना पडता है । ईमानदार लोगों को ही अपनी ईमानदारी साबित करनी पडती है । अधिकतर इंसान तो वैसे भी आजकल दुनिया में ईमानदारी का सिर्फ ढोंग करते नजर आते हैं तो हम जरूर सफल होंगे । परेश्वर में विश्वास रखो, नास्तिक होना आसान है । ठीक उसी तरह जैसे जिस चीज का वजूद । आप जब तक देखना लोग उसे नकार तो पर अगर विश्वास करो तो दुनिया में ऐसी कई अलौकिक शक्तियां हैं जिनका वजूद हैं और वह किसी के नकारने से झूट लाया नहीं जा सकता । मन में ईश्वर के लिए भाव रखना हमेशा आपको बाल देता है । मैं ये नहीं कहता कि तुम किसी खास तरह के ईश्वर में ही विश्वास करो, किसी की पूजा करूँ पर पेशवर के वजूद को जरूर मान । भले ही किसी कॉस्मिक एनर्जी की तरह ईश्वर को मानना खुद को मानने जैसा है । अगर आप ईश्वर को नहीं मानते तो शायद आप ये मानते हैं की आपकी इस दुनिया में उपस् थिति भी मात्र को इंसिडेंट्स हैं जबकि ऐसा होना संभव नहीं । अमर आश्चर्य से ओसाका को देख रहा था । उसके चेहरे पर परमानंद और संतुष्टि के भाव आ गए । फिर अचानक गुरु शांति के साथ आंख बंद करके मुस्कुराने लगे । अमर समझ गया । यह मुलाकात की समाप्ति का इशारा था । वो हाथ जोडकर कमरे से बाहर निकला । आसाराम के आंगन में पहुंचकर उसने एक मोटर को बाल कटवाते हुए देखा । उसके पास पहुंचा और नई से बोला अगला नंबर मेरा । उसने पहले तो आश्चर्य से हमार को देखा, फिर मुस्कुराया । जब अमर का नंबर आया वह कुर्सी पर बैठा और उसने कहा सब बता दो नहीं रुक गया । उसने अमर से दो बार इशारों में पूछा कि वाकई उसे सिर के बाल कटवाने थे ये सिर्फ गाडी मुझे अमर ने इशारे से इस बात की पुष्टि की कि उसको सर से लेकर थोडी तक सभी बाल हटाने थे । फिर वैसा ही हुआ । दस मिनट बाद जब अमर ने शीर्षा देखा तो उसका पूरा सर और चेहरा सफा चट्ठा । उसकी उम्र अचानक ही दस साल काम लगने लगी थी और उसके चेहरे पर जो चतुर चालाक भाव दिखाई देते थे और उसके चेहरे पर जो चतुर चालाक भाव दिखाई देते थे, उनकी जगह विद्वानों जैसे भाव ने ले ली थी । दोपहर के वक्त बाकी मोनतीरो की तरह अमर ने भव्य वस्त्र धारण किए और आश्रम से बाहर निकल आया । बाहर कोई भी उस पर ध्यान नहीं दे रहा था । क्योंकि मकलोडगंज की सडकों पर इसी तरह के भगवे वस्त्र पहनी विभिन्न आश्रमों के शिष्या दिखाई देते थे और यही अमर चाहता था । वो पैदल चलता चला गया और फिर उसने कुछ लोगों से गुरु सुजुकी के आश्रम का पता मालूम किया और फिर एक रिक्शा करके वहां पहुंच गया । आसाराम हमेशा सभी के लिए खुला रहता था और भव्य वस्त्र पहने शिष्यों पर वहाँ आने के लिए कोई रोक टोक नहीं थी । अमर बेधडक अंदर चला गया । अंदर एक खुले मैदान में पूजा चल रही थी । सुजुकी कोई पांच पड रहा था । वहां बैठ गया । पूजा खत्म होने तक वह बैठा रहा और उस आश्रम का जायजा लेता रहा । आसाराम कई मामलों में ओसाका के आश्रम से अलग था । क्षेत्र काफी बडा था । अंदर जो खुला मैदान था उसमें जगह जगह मिट्टी खुदी हुई थी । ऐसा लग रहा था जैसे वहाँ माल युद्धादि होता हूँ । आसाराम के शिष्या विभिन्न प्रकार के थे यानी कुछ तो सामान्य दिख रहे थे पर कई हट्टे कट्टे चेहरे पर सख्ती लिए थे । वहाँ की शिष्याएं कुछ खास अलग नहीं थी । हालांकि जवान के मुकाबले वृद्ध महिलाएं ज्यादा थी । पूजा के बाद आश्रम के हट्टे कट्टे शिष्यों की टीम खास तौर पर ये पुष्टि करने लगी कि बाहर के सभी लोग वहाँ से निकले की नहीं । वहाँ रुकने का फिलहाल अमर का कोई इरादा नहीं था । वो भी बाहर निकल आया । पर मंदिर के मुख्य दरवाजे से बाहर निकलते हुए उसने मैदान के कोने में कुछ लोगों को खुदी हुई मिट्टी की तरफ बढते हुए देखा । उनकी सेहत और पोशाक को देखकर पता चल रहा था कि वह मल्ल युद्ध करने जा रहे हैं । अमर की तेज नजरों से जरा भी चूक नहीं हुई जब उसने उनमें एक नाते बलिष्ठ युवक को तुरंत पहचान लिया । वो कोई और नहीं बल्कि निक था । बाहर निकलते हुए अमर के चेहरे पर मुस्कान थी । अगले दिन सुबह ग्यारह बजे जॉन दिल्ली से वापस आ गया । जावेद गेस्ट हाउस की कैंटीन में नाश्ता कर रहा था । जॉन अपना सामान कमरे में रखकर सीधे कैंटीन में पहुंचा । जावेद कोने में अकेला बैठा था और ब्रेड ऑमलेट खा रहा था । जान उसके सामने आकर बैठ गया । वीजा का काम हो गया । जावेद ने पूछा, हाँ, अगले दर्जी तक हाथ में आ जाना चाहिए । पॉडगोरिका के लिए संडे की फ्लाइट की टिकट भी बुक करा दी है । कंचन कब जा रही है? संडे को उस की फ्लाइट पता लगने पर उसी में बुकिंग । इस तरह वहाँ विक्रम को ढूंढने में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी । जब इतनी सहमती में सिर हिलाया, कुछ खाओगे नहीं । नाश्ता हो गया था, सिर्फ चाय लेता हूँ । कहकर जॉन ने वेटर को इशारा किया । वो दो ग्लास में चाय ले आया । जावेद ने इधर उधर देखा और फिर आगे झुककर कहा अमर का पता चल गया । जॉन ने चाय का गिलास उठाया था पर तुरंत मेज पर वापस रखकर बोला कहाँ हूँ, क्या क्या मतलब? इसी शहर में ऐसा कैसे हो सकता है? जॉन बुरी तरह से हैरान था । हो गया क्या यह कन्फर्म खबर प्रतिशत तो कन्फर्म है । समझे प्रतिशत यानी फेस टू फेस तो अभी दिखाई नहीं दिया पर उसने अपना ईमेल इसी शहर के आईपी एड्रेस सेक्स किया है हूँ । जॉन के मुंह से निकला । उसने चाय की चुस्की ली । तो फिर हम किस बात का इंतजार कर रहे हैं? हाँ, तुम भी जानते हो और मैं भी यही मानता हूँ की अमर को पकडने से ज्यादा जरूरी है । इस वक्त धीरज ने की और उसके प्लान के बारे में और खोजबीन करना और दोनों केदार हमें और अमर को भी मकलोडगंज लेकर आए हैं । इसका मतलब हम सब सही दिशा में है । ये सब आइडियल सिनेरियों में हमारे कंट्रोल में होता लेकिन लेकिन क्या चीफ का फोन आया था? लियोन भारत पर दबाव डाल रहा है । अगले हफ्ते मंडे तक उसे पूरी रिपोर्ट चाहिए जिससे कि ये साबित हो सके कि धीरज नहीं कि आतंकवादी था । ऐसा ना होने पर अमर को आरेस्ट करके रखना होगा और उनकी टीम आकर उसे इंटैरोगेट करेगी और आगे की इन्वेस्टिगेशन करेगी । जॉन के मुंह से निकला अभी तक कोई सबूत तो मिला नहीं । हाँ पर हम सही दिशा में बढ रहे हैं । अब हमें सबसे पहले और साखा के आश्रम पर छापा डाला है । कहाँ गया? वहाँ दो चीजें हैं पहला अमर जिससे हमें आरेस्ट कर रहा है । दूसरा गुरु ओसाका जोकि धीरज नेगी के प्लान में शामिल था । वोट धर्म गुरु ऐसा का इस प्लैन में शामिल था पर अमर उसके आश्रम अगर ऐसा है तो मुझे यकीन है कि अमर को भी उस पर शक हुआ होगा और इसीलिए उसके आश्रम में रुका होगा । शायद को जानकारी निकालना चाह रहा होगा । ऐसा हो सकता है पर अब जो भी हो हमें अमर को अरेस्ट करना ही होगा और उसके पास जो भी इन्फॉर्मेशन है वो लेकर आगे की इन्वेस्टिगेशन बढानी होगी । क्योंकि मंडे तक का समय काफी नहीं । मैं तो ये भी नहीं पता कि सबूत मिलेंगे की भी नहीं मिलेंगे भी तो कब मिलेंगे । इसलिए अमर को तो पकड के रखना ही पडेगा । वरना सीबीआई सीक्रेट सर्विस और हमारे देश के लिए भारी मुसीबत हो जाएगी । उसे पकडने के बाद एक तसल्ली रहेगी और बाद में भी हम इन्वेस्टिगेशन कर सकते हैं । तुम ठीक कह रहे हो । आखिर हम सब यही चाहते हैं कि अमर को बेकसूर साबित किया जाए । उसको शुरू से ही समझना चाहिए था । हम लोग मिलकर काम करते तो शायद अब तक बहुत कुछ पता चल चुका होता है । वो तो सच है कि उसने काफी नादानी दिखाई पर ठीक है । जो हुआ सो हुआ तो अब क्या करना है । जहाँ भी दूर खडा हुआ वहीं के लिए निकलना है । पर ये कैसे पता चला की वो सागर नेगी के साथ मिला था । चलो रास्ते में बताता हूँ । फिर वो दोनों कैंटीन से सीधे बाहर निकले ।

Chapter 32

जावेद और जॉन ओसाका के आश्रम के मुख्यद्वार से अंदर प्रवेश होते चले गए । मुख्यद्वार के द्वारपाल उन्हें रोकने की कोशिश भी ना कर सके क्योंकि वह तेजी से अंदर चलते चले गए और सीधे आश्रम के प्रांगण में पहुंचकर ही रुके । उन्हें चारों तरफ अपने कार्यों में व्यस्त मोटर और मोटी भी दिखाई दिए । सभी चौकर उनकी तरफ देखने लगे । द्वारपाल दौड कर उनके पास पहुंचा । उनमें से कुछ जो हिंदी जानते थे, वो बोले आपको यहाँ किस से कम है, कौन हैं आप लोग? यहाँ पर इस तरह से बिना पूछे अंदर आना मना है । जावेद और जॉन ने तुरंत अपने आईडी कार्ड दिखाए । हम सीक्रेट सर्विस से हैं । जावेद बोला, हमारे गुरु ओसाका से मिलना है, पर इस वक्त वो पूजा मिली नहीं है । उनकी पूजा बाद में भी हो सकती है । जॉन सख्त स्वर में बोला, मामला बेहद गंभीर, उनसे कहिए । तुरंत हम से मिले । द्वारपालों के पसीने छूटने लगे । उनमें से दो भाग का ओसाका के कमरे की तरफ गए । कुछ देर में ओसाका कमरे से बाहर निकला और हाथ फैलाकर उनका स्वागत करने लगा और इशारे से उन्हें अपने कमरे में बुलाने लगा । आप लोग कृपया यहाँ जाएँ । उसने अपने शिष्यों की तरफ हाथ उठाकर इशारा किया । चिंता की कोई बात नहीं है । आप सभी अपने काम में लगे रहे । हम सीक्रेट सर्विस वालों से बात कर लेंगे । जावेद और जॉन तेज कदमों से ओसाका के कमरे में पहुंचे । गुरु ऐसा का अंदर आते ही जावे । बोला आपको हमारे साथ अभी दिल्ली चलना होगा । दिल्ली तो क्यों? मेरा वहाँ क्या काम? बाकी बातें वहीं पर होंगे । फिलहाल आप को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है । ओसाका चिंतित मुद्रा में शून्य में देखने लगा । क्या जानना चाहते हैं कि इस बारे में जानना चाहते हैं । आपको जो पूछताछ करनी है, आप यही करिए । मैं सब कुछ बताने के लिए तैयार हूँ । तभी दरवाजे के पत्ते, तेज आवाज के साथ खुले चौखट पर भगवे वस्त्रों में एक लंबा शिष्य दिखाई दिया । वो सिर झुकाकर तेज नजरों से जावेद और जॉन की तरफ देख रहा था । उसके चेहरे पर गुस्सा था । जावेद और जॉन में उसकी तरफ देखा । उन्हें दो पल लगे, पर फिर वो उसे पहचान गए । वो अमर था एक नए अवतार में । ओसाका के शिष्य के अवतार में हम लोग यहाँ क्या कर रहे हो? अमर ने वही खडे खडे सवाल दागा । जावेद उसकी तरफ पालता और एक ये सवाल तो हमें तुमसे पूछना चाहिए कब से गायब? आखिर में भागने की क्या जरूरत थी? मेरे आम जॉन बोला ये क्या हुलिया बना रखा है तो यहाँ पर साधु बन गया । हमें तो लगा नेगी के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन कर रहा होगा । मैं मुक्त इंसान हूँ । मेरे मन में जो आएगा मैं वही करूंगा । अरे ऐसे की बात कर रहे तो हम लोगों से जॉन बोला हमने तेरे लिए कभी गलत नहीं सोचा । तुझे पकडने का इरादा लियोन के दबाव के कारण चीज के ऊपर आया था । फिर भी हम लोग हमेशा तेरी साइड लेकर बात करते रहे । जानकर अच्छा लगा । पर फिलहाल जिस तरह से तुम यहाँ पर मेरे गुरु ओसाका से बात कर रहे हो, उस बारे में क्या कहना चाहोगे? क्या तुम लोग मुझे ढूंढते हुए यहां पहुंचे? एक पंथ दो काज जावेद बोला मेन वजह तो तुम्हारे गुरु हैं । वैसे तो मैंने अब अपना गुरु बोलना बंद करो, वही तुम्हारे लिए अच्छा होगा । इनको दिल्ली ले चलते हैं । सारा मामला साफ हो जाएगा मैं मेरे खयाल से तुम्हारे ऊपर जो वारंटी शुरू होने वाला है वो भी कैंसिल हो जाएगा । तो मैंने किस इल्जाम में ले जाना चाहते हो? इल्जाम तो फिलहाल कुछ नहीं है पर हमें पूछताछ करनी है । क्योंकि इतना तो हमें पता चल गया है कि इन का लिंक ऐसी जगहों पर है जहाँ आम तौर पर किसी धर्म गुरु का नहीं होता । क्या कोई सबूत है? तुम्हारे पास? नहीं? फिलहाल तो कोई सबूत नहीं, फिर तो मैंने नहीं ले जा सकते । हो रही मुझे अमर निर्णायक भाव के साथ बोला मेरे खयाल से अब तुम लोगों को यहाँ से चले जाना चाहिए । सीक्रेट सर्विस का यहाँ कोई काम नहीं बता । जॉन बोला देख रहा हूँ तुम्हारा राग एकदम बदल गया । चार देनी आश्रम में क्या रहे लिए? पूरी थिंकिंग ही बदल गई तुमने खुद क्या सीक्रेट सर्विस में सिर्फ सबूत के बल पर काम किया है जावे । चुनौतीपूर्ण स्वर में बोला शक होते ही तुमने भी लोगों पर हर डाला है कि नहीं अमर्ष ये तो तुम्हारी फितरत में हमेशा से रहा है रहा था । मैं सीक्रेट सर्विस छोड चुका हूँ । चीफ ने ऐसा कुछ बताया तो नहीं कि तुम्हें कोई रेजिग्नेशन लेटर दिया हूँ । नहीं तुम्हें निकाला गया है तो टेक्निकली तुम अभी भी सीक्रेट सर्विस में हूँ । सीक्रेट सर्विस अपने ही एजेंटों को पकडने का हो काम नहीं देती और अगर देती है तो ऐसी जगह मुझे काम नहीं करना । अरे मेरे आम जनों से समझाने की भरसक कोशिश करते हुए बोला हूँ ये सब अपना अंदर का मामला है । यहाँ डिस्कस करना आराम से बैठकर सुलझा लेंगे । तेरह पर कोई खतरा नहीं है । मुझे सब पता है । मैं तुम लोगों के साथ ही काम करता था । यहाँ तुम कुछ भी बोलो की और वहाँ जाकर मुझे फंसा होगे और गुरु ओसाका को भी फालतू के पचडे में फंसा हो गई । तुम तो ऐसे कह रहे हैं जैसे सीक्रेट सर्विस बेईमानी से काम करती है । भले ही हमने कई दांवपेच खेले हो, पर अंत में हमारी अरेस्ट सबूतों के बेसिस पर ही होती रही तो जाओ पहले सबूत लेकर आओ और फिर हमें अरेस्ट करूँ कहकर अमर भारी कदमों से चलते हुए अंदर आया और फिर गुरु ओसाका और जावेद जॉन के बीच आकर खडा हो गया । जावेद का पारा चढने लगा था । उसने जबडा सख्ती के साथ भेज रखा था । जॉन अभी भी अमर को समझाने के मूड में था । पर तभी जावेद के मुख से जैसे अंगारे निकले । अमर दोनों और ओसाका दोनों अभी हमारे साथ चलोगे नहीं चलेंगे अमर भी पूरी । जिसके साथ बोला नहीं चलोगे अपनी मर्जी से नहीं चलोगे । ठीक है हम तो मैं जबरदस्ती ले चलेंगे कहकर जावेद ने आगे बढकर अमर की कलाई थाम ले । अमर ने अचानक ही दूसरे हाथ से जावेद की कलाई पकडी और उछलकर उसे एक तरफ गिरा दिया । जावेद जमीन पर गिर गया और आश्चर्य से अमर को देखने लगा । क्या देख रहे हो? जो हो रहा है तो उनका समझते थे । अमर तुमसे कमजोर है, सबसे ताकतवर तो नहीं हो तुम आर्मी के दांवपेच जानते हो तो मेरी भी सीक्रेट सर्विस में ट्रेनिंग हुई है । मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट हूँ तो बोल रहे हैं क्योंकि ये कला कभी तुम पर नहीं आजमाई इसलिए तुम्हें कभी सोचा नहीं । मेरी ताकत के बारे में जावेद मुस्कुराते हुए उठा मानना पडेगा । कभी सोचा भी नहीं था की तो मुझ पर हाथ उठाओगे और मुझे उसका जवाब देना पडेगा । कहते हुए अचानक ही जावेद अमर पर तेजी से जब आता है अमर ने चालाकी से एक तरफ फटना चाहा पर जावेद ने भी उसी हिसाब से दिशा बदली और फिर अमर को अपनी आगोश में लिए कमरे के दूसरे कोने की तरफ तेजी से बढा । उसने अमर की पीठ कमरे की लकडी की दीवार से बढा दी । जोरदार आवाज हुई ऐसा लगा जैसे दीवार चटक गई हूँ । जावेद में अमर को लगभग हवा में उडाते हुए दीवार पर पडता था होकर जबरदस्त हुई थी और इसके कारण अमर की पीठ पर बुलेट के गांव में अत्यंत पीडा उभरने लगी थी । इसे एक ही बार से अमर को अपना आधा दम निकलता हुआ लगा । जावेद पीछे आता और एक बार फिर गुस्से से उभरते हुए अमर को रहने के लिए उसकी तरफ पढा । ऐन मौके पर अमर एक तरफ हट गया । जावेद कसर दीवार में भीड गया । वो एक तरफ गिर गया । दूसरी तरफ अमर गिरा पडा कराह रहा था । कुछ पल दोनों खुद को संयमित करते रहे । फिर दोनों धीरे धीरे उठने की कोशिश करने लगे । ओसाका किंकर्तव्यविमूढ व्यवस्था में खडा उन्हें देख रहा था । जॉन कुछ बोल रहा था पर शायद जावेद और अमर को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था । अपने पैरों पर खडे होते ही अमर ने घुसा जावेद के पेट में मार दिया । जावेद के पत्थर जैसे ठोस ऍफ पर उसका कुछ असर नहीं हुआ । उसने खा जाने वाली नजरों से अमर को देखा और अपना घुसा उसके मूंग की तरफ कुमार शर्तिया अगर वह घूस अमर के ऊपर पडता तो उसके एक दो दांत बाहर आने निश्चित थे । पर अमर ने फुर्ती से खुद को झुकाया और गोल घूम कर मार्शल आर्ट स्टाइल में एक केक जावेद के घुटने पर बीमारी ये बार कमाल का था । जावेद घुटनों के बल बैठ गया । चोट सीधे हड्डियों के जोड पर जो लगी थी । दोस्त के साथ लडने में यही फायदे और नुकसान है । अमर बोला हमें एक दूसरे की कमजोरियाँ अच्छे से पता है । अमर अभी भी रुक जा ये तमाशा बंद कर देते हैं । जावेद हिंसक ढंग से हो जाते हुए बोला वरना मैं तुझे जान से मार दूंगा । जावेद के चेहरे से लग रहा था की अब उसके क्रोध की अति हो गई है और अब वह कुछ भी कर सकता था जान से मारेगा । अमर ने जांच चल रही है । अपने आप को समझता क्या है कहते हुए अमर जावेद पर झपटा अमर ने सीधे उसका गला पकड लिया । उसके दोनों हाथों में भी जावेद का गला पूरी तरह पकड में नहीं आ पा रहा था । हालांकि अमर की पकड बेहद मजबूत थी । किसी शिकंजे की तरह उसने उसे जकड रखा था । जावेद होतो छुडाने की कोशिश कर रहा था पर न जाने अमर में इतनी ताकत कहाँ से आ गई थी । जावेद का चेहरा लाल होने लगा और फिर अचानक ही उसने हिम्मत बटोरी और घुटने से अमर के पेट में प्रहार किया । अमर की पकडा छूट गई । जावेद होते से पागल हो गया था । उसकी हालत किसी बिगडैल सांड जैसी थी । उसने ओसाका की पूजा की, कुर्सी उठाई और अमर पर फेंक दी । अमर एक तरफ हट गया । इस बार अमर अपना मार्शल आर्ट का पूरा जलाल दिखाने के मूड में था । वो एक पैर पर उचला और तेजी से हवा में घूमने लगा । घूमते घूमते ही उसकी किक जावेद पर बडी जावे । दूसरी तरफ जा गिरा मुझे अरेस्ट करेगा मैं अपराधियों साले मैंने हमेशा अपने देश के लिए ईमानदारी से सेवा की है तो मुझे रेस करेगा । बडबडाते हुए वो जावेद की तरफ पड रहा था कि अचानक जावेद ने उछलकर अमर पर कोहली से वार किया जो उसके सीने पर लगी । अमर पीछे गिरा और ओसाका कि मेरे से जा टकराया । इस बार जावेद ने जेब से पिस्टल निकाली और अमर की तरफ तांदी । तभी जॉन दौडता हुआ आया और अमर के सामने खडा हो गया ऍम जॉन तीखा जब तो घोषणा हूँ क्या कर रहे हो हमें ये मसला सुलझाना है और उलझाना नहीं होश में आओ । अगर अमर जुनूनी हो गया है तो इसका मतलब ये नहीं है कि तुम भी उसको बैठो जावे । जोर जोर से हाफ रहा था और खा जाने वाली नजरों से अमर को देख रहा था । फिर जैसे वो खुद को संयमित करने लगा उसने अपने कस बाल ढीले छोड दिए है । जॉन ने अमर को उठाया जो की भारी पीडा में था क्योंकि बुलट का जख्म इस बार मेज के कोने से टकराया था और फिर से ब्लीडिंग शुरू हो गई थी । अमर लडखडाते हुए उठ खडा हुआ तो यही जहाँ जाना हम कायदे से सबूत सहित तेरे गुरु को अरेस्ट करें । जॉन बोला तो ऐसा होगा अब हम सबूत के साथ आएंगे । पर अमर ये जान ले के सिर्फ मंडे तक का समय । इस बीच अगर धीरज ने कि आतंकवादी साबित नहीं हुआ तो फिर तेरे नाम का भी अरेस्ट वॉरंट निकल जाएगा । क्या बोल रहे जॉन जावेद ने उसे झिडका अभी से ऑर्डर हमार को पकडने का पकडने का एॅफ करने का तो नहीं है ना? ऑफिशियली होममिनिस्टर मंडे ही बोलेगा जब रिपोर्ट नहीं आएगी कि अमर को अरेस्ट करो । अगर लियोन को बात करनी है तो हम उसी वक्त अमर कुमार रेस्ट करेंगे तो मजा कर रहे हो । जब भी बोला इतने दिनों से भाग रहा है । आज छोड दिया तो दोबारा में मिलेगा कि नहीं, इसकी क्या गारंटी है? जॉन अमर की तरफ पालता मेरा नाम मैं तो उस पर खुद से ज्यादा भरोसा करता हूँ । मैं जानता हूँ तो इन्वेस्टिगेशन कर रहा होगा । हम भी कर रहे हैं । क्या मंडे से पहले कुछ हो सकता है? इस बार अमर दृढ स्वर में बोला मुझे नहीं पता क्या हो सकता है । पर अगर मंडे से पहले में ये साबित नहीं कर सका तो मैं खुद तुम लोगों के पास चल कराऊंगा तो लोग मुझे रेस्ट कर लेना । लोग ठीक ना जॉन जावेद की तरफ पालता हो गया । फैसला ये कोई खेल नहीं है । जब भी बोला हमें ओसाका को तो ले ही चलना होगा । अमर बोला इनके खिलाफ ऐसे सबूत प्रस्तुत करो जिससे इनकी अरेस्ट जस्टीफाई हो सके । कोई ऐसा सबूत दिखा मुझे जावेद निरुत्तर हो गया । ठीक है? जावेद जॉन बोला अमर सही कह रहा है आखिर हम सीक्रेट सर्विस से हैं । सबूत जुटाना हमारे लिए बहुत बडी बात नहीं है । हमें लिंक तो मिल ही गया है । अब हम इन दोनों को आॅस्कर नहीं वापस आएंगे । जावेद बेमन से उठा और खा जाने वाली नजरों से अमर और ओसाका की तरफ देखने लगा । फिर अमर की तरफ उंगली दिखाकर बोला अगर तुम फिर से गायब हुए हैं तो मैं मान लूंगा की तो मैं कायर इंसान हो जिससे जीवन की मुश्किलें झेलना नहीं आता । हाँ, यही समझ लेना जीवन की सारी मुश्किलें तो तुमने जले ना । अमर पलट कर बोला अब बस करो तुम दोनों जन । पहली बार गुस्से से जी का अब सभी लोग अपना अपना काम करेंगे । हम लोग जा रहे हैं । फिर जॉन जावेद के पास पहुंचा और ध्यान से उसकी आंखों में देखने लगा । जावेद ने जाने से पहले कडी नजरों से एक बार अमर और ओसाका को देखा । फिर वो दोनों वहाँ से निकल गए । कमरे में ओसाका, सौम्या, अमर और वैद्य मौजूद थे । अमर पेट के बल बिस्तर पर लेता था । वैद्य उसके बुलेट के जख्म पर लेप लगा रहा था । सौम्या एक तरफ गंभीर मुद्रा में खडी थी । उसमें अपने सिर से हुड हटा ली थी । उसके बाद इस वक्त जोडे में बंधे हुए थे । उसके चेहरे पर चिंता की लकीरे थी । ओसाका कुर्सी पर बैठा हुआ था । अमर की तरफ देख रहा था । मुझे यकीन नहीं होता तो में अपने ही साथियों पर हाथ उठाया । सौम्या बोली तो मेरे साथ ही नहीं ऐसी संस्था से मेरा कोई लेना देना नहीं जो अपने ही जासूसों को सपोर्ट नहीं करती । सरकारी दबाव में आकर उन्हीं अरेस्ट करने के लिए तैयार हो जाती है । आप ही बताइए गुरु हो जाएगा कि कौन सी बात होती है कि कोई दूसरा देश दबाव डालेगा और जैसा बोले आप वैसा करते जाओ । क्या आपके पास रीड की हड्डी नहीं? क्या आप जवाब नहीं दे सकते कि भाड में जाओ । ये हमारा जासूस है और हमारे देश की भूमि पर हुई घटना हमारा मसला तुम्हारा इससे कोई लेना देना नहीं है । तुम्हारा गुस्सा जायज है हमारा पर एक देश के दूसरे देश के साथ के रिश्ते डिप्लोमेटिक टाइप होते हैं जिन्हें मद्देनजर रखते हुए कुछ सख्त फैसले करने पडते हैं । लेकिन ये वाकई अफसोसजनक है कि देश अपने ही जासूसों की रक्षा नहीं कर पा रहा । आए दिन अक्सर ऐसा होता ही रहता है । देश के जासूस दूसरे देश में पकडे जाते हैं और फिर देश उन्हें अपने देश का मानने से ही इंकार कर देता है । एकदम सही उदाहरण दिया आपने तुम्हारा गुस्सा जायज अहमद पर एक देश के दूसरे देश के साथ के रिश्ते डिपलोमेटिक टाइप होते हैं जिन्हें मद्देनजर रखते हुए कुछ सख्त फैसले करने पडते हैं । लेकिन ये वाकई अफसोसजनक है की देश अपने ही जासूसों की रक्षा नहीं कर पा रहा । आए दिन अक्सर ऐसा होता ही है । देश के जासूस दूसरे देश में पकडे जाते हैं और फिर देश उन्हें अपने देश का मानने से ही इंकार कर देता है । एकदम सही उदाहरण दिया आपने । अमर रोज स्वर में बोला यही होता है और आज भी यही हो रहा है । जासूस ने अपना कर्तव्य निभाया, देश के लिए काम किया और जब वक्त आया कि देश उसके लिए कुछ करें तो उन्होंने अपने हाथ पीछे खींच लिए । जिस डोर के सहारे वह बंदा था उसे ही कार्ड दिया है । मगर बच्चों के बीच खुला छोड दिया कहकर वो चुप हो गया । कुछ देर कमरे में शांति छाई रही जिससे फिर अमर नहीं थोडा और कुछ भी हो जाए । गुरु ऐसा का मैं उन लोगों को आप पर कोई झूठा इल्जाम नहीं लगाने दूंगा । शून्य में घूम रहा था मैं जानता हूँ उन लोगों को अब पर शक हुआ । अभी तो कैसे? ये बात तो मैं अपने दोस्तों से ही क्यों नहीं पूछते हैं । गुरु ओसाका से ये सब पूछने का क्या मतलब है? सौम्या होते से बोलिए मैं कोई इल्जाम नहीं लगा रहा हूँ । दीपिका अमर समझाने वाले भाव के साथ बोला अपना ये समझाना चाहता हूँ कि उनके दिमाग में इनके खिलाफ शक का कीडा किसने डाला? हम अच्छी तरह से जानते हैं । ओसाका बोला ये काम सुजुकी के अलावा और किसी का नहीं हो सकता । जी गुरु जी आप ने सही कहा । वैद्य भी पट्टी बांधते हुए बोला ये जो कि बहुत ही धूर्त हैं, किसी को भी अपनी बातों में ले आता है । इन जासूसों को भी उसी ने आपके खिलाफ भडकाया होगा । भडकाने से क्या होता है? अमर बोला जावेद या सीक्रेट सर्विस का कोई भी एजेंट आप पर तब तक हाथ नहीं डाल सकता जब तक आप के खिलाफ कोई सबूत ना मिले । इसी बात की तो चिंता है हमें ओसाका बोला क्या मतलब? मतलब ये है की सीटों सरकार गुरूजी पर अब आप ये सब क्या बोल रहे हैं? वैद्य ने उसे रोकने की कोशिश की । बोली तो हमें अब अमर से ये सब बातें छुटाकर । क्या फायदा किसी का फायदा नहीं है । जावेद और जॉन को भी मैं यही बातें बताता पर मौका ही नहीं मिला । मतलब अमर रहस्य से बेचैन हो रहा था । दरअसल आज से कुछ साल पहले हमारी ये गुप्त मीटिंग हुई थी । सीनों के नए प्राइम मिनिस्टर के साथ नई प्राइम मिनिस्टर मतलब जो छह साल से प्राइम मिनिस्टर है । वहीं अमर ने पूछा हाँ वही पर वो तो ऑफिसियली भारत दौरे पर आए थे । तुम सही कह रहे हैं । उस दौरे पर पहली बार किसी सीन ओपीएम ने भारत की शरण में रह रहे ओसाई धर्मगुरुओं से मिलने की इच्छा जताई थी । हमारी ऑफिशियल मीटिंग हुई और उसके बाद हम दोनों के साथ अलग से एक अनऑफिशल मीटिंग रखी गई । मैंने उस मीटिंग में ये सोच कर भाग लिया कि शायद शांति को लेकर कोई अच्छा कदम होगा । जब बात शुरू हुई तो उन्होंने यही कहा कि पुरानी बातें भुला दी जाएं और एक नई शुरुआत हो । प्राइम मिनिस्टर सीनों में हम सभी धर्मगुरुओं पर लगे सभी तरह के बैन हटाना चाहते थे तो हमारे फैलाए धर्म को वापस तीनों में लाना चाहते थे और इसके लिए उनको हमारे सपोर्ट चाहिए था । कैसा सपोर्ट? भारत के खिलाफ जासूसी में सपोर्ट, भारत के खिलाफ मिशन में साथ देने का सपोर्ट । तीनों अपना बॉर्डर भारत के अंदर बढाना चाहता था । ये सब सुनकर मेरा माथा ठनक । मैं तुरंत उस मीटिंग से उठ गया । सुजुकी भी उठ गया । हम दोनों ने ही उसे बोला कि वो हम लोगों को क्या समझते हैं । हम लोग शांति के दूत हैं और अपने ही रक्षक देश को धोखा नहीं दे सकते । इस तरह वो मीटिंग खत्म हुई । लेकिन उसके बाद सुजुकी की अकेले में प्राइम मिनिस्टर के साथ बात हुई और वहाँ सब उल्टी बात हुई । उसने हमारे सामने दिखावा किया, पर प्राइम मिनिस्टर के मिशन में शामिल हो गया । सोचो कि को नए खाद जो देख रहे थे, तीनों में दोबारा एंट्री के अपना धर्म फैलाने का मौका और भारत में जो भी नई टेरिटरी सीनों के अधिकार में आने वाली थी, वहाँ भी सूजूकी ही धर्मगुरु स्थापित किया जाता है । इसलिए सुजुकी ने प्राइम मिनिस्टर की साजिश में शामिल होना स्वीकार कर लिया । अमर का मुंह खुला हुआ था, वो एक्टर को साका को देखे जा रहा था । आप जानते हैं आपने कितनी बडी बात कह दी जानता हूँ और ये भी जानता हूँ कि सूजूकी के पास गुप्त मीटिंग के कुछ रिकॉर्डिंग और सबूत मौजूद है और वो उनको इस तरह पेश कर सकता है जिससे सिर्फ ये साबित होता है कि मैं कैसे प्राइम मिनिस्टर से मिलने गया और उन्होंने क्या प्रलोभन दिया । उसके आगे की रिकॉर्डिंग को नहीं सुनाएगा, क्योंकि इतने में ही मेरे ऊपर शक के लिए पर्याप्त मटेरियल मिल जाएगा । क्योंकि आगे जो कुछ साजिश चल रही है उससे फिर मुझसे कनेक्शन आराम से जोडा जा सकता है हूँ पर आपको क्या पता उसने ऐसी कोई रिकॉर्डिंग की है और वो इस तरह से आपको ब्लैकमेल करेगा? मुझे पता है क्योंकि वो पहले भी ऐसा कर चुका है तो मैं बाकायदा वो रिकॉर्डिंग सुन चुका हूँ तो उसके बदले में आपने क्या किया? मैं चुप रहा हो सका । आत्मग्लानि भरे स्वर में बोला यही मेरा सबसे बडा अपराध है । मैं चुप रहा । भारत के खिलाफ हो रही साजिश में उसकी भागीदारी के बारे में जानते हुए भी मैं चुप रहा । अमर जैसे सकते की हालत में आ गया था और उसका दिमाग तेजी से दौड रहा था । मानो हवा में उड रहा है । उसे पुरानी सभी घटनाएं याद आने लगी । तो क्या खलीली का पूरा प्लैन्स तीनों द्वारा कौनसा किया गया था? उसके मुंह से निकला ऐसा ही लगता है । कोई सबूत तो नहीं है पर हमें यकीन है कि सीटों के सपोर्ट के बिना यह मुमकिन नहीं कि आपके पास ऐसा कोई सबूत है जिससे सुजुकी पकडा जा सके । बदकिस्मती से हमने कभी सुजुकी की बात ही चला कि नहीं सीखी, कोई बात नहीं । सबूतों जैसा कि हम लोग भी लडते वक्त बोल रहे थे, जोडे जा सकते हैं । फिलहाल इटली तो मिला है । हाँ, जहाँ तक हमें मालूम हैं उनके शिष्य निक्की बहुत पहले से इस प्लानिंग में हिस्सेदारी है और उसका किसी बडे मिनिस्टर के साथ गठबंधन भी था । यानी कोई इंडियन मिनिस्टर भी इस प्लान में शामिल था इसकी संभावना बहुत अधिक है । और जहाँ तक मुझे पता है खाली के प्लैन फेल होने के बावजूद ये लोग अभी किसी प्लान बी पर काम कर रहे हैं । अमर उठ खडा हुआ उसने अपनी शर्ट पहनी और फिर ओसाका गुरु के सामने बैठ गया था । मेरे ख्याल से जावेद और जॉन को आपके खिलाफ रिकॉर्डिंग वाला सबूत मिल ही जाएगा । कोई बात नहीं । हमने कोई गलत काम नहीं किया है । उन्हें हमें अरेस्ट करने तो पूछताछ में हम सब कुछ बता देंगे । अब जब पानी गले तक आ गया है तो हमें चिंता नहीं भले ही हमारे देश की बदनामी हो, हम सब सच बोल देंगे । अब सच तो पता चल ही गया है । आप दोबारा बोलने के लिए क्यों फंसे हो? मेरे खयाल से आपको भारत छोड देना चाहिए । क्या बोल रही हूँ मैं अच्छा हम भारत छोडकर कहाँ जायेंगे? सीनों छोडने के बाद अब यही हमारा घर है । हमेशा के लिए छोडने के लिए नहीं कह रहा हूँ । कुछ समय के लिए चले जाइए । एक बार सुजुकी हाथ में आ जाएगा तो मामला रफा दफा हो जाएगा । पर हम क्यों भागे? हमने क्या किया है? आप सीनों से भी तो भागे थे । वहाँ भी तो आपने कोई गलत काम नहीं किया था । ओसाका निरुत्तर हो गया । सौम्या चहलकदमी करते हुए बोली, अमर ठीक कह रहा है गुरु जी, इन हालात में अभी आपको चले जाना चाहिए, वरना सीक्रेट सर्विस का तो ठीक है । यहाँ पर इंटरपोल वगैरा कभी इनरॉलमेंट वो लोग किसी के भी पीछे हाथ धोकर पड जाते हैं । पर अगर मैं यहाँ से भाग जाऊंगा तो तो हर कोई यही कहेगा कि मैं ही गलत था । वो तो आपके रहते हुए भी लोग यही कहेंगे । अब आप ज्यादा मत सोचिये । अमर बोला । अब सुबह की फ्लाइट से कहीं मलेशिया, सिंगापुर वगैरह किसी ऐसी जगह निकल जाइए जहाँ कोई तीनों धर्म का प्रोग्राम होने वाला हो या ना भी हो तो आप करा सकते हैं । तो कहने को भी हो जाएगा की आप धार्मिक काम के लिए गए । जब सब ठीक हो जाए तब आप वापस आ जाना । ओसाका ने तनावयुक्त ढंग से पहलू बदला । वो कभी सौम्या हाँ और कभी अमर की तरफ देख रहा था । रात के एक बच्चों की थी । अमर आश्रम के बाहर घूम कर वापस आया । आसाराम के आंगन में सौम्या वैद्य और ओसाका के दो खास शिष्य बैठे । विचार विमर्श कर रहे थे । वो सा का अपने कमरे में चला गया था । अमर गहरी सोच के साथ बोला आसाराम से निकलना ऐसा नहीं होगा । गेट के आसपास रोड की । दोनों तरफ सादे लिबास में पुलिस का पहरा है । इसका मतलब अगर हम निकले तो हमें रोकेंगे तो नहीं पर पीछा जरूर करेंगे । तो मैं बोली कह नहीं सकते, रोक सकते हैं । पर हमारे खिलाफ उनके पास अभी कोई अरेस्ट वारंट नहीं होगा । अमर सोच रहा था । फिर वो बोला हमें गुप्त रूप से निकलने का प्लान बनाना होगा तो की तुम जासूस हो । तुम्हें कुछ सुझाव कुछ देर अमर विचारमग्न होकर आंगन में चहलकदमी करता रहा । तिरु उन सब की तरफ पालता और अपना प्लान समझाने लगा ।

Chapter 33

वो एक बजकर चालीस मिनट हुआ था । वो ओसाका के आश्रम से एक के बाद एक मोदी जी बाहर निकलकर प्रांगण में एकत्रित होने लगी । जॉनी पुलिस जीत में बाहर पहले पर था । उसकी नजर आश्रम में हो रही है । इस नई गतिविधि की तरफ कहीं वो संभाल कर बैठ गया । उसने दूरबीन से उस तरफ नजर डाली । भगवे वस्त्र धारण की हुई करीब दस औरते वहां एकत्रित हो चुकी थी और कुछ और आश्रम के अंदर से बाहर आ रही थी । जॉन ने जावेद को फोन मिलाया, आश्रम में कुछ एक्टिविटी दिखाई दे रही है और से निकलकर सभा बना रही है । अमर है तो कुछ ना कुछ प्लान करेगा ही । जो भी हो हमें आश्रम से निकलने वाले सभी लोगों का पीछा करना है या उन्हें रोकना है । पर हम यहाँ कुल बारह लोग ही हैं । अगर आश्रम के लोग अलग अलग दिशा में निकलने लगे तो पीछा करना मुश्किल होगा तो निकलते हुए लोगों की शक्ल देखते रहना । जो शकल छिपाने की कोशिश करें वही हमारा टारगेट होगा या नहीं हो सका और हमारे उनके अलावा बाकी लोगों से हमें क्या राइट? मैं कोशिश तो कर रहा हूँ पर पर कल सुबह से पहले ये काम होना मुश्किल है । ओके नो प्रॉब्लम । मैं उन्हें कहीं भी अकेले निकलने नहीं दूंगा । हाँ कहकर जावेद ने कॉल समाप्त की । जॉन बराबर आश्रम पर नजर रखे हुए था । हम वहाँ करीब तीस महिलाएं दिखाई दे रही थी । फिर वह मुख्यद्वार की तरफ पर ही जो नहीं कांस्टेबल से बोला । उन लोगों और पूछो । इतनी रात को बाहर निकलने की वजह क्या है? जी तीन कांस्टेबल गेट की तरफ चलती है । मुझे भी गेट से बस बाहर निकलने ही वाली थी । लोग चाहिए । कांस्टेबल ने कडक आवाज में कहा क्या है? एक बुजुर्ग औरत ने पूछा आप इतनी रात में कहाँ जा रही हैं? तुम कौन होते हो? पूछने वाले हाँ जो हर बनाया मैं मैं पुलिस में हूँ क्या रात को निकलना अपराध है? नहीं, पर अपराधी रात को बडे गेट में सडकों पर निकलना निषेध है । हम कोई धरना देने नहीं जा रहे हैं । ये हमारी प्रथा है । हम लोकेश टेकरी पर जा रहे हैं । इतनी रात को ऊपर क्यूँ दूसरे कांस्टेबल ने पूछा ये सुरक्षा के लिहाज से भी ठीक नहीं है । इधर जॉन तीक्षण नजरों से सभी औरतों के चेहरे देख रहा था । ऍम अगर तो औरत के बीच में है तो मेरी नजरों से तो बच नहीं पाएगा । कुछ मिनटों के बाद सभी मोटी भी सडक पर आ गई । पुलिस ने हार मान ली और उन्हें जाने दिया । दो लोग मेरे साथ चलेंगे और बाकी यहीं रुकेंगे सर, उनकी हरकतें तो संदिग्ध हैं । पर्व सभी होते हैं । ऐसा लगा नहीं कि कोई आदमी औरत के बीच में रहा हूँ तो मैं इतने कॉन्फिडेंस से कैसे बोल सकते हो? जो हमने कहा तो वह हर बडा गया । हमने सभी को ध्यान से देखा था । जॉन उन पर मुस्काया कभी तैयार हो के बारे में सुना ऍफआईआर था । चंद्रकांता में देखा था वही तैयार हो की खासियत होती है कि वह किसी का भी भेज धारण कर सकते हैं । ऑपोजिट सेक्स का भी । पर वो तो जादू से ऐसा करते थे । कुछ जासूस भी जादूगर से कम नहीं होते । कांस्टेबल मुस्कुरा दिया । उनमें से एक हंस पडा । अब जाओ उनके पीछे । फिर जीत आगे बढ गई जिसे कांस्टेबल चला रहा था और उसके अलावा दो कांस्टेबल और बैठे थे । जॉन एक दूसरी पुलिस जीत में आकर बैठ गया । एक बार फिर उसकी वह बाकी पुलिस कर्मियों की नजरें आश्रम की तरफ घूम गई । अभी कुछ ही मिनट कुछ रहे थे कि आसाराम के अंदर से बारह और तो की एक और टोली निकली । इस बार पुलिस वालों के साथ जॉन गेट पर पहुंचा । एक कांस्टेबल अडकर रास्ते में खडा हो गया । अब आप लोग कहाँ जा रहे हैं? लोकेश टेकरी आज पूरा आश्रम उधर ही जाएगा । क्या वो चुप रही? जॉन चुपचाप सभी की शक्लें ध्यान से देख रहा था । आप लोग नहीं जा सकती क्यों? अरे कितनी औरते आधी रात को बाहर घूमेंगे तो आप लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? आप हमारी चिंता ना करें । एक वरिष्ठ मोटी बोली हमारा एशवर्थ हमारा रखवाला है । पर वो शायद कुछ और देर उन्हें टरकाता पर जॉन ने आंखों के इशारे से उन्हें जाने देने को कहा । ठीक है जाइए । वो आगे बढ गई और जॉन इस बार एक कांस्टेबल के साथ जीप में सवार होकर उनके पीछे लग लिया । जाने से पहले उसने वहाँ उपस् थित एक कांस्टेबल को आश्रम पर नजर रखने का निर्देश दिया । आसाराम के अंदर आंगन में पंद्रह और थे ओसाका सौम्या ओसाका के दो शिष्य कम अंगरक्षक और अमर थे । अमर औरतों को ध्यान से देख रहा था । आप लोग जानते हैं अब तीसरे नंबर पर क्यों जा रही है? सभी ने अनभिज्ञता जताई । आप में कईयों का कद अच्छा है इसलिए आप के बीच मुझे और ओसाका गुरु को औरत के बीच में छिपने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी । हाँ सौम्या बोली गुड आईडिया लेकिन इसके बावजूद हम आपके देश में नहीं छिपेंगे । सभी ने ताजुब से अमर को देखा । फिर सौम्या ने पूछा मैं आप में से एक दो का ऐसा में कब करूंगा कि लगे औरत के बीच में मर छिपे हैं । तब जो बाहर खुर्राट जासूस बैठे हैं उन्हें शक होगा और वो आपके पीछे चल देंगे । आप के बाहर निकलते वक्त गार्ड मुख्यद्वार भी बंद कर लेगा और आश्रम में अंधेरा कर दिया जाएगा ताकि लगे अब आसाराम से कोई और नहीं निकलने वाला । फिर अगर सब सही रहा तो हम गुरु ओसाका को लेकर चोरी छिपे बाहर निकलेंगे । बाहर गाडी का रेजमेंट आपने करवा ही दिया है जो फिलहाल आश्रम से कुछ दूरी पर खडी है । उसमें बैठ कर हम दिल्ली निकल जाएंगे । कहते हुए अमर ने बारी बारी से ओसाका और उनके शिष्य को देखा । ओसाका नी सहमती में सिर हिलाया । बढिया तो अब मौका आ गया है जब मैं आप लोगों को अपनी आठ का हुनर दिखा सकूँ । फिर मरने दो औरतों को कुर्सी पर बैठने को कहा और फिर मैं कब बॉक्स निकालकर उनके चेहरे पर कार्य करने लगा । उसने उनकी बहुत ही कुछ मोटी कर दी । चेहरे पर फाउंडेशन कुछ इस तरह लगाया कि जबडा बडा देखने लगा । पंद्रह मिनट बाद दोनों औरतों की शक्लें बदली हुई थी । उनके चेहरे पर मर्दाना झलकने लगा था । आरवी गुड । अमर ने गर्व से सभी को देखते हुए पूछा । कमाल है सौम्या बोली, एक बार फिर औरतों की टोली बाहर नहीं । इस बार पुलिस ने उन्हें रोका, टोका नहीं, बस जाते हुए देखते रहे । उनके जाते ही आश्रम के द्वार पर एक मोदी ने अंदर से ताला डाल दिया और फिर आश्रम के अंदर की बत्तियां बुझा दी गई । ये देख कर पुलिस की आखिरी जीत आखिरी टोली के पीछे लग गई, जिसमें जॉन भी था । आसाराम के अंदर अमर ने पूछा तो कौन कौन चल रहा? दिल्ली मैं और मेरे दो शिष्यों ओसा का अपने लंबे तगडी मार्शल आर्ट मैंने फोन लग रहे शिष्यों की तरफ इशारा करते हुए बोला मैं भी चलूंगी । सौम्या बोली तो तुम तो यही रोक सकती हो । अमर बोला तो मैं वापस इधर ही आने वाला हूँ । अमर मुस्कुराया, अपने दोस्तों को वादा जो किया है, मुझे यहाँ खतरा हो सकता है । आप लोगों के जाने के बाद में एक वो मेरे पीछे पडा है । अमर ने सोचा फिर बोला ठीक है ये बात है तो चलो । फिर अमर ने अपने स्तर पर हो डाला और दोनों शिष्यों को कुछ समझाने लगा । फिर वो पांच लोग बाहर निकले । आश्रम के प्रांगण में अंधेरा था । ओसाका और सौम्या को वहीं रुकने के लिए बोल कर अमर दो शिष्यों के साथ गेट पर पहुंचा । सडक पर दूर एक स्ट्रीट लाइट जरूर चल रही थी फिर भी दूर से उन को पहचान पाना मुश्किल था । जैसा कि मेरा अंदेशा था यहाँ पुलिस वाला अभी भी नजर रखे हैं । अमर फुसफुसाकर बोला उसे बेहोश करना होगा । वो लोग बाहर निकले और रोड की दूसरी तरफ एक बाइक के सहारे बैठे व्यक्ति की तरफ पर हैं । उन्हें आता देखो जीत गया और उसके पास पहुंचकर वो तीनों बाज की तरह उस पर छपते और फिर एक शिष्य ने उसकी गर्दन पर एक प्रहार किया जिससे उसकी चेतना विलुप्त हो गई । उसके बाद फोन करके गाडी बुलवा ली गई ।

Chapter 34

चौबीस मार्च दो हजार तेरह रात्रि एक बजकर दस मिनट फ्लाइट तीन सौ एक फ्लाइट के अंदर दहशत का माहौल था । सभी डरे हुए थे । ज्यादातर लोगों को यही लग रहा था कि ये किसी टेरेरिस्ट का काम है । हम इस तरह चुपचाप नहीं बैठ सकते हैं । अब्दुल बोला लाॅगिन अरुण ने कहा मतलब कॉकपिट का दरवाजा तोड दो । तीन चार लोग फौरन उठ खडे हुए । गंजा भी जी खा । अब कल आइना तुम लोगों अरे तोड दो ये सभी मिले हुए हैं । वो लोग कॉकपिट के दरवाजे की तरफ पढे तो कैबिन क्रू उनके सामने आ गया । प्लीज टीना बोली तोड फोड करने से प्लेन में प्रॉब्लम हो सकती है । लेकिन अरुण बोला हूँ तुम लोग भी फंसे हुए । पायलट ने कहा कि वो दरवाजा खोल नहीं पा रहे हैं तो कम से कम हमें कोशिश करनी चाहिए । अगर अनफॉर्चुनेट ली, प्लेन क्रैश वगैरह हुआ तो पायलट तो अंदर ही फंस जायेंगे । पर ये कोई तरीका तो नहीं हुआ । अभी तरीका सोचा है । अब्दुल ने कहा और चारों तरफ नजर घुमाई । दरवाजा तोडेंगे किस चीज से मैंने सुना है । प्लेन के अंदर एक होती है कोई बोला क्या होती है? गंजे ने पूछा एक सियानी को लाडी कोई और बोला बिल्कुल होती है स्टीवल रोहित ने कहा क्राॅस वो कॉकपिट के अंदर होती है । पायलट कि यूज के लिए किसी एमरजेंसी में । वैसे भी कॉकपिट का दरवाजा तोडना कोई मजाक नहीं है । ये बुलेट रूप होता है । सभी चुप हो गए । वो लोग अरुण और अब्दुल की तरफ आशापूर्ण दृष्टी से देख रहे थे । उन्हें उम्मीद थी कि वह दोनों जरूर कोई तरकी बताएंगे । तुम लोग ही बताऊँ कॉपरेट और किस तरह खोला जा सकता है । अरुण ने कैबिन क्रू की तरफ देखते हुए पूछा, दरवाजा सिर्फ पायलट से अंदर से खोल सकते हैं । दूसरी एयर होस्टेस ने कहा कुछ तो जरूर किया जा सकता है । कहते हुए अब्दुल आगे बढकर दरवाजे के अगल बगल लगे पैनल को देखने लगा है । फिर उसने पैनल हटा दिया । उसमें विभिन्न प्रकार के तार इलेक्ट्रॉनिक्स दिखाई देने लगे । यहाँ कुछ भी छेडछाड करना ठीक नहीं होगा । बिना बोली मुझे नहीं लगता । प्लेन के सभी मुख्य कंट्रोल कपडे होते हैं । यहाँ पर यहाँ छेडछाड करने से कहीं और असर पड सकता है । वैसे भी दरवाजे की मशीनरी भी अंदर ही होती है । बाहर होती तो सेफ्टी कहाँ रहती है? अब्दुल्ला कुछ कहा नहीं । वो सोच में डूबा था । तभी सभी बुरी तरह से चौकी वो घटना ही कुछ ऐसी थी । सभी की नजरें उस तरफ थी । कॉकपिट का दरवाजा अपने आप खुल गया था ।

Chapter 35

वर्तमान समय नई दिल्ली रात के ग्यारह बजे थी । सीबीआई एनेलिस्ट मनोज इस वक्त केंद्रीय मंत्री के सेक्रेटरी । कॉम जम के घर की बैठक में मौजूद था । वो दोनों सोफे पर आमने सामने बैठे थे । टेबल पर चाय की प्याली और विस्की का ग्लास मौजूद थे । आयुष और मिस्टर मनोज रात के इस वक्त स्कॉच का आनंद कुछ अलग है । ऍम आई डोंट ड्रिंक और वैसे भी अभी मुझे काफी कम कर रहे हैं । रात काफी लम्बी होने वाली है । ओके मुझे अभी तक समझ नहीं आया कि उससे लडके मैं था, उसे इतनी इंपॉर्टेंस क्यों नहीं जा रही है और मेरी उससे मुलाकात को किस सेंस में लिया जा रहा है । वेसर अभी हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे तो पर तुम सीबीआई की उस टीम के सदस्य होना जो पिछले तीन रोज से मेरे पीछे पडी है । तमाम सवाल पूछे जा रहे हैं । एक दस मिनट की मुलाकात के पीछे आखिर इतना इशू क्यों बनाया जा रहा है? अगर ये कोई पॉलिटिकल एजेंडा है । आप जानते ही हैं कि सीबीआई किसी पार्टी विशेष के दबाव में काम नहीं करती पर गवर्नमेंट के निर्देश तो लेती है और गवर्नमेंट पार्टी से ही तो बनती है । मनोज मुस्कुराया फिर बोला ऐसा नहीं है । चले कुछ तो मैं आपको बता ही देता हूँ । दरअसल निक्की लिंक फ्लाइट तीन सौ की हाईजैकिंग से मिले । कौन झुमने उसे ताजुब से देखा वॉट जी और अब ऐसा लग रहा है कि इतनी बडी साजिश को अंजाम देने के लिए तो एक मोहरा था जिसने काफी रिसोर्सेज एकत्रित किये । क्या तुम ये कह रहे हो कि हमारा हाईजैकिंग में कुछ रोल रहा नहीं । मैं लिख के बारे में बात कर रहा हूँ और हम पर भी शक तो इसलिए किया जा रहा ना । अब गलत सोच रहे हैं । आप पर शक नहीं किया जा रहा । अनजाने में अपने उसकी कोई मदद कर दी होगी जो आपकी दृष्टि में जनसेवा रही होगी । पर उसका मंसूबा कुछ और था । उसने इस तरह कई लोगों को बिना शक्कर आए ये मिशन पूरा किया होगा । हम अगर हर पहलु के तहत में जाएंगे तभी साजिश का खुलासा होगा । मैं उस दस मिनट की मुलाकात के बारे में और क्या बताओ? उसने बस ये गुजारिश की थी की प्रदर्शनी में आकर उसका बिजनेस प्रमोट कर दो । तो बस इतनी सी थी वो बात यस कहकर कम झुमने विस्की का एक सब क्या मनोज सोच में डूबा जमीन की तरफ देख रहा था । फिर बोला, निक मिनिस्टर जॉइंट रुकी से मिलना चाहता था । उसने एक अंतराल के बाद फिर काम जो उनकी आंखों में देखते हुए कहा और मिला भी था तो मीटिंग किसने अरेंज की थी? उसने आश्चर्य से मनोज को देखा, क्या बोल रहे हो? मुझे नहीं लगता और अगर वह मिला भी होगा तो मुझे उसकी जानकारी नहीं है । जहाँ तक मुझे याद है ऑफिस चली अपॉइंटमेंट लेकर तो कभी नहीं मिला । पर उस अनऑफिशियल मीटिंग में आप भी तो थे मीटिंग आपने ही तो अरेंज करवाई थी, जो मर्जी की सीटों, धर्मगुरु के साथ काम जम के चेहरे पर इस बार कडे भाव आ गए तो मैं ऐसे ही कुछ भी नहीं बोल सकते हैं । मैं तुम्हारे खिलाफ ऐसे ही कुछ बोलने की मेरी हिम्मत भी नहीं है । सर, ये तो वह सबूत बोल रहे हैं जो कि सीक्रेट सर्विस से मिले हैं । मैं कुछ और नहीं कहना चाहता हूँ । तुम जो कर रहे हो पहले उसे जाकर साबित करो । फिर बात करो । बिल्कुल कहकर मनोज उठा आपको जल्दी ही मुख्यालय बुलाया जाएगा । काम जम कुछ नहीं बोला । वो बैठा रहा । उसने मनोज पर से नजरें हटा ली थी । मनोज ने उसे आखिरी बार देखा फिर बाहर की तरफ चल दिया । वीरेंद्र अहलावत एक चालीस वर्षीय रिटायर्ड आर्मीमैन था जिसका इस जहाँ में आगे पीछे कोई नहीं था । इस वक्त वो दिल्ली में अपने दो कमरे के फ्लैट में कुर्सी पर बैठा । टीवी पर बिहाइंड एनिमी लाइंस नामक फिल्म देख रहा था । मैं इस पर बियर की दो बोतलें थी । एक खाली और दूसरी आधी खाली । साथ ही प्लेट में चिकन चिली के टुकडे रखे थे । उसने अभी अभी एक सिगरेट सुलगाई थी जब उसकी मोबाइल स्क्रीन चमकी । न्यूज टीवी से हटाए बगैर उसने फोन उठाया । फिर उसने मोबाइल में नोटिफिकेशन्स पर नजर डाली । उस एक नया ईमेल आया था । उसने ईमेल खोला । भेजने वाले का नाम था मिशन अंतर्द्वंद मिशन डॉट अंतर्द्वंद एट द रेट जीमेल डॉट कॉम । ईमेल का कोई सब्जेक्ट नहीं था । उसने ईमेल की बॉडी पर नजर डाली । जहाँ लिखा था नेम एॅफ डब्ल्यू फाइव परसेंट एंड जी एचकेएस सेवन एट एंड स्टार लोकेशन डबल एॅफ पीके । ईजी टाइम सेवन थर्टी है । वीरेंद्र ने घडी देखी । बारह बजने वाले थे । कल शिकार करना है तो फिर आज अच्छी नींद लेना जरूरी है । छह बजे उठना पडेगा तभी लोकेशन पर साढे सात बजे पहुंच पाऊंगा । उसने रिमोट उठाया और टीवी बंद कर दिया । फिर उसने फोन में एक खोला और उसमें लॉग इन किया । स्क्रीन पर दो आइकन दिखने लगे । नेम और लोकेशन । उसने नियम दबाया । फिर स्क्रीन पर मेल में लिखा, कोर्ट पाँच क्या एजेेंट जीडब्ल्यू फाइव परसेंट एंड जी एचकेएस सेवन एट ए एंड स्टार स्क्रीन पर एक नाम क्या उसे पढ कर वह मुस्कुराया? फिर वो बैठ गया और उसने लोकेशन वाला आयकन दबाया और इस बार ये मेल में लोकेशन वाला कोट डाला । इस बार किसी लोकेशन के कॉर्डिनेट्स कोबरे जिन्हें उसने कॉपी करके गूगल मैप्स पर डाल दिया । एक लोकेशन उभरी । उसने उसे सेव कर लिया । फिर वो उठा और बातों में घुस गया । वापस आकर उसने अपनी अलमारी खोली और एक लंबा सा बॉक्स निकाला । उसने बॉक्स जमीन पर रखकर खोल दिया । उसके अंदर एक स्नाइपर राइफल थी । उसने राइफल निकली और उसकी सफाई करने लगा । फिर उसने अलमारी से कारतूसों का एक डिब्बा निकाला और उसमें से नौ गोलियां निकली और मैगजीन में डाल दी । राइफल की मैगजीन में दस गोलियां लगाने का प्रावधान था । पर वीरेंद्र नौ नंबर खुद के लिए लकी मानता था । फिर उसने बॉक्स पूर्ववत बंद कर के बैठ के नीचे सरकार दिया और सोने की तैयारी करने लगा ।

Chapter 36

वर्तमान समय हरियाणा । हालांकि सूर्योदय होने में अभी कुछ समय शेष था । आसमान में उजाला फैलना शुरू हो गया था । सफेद रंग की एसयूवी सडक पर तीव्र गति से भाग रही थी । गाडी के अंदर ड्राइवर के बाजू में ओसामा का एक अंगरक्षक बैठा था । उनके पीछे ओसाका और उसका दूसरा अंगरक्षक मौजूद थे और सबसे पीछे वाली सीट पर अमर और सौम्या थे । अमर की नींद अभी अभी खुली थी । उसने बगल में नजर डाली । सौम्या सीट के सहारे आंखे मूंदे स्वप्निल अवस्था में थी । ओसा का भी नींद में था । हालांकि उसके दोनों अंगरक्षक जाग रहे थे । कहाँ पहुंचे अमर ने पूछा तो ड्राइवर ने शीशे में उस पर एक नजर डाली और बोला करनाल आने वाला है बढिया । फिर तो आप मन से ज्यादा दूर नहीं है । आज एक मुश्किल से दो ढाई घंटे लगेंगे । कुछ देर में सभी की नींद खुल गई । करनाल पहुंचकर एक ढाबे पर पडाव डाला गया जहाँ वो लोग फ्रेश हुए और कुछ चाय नाश्ता हुआ । आप ने कुछ सोचा कहाँ जायेंगे? चाय की चुस्की लेते हुए हमारी ओसाका से पूछा था सिंगापुर सही रहेगा तो वहाँ हमारे काफी अनुयायी हैं । बढिया आप कहीं तो मैं टिकट निकाल दूँ । अमर फोन की तरफ हाथ बढाते हुए बोला वो हमारी शिष्य ने पहले ही कर दिया है । तुमने हमारी और हमारे आश्रम के लोगों की बहुत मदद की है । पता नहीं तो तुम्हारा ऋण कैसे चुकता कर ऐसी बातें मत कीजिए । मैं बस वही कर रहा हूँ जो सही है । शायद इससे मेरे सब कर्मों में कुछ इजाफा होगा । अवश्य अच्छे कार्य से हमारे जीवन में विस्तार आता है । मन में सकारात्मक भाव आते हैं और हृदय में उदारता बढती है । जी गुरुजी फ्लाइट कितने मजे, क्या ग्यारह बजे । चलिए फिर जल्दी से निकलते हैं । सभी एक बार फिर गाडी में सवार हुए और सफर आगे बढा । आसाराम से कुछ खबर अमर ने सौ में से पूछा हाँ मैंने फोन किया था । पुलिस देखनी पहुंचकर सभी की शिनाख्त कर रही थी पर उन्हें सफलता हाथ नहीं आई । आदि भी तो कैसे? हम तो यहाँ पर अब तुम्हारे साथ ही ये तो समझ गए होंगे कि हम भाग गए । हाँ क्या कोई बोला कि वो आश्रम आए थे? तलाशी लेने नहीं । इसका मतलब जावेद अभी तक गुरु जी के खिलाफ वारंट हासिल नहीं कर सका होगा । शायद कभी जोरदार धमाका हुआ और गाडी अनियंत्रित होते हुए सडक पर लहराई । सभी बुरी तरह से दहल उठे । किसी को सोचने समझने का मौका नहीं मिला और गाडी सडक से किनारे उतरने लगी । ड्राइवर ने किसी तरह उसे नियंत्रित किया वरना वो जरूर पलट जाती । गाडी के स्थिर होते ही सौम्या चेक ही क्या हुआ । चार टायर पंचर हुआ है । ड्राइवर बोला पर इतना तेज धमाका अमर के मुँह से निकला । आगे बैठा शिष्य नीचे उतरने लगा । अमर बोला रुक जाओ पर तब तक देर हो चुकी थी । वो नीचे उतारा और फिर उसके शरीर को तेज झटका लगा और वह गिर गया । केश्वर ओसाका के मुझसे पीडा और हैरानी से भरा स्वरूप दूसरा शिष्य उतरने के लिए दरवाजा खोल रहा था की अमर जोर से चीखा । फायरिंग हो रही है । उधर नहीं, सभी जोकर बैठे उन्होंने उसका अनुसरण किया । अमर ने पिस्टल निकाली और पीछे झांकने की कोशिश करने लगा । जिधर से संभवतः फाइरिंग हो रही थी पर उसे कोई दिखाई नहीं दिया । आखिर फायरिंग हो कहाँ से रही है? जो बनाया फिर उसे काफी दूर सडक किनारे ट्रक नजर आया है । उसके अलावा सडक पर कुछ गाडियां आती जाती नजर जरूर आ रही थी । लगता है उस ट्रक पर कोई स्नाइपर सवाल है । वो बोला फिलहाल उसका मुकाबला करना मुश्किल है, बस कोशिश करनी है कि उसके निशाने पर ना आए क्या किया जाए भाई साहब ड्राइवर बोला मैं गाडी ने आगे बढाने की कोशिश करूँ पर ये तो पंचर हैं फिर भी चल रहा है । शायद नहीं ऍम गाडी टेढी मेढी होगी तो हम दरवाजे की तरफ से आसानी से उसके निशाने पर आ जाएंगे । पहले मैं पुलिस को फोन करता हूँ । हाइवे पर गश्ती पुलिस जल्दी ही मिल जाती है । पर क्या वो स्नाइपर का मुकाबला कर सकेंगे? सौम्या शंकित स्वर में बोली । अमर ने जवाब नहीं दिया और सौ नंबर पर फोन करके वारदात की सूचना देने लगा । पुलिस ने जल्द ही पहुंचने का आश्वासन दिया । सब्जी वो ट्रक नजदीक आता लग रहा है । ड्राइवर मेरे में देखते हुए बोला अमर ने पीछे जहाँ का अभी भी ट्रक काफी दूर था । उसकी ड्राइविंग सीट पर तो कोई दिख नहीं रहा था और उसकी छत पर राइफल की चमक जरूर मिल रही थी । अमर सीट पर उचककर बैठ गया । फिर उसने पिस्टल गाडी के पिछले शीशे से सगाई और ट्रक की तरफ फायर कर दिया । गोली शीर्षा में गोल सुराख बनाती हुई निकल गई । अगले ही पल ट्रक की तरफ से सनसनाती हुई बुलेट शीर्षक में एक और गोल छेत्र बनाती हुई प्रविष्ट हुई और सामने के कांच को तेज धमाके के साथ जोडते हुए बाहर निकल गई । गोली की सनसनाहट सभी ने महसूस की थी । सबका रोम रोम कांप रहा था । ओसाका ने आंखें मूंद रखी थी और वह किसी मंत्र का जाप करने लगा था । लगता है ट्रक का ड्राइवर नीचे जोकर ड्राइव कर रहा है । अमर बोला तभी एक और फायर हुआ । इस बार गोली ड्राइवर सीट से टकराई और सीट का ऊपरी सिरा टूटकर एक तरफ जा गिरा । ड्राइवर जोकि अब लगभग नीचे बैठ चुका था । बुरी तरह से घबरा गया सब्जी मैं जा रहा हूँ तो बगल में तो वो ट्रेन स्नाइपर लगता है । बाहर निकलते ही उसके निशाने पर आज हो गया और बस हम कब तक यहाँ बैठे रहेंगे तो पास आता जा रहा है । उसी का तो मुझे इंतजार है । अमर निर्भीक स्वर में बोला तभी पीछे बस आती नजर आई । बस ट्रक से आगे निकली और एक ऐसी हुई और ट्रक के बीच में आ गयी । मौका देखते ही अमर बाहर निकल आया क्योंकि अब ट्रक से उन पर निशाना नहीं लिया जा सकता था । बस जो बीच में आ गई थी । अमर ने दोनों हाथ उठाकर बस को रोकने का इशारा किया । बस ड्राइवर ने भी रुकी हुई गाडी देखकर उनकी परेशानी समझ ली और किनारे लोगे । जल्दी जल्दी हो और बस में बैठो । अमर चीखा । सभी तेजी से उतरे । शिष्य और सौम्या ओसाका को संभाल कर बस में ले आए । ड्राइवर भी बस में चढ गया । पर अमर नीचे रुका रहा । मैं यही रुकता हूँ । अरे पर शिष्य बोला टाॅक, सौम्या भी बोली मेरी चिंता मत करो, ये तुम लोगों के पीछे ही आएगा और मैच के पीछे चिंता मत करना । ये इतने सारे लोगों से भरी बस पर हमला नहीं करेगा । तुम लोग झुककर बैठना । फिर बस आगे निकल गई । तब तक कमर ऐसी हुई के पीछे छिपा हुआ था । जैसा कि उसने कहा था ट्रक बस के पीछे लग गया । थोडी देर में पुलिस वहां पहुंची । अमर ने जल्दी जल्दी अपना असली परिचय देकर सारी बात समझाई । पुलिस वाले ट्रक का पीछा करने के लिए तैयार हो गए । लगभग दस मिनट की ड्राइविंग के बाद उन्हें ट्रक दिखाई देने लगा । पीछे से उन्हें कोई स्नाइपर नहीं दिखा । कांस्टेबल जीत को ट्रक ड्राइवर की खिडकी के पास ले आया तो होता क्या है? दूसरा कांस्टेबल सीखा, लोग गद्दी नो ड्राइवर ने ट्रक रोका । एक कांस्टेबल आगे रुका । दूसरा अमर के साथ सावधानी से ट्रक के पीछे चढा । उन्हें ट्रक में कोई नहीं मिला । ड्राइवर के पास भी कोई हथियार नहीं था । यहाँ तो आपका वो स्नाइपर नहीं है सर जी । कांस्टेबल बोला कहीं वो बस नहीं तो नहीं चल गया । अचानक अमर के मुख से निकला है । वो दौड कर नीचे पहुंचा । उसने ड्राइवर की तरफ इशारा करते हुए कहा उसे ले आओ । कांस्टेबल ने ड्राइवर को पकडकर जीत में बैठा दिया और उसे हथकडी पहना दी । फिर से जीत सडक पर भागने लगे । कुछ देर बाद उन्हें बस सडक किनारे खडी नजर आई । बस के कई पैसेंजर्स और ड्राइवर भी नीचे खडे थे । किसी अनिष्ट की आशंका के साथ । अमरजीत से कूद और वहां पहुंचा क्या हुआ? उसने ड्राइवर से पूछा । ड्राइवर के चेहरे पर खौफ था । उसने बस के अंदर इशारा किया अमर तेजी से बस में चढा जिसके अंदर कोई नहीं था सिवाय एक लाश के । अमर ने देखा तो एक सीट पर लडका पडा था । चालीस वर्षीय लंबा मजबूत जिस्म का मालिक जो की अब बेजान हो चुका था । उसके बाजू में एक लंबा सा बॉक्स भी पडा था । उसके बाजू में एक लंबा सा बॉक्स भी पडा था । बाहर निकलकर अमर ने लोगों से पूछा क्या हुआ और बस में जो चीनी जैसे गुरु थे वो कहाँ गए? एक आदमी बोला पैसा भी आदमी बीच रास्ते में बस में जाना था और उन लोगों के पास जा बैठा था । फिर अचानक वो लोग उतर गए । कुछ देर बाद लोगों का ध्यान इस आदमी पर गया । पता लगा कि सो नहीं रहा बल्कि लडका पडा है । तो वो लोग बस से उतरकर कहाँ गए? उसने मूव बनाते हुए कंधे, उसका अमर ने आशापूर्ण नजरों से बाकी लोगों की तरफ देखा । बस से उतरने के बाद वो लोग एक टैक्सी को रोक रहे थे । एक युवक बोला अमर ने सौम्या का फोन मिलाया, रिंग जाती रही पर दूसरी तरफ से किसी ने फोन नहीं उठाया ।

Chapter 37

वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश जावेद कार ड्राइव कर रहा था । जॉन पीछे बैठक हो रहा था । अचानक जावेद का फोन बजा । उसने ब्लूटूथ पर कॉल रिसीव किया । बोलो मार कहाँ तक पहुँचे तुम लोग? अभी तो मिल रहे हैं वो सब ठीक हम पर स्नाइपर्स अटैक हुआ था । वोट जावेद चौका । अमर ने उसे पूरी बात बताई । जॉन की नींद भी खुल गई और वो उनका वार्तालाप सुनने लगा । स्नाइपर मारा कैसे? जावेद ने पूछा, कोई बाहरी चोट का निशान तो नहीं दिख रहा था? खून कहीं भी नहीं था । बहस आंखें मैच में चाहते हुए जॉन बोला खून बहाए बिना हत्या करने का आसान तरीका पर ऐसा कौन? कोई भी हो सकता है, ऐसा कहा । उसके शिष्य जावेद बोला जहर औरतों का हथियार हैं । जॉन बोला कम ऑन सौ में ऐसा नहीं कर सकती । अमर बोला मैं तो बस एक बात बोल रहा था । लोग अमर व्यग्र भाव के साथ बोला सौम्या का ही फोन आ रहा है । चलो मैं कॉल करता हूँ । ठीक है सावधान रहना । जावेद बोला, कॉल डिस्कनेक्ट होते ही जॉन बोला ओसाका पर हमला कौन करा सकता है । शायद सुजुकी या निक हमारी उनसे बात हुई थी । सुजुकी से तो ऐसी उम्मीद नहीं है । नहीं हो सकता था, पर तब तक जब तक उसे ओसाका से था । फिलहाल तो ओसाका देश से भागने की फिराक में हैं । तो इस से निक को क्या नुकसान हो सकता है? जावेद सोचते हुए बोला मिशन अंतर्द्वंद वाले हो सकते हैं, हो सकता है वो अभी भी नहीं को प्रोटेक्ट करेंगे । फिर वही बात अब तो ट्रेन में नहीं है, पर बदले की भावना तो खत्म नहीं हुई होगी ना । तो याने अमर ने उस हमलावर की फोटो भेजी थी, जिसमें उस पर लवेश के उसमें हमला किया था । हाँ वो नहीं था क्या बात कर रहे हो । यकीनन एक बार फिर फोटो देखो । जॉन ने अपने मोबाइल की स्क्रीन सजीव की और उससे अमर द्वारा भेजा निकल फोटो देखा । शायद तुम थी की कह रहे हो । इसकी शकील मेकप से थोडी बदली लग रही है । अगर यही निक है तो सोचने वाली बात है कि इसमें सौम्या पर हमला क्यों किया? जावेद ने उसकी तरफ एक नजर डालकर पूछा जावेद ये तो सागर से नफरत करता है इसलिए उसकी शिष्य से भी इसका मतलब सौम्या भी ओसाका की तरह खतरनाक हो सकती है और कहते हुए जावेद के चेहरे पर अचरज भरे भाव आ गए नहीं वहाँ छिपा था और सौम्या अपनी मर्जी से उस तरफ गई थी । अमर का कहना था की उसे वहाँ बहला फुसलाकर बुलाया गया था । हो सकता है वह सच ना हो । सौम्या सोचे समझे प्लान के हिसाब से ओसाका के कहने पर निक्को मारने गए हो । जॉन ने आंखे फैलाकर जावेद की तरफ देखा कहाँ हो तुम लोग? अमर ने पूछा मैं गोश्त अमर तुम यकीन नहीं करोगे । वॅार तो बस में ही किसी नॉर्मल पैसेंजर की तरह चढ गया था । तो फिर वो चला कि भरी मुस्कान के साथ हमारी बगल की सीट पर यहाँ बैठा अच्छा हाँ वो हमें ऐसे देख रहा था जैसे कसाई मारने से पहले बकरी को देखता है । फिर मैंने उस चीज का इस्तेमाल किया जो कभी मैंने धीरे से सीखी थी । हो गया सेल्फडिफेंस कान के नीचे और कमाल है । बहुत सही किया पर अभी तुम लोग को कहाँ? गुरु जी और उनके शिष्य ने तो सिंगापुर की फ्लाइट पकडी हूँ कि अच्छा हुआ । अमर ने बोला पर मन में कुछ और सोचा हूँ लाइट तो क्या एयरपोर्ट में घुसते ही उन्हें अरेस्ट कर लिया होगा? हाँ मुझे तो लग रहा था आज गए हम लोग पर तुम्हारी ब्रिलियंट थिंकिंग में हमें यहाँ भी बचा लिया । कमाल तो तुमने क्या है? बताओ तुम कहाँ हूँ? कुछ पुरानी यादें ताजा कर रही थी । दिल्ली आई तो सोचा ऍम तुम्हारे लिए बडी खुशखबरी है । तुम्हें क्लाॅज देने वाली हूँ । सच में मुझे क्या खुशखबरी मिलेगी एक बार तुम्हारी सेफ्टी का इंतजाम कर दूँ । फिर मुझे अपना वादा निभाने अपने साथियों के पास जाना है । उस की कोई जरूरत नहीं पडेगी । मैं खुद हैरान हूँ पर मेरे पास जो चीज है उससे इंटरपोल यकीन कर लेगी की धीरज ने की एक आतंकवादी था । जैसा क्या मुझे हो गया है मेरे मन में अब उससे बिछडने का कोई काम नहीं है । शायद सब अच्छे के लिए ही होता है । अच्छा हुआ जो तुम मेरी जिंदगी में आए अब चल दिया हूँ । कुछ और बात भी है जो मैं फोन पर नहीं करना चाहती । अमन हैरान था । लगता है वाकई बहुत बडा सुराग हाथ में आ गया है वसंत विहार में मकान नंबर जे नौ सौ उनतालीस चल दिया हूँ मैं । यहाँ चोरी छिपे अंदर तो आ गई बॉर्डर है कोई आना जाए दस मिनट में पहुंचा हूँ किस कर अमर ने फोन काट दिया

Chapter 38

वर्तमान समय नई दिल्ली अमन वसंत विहार के उस घर के बाहर रिक्शा से उतरा जिसका पता सौम्या ने दिया था । घर पर बाहर से ताला पडा था । अमर ने चारों तरफ देखा फिर घूमते हुए घर के पीछे पहुंचा । जहां छोटा गेट था उस पर आसानी से बिना किसी की नजरों में आए चढा जा सकता था । अमर बिना ज्यादा आवाज की ये घर के अंदर उतर आया और फिर दबे पाऊँ अन्दर की तरफ पड गया । मुख्यद्वार धकेला तो पाया खुला हुआ था । अंदर अंधेरा था । बाहर की रोशनी अंदर आ जरूर रही थी । पर्व सामान्य रूप से देखने के लिए पर्याप्त नहीं थी । पिस्टल हाथ में लिए वो एक कमरे से दूसरे कमरे के अंदर चलता चला गया । तभी सीढियों की तरफ से आवाज आई इधर आ जाओ । वो स्वामी थी । अमर सीढियों से ऊपर चढाया । ऊपर एक कमरे के दरवाजे पर सौम्या खडी थी । अमर को सामने देखकर वो खुद को रोक नहीं सकी और एकदम से उसके गले लग गई । आज का दिन में कभी नहीं भूल सकती हैं । अब तुम हो । अमर ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा । पता नहीं जब गाडी में हम पर हमला हुआ तो मुझे लगा बस आज यही हम सभी कान्त हो जाएगा । सच बोल तो एक बार मुझे भी ऐसा ही लगा था को पूरी तरह से अनएक्सपेक्टेड था यूअर ट्रू हीरो । उस से अलग होकर सौम्या उसकी आंखों में प्यार भरे भाव के साथ देखते हुए बोली सीक्रेट सर्विस को गर्व होना चाहिए । तुम पर वो बेवकूफ है जो तुम्हारे ही पीछे पडे हैं अब और नहीं ऐसा क्या है घर में किसका रही अक्सर? धीरज मुझे यहाँ लेकर आता था । शायद ये उसके किसी दोस्त का घर था जो अमेरिका में रहता था और इस की चाभी उसने भारत आते ही हासिल कर ली थी तुमसे मिलने के लिए ऐसा मैं सोचती थी पर आज मुझे समझाया कि वह घर को अपने मिशन के लिए इस्तेमाल करता था । ये विचार मन में आते ही मैं यहाँ आने के लिए प्रेरित हुई । देखा तो अभी भी खाली पडा था । इस की इच्छा भी अभी तक मेरे पास थी । फिर भी गेट प्लान कर रही हूँ जानबूजकर ताकि कोई शक ना करें । लेवर अमर मुस्कुराया, चलो इस कमरे में हूँ । सौम्या उस कमरे के अंदर बढते हुए बोले शायद ये धीरज की मिशन से संबंधित खास कमरा था । अमर भी कमरे के अंदर पहुंचा । वहाँ कई मेस कुर्सी कैबिनेट्स पुराने कंप्यूटर धूल खाते हुए नजर आ रहे थे । अमर्ष मैं तुमसे बात जानना चाहती थी क्या धीरज को मारते वक्त तुम्हें कैसा लगा था? अमर सतर्क हो गया । उसने पलट कर स्वामी को देखा तो क्या तुम्हें पता चल गया भाई? वो बोली उसकी पीठ अमर की तरफ थी । फिर उसकी तरफ पलटते हुए उसने पूछा क्या तुम्हें याद है? उसके अंतिम शब्द क्या थी? अमर ध्यान से सामना के चेहरे को देख रहा था । उसका मंतव्य समझने की कोशिश कर रहा था, पर सफल नहीं हो पा रहा था । याद करो हाँ, तुम एक सेंसिटिव इंसान हो, ऐसा हो ही नहीं सकता । जिस इंसान की मौत तुम्हारे अंतरमन को आज तक झकझोरती रही है, उसके अंतिम शब्द तुम्हें याद ना हो । उसने कहा था तो मुझे नहीं मार सकते हैं । मैं अभी भी इंटरपोल का एजेंट होगा और तुम इस बात को उस वक्त समझ नहीं सके । अमर ताज्जुब से उसे देखता रहा । फिर उसके चेहरे पर हैरानी भरे भाव आ गए हूँ । इसका मतलब तुम समझे? सौम्या मुस्कुराई । उसे पता था कि इंटरपोल के ऑफिसर को इतनी आसानी से मारा नहीं जा सकता है और उसने ये नहीं सोचा कि तुम्हारे जैसे देशभक्त जासूस खुद की भलाई के बारे में नहीं बल्कि सबसे पहले देश के बारे में सोचते हैं । हम आॅडी तुमने देश के उस दुश्मन को अपने हाथों से मिटा दिया । अमर सावधानी से उसे देख रहा था और सौम्या तो मैं कैसे पता चला । उसके आखिरी शब्द क्या थे उसी के लिए तो तुम्हें बुलाया था । यहाँ यहाँ सोहनगढ माइनस में हुई बातों की रिकॉर्डिंग थी यानी धीरज वहाँ था और उसका कोई साथ ही इसी कमरे में मौजूद उससे बात कर रहा था और उसकी बातें सुन और रिकॉर्ड कर रहा था । कमाल है अमर कमरे में चारों तरफ देखते हुए बोला हूँ । तभी अमर लडखडाने लगा । सौम्या लगभग कर उसके पास पहुंची । अयोज्ञ पता नहीं चक्कर आने लगता है । अमर ने मेज का सहारा लेने की कोशिश की थी पर फिर भी वो गिर गया । उसने अपना सिर पकड लिया । अरे मैं तो भूल ही गई हूँ । जहर ने असर दिखाना शुरू कर दिया । लगता है वो अभी मैंने माइक्रो सिरिंज लगाई थी । ना तो मैं थक करते वक्त तुम्हें पता भी नहीं चला । अचानक ही सोम्या के चेहरे पर बेहद शातिर भाव देखने लगे थे । ऐसे भाव जो आज से पहले अमर ने कभी नहीं देखे थे तो मिलेगी की मौत का बदला ले रही हूँ वहाँ सी धीरज नहीं तो मैं यही लगता है ना कि मैं उससे प्यार करती थी और उसने मुझ जैसी अच्छी भली लडकी का जीवन खराब कर दिया । अमर को रह रहकर सर में भारी पीडा होने लगी । उसे लग रहा था जैसे उसका सर फट जाएगा । राज की बात बताती हैं रिक्रूट तो मैंने उसे किया था हमारे यानी सीन ओके मिशन के लिए । दरअसल खलीली के मिशन में सीनों की भागीदारी भी थी और तीनों की सरकार खाली पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर दी थी । इसलिए उन्होंने उस पर कंट्रोल रखने के लिए बैकप मिशन के रूप में नेगी को वहाँ लगाया लेगी । भारत में अंतर्द्वंद नाम का एक मिशन चला रहा था जिसका वह गुप्त रूप से चीफ था और उसके मेंबर्स देश के विभिन्न प्रकार के लोग थे । कुछ पुलिस कर्मी, रिटायर्ड आर्मीमैन, साधारण लोग भी । बस कॉमन बात ये थी कि इन लोगों के अंदर देश में पहले करप्ट लोगों के खिलाफ अत्यंत रोष भरा था और उसे मिटाने के लिए ये कुछ भी कर सकते थे । नेगी ने शुरुआत तो अपने पिता की मौत के बदले से ही की थी । उन्हें जलाकर मारने वाले को उसने जलाकर मारा और उस भूतपूर्व मेले किसके इशारे पर उसके पिता को मारा गया था । उसे रोड एक्सीडेंट बनाकर मार दिया । वो नहीं ग्रीन नेगी का एक साथ ही था, जो पहले तो सुजुकी के आश्रम में डिप्रेशन से जूझता हुआ पहुंचा था । फिर अंतर्द्वंद मिशन में शामिल हो गया । अंतर्द्वंद वालों ने ही फ्लाइट तीन सौ एक की हाईजैकिंग में सीनों का साथ दिया था ये सोच कर कि फ्लाइट हाईजैक करके कुछ काॅल्स को सजा मिलेगी, पर ऐसा हुआ नहीं । हाईजैकिंग में लिप्त बाकी लोग सीटों के जासूस थे और उनका मंसूबा कुछ और था । नित नहीं, तुम्हारे एक मिनिस्टर की मुलाकात हो साकार से करवाई थी वो मिनिस्टर प्लान पी के लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है । लेकिन नहीं की की मौत के बाद से निक का दिमाग मिल गया और उसने सीनों के लिए आगे काम करने से मना कर दिया । इसलिए वो हमारे लिए लाइबिलिटी बन गया । दिल्ली में उसे मारने की कोशिश की गई, पर वह बच निकला । उसके बाद से वह छिपा छिपा घूमता रहा और उसकी लोकेशन पता चलते ही उसे मारने के लिए मैं तीनों के एजेंट के साथ टूट गई । वहाँ से लाॅन्च था तो उधर भी पहुंची, पर वहाँ उसने मेरे साथ ही जिनको मार दिया जिसकी लाश तुम्हें मिली थी और फिर मुझ पर भी हावी हो गया । ऍम तुम्हारा की तुमने मुझे बचा लिया । पर देखो लौटते वक्त उसकी गोली तुम्हें लगी और मैंने तुम्हें बचाया । इसलिए वो हिसाब बराबर ऐसा हाँ ओसाका और मैं तुम्हें बेवकूफी बना रहे थे । वो सारी बातें जो हम सुजुकी के लिए बोल रहे थे ना, वो दरअसल ओसाका के लिए थी । सूजूकी के पास सच में ऐसे सबूत हैं जिससे ओसाका की पोल खुल जाए, पर वह बेचारा कुछ बोलता नहीं । उसे लगता है इससे सीनों और भारत के संबंध खराब हो जाएंगे । ओसाका को मैं रिपोर्ट नहीं ले गई क्योंकि कल रात आश्रम में मैंने तुम्हें जोनिया जावेद किसी से बात करते हुए सुन लिया था । तब समझ आ गया कि तुम्हारी जावेद के साथ लडाई नाटक था । शुरू में तो मन से खफा जरूर थे, पर दोस्त गहरे हूँ तो गिले शिकवे ज्यादा दिन नहीं रहते । तुम्हारा प्लान था ओसाका को अपने कॉन्फिडेंस में लेकर आश्रम से निकालकर दिल्ली एयरपोर्ट पर अरेस्ट कराने का । इसलिए मैंने उन्हें सीधे छोडा सी फॅमिली में उससे ज्यादा सुरक्षित जगह क्या होगी उनके लिए सोम्य ने देखा अमर की आंखें बंद हो रही थी उसने झुककर उसका गाल थपथपाया । हमारे हमारे अरे तुम सुन रहे हो ना । मरने से पहले सब सुन कर जाओ, वरना मरने के बाद ही बेचैन होगी तो मुझे खोजते हुए शिमला । तभी से हमारे सीनों जासूसों को पता चल गया कि तो मुझे खोज रहे हो । मंडी में वह नकाबपोश जिसने तुम पर हमला किया था, तीनों का जासूस था, जिसे तुम ने पकडा । वो सारे ही तीनों के ही जासूस थे तो तुम्हें मार भी सकते थे । पर फिर हमें ऊपर से ऑर्डर आया कि तुम्हें मारने की जगह तुम्हारा प्रयोग किया जाएंगे । इसलिए धर्मशाला में जब तुम मुझ तक पहुंचे, मैंने आगे बढकर अपने बारे में तुम्हें बताया और काफी सारी कहानी सुनाई । नेगी के दोस्त जिन्होंने मेरे मरने का नाटक किया, उन्होंने कि के दोस्त नहीं, मेरे साथ ही सीधे एजेंट थे । मंडी में जो मेरे माता पिता बने हुए हैं, वो भी सीन ओके जासूस हैं । नेगी के कारण मुझ तक पहुंचा जा सकता था, इसलिए मेरे मरने का ढोंग किया गया था । आगे तुम जानते हो अच्छा हाँ, मैं तो मैं खाली के बारे में बता रही थी ना खाली अपनी मनमानी बहुत करता था और तीनों की कोई बात नहीं सुनता था । इसलिए अंत में नेगी ने वो किया जिसके लिए उसे भेजा गया था । खाली के मारते ही खुद पूरा कंट्रोल ले लिया । इसी जगह से मैं और तीनों के दो और जासूस उससे कनेक्ट थे । मैं साइंस में हो रही सारी बातें नहीं कि कि डिवाइस के जरिए सुन रही थी । फिर तुमने लेगी कुमार दिया और हमारा बडा नुकसान कर दिया । इतना कि अब सीनों को प्लान बी पर काम करना पड रहा है । वो क्या है ये तो मैं तो मैं मरते वक्त नहीं बताना चाहती हूँ वरना मरने के बाद भी तुम्हारी आत्मा अपने देश पर मंडराते ऐसे खतरे को लेकर परेशान रहेगी । अमर अमर बहुत निराश किया तुमने । मुझे तो मेरे लिए प्रॉफिट पार्टनर बन सकते थे । हमारे मिशन के लिए एकदम परफेक्ट । कितना भरोसा था मुझे तुम पर । इसलिए मैंने तो मैं अभी तक जिंदा रखा । अपने हिसाब से मॉड्यूल एड करने की कोशिश की पर तुम ने मुझे निराश किया । तुम्हारी जासूसी संस्था ने तुम्हारा साथ नहीं दिया । तुमने बगावत भी की पर फिर भी तुम से ये ये देश भक्ति छोटे ही नहीं जो देश तुम्हारे शौर्य को नकारते हुए तुम्हारी रक्षा नहीं कर पा रहा, लानत भेजनी थी ना उसे । फिर इसलिए मैं ये रिकॉर्डिंग छोड कर जा रहे हैं जिनसे यह तो सिद्ध हो जाएगा कि नेगीए टेरेरिस्ट था और तुमने उसे मारकर सही किया । ऍम अमर बुरी तरह से तक आपने लगा था गुड बाय आमस मुझ पर भरोसा करने के लिए थैंक्स तुम हमेशा यादव । उसने झुककर अमर के माथे को चूमा । उसकी आंखों में देखकर मुस्कुराई अमर को उसकी आंखों में जो भाव देखे उसने आज से पहले कभी नहीं देखे थे । इस वक्त कोई अलग ही शख्सियत दिख रही थी जो सीधी साधी सौम्या से बिल्कुल भी मेल नहीं खाती थी । ऍम सौम्या ने कहा और उसका शरीर लांघकर सीढियों की तरफ बढ गई । नीचे उतरते हुए उसके जूतों की आवाज अमर को सुनाई देती रही । अमर का चेहरा नीला पडने लगा था । आंखों की पुतलियां पलटने लगी । फिर फिर उसकी हृदयगति रुक गई । समाप्त

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