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01 अनुभव माई फ़ुट

ऍफ सुन रहे हैं तो बेहतर किताब का नाम है अनुभव जिसके लेखक है मनमोहन भालिया आरके मनीष की आवाज में फॅस उने जो मांॅग अनुभव मानाफोर्ट अनंत नहीं मेट्रो स्टेशन से बाहर आने पर अपने पिता के ऑफिस जाने के लिए ऑटो स्टैंड की और देखा था । ऑटो की एक लंबी लाइन लगी हुई है । ऑटोवाले सवारियों को आकर्षित करने के लिए आवाजें लगा रहे थे । मेट्रो स्टेशन पर खडे ऑटो में बैठने के लिए वो भी बडा ही था । उसके मोबाइल पर ड्राइवर मंटों का फोन आया । सभी पार्किंग में आ जाइए । साहब ने आपके लिए कार भेजिए । ननद के पिता दुर्गाप्रसाद एक सफल व्यापारी है । एक बहुत बडा ऑफिस जहाँ डेढ सौ कर्मचारी काम करते हैं । इंपोर्ट एक्सपोर्ट के साथ नामी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप हैं । रहने को एक बडी कोठी जिसमें नौकरों की एक अलग पहुँच भी रहती है । अंडो का फोन आने पर अनंत मेट्रो स्टेशन की पार्किंग की ओर बढ चला लाल रंग की चमचमाती बीएमडब्लू कार खडी है । मंटो ने अनंत कोई फौजी संयुक्त मारते हुए कार्यक्रम गेट खुला अनंत बस को रहते हुए कार की पिछली सीट पर बैठ गया ऍम मैं ऑटो से आ जाता है । मेट्रो स्टेशन के पास ही और दुनिया भर के ऑटो लाइन लगाकर सवारियों को आवाज दे रहे हैं । ऍम सर्जे बडे साहब ने जैसा कहा हमने वैसा किया । मैंने न पतला सा उत्तर दिया । पांच मिनट में आ गया । कार से उतर रही सिक्योरिटी गार्ड ने भी मुँह मारते हुए ऑफिस का मेन गेट खोला । गेट पर दुर्गा प्रसाद के निजी सचिव अनंत की अगुवाई के लिए मुस्तैदी से खडे थे । अनंतविजय सचिव के साथ लाॅबी की ओर पडे हैं । सबका हर सदस्य अनंत को गुड आफ्टरनून कहते हुए स्वागत कर रहा था । तरीका प्रथा दूसरे मंजिल पर कॉन्फ्रेंस रूम में मीटिंग में व्यस्त हैं मेरे सचिव काॅन्फ्रेंस रूम में प्रवेश करते ही डर का प्रसाद अपनी सीट से उठे आनंद का स्वागत करते हुए अपने साथ एक खाली कुर्सी पर बिठाया । दुर्गा प्रसाद ने मीटिंग में उपस्थित अपनी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से अनंत का तरीका करवाया । ऍम आनंद अनंत कुछ दिनों में हमारी कंपनी जॉइन कर रहे हैं । मेरा सारा काम आगे से अनंत देखेंगे । आज मीटिंग में आनंद को बुलाने का सिर्फ एक मकसद है । आप अपने भावी मैनेजिंग डायरेक्टर से एक बार मिल रहे हैं । मीटिंग के पश्चात दुर्गा प्रसाद अनंत को उसका क्या दिन दिखाते हैं और वहीं बैठकर अनंत से बातें करते हैं । अनंत अपने कैबिन को देख रहा है । ऍम के दो और कांच की बडी खिडकियां है जहाँ से सडक के दूसरी ओर एक वाइफ स्टार होटल नजर आ रहा है हूँ पहले तो ये बताओ ऍम दुर्गा प्रसाद ने अनंत से राय पूछे धाबा इसमें भी कोई पूछने की बात है एकदम आपकी छाप है पूरे फॅमिली एक और कुछ नहीं । आपने अचानक से मुझे वापस बुलाकर एक महत्वपूर्ण निर्णय भी ले लिया । अनंत तुम्हारी एमबीए को पूरा हुई तो वर्ष से अधिक हो गए मेरे जीवन का कटु अनुभव प्राप्त करने के लिए । तब से तब भी धूप में काम करवाया है । अब तो मैं काबिल बन चुके हो के अपने पिता के व्यवसाय को संभालता हूँ । आज तो मैं अपनी कंपनी के काम से आए और एयरपोर्ट से सीधा स्थान पर गए । काम समाप्ति के बाद ही मुझे फोन किया । काम के प्रति निष्ठा, समर्पण से मैं भली भांति समझ गया हूँ तो मेरे व्यवसाय को आगे बढाने में पूर्णतया सक्षम हो । अब तुम अपनी नौकरी को त्यागकर मेरा हाथ बनाऊँ । पिता दुर्गाप्रसाद की बात का अनंत ने तुरंत पालन किया । आपने टूर समाप्ति पर उसने त्यागपत्र दे दिया । अगले महीने की पहली तिथि से उसने पैसा के व्यवसाय की बंदा और संभाल नहीं एक अमीर व्यवसायी दुर्गा प्रसाद का पत्र अनंत एम । बी । ए की पढाई के बाद पिछले दो वर्ष से नौकरी करके जीवन की कठोरता गटर दाव सत्यता का अनुभव दे रहा था । घर से दूर छोटे बडे शहरों में उसने चार नौकरियाँ बदली । पेइंगगेस्ट के तौर पर विभिन्न शहरों में रहकर सीमित आमदनी में गुजरा करके उसमें बचत भी की । इन दो वर्षों में अनंत ने पिता से कोई आर्थिक सहायता नहीं मांगी । घर में किसी सुख सुविधा की कमी नहीं है लेकिन पिता दुर्गाप्रसाद उसको जीवन के संघर्ष से अवगत करवाना चाहते हैं ताकि कठिन समय में तो पूछ लेता हूँ । दुर्गा प्रसाद ने क्या बार में अनेक उतार चढाव देखे थे । उनका मकसद आनंद को कम में भी गुजारा करना सिखा रहा हूँ जिसमें वो सफल हुए हैं । टीआई उच्च सरकारी अफसर जनार्दन प्रसाद की पुत्री है । जनार्दन प्रसाद ने रिश्वत के जरिए अकूत दौलत एकत्रित कर रही है पुत्री पुलिस विलासिता में तो भी हुई है लखनऊ उल्टियाँ हमेशा साथ मे आसमान में प्रचलन कर दिया । उसने बडे बडे व्यापारियों को अपने पिता के आगे सब चुकाकर काम करवाने के लिए गिडगिडाते देखा है और रुपयों के प्रीत किसके साथ घर आते देखा हूँ क्या के बताने सिर्फ सफलता की चढाई देखी थी उसने कभी कठिन समय नहीं देखा प्रशस्त कि मोदी कमाई से घर में पूरे भरे हुए हैं क्या नहीं जो मांगा उसे मिला पापा सब पचास हजार देना शॉपिंग करनी है । यानी रविवार की दोपहर अपने पिता के आगे मांग रखूँ । जनार्दन किसी से फोन पर बात कर रहे थे । साइड से बात है काम के बदले दक्षिण की बात होती थी पिता ने लाडली बेटी को अलमारी की चाबी पकडा नहीं हूँ लॉकर में नोटों की गड्डियां से बडी थी चनारथल को स्वयं नहीं मालूम होगा कितना माल नगर में रखा है चनार्धन को लाकर में एक मिलीलीटर भी खाली स्थान पसंद नहीं है लाकर में दो हजार के कटे सबसे आगे रखे थे । दिया ने एक कडी निकली पिता को दिखाई चाबी वापस और कार की चाबी उठाकर और हो गए मांगी तो पांच सौ वाली कर दी थी । दो हजार वाली कर दी लेकर दिया अपने फ्रेंड्स के साथ शॉपिंग के लिए फुदकती हुई निकल पडी । जनार्दन को भी कोई फर्क नहीं पडता था । कितने वाली गद्दी लेके गई है थोडी देर में और आने वाली है उनको बाॅल कि अपने मित्रों दिन में पुरुष मित्र अधिक थे । उन के साथ पूरा दिन मटरगश्ती करते रहे । रात के समय पब में बैग पैक लगाते रहे हैं । जरूर में मित्रों संख्या रखते दिया । सात दो बजे घर पहुंचे जवान लडकी कहाँ है, किस हाल में है इसकी खबर लेने के प्रसर महाद आपके पास है ही रहेंगे । पिता का सहारा दिन निन्यानवे के चक्कर में निकल जाता है और माँ को भी अपने हाई सोसाइटी क्लब पार्टी से फुर्सत मिले तब कुछ सोचना दिल्ली आने के पश्चात आनंद अपने फॅमिली हो गया । उसके अधिक मित्र भी नहीं नहीं । स्कूल कॉलेज का एक मित्र अनमोल था जिसके साथ अनंता याराना अधिक था । अक्सर छुट्टी वाले दिन मिल कर एक अच्छा समय बिताते थे । शनिवार शाम का नाम तो बोलने मिलने का कार्यक्रम बनाया । शाम के समय नवंबर के महीने में दिल्ली का मौसम बदल जाता है । हल्की गुलाबी ठंड का एहसास माता फ्रेंड को मस्त बना देता है । हल्की ठंड के कारण अनंत ने कोर्ट पहना हुआ है और अपने मित्र अनमोल का इंतजार कर रहा है । थोडी देर में मोल आया फॅमिली, अनमोल और ऍम समय से अच्छे मित्र हैं और अब प्रेमपाश में बन चुके हैं । आपने प्रेमपाश के बंधन को पवित्र विवाह के बंधन में परिवर्तित करने का पूरा मन बना चुके हैं । आॅल ए अनिला बहुत इंतजार करा दिया, तुम दोनों हैं फिर तो टाइम पास हो रहा था । अनंत में घडी देखते हुए अनमोल से शिकायत की, फॅमिली दिया बस इसी के कारण थोडी देर हो गए । क्या ऍफ का परिचय आनंद से कराया? ऍम को देखा यानी छोटा सा टॉप और आधुनिकता की निशानी पडी हुई चीज पहनी हुई है क्या कट ऑफ उसके बदन को छुपाने में पूर्णतया असफल नजर आ रहा है । क्या का प्रदर्शन आनंद को पसंद नहीं आया । तब तो अति आधुनिक दिया के लिए ये अंग प्रदर्शन नहीं ऍसे । सिगरेट का पैकेट निकालकर आनंद के सामने क्या लग रहा है? मैं सिगरेट ने भी था, कमाल है, सिगरेट नहीं पीते । ऍम ऍफ सुलगाई और दशभर कर दो । हाँ, आनंद के मूंग की और छोडकर मुस्कराएंगे ऍसे खास नहीं लगा । ॅ आनंद की ओर छोडा । अनंत अब वहाँ पर राज नहीं कर सका और कौनसी छोडकर फट गया । उसने अपने मित्र अनमोल को कहा जब सिगरेट समाप्त हो जाए तब मुझे बुला लेना ऍम बुझने होगा । फॅमिली निकालकर मनी मनी ईडियट का सहारा नशा उठा दिया । अनिल है तो बता रही थी अनंत बहुत बडा फॅमिली है । लेकिन स्वयं को नियंत्रित करते हुए बात आगे बढाएंगे । अनंत अपने बारे में बताओ मैं और अनमोल स्कूल से फैन हैं । ऍन बनी अब अनमोल और अकेला मेरे बारे में सब जानते हैं । ऍम मेरे मैं ऐसे कोई खास बात है । नहीं तो बताओ ऍम अपने बारे में बताओ तो सोने पर सुहागा । मैं फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रहे हैं । अच्छा रोलमॉडल बनने की थी लेकिन पापा से अधिक माॅग चल मॉर्डल नहीं बन सकते । हो गया फॅमिली यानी खास अंदाज में हाथ को हिलाते हुए ना अप्रैल आधा के साथ क्या का अंदाज देखकर अनंत उसके घमंड को अच्छी तरह से समझ गया । ऍम तो बहुत अच्छा होता है । आजकल तो ये ट्रेन में हैं । एकदम ॅ, बडी टेक्सटाइल कंपनियाँ और निर्यात करने वाले एक्सपोर्ट हाउस में फॅार की जबरदस्त डिमांड रहती है । अभी बहुत सामान एक्सपोर्ट करते हैं । मैं नौकरी नहीं करेंगे । पापा मेरे लिए डिजाइनर आप खोलेंगे । आपको मालूम नहीं मेरे पापा के पास रुपयों की कोई कमी नहीं । ऍम बात करते हुए दिया कि नखरे साफ नजर आ रहे थे । आपके पापा का नाम क्या है? आनंद को दिया के पिता का नाम जाने की इच्छा हुई । जनार्दन प्रसाद ऍफ से अपने पिता का परिचय दिया । जनार्दन प्रसाद का नाम अनंत ने सुना होगा था । पिछली कंपनी में नौकरी के समय तो आपने पहुँच के साथ जनार्दन प्रसाद को रिश्वत देने उनके घर गया था तो जनार्दन प्रसाद के घर के पहाडी रुका था । कुछ नाटक प्रसाद कभी मिलने का बंद उनके किससे बहुत सुने थे । उस अपनी बात सहित नहीं होने दी और बात को पलट कर दिया । फिर भी एक बार नौकरी करके अनुभव अवश्य हासिल कर लेना चाहिए । जैसे मैंने भी किया । दो वर्ष तक मैंने नौकरी करने के बाद अब पापा का फॅमिली हैं । मेरे लिए हर रोज एक नया अनुभव है । बिना पूर्व अनुभव के अपने बिजनेस को संभालने में कई बार परेशानी हो सकती हैं । अभी थोडा समय सिर्फ अनुभव के लिए नौकरी कीजिए । थोडे से अनुभव के लिए अनंत ने मुस्कुराते हुए दिया से का अनुभव ऍम तो मुझे कहाँ गया है? कॉफी के अलावा कुछ मिलेगा नहीं तो पूरे गया क्या? तो चक्कर अनिला से कहा तो किस पोलिंग बन्दे से मिलवा ले ले आए हैं बोलने क्या को? कुछ तो अपने को दिया । मेरा बचपन का मित्र हैं । तीन वर्ष बाद मिल रहा है दस बीस मिनट नाम अनिल आतंकवाद करूँ फिर दूसरी जगह चलेंगे ऍम कुछ खाने का ऑर्डर कर तब तक मैं और अनमोल बात करते हैं । क्या मूंगदाल का चीला पनीर टिक्का बिरयानी के साथ गोल गप्पे भी मिलते हैं? अच्छे होते हैं अनंत नहीं किया को सुनाते हुए ऍम चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है । मुझे प्यार के साथ चिकन लेना तो बातें करो । मैं बाहर इंतजार कर लेंगे । मुझे छोटा भी लगाना ऍम क्या बाहर जाकर सिगरेट ठोकने लगती है । बाहर उसे एक और मित्र मिल जाता है । आनंद की नजरे दिया को देख रही है । क्या उस मित्र के साथ चिपक कर सकते? हो रही है? फिर अंदर आकर अनिला से विदा लेती है । बाॅस बिना अनिला की प्रतिक्रिया देखे वो टोनी के सफर हो गए । मनिला कैसी सिंह पाल रखी तुम्हें तुम्हारे और उसमें दिन रात का अंतर है । अनंत ने कारण जाना चाहिए आनंद उसके पापा और मेरे पापा गवर्नमेंट जॉब में इसलिए बचपन से फॅस अन एलाने अनमोल से फोन बात करने को कहा जिसके लिए वह दोनों अनंत से मिलने आए थे । अनंतम तो जानते हो मैं और अनिला पिछले पांच वर्षों से आप मेरे घर वाले मान नहीं रहे । तुम अंकल से बात करके मेरे पापा से बात करो ना । पापा और अंकल फॅमिली तो मेरा ये काम करती हूँ । ठीक हूँ कल रविवार छुट्टी का दिन है तो हमारे घर वापस बनाता हूँ । अनंत और अनमोल के पिता एक दूसरे के अच्छे मित्र हैं । रात के खाने के समय आनंद ने अनमोल की बात बताऊँ । दुर्गा प्रसाद ने अनमोल के पिता जानकीराम को तुरंत फोन मिलाया । फॅालो जानके क्या कर रहा है फॅस कर रहा हूँ । बहुत बढिया बरखुरदार । हमें तो लिया कि दुर्गा नाम का भी बंदा इस दुनिया में दुर्गा कहने से बंदा नहीं होता । आने से होता है बंदा है तो आ जाओ अपने घर तो मैं कर रहा हूँ । सुबह नाश्ते पर मिलता है इंतजार रहेगा । अगले सुबह दुर्गाप्रसाद और अनंत अनमोल के घर पहुंचते हैं अनंत अनमोल से मैंने उसके कमरे में जाता है । दोनों मित्र दुर्गा प्रसाद और जानकीराम आपस में चाय की चुस्कियों के बीच बात करने लगते हैं और दरगाह है क्या खबर है जानकी जरा नाचने का दिल कर रहा है । अनमोल की बारात में कहा नाचने का मनाया तब आनंद की बारात निकालने बारह के लिए कर लडकी की भी जरूरत होती है जो आनंद के लिए भी ढूंढनी है । मॉल में तो छोड रखी इसलिए कह रहा हूँ या और दुर्गा ऍम से बात की हुई होगी तभी तो ऐसी बात कर रहा है जाम की लडकियाँ अच्छी मतलब किस बात की आपत्ति है । लडका लडकी राजी तो क्या करेगा काजी जब लडकी उसके खानदान में कोई दोष नहीं है तो विवाह कर लेना चाहिए तो उसका परिवार हमारे स्तर का नहीं है । लडकी का पिता सरकारी कर्मचारी है छोटी पोस्ट पर है चानकी इस प्रकार की बातों को छोड जब हमारी शादी हुई थी हम कौन से अमीर थे यहाँ तो अमीर नहीं है दोनों गरीब है और मेल मिल गया छोड जान के लडके की बात मान ले बात पक्की कर ले थोडा ना चलेंगे दुर्गाप्रसाद की बात जानकीराम मान गए और अनमोल के अनुशासन पर वहाँ की अनुमति दे दी । बच्चों की खुशी ही सर्वोपरि है । विवाह तन के साथ मन का भी मिला है जहाँ बच्चों की खुशी वहाँ अपनी खुशी अनमोल के विवाह कर दिया का पूरा परिवार उपस्थ था । जानकीराम ने किया के पिता जनार्दन प्रसाद को दुर्गा प्रसाद से मिलवाया । जनार्दन और दिया दोनों पक्षों की ओर से विवाह में उपस्थित हैं अनिला और ऍम थी । जानकीराम ने जनार्दन प्रसाद को कई बार रिश्वत दी थी इसलिए दोनों की नजदीकियां थी । जानकीराम में जनार्दन प्रसाद को दुर्गा प्रसाद की मुलाकात में अनंत की तारीफ शराफत के पुल बांध भी है । जनार्दन प्रसाद जानकीराम की बातों से प्रभावित हुए और आनंद को दिया के लिए पसंद करने लगे । जानकीराम ने अनंत की दिया से मुलाकात कराकर एक दूसरे का परिचय दिया । आनंद क्या एक दूसरे को देखकर मुस्कराए? हमें तो मालूम नहीं दोनों एक दूसरे को जानते हैं । हमारा काम आसान हो गया । सनातन प्रसाद ने हसते हुए दुर्गा प्रसाद से हाथ मिलाया और ऍम या तो मानन से बात करूँ ऍम क्या आनंद किसान एक एकांत में बैठ कर बातें करने लगे । अनंत ने महसूस किया क्या नहीं था । कुछ अभी की भी रखी है । दोनों बाते कर रहे हैं । अभी फॅमिली के लिए मना कर दिया । कमाल के आदमी हो फॅस की भी नहीं पीते । फिर बिजनेस कैसे करते हो? सोशल सर्कल में कैसे जी सकते हैं फॅार सोसाइटी ऍफ खाली करते हुए एक और बैग लिया क्या की और हमारा एक्सॅन ना मेरे पापा शराब सिगरेट पीते और ना मैं पीता हूँ । हमें व्यापार चलाने में आज तक कोई दिक्कत नहीं है । व्यक्तिगत रूप से मैं शराब और सिगरेट को पसंद नहीं करता हूँ । और क्या हम से भी अनुरोध करता हूँ । तुम भी शराब और सिगरेट तो आना ऍम वाइॅन् क्या की बात सुनकर अनंत सोफे पर से उठ गया माफ करना क्या अब मैं चलता हूँ मेरा और तुम्हारे ख्याल एकदम जुदा है । आपस में बैठकर और बात नहीं करना चाहता हूँ । मेरे और तुम्हारे विचार नदी के दो किनारे हैं जो कभी मिल नहीं सकते हैं । विवाह तो तन के साथ मन का पवित्र मिलन प्रबंधन है । हमारी परंपरा सात जन्मों तक साथ निभाने की आधुनिक होना अच्छी बात है । मेरे विचार दकियानूसी नहीं, पुरानी और आधुनिक बातों का मिश्रण होना चाहिए । हम पुरानी परंपरा था की अनुमति नहीं और हर आधुनिक चीज प्रगति की निशानी नहीं है । मैं सिगरेट और शराब नहीं था क्योंकि ये तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और तुम मुझे लगता है इन दोनों के बिना रह नहीं सकती । फॅसा भाषण सुनने नहीं आई हूँ ऍम कोर्ट के साथ मैं एक पल नहीं रह सकते हैं । याने आनंद को सुनाकर अपना पैर पटका तो अपनी मर्जी से जीवन जी हो तो मैं कोई नहीं रोकेगा । तुम्हारे पिता के पास रिश्वत की बेशुमार दौलत है जिसपर तो महेश कर सकती हूँ लेकिन मेरे पिता ने मुझे संघर्ष में जीना सीखने के लिए दो तीन साल नौकरी कर के जीवन का काटो अनुभव देने घर से दूर रखा है । आजकल पता की दौलत पर विलासिता से जी रही हूँ । लेकिन मैंने और मेरे पिता ने दौलत के अंबार खाली होते थे । लक्ष्मी चंचल है और इसमें बंद नहीं होती । आज एक के घर तो कल किसी और के घर । इसलिए कठिन परिस्थितियों में जीने का अनुभव भी कुछ लीजिए । दिया जी अनंत उठकर चल दिया क्या को और अधिक चढ गई थी वो सोफे पर ही लुढककर हो गए । दुर्गा प्रसाद सब समझ गए । उन्होंने अनंत के कंधे था तब आया और फिर जानकीराम से कहा क्या की तबियत ठीक नहीं लग रही है । इसको कमरे में ले जाकर सुना हूँ । अधिक नशे में जनार्दन प्रसाद भी दूसरे लोग लडके हुए थे । जानकीराम ने तो होगा उठवाकर दो कमरों में बंद कर दिया । कहीं नशे में कुछ ब्लॅक इसलिए हम कभी भी रिपोर्ट नहीं होता । हाँ फिर थोडा अनुभव अवश्य दीजिए ।

दी होनेस्ट 01

फॅमिली लेंगे जिसमें नामीगिरामी कंपनियों क्या होता है फॅस के पार्किंग स्थान पर एक मोची का क्या है मुझे का नाम राम पर कई वर्षों से यहाँ ऍफ का काम तसल्लीबख्श करना है । सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक आपने ठेले पर बैठता है कभी कभी उसका हाथ बटाने आ जाता है । उसका लडका जिसका नाम शाशिकांत और उम्र बारह साल साहब की मैं पढता हूँ । उसके दो छोटे भाई बहन है जो उसके साथ स्कूल जाते हैं । रामपाल की पत्नी रामकली घरों में साफ सफाई का काम करती है । बस गुजरा हो जाता है घर के पास नगर निगम के स्कूल में तीन बच्चे पढ रहे हैं आपको कोई मतलब नहीं उनके बच्चे स्कूल में क्या पडते हैं, कौन सी कक्षा में पढते हैं । पढाई का खर्च सरकारी स्कूल में नहीं होता है फिर भी कोई नहीं होती । ऊपर से यूनिफॉर्म किताबें सरकार की तरफ से मिलती है और स्कूल में एक समय का भोजन भी मिलता है । यही सोचा शशिकांत के माता पिता के बच्चों को स्कूल में खाना मिलता है । एक समय के भोजन का प्रबंध बच्चों के लिए सरकार ने कर दिया । चलो बच्चों को स्कूल भेज दिया । मैं स्कूल चले गए और महाबाद अपने काम धंधे पर सरकार की नीति है कि आठवीं कक्षा तक किसी बच्चे को तेल नहीं किया जाएगा । हर साल बच्चे पढे आना पडे पास होकर अगली क्लास में चढ जाते हैं । जब तक स्कूल वाले बच्चों को स्कूल से नहीं निकालते हैं बच्चे पढते जाते हैं सरस्वती किस पर मेहरबान हो जाए किस को क्या पता है शिक्षा का अधिकार सिर्फ अमीरों को नहीं करी भी पढ सकते कभी तो खूब पडते हैं यहाँ तक कि आईएस भी बन जाते हैं यहाँ भी सरस्वती ने छप्पर फाडा और शशिकांत का हाथ पकड लिया । कक्षा साथ कार्य सकता है और सरस्वती की कृपा से शशिकांत पूरी कक्षा साथ में प्रथम रहा । प्रिंसिपल ने सबके सामने शाबाशी दी और छात्रवृत्ति प्रदान की । नकद पैसे पाकर माँ बाप कक्कर हो गए । गर्व से सीना चौडा कर के सब को बताते भरते कि उनका पुत्र प्रथम आया शशीकान्त हर साल तथा माता ना माता पिता पढते हुए पुत्र पर गर्व करते रहे । पढाई का कोई खर्च स्थानी ट्यूशन ले नहीं सकता था क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं थी की ट्यूशन फीस भर सकेंगे । छात्रवृत्ति मिलती रही और खुद अपने बल बूते पर शशिकांत बढता रहा । ऐसा तो सरकारी स्कूल में अध्यापक और प्रिंसिपल को कोई फर्क पडता है । नहीं आप के बच्चे पास हो या फिर रंग जब सरस्वती की विशेष कृपा हुई तो अध्यापकों ने शशिकांत की पढाई पर विशेष ध्यान देना शुरू किया । शशिकांत के प्रतिभा देखकर उनको विश्वास हो गया कि शशिकांत बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में मेरिट लिस्ट में नाम ला सकता है । इस से उनका और स्कूल का नाम रोशन हो जाएगा । शशिकांत की पढाई में लगन, उसकी मेहनत और अध्यापकों के सहयोग की रंगत सफल हो गई । बारहवीं की बोर्ड परीक्षा शशिकांत ने प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की । माँ बाप का सीना चौडा हुआ स्कूल का नाम रोशन हो गया । एक समाचारपत्र ने गरीब बच्चों के फोटो के संग उनकी जीवनी और संघर्ष की कहानी प्रकाशित कि जिन्होंने पचास प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त की । प्रतिभा संपन्न गरीब बच्चों में शशिकांत का संघर्ष भी सम्मेलन था । शशिकांत माता पिता की सीमाएं पहचानता था इसलिए बोर्ड की परीक्षा के बाद अपने पिता के साथ नियमित रूप से उनके ठेले पर बैठने लगा । पिता का हाथ बटाना उसे अच्छा लगने लगा और आगे उच्च शिक्षा का सपना प्रभु इच्छा के हवाले कर दिया । स्पोर्ट नतीजे के बाद समाचार पत्र में उस बिल्डिंग के फोटो छपी जहाँ हम पाल का किया था । रामपाल ने ऑफिस बिल्डिंग की पार्किंग की दीवार पर समाचार पत्र चिपका दिया । हाँ एक मुझे पिता और घरों में काम करने वाली बाई मात्र का होनहार वाला हूँ । अभावों के बीच बेहद करीब आ लगने सब का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया । क्या कोई उसकी मदद को आ जाएगा? शशिकांत आगे पढना चाहता है पर उसके माता पिता उच्च शिक्षा का खर्च उठाने में असमर्थ है । समाचार पत्र में छपे लेख को पढकर बिल्डिंग में एक ऑफिस के मालिक रंगराजन ने अपनी कार बिल्डिंग में पार्किंग में उस स्थान पर रोकी जहाँ मोची रामपाल अपनी दुकान लगता है । रंगराजन पेंटिंग पार्किंग की दीवार पर चिपके समाचार पत्र को पढ ले रहा हूँ । हालांकि उन्होंने सुबह घर पर ये समाचारपत्र पढ लिया था पर तभी उनको जानकारी मिली शशिकांत उन की बिल्डिंग के पार्किंग में मोदी का काम कर रहा है ये तुम्हारा पुत्र । कार से उतरकर रंगराजन ने दीवार पर चिपके समाचार पत्र पर नजरें टिकाकर रामताल से पूछा जी यहीं आपके सामने किसी का फोटो समाचार पत्र में छपा है । रामपाल ने शशिकांत की तरफ यहाँ क्या इतने अच्छे नंबरों से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण डाॅॅ हूँ । पिता का हाथ बढाना चाहते हो या कुछ आगे भी बढना चाहोगे । रंगराजन ने शशिकांत सीधा प्रश्न किया जी पढना चाहता हूँ पर पिताजी की आर्थिक स्थिति के कारण बहुत तंग उच्च शिक्षा का खर्च सहन करना हमारे समझते से बाहर हैं । शशिकांत में शरमाते हुए ॅ खोल बंद करते हुए रखना चल से बात की । रंगराजन ने मुझे रामपाल से पूछा तुम क्या सोचते हो? तुम्हारे पुत्र को आगे बढना चाहिए । इस विषय पर तुम अपने मन की बात स्पष्ट करूँ । मेरे जाने से क्या होगा? साहब के आगे पढाई का खर्चा कहाँ से और कैसे पूरा करूंगा? मुझे रामपाल के आंखों से कहते कहते हैं आप कुछ अलग है । रंगराजन उन दोनों की मन की स्थिति समझ गया । पैसों की तंगी के चलते शशिकांत की उच्च शिक्षा का सपना पूरा करने में उनको आर्थिक सहायता की जबरदस्त आवश्यकता है । रंगराजन ने शशिकांत होगा । वो आगे बढने का चुके है तो उसकी मदद करेगा । आगे के बाद ऑफिस में बैठ कर कर सकते हैं । चलो मेरे साथ शशिकांत और राम पाॅप रंगराजन का अनुसरण करते हुए उसके ऑफिस करेंगे । रामपाल और शशिकांत पहली बार किसी शानदार ऑफिस बिल्डिंग के अंदर गए थे । बिल्डिंग की दीवार के साथ सटकर रामपाल पिछले कई वर्षों से अपना काम कर रहा है परन्तु लगाने का सौभाग्या रंगराजन की बदौलत आज मिला । जब से दोनों रंगराजन के साथ के आपके मंजिल पर बने ऑफिस में पहुंचे । वही मंजिल पर रंगराजन का ऑफिस एक और छोटे छोटे कैबिन भरे हुए थे जहाँ बडे मैनेजर बैठते हैं । बाहर बडे हॉल में स्टाफ कंप्यूटरों पर काम कर रहा है । अंत में एक बहुत बडे कैबिन के बाहर नहीं प्लेट लगी है । रंगराजन चेयर में तीनों के दिन के अंदर गए ऍम पहचानता है । अधिकांश अपने जूते रामपाल से पॉलिश कराते साफ हैरान हो गया । तक राजन मुझे और उसके लडके को अपने कैबिन में ले गए । कैबिन में एक बहुत बडी टेबल भी जाना । रंगराजन अपनी कुर्सी पर बैठकर टेबल के दूसरी तरफ छह कुर्सियां थी । रंगराजन ने दोनों को कुर्सी पर बैठने को कहा । केबिन के एक तरफ कांच लगा हुआ था जैसे बाहर सडक और सडक के बार का पूरा दृश्य साफ नजर आता था । एक दीवार पर बहुत बडा टीवी लगा हुआ था । रंगराजन ने से मोटे से टीवी ऑन किया और एक बिजनेस चैनल लगाया हूँ तो मैंने टीवी देखने के बाद इंटरकॉम से अपने निजी सचिव से तीन कप चाय और बिस्किट भेजने का संदेश दिया । निजी सचिव भी अचंभित हो गया । आज बहुत को क्या हो गया हूँ । सुबह सुबह मुझे के साथ ऍम उसको आदेश का पालन करना था । पांच मिनट के बाद ऍम चाय और बिस्किट लाया हूँ और सबके सामने चाहेगा । कब रखा और बिस्कुट के लेटी शशिकांत रंगराज का क्या बिल देख रहा था । एक तरफ अलमारी में बहुत सारी ट्रॉफी सजी हुई रखी थी । रंगराजन ने चुप्पी तोडते हुए कहा हो चाहे वो शर्मा नहीं मिस कर देता हूँ । चाय पीते हुए रंगराजन ने शशिकांत को कहा हूँ शशिकांत यदि तुम अपनी लगन, जोश और डिनर के साथ आगे बढना चाहते हो तब वो पढाई का पूरा खर्च देगा और उसके बाद ऑफिस में काम करना चाहो तो नौकरी भी अभी से पक्की समझूं । शशिकांत सोचकर जवाब दे देना । रंगराजन के बात सुनते रामपाल की चाय का कप छोड गया हूँ । चाय टेबल पर फैल गए । हाँ कल को ऐसा मैं सोचता हूँ कि सपना देख रहा हूँ । टेबल पर चाय करने से रामपाल शर्मिंदा होकर रंगराजन से माफी मांगने लगा हूँ । कंगना चलने पहल बचाइए । ऑफिस तुरंत सेवा में हाजिर हुआ । बॅाल साफ करके एक कप चाय और लाने को कहा । ऑॅल साफ करते हुए मनी मान रामपाल को मां बहन की गालियां निकालने लगा । ऍफ इसमें बैठने की कहाँ कल और साहब पहुँच गए हो गया हो तो मुझे के साथ चाय पी रहे हैं । टेबल साफ करके वो रामपाल के लिए दूसरी चला गया । संजीव मैं आगे पढना चाहता हूँ । शशिकांत ने रंगराजन को अपने दल की ख्वाहिश बताएगा किस विषय में पढाई करना चाहते हो? राजन ने अगला प्रश्न किया जी कंप्यूटर साइंस में पढना चाहता हूँ । मेरी इच्छा प्रोग्रामर बनने क्या सर आप कुछ राइट कीजिए । शशिकांत में रंगराजन से सलाह ली खाॅन जिस विषय में तुम्हारी रूचि है वही पढो कॉलेज में पढना चाहूँगा । रंगराजन के पूछने पर शशिकांत ने कॉलेज के बारे में बताया सर जे कॉलेज नंबर वन है पर हमारे घर से बहुत दूर है । आने जाने में समय लगेगा और मेट्रो का किराया भी । खर्चा बहुत होगा । शशिकांत की शंका का रंगराज ने समाधान किया । शशिकांत चिंता मत कर रहा हूँ । मैं तो मैं कॉलेज भी इसके साथ मेट्रो किराया और चेस खर्च भी दूंगा । तुम आपका ध्यान सिर्फ पढाई में लगा । गीता का ज्ञान हमें यही बताता है । क्या मैं सिर्फ कर्म करना है, बाल कर्मानुसार कपडा में दे देता है तो एडमिशन लोग एडमिशन के बाद हर महीने तो मेरे पास बिना किसी झिझक के पहली तारीख को अपना महीना लेने आओगे । मैं अकाउंटेंट को बोल देता हूँ वो हर महीने की पहली तारीख में तो मैं पेमेंट कर देगा । अगर वह तकलीफ हो या कोई भी काम हो तो बिना किसी चीज अगर संकोच के मेरे पास मिलने आ सकते हो । रंगराजन ने शशिकांत की पढाई और जेब खर्च का इंतजाम कर दिया । शशिकांत एडमिशन के बाद उच्च शिक्षा का सबका साकार करने में जुट गया । फीस और जेब खर्च रंगराजन के ऑफिस से नियमित मिल रहा था । रंगराजन अपने काम में व्यस्त रहते हैं । कभी कभी अकाउंटेंट से शशिकांत के विषय में जानकारी लेते रहते थे । एक वर्ष बीत गया । रंगराजन अकाउंट की रिपोर्ट देख रहे थे । देखते देखते कुछ याद आया और अकाउंटेंट से शशिकांत के विषय में पूछा शशिकांत को हर मैंने पैसे देते हो ना । जैसे मैंने कहा था जी सर । लेकिन पिछले चार महीने से वह पैसे लेने नहीं आया । अकाउंटेंट रंगराजन को सूचित किया । रंगराजन हैरान हो गया की चार महीने से शशिकांत पैसे लेने नहीं है । कुछ सोचने के बाद अकाउंटेंट से कहा शशिकांत के पिता मुझे का काम करते हैं । बिल्डिंग के पार्किंग में उसका क्या है । उसको संदेश तो कि शशिकांत में से मिलेगा संदेश मिलते । अगले दिन शाम के समय शशिकांत रंगराजन से मिलने आया । शाम के छह बज रहे थे । रंगराजन काम में व्यस्त हैं । शशिकांत को इंतजार करने को कहा एक घंटे बाद सात बजे रंगराजन ने शशिकांत अपने कैबिन में बुलवाया । ऍम प्रवेश करते हुए रंगराजन शशिकांत के उसे ना मिलने के कारण हैरान थे और उन्हें गुस्सा भी था कि उसने शशिकांत के उच्च शिक्षा के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोडी । लेकिन शशिकांत ने उससे मिलना उचित नहीं समझा । रंगराजन ने उसके पढाई का हर खर्चा उठाया । महीने के खर्च का प्रबंध भी कर दिया और शशिकांत महीने का खर्चा लेने भी नहीं आ रहा । एहसान को ये छोटे लोग क्या समझे, किसी भी मदद के लायक नहीं । छोटे आदमी को अपने मूल लगना ही नीचे हूँ । ऍम सोच रहे थे । कई शशिकांत पढाई छोड तो नहीं थी आपने? उसको काबू में रखकर रंगराजन ने शशिकांत को कुर्सी पर बैठने को कहा । फॅस को लाने को कहा । पांच मिनट में चाय की चुस्कियों के बीच रंगराजन ने शशिकांत से पूछा बहुत बडे आदमी बन गए शाशिकांत बच्चे मिलने भी नहीं आए और चार महीने से पैसे भी नहीं क्या कर रहे हो । आजकल सीधा साधा । शशिकांत रंगराजन की बातों को समझ नहीं सका तो सीधी सच्ची बात कहने लगा । सर्जे अब हर महीने जो पैसे देते थे वो सारे खर्च नहीं होते थे । थोडे थोडे करके एक बडी रकम की बचत हो गए । इसलिए मैं ऑफिस पैसे लेने नहीं आएगा । दो महीने पहले प्रथम वर्ष की परीक्षा समाप्त और समझ लेने के लिए कॉलेज ने एक कंपनी में भेजा । ट्रेनिंग के साथ मुझे काम करने का वेतन भी मिला । मेरी ट्रेनिंग कल ही समाप्त हुई । ये पेटन का चेक सबसे पहले आपके हाथ में रखना चाहता था । कहकर शशिकांत ने चेक रंगराजन की ओर बढाया । टाॅल मात्र दो हजार केवल देखकर रंगराजन का सारा गुस्सा दूर हो गया । जो रंगराजन शशिकांत के बारे में पूरा सोच रहा था अब उसकी ईमानदारी देखकर हैरान और आश्चर्यचकित हो गया । एक गरीब घर का ईमानदार मेहनती छात्र जिसने उसके द्वारा दिए गए पैसों में से भी बचत की है । अच्छा और कोई होता तो नियमित रूप से पैसे लेता रहता । रंगराजन को क्या फर्क पडता है । उसने तो खर्च के पैसे दे रहे थे परंतु शशिकांत नहीं । ईमानदारी से सिर्फ उतने पैसे दिए जितने की उसको जरूरत थी । सीमित जरूरते रखते हुए कम रकम में उसने तो सारा की ऍम को देते हो जाएगा शशिकांत की तुम्हारी पहली कमाई है इसको खर्च नहीं कर रहा हूँ बैंक में खाता खुलवाकर जमा करवा दूँ तुम्हारी फीस का जिम्मा मेरा था मेरा ही रहेगा सब्जी अगले सप्ताह मेरा कॅरियर की फीस ऍम से जमा करा दूंगा महीने के खर्च से भी थोडी बची रकम हुई है बाकी रकम आपसे लेने अवश्य होंगा जैसा तो मस्जिद समझे रंगराजन ने शशिकांत ईमानदारी को देखते हुए का एक सप्ताह बाद रिजल्ट आया शशिकांत पूरी यूनिवर्सिटी में प्रथम रहा । मार्किट को देखकर रंगराजन की आंखों में आंसू अगर फोन हार शशिकांत में लगन, मेहनत और ईमानदारी से निराजन का दिल जीत लिया मार्किट हाथों में लेकर रंगराजन ने शशिकांत को कल ऐसे लगाया ऍम रंगराजन कि आखिर की ली थी ऍम से बाहर अगर पूरे स्टाफ का संबोधित किया फॅस शशि का ऍम

कायाकल्प 02

कायाकल् सुबह के समय दर्पण तिलक के लिए टिफिन तैयार कर रही हैं । लेफ्ट स्नान करने के बाद आप पर जाने के लिए तैयार हो रहे हैं । पेंशन पहनकर सफेद काले के चलिए नाम आ बालों पर कंघी, फेरी और मुस्कराती नहीं सोचा पहले बाबू अब साठ के हो रहे हैं बालवीर सिर पर आधे रह गए थोडे दिन में सेवानिवृत्ति हो जाएगी सब की होती है जीवन की नियति है बाबू तुमको तैयार हूँ । बस अब ये निर्णय लेना है कि सेवानिवृत्ति के पश्चात जीवन किस प्रकार से अधिक करना है । सोचते हुए ऍम क्या समाचार पत्र के प्रथम पृष्ठ पर मुख्य समाचार पडने लगा तार पन्ने नाश्ता लगाया क्या बात है ले कोई खास खबर पढकर मुस्कुरा रहे हो डर पानी खबर सिर पे की खास है अब साठ वर्ष के होने वाले हैं सरकार घर बैठ आने की तैयारी में दलित फेयरवेल पार्टी का बडा प्लेट में आलू की सबसे के साथ गर्म गर्म पूरी रखते हुए दर्पण भी डाइनिंग टेबल पर बैठ गई । सरकारी नियमों के अनुसार जन्मदिन वाले महीने की अंतिम तिथि पर गुड बाय टाटा होके हो जाएगा । अभी तो तीन महीने हैं अब दुनिया में उनका पालन करना ही होगा । आगे का क्या सोचा है कर बैठ कर आराम कर हो गया । कुछ ऍम इस विषय पर तुम सोचता हूँ अभी तो तीन महीने चलता हूँ ऑफिस के लिए नहीं तो देर हो जाएगी नाश्ता करने के फॅमिली और चलती है । केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर उतरकर अपने ऑफिस में समय से पहले अपनी सीट पर बैठ गए तो ऑफिस में सबसे पहले पहुंचते थे । पर बैठकर कल की पेंडिंग फाइल को निपटा देखो । सरकारी दफ्तर किसको आने की जल्दी आराम से टहलते हुए आते हैं कि जैसे ससुराल में साले सालियों से मिलने आए हैं । कोई समय से आ जाता है । कोई ऍम तो कोई एक घंटा । ना कोई पूछने वाला कितना काम हुआ, कौन से फाइल निपटा दी । आते ही अपनी सीट पर बैठते हैं । चाय पीते और गप्पे लडाते हैं । अब जब दिलीप समय से पूर्व ऑफिस आता है तो सही रहेगा । उन के अधीन कार्यरत अवसर भी समय पर आते हैं । उन्होंने आते ही तलब की टेबल से सारी फाइल वापस उन विभागों में भेज दी जहाँ चेन्नई थे । लेटलतीफ बापू वापिस आए, उनसे पहले ऍम फाइल टेबल पर रखी मिलेगा । चिंतामणि ऑब्जेक्शन के साथ सारी फाइल वापस आ गयी । चिन्तामणि के दफ्तर में घुस नहीं । उनके साथ पार्टी चेन्नास्वामी ने ये खुशखबरी सुनाई दी । चिंतामणि की लाइफ ऍर रखेगा दुनियाभर की चिंताएं चिंतामणि के स्तर पर तिवारी है । क्या करो । चिन्नास्वामी गलत कहा युवा राइट चिंतामणि क्या काम करने के पैसे पकड रखे हैं? ऍम लगाए जा रहा है । चिन्नास्वामी अपनी निराशा व्यक्त करते हुए दूसरे सहपाठी सोमनाथ चटर्जी को कहा ऍम वो कुछ काला जादू करने देने पर ताले का ट्रांसफर हो जाये । अपनी आमदनी पर ज्यादा लग गया । चिंतामणि की सारी चिंताओं का समाधान अतिशीघ्र होने वाला है । इस दिलीप का तीन महीने में रिटायरमेंट । अब तीन महीने बाद हमारे अच्छे दिन आने वाले हैं । सोमनाथ चटर्जी ने खुशखबरी सुनाई । तेरे में खेल चक्कर बंगाली दिलीप की रिटायरमेंट वाली खबर सुनकर चिंतामणि अपनी सीट से उछल पडा । चलो तीन महीने बाद इन फाइलों पर काम करेंगे । अब तक सफाई समझे फॅमिली आपके बच्चे का पता नहीं कहाँ से हमारे ऊपर चमगादड बनकर नाॅक । हर इन सब बातों का दिल पर कोई असर नहीं पडता था । उसे भलीभांति सरकारी कार्यशाली मालूम है । कभी वह भी चिंतामणि चिन्नास्वामी और सोमनाथ चटर्जी का बात हुआ करता था । शाम को जब दलिप कराया तब दर्पन संध्या अर्चना में मत नदी घर में बने छोटे से मंदिर में श्रीराधाकृष्ण की मूर्ति के आगे हाथ जोडकर सर चुकाए भजनगढ सुना रही थी देशभर तुम्ही दया करो कम्पन मेरा कौन हैं दुर्बलता दीनता हरो तुम बिन मेरा कौन है भजन गुनगुनाते समय दर्पण को देख के आने का हो गया था दिल्ली अपने दर्पण की पूजा में कोई रहना नहीं डाला उसने चुपचाप कमरे में कपडे बदले और तरपन के पास बैठ गया फॅमिली प्रसाद दिया ऍम प्रसाद अपने हाथों में लेते हुए थे अपने साथ इरादे तार पंजीका बैठो मैं चाहता हूँ चाय की चुस्कियों के बीच दर्पन ने दलित से सेवानिवृत्ति कीतिथि जानी चाहिए तर्पण तीन महीने बच जाएगा । आगे कहा और कैसे रहना है इस पर कुछ सोचो बुढापे में दिन कैसे कटेंगे रिटायरमेंट के बाद जीने का अर्थी संपूर्ण रूप से परिवर्तन हो जाता है जवानी तुम्हारी बाहों में कट गई बडा बात हमारी निगाहों में कट जाएगा कुछ बातें होंगी आंखों आंखों में कुछ शरारत होगी मुस्कुराहट में नाॅन तुम्हारा मोर्चा इराना हो रहा है तुम हो ही इतने अच्छे मैं तो कुछ भी नहीं फिर मेरा कितना ख्याल रखती हूँ एक बात करना चाहूँ सेवानिवृति के बाद मसूरी चल कर रहे हाथों में हाथ डालकर कैमल बैक रोड पर घुमा करेंगे या फिर ऋषिकेश में रहे गंगा किनारे त्रिवेणी गार्ड से आस्थापथ पर सुबह शाम सैर करेंगे । ऍम हमारे दोनों सुझाव मुझे मंजूर है । जहाँ भी दो कमरे का मकान मिल जाएगा वहीं आपका आशियाना बनेगा । टेलिकाॅम से अपने प्रति के पहचान अपने बुढापे की योजना बना रहे थे । इस पर को कुछ और ही मंजूर था । एक महीना और पी तिया दलित के अधीनस्थ सहकर्मियों ने फाइलों पर काम करना ही बंद कर दिया । चाय जनता मनी हो, चिन्नास्वामी, सोमनाथ चटर्जी या कोई सभी दिलीप के रिटायरमेंट की तारीख पर नजर गडाए बैठे थे । भाग प्रमुख सुभाशीष मुखर्जी ने एॅफ अपने रूम में बुलाया । तलब खाली बैठा हुआ था । तुरंत मुखर्जी साहब के रूम में पहुंच गया । मुखर्जी साहब अपनी स्टेनो को डिक्टेशन दे रहे थे । देख कर के वापस मुडने लगा । तब सुभाशीष मुखर्जी ने हाथ के इशारे से उसे बैठने को कहा । मुखर्जी साहब अपनी फाइलों के निपटारे ऍफ कराया उसका ऍम में रह गया तलब के बहुत सुभाशीष मुखर्जी ने तरक्की दो साल के एक्सटेंशन के से बारिश स्टेशन के बाद सेना फाइलों के साथ चली गई । उन्होंने बाहर अभी चिंतामणि चेन्नास्वामी, सोमनाथ चटर्जी और दूसरे स्टाफ को दलित के एक्सटेंशन की खबर सुना दी । खबर सुनते चिंतामणि ने सोमनाथ चटर्जी की गर्दन पकड ली सारी तो कौन सा जादू किया जो उल्टा पड गया हम रिटायरमेंट के जश्न की सोच रहे हैं उसका टेंशन हो गया । यहाँ तो हमारा क्रियाकर्म हो जाएगा शांत गदाधारी भीम शांत कभी कभी जादू उल्टा असर करता है यहाँ वही हुआ है हॅूं यहाँ तो दो वर्ष तक सब सैलरी मिलेगी और कुछ नहीं मिलेगा । सोमनाथ चटर्जी ने एक बढिया सलाह दी है जो किसी के काम की नहीं थी । तीनों के जाने के पश्चात दिलीप आपने पहुँच का चेहरा पडने का प्रयत्न करने लगा । क्या सोचते हैं मतलब सुभाषीश मुखर्जी ने कुर्सी पर आराम से पीछे झुकते हुए पूछा सर आप मेरे एक्स्टेंशन की सिफारिश कर रहे हैं पर क्यों? दिलीप को अभी भी अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था । दलितों ने सही सुना है तुम्हारी दो साल का एक्सटेंशन की सिफारिश है । मिनिस्ट्री से ऑर्डर आए हैं । हम तो मैं एक औपचारिकता निभा रहे हैं । मुखर्जी ने तरफ से कहा सर आप तो मेरा अतीत सब जानते हैं । राजीवन खुली किताब है मेरा एक्स्टेंशन मैं समझ नहीं पा रहा हूँ । ऍम सिर्फ एक सपना ही लग रहा था । फॅमिली मुझे क्या विभाग में सभी को तुम्हारे बारे में सब कुछ मालूम है । पिछले दस वर्षों भर हमारी निष्ठा, ईमानदारी किसी से छिपी नहीं मैं क्या मंत्री भी तुम्हारे बारे में सब जानते हैं तो हम मंत्री चाहते है तुम्हारा एक्स्टेंशन तभी से बारिश है । पैसे पर बैठकर सत प्रतिशत सच कह रहा हूँ । एक ईमानदार निष्ठावान आदमी की हर समय आवश्यकता होती है । तुम्हारी एक्स्टेंशन के पीछे दो कारण है पहला ईमानदारी और निष्ठा को बढावा देना और दूसरा प्रश्न कर्मचारियों के समझ उदाहरण पेश करना की । सरकार ईमानदारी को पुरस्कृत करती है । भ्रष्टाचार छोड ईमानदारी से काम करें । अब तुम निश्चिंत होकर फाइलों का नाम क्या? तो सर, मैं कैसे शुक्रियादा करूं कैसे? धन्यवाद तो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा हूँ । टाॅक ये सब ईश्वर की चाय तो मैं अपनी गलती मानकर भूल सुधार क्या यदि बाकी भी तुम्हारा अनुसरण करें कुछ तो भ्रष्टाचारी समाप्त हो जाएगा अपने बॉस सुभाशीष मुखर्जी से बात करने के बाद दिलीप अपनी सीट पर बैठ गया के लिए पवनदीप में चला गया । पुरानी बातें, घटनाएं सभी बारी बारी से चलचित्र की भांति उसके मन पटल पर आने लगी । रिश्वतखोरी मैं दिलीप, आज के चिंतामणि चिन्नास्वामी और सोमनाथ चटर्जी जमीन सभी का बहुत था । जिस विद्यालय मेरे आज पढ रहे उस विद्यालय का प्रधानाचार्य दिलीप रह चुका था । दलित की मैं इस पर फाइलों का पुलिंदा पडा रहता था । पर तो आपको कोई जल्दबाजी नहीं होती थी कि फाइलों को निपटाया जाए । सरकारी विभाग में बिना दक्षिण के फाइल का पट नहीं खुलता है । तिलक का सिर्फ एक सिद्धांता सभी वक्त मंदिर जाते हैं तो बिना प्रसाद चढावे के भगवान से भी विनती नहीं करते हैं । तो सरकारी कर्मचारी कौनसा भगवान से कम है । पूरे देश के जवाहर आ जाए । घर में खाने को दाने ना हों पर जवानी के खाकर जरूर होती है । चाहे पडोसियों से उधार मांगना पडेगा, एक बार सरकारी नौकरी लग जाएगी, सरकार की पेंशन लग जाती है, तनखाह पेंशन हैं, बाकी हम चले दान दक्षिणा होती है । इसी सिद्धांत वर्तली अपने बीस वर्ष सरकारी नौकरी में निकाल दिए । दर्पण सुबह सुबह टिफिन तैयार कर देती थी और सरकारी डॉक्टर की पत्नी की ख्वाहिश रहती है कि उसके पति को सबसे अधिक दान दक्षिणा मिले । फिर चला, ये तो कुर्सी पर निर्भर करता है कि उसका महत्व कितना है । जितनी ऊंची कौनसी उतनी अधिकता । दक्षिण दर्पण को दिल्ली की तन्खा से कोई सरोकार नहीं था । दर्पण लेना तो कभी तलब की सैलरी पूछे कितनी और नहीं । कभी सैलरी से पैसा मांगा तलब की । पूरी सैलरी स्लिप के पास ही रहती थी और दक्षिण पर पूरा हक दर्पण का ही रहता था । उसका मानना था की सरकारी दफ्तर एक मंदिर है । वहाँ हर रोज जाना है । कोई छुट्टी नहीं करनी । पता नहीं कौन से पर किसी और को विराजमान कर दिया । हाँ ना जाने क्या होगा । दलित दफ्तर में सुबह से तीन कप चाय पी चुका था । ग्यारह बजे थे जब शक चल रही थी । किसी ने कोई फाइल नहीं खोली थी । धीरे धीरे लोगों का आना आरंभ हुआ और फाइलों की पूछताछ हुई । सभी को पता था कि कहाँ किसको कितनी रक्षणा देनी है । जो सीट पर फाइल होती थी, बातचीत कर आगे बढाने के लिए दक्षिण देते जाते थे । मतलब जी नमस्कार कैसे हैं? ऐसा जाॅब की सीट के आगे कौन से खींचकर बैठे हुए नमस्कार दिखाई नहीं देते । आजकल तो सचिन को देखते तलब के चेहरे पर मुस्कान छा गई । मनीआॅर्डर पत्ती मां बहन की गालियां नहीं आना आना चाहता है । मिलने का मतलब है माथा टेकना परन्तु चेहरे के हावभाव से प्रकट नहीं होने दिया कि वह मन ही मन को सुना है । हमारी फाइल जरा देख लीजिए । अभी देख लेते हैं । आपने फाइल निकली और देखने के बाद दक्षिण बताइए, इसमें तो तीस हजार लगेंगे । पिछली बार तो भी इसमें काम किया था । वही विषय था । ऐसा हो गया ऍम पुराने दाम में उनका मानना मुश्किल है । अब आप तो हमारे पुराने जजमान ठहरे । उच्च दक्षिण में काम होगा । हमें ज्यादा का कोई लालच नहीं । तलब के आगे जिस मान की क्या होगा ठीक है जो आपके चाहे काम कब तक हो जाएगा । कोई और चारा ना देखते हुए तो सब जन बोलेंगे । कल इसी समय आ जाना हमारे दरबार में देर तो होती नहीं, बस दक्षिण की बात होती है । हम तो पंडित ठहरे तुरंत आपके और भगवान के चरणों में रख देते हैं तो अपने आश्वासन दिया । एक खूबी थी आपने दक्षिण मिलता ही गोली की रफ्तार से फाइल में पड जाती थी । उस दिन तो आपको दो लाख रुपये की दक्षिण आएंगे । ऐसे दिन तो कभी कभी आते थे कि छप्पन भोग लगाते हैं । शाम को झूमते चाहता दिलीप को देखते ही डर पन्ने आपके होठों पर होटल रखती है । आज तो लक्ष्मी के दर्शन अगर आती थी अकेले बाबू जब लक्ष्मी हमारी बाहों में रह रही है पहले उसको देखकर थोडी संतुष्टि ले लें । फिर लक्ष्मी लक्ष्मी के हवाले कर देंगे दिल इतने दर्पण को अपनी फॅमिली बाहों में बस चल गई आपकी सोनी गर्दन पर एक डॅालर्स होता क्या हूँ जम बन की झडी लगाते हुए अपने वो बात कही जो दर्पण के हो रहे थे ऍम आप आज पूरा कर रहे हैं गलत के बाहों में घर पर इतना ही नहीं रही थी कॅश आज दर्पण के लिए हकीकत हो गया था ऊँट तरपन कीमत को नहीं देखना है नकली ऐसा होना चाहिए कि सब देखते रह जाए तुम्हारे खूबसूरती को चार चांद जब तक ना लगें मुझे चैन नहीं आएगा वो ऍम के हाथ पर उस दिन की दक्षिण रखी है दर्पण अपनी अलमारी के लॉकर में दक्षिण कर अगर घूमी और दलित ने छत से दर्पण को फिर से अपनी बाहों में कैद कर लिया । मतलब की बाहों में मचलते हुए दर्पण ने अपने हो दिलीप के होटल पर रखती है आज कोई खास थे तो इतना जवान बन रहा हूँ बच्चों को हॉस्टल में डाल के रखा है घर में एक मैं और एक तो मौसम भी कातिलाना है और तुम उस पर आग लगा रही हूँ । जिस माहौल में दिल में चलने को बेताब ठिठोली करता हूँ, सच कह रहा हूँ आज हमने आग लगा दिया है हूँ । दो, दस और एक जन हो गए हैं । दर्पण नाम के अनुरूप थी और नाम को सार्थक करती थी । व्यवहार के सोलह साल बाद भी दर्पण को देखकर हर कोई यही कहता था उसकी दर्पण अभी कॉलेज में पढ रही होगी । बच्चे हॉस्टल में रहते थे । दर्पण उम्र के साथ साथ अधिक जवान होती जा रही थी । बेफिक्र घर का वातावरण । एक वो और एक दलित रुपए । पैसों की कोई कमी नहीं । हर ख्वाहिश पूरी हो रही थी । हालांकि दलिप कुछ उम्र से बडे देखने लगे थे । पर तर्पण उम्र से छोटी देखती हूँ । कोरी सुनना थोडा ऊंचा कद सुडौल बदन के स्वामी ने तरपन के हर ख्वाहिश पूरी होती गई । जब हर ख्वाहिश पूरी होती है तब उम्र की गाडी उल्टे गैर में चलती है । दर्पण की खूबसूरती चलती है और भारती चली गई । तिलक के दक्षिण मानने में लक्ष्य थी । दूसरे सहकर्मियों से अधिक दक्षिण बटोरे जाता था और दक्षिण केसन दर्पण की खूबसूरती में चार चांद लगाते जा रहे थे । एक रात तरपन के होठों पर हो ट्रक कर दलित ने कहा आज मुझे नौकरी करते हुए पच्चीस साल हो गए ऍफ का शादी की सिल्वर जुबली में तभी पांच साल है । नौकरी के सिल्वर जुबली का जश्न शानदार होना ही चाहिए । तर्पण दलित के बाहों में मचल गए ऍम कश्मीर चलते हैं वहाँ के हसीन दिलकश वादियों में प्यार कुछ बहुत परवान होगा । प्रेम की सभी पराकाष्ठा को पार कर जाना है । प्रेम की सभी हदें सरहदें पार करनी है मिले प्रेम की सभी ऊंचाई और कहना या छोडनी है दर्पण प्रेम के नए मायने स्थापितकरने दलित हम कभी विदेश नहीं गए इस पर विदेश चलते हैं ऍम हूँ डर बन के दिल की ख्वाहिश काॅर्निया तरपन मेरी सरकारी रह रहे हैं विदेश सैर सपाटे के लिए कहे तो दुश्मन पीछे लग जायेंगे और फिर जांच पडताल और ना जाने क्या क्या पूरी जिंदगी झंड बा हो जाएगी । सरकारी नौकरी हाथ से ना निकल जाएगा अपने इंडिया सबसे बढिया जहाँ होंगे वही ले चलते हैं फिर कश्मीर चलते हैं तो फॅमिली है । कश्मीर के हसीनवादियों और मौसम ने दलित और तर्पण को रोमेंटिक बना दिया । अधेड उम्र में भी दोनों युवा से भी अधिक युवा बने हुए थे । तर्पण का सौंदर्य कश्मीर की हसीन परी और मौसम के साथ अधिक कामुक हो गया हूँ तो जिसमें एक जन चले पर तरपन के जीवन के वह पंद्रह दिन सबसे अधिक यादगार और हसीन पद हैं । चलचित्र कुछ पल के लिए रुका हूँ । शायद मध्यांतर हो गया था । आंखों से चश्मा उतारकर इस्तेमाल से आंखों का किला बन साफ किया । भविष्य की करता मैं क्या छुपा हुआ है ये तो समय स्वयं दस्तक देकर बताता है वो वो अचानक से आधा वक्त आया ना कोई संदेश, ना कोई पूर्व सूचना मैं अचानक से सामने खडा हो जाता है । पैसा बाबा आपकी कुछ नहीं चलने वाले । जो मैं कहूंगा बस वही होगा । जय श्री राम । दिलीप और दर्पण ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था । जो हुआ और जो होने वाला है समय के पास खुद है कब कहाँ के लिए उड जाए और आपको कहा ले जाए । इसका उत्तर सिर्फ समय ही जानता है । कश्मीर के हसीनवादियों के बाद समय ने उन्हें तपते रेगिस्तान में पटक दिया । कश्मीर से लौटने के बाद तर्पण की तबियत बिगडने लगी हैं । उसका स्वास्थ्य ढीला हो गया । फॅमिली डॉक्टर को दिखाया । उस ने दवाई लिख दी । कुछ दिन दवाई का सेवन किया परंतु तबियत सोचते ही रहने लगे । डॉक्टर ने कई टेस्ट करा लीजिए नतीजा से । पर कोई बीमारी हाथ में नहीं आएगी और स्वास्थ्य लाभ भी नहीं हूँ । तरपन की सुंदरता को जैसे ग्रहण लग गया । फॅमिली डॉक्टर ने वरिष्ठ डॉक्टर से भी जांच कराई । कई डॉक्टर को दिखाया । तबियत भी करती है । दर्पण के सौंदर्य पर जैसे किसी की बुरी नजर लग गई । बाकी छह छपेली छप्पन झरी दर्पण सूखकर कांटा हो गए । एक वर्ष डॉक्टरों और अस्पतालों के चक्कर में कट गए । एक रेगिस्तान की तपती रेत पर पहर पडे और सब पहुँच गए । डॉक्टर ने सिर्फ एक शब्द कहा, कैंसर और ये शब्द सुनते । वज्रपात दर्पण पर गिरा और दर्पण सपने में आ गई ऍम गया । डॉक्टर ने कहा हो सकते है कटु सत्य ही है । दूसरे डॉक्टर फिर तीसरे डॉक्टर से मिले हैं । आप जो कर तो सकते हैं, उसको झगडा है तो जा नहीं सकता था । डॉक्टर ने कहा कि कई बार कैंसर बीमारी का पता शुरू में लग जाता है । कई बार बाद में है । आप के केस में कैंसर का पता तेरे से लगा लेकिन घबराने और परेशान होने की कोई बात नहीं ऍम लगभग एक साल तक इलाज चलता रहेगा । ॅ इलाज के लिए रुपये पैसों की कोई चिंता रहे थे । दक्षिण के खूब कमाई एकत्रित थे । बेहती नदी से दो चार बाल्टी पानी के निकाल लो । नदी को कोई फर्क नहीं पडता । एक तो तर्पण का शानदार है, जिस पर वो इतना दी थी अभिमान करती थी । पैसे भी काफी हद तक ढल चुका था । बाकी के बचे सुंदरता पर कैंसर का ग्रहण लगाने को तत्पर था । स्त्री का सौंदर्य उसके वक्ष से जो हर नारी के जैसा उन का अहम अंग है, वहीं उससे जुदा होने जा रहा है । ये सोच सोच कर तरपन रातों को जहाँ जाकर होती रहती थी, उसकी आंखों से गंगा जमुना बहती रहती थी । उसके स्थान को उसके शरीर से चुरा कर दिया जाएगा । उसका चश्मा अधूरा हो जाएगा । ऍम के साथ तो कैसे जीवन व्यतीत करेगी । नहीं करवाना उसे कैंसर पहला मर जाना उसे मंजूर था । अपने से चुनाव होना उसे स्वीकार नहीं था । डाॅन को समझाया और डॉक्टर ने भी समझाया ऍम इसलिए एक्सन को अलग करना ही पडेगा । यदि पहले चरण में पकडा जाता तो स्थान बन जाता हूँ । अब कोई चारा नहीं । जिंदगी से बहुमत पोर्टर पर अभी तक खुद अपने लिए जिंदगी को दिया है, खराब है और उनके लिए जीटॅाक अपनी बाहों में लेकर प्रेम से कहा और उत्तर फंड शून्य भाव से दिल को देखते हुए मेरे लिए बच्चों के लिए वहाँ पर बच्चे तो आपने है और कौन है तेरे बिना मैं क्या करूँ? मेरे जीवन का कोई लक्ष्य नहीं रहेगा । बच्चे छोटे हैं उनका सोचो ऍम कोचीन में रैली और बच्चों के लिए मेरा मार्गदर्शन करना है तो तुम्हारे बिना भी नहीं सकता हूँ । बंद शरीर के साथ मैं कैसे जीवन बिता होंगे? मैं तो तुम्हारे साल कहना आसान है, खेलना मुश्किल है हूँ, जीवन में तक सकते हैं, कुछ तो सहना पडेगा जीवन में हर किसी को सुखर तक बराबर मिलता है । किसी को पहले सब मिलता है और घर तो किसी को पहले तो फिर तो किसी को बराबर साथ साथ मिलता है फॅसा है जिसके एक तरफ से बाहर दूसरी तरफ होता है फॅर तब तक हॅूं दर्पण ने नाखून कृते होए गा पिछले एक महीने से जब से तुम्हारी बीमारी का पता चला है मेरा समय क्या तो हमारे साथ ऑपरेशन के लिए बात करने और तुम्हें राजी करने में व्यतीत होता है या फिर धार्मिक पुस्तके पढने में भी इतना बढकर आत्मचिंतन कर रहा हूँ कि कर्म करने बाल भगवान पर छोड दें तो जीवन का उद्धार है ऑपरेशन करवाना हमारे घर में उसका फल अच्छा मिलेगा तब स्वस्थ हो जाओगे । हमें आज का सोचना है । भविष्य परम परमात्मा के लिए है जो होगा अच्छे के लिए ही होगा । दहेज की सलाह पर दर्पण ने ऑपरेशन के लिए हामी दे दी । ऑपरेशन के लिए तर्पण को अस्पताल में दाखिल करवाया । मैं कर लेते हुए दर्पण कमरे की छत पर टकटकी लगाकर दिलीप को बोली सुना कल सुबह ऑॅपरेशन है । पता नहीं मैं बच्चों या नहीं । दिलीप कुर्सी से उठकर दर्पण के सिरहाने बैठकर एक हाथ दर्पन के हाथ पर रखता है और दूसरा हाथ तर्पण के बाद ऍम सब ठीक होगा । डॉक्टर ने कहा है कि ऑपरेशन के बाद सिर्फ एक दिन अस्पताल में आॅपरेशन में कोई खतरा नहीं होता हूँ । बस घर पर आराम कर रहा है । मिले तो मुझे झूठी तसल्ली दे रहे हो । ऍम आ गए और कानों पर छलक पडे दिल इतने दर्पण के आंसू पहुंचना तर्पण के हाथ पर चंबल लेकर दर्पण को सांस बनाती । अचानक तलब के हजार तरपन के हाथों पर बडा दर्पण के हाथों की लकीरों गा कोई पता नहीं था । अजीब सा था । उसने दूसरा देखा । दोनों हाथों की लकीरों ने नया रूप ले लिया था । पूरे हाथ में चौकडी से काॅफी हर मानव के हाथों की लगी रहे । उसके भूत वर्तमान और भविष्य को दर्शाती हैं । पर आज वो लकीरे नहीं थी । सिर्फ कटी हुई लकीरों की चौकडी से पूरा हाथ भरा हुआ था । दलित को हस्तरेखा शास्त्र का कुछ भी क्या नहीं था । हो सोचने लगा कि दर्पण का हाथ क्या कह रहा है? फॅमिली वाले लकीरों का क्या रहता है? क्या बताना चाहती है दलित अचानक से सावित्री की बात याद आ गई हूँ । सावित्री दिलीप ऑफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर थी । उसका छोटा भाई आर्मी में था । नार्थ ईस्ट में एक मुठभेड में बहुत बुरी तरह जख्मी हो गया था तो इलाज के लिए उसे दिल्ली लाया गया । ऍफ का इलाज चल रहा ना सावित्री को हस्तरेखा शास्त्र में रूचि थी और थोडा बहुत ज्ञान बिता उसके भाई के हाथ के रखेंगे भी ऐसी हो गई थी जैसे आज तर्पण की थी । जब कोई चीज बिना बात के बीच छोड रहा होता है तब उसका हाथ ऐसा हो जाता है । खाद की लकीरे सब कुछ बताते है । सावित्री की कहेंगे शब्दों से याद आ गए क्या सचमुच सरपंच जीवन और मौत के बीच चौराहे पर हैं । दर्पण को ज्ञान हो गया है । डॉक्टर तो तसल्ली देते हैं । किसी अनजान डर से भयभीत ले अपने भाई को छुपाकर तर्पण को तसल्ली देता था । दर्पण किया की नहीं थी । कुछ देर बाद दर्पण को नींद आ गई पर तलब की आंखों से नींद छोड चुकी नहीं । दर्पण को सोता देख तरफ ने बत्ती बुझा दी । पूरी रात तर्पण के सफल ऑपरेशन के विनती और प्रार्थना करता रहा हूँ । अगली सुबह पांच बजे तक पढना बिस्तर छोडा, स्नान किया और प्रार्थना के वैसे दर्पन पूजा पाठ कभी कभी करती थी और जब से उसे कैंसर की बीमारी के बारे में मालूम हुआ था हर रोज की पूजा प्रार्थना और उसकी दिनचर्या में शामिल हो गई थी । तले पे प्रार्थना करने लगा प्रार्थना समाप्त होने के पश्चात डर पन्ने कॉलेज का सुना एक बात मानोगे ऍम अभी कुछ देर बाद मेरा ऑपरेशन है कुछ भी हो ऑपरेशन के बाद में कैंसर की लडाई जीत हो या हार ऑपरेशन के बाद काॅफी में भी कुछ भी हो सकता है । चाहे मैं तो छोड कर चले जाओ तुम आज वितरण लो कि अभी से रिश्वत कभी भी नहीं लोगे । काम तन्खा में गुजारा कर लेंगे । रोकी रोटी में गुजारा कर लेंगे प्रभुभक्ति मैं जीवन व्यतीत करेंगे । तुम कभी भी रिश्वत दक्षिण नहीं लोगे तो शायद हमारा अधिकतन अर्जित करने का लालच अधिक दक्षिण लेने का फल ही है जो मुझे दुर्घटना पड रहा है । ऍम किसने देखें सब हम अपने जीवन में इसी धरती पर सर भी देखते हैं । ऍम भी देखते हैं सब कुछ और आपको नाटक समझे कहकर तर्पण होने लगी । ऍम बना दी । ऑपरेशन से पहले मन को दुखी ना करें तो प्राण लेता है कि आज से वह रिश्वत नहीं लेगा । सिर्फ काम करेगा । अपनी पूरी निष्ठा से, बिना पे दबाव के हर फाइल को उसकी योग्यता के आधार पर देखो । दर्पण का ऑपरेशन सफल रहा हूँ । दो दिन बाद तर्पण अस्पताल से घर आ गई । तिलतर्पण का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा ओ हो जो वादा किया है तुमसे वहीं होगा । जब मैं ऑफिस जाऊंगा तब हर काम बिना रिश्वत के करूँ । अपने दर्पण का हाथ देखा । अब चौकडी वाली कट मत काफी हद तक गायब हो गई थी और सामान्य रेखाएं नजर आ रही थी । अपने अनुमान लगाया तर्पण कैंसर की जंग जीत लिया । उधर अपन को दिए वचन का अंतिम सांस तक पालन करेगा । एक काम और कर तो बच्चों को अपने पास बुला । तब उनको खास टल में मत रखो । अगर हम बच्चों के संग रहेंगे । ठीक है इस साल हॉस्टल में रहने, अगले सत्र में यही स्कूल में दाखिला दिलवा देंगे । सत्र के मध्य उनको हॉस्टल से वापस बुलवाने से उनका एक वर्ष व्यस्त हो जाएगा । आप छुट्टी करके घर मत बैठा हूँ । कल से ऑफिस जाना शुरू कीजिए । डॉक्टर ने कहा मैं सब काम कर सकती हूँ । मुझे सामान्य जीवन व्यतीत करना है । सकारात्मक विचार है । मुझे कैंसर से ठीक करने में सहायता करेंगे । डॉक्टर ने ये भी कहा है कि थकना नहीं और भारतीय नहीं उठाना । थोडा थोडा काम करेंगे । थकान महसूस होगी तो आराम कर लेंगे । भारी चीज कोई नहीं उठानी है । घर पे नौकर है वो काम करेगा । मैं तो जान घर में हैं । काम है भी कितना ऍम तल आपने एक सप्ताह बाद ऑफिस जाना शुरू कर दिया । दलित एक नए अवतार में अपनी कुर्सी पर बैठे हर फाइल को ध्यान से देखते और अपनी टिप्पणी लिखते हैं । ऊपर असर भी गौर से देखते हैं कि दिलीप को क्या हो गया । फाइल पर टिप्पणी दर्ज होने पर प्रैक्टिस बाहर के बाद ही आगे की कार्यवाही हो सकते थे । दल अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी की हर जान मानव को अपने पुण्य पाप का लेखा जोखा इसी जिंदगी में मिलता है । आप सब जानते हैं कि मेरे से अधिक ऍफ इसमें कोई दूसरा नहीं । दक्षिण अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता था । मैं कैसा भी समझते हैं पत्नी की बीमारी में खुद अपने आप क्या हुआ की बहुत हो गया । शायद दक्षिण का असर था की पत्नी कैंसर जैसे रोग का शिकार हुई । भगवान का शुक्र है कि ऑपरेशन सफल रहा हूँ । मैंने और पत्नी ने शपथ ली है कि रिश्वत नहीं दूंगा । आप लीजिए पर मुझे रिश्वत लेने को मजबूर मत कीजिए । अब अपना मन शांत स्वच्छ रखना चाहता हूँ । जीवन स्वर्ग और नरक देख लीजिए ऍफ किसी ने नहीं देखें । सबकुछ इसी जीवन में है । मतलब सुबह साढे नौ बजे ऑफिस पहुंच जाते और बिना समय बर्बाद किए कम में चढ जाते । कोई चाहे कक्षा पार्टी नहीं कम ही पूजा है । तलब के जीवन का लक्ष्य शाम थी छह बजे तब तक छोड देते हैं उनके बैंक में गीता रहती फुर्सत के पलों में गीता पडते हैं । घर में दर्पण रसोई बनाती और छोटे कार्य करती पडे कम लाकर करता हूँ । फुर्सत के पल में तो प्रभु की आराधना में व्यतीत करते हैं । एक दिन दिलीप ऑफिस में फाइल निपटा रहा था । एक पुराने परिचित तलब के सामने कुर्सी पर बैठ गए जिन्होंने तलब को कई बार दक्षिण दी थी । उनकी फाइल पर अपनी टिप्पणी कर कुछ और कागज मांगे जो प्रस्तुत नहीं कर सकते थे । जिसके खादर पे मोहम्मद की दक्षिण देने को तैयार हैं । समझे हमारी फाइल की उसका रखी है । चलती फाइनल करूँ इस बार बहुत समय ले रहा हूँ । सचिन थोडा कटाक्ष भरे स्वर में कहा पायल पूरी करता हूँ । मुझे कोई दिक्कत नहीं हैं । दूसरी फाइल को सूक्ष्म दृष्टि से देखते हुए बिना सर उठाए अपने जवाब दिया सर आप तो जानते ही हैं, पहले भी नहीं कागजों के आधार पर आप काम कर देते थे । अबे फटाफट कर दीजिए, दक्षिण तो पूरी मिलेगी । आपका सब जानते हैं पहले की बात कुछ और थे । मैं दक्षिण लेता था अब नहीं लेता हूँ । मैं कुछ समझा नहीं । यही की मैंने रिश्वत लेने छोड दिया । अब काम सिर्फ योग्यता के आधार पर ही होगा । सबसे हमारा क्या होगा? लालच बुरी बला है । मैंने ये अलग छोड दिया । अब ईमानदारी से काम कीजिए और दक्षिण का लालच देकर हमें परिमाण मत बनाई है । सर छे मछली पानी में ही तैयार थी है । अभी तक कीरीट को टूटने मत दीजिये । तोड नहीं रहा हूँ । अपनी राह रखी है । नया रास्ता है । मुझे आनंद आ रहा हूँ । आप भी चलकर देखिए किसी का डर नहीं रहेगा । चैन केवल से बचाइए । उल्टे काम बंद कीजिये ना टैक्स वालों के छापे की चिंता ना कल परेशानी रात को चैन की नींद आएगी । सर्च ये उस रास्ते पर नुकीले पत्थर है, चला नहीं जाता । दक्षिण से सभी चाहत संपन्न होती है । आसान जिंदगी जीने में आनंद है कहकर एक लाख रुपये उसने दलिप की मेज पर रखती है । दलित ने वो रुपए उन सज्जन के हाथों पर वापस रखकर का आप गलत मकान का दरवाजा खटखटा रहे हैं । यहाँ वो नहीं रहता जिन्हें आप जानते थे । अब उस मकान में वो रहता है जो आप से एकदम अनजान है । आपकी पहचान का आदमी वहां से चला गया तो वहाँ कभी रहने नहीं आएगा । ऍम बंद कर दिए उस व्यक्ति ने । काफी में न देके तुरंत दिलीप जैसे ईमानदारी के रास्ते चल चुका था । वो बंद था । वहाँ से वापस मारना असंभव और नामुमकिन था । उस व्यक्ति ने ऑफिस में दूसरों से बातचीत की पर कोई बात नहीं बनी । तरह बदल चुका था तो उसने सोचा कि घर पर बात की जाए । गौरतलब की पत्नी को दक्षिण दी जाए । पहले भी कई बार वो दर्पण को दक्षिण दे चुका था । वो व्यक्ति तुरंत दलित के घर पहुंचा । दर्पण उसको पहचानती थी । उसके लिए चाय बनाई थी । चाय पीते पीते एक लाख रुपए की कट्टी दर्पण को देनी चाहिए । तर्पण ने मुस्कराकर रुपए लेने से इंकार कर दिया । ऍम आपने बहुत बार सेवा की है । अब ईश्वर की आराधना कीजिए । हम बदल चुके हैं । कुछ आप डाली है ठकार कर वह व्यक्ति चला गया । शाम को दलित घर वापस आया । तब उसे और दर्पण को आत्मसंतुष्टि थी कि वे अपने प्राण पर अधिक रहे और सभी पहलुओं बना से बचे रहे । अभिषेक होते ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य थी । एक महीने बाद दर्पण की कीमत भी शुरू हुई । हर एक दिन बाद छह के मतलब तरफ से कुछ करता हुआ समय सर के बाल झड गए । मजबूत इरादों के साथ सिर पर चलने वाले घर के काम भी करती रही और काॅपी के डर दायक तौर से गुजर गयी । दर्पण का बदन ढल गया । लेकिन खूबसूरती अधिकतर नहीं थोडी बहुत अभी भी कायम थी । अपने खाली समय में दर्पण प्रभु भजन गुनगुनाती रहती हैं । हुए हैं जब से शरण तुम्हारी खुशी की घडियां मना रहे हैं, करें बयान क्या सिफत तुम्हारी जुबान में ताले पडे हैं । स्कूल का नया सत्र आरंभ हो गया । बच्चे भी हॉस्टल से घर वापस आ गए । काॅफी के बाद रेडिएशन का सत्र शुरू हुआ । पच्चीस दिन रेडिएशन के पक्ष के उस हिस्से को चला दिया गया । ढीले ढाले वस्त्रों सिर पर चल नहीं हाथ में गीता दर्पण एक संन्यासी लगने लगे । एक वर्ष के कठिन दौर के बाद कैंसर का इलाज समाप्त हुआ । अस्तर पर वापस अपनी फॅमिली दर्पण के सिर पर बालों ने फिर देखना शुरू किया । कुछ समय में बॉस्केटबाल हो गए तो आपने दर्पण का हाथ देखा । अब कोई कटी हुई चौकडी वाली लकीर है । नहीं थी सामान्य हाथ हो गया और लकीरे भी पहले वाली अवस्था में हो गए । दर्पण एक बात मेरी हूँ वहाँ तरपाल अच्छे लग रहे हैं तुम्हारे चाहे इनको लम्बे मत होने तक हूँ । ठिठोली कर रहे हो । हसते हुए डर पडने तलब की बात मान लीजिए समय बीतता गया । कल के भ्रष्ट धूर्त दिलीप की गिनती अब सबसे ईमानदार और निष्ठावान अवसर के रूप में होने लगे । सब गलत की मिसाल देकर कहते हैं कि कहाँ सब तरह की तरह सुधर जाएं । ऍम वर्तमान में आ गया हूँ । तलब की आंखों में आंसू थे । चश्मा उतारकर आखिर साहब की ऍम जाकर हो गया और वाशरूम से वापस आकर अपनी सीट पर जाकर बैठ कर चाय मंगवाई । चाय पीने के बाद आज वर्षों बाद ऑफिस से जल्दी घर जाने के लिए चल पडे हैं चॅू ये मैं क्या देखा हूँ चिंता माॅस्को जल्दी घर जाते देखकर पूछा चिंतामणि तो बहुत ही चिंता की बात है । दिलीप जल्दी घर जाए और वो भी जब उसका टेंशन हो रहा है । चिन्नस्वामी ने सब की चिंता बढा दी है हूँ मेरी सीरियस मैटर मिस्टर चिन्नास्वामी चटर्जी की बात सुनकर चिंतामणि और अधिक चिंतित हो गया । ऍम के बावजूद चिंतित मन से ऑफिस से जल्दी जाते देख पूरे स्टाफ में खुसर फुसर आरंभ हो गई । दलित के जल्दी घर आने पर पर पर भी चिंतित हो गए जब उसने दिलीप को गंभीर मुद्रा में चुपचाप कमरे में बैठे देखा क्या बात है? तबियत ठीक है । दर्पण ने तलब के माथे पर हाथ रखा । तर्पण ईश्वर के मन में क्या है? हम नहीं जानते हैं । हमको अच्छा रखते हैं । उसके ऐसा कुछ हो, कुछ खुलकर बताओ क्या हुआ कल तक हम रिटायरमेंट के बाद मसूरी आ ऋषिकेश में बस कर एक दूसरे की आंखों में आंखों से बात करने की सोच रहे थे । अब तो साल इसी मकान में रहना होगा । बस इतनी सी बात है तो क्या हुआ तो वर्ष बात मसूरी ऋषिकेश रह लेंगे, लेकिन दो वर्ष बाद क्यों? ऐसा अचानक से क्या हुआ? दर्पण मुझे दो वर्ष की एक्सटैंशन मिल रही हूँ । आॅपरेट इसमें तो चिंतित होने की क्या बात है ये तो खुशी की बात है । सरकार ने आपकी ईमानदारी और निष्ठा का पुरस्कार दिया । ईश्वर की निगाह सबके ऊपर बराबर रहती है । हम सोचते हैं वो हमें देख नहीं रहा तो हमारी भूल होती है । ईश्वर हमारे पल पल का हिसाब रखता है । दर्पण तुरंत मंदिर के सामने बैठ कर ईश्वर होते करने लगे । अच्छ सारी दुनिया प्यारी है साढे गाना तो प्यारा कोई नहीं चिरा कदम कदम से रक्षा करें कृष्ण वर्क आहोर सहारा नहीं अगले धंधे कुछ देरी से ऑफिस पहुंचा पूरा साफ कल शाम से ही परेशान था । आज हिम्मत करके साफ तलब के पास पहुंच गया । कल शाम आपके तभी कुछ आराम से लग रही थी । आज भी थोडा देरी से आए । मेरी तबियत ठीक है । कल एक्स्टेंशन की खबर के बाद कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई है । आपने से कुछ मेरे अतीत को भलीभांति जानते हैं । कुछ नहीं जानते मुझे यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं । मैं रिश्वत लेने में तुम सब का था । वो अतीत है वर्तमान तुम जानते हो आप लोग भी अपने यहाँ पैदल लोग तो बहुत अच्छा रहेगा । सपने देखा ऍम फिर हम हो गए । तीन महीने बाद ऍम के हाथ में रखा हूँ कि तुम्हारे खांड और ईमानदारी का फल है । दर्पण ने मुस्कराते हुए गा तब कुछ नहीं बोला । दो वर्ष बाद आपको एक एक्सटेंशन दो वर्ष के लिए ।

वेल्ली गपशप 03

बेली गपशप आज कुछ अत्यावश्यक कार्य संपूर्ण करने में मोहन को अधिक समय लग गया जिस कारण दोपहर का भोजन भी समय पर नहीं खा सकते । लगभग चार बज रहे हैं । भूख लग कर कुछ मुझे ही गई है । टिफिन खोलकर खाना आरंभी किया था । निर्मल ने बेहतर ऍम में घुसकर सामने की कुर्सी पर बैठकर बिना किसी औपचारिकता के बातचीत आरंभ करते हैं । मोहन किसी ने सही कहा है कि हर खाने पर लिखा होता है खाने वाले का ना कहकर निर्मल ने लेट से एक रोटी का कौन थोडा और छोले के साथ अपने मुँह में रखकर मस्जिद दिखाने लगा । निर्मल थोडी चपाती छोले के साथ और लोग अब चार बजे मेरे खाने की भूखी समाप्त हो गई है । मुझे पूरा खाना नहीं खाया जाएगा । मोहन ने निर्मल के आगे खाने की प्लेट की थोडी और रोटी छोड के साथ खाते हुए निर्मल ने फिर का आप पी जी के हाथों में जादू है क्या गजब का खाना बनाती है? छोले होगा तो जवाब नहीं । बाबा क्या स्वाद है बता नहीं सकता । मोहन तो बहुत ही घोषणा से है कि इतने अच्छे भावी जी मिली निर्मल क्या हमारी बात बजे खाने में कभी छोडती है? मोहन ने चटकीली श्रीमोहन वो बात नहीं, ये जो भाभी जी छोले बनाती है । लाजवाब स्वाॅट मोहन पूरे दिल्ली शहर में ऐसे छोले नहीं मिलते । मोहन ने जब प्लेट निर्मल के आगे सरकारी थी, वो उसे चट करने में लग गया । मोहन समझ चुका है कि निर्मल किसी खास मकसद से उसके पास आया । मोहन ने निर्मल से बहुत मकसद जानने के लिए बात बदलते हुए पूछा । निर्मल तो में समय इधर से उधर कैबिनों में दौडते भर रहे हैं । कोई खास बात है क्या? पहले पेटपूजा पर कोई काम हो जाएगा? निर्मल भी कौन सा काम था? उसने सबसे पहले मोहन का भोजन समाप्त किया । मजा आया मोहन छोले खाकर ऍम फिर बात करते हैं । मोहन ने इंटरकॉम पर निर्मल के आदेशानुसार जायेगा ऑर्डर दिया । पांच मिनट बाद ऑफिस बॉय ने मोहन की टेबल साहब की और खाने की प्लेट ले गया । उसके बाद तुरंत दूसरा ऑफिस बॉय चाय के साथ फॅमिली आया । ऑफिस बॉय को भलीभांति मालूम था कि निर्मल बना बिस्कुट के चाय नहीं पीते । चाय की चुस्की लेकर निर्मल ने कहना आरंभ किया । मोहन तो ने सुनाया, नहीं कहकर निर्मल मोहन की ओर देखकर मुस्कुरा दिया । मुझे क्या पता कि तुम किस बारे में बात कर रही हूँ । मोहन नाॅन बंद करते हुए गा । मोहन निर्मल के चालीस मुस्कान को देख कर ही समझ गया था । अवश्य कोई विशेष बात है । अरे वही बात प्रकाश बोस और उसके सेकेट्री रंजना की और कौन से? आजकल तो गर्म गर्म खबर है । सबकी जुबान पर निर्मला चाहेगा खाली का प्लेट में रखते हुए गा निर्मल पहेलियां मत बचा हूँ । बहुत अधूरा काम पडा है संपूर्ण करने को । मोहन नहीं निर्मल से स्पष्ट बात की । मोहन चाहता था कि निर्मल जल्दी से किसके सौ लगे की एक बात है कि प्रकाश बोस और उसकी सैक्ट्री रंजना का सफर दस अफेयर चल रहा है और तुम अनजान बने बैठे हो । ऍम भी जानते हैं । निर्मल ऐसी बातें सबसे पहले ऑफिस बॉय को ही मालूम होती है तो बेकार की बात सुना रहा हूँ । मुझे इन बातों में किसी तरह की कोई रूचि नहीं । मोहन ने निर्मल से छुटकारा पाने के लिए कहा परंतु निर्मल के पास कोई काम करने के लिए था नहीं । उसे केवल समय व्यतीत करना है । इसलिए मोहन के सामने बातों का पुलिंदा खोलकर बैठ गया । मेरे बात बल्लेबाज लेवॅल ये प्रकाश बहुत सेक्रेटरी रंजना की सैलरी डबल करा देगा । इतनी नजदीक किया है बट रोज सुबह अपने कार में लेकर आता है और शाम को भी पहले उसके घर छोडना है और फिर उसके बाद अपने घर जाता रहे तो कुछ भी नहीं है । मोहन प्रकाश बोस रंजना को सीधे घर छोडने नहीं जाता है । पट्ठा पहले रंजना के साथ घूमता है, कभी वो रेस्टोरेंट में, कभी मॉल में और कभी सिनेमा में । अरे मोहन पूरे गुलछर्रे उडाते है वह दोनों मोहन तो कभी देखे तो हैरान हो जाएगा । दोनों मॉल में ऐसे हाथ में हाथ डालकर घूमते हैं जैसे मियां बीवी हो । निर्मल बातों का वर्णन ऐसा कर रहा था जैसे सब कुछ उसके सामने घटित हुआ हूँ । निर्मल मॉल में तो तुम भी घूमते हो । घर देर से पहुंचने होंगे । भाभी जी की नाराजगी तब कैसे रहते हूँ मैंने खुलासा तो करूँ मोहन ने चोट के लिए हम डरने वाला में नहीं मजा ले । उसकी की ऊंची आवाज में मेरे से कुछ बोले हम से दबकर रहती है । निर्मल कडक हो कर कहा निर्मल ये सोचता हूँ की नीति आवाज में भी भावी भी तुम्हारे खबर ले सकती है । मोहन ने ये सोच कर कहा कि शायद निर्मल के कलेजे में बात हुई की तरह जब जाए और निर्मल एक्सप्लेन परन्तु निर्मल जाने का नाम ही नहीं ले रहा है । यार तुम तो अपनी बात मुझ पर थोडा रहे, तुम करते होगे बीवी से हम नहीं डरते हैं । हम डरा कर रखते हैं । निर्मल अपनी हार मानने वाला नहीं । निर्मल ये तो कट हो सकते हैं कि हर पति अपनी पत्नी से डरता है परन्तु ये बात स्वीकार नहीं करता है । निर्मल टाॅस सुनाता हूँ । एक बार अदालत में तलाक का मुकदमा चल रहा था । वकील ने पति से पूछा अब जो मैं पूछूंगा उसका जवाब केवल हाँ या ना में देना है । पति ने भी सीना ठोककर का ठीक है । वकील ने पति से पूछा क्या तुम्हारी पत्नी ने तो मैं मारना पीटना बंद कर दिया है । अब तुम बताओ निर्माण इसका उत्तर क्या हो सकता है? मोहन से कटाक्ष किया परंतु निर्मल विचलित नहीं हुआ । भाई ये प्रश्न तुमने पूछा उत्तर भी तुम क्योंकि हम तो पत्ते नहीं निर्मल सच है आपके पति पत्नी एक जिसमें दो जन है, खट्टी मीठी बातें दोनों में होंगे । एक सिक्के के दो हिस्से हैं, कभी एक ऊपर तो कभी दूसरा एक दूसरे की बात मानना चकना नहीं, दूसरे की भावनाओं की कद्र करना है । दो बातें अपने मनमोहन और दो बातें दूसरों की बात है । यही सफल कर रास्ते का मूलमंत्र है । गुरु मोहन की जाए हो चरणस्पर्श करने को दिल करता है जय हो । निर्मल ने मोहनका चुप करवाते हो जाएगा । लेकिन फिर बाद प्रकाश बोस और उसकी फैक्ट्री रंजना क्या गए? कितने की शर्त लगाते हो? बिना शर्त लगाए बात करो तो बोल रहे हो कि मैं नहीं खेलता । मोहन की बात सुनकर निर्मल बोलने लगा । अंदर की खबर है । इस बार रंजना की सैलरी डबल और प्रमोशन एकदम शत प्रतिशत पक्की खबर है । निर्मल जब अंदर की खबर रखते हो तब ये भी पता होगा कि मेरी सैलरी कितनी बढेगी या फिर इस बार की इन्क्रिमेंटल । मोहन ने निर्मल से बात करवाने के मकसद से पूछा । यह नहीं मालूम । निर्मल्य साफ तोड तो बाद की क्यों तुम नीरस व्यक्ति हूँ । कभी किसी से मेलजोल नहीं रखते हैं । सारा दिन काम में डूबे रहते हो । कोई सिफारिश नहीं करेगा । हमारी सैलरी बढाने के लिए कुछ दूसरे का देखो लोग तुम्हारा भी देखेंगे । निर्मल तुम कहना चाहती हूँ की सर फॅमिली पडेगी । काम करने वालों की इस कंपनी में कोई कदर नहीं हूँ । ऐसे नहीं है मोहन बाबू बढेगी सब की सैलरी बढेगी । यह तो जगजाहिर है कि तुम जैसे दो चार आदमी जो काम के बुखार में सादा लगाते रहते हैं जिनके काम का बुखार कभी एक सौ दस डिग्री से काम होता ही नहीं । वास्तव में कंपनी उन के दम पर ही चलती है । पर हर मालिक कच्चे खान का होता है, उसे चापलूसों की जरूरत होती है । जब हो सके चिकनी चुपडी बातों से उसे खुशी होती है और दुनिया में सब को दिखाता है । मेरे पास विश्वासपात्रों की बहुत बडी पहुंच जाएगा पैसे ये उसका मात्र बहन होता है । मैंने मन ही मन सोचता हूँ कि निर्मल सत्य बोल रहे हैं कि सैलरी अधिक चापलूसों की बढती है और काम वालों की कम । निर्मल की बात सुनकर मोहन उसका अभिप्राय समझ गया की सैलरी इन्क्रीमेंट की लिस्ट बन चुकी है और उसकी सैलरी नाममात्र के ही बढेगी । निर्मल को अंदर की खबर सब मालूम है । मोहन ने खडी देखी छह बज रहे हैं । उसने अपना कंप्यूटर बंद किया । आप चलने के लिए ब्रीफकेस उठाया । अब तो ठीक है ना, तुम छह बजे जा रहे हैं । अच्छे बच्चे तो ऑफिस में देर तक बैठकर काम करते हैं । निर्मल ने मोहन को रोकने की कोशिश की निर्मल तुम्हारी बात तो सोलह आने ठीक है परंतु जो सैलरी इन्क्रीमेंट के बाद तुमने बताई है मेरी तो हालत खराब होने लगी है कि जो काम करता है उसकी सैलरी कम भर्ती है या फिर बढनी नहीं और चापलूसों की टनाटन इन्क्रीमेंट के साथ प्रमोशन भी होती है । अपवंचना कोई देख लो साली सारा दिन प्रकाश बहुत से नैन मटक्का करते कर दिया । थेले का काम नहीं करती उसके प्रमोशन के साथ डबल सैलरी निर्मल मैं रुक कर काम क्यों करूँ? कल से दूसरी नौकरी ढूंढते हैं जहाँ दो पैसे ज्यादा मिले वहाँ नेता का अगर अपने कैबिन से निकल पडा उसने निर्मल के हावभाव की भी कोई चिंता नहीं । उसे मालूम था कि निर्मल के पेट में हलचल आरंभ हो गई होगी और उसका संदेश हाई कमान तक अवश्य पहुंचेगा । मोहन के जाने के बाद निर्मल और मैनेजिंग डायरेक्टर के कैबिन में मिलने पहुंच गया । साहब जाने की तैयारी में थे । एक सैल्यूट मारकर धीरे से कहा सच एक एक बात करनी है तो बहुत जरूरी है । मुझे जल्दी ऍम ऍम सीट से उठते हो जाएगा सर जी मोहन की सैलरी बढा दीजिए । वो जाने की सोच रहा हूँ ऍम अल ऍम मोहन चला गया तो काम कौन करेगा? हमारे बाॅधने फिर बैठ गए । कुछ सोच रहे थे निर्मल तुम ठीक कह रहा हूँ मुझे सच में बताओ । अगर बात सच्ची और क्या तो सैलरी बढा दूंगा । उसका जाना भी प्रकाश नहीं कर सकता । मैं तो बहुत सारे काम करवाने हैं । उसे फॅार बात करते हुए बहुत गंभीर थे सर जी एकदम सच्ची खबर है मैं झूठ बोलना और वो भी आपसे वो बात अलग है कि मैं काम नहीं करता परंतु कंपनी की चिंता तो करनी है अगर मोहन चला गया तक कंपनी एक साल पीछे चली जाएगी । मेरी अभी अभी तो उससे बात हुई है । तभी तो भगा भगा आपके पास आया हूँ । ऍसे ज्यादा चिंतित तो निर्मल लग रहा था । उसे मालूम था कि मोहन की इन्क्रीमेंट नहीं हो रही है तभी बहाने से मोहन के मन को टटोलकर उसके छोले खा गया था । ठीक ऍम इसका में देर नहीं करनी है, उसकी ठीक ठाक चल रही बढानी चाहिए । मोहन काम का आदमी है जैसा निठल्ला नहीं निर्मल फटाफट फाइल ज्यादा है और बहन की सैलरी बढा दी जाती है । मोहन की सैलरी पडने के बाद निर्मल कान को जाने लगता है साहब निर्मल को कम हो जाते थे । उसके मन की बात है जान जाते हैं कुछ कहना चाहते हो निर्मल सब मेरा भी थोडा सा ख्याल रखो अपनी के बारे में हमेशा चिंतित रहता हूँ । तभी भागता हुआ आपके द्वारा निर्मल तुम्हारी इन्क्रीमेंट तो बिना कहे कर दिया तो मैं चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं । मुझे थोडी और कर दीजिए ना आपने मोहन की इन्क्रीमेंट ज्यादा कर दी । मेरे भी कम से कम उसके बराबर तो कर दीजिए । प्लीज निर्मल खुशामद करने लगा । ऍम अल तो मानेगा नहीं । मेरे हाथों अत्याचार करवा कदम लेगा । चल तेरी फॅमिली थोडी और पढाते थे तो भी क्या याद रखेगा? निर्मल आश्वस्त होकर ऍसे निकला । बाहर आते ही उसने मोहन को फोन लगाया । मोहन बाबो आप चिंता मत करना । मैंने पता लगा लिया है आपकी सैलरी भी अच्छी बडने वाली है । फॅार मिल जाएगा । अब आपको कहीं भटकने की जरूरत नहीं है । नौकरी बदलने की चिंता छोडी है । अच्छी शुक्रिया । निर्मल जी आपके मुँह में घी शक्कर कल ऑफिस में मिलकर बात करते हैं । गुड्डू ऍम मोहन समझ गया । उसके जाने के बाद ही निर्मल ने सैलरी की बात मैनेजिंग डायरेक्टर से की होगी । रात को खाना खाने के पश्चात मोहन फ्लाइट के नीचे उतारकर सोसाइटी के अंदर टहलने लगा । पैसे तो मोहन खाना खाने के बाद टेलीविजन ही देखता था । कुछ देर टीवी देख कर चलती सोने वाले कहानियों में मोहन शामिल था । सारा दिन काम करने के बाद शरीर को आराम भी चाहिए अगले दिन काम करने के लिए एक तो आज मोहन ऑफिस से दाल दिया गया था और ऊपर से ऑफिस में चापलूसों की राजनीति से परेशान हो गया था । कुछ मन में उदास और पचास हो रहा था । उसने निर्मल को नौकरी बदलने की धमकी दी थी । फिर भी उसे इस बात का पूरा अहसास था कि हर ऑफिस का यही हाल है । कहाँ जाए हर जगह बीस से पच्चीस प्रतिशत लोग काम करते हैं जिनकी बदौलत कंपनी क्या देश भी चलता है और बाकी चापलूसों आतंकवाद इन्हीं की बदौलत मिलती है । टहलते हुए मोहन बेंच पर बैठकर बेंच के समीप सोसाइटी के कुछ पुरुष गपशप कर रहे थे । पहले तो मैं सुना तीस नंबर वालों की लडकी लेकिन में रह रही है । दूसरा कहाँ रह रहे हैं पहला गुडगांव में अपने यार के साथ मैं ऑफिस में काम करती है । सुना आपने बहुत के साथ ऍफ कर लिया । मोटी तनखाह मोटा बहुत है वहाँ ऍम तीसरा और सर कडाई में सभास् पढे दूसरा तीसरे से हम ठीक कह रहे हूँ आज तो रन लेकिन का क्या भरोसा कब अलग हो जाए ये तो आज एक कल तू जा वाला हिसाब लगता है । चौदह । तभी मैं सोचता हूँ कि इतने कम समय में तीस नंबर वाले के पास मोटी रकम आई । कहाँ से पिछले साल तक ॅ होते थे । अब एक साल में घर की हर चीज नहीं आ गयी । चमचमाती कार आ गई । सौ बनाया गया फ्रेश नहीं आ गया । नया ऐसी मेरी बात को गांठ मान लो । सब लेवल का कमाल है । बच्चे तो हमारे भी नौकरी करते हैं । जैसे पहले रहते थे वैसे आज भी रह रहे हैं । पहला ऍम सोच ही नहीं सकता कि आजकल की पीढी इतनी नीचे जा सकती है कि लेकिन मैं खुलेआम रहते हैं । किसी को स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होती कि लेकिन में रह रहे हैं । दूसरा अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया कि लेकिन में रह सकते हैं । बच्चे हुए तो पूरा हक मिलेगा । मोहन उनकी बातें सुनता रहा और मुस्कुराता रहा हूँ लेकिन उनकी बातों में कुछ नहीं बोला । आज कल हर ऑफिस में कही चक्कर और किस्से सुनने का मिल रहे हैं । हर जगह सिर्फ यही बात की पलंग ढाका पलान से बढा हुआ है । सब चटखारे लेकर नमक मिर्च लगाकर ठाणे के बीच यही चर्चा करते हैं । ऑफिस में निर्मल भी यही बात कर रहा है कि प्रकाश पोस्ट का उसके सेकेट्री रंजना के साथ चक्कर है । यहाँ भी यही हाल है । तीस नंबर वाली लडकी का उसके बॉस के साथ टांका बढा हुआ है । मालूम नहीं इस दुनिया में नैतिकता नाम के चिडिया जीवित भी है या मर चुकी है । सबको कम समय में तुरंत सफलता चाहिए । इंस्टाॅल हर विलासिता की वस्तु चाहिए । अपनी और तो कोई देखी नहीं रहा । जिसको देखो दूसरों की बात करके मजे ले रहा है । गपशप में अपना समय व्यतीत कर रहे हैं । दूसरों के बनियान, अंडरवेयर के नाम और रंग को हर कोई जाना जाना जानना पाए । गपशप की दुकान तो खुली जाती है जिसको देखो अपना अधिकांश समय गपशप में व्यतीत कर रहा है । लोगों की गपशप की बातें सुनकर उसका मन और अधिक बच्चा हो गया तो घर आकर बिस्तर पर लेट गया और नींद की गिरफ्तारी आ गया । अगले दिन ऑफिस में निर्मल मोहन के कैबिन में दनदनाता आया और कुर्सी पर बैठे हुए कहने लगा ऍम मीठा करवाओ । अब तो फॅमिली बढ रही है । मैं आपको होश होंगे । निर्मल रातोरात कायाकल्प कैसे हो गए? कल रात तक तो ऐसा कुछ नहीं था । डाॅट के लिए ग्रुप कंपनी का नमक खाते हैं और कंपनी के हित की सोचते हैं । तुम्हारे जाने के बाद मेरा दिल बहुत उदास होगा की अगर मोहन जी की सैलरी नहीं बडी तो कंपनी अपना होना हर ही रखो । देगी कृतम् डर नहीं रहा तो घर चले गए परन्तु मैं समझ गया और तुरंत मैनेजिंग डायरेक्टर से मिलकर तुम्हारे तगडी वाली सैलरी इन्क्रीमेंट की सिफारिश की । बस इन्क्रीमेंट लाइटर आता ही होगा । आज निर्मल ने मोहन के इंटरकॉम से ऑफिस पहुँच जाए और बिस्कुट लाने को कहा । निर्मल जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया । आप तो जानते ही हैं कि हर कोई तन्खा के लिए काम करता है । अच्छी तन्खा मिले । आजकल की महंगाई में इतने कम सैलरी में घर चलाना बहुत मुश्किल है । मोहन ने अपना कंप्यूटर स्टार्ट करते हुए गा । इसीलिए तो सिर्फ अपने दोस्त मोहन के खाते कल रात बाद मैनेजिंग डायरेक्टर से करनी पडेगी । कहीं आप हमसे नाराज होकर कंपनी छोड दें । अमित अपने साथियों के बारे में सोचने का पूरा हक है । कल शाम निर्मल की बातों में लगा रहा और आज सुबह घर निर्मल बातों में लगा हुआ है जिस कारण मोहन के रूप से काम करने की नहीं हुई । थोडी देर बाद निर्मल चला गया हूँ । लेकिन मोहन का मन उदास पर मैं चाहता हूँ । दोपहर बाद उसे इन्क्रीमेंट राइटर मिल गया । उसकी सैलरी उसके मन मुताबिक नहीं । बडी लेकिन फिर भी ठीक ठाक बढोत्तरी हो गई । कुछ प्रसन्नता उसके चेहरे पर आई और निर्मल का कैबिन में घर से आना हुआ । गुरु मीठा करवाओ ऐसे नहीं चलेगा । निर्मल मैं तो रात कंटेनर भी करवाने को तैयार हूँ । मिठाई तो उनके लाॅट तुम्हारी हुई है । क्यों नहीं अभी मंगाता हूँ । अगर निर्मल मोहन के कैरॅल निर्मल को जाता देख मोहन समझ गया कि कंजूस निर्मल से छुटकारा पाया हो तो खर्चे की बात करता हूँ । निर्मल के जाने के बाद मोहन काम में व्यस्त हो गया । आदत के अनुसार मोहन को ऑफिस की राजनीति गपशप में कोई रूचि नहीं थी । पूर्ति बातें कानों में पड जाती है, लेकिन वो उन बातों को तुरंत निकाल देता हूँ । कभी सोचा नहीं और कभी विचार नहीं किया । मोहन ने सैलरी इन्क्रीमेंट में पक्षपात देख समय पर ऑफिस से जाना आरंभ कर दिया । छह साढे छह बजे तक ऑफिस से जाने लगा और रात के खाने के बाद सोसाइटी के पार्क में कुछ देर पहले जाता है । समय से घर पहुंचने के कारण पत्नी और बच्चों के साथ अधिक समय बिताने लगा । आदत के अनुसार सुबह समय से पहले ऑफिस पहुंचकर काम में व्यस्त हो जाता है । किसी से कोई कपडे नहीं । ऑफिस में सिर्फ काम की बात निर्मल के पास करने के लिए कुछ खास काम था नहीं । कंपनी ने उसे एक तरह से जासूस का पद दे रखा था कि सब पर नजर रखें और रिपोर्ट मैनेजिंग डायरेक्टर को देखते हैं । कुछ दिन बाद निर्मल मोहन के कैबिन में मिलने गया ऍसे कोई नाराज किया गया मिल नहीं छोड दिया पानी में रहकर । मगर से बाहर तो बात तो बाबा निर्मल बाबू आज अब कैसी बातें कर रहे हो निर्मल को देखकर मोहन ने सिर्फ मन ही मन तो गाली निकालना है अच्छा भी एक बार हुई कि सच कहूँ ऍम मोहन है होठों पर मुस्कान के साथ स्वागत किया । बैठे निर्मल बाबू मोहल्ले इंटरकॉम पर ऑफिस बॉय को जब चाय और बिस्किट लाने को कहा निर्मल को किसी औपचारिकता की कोई आवश्यकता नहीं । नहीं मत । मोहन के कहने से पहले कुर्सी पर अगर आज हो चुका था बहुत तो बताया ऍम नहीं आ रही है, वैसे ही रह जाता कौन से विभाग में कार्यरत है मान्य निर्मल से पूछ लूँ दुनिया में रहते हो मोहन बाबू ऍफ इसमें हर जुबान पर रंजीता के चर्चे हैं और आपको मालूम ही नहीं कुछ बताओ तो पता चलेगी क्या बात हुई? अंजता कौनसी है पहचान नहीं पा रहा हूँ । उनको मालूम था कि आप गपशप होने वाली है मार्केटिंग में गंजा की वो मोटी सी फॅमिली जो तुम्हारे पास तो अक्सर काम के लिए आती रहती है । अच्छा निर्मल बाबू । अब समझ में आया वो रंजीता कौनसे वाली पर हुआ क्या? मुझे नहीं मालूम । उन्होंने निर्मल के आंखों में झांकते हुए पूछा । आज सुबह उसके घर वाले आए थे और पूछ ताछ कर रहे थे कि रंजीता का है तो दिन से तो ऑफिस भी नहीं आ रही । उसने छुट्टी के लिए भी कोई आवेदन नहीं किया और ना ही कोई फोन किया नहीं । कोई लडकी गुरु मोहन उसका फोन भी बन चल रहा है । घर पर से तो दस दिनों से गाया गया घर बार कहा कि टूर पर है । दो दिनों से ऑफिस भी नहीं आ रही । अब उसके टाॅपर हंगामा कर दिया । सारा ऑफिस ऍम घर वालों ने फोन करके पुलिस को भी बुला लिया और तुम यहाँ ऍम पर चलकर तमाशा देखते हैं । निर्मल ऍम इसमें घबराने की क्या जरूरत है? बता दो कहाँ टूर पर गए है मोहन बाबू दूर पर भेजा हो तो बताएं भाग गई घर से चिडिया फोर हो गयी । उसका कोई अता पता नहीं है तो मैं कैसे पता कि वह घर से भाग गई । मोहन बाबू और चिडिया के पर पहचान लेते हैं । बाल धूप में सफेद नहीं किए तो तुम्हारे तो खा लें । फॅमिली कलर का कमाल है समझता लेकिन में रह रही अपने यहाँ के साथ अब ऑफिस में नहीं आएगी । चिडिया उड गई । घरवाले शादी के लिए दबाव बना रहे और मुझे छुपा कर नहीं रख सकते हो । ऑफिस में सबको पता था कि उसका एक लडके के साथ चक्कर था । भाई खूबसूरत थी । सारे ऑफिस के जवान उसके आगे पीछे घूमते थे कि शायद किसी का कोई चक्कर चल जाएगा परन्तु उसका चक्कर तो कहीं हमारी था । थोडी मोटी थी तो क्या हुआ सब अॅान थी । निर्मल तो पूरे खबर हो यहाँ के कर रहा हूँ । किसी न्यूज चैनल में भर्ती हो जाऊँ । फॅमिली ये अदा मार गयी कहकर निर्मल चलने के लिए उठा तो मोहन ने पूछ लिया हूँ निर्मल तुम प्रकाश बोस और उसकी सैकेट्री रंजना का भी कुछ बता रहे थे । कुछ दिन पहले छोड दिया वो पुरानी बात हो गए हमने क्या काम है उनका ताजा खबर रंजीता कहेगा निर्मल चला गया और मोहन सोचने लगा लोगों की आदत गपशप क्या दो चार दिन मसालेदार चटपटी बातों में गुजार देते हैं । उन्हें किसी से ना तो कोई हमदर्दी है और न कोई । अब सौं समय बिताने के लिए कब शब्द किसी की जिंदगी चली जाये पर अंतर लोगों की काम सब समाप्त नहीं होती । किसी से कोई सहानुभूति नहीं होती । चटपटी बातों का बाजार गर्म रखते हैं । कब शकपाल हैं हर रात की तरह? आज भी खाना खाने के बाद मोहन पत्नी के साथ सोसाइटी के बारे में टहल रहे थे । वहाँ पांच आदमियों का एक ठंड बातों में लगा था । मोहन टहल रहा था । उसके कानों में बात सुनाई दी । एक व्यक्ति कह रहा था ॅ नंबर वालों का लडका एक लडकी को कर ले आया । बिना शादी के दोनों रह रहे हैं । दूसरा मैंने तो सुना है । दोपहर में आया और माँ बाप से कहा कि ये मेरे साथ रहेगी । शादी नहीं करेंगे लेकिन में रहेंगे । तीसरा नंबर वाला वही है जिसमें तीस नंबर वाले की लडकी की खबर सुनाई थी । खुद के घर लडका खुलेआम लडकी लिया । चौथा तब तो मसालेदार चटपटी बातें सुनाता था । अब तो कुछ सुन्नी पडेगी पांचवां तब ये बता आज नीचे नहीं उतरा । पांचों हंसने लगे और मोहन मंद मंद मुस्कान के साथ मन ही मन कहने लगा । गरम गरम चटखारेदार बातों में लोग अपना समय बिता देते हैं । ये वेल्ली गपशप नहीं तो और क्या है? अपने बयान को कोई नहीं देखता नजर दूसरों के कच्छे बनियान के नाम और अंगों पर रखते हैं ।

नमस्ते जी 04

नमस्ते जी नमस्ते जी इतना सुनते सीढियों पर अपने कदम रखते रखते सोहन रुक गया । स्वर्ण पीछे मुडकर देखा एक लडका है जिसकी उम्र लगभग अठारह उन्नीस वर्ष जिसके होठों पर हल्की सी मुस्कान थी उसने ही सोहन से नमस्ते की थी तो हम लोग कर उस लडके की ओर गया और उसने भी नमस्ते का जवाब नमस्ते से क्या समझते । कहने के पश्चात सोहन तब कर उस लडके को बहुत ध्यान से देखने लगा । तुरंत उसको पहचान पाने में असमर्थता हूँ । मैंने आपको पहचाना नहीं । सोहन अपना चश्मा ठीक करते हुए उस लडके होगा मेरी ये स्टेशनरी की दुकान है । आजी खोली है । आज दुकान का पहला दिन है आपको सीढियों से ऊपर जाता देखकर समझा कि आपकी दुकान ऊपर प्रथम मंजिल पर है । यह भी एक संयोग की आपने दुकान खोली और उसका पहला दिन है तथा मंजिल में आपकी दुकान के ऊपर जो कमरा है उसमें मैंने ऑफिस बनाया है और मेरे ऑफिस का भी आज पहला दिन है । अपना पंडित जी की प्रतीक्षा कर रहा हूँ । पूजा करने के बाद ऑफिस का कामकाज शुरू कर हुआ तब भी कह रहे हैं कि तुम्हारी दुकान का आज पहला दिन तो मैं पूजा करवाई तो हम ने उस लडके से पूछा । सुबह आठ बजे पूजा हो गयी । पंडित जी ने सुबह आठ बजे का शुभ मुहूर्त निकाला था । हमारे बडे तो बहुत व्यस्त रहते हैं । बारह बजे का पूजा का समय दिया आते होंगे । वैसे हम बात कर रहे हैं तब तो हम एक दूसरे को अपना परिचय तो दिया ही नहीं । चलो पहले मैं अपना परिचय देता हूँ । मेरा नाम सोहन है । मैं आपकी दुकान के ठीक ऊपर वाले कमरे में ऑफिस खोल रहा हूँ । सोजन्य का छोटा सा परिचय दिया । मेरा नाम प्रीत अरोडा है । मैंने स्टेशनरी की दुकान खोली । आपको स्टेशनरी की जरूरत हो तो सेवा का अवसर दीजिएगा । उस लडके ने अपना परिचय दिया । इतने में सोहन के पंडित जी भी आ गए और सोहन ऑफिस की पूजा में व्यस्त हो गया । पूजा के बाद तो हम नीचे उतरे और अपने ऑफिस के लिए कुछ स्टेशनरी खरीदी । सर जी आपने भी दुकान के पहले एक रहा गया । ऑफिस भी दुकान के ऊपर है । आपका मेरे जीवन में सदा एक विशेष स्थान रहेगा । प्रीत ने कहा क्या उम्र है छोटे नजर आ रहा हूँ ये अठारह साल अठारह साल कितना पडे हूँ । सोहजप्रीत की उम्र देकर कुछ अजीब सा लगा कि वह उम्र में पढाई छोडकर दुकान चला रहा है । पार्टी में नंबर कम आये अब क्या करूँ, बस पढने में दिल नहीं लगता । अब इतने कम नंबरों से किसी भी कॉलेज में दाखिला नहीं मिलेगा । इसलिए दुकान खोल दिया । पापा की सदर बाजार में दुकान है वो भी स्टेशनरी का काम करते हैं । यहाँ मेरे लिए दुकान खोली है तो इतने सीधे सादे शब्दों में अपनी व्यथा व्यक्त की है । लगभग दस मिनट तक प्रीत किसन बातचीत करने के पश्चात सोहन अपने ऑफिस में आकर काम करने लगा । सोहन का ऑफिस एक कमर्शियल मार्किट में हैं । मार्केट में नीचे दुकानें और ऊपर की मंजिल में ऑफिसर । शाम के समय फुर्सत के पल में सोहन सोचने लगा कि प्रीत के परिवार ने उचित कदम उठाया है । पढाई में डर लगता नहीं तो दुकान खोल दी । उसने खुद पढाई करके कौन से तीर चला दी है । पढाई की डिग्रियां ली है पर्दा साल विभिन्न कंपनियों में नौकरी की सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष किया जो उसकी किस्मत में नहीं थे । सरकारी नौकरी भी किस्मत वालों को ही मिलती है । जिन्होंने पिछले जन्म में मोतीराम किये होंगे । सोहन अक्सर सोचता था कि शायद उसने पिछले जन्म में बिहारी के कटोरे से पैसे चुराए होंगे । तभी सरकारी नौकरी नहीं मिली और निजी कंपनियों में नौकरी करनी पडी । निजी कंपनी चाहे छोटी हो या बडी, हर जगह एक जैसे हाल होते हैं । कम क्षमता से अधिक लिया जाता है । सारा दिन धोबी के कहे की तरह बोझ उठाना पडता है और वेतन नाममात्र का मिलता है । छोटी कंपनियों में वार्षिक वेतन वृद्धि का कोई मापदंड होता ही नहीं । जब वेतन वृद्धि की बात करो तो कोई करता नहीं । उल्टा सुना देते हैं कि तुम काम करते कितना हूँ । जो वेतन मिल रहा है वो भी अधिक काम करना है तो इसी वेतन में कर निजी कंपनियों में तो काम खूब करवाते हैं । सुबह समय से आओ परंतु शाम को छोडने का कोई समय नहीं होता । देर तक काम करना पडता है, कोई छुट्टी भी नहीं होती । थकहारकर हर दूसरे साल अधिक वेतन के लिए सोहन नौकरी बदलता गया तो हम सोचते सोचते मुस्करा दिया । जब जब दूसरी जगह नौकरी मिलने पर इस्तीफा दिया तब कंपनी कहती नौकरी के छोड रहूँ, वेतन बढा देते हैं । यहीं काम करो तो मैं कोई परेशानी हो तब हम से बोलो लाना है मालिकों की ऐसी छोटी सोच शराफत से वेतन बढाते नहीं रुकने का क्या फायदा । नई जगह नया अनुभव और अधिक वेतन यही सोचकर सोहने दस वर्षों में पांच नौकरियाँ बदली । अब दस साल बाद अपना खुद का व्यापार शुरू किया कि अपना हाथ जगन्नाथ खुद के लिए काम करेंगे । किसी की गुलामी नहीं करनी पडेगी । उसके कई मित्र और साथ ही व्यापार करते हुए उस से कहीं आगे निकल गए । पता तो उसके पास ना तो पूंजी थी और ना हिम्मत की अपना कोई व्यापार कर सकें । दस वर्ष बाद भी हर रोज की मेहनत के बावजूद जब तरक्की नहीं मिले तब खुद का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया । सोजन्य किराये के छोटे से कमरे में ठेकेदारी का काम आरंभ किया । उसे प्रीत का निर्णय उचित लगा । जब पडने में दिल नहीं लगता और नंबर भी नहीं है । इधर उधर बेकार मटर गस्ती करने से अच्छा है की दुकान चलाई जाए । दस वर्ष बाद बहुत आगे जायेगा । प्रीत सोहन और प्रीत हर रोज मिल गए । ठेकेदारी में उसे कई बार बाहर जाना पडता है तो हम सारे काम खुद करता था । शुरू में उसने कोई सहायक नहीं रखा । जब भी ऑफिस से बाहर जाना होता तो ऑफिस बंद करके चाबी प्रीत को दे देता । इस बहाने कई बार मिलना होता है । प्रीत मिलनसार और हंसमुख नवयुवक था । हर बार मिलने पर नमस्ते कहना । सोहन को उसका नमस्ते का अंदाज अच्छा लगता है । प्रीत सोहन नहीं नहीं, सभी ग्राहकों से नमस्ते करता हूँ । दिन बीते गए प्रीत की दुकान चलने के लिए और सोहन का धंधा भी चल पडा । प्रीत स्टेशनरी के साथ स्कूल कॉलेज की पुस्तकें भी रखने लगा । ठेकेदारी में जो सामान सोहन को जरूरत पडती, प्रीत के पिता सदर बाजार से ला देते । दो तीन वर्ष बाद प्रीत का छोटा भाई का गन भी दुकान पर क्रीज का खास बताने लगा । सोजन्य भी चार सहायक रख लिए । सोहजप्रीत को महीने में खरीदे सामान का भुगतान एकमुश्त चैक से करता है । क्रिस कभी अग्रिम भुगतान के लिए नहीं कहा । हर महीने की आखिरी तारीख में बिल बनाकर सोहन को दे देता । सोहन पाल चेक कर के तीन चार दिन बाद बिल का भुगतान कर देता है । सोहन का व्यापार उन्नति की चोटियों पर चलता गया तो हमने बडा ऑफिस ले लिया । परंतु प्रीत की दुकान के ऊपर वाले ऑफिस को छोडा नहीं । सोहन ऑफिस को भाग्यशाली मानता था, जहाँ से आपने छोटी से पूंजी से ठेकेदारी का व्यापार आरंभ किया था । दस वर्ष बाद सोहन अब एक बहुत पडे ऑफिस में कंस्ट्रक्शन कंपनी का मालिक बन गया है । प्रीत की दुकान भी ठीक ठाक चल रही है । जब भी प्रीत सोहन के ऑफिस चैट लेने आता तो नमस्ते से दोनों की बात शुरू होती है और कम से कम एक घंटे तक चलती रहती है । सोहन और प्रीत की आर्थिक स्थिति में दिन रात का अंतर हो गया । सोहन धनि व्यक्तियों की श्रेणी में शुमार हो गया । प्रीत अभी भी मध्यवर्गीय श्रेणी से बाहर नहीं निकल सका । सच्ची मित्रता में धान कभी भी पाता उत्पन्न नहीं करता । सोहन और प्रीत की मित्रता अधिक गाडी होती गई । हालांकि सोहना और प्रीत के उम्र में पंद्रह वर्षों का अंतर है । फिर भी जब मिलते हैं हम उम्र की तरह बात करते हैं । ऑफिस में सभी को मालूम है । प्रिया महीने में सिर्फ एक बार पेमेंट लेने ऑफिस आता है और फिर सोहन के साथ जमकर मैं कल लगती है । उस की महफिल में कोई भी बाधा डालने की हिम्मत नहीं करता । समय पंख लगाकर उडता चला जाता है । सोहन व्यापार में अधिक व्यस्त रहने लगा । कई बार प्रीत चक लेने ऑफिस में आता तो आपस में मुलाकात नहीं हो पाती है । एक दिन सोहन दोपहर के डेढ बजे ऑफिस से निकल रहा था । उस समय प्रीत ऑफिस क्रिकेट पर सोहन से मिला आपस में नमस्ते हुई । नमस्ते जी नमस्ते प्रीत, मैं जरा जल्दी में हूँ । ऍसे ले लेना । आप से कुछ बात करनी है । जब बनने में तो अभी टाइम है । अभी चेक नहीं बना होगा । मैं अकाउंटेंट को फोन पर कहते हैं । शाम को आकर चेक साइन कर दूंगा । शाम को आना । फिर फुर्सत में बात करते हैं । स्वाॅट चला गया । अफ्रीका कोई चेक नहीं बनना था । वो भी वापस लौट गया तो अन्य कार में बैठे अकाउंटेंट को प्रीत काॅपर आने को कह दिया । शाम को सोहन ऑफिस में देर से आया प्रीत इंतजार कर रहा है । प्रीत को देख कर तो हमने अकाउंटेंट से प्रीत का चेक बनाकर लाने को कहा । अकाउंटेंट खाली हाथ से उनके कैबिन में आया । ऍम प्रीत केचप में देरी क्योंकि सर जी प्रीत ने इस बार का बिल की नहीं दिया । अच्छा तुम जाओ सोने अकाउंटेंट को जाने के लिए कहा । फिर प्रीत से कहा फिल्में देरी मत करो । कल सुबह मिलते तो मैं सारा दिन ऑफिस में रहूंगा । उसी समय साइन कर दूंगा । मैं आज आपसे निजी बात करने आया हूँ । बिल बनाने का समय नहीं हुआ है । बिल तो महीने की आखिरी तारीख में बनाता हूँ । आप से कुछ मदद चाहता हूँ । प्रीत ने अपने सर को झुकाते हुए बहुत धीमी आवाज में कुछ घबराहट के सफर में सोहन से कहा कहो तो क्या कहना है दिलखोलकर अभी तो मेरे पास समय समय दरअसल सुबह एक आवश्यक मीटिंग में जाना था, जिस कारण मैं तुम से बात नहीं कर सकता । अब बात करते हैं यहाँ से सीधे ही जाना है । तुम्हारी भाभी मायके गई । मुझे कोई जल्दी भी नहीं । लॉटरी चुप रहा । कुछ नहीं बोला सर चुकाकर अपने हाथों के नाखून कुरेदने लगा । प्रीत की चुप्पी पर सोहन हैरान हो गया । आज तक ऐसा नहीं हुआ कि दोनों की महफिल में प्रीत चुप रहा हूँ । चुपके मुख्य था क्या बात है? जो कहना है कह हूँ । दोस्तों से कोई पता नहीं होता है । प्रीत चुप रहा । प्रीत ने कुछ कहने की कोशिश की, पर उसका गला सूखता जा रहा था । उसके पहले से आवाज ही नहीं निकल रही थी । कुछ कहने के स्थान पर पूर्व पडा प्रीत को रोता हुआ देख सोहन भी भावुक हो गया । सो हमने प्रीत को पानी का गिलास दिया । पानी पीकर पीटने धीरे से कहा कुछ मदद चाहिए तो क्या बात है । दिल खोलकर कहूँ मित्र अच्छा तो अन्य प्रीत के कंधे पर हाथ रखा । अच्छा पिताजी को कैंसर हो गया । ऑपरेशन और कैंसर के इलाज के लिए पैसों का इंतजाम पूरा नहीं हो रहा है । कुछ फॅसने देते तो आपका आभारी रहूंगा । हर महीने की फिल्में एडजस्ट करवा लूंगा । प्रीत में रोते रोते सो हमको अपना दुखडा सुनाया । प्रीत तुमने मुझे इतनी बडी बात छिपाई । दो सौ पडता अच्छा नहीं होता । आज तक हमने हर तेजी बात को भी साझा किया है । सोजन्य प्रीत पर हाल किसी नाराजगी जाहिर की । पिताजी की तबीयत तीन महीनों से अच्छी नहीं चल रही है । अचानक से पिछले सप्ताह बहुत बिगड गई । अस्पताल में दाखिल करवाया और कल ही मालूम हुआ कि कैंसर की थर्ड स्टेज तुरंत ऑपरेशन के लिए कहा है । डॉक्टर ने पिताजी के इलाज में काफी रकम खर्च हो चुकी है । तुरंत रकम इकट्ठा करने में दिक्कत आ रही है । ऑपरेशन के बाद ऍम एक साल तक चलेंगे । हमारे पास अभी इतनी बडी रकम नहीं कुछ एडवांस मिल जाए । मैं फिल्मों में जिस करवा दूँगा । प्रीत की बात सुनकर तो हमने कुछ सोचा और प्रीत का वही तो कैंसर के इलाज में कोई कसर नहीं छोडना । इलाज बढिया और अच्छा करवाना तो रुपये पैसों की चिंता मत करना । मुझे मालूम है कि कैंसर का इलाज बहुत महंगा था तो मेरे दोस्त हो तुम्हारी मदद करना मेरा फर्स्ट तुम्हारे पिता मेरे पिता सामान है कहकर सोहन से अलमारी से तीन लाख रुपए निकालकर प्रीत को दिया है । अभी इतना रख लो, ऑपरेशन तुरंत करवा लूँ और रकम की जरूरत हो तो फॅमिली मैं खुद देना होगा । ये रकम वापस लेने की मत सोचना । जब तक इलाज पूरा सफल नहीं हो जाता है और पिताजी स्वस्थ नहीं हो जाते हैं तो मैं कुछ भी नहीं हो चुके । हो चुके तो सिर्फ पिताजी के इलाज और उनके स्वास्थ्य के बारे में । ट्वीट के आंखों में आंसू थे । आपके हाथों से उसने तीन लाख रुपए पकडे । सोहन तीन लाख रुपये देकर भूल गया कि कभी उसने प्रीत को दिए थे । उसे वापस भी लेने प्रीत सोहन के ऑफिस में सामान देता रहा और बिल के भुगतान में तीन लाख रुपए एडजस्ट करवाने के लिए चेक लेने सोलंकी ऑफिस नहीं गया । परंतु सोहने ऑफिस में आदेश दिया हुआ था कि प्रीत के बिल का भुगतान समय कर कर दिया जाए । जब प्रीत चैट लेने नहीं आया तो अकाउंटेंट खुद उसके दुकान पर जाकर चेक देता । किसी अच्छी का आदेश सोहजप्रीत से उसके पिता के इलाज और स्वास्थ्य के विषय में नियमित बात करता रहे था । एक साल बीत गया सोहन के पिता का कैंसर का इलाज पूरन हो गया । इलाज के बाद एक दिन प्रीत अपने पिता के साथ सो हमसे मिलने ऑफिस आया । नमस्ते पिताजी भी मिलने हैं । आज प्रीत के आवाज में आत्मसम्मान था । एक वर्ष पहले प्रीत सोहन से बात कहने के लिए चल रहा था । पर आज फिर पुरानी को तेजना और स्पूर्ति के साथ चेहरे में मुस्कान विपरीत सोहन के साथ बैठा था । पिताजी का है तो हनीप्रीत से पूछा जी, बाहर बैठे हैं भारतीय बिठा रखा है अंदर लाॅन को । मैं उनको लाने चलता हूँ । सोहन बाहर जाकर प्रीत के पिताजी को कैबिन में अपने साथ लेकर आते हैं । नाम से बाबू जी आपका अपना क्या? मैंने मुझे अच्छा नहीं लगा क्या बाहर बैठकर नमस्ते बैठा हूँ । ये तो तुम्हारा भडक बनाने की जब मुसीबत में देवता बनकर है । प्रीत के पिताजी ने कुर्सी पर बैठते हुए हाथ जोडकर विनम्रता से कहा कैसी बात करते हो आप? मुझे । मेरे और प्रीत में कोई अंतर नहीं है तो उस भाई से भी बढकर होते हैं । बातों के बीच में प्रीत के पिताजी ने अपना बैग खुला और एक ले पापा सोहन के आगे । क्या ये पिता आपके जमाना मैं से और अधिक संभाल कर नहीं रख सकता हूँ तो हम ने लिफाफा खोला । उसमें तीन लाख रुपये थे । ये कहते रहे पिताजी बेटा जी प्रीत ने मेरे इलाज के लिए तीन लाख रुपए आपसे एडवांस मांगे थे । आपने फिल्मों में एचएसपी नहीं किया । उस समय हमारे पास मेरे काम नहीं आकस्मात । इलाज का खर्च उठाने में हम समझ सकते हैं । तभी प्रीत ने आपसे सहायता नहीं आपकी तीन लाख रुपए नहीं, मुझे नई जिंदगी दी है । यदि आप उस समय मदद नहीं करते तो शायद मैं यहाँ नहीं होता । कैंसर के इलाज में आठ लाख रुपए खर्च हो गया । आज मैं स्वस्थ लेकिन कमजोरी की वजह से सदर बाजार हर रोज आना जाना मुश्किल है । वहाँ की दुकान बेचती है । अब मैं प्रीत का हाथ उसके दुकान में बताऊंगा तो भारत का तो मैं कभी नहीं भूल सकता । प्रीत के पिताजी की आॅल भाई मुझे इसमें उपकार नहीं । एक बेटे ने पिता के प्रति सिर्फ अपना फर्ज निभाया है । मेरे और प्रीत में कोई अंतर नहीं । जैसे प्रीत आपका बेटा, वैसे मैं अभी आपका बेटा बेटा तुम जीवन में बहुत तरक्की करूँ । मेरी केश्वर से कही हुआ है । तुमने समय पर हमारी मदद की । मैं और मेरा परिवार जीवन भर आपकी आवाज ही रहेंगे । फिर कभी यदि जरूरत पडेगी तब मैं संकोच तुम्हारे पास आएंगे । प्रीत के पिता ने मुस्कुराते हुए गा आवश्यक मेरा सौभाग्य रहेगा सोहन के हाथ में तीन लाख रुपए का ले पाता था टाॅक उसी से उठते हुए गा अब चलते हैं घर मिलने आना आवश्यकता चाहिए तो हमने भी कौनसी से पढते हो जाएगा ऍम सोहन नम आंखों के साथ प्रीत और उसके पिताजी को बाहर छोडने आया प्रीत और पिताजी धीरे धीरे हैं । सीढियां उतर रहे थे ऍम

पहला सौदा 05

पहला सौदा सुबह के छह बज रहे हैं । चिडियों के चहचहाने की आवाज आने लगी । सर्दियों के दिन सुबह छह बजे अंधेरा ही होता है । धर्मपाल सच्चाई छोडकर घर आते भरा है । खर्राटों की आवाज से परेशान धर्मपाल की पत्नी की नींद खुल गई । उसने घडी में समय देखा । छह बज रहे हैं । थोडा और रजाई में आराम से लेने का सोचा । परंतु धर्मपाल के खर्राटे तेज हो गए । सर्दियों में चाहे सुबह हो जाए लेकिन बिस्तर छोडने का मन नहीं करता है । ठंड में हालत में बिस्तर मरीज हो जाता है । जब तक कोई जरूरी काम ना हो कोई भी बिस्तर छोडने को तैयार नहीं होता हूँ । रजाई में काम कर लेते हुए हैं प्रजाति से बाहर निकलने का । सिर्फ एक ही मतलब ठंड की ठिठुरन से कबड्डी करना । ऍसे निकलने का चीज नहीं कर रहा हूँ । लेकिन पति देव के खर्राटों से परेशान धर्मपत्नी द याने अगर सही छोडने का मन बना ही लिया । इसी सोच में आधा घंटा और क्या उठे या ना उठे । अब उठने का समय हो ही रहा है । पति देव के खराटे सोने नहीं दे रहे हैं । बस इसी सोच में वो उठे और फ्रेश होने बातों में चली गई । नया बाथरूम नहीं थी की फोन की घंटे बजे ॅ गया । बात हमसे निकल नहीं सकती और धर्मपाल खराटे भरा है । फोन के घंटे सुनकर धर्मपाल की नींद खुली । कच्ची पक्की नींद में उसने फोन उठाया । ऍम धर्म फोन पर दूसरी और ऍम की आवाज सुनकर धर्म ने पूछा क्या फॅमिली रात को फोन कर रहा है? क्या बात है? अब धर्म आधी रात नहीं है । दिन निकल आया है । साढे छह बजे घडी देख घडी घडी तो देख लूंगा तो बोल रहा तो सही बोल रहा होगा लेकिन तो फोन क्यों किया? धर्मपाल का अभी भी बिस्तर छोडने का मन नहीं कर रहा हूँ और ऊपर से उसकी प्यारी प्यारी नींद में खलल भी बढ गई । उसे दौलत राम पर कौन सा आ रहा था । अब फटाफट सब तो मर गया तो उसका छोडकर फटाफट अस्पताल पहुंच हाँ सच्चाई से निकाल कर रहे एक दिन निकल आया । मैं बताता हूँ तो किसी दवाई पहुंच हूँ तो क्या बोल रहे हो? हमारे मरने के बाद छोड के बोलूंगा तो फटाफट कर अब अस्पताल में मिलते हैं । मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है । इतना कहकर तालग्राम ने फोन रख दिया । धर्मपाल तुरंत हवाईपट् की और उठकर आंखें मलते हुए नींद खोलने लगा । इसका फोन था । दया नेपात रूम से बाहर आते पूछा हो गया । सब तो सेट पर गया तो फटाफट चाय बना दे । बस निकल रहा है । तैयार हो चाहे बनाने को कहकर । धर्मपाल बिस्तर से रॉकेट की रफ्तार के भर्ती निकला और फ्रेश होने बाथरूम में गुजार सेट सत्यपाल अनाज मंडी के बाद चाहते । मंडे में जब भी नया माल पहुंचता पहला सौदा सेट सत्यपाल ही करते थे । यहाँ तक बात थी की अनाज का पहला ट्रक सेट सत्यपाल के गोदाम में आता था । सिर्फ जी कितनी धाक भी कि बाकी व्यापारी औपचारिक तौर पर पहला सादा नहीं करते थे । सेठ जी के हाथ में पहला सौदा खुलता था । पिछले तीस वर्षों से सेट सत्यपाल अनाज मंडी के प्रधान थे । कोई उनको प्रधान के पद से हटा नहीं सका । मंडी में पीठ पीछे सब सेट सत्यपाल को सत्तू कहकर चलाया करते थे । मगर को के आगे मीठी मीठी चापलूसी बातें करते थे । से जी से जी आप महान है, गुणों की खान है । आप ही मंडी की आन बान शान है । आप का सानिध्य पाकर हम धन्य हो गए । आपके अनुकंपा से हमारे घर चलते हैं । ऐसे ही चापलूसी बातों से मंडे का हर व्यापारी सेट सत्यपाल की खुशामद करता था की चापलूसी इसलिए होती थी क्योंकि सेट सत्यपाल ने अपने साथ छोटे व्यापारियों का एक समूह बना रखा था । ऍम सहायता करता रहता था ताकि वे उसी से सौदा करें । ये बात दूसरी है कि पूरे सूत समेत काम तो वापस वसूल करता था । गांव में रहने वाला मुश्किल से छठी कक्षा तक पडने वाला सत्यपाल अपने चाचा के साथ मेहनत मजदूरी करने शहर आया था । उस समय उसकी उम्र करीब अठारह की रही होगी । चाचा उसका एक दाल मिल में नौकरी करता था । चाचा ने उसकी नौकरी भी दाल मिल में लगवा दी । दस वर्ष बाद दाल मिल में नौकरी करके बहुत कुछ सालों के व्यापार की बारीकियों को सत्यपालसिंह किया था । फिर एक दिन तालमेल बैठ गए । किसी बिल्डर ने मिल तोडकर रिहायशी कॉलोनी बना दी है । मेल बैठने के बाद सत्यपाल ने अनाज मंडी में दलाली करनी शुरू की । दालों की दलाली के बाद चावल और अन्य अनाज की भी दलाली आरंभ कर दी है । दलाली की आमदनी से एक छोटी सी दुकान किराये पर लेकर अनाज खरीद पेज का जो धंधा शुरू किया तो फिर सत्यपाल ने बढकर पीछे नहीं देखा । सत्यपाल में धीरे धीरे सफलता की सीढियां चढते चढते दस साल में मंडी में अपनी धाक जमाते हैं । एक छोटी सी दुकान के बाद दुकानों की लाइन लगती हूँ । एक बार मंडी के प्रधान बने तो कोई उनके बराबर नहीं पहुंच जगह जब सेट सत्यपाल दलाली करते थे तब सत्तू दलाल के नाम से मशहूर है । प्रधान बनने पर वो तो नहीं परंतु पीठ पीछे सब तो कह रहे कर वहाँ बहन के गंदी गालियाँ निकाल कर लोग अपनी भडास निकालते थे । सत्यपाल के बच्चे बडे होकर उनका अनुसरण करते हुए व्यापार को बुलंदियों पर लेकर आज एक लंबी बीमारी के बाद सेट सत्यपाल करने देना हो गया । पिछले एक महीने से तो अस्पताल में भर्ती थे । सुबह छह बजे राउंड पर आए डॉक्टर ने सीट सत्यपाल को मृत घोषित कर दिया । डॉक्टर की घोषणा के बाद फोन पर फोन सभी नजदीकियों को सूचना दी गई । कुछ देर में मंडी के हर व्यापारी दलाल को सेट सत्यपाल की मौत का समाचार मिल चुका था । धर्मपाल और गलत राम सेट सत्यपाल के दूर के रिश्तेदार हैं और अनाज मंडी में छोटे दुकानदार हैं । सीट सत्यपाल ने दुकानदारी शुरू करने में उनकी मदद की और इसका एहसान हमेशा से सत्यपाल दोनों पर जताते थे । दोनों सेठ जी को नेतृत्व मंडी खुलते ही सलाम करते हैं । मेहनत करते हुए दोनों तरक्की के रास्ते पर अग्रसर थे । इसलिए दोनों सेट सत्यपाल की कद्र करते हैं की चाहे उन का व्यापार छोटा था, सेट सत्यपाल की दुकान जमाने में सहायता को भूलते नहीं से सत्यपाल आपने एहसान को ब्याज समेत कभी का वसूल कर चुके थे पर कभी कभी सेंटी अनावश्यक तब आती भी बहुत है । फिर भी दोनों में कभी भी शिकायत नहीं कि एक ही बात करते थे । कोई बात नहीं एक रास्ता दिखायेगा से अच्छी नहीं अग्रसर हैं । रास्ता दिखाने का कर्ज चुकाना है, चुका रहे हैं पढ हमारी औकात है क्या नहीं हो रहा धर्मपाल और गलत राह दोनों अस्पताल पहुंचे सेट सत्यपाल का पूरा परिवार थोडी देर में एकत्रित हो गया । दोनों परिवार के हर सदस्य के बाद सुनकर सारे काम करने में दस हो गए । तो से जी के बेटे रमाकांत और उमाकांत होता चला रहे थे और दोनों फटाफट अपने आका का हर हो काम पूरा करने में व्यस्त थे । तभी मंडे के कुछ व्यापारी भी अस्पताल पहुंचे दोनों को भाग दौड करते थे । एक ने कहा सब तूने सालों को बंधुआ मजदूर बना रखा है अपना दिमाग लगाते नहीं । दूसरा व्यापारी दिमाग होता लगाए ना दोनों व्यापारी धर्मपाल और दौलत राम को देखकर मंद मंद मुस्कराने लगे । उनकी बातें सुनकर धनपाल और तालग्राम चुप रहे । धर्मपाल में दौलत राम के कंधे पर हाथ रखकर कहा अभी जो है ये समय कुछ कहने का नहीं है । बाद में देखेंगे दोनों धर्मपाल और अदालत राम काम में व्यस्त थे और साथ ही साथ उन दोनों के चार कान सभी रिश्तेदारों और व्यापारियों की बातों पर भी दे सेट सत्यपाल की मृत्यु नहीं को अस्पताल से घर लाया गया । विचार विमर्श के बाद दोपहर तीन बजे दाहसंस्कार का समय तय हुआ । सेट सत्यपाल की कोठी पर मंडी के दूसरे पदाधिकारियों ने चार दिनों के शोक की घोषणा का ऐलान कर दिया । इस शोकाकुल परिस्थिति में मंडी में कोई सौदा नहीं होगा । दुकानों के शटर डाउन रहेंगे । मंडी से जी के चौथे की रस्म के बाद ही खोलेगी । थोडी देर में सभी व्यापारी लोग हुए । रमाकांत ने धर्मपाल और दौलत राम को हिदायत दी है कि वह मंडी की हर गतिविधि पर उनको अवगत कराते रहेंगे । उन दोनों को कोठी से अधिक मंडी की हर गतिविधि पर नजर रखने के काम पर लगा दिया भाई उन दोनों को तुमने मंडी भेज दिया । यहाँ काफी कम है । उमाकांत में अपने बडे भाई को अपनी नाराजगी जाहिर की । हम तो घर के नौकर कर लेंगे । पापा के चौथे तक हम मंडी नहीं जा सकते हैं । हमारी गैरमौजूदगी में मंडे के बाकी व्यापारी फायदा उठाने की कोशिश करेंगे । चावलों की नहीं । आज कभी भी आ सकती है । मैंने फतहसिंह की ड्यूटी गोदाम पर लगा दी है । ट्रक ड्राइवर का फोन था । दोपहर तक वो ट्रक गोदाम में लगा देगा । पहला ट्रक हमारा ही आएगा । ड्राइवर को तोडना इनाम देना है । पिताजी रही हैं तो क्या हुआ उन की हर बात को हमने आगे बढाना है । आज तक नहीं । माल का पहला सौदा से सत्यपाल ने किया था । भाजपा ये परंपरा निभाई जाएगी । उनके बेटे उनकी परंपरा को जीवित रखेंगे । रमाकांत उमाकांत के कंधे पर हाथ रखते हुए गा आई तो मंडी चार दिन तक नहीं जा सकते हैं । ये सब करेंगे कैसे? छोटे भाई उमाकांत ने आशंका जताई तो हालत और धर्म किस काम आएंगे । नाम उन दोनों का होगा परन्तु पहला सौदा हमारा ही होगा । तभी उन दोनों को मंडी की टोह लेने भेजा है । यदि पहला सौदा हमारा नहीं हुआ तब लानत है हम पर पर हमें सेट सत्यपाल के हालात कहलाने का कोई हक नहीं । समाकांत ने फोन की घंटे बचने पर बात समाप्त की । उधर, मंडी में व्यापारी अलग अलग टोलियों में लामबंद हो चुके हैं । सभी की निगाहें चावलों की नई खेत के आने पर टिकी हुई थी । हर किसी की कोशिश थी कि पहला ट्रक उनका है और पहला सौदा भी उनका होगा । विभिन्न रणनीतियां बनाई जा रही थी । धर्मपाल और दौलत राम दोनों अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभा रहे थे । पल पल की खबर रमाकांत को दी जा रही थी । दोपहर एक बजे का हम लोग अटक सीट सत्यपाल के कदम में पहुंच गया । ट्राॅले नाम तो किसी को खबर नहीं लगनी चाहिए कि चावलों की पहली खेप हमारी है । ड्राइवर के खूब खातरकर । ड्राइवर पहले सौदे के बाद ही गोदाम से बाहर आएगा । समाकांत फतहसिंह को हिदायत दी और धर्मपाल दौलत राम को कोठी पर पहुंचने को कहा । रमाकांत के चेहरे पर कुटिल मुस्कान दे । जिस धरने परसेंट सत्यपाल ने काम किया आज रामाकांत उसी और चल रहा था । पहला सौदा हमारा ही होगा । ठीक तीन बजे से सत्यपाल के व्रत देखो । नगर के सबसे बडे शमशान लाया गया । अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी हो गई । शमशान में मंडी के सभी व्यापारिक एकत्रित थे । रिश्तेदार एक ओर जमाते हैं और व्यापारी अपना अपना घर पर आकर बंदी की बातों पर चर्चा कर रहे थे । कुछ मन की भडास निकाल रहे थे । एक व्यापारी भाई एक बात मेरी काठमांडू हूँ । सब तो में जो बात थी वो बहुत उसके हाथ में नहीं है । दूसरा व्यापारी कह रहे हो ऍम अपने पल्लू में बांध कर रखा था तभी आगे आने नहीं दिया । शर्ता डाल बात चाहत खत्म समझो । तीसरा व्यापारी कितने की लगा रहे हैं हजार की मेरी भी लगा लो । दूसरा व्यापारी साले तू जिंदगी भर तो अच्छा ही रहेगा । सत्तू पर हजार की चाल लाना है । शर्म कर कम से कम लाख की बात करें तो लगता हूँ तीसरा व्यापारी इतना घमंडी बात करूँ । कहीं चाल उलटी ना हो जाए । चौदह । व्यापारी साले तू छोटा है, छोटी बात ही करेगा । यहाँ बादशाहत की बात हो रही है । मंडी का अगला बादशाह कौन? तीसरा व्यापारी वहाँ से किस अगर दूसरे दल के पास पहुंच गया । पांचवां व्यापारी हो तो हम तो सब बच्चे हो । हमने तो सब को उस जमाने से देखा है जब वो दलाली करता था । आज बात चाह कहलाता है । तलब पक्का व्यापारी था, बडे लिखों की छठी करता था, कभी स्कूल की पढाई नहीं की । पटना पांचवीं छुट्टी फेल था परन्तु बडे बडे चार्टर्ड अकाउंटेंट और एम बी ए को धोबी पछाड मारता था । सारे सर झुकाकर लाइन लगाकर उसको सलाम मारते थे सब तो कि चाणक्य नीति पर पक्की पकडते साम दाम दंड भेद से मंडी को अपने वश में कर रखा था । ऍम करते मंडी का पहला सौदा किसका? सातवां ज्यादा? वर्मा और शर्मा बादशाहत को तोडने के पूरी तैयारी करके बैठे हैं । पांचवां व्यापारी सुना तो है लेकिन देखते हैं उनमें कितना दम है एक कोने में वर्मा शर्मा अपने चेलों के साथ रणनीति में मशहूर थे । ऍम शर्मा जहाँ तक आ जाएगा कल पहला सौदा अपना ही होगा । शर्मा कोई शक की गुंजाइश नहीं है । इस बार पहला सौदा अपना सत्तू की माँ की ऐसी की तैसी । कुछ व्यापारी पहले सौदे में कुछ हिस्सा मिल जाए तो सोने पर सुहागा । पहले सौदे में प्रकट होती है जाए एक बोरी मिल जाये । पूरा सीजन लाभ ही लाभ होता है । परमाणु शर्मा एक स्वर्ग है । हाँ हाँ बिल्कुल बिल्कुल हर किसी को हिस्सा दिया जाएगा । हमें क्या सब तो समझ रखा है । सारा का सारा माल खराब कर जाता था । शर्मा शर्मा के जाए पर कुटिल मुस्कान नहीं देख व्यापारी हो आपसे ये अब की बार तो मजा लिया जाएगा । आपके मुँह में घी शक्कर ले सब तूने हमारी लाइफ झंड कर रखी थी । उस व्यापारी के कहने के बाद शर्मा परमान सातवे आसमान पर बोल रहे थे । तभी सेट सत्यपाल को मुखाग्नि दी गई । ये इशारा था धर्मपाल और गलत राम के लिए तो शर्मा शर्मा के ग्रुप के समीप खडे हो गए । डाॅ । सिर्फ जी पहले सौदे का रेट लगा रहा हूँ हूँ कौन ले रहे हैं? धर्मपाल के मुख से पहले सौदे के रेट सुनकर सब सब रहेगा । सब व्यापारियों ऑफिसर पता शुरू हो गई कि धर्मपाल क्या बोल रहे हैं, क्या ऍम आ गया? सब एक दूसरे कामो देखने लगे । शर्मा आॅल तुम ये क्या कह रहे हो तो लग रहा है ऍम चावलों की पहली खेप सेट सत्यपाल के गोदाम में एक बजे पहुंच गई थी । आप सेट सत्यपाल के बेटों को कम बता तो रेट सुना दिया । हम धर्मपाल और तालग्राम भेज रहे हो । क्या कहते हैं शर्मा शर्मा सकते में आ गए । पहला सौदा हो गया । व्यापारियों ने झट से पाला बदला जो वर्मा शर्मा के पाले में थे । झट से दल बदलकर धर्मपाल और दौलत राम के दल में शामिल हो गए । सब ने सादा बुक कर लिया । मृत्यु अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि पहला सौदा हो चुका था । रमाकांत छोटे भाई उमाकांत के साथ वहाँ से गुजरे हैं । एक नजर परमाणु शर्मा पर डाली और आगे बढ गए । धर्मपाल और दौलत राम ने इशारा किया कि पहला सौदा आपका ही हुआ है । उधर पंडित ने अंतिम विधि की और सबको चौथे की सूचना नहीं सुबह सात बजे शमशान में फूल चुने जाएंगे और बिरादरी का उठाला शाम चार से पांच बजे साईं मंदिर के परिसर में होगा । परिवार के सभी सदस्य एक तरफ खडे हो जाए और बिरादरी शोक प्रकट करते हुए अपने घरों को प्रस्थान करें । बिरादरी रुखसत होने लगी । शर्मा शर्मा रमाकांत उमाकांत के सामने शोक प्रकट करते गए । उनका सिर्फ हार से जुडा हुआ हूँ और रमाकांत मकान के चेहरों पर हो हर्षोल्लास था ।

विपुल दी ग्रेट बड़बोला 07

विपुल टिक रेट बढ बोला ऍम मेरे कैबिन में प्रवेश करते हुए विपुल ने कहा! और मुझे अपना फॅार दिया । ऍम बोलने आज ही ऑफिस जॉइन किया । कहने को तो ऍम लेकिन सारी नियुक्ति हेड ऑफिस से ही होती है । अब ब्रांच में नौकरी करने वालों की पोस्ट कितनी उँची होगा? चलती तो ऑफिस क्या? मैंने अपने डिपार्टमेंट में एक जूनियर की पाॅइंट के काम पेंडिंग बहुत हो गया था । हेड ऑफिस वालों ने अपनी अहमियत बताने के लिए एक बिना अनुभव के प्रेशर की नियुक्ति कर दी । मुझे थोडी तसल्ली हुई । कम से कम कोई मिला तो सही काम तो करवा लेंगे । मैंने विपुल को कुर्सी पर बैठने का संकेत क्या और इंटरकॉम पर अपने सहायक महेश को कैबिन में आने को कहा । महेश ने कैबिन में आते ही नमस्ते का और कुर्सी पर बैठते ही छुट्टी के लिए आवेदन कर दिया । सर्दी अच्छा दो घंटे जल्दी जाना है । वाइफ शाम के ट्रेन से मायके से वापस आ रही है । अब महेश वाइफ की बात है तब तो जाना ही होगा । हम भी वाइफ वाले हैं । बाइक की अहमियत सब शादी शुदा हाथ नहीं जानता है । तुम जल्दी चले जाना ऍम ये है विपुल तुम्हारे सहायक रहेंगे । काफी दिनों से शिकायत कर रहे थे कि कम अधिक हैं । एक आदमी की जरूरत है । बोल अब तुम्हारे अधीन काम करेगा । पुल के अतिरिक्त सुरेश ने भी अगले सप्ताह ज्वाइन करना है । ऑफिस में स्टाफ पूरा हो जाएगा, जिसके बाद पेंडिंग काम पूरा हो जाएगा । अच्छा तब से महेश के साथ काम करोगे तो अपनी सीट पर जाकर अपना काम शुरू करता हूँ । महेश तो मैं कम बता देगा । कभी भी कोई परेशानी हो, सीधे मेरे पास चले आना । हम सब एक परिवार के जैसे काम करते हैं । शर्माना नहीं और घबराना भी नहीं । बस दिल लगाकर काम करूँ वो पुल की उम्र बीस साल । उसने इसी वर्ष बीकॉम की परीक्षा उत्तीर्ण की । हालांकि उस की नियुक्ति हैडऑफिस ने की थी । परंतु नियुक्त होने के पश्चात मैंने पिछले सप्ताह जॉइन होने से पहले उसे मिलने के लिए बुलाया था । उसको काम का कोई अनुभव नहीं था । लेकिन एक गजब का आत्मविश्वास सरोथा जिसको देखकर मैंने अनुमान लगाया कि वह काम चलती सीख जाएगा । मुझे लेकर काॅल विपुल नवगांव में रहता था । नवगांव नवयुक सिटी से लगभग अस्सी किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा है । बस से एक तरफ का सफर लगभग दो ढाई घंटे में पूरा होता है । ऑफिस का समय सुबह दस बजे से शाम छह बजे आठ घंटे की ड्यूटी के बाद बस पकडने के लिए आधा घंटा और लगभग पांच घंटे बस में अर्थात लगभग चौदह घंटे की ड्यूटी पर मैं सोचने लगा था कि क्या सोचकर एक प्रेशर नियुक्त कर दिया । अब इतनी दूर रहने वाला ऍम को क्या पता कि नवगांव नवयुक स्थिति से अस्सी किलोमीटर दूर है । ऍम करने का मुझे डर सताने लगा । कई थोडे दिन बाद नौकरी छोड कर भाग गया । फिर पेंडिंग काम की मुसीबत तुम्हारा शुरू हो जाएगी । विपुल तुम बताओ तुम नवगांव रहते हो? हाँ, काम बहुत हो रहा है । आने जाने के अतिरिक्त अकाउंट डिपार्टमेंट के कंधे आदत बता दूँ । क्या अक्सर देर रात तक रोककर हेड ऑफिस के लिए रिपोर्ट बनानी पडती है? मेरे प्रश्न पर मुस्कुराते हुए पे पालने जवाब दिया । सब से आप चिंता मत कीजिए । आपको शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा । कितनी देर तक करेंगे । ऑफिस में रह कर काम करूँ । घर पहुंचने के मुझे कोई जल्दी नहीं । मेरे ऊपर घर की कोई जिम्मेदारी नहीं । आप बेफिक्र रहे हैं । देखो विपुल तुम्हारा अपाॅइनमेंट हो गया तो तुम्हारी नौकरी पक्की है । फिर भी मुझे एक चिंता नहीं खेल रखा है । टाइम मैनेज करना बहुत मुश्किल होता है । कहीं आने जाने के बाद पांच छह घंटे के कारण थोडे दिन में नौकरी छोड हो गए तब मेरी मुसीबत बढ जाएगी । फिर काम पैंडिंग और नये आदमी की तलाश में दो चार महीने निकल जाते हैं और हम छह महीने पीछे चले जाते हैं । सच्ची में आपको स्टाम्प पेपर पर लिखकर गारंटी दे सकता हूँ । आपको पीठ मझधार में कभी नहीं छोडूंगा । सबकुछ सोच समझकर नौकरी ज्वाइन कर रहा हूँ आप सभी चिंताओं को त्याग तो डबल के आत्मविश्वास और जवाब देने के ढंग के आगे मैंने उत्तर हो गया और मैंने घुटने टेक दिए और ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा । तर्ज आप चिंता मत कीजिए । मैं हर हालत और हर मौसम में सुबह दस बजे से भी दस मिनट पहले ऑफिस पहुंचाऊंगा । आज पीपल का ऑफिस में पहला दिन था और आधा घंटा देर से साढे दस बजे ऑफिस आया । मैंने उसे पहले दिन कुछ कहा नहीं और महेश के साथ काम करने का आदेश दिया । उस दिन के बाद विपुल ने कभी निराश नहीं किया । अपने वायदे का पक्का निकला । दूसरे दिन से बिना नागा ऑफिस खोलने से पहले तो ऑफिस पहुंच जाता और दो महीने के छोटे समय के अंदर सभी कार्यों में निपट हो गया । ऑफिस का पेंडिंग काम समाप्त हो गया और काम रूटीन पढा गया । डबल काम में तेज स्वभाव में फिर नंबर था । उसकी सीट पर कोई भी काम पेंडिंग नहीं रहता था । फिर भी मुझे उसकी एक बात कतई पसंद नहीं । वो बात उसके अधिक बोलने की थी तो चुप नहीं रह सकता था । कई बार मुझे लगता था कि वह बात को बढा चढाकर करता है और ऍम पर आपने अमीर होने का आप भी डालता है । धीरे धीरे उसने पूरे ऑफिस में सभी को यकीन दिला दिया कि वह अमीर घर से ताल्लुक रखता है । उसके अच्छे और महंगे कपडे जो थे अपने आप उसके कुछ अमीर होने का अहसास करवाते थे । ऑफिस में सहयोगियों को अक्सर दावत देना उसका नियम बन गया था । ब्लॅक की सुविधा और मार्केटिंग डिपार्टमेंट के प्रियंका के आसपास मंडराते देख ऐसा लगता था कि ऑफिस के लडकियों में उसके विशेष और खास सोचे थे । पुल हर रोज लंच प्रियंका शुभिता के साथ करता था जबकि डिपार्टमेंट के लोग आपस में कर देते हैं । लेकिन पुल श्वेता और प्रियंका के साथ लंच इसलिए करता था कि उन पर अमेरिका रॉक डाल सके । उन दोनों का प्रयास करते हैं । उसका खाली समय प्रतीत होता था । इन सब बातों को देखकर मैंने विफल को कभी भी नहीं होगा क्योंकि ऑफिस का काम उसने कभी पेंडिंग नहीं किया । जब वो काम तसल्ली और निष्ठा से करता है तब बाकी सब हरकतों को उसका निजी मामला समझकर मैं नजर अंदाज करता रहा हूँ क्योंकि कंपनी के काम में सदा अग्रणी रहता था । लेकिन मैं ऑफिस में रिपोर्ट देख रहा था । शाम के चार बजे चाय के साथ ऑफिस बॉय, समोसा, गुलाबजामुन और पनीर पकौडा केवल पर रखा हुआ बोला । सर समझा पार्टी प्रफुल की तरफ से की खुशी में दावत हो रही है । अभी ऑफिस से पूछ रहा था कि तभी महेश ऍम जी वो बोलता छुपा रुस्तम निकला, बहुत मोटी आसामी है । ये दावत तो कुछ भी नहीं बोल सकता । बडी पार्टी लेनी पडेगी, ऐसे नहीं छोड सकता । उसने आज दो ट्रक खरीदें सर जी, उसके सोलह ट्रक तो पहले से चल रहे हैं । उसके पिता नवगांव की दाल मिल में पार्टनर रहेगा । कुल मिलाकर विपुल अठारह ट्रकों का मालिक है और तालमेल में पार्टनर । ये समोसा पार्टी तो सिर्फ एक शुरुआत है । अब वॅार होटल में दावत लेनी होगी । समझे उसको इस छोटी से समोसा पार्टी में नहीं छोडना । महेश की बात सुनकर मैं भी अचंभित हो गया । महेश एक बात समझ में नहीं आ रही है कि अठारह ट्रकों के मालिक और तालमेल के पार्टनर को एक छोटी सी अकाउंट असिस्टेंट क्योंकि क्लर्क की नौकरी ये करने की क्या जरूरत है । सर जी मुझे लगता है कि अनुभव लेने के लिए नौकरी कर रहे हैं । साल दो साल के बाद नौकरी छोडकर व्यापार में अपने पिता का हाथ बढाएगा । महेश ने पनीर पकौडा खाते हुए बच्चे का महेश मेरा अनुभव कहता है कि अमीर घराने के बच्चे कभी नौकरी नहीं करते हैं । पढाई के बाद अपने घर के व्यापार में टूट जाते हैं । आईएएस की नौकरी या मैनेजमेंट डिग्री के बाद किसी जनरल मैनेजर के पद पर नौकरी तो समझ में आती है लेकिन एक क्लर्क की नौकरी कोई अनुभव भी व्यापारी अपने बच्चों से नहीं करवाया था । सर जी आप की बात में वजन है लेकिन हमें इन सब बातों से क्या मतलब? अपन तब भारत का मजा लेते हैं कहते हुए महेश ने दो घंटे पहले जाने की छुट्टी मांगी । महेश के ऑफिस से जल्दी जाने के बाद मुझे रिपोर्ट की आवश्यकता पडी है । आपने पाल को इंटरकॉम से संपर्क किया परंतु वो अपनी सीट पर नहीं था । मैंने ऑॅयल के बारे में पूछा । ऍम समोसा पार्टी कर रहे हैं । उसको बोला कि मुझे रिपोर्ट देकर खर्च इतनी देर तक चाहे समझा पार्टी कर रहे हैं । कहने के बाद भी विपुल रिपोर्ट देने समय नहीं आया । उसने ऑफिस बॉल के हाथ रिपोर्ट भिजवा दीजिए । ऍम कर्जे ऍम और प्रियंका मेम के संग समोसा पार्टी कर रहे । उसने ये फाइल आपको देने को कहा है तो मोबाइल मालूम थी । विपुल ने बताया की फाइल उसकी टेबल पर सबसे ऊपर पडी है । मैंने आपको सही फाइल दिया ना ऑफिस भाई थोडा घबरा गया कि कहीं उसने गलत फाइल ना पकडा दिया होगा । मुझे यही फाइल चाहिए । जरा देख कर बताओ की फिर बोल क्या कर रहा है? दो मिनट ऍम रिपोर्ट ऍम में हाजिर हो गया । सर जी ऍम के साथ ऍफ का कर रहा है । उसकी सीधी बात सुनकर मुझे हँसी आ गए और उसे जाने को कहा । निराधान रिपोर्ट से हटकर पीपल के हरकतों पर क्या किस तरह का भी खाली समय मिलता है । तब श्वेता और प्रियंका के साथ टिटोली करने लगता है । मैं ऍम लडकियों का आपस में ही हाॅग का करना एक आम बात है । मेरा ध्यान पीपल पर इस कारण नाटक किया कि वह मेरे अधीनस्थ था अपने डिपार्टमेंट में काम करने वाले हर कर्मी पर राजा रखना मेरा करता है काम तो समय पर निपटा रहे हैं काम निपटाकर पे जो कुछ करें मुझे कभी भी कोई ऐतराज नहीं होता । निजी जीवन में कुछ भी करने के लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र । आखिर हमारे देश में प्रजातंत्र सोचने लगा कि कहीं पे बोलने, लडकियों को इंप्रेस करने के लिए तो समझौता पार्टी नहीं दी । खैर मेरा मन पे बोल की बातों में उलझ गया और मैंने फाइल बंद करके एक साइड कर दी और काम करने का मन ही नहीं किया । शाम के समय ऑफिस से निकल कर घर जाने से पहले समेत के मार्केट से ग्रॉसरी का सामान खरीदने के लिए रोका । श्रीमतीजी की दी हुई सामान के लिस्ट जेब से निकालकर खरीददारी शुरू की । इस मार्केट में वैराइटी अधिक मिलते थे जो घर के समीप वाले मार्केट में नहीं मिलती थी । मैं किसी कारण श्रीमतीजी काॅस्ट पकडा देती थी । शाम के समय बाजार में बहुत भीड रहती है । बाजार में सामान खरीदते समय मुझे एहसास हुआ कि विपुल श्वेता के साथ हस्ता हुआ हाथ में हाथ डाले टहल रहा था । एक दूसरे से चिपके हुये अपने में मस्त दुनिया से बेखबर मुझे भी नहीं देख सकते हैं । दो हंसों का जोडा प्रेम की गहराई में उतर चुका था । मैंने भी युवा प्रेमी युगल को डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा । सामान खरीद कर घर को कोच कर गया । सोचने पर मजबूर हो गया कि विपुल कब नवगांव ज्यादा होगा और कैसे टाइम मैनेज करता होगा । ऑफिस में पिपल श्वेता की नजदीकियां अधिक पडने लगी । चाहे ब्रेक में दोनों एक साथ चाय के सब लगाते नजर आते हैं और लंच टाइम में एक साथ खाना खाते नजर आते हैं । काम के बीच दो मिनट के ब्रेक में पिपल झट से किसी ना किसी बहाने श्वेता से बतियाता नजर आता । धीरे धीरे बोला शमिता का प्रेम परवान हो गया । अब इसको छुपाना किसी के बस में नहीं है । धीरे धीरे ऑफिस में सबकी जुबान पर सिर्फ विपुल असुविधा के प्रेम प्रसंग के चर्चे थे । एक दिन लंच टाइम में मैं आराम कर रहा था । महेश कैबिन में आकर सामने को से खींचकर बैठ गया । सबसे आपने नई खबर से नहीं महेश मुझे पुराने की कोई खबर नहीं और तुम नहीं की बात कर रहा हूँ । तुम्हारी शकल से लगता है कि कोई संसदीय जरूर बता दूँ । क्या खबर है सर जी, आपके लिए सनसनी होगी । आप शरीफ बच्चों की तरह के साथ हैं । काम करके चले जाते हैं । आपको तीन दुनिया की कोई खबर नहीं होती है । हम तो पडता उठने के फिर हाथ में कब से टकटकी लगाए बैठे थे । लेखकों की तरह भूमिका मतदान रोमेश सीधी सीधी बात बताऊँ । सीधी बात ये है कि पॉपुलर श्वेता का प्रेम एक काम परवान हो चुका है । बस अब तो शहनाई बजने के दे रहे हैं । महेश ने सनसनी बताइए शॉपिंग मॉल में ना कई बार दोनों को एक साथ तो ट्रेन के मूड में देख चुका हूँ । मैंने महेश को बताया आपने तो शॉपिंग मॉल में देखा है । सर जी आपको मालूम नहीं पुल आजकल नवगाम चाहता ही नहीं । श्वेता के घर रह रहे हैं । हफ्ते में एक या दो दिन ही नवगांव जाता है । अंदर की खबर बताता हूँ । शादी पक्की होते । श्वेता नौकरी छोड देगी । सर्च इतने अमीर घर जा रही है । नौकरी की क्या जरूरत है उसके तो आगे पीछे नौकर होंगे । महेश बात बताकर गुनगुनाने लगा दो चालीस हजार कर रखना । आपकी असुविधा के घरवाले ऐतराज नहीं करते । शादी से पहले विपुल का कराना जाना ये तो आजकल आम बात है । लेकिन रात को सोना क्या वाकई हो सकता है? कहीं तुम लम्बी बात तो नहीं छोड रहा हूँ । कसम लंगोट वाले की एकदम सच बोल रहा हूँ कसम लंगोट वाले के ये महेश का तकिया कलाम था । मैं समझ गया उसके बाद में कुछ सच्चाई तो आवश्यक महेश मुझे कुछ ऐसा लगता है कि ऑफिस में आजकल हम लोग काम, काम और इधर उधर की बातों में अधिक ध्यान दे रहे हैं । मैंने बात पलटते होगा सर जी आप ऐसी बातें बच्चे नहीं कर सकते हैं । आपको मालूम है कि सारा काम समाप्त करने के बाद ही मैं आपसे गपशप करता हूँ । महेश मेरी बात का बुरा मान गया । मैं मैं तुम्हारी बात नहीं कर रहा हूँ । मैं बोल की सोच रहा हूँ की आजकल जब देखो वो श्वेता और प्रियंका के इर्द गिर्द मंडराते हुआ नजर आता है । अपना काम काम करता है । मैंने कुछ हैरान होकर पूछा । महेश हंसते हुए बोला सर जी आप इस बात की फिक्र मत कीजिए । उसका काम जब तक समाप्त नहीं हो जाता है शाम को ऑफिस से घर जाने नहीं देता हूँ । सुविधा के प्यार से उसकी रफ्तार गोली की तरह हो गई है । शाम तक सारा काम अप टू डेट रहते है । रफ्तार के चक्कर में कहीं काम में गलती ना हो जाए । इस बात का ध्यान रखा हूँ । मैंने महेश को खास राय दी है । सर जी, आप बिल्कुल निश्चिंत रहे । अगर कभी भी काम में कोई शिकायत मिल जाए तो फिर पुल की सजा भी मैं भुगतने को तैयार हूँ । महेश ना छाती ठोककर का ऑफिस के काम में मुझे बोल से कोई शिकायत नहीं मिली । इसलिए विपुल असुविधा के आपसी रिश्तों में मैंने विशेष महत्व देना छोड दिया । दिन बीतते गए विपुल असुविधा के प्रेम प्रसंग के किस से कुछ अधिक सुनाई देने लगे । एक तन लंच टाइम में कॉफी पी रहा था । तभी सफल और महेश ने कैबिन में प्रवेश किया । सर्जे बधाई हो विपुल की बहन की शादी है आपका निमंत्रण पत्र । महेश ने शादी का कार्ड मुझे दिया । टेबल बहुत बहुत बधाई हो । मैंने विपुल से हाथ मिलाते हुए गा । सर्जे सोखी बनाई से काम नहीं चलेगा । शादी में आपको अवश्य अगर होना करनी । विपुल ने आग्रह किया जरूर शादी में राणा करेंगे । मैंने मुस्कुराते हुए कहा । शादी से एक दिन पहले महेश ने लंच समय में कहा सर जी, कल विपुल की बहन की शादी या पूरा साफ शादी में जाएगा । कल लंच के बाद ऑफिस की छुट्टी है । आपने भी चलना है, कोई बहाना नहीं चलेगा । देखो महेश शादी नवगांव में हैं । रात को वापस आने में देर हो सकती है । पाकिस्तान ने के लिए कुछ हमारी नहीं मिलेगी । मैंने आशंका जताई सर्जिक इसकी जनता आप मत कीजिए है । आपसी का प्रबंध पे बोलने कर दिया । नवगांव के सबसे अमीर परिवार में आपको हाथ पैर तरीके से हो रहा है । इसलिए तो सहारा साहब जा रहे हैं । वहाँ पहुंच गए । एक चमचमाती कार हमारे और सिर्फ हमारे लिए ही होगी । हम उसी कार में वापस आएंगे । इसलिए आप बिल्कुल को चिंता मत कीजिएगा । महेश नाम पहुंची आराम जगह ऐसे शादी देखने का मौका जीवन में एक बार मिलता है । पूरे नवगांव में कारपेट होंगे । एक पुरानी हवेली में शादी कब भव्य समारोह होगा । जिस तरह छब्बीस जनवरी के दिन राष्ट्रपति भवन को सजाया जाता है, उसी तरह हवेली सजेगी । बस हमने नवगांव पहुंचना है । बस हमें तालमेल क्रिकेट पर उतारेगी और फिर आप देखेंगे । फिर पुल के परिवार की रही थी दाल मिल के गेट से हवेली और विपुल के घर तक सडक पर खूबसूरत कालीन और खूबसूरत बनाते होंगे । हवेली की शान उसकी रोशनी से होगी । हफ्ते आयोजन को देखना सर जी आप और हम फॅस कर सकते हैं । ये ऐसी शादी की भव्यता तो जीवन में सिर्फ एक बार देखने को मिलती है । शादी में जरूर जाना है अब इतनी सफर । दस । हंगामेदार बातें सुनकर मैंने भी हाँ मार दी । अब मैं किस मुँह से इनकार करता जब ऑफिस का हर आदमी शादी में जा रहा है । अगर इतनी भव्य शादी को देखने का मौका जैसे मिडल क्लास लोगों के नसीब में होता है । अब जब मौका मिला है तब सुनहरे अवसर को हाथ से जाने नहीं देना । आखिर शुभ घडी आ ही गई । वे बोल की बहन की शादी के दिन पूरे ऑफिस के स्टाफ ने नए शानदार चमकते कपडे पहनकर ऑफिस को एक तरह से बारात घर बना दिया । महेश को संबोधित करते हुए मैंने पूछा क्या बात है? श्वेता नजर नहीं सर जे आपने क्या मजा करते हैं? शादी से पहले अपने सवाल कैसे जा सकती है? बस आज बहन की शादी हो जाए । फिर अगले महीने विपुल कभी बैंड बाजा ही समझे । लंच के बाद सभी बस अड्डे पहुंच गए । थोडी देर इंतजार करने के बाद नवगांव की बस मिली । दोपहर के लगभग चार बजे बस चले । बस चलते ही महेश, प्रियंका और अन्य स्टाफ के सदस्य शादी की बातें करने लगे । खासतौर से शादी के इंतजाम के बारे में बातें कर रहे थे और मैं महेश के पीछे वाली सीट पर बैठा उनकी बातों पर मंद मंद मुस्कुराने लगा । अभी मेरे साथ सीट पर बैठे सज्जन ने बीडी सुलगाई पायजब यहाँ अभिनव गांव जा रहे लोगों के साथ बिहारी की छोरी की शादी में पीडित कॅश लगाते हुए उसने बच्चा पूछा मैं आपकी बात नहीं समझा । मैंने पीढी वाले सज्जन से पूछा । बी डी का एक और लम्बा काश लगाते हुए उसने कहा ऍम मेरा नाम बाकी है । मैं और बिहारी अनाज मंडी में दलाली करते हैं । बिहारी काॅफी में किसी बडे ऑफिस में काम करता है । ऐसे लगे की तुम लोग उसी ऑफिस में काम करते हो और उस की बहन की शादी में जा रहा हूँ । इतनी लम्बी बातें पूरे नवगांव में बिहारी का खानदानी कर सकें । अगर इतना अमीर होता था उसका चला हजार हजार की नौकरी करता था, अठारह और चलता है बिहारी के मोहल्ले में रहता हूँ और हम इकट्ठे नवयुक सिटी के अनाज मंडी में दलाली करते हैं । जिस तालमेल की तुम बात कर रहे हो उसे बंद हुए तो कभी दस साल हो गए और बिहारी उस तालमेल में नौकरी करते थे । जब मिल बंद हुई तब से अनाज मंडी में दलाली कर रहे हैं । बीडी का कश लगाते हुए, बात करने का, उसके आवाज में और चढाने वाली मुद्रा थी । बाकी की बात सुनकर हम जब सकते में आ गए बहनों जैसे किसी जहरीले बिच्छू ने डंक मार दिया हूँ । सबकी बोलती बंद हो गई और बहुत छक्के से एक दूसरे की शक्ल देखने लगे । साहस जुटाकर बडी मुश्किल से आवाज निकालकर प्रियंका बोले अंकल! आप सच कह रहे हो ना? कहीं मजाक तो नहीं कर रहे हैं? हाँ, मैंने एक और बीडी सुलगाई और एक लंबा कश लगाते हुए बोला मैं गांव पहुंच कर देख लेना, मेरी कोई दुश्मनी थोडी है । फॅमिली निकलेगा, बता नहीं था । पूरा नवगाम बिहारी को एक नंबर का टपोरी मानता है । बेटा तो उससे भी दस कदम आगे निकला । छुट्टियों में रणनीति सुनकर हम सभी का बाकी का रास्ता काटना तो भर हो गया । सभी इसी उधेडबुन में थे कि जल्दी से नवगांव आ जाए और हकीकत का सामना होगा कि वो पालने सच कहा या फिर बीडी वाले सज्जन सच कह रहे हैं । तभी बस एक पुरानी बिल्डिंग के सामने लोगे ऍम नवगाम आ गया । मैं बता रहा हूँ आप भी उधर ही है ये जो टूटी फूटी खंडरनुमा बिल्डिंग है । इसी को दाल मिल कहते हैं । आप सब लोग इसी मिल की बात कर रहे थे । जहां बिहारी का छोडा अठारह तक चला रहा है । उस पीढी वाले सज्जन के साथ हम सब टूटे हुए मान के साथ बस से उतरे । अब करते भी तो क्या, कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था । बस से उतरकर हम पुलकि कपूरी बातों को बस याद कर रहे थे जो दाल मिल दस साल से बंद है और जिसकी हालत खंडर से काम क्या आप ज्यादा गया? नवगांव के कच्ची टूटी फूटी सडक पर हम कारपेट ढूंढते रह गए । अब स्टाफ का सब्र टूट गया । सब विपुल को गालियां निकालने लगे । अपनी छोटी शान के लिए पुल इतना झूठ बोलेगा, इसकी उम्मीद किसी को भी नहीं । कितने बडबोलेपन का क्या फायदा? झूठ एकदम सामने आई जाता है । उसको कब तक छुपाया जा सकता है । स्टाफ के सभी सदस्य धूलभरी टूटी सडक पर खंडरनुमा तालमेल के आगे कोई बैठने का स्थान खोजने लगे । तभी सामने से एक तांगे में कुछ कारपेट और कुर्सियों के साथ पुल दिखाई दिया । उसे देखकर प्रियंका जोर से चल रही पुल के बच्चे नीचे उतार हमें बेवकूफ बनाकर कहा जा रहे इन टूटी घंटे वाली सडकों पर टांग टूट गई हैं । और तो मुझे मैं आगे की सवारी कर रहे हैं । अमेजॅन ऐसे नहीं होता रहा आॅर्बिट बेचने के लिए गली में जा रहे थे । फिर पीढी पीने वाले सज्जन जो हमें बस में मिले थे थोडा आगे निकल गए । ऍम का आवास बाकी अंकल तांगे का सामान घर पहुंचवा तो मैं सर जी के साथ हवेली आता हूँ । महेश ने विपुल की शर्ट का कॉलर पकडकर पूछा बेटा इतना झूठ बोलने की जरूरत क्या थी? इतने महंगे कपडे पहन कर आए, सब खराब करवा दिए फॅार तो सब सच सच बता देता । तब भी हम शादी में आते हैं और हमें बहुत ज्यादा खुशी होती है । हमने तो ऑफिस आपकी दूरदराज गांव में शादी अटेंड किया । क्या मीलों तक सामान कंधे पर लाख कर चलना पडता है । साले हरामी तो हमें पागल बना कर रख दिया । अब चल राष्ट्रपति भवन नवाज हवेली के दर्शन भी करवा दे उसको भी देख करते हो जाए । शायद विपुल हमारे शादी में आने की उम्मीद नहीं थी । एक पल के लिए सफल हमें देखकर सन्न रह गया । लेकिन हर बडबोले की तरह चतुराई से बातें बनाने लगा । ऐसे व्यक्ति आदत से मजबूर हार नहीं मानते हैं । टेबल बात को पलटते हुए बोला फॅमिली चलते हैं । अब सफर में थक गए होंगे । कुछ जलपान कर लेते हैं । तीन चार मिनट पैदल चलने के बाद हम सब राष्ट्रपति भवन नाम आ हवेली में पहुंच गए । हवेली एक पुरानी इमारत निकलिए । फॅमिली को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी समय समय इंदार क्या रईसजादे की रिहाइश रही होगी । जब एक धर्मशाला बन कर रह गई, जिसके दो तरफ कमरे बने हुए हैं और बाकी दो तरफ खाली मैदा पहुंचने के नाम पर तीन चार खंबों पर बल पे लटक रहे थे । दो तीन कमरों में कुछ हलचल हो रही थी, जहाँ पर पक्ष के पुरुष तैयार हो रहे थे । कुछ महिलाएं तैयार होकर एक तांगे पर बैठकर कहीं जा रहे थे । तभी पुल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, हमारे यहाँ औरतें बारात में नहीं जाती है, इसलिए पहले हमारे घर बच्चों के पास जा रही है । उस तथाकथित हवेली जो वास्तव में एक धर्मशाला ही थे, उसके कोने में हलवाई अंगीठी को बस बुझने वाला था । टेबल के आग्रह पर पडे मुझे मुझे मन से कुछ पकौडे तल दिए और चाय बना दी चली थी । प्रियंका के सब्र का बांध टूट गया और विपुल कुछ चल इकट्ठे सुनने लगे । बिल्कुल तो ये काम अच्छा नहीं किया । इतना छोड तो कोई अपने दुश्मन से भी नहीं बोलता । सारा मेकप खराब हो गया इतनी महंगी साडी धूल ऍम होंगी वहाँ क्यों नहीं बिलकुल बिलकुल सब मिलेंगे छह हाथ के साथ एपल बोला इतनी भूख लग रही है और खिलाने को तुझे सडे हुए बैंगन और सीताफल के पकौडे मिले तो हमारे सामने पुराने अखबार के कागज पर धरकर हमारे हाथों में रखती है । हमें तेरे को दावत नहीं चाहिए । ऐसे तो पास अच्छा कहते वो प्रियंका पकौडों का दो ना विपुल को वापसी पकडा दिया । ट्रिपल एक्स पकौडा में डालते हुए कहा प्रियंका नाराज नहीं होते हैं । पाइप स्टार होटल से अच्छे पकौडे पाल अपनी हार मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था । तेरे घर का एक फोन पानी भी नहीं पीना कहाँ है तेरी चमचमा अधिकार जो तो हमारे स्वागत में खडा करने वाला था । मुझे अभी वापस घर जा रहा है । प्रियंका तमतमाती हुई बोली है सब चीज में नाराजगी की क्या बात है आप इतनी दूर से आए हैं कुछ तो लीजिए पकडे की फ्लाइट मेरे आगे करते हुए बिल्कुल ने कहा सरकार की बात को गोल कर गया । मैं पकौडा खाते हुए प्रियंका से बोला प्रियंका राज की छोडो और कुछ खा लूँ । भूखे पेट रहना सेहत के लिए ठीक नहीं है लेकिन ऍम अस नहीं हुई । उस ने कुछ नहीं खाया । प्रियंका और महेश ने अपनी नाराजगी पीपल को साहिर कर दी ताकि स्टाफ चुप रहा । लेकिन मेरे समेत सभी दुखी रह है । जिस बात की कल्पना थी उसका एक प्रतिशत ही नहीं देखकर आसमान से पाताल में समा गए थे । पूरा सोलह आने झूठ की उम्मीद तो हमने सपने में भी नहीं की थी । पकौडे खाने के बाद हमने पाल के घर गए तो वहाँ भी वही हालत है । गली में साधारण से कनात कुर्सियां और धनियाँ बच्चे थे । घर के साथ वाला प्लाट खाली था जहाँ खाने का प्रबंध था । शहरी वातावरण से बिल्कुल उलट दरियों पर बैठकर खाने का प्रबंध था । शादी का माहौल देखकर पूरा स्टाफ दंग रह गया । स्टाफ के हर सदस्य का सपना चूर चूर हो गया था । सभी के सामान पर एक ही बात थी किस टाइप का पहाड बनाने की क्या आवश्यकता थी । सच सच बोल देता । खुशी और काम में हर कोई सम्मलित होता है । छोटा बडा कोई नहीं देखता हूँ । पिपल का छोटा सा दो कमरों का करता है जहाँ पर पक्ष की महिलाएं बैठी थी । साफ घर के बगल वाले खाली प्लॉट पर बिछी दरियों पर बैठ गए । तभी बार आधा गया । आतिशबाजी के नाम पर बंदूक के दो चार फायर देखने को मिले । भूख से सबका पुरा हाल हुआ जा रहा था इसलिए चुप चाप दरियों पर बैठ गए । प्रियंका ने तो जैसे फ्रेंड कर लिया था वो अपने इरादे से नहीं पडती है । उसने खाना तो दूर पानी की एक फोन भी नहीं है । कॅापी आग्रह किया लेकिन सब का फिर एक तो उसकी शादी का हमें हुई थी । मुझे गांव की शादी का अच्छा अनुभव था । एक पुरानी शादी याद आ गई । तेरी आवाज बिल्कुल वैसे कुछ भी नहीं बदला । तभी याद ही टूट गई जब पत्तल सामने रख दी गई और भोजन परोसा जाने लगा । महेश का मन खाने से अधिक वापस जाने के जुगाड में लग रहा था । मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं था और कोई अपने घर पर बात भी नहीं कर पा रहा था । यदि मोबाइल का नेटवर्क आपके जाता तब भी कम से कम मैं अपनी वाइफ को यह घटता अनुभव तुरंत बताने वाला नहीं था । अब कोई घर फोन करके बता भी नहीं सकता था कि वापस कब पहुंच पाएंगे । पीपल के घर लैंड लाइन फोन भी नहीं था । मालूम करने पर पता चला कि टेलीफोन एक्सचेंज में खराबी के कारण पूरे नवगांव के लैंड लाइन फोन खराब है । ऐसी हालत में महेश बहुत गुस्से में था । कसम लंगोट वाले की ऐसी बेइज्जती कभी नहीं हुई । विपुल से ऐसी उम्मीद नहीं थी । तब मुझे चिंता वापस जाने किया । ना तो यहां रहने का कोई इंतजाम है और न बाबा जाने का कोई इंतजाम है । यार रात को कोई भी नहीं जाती । पहली बस कल सुबह सात बजे किया । सुबह ऑफिस कैसे पहुंचेंगे सर्दी साफ की लडकियाँ परेशान है उनके घर कैसे सोचते हैं की हमें किस मुसीबत में फंस गए । हमारी बातें सुनकर साथ में बैठे विपक्ष के एक सज्जन ने का कितने व्यक्ति है । हमारे बस खाना समाप्त होने के बाद वापस मेरठ जाएगी । हम आपको नवनियुक्त जी के भाई पास पर छोड देंगे । शहर के अंदर बस नहीं जाएगी क्योंकि पहुंचाने से हमें देर हो जाएगी । ये बात सुनकर पूरा साफ खुशी से झूम उठा । जहाँ तो बाल पहले खाने का इतने वाला भी गले के नीचे नहीं उतर रहा था । अब भूख से ज्यादा खाने लगे ऐसा केवल खुशी नहीं हो सकता है । हर पक्ष को धन्यवाद देते हुए बस में बैठे हैं । उनका बडा ही था के बस में जगह ना होते हुए भी हम लोगों को बस में जगह दी । स्टाफ की लडकियों को सेफ्टी और खुद ड्राइवर के कैबिन में बोनट पर बैठ कर जबान लडके बस में खडे खडे यात्रा करने लगे । रात के एक बजे नवयुक सिटी के भाई बात पर बस में हमें उतारा । चारों तरफ सन्नाटा । हम सब उतार हो गए लेकिन सबसे बडी समस्या बस अड्डे जाने की थी जहाँ हमारे स्कूटर, बाइक और कार पार्किंग में खडे थे । हम सब माने की मान पीपल को कोस रहे थे कि कहाँ बता दिया । रात के एक बजे कोई ऑटो रिक्शा भी नहीं मिला । स्टाफ की लडकियों को उनके घर सुरक्षित पहुंचाने की सबसे बडी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गयी क्योंकि मैं उम्र में सबसे बडा था । आधे घंटे इंतजार करने के बाद एक रोडवेज की बस रुके । बस रुकते ही मेरी जान में जान आई । हमने बस कंडेक्टर से बस अड्डे छोडने को कहा । बस कंडक्टर ने एक शर्त पर हमें बस में बिठाया की किराया पिछले स्टॉप से वसूलेगा । हम तुरंत कोई भी किराया देने को तैयार हो गए । हमारा लक्ष्य केवल अपने घर पहुंचने का बस अड्डे पहुंचकर अपने अपने स्कूटर, बाइक और कार उठाए और स्टाफ की लडकियों को उनके घर छोडने की सब की ड्यूटी लगाई । हर लडकी को हिदायत दी के घर पहुंचते ही मुझे पहुॅचकर । इस पूरे घटनाक्रम में सुबह के चार बज गए । उसके बाद न तो नींद आई नहीं चलाया । सहारा पतन तोड रहा था । आंखों में नींद थी लेकिन ऑफिस भी जाना जरूरी था क्योंकि स्टाफ की लडकियों ने ऑफिस आने से मना कर दिया और लडकों की भी तबियत पतली लग रही थी । गिरता पडता ऑफिस पहुंचा । पूरे ऑफिस में सन्नाटा पूरा स्टाफ लगा रहा था । ऑफिस में सिर्फ श्वेता ही नजर आई । मैं कुर्सी पर निढाल बैठे बैठे कब हो गया पता ही नहीं चला । दोपहर के दो बजे महेश ने आकर जगाया । बाकी समय हम तो सिर्फ शादी के ही बातें करते रहे हैं । मैं अपना कैबिन छोडकर महेश के साथ उसकी टेबल पर ही बैठ गया । पिता के कान हमारी तरफ थे । हमने अपनी पूरी भडास, नमक, मिर्च लगाकर निकालती । श्वेता के ऊपर बज्रपात के बेचारी के सारे सपने टूट गए । कहाँ तो उसने एक राजकुमार से शादी का सपना संजोया था और कहाँ वो राजकुमार एकदम पक्का निकला । बात को बढा चढाकर कहने की आदमी तो बहुतों की होती है लेकिन एक रुपये का पांच सौ रुपये विफल बनाया गया था । इस नंबर को सह नहीं सके और उसने तीन चार दिन बाद त्यागपत्र दे दिया । ऑफिस में सब टेबल के व्यवहार से नाराज थे लेकिन हम कुछ भी नहीं कर सकते थे । जो जैसा करेगा वैसा भरेगा वाली कहावत खाकर चरितार्थ हो ही गई है । एक सप्ताह बाद पालने जब ड्यूटी ज्वाइन के तब पूरे स्टाफ ने उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया । उसका सही मायने में खुद का पानी बंद कर दिया । ऑफिस में अब उसे सिर्फ काम की ही बात होती है । वो भी चुप चाप काम करता है क्योंकि सबको उसके हकीकत मालूम हो गई थी और कब कोष्ठी बंद हो गए । एक शाम को चप्पल ऑफिस से निकला तो श्वेता के भाई ने अपने तीन दोस्तों के साथ उसे घेर लिया और उसकी जमकर पिटाई करने लगे । हॉकी, क्रिकेट, बैट, बेसबॉल, बैट से जमकर धुनाई होगी । पिपल्स ओर से चिल्लाने लगा बचाओ बचाओ । लेकिन ऐसे मौके पर लोग तमाशबीन बनकर रहे जाते हैं । कोई बचाने नहीं बल्कि भीड में से भी दो चार ने अपने हाथ गर्म कर ली है । तभी हम वहाँ से दूसरे और महेश भीड को देखकर रुक गया । महेश कहा रुक गए । मैंने महेश को जल्दी चलने को कहा सर जी मुझे पुल की बातों पर अभी भी बहुत होता है । पुल को तो शादी में बिरादरी के आगे पीठ नहीं सका । आज इस पत्ते को पीसकर अपना गुस्सा शांत कर लो । महीने में भीड में घुसकर नेपाल पर तो चार लाख जमा दो चार मिनट बाद महेश को एहसास हुआ कि ये पिटने वाला बंदा अपना विपुल है । महेश ने मुझे आवाज भी सब्जी इधर आना यहाँ ॅ एक हम दोनों से बचाने की कोशिश करने लगे । उसके बचाव में हम भी पड गए । हमारे कपडे भी फट गया । हमें देखकर भीड में से दो चार आदमी बचाव करने आगे आए । पीठ को देख कर हमलावर भाग गए तो बल्कि पहुंच सफलता वाले पढाई हुई थी । उसकी आंखें सोच गई । शरीर पर जगह जगह नील पड गए । उसे पास के नर्सिंग होम में इलाज के लिए ले गए जहाँ से दो दिन रहना पडा । नर्सिंग होम में महेश ने जमकर में पाल को भाषण दिलाया । देख लिया हो तो अपने बडबोलेपन का नतीजा इतनी सुंदर, सुशील कन्या श्वेता का दिल तोड दिया । यहाँ क्या सपने संजोकर रखे थे उसने तो सब बर्बाद कर दिया । पूरे स्टाफ की नजरों में गिर गया । तो आखिर तुझे क्या हासिल हुआ? बता तो सही ये तो हमारा शक्कर करके हमारा समय पर पहुंच गए । पहनते तो आज क्रियाकर्म ही हो जाता है । कितना झूठ बोलने की क्या जरूरत थी । इन चीजों की कोई वैल्यू नहीं है । फॅमिली और कुछ नहीं । सच एक जन सबके सामने आई जाता है । अब तो समझ सबका ले आज की पिटाई से टेबल चुपचाप सुनता रहा । दर्द से कराह आ रहा था । महेश का भाषण चले पर नमक का काम कर रहा था लेकिन फिर भी दवाई तो पी नहीं पडती है । नर्सिंग होम में कुछ चल रहा है । हम अपनी भडास निकाल कर चल पडे । ऐसे अधिक हम कुछ कर भी नहीं सकते थे । आदमी अपनी आदत से मजबूर होता है । जहाँ पर भी ना तो उसकी आदतें बदलती हैं और ना ही कोई दूसरा उसको बदल सकता है । तो फिर उसी रास्ते पर चल पडता है । कुछ ऐसा ही डबल के साथ होगा । कुछ दिन खामोश रहने के बाद पुल के बोलने की आदत फिर से शुरू हो गए । लेकिन अब तो आप उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेता था । एक दिन पुल मेरे कैबिन में आया । सर जी आपकी एक हेल्प की जरूरत है । बॅाल अगर मेरे बस में होगा तो जरूर करूँगा सर, हमने नवगांव का मकान बेच दिया है । यहाँ अभियोग सिटी में सेक्टर बीस में सरकार ने प्लाट काटे हैं । एक प्लाट खरीदा है साॅल्वर कोठी बनवानी आपको मालूम है कि ठेकेदार मजदूरों के सर पर बैठना पडता है नहीं तो वो काम नहीं करते हैं । सुबह कुछ देर से आने की इजाजत मांगी है । शाम कुछ देर तक बैठकर ऑफिस का काम पूरा कर लूंगा । कोई काम नहीं होगा । सबसे हमने यहाँ किराये पर मकान ले लिया है । शाम को डाइट कोठी की कंस्ट्रक्शन का काम देख लेंगे । सर से बस एक महीने की बात है । मैंने उसको इजाजत देते हैं और सोचने लगा की एक महीने में कौन सी कोठी बनकर तैयार होती है । पीपल के जाने के तुरंत बाद महेश मेरे कैबिन में आया ऍम चलाने का भर बोला है । जिंदगी में कभी नहीं सुधरेगा । आप क्या हो गया? मेरी उत्सकता अधिक हो गए । समझे ॅ और पचास गज के प्लॉट काट रहे हैं । हाँ कौन सी कोठी बनवाएगा? मकान कहता शर्म आती है इसलिए कोठी कह रहे सर जी एक बात बताओ यदि उसके पचास गज में कोठिया तो मेरा एक सौ गज का मकान तो महल की कैटेगरी में आ जाएगा और आपका दो सौ गज का मकान तो लाल किले की कैटेगरी में आएगा । मैं महेश की बातें सुनकर हस दिया और जल्द बनकर महेश पीपल को चली । कभी सुनने लगा । घर बिल्कुल नहीं । एक महीना कहा था लेकिन लगभग छह महीने बाद मकान बनकर तैयार हो गया । मकान के मोहलत गृह प्रवेश पर विफल नहीं । पूरे साफ को आमंत्रित किया फॅसने कोई रूचि नहीं दिखाई । सब पडे । आॅफिस के काम करने में जुट गए । मेरे कहने पर भी सबने एकजुट होकर पुल के यहाँ जाने से मना कर दिया । मैं डबल जैसा भी है । हमारा सहपाठी हैं । बडे प्रेम से ग्रहप्रवेश पर बुलाया है । हमें वहाँ जाना चाहिए सर, यह प्रेम आपको मुबारक हो । मुझे चलने का मत गई है । मैं उसकी कोठी कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता हूँ । मैं अपने कपडे में खुश हूँ । महेश ने दो टूक इंकार कर दिया । महेश ऑफिस से दो घंटे चलती चलकर बनाई दे देंगे । उसकी कोठी हो या छोडा हमें से कुछ मतलब नहीं है । अपनी कोठी में खुश हम अपने झोपडे में खुश ट्रिपल मेरा तुम्हारा जूनियर है । उसने बुलाया है । औपचारिकता के वास्ते चलते हैं । एक बार उसका राष्ट्रपति भवन देखा था । अब की बार उसका लाल किला भी देख लेते हैं । मेरी बात सुनकर महेश खुशी से उछल पडा । कसम लंगोट वाले की आपकी इस बात में दिलबाग बात कर दिया । अब आपके साथ खुशी खुशी उसके लाल किले गए प्रदर्शन कर लेते हैं । शाम को चार बजे हम ऑफिस से चलकर विपुल कि तथा कथित कोठी पर पहुंचेगा । वो पुल का पचास गज के प्लॉट पर दो मंजिला मकान था । महेश ने चोट के लिए यार कोठी के दर्शन तो करवा देते हैं । बडी तमन्नाएं दीदार करने की । हाँ बिल्कुल बिल्कुल देखो । ड्रॉइंग रूम, रसोई, बाथरूम, बेडरूम अपनी आदत से मजबूर साधारण काम को भी बढा चढाकर बताने लगा की कोठी के निर्माण में पचास लाख रुपए लग गए । सुधर जाएंगे । बोला भी सुधर जाएगा । तो फिर चेतावनी दे रहा हूँ की पांच लाख को पचास लाख मत कर सही सही बता दे कितना खर्चा होगा । नहीं नहीं आपको पता नहीं कि हर चीज बहुत महंगी है । जिस चीज को हाथ लगाओ लाखों से कम आती नहीं । पुल आदत से मजबूर सफाई देने लगा । महेश शायरी करने लगा । कितनी भी ज्यादा सफाई न दे, गुनहगार समझेगी दुनिया बच्चे महेश ने शेर सुनाकर अपने दिल की भडास निकाली । व्यापम खेल खेल करके हसने लगा समय बडा बलवान है । कितना झूठ बोलना छोड दें । एक दिन देना । सच हम छोटे मानेंगे, सुधर जाओ, पुल सुधर जाएगा । हाईकोर्ट के कसम चोट की बात नहीं है । बिलकुल सच विपुल सफाई पर सफाई दे रहा था, जिसको हम छोटी मान रहे थे । हम ने वहां से खिसकने में अपनी बेहतरीन सोची थी कि विपुल से और अधिक बहस करना तो बेकार है । उसने मना भी नहीं । हमने उसे शगुन का लिफाफा पकडाया और विधालय मकान से बाहर आकर हम दोनों के मुख से एक साथ बात निकली । वॅाक रेट कभी नहीं सुधरेगा । बट बोला था बट बोला है और पर बोला रहेगा । अंग्रेजों के जमाने के बडबोले कभी नहीं सुधरते हैं ।

दिखावा 08

दिखावा, स्वास्थ्य के लिए सुबह की सर, दोपहर के भोजन के बाद हल्का आराम और रात के खाने के बाद हलकी बहुत बहुत जरूरी है । लेकिन आज के आधुनिक हाई फाई टेक्निकल भागदौड की जिंदगी में ये सब बेकार की बातें हैं । जिनके लिए किसी के पास कोई टाइम नहीं । जो प्राकृतिक है उसे हम दूर भाग रहे हैं, हमारी जिंदगी बनाती होती जा रही है । यहाँ सिर्फ दिखावा ही दिखावा, झूठी आन बान और शान के चक्रव्यूह में फंसकर निकलने का कोई उपाय नहीं । स्वास्थ्य से भी खिलवाड करते हैं । जो काम मुफ्त में सुबह के समय पार्क में शहर करने से हो सकता है, उस समय हम बिस्तर तोड के रहते हैं और शाम को या किसी दूसरे समय अपनी जेब ढीली करके जिम जाते हैं । क्यों ना जाए जान जाना आजकल का फैशन स्टेटमेंट है । बिना जान गए तो सेहत बनती नहीं है । सेहत बनानी है तब भी दिखावा किसी से मिलना है तब भी दिखावा चेक में वो वाली फोर्टी चवन्नी ना हो जो भारत सरकार ने चलन से बाहर कर दिया । पट्ठे ऐसा दिखावा करते हैं जैसे सात जन्म से खानदानी रही हूँ । हर राजा महाराजा के औलाद हूँ क्या हालत नहीं तो स्वाइन किसी मंत्री संतरी से काम नहीं है । अपने को आम आदमी बनाने का तो कोई बैठा तैयार ही नहीं है । जिस किसी को देखो अपने आपको खास समझता है । हर कोई किसी बीमारी की गिरफ्त में है । दिखावा आॅफर चलने वाले सीधे सच्चे इन्सान को अपनी चपेट में ले लेता है । वास्तव में देखा जाए तो ये दिखा देगा । वायॅस नाइनटीन से भी अधिक खतरनाक है । शनिवार सुबह उठने के बाद राकेश और लेना चाहे भी रहे हैं । रीना मुझे गोल गोल करके देख रही हूँ । कोई खास बात तो देखिए सेना ने चाय की चुस्कियों के बीच का तो कौन सी? तो राकेश ने हैरानी से पूछा तो तो कोई कहते हैं और क्या कह रही हूँ अपनी तो देखो । राकेश ने मुस्कराते हुए अपनी तोंद देखी । करीना अब सर्दियाँ खत्म हो गई है और मौसम भी सुहाना है । अब सुबह की सैर शुरू करते हैं । दिल्ली की जालिम सर्दी होती है बहाने बनाना छोडो राकेश सेहत के दीवाने कडाके की सर्दी और हिंदी में भी सुबह की सैर करते हैं । अब मौसम सही हो गया है । आज से सुबह की सैर शुरू कर हर रोज नहीं तो कम से कम छुट्टी वाले दिन शनिवार और रविवार तो कर ही सकते हो । कुछ तो तोंद कम होगी । लाला लगने लगी हूँ । मैंने शादी स्लिम ट्रिम लडके से की थी और अब तो बढाए जा रहा हूँ । तो उन देखकर हम किसी कॉरपोरेट में कार्यरत जनरल मैनेजर कम और किराना स्टोर के लाला अधिक लगते हूँ । पीना काश में किराना स्टोर का लाला होता हूँ । अपना मालिक होता । किसी की नौकरी तो नहीं करनी पडती है । मेरे नीचे नौकर कार्यरत होते हैं । एक लंबी आह भरते हुए राकेश ने रीना से कहा श्रीमानजी ज्यादा सेंटी होने की जरूरत नहीं है । जो नौकरी कर रहे उसमें खुश रहना से हो ना तो मैं किसने कहा कि मैं अपनी जॉब से संतुष्ट हूँ । बस कभी कभी दिल में खयाल आते जाते रहते हैं । चलो छोडो बेकार की बातों में ये बातें फुर्सत में टाइम पास कर नहीं है । तुम ही कह रही हूँ । आज से ही सहर आराम जैसे पहले करते थे । अब प्रतिदिन की शहर तो संभव नहीं है । ऑफिस जाने के लिए भागम दौड होती है । छुट्टी वाले दिन तो अवश्य सुबह की शहर करनी है । चलो रीना आज की सर पर चलते हैं । राकेश और रीना ने स्पोर्ट्स शूज पहने और घर के समीप डिस्ट्रिक पार्क में शहर के लिए जाते हैं ना मुझे बहुत अच्छा लगता है । एक तरफ खूबसूरत फूलों से सजा हुआ गार्डन और दूसरी ओर कच्ची पगडंडी जो ऊंचे ऊंचे पेडों से घिरी हुई है और दोनों के ही बीच में बच्चों के खेलने का मैदान । हाँ राकेश पेडों के जर्मन के बीच धूप के समय भी सर आराम से कर सकते हैं । गर्मियों में धूप जल्दी निकलती है तभी आराम से शहर हो सकती है । दोनों कुछ देर बाद एक बेंच पर बैठे हैं । क्या बात है थक गए हमारी बहुत दिनों बाद शहर की और वो भी कुछ लम्बी से । फैसले थकान हो गए । अब शहर की आदत नहीं रही । बदल झगडा हुआ था । बस दो मिनट में चलते हैं । राकेश रूठा सब्जी लेते हुए चलेंगे । पार्क के बाहर बढिया क्वालिटी की सब्जी वोट मिलते हैं । चलो टूट सब्जी लेते हैं । छुट्टी का दिन है तो बाहर को आराम करेंगे । पार्क के बाहर बहुत तादाद में फ्रूट सब्जी बेचने वाले सुबह के समय अपना क्या लगाते हैं जो नौ साढे नौ बजे तक बैठते हैं । रीना और राकेश फ्रूट खरीद रहे थे । तब राकेश की पीठ पर एक दमदार मुक्का पडा । राकेश लडखडा गया । राकेश इससे पहले कुछ समझ पाता कि मुक्का मारने वाले ने कहा और सुना । राकेश कमजोर हो गया । जरा सा हाथ लगाया कि गिर बडा रीना के और मुड कर कहा भाभी जी! लगता आप राकेश ध्यान ठीक से नहीं रख रही देना और अखिलेश ने मुड कर देगा पीछे । रमेश खडा था रमेश और राकेश की रिश्तेदारी थी । राकेश रमेश को मेरी कहकर बुलाता था । क्या यार इतने जोर का मुक्का मारा कि आपके आगे तारे नजर आने लगे और तू कह रहे कि आप लगाया? राकेश ने नाराजगी जताई छोड यार और बता क्या हो रहा है । रमेश ने राकेश का हाथ पकडकर हिलाते हुए सुबह की जहर क्या अब खरीद रहे यहाँ अच्छी क्वालिटी के फ्रूट मिलते हैं और मैं तो बता आजकल का फॅमिली में ही महारत से को अब तक मेरे नजदीक आ गया हूँ । सेक्टर तीन में कोठी बना लिया । रमेश ने बहुत आपसे कहा मेशी ग्रहप्रवेश तो बुलाया नहीं । पता ही नहीं चला कब कोठी बनवाई ऍम राकेश सेक्टर तीन की बात सुनकर हैरान हो गया । बेटा राकेश पांच सौ गज के प्लाॅट में कोठी बनाई है । पूरे ढाई मंजिल के रमेश नाॅट जलाया मैं तो बुलाएगा तब देखेंगे एड्रेस फोन नंबर तो दे । राकेश और रमेश दोनों एक दूसरे को अपना पता और फोन नंबर देते हैं । राकेश तो घर नहीं बदला । वही पुराना ऍम और फोन नंबर भी पुराना है । हम तो पुराने जमाने के हैं लेकिन तू तो मॉर्डन हो गया । घर आएगा तो बात करेंगे । अभी मैं जल्दी में हूँ । यहाँ से गुजर रहा था तो नजर आ गया तो क्या और जहाँ की हार हो जाता है आज तक नजर आ गया । ऍम और रविवार को शेयर करता हूँ । बाकी दिन समय नहीं मिलता । हालांकि राकेश को चार महीने बाद से हर करने आया था फिर भी उसने अपने को नियमित शहर करने वाला बताया । कहाँ काम कर रहे हैं आजकल देशी सारी बातें हैं, सडक पर खडे खडे करेगा । चलता हूँ पास में ही है । आराम से बैठ कर बात करते हैं । अभी तो जल्दी में हूँ । एक लाइन से मिलना है । राकेश मेरे पास आऊँ कोठी भी देखा था । डेरो बातें करते हैं मुझे सिर्फ शनिवार और रविवार समय मिलता है चल कल आ जा संडे है आराम से बात करते हैं । पेशे फ्रूट लेले बाॅडी खाता हूँ वहाँ मिलता नहीं है फॅार थोडा स्टेटस बडा इतना महंगा फ्रूट गले के नीचे से भी नहीं उतरेगा । अपना देसी फ्रूट एकदम बढिया है । इम्पोर्टेन्ट को पीछे छोड दी है । मेरे घर में हार चीज इम्पोर्टेन्ट मिलेगी । देसी चीजों में मेरी कोई रुचि नहीं । रमेश नहीं पर फिर ऍम भावी जी पुरानी देसी वाली है या दो ऍम क्या गाॅव जो बस घर में वही एक देती है हसते हुए अगले दिन रविवार को मिलने की तय करके दोनों प्रस्थान करते हैं । राकेश और रमेश रिश्तेदार है । रिश्तेदारी तो थोडी दूर की थी परंतु बचपन में दोनों के घर पडोस में है और एक ही स्कूल में पढते थे जिस कारण दोनों पक्के मित्र बन गए । राकेश तुमने देखा कमिश्नर गले में सोने की दो मोटी चैन पहनी थी । अंगूठा छोड बाकी उंगलियों में भारी भरकम अंगूठियां लगता है । काफी तरक्की कर रहे हैं । ऍम बन गया है । अच्छा ज्यादा आठ वर्ष बाद मिले होंगे । पहले तो छोटा काम था । अब लगता है कि अच्छा प्रॉफिट कमाया होगा । मैं बाहर में कब छप्पन फट जाए किसी को नहीं पता हूँ । हम नौकरी वाले तो बस कछुए की रफ्तार से चलते हुए पूरी जिंदगी काटते हैं । राकेश भी रमेश की बातों से बहुत प्रभावित हो गया था । क्या नाम के समय रीना और राकेश रसोई और घर के सामान की खरीदारी मार्केट में कर रहे थे । तभी मार्केट में राकेश और पंकज का आमना सामना हो गए । तीन चार साल पहले पंकज राकेश का सहायक हुआ करता था । लगभग एक साल नौकरी करने के पश्चात उसने नौकरी बदल ली थी । पंकज ने राकेश के हाथ सामान से भरे थैले को लेकर का क्या करो दुकान दुकान जाकर शॉपिंग कर रहे हो । आज जमाना फोन घुमाकर सामान मंगाने का है । ऑनलाइन शॉपिंग करो गुरु और वो भी इम्पोर्टेन्ट सामान की शॉपिंग करो करो । क्या देसी सस्ता सामान खरीद रहे हो उनका जहाँ ठहरे पुराने जमाने के दुकान पर सामान की क्वालिटी देखकर सामान खरीदने की आदत बन गई है और काऊ पंकज आजकल कहा हूँ पंकज की बात का राकेश ने जवाब दिया गुरु हमने तो तीन साल में तीन जॉब बदलने, अब अपने मजे मजे तीन लाख रुपए महीने का पैकेज जाए । ऍम कोई दूसरी जगह अंकुश तुमने सही अनुमान लगाया मैं तो उसे पुरानी कंपनी में काम कर रहा हूँ । कुछ देखा हूँ तुम्हारे जूनियर तुमसे ज्यादा कमा रहे हैं और तुम वहीं पे मुझे देखो जो बदल रहा है । चार लाख रुपए महीने का ऑफर है, पांच से कम नहीं जाऊंगा । अपना भी कोई स्टेटस है । गुरु अंदर की बात बता रहा हूँ । दो जगह बात चल रही है । देखो किस कंपनी को जॉइन करता हूँ । लेकिन एक बात पक्की पांच लाख के पैकेज से कम नहीं जाऊंगा । ऍम अच्छा ग्रुप चलता हूँ हूँ कहकर पंकज ने वितालिया रीना पंकज की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गई । पंकज सही कह रहा है कि तुम्हें भी दूसरी जॉब देखनी चाहिए तो मैं एक लाख के पैकेज में और तुम्हारे जूनियर पांच लाख के पैकेज पर पहुंच गए । जब बहुत तरक्की कर सकते हैं तो बहुत में क्या कमी है जो एक ही जॉब से चिपके हूँ । राकेश सिर्फ मुस्कुरा दिया वो श्रीमति जी को क्या जवाब थे उसने भी कह दिया ठीक है सोचते हैं रात को रमेश ने फोन करके संडे को लंच पर आमंत्रित किया । रविवार साढे बारा पौने वजह लेना और राकेश रमेश के निवास पहुंचे । कोठी पांच सौ वर्ग क्षेत्र में ढाई मंजिल की आलीशान बनी हुई थी । भूतल और प्रथम तल बंद पडे थे । रमेश दूसरे मंजिल में रह रहा था । कोटी की भव्यता उसकी बनावट से प्रतीत होती थी । एकदम नई बनी कोठी अपने मैं मिसाल थी जो आस पास की सभी कोठियों से जो है । रमेश और उसकी पत्नी रेशमा ने दिल खोलकर राकेश और रीना का स्वागत किया । खाने में कई प्रकार के व्यंजन बनाए । कुछ रंजन बाजार से भी मंगाए हुए थे । देशमा के हाथों में हमेशा से रह रहा है । आज वर्षों बाद रेश्मा के हाथों का जादू फिर से देखा है राकेश और रीना ने । खाना खाते हुए का मेरे हाथों के जादू में रीना का भी बहुत बडा हाथ है । सारा श्रेय रीना तो मैं जाता है जिसमें शादी के बाद बढिया व्यंजन बनाने से खाते हैं । देशमाने रीना को पुराने दिन याद कर रहे हैं जब उनका एक दूसरे के घर आना जाना बहुत अधिक था । मैं खाना तो लाजवाब और स्वादिष्ट मजा आ गया । अब कोठी तो देखा नीचे ताला लगाकर बंद हो रखा है । राकेश अभी नीचे लकडी का काम करवाना है । अब रहकर आराम से तसल्ली से ज्यादा बनवाऊंगा इसलिए ऊपर रहने लगा हूँ के सामने बैठ कर काम करवाऊंगा । बढिया कारीगर की तलाश में था । अब मिल गया अगले सप्ताह से काम शुरू दो घंटे खाने पर रमेश और राकेश अपने पुराने दिन याद करते रहे । लेना बैठे बैठे विचलित होते रहेंगे तो वहाँ अधिक देर तक रुकना नहीं चाहती थी । पहले सुबह की सैर पर रमेश और कर शाम को पंकज और आज फिर रमेश की कोठी देख कर लेना विचलित हो गई थी ना सोचने लगे कि राकेश जीवन की भाग दौर में बहुत पीछे रह गया । राकेश की तन्खा सिर्फ एक लाख रुपए महीना राकेश का सहायक बहुत जूनियर है, पांच लाख रुपए महीने की सैलरी पर है और रमेश व्यापार में करोडों अरबों रुपए कमा रहा है और शानदार कोठी बनानी और आकेश को नौकरी बदलने को कहने लगे । राकेश ने रीना को समझाया कि हमें खुद की किसी से तुलना नहीं करनी चाहिए, भले उसकी तनख्वाह कम है फिर भी संतोष है । पंकज में संतोष नहीं । रमेश व्यापार करता है और व्यापार में कभी भी छप्पर फट सकता है । रीना के बार बार आग्रह करने पर राकेश भी अच्छे अधिक सैलरी वाली दूसरी नौकरी ढूंढने लगा । तीन महीने बाद सुबह के समय राकेश ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था । कॅप्टन आ रही थी राकेश का फोन बजा पंकज का फोन था अलग पंकज गुरु दो मिनट बात हो सकती है । हाँ पंकज बात हो सकती हूँ । गुरु तुम्हारी कंपनी में कोई जॉब हो तो बताओ । पंकज ने फोन पर कार किसके लिए? जॉब देख रहा हूँ गुरु अपने लिए ये सुनकर आॅल पंकज हमारे पैकेज तो पांच लाख रुपए का है । मेरी सैलरी सिर्फ एक लाख है । ऍम जूनियर पोस्ट पर पचास साठ हजार से अधिक हमारी कंपनी देगी भी नहीं । हमारे मतलब की नौकरी मैं तो नहीं दे सकता है । कोई बात नहीं । गुरु तुम चिंता मत करो । गुरु में पचास हजार वाली जॉब भी कर लूंगा । हमारी कंपनी में छठ भी हो रही है । मुझे नौकरी छोडने का नोटिस मिल गया इसलिए करो तुम सैलरी को मत देखो । जो मिलेगी जब मैं जॉब कर लूंगा तो मैं मेरे काम के बारे में मालूम है । सब किसको? ऐसा प्रतीत होगा की पंकज के सामान में लडखडाहट थी और उससे नौकरी की जबरदस्त जरूरत थी । पंकज मेरी कंपनी में तो फिलहाल कोई जॉब नहीं है, कहीं और बात करता हूँ । पंकज से बात करने के बाद राकेश ने रीना से कहा मुझे ये नहीं मालूम था । पंकज इतना बडा कपूरिया तुम्हारे सामने की बात है जब वो मार्केट में मिला था और पांच लाख रुपए की तन्खा की बात कर रहा था । अब कहना है कि पचास हजार की भी नौकरी कर लेगा देना । मुझे लगता है कि वो एकदम झूट कह रहा था और रॉक डालने के लिए हवाबाजी कर रहा था । तीन साल पहले मेरी कंपनी में उसके पच्चीस हजार की सैलरी थी । मुझे ऐसा लगता है कि वह पचास साठ हजार वाली नौकरी कर रहा होगा । तभी पचास हजार के चलते हैं । ताजी हो गया यकीन नहीं होता । राकेश ऍम डालने के लिए कोई इतना झूठ बोल सकता है । हाई का पूरा पहाड बना दिया । पचास हजार का पांच लाख बना दिया और मैंने आपके ऊपर दूसरी नौकरी छोडने का दबाव बनाया । खुद भी तनाव में आ गई और आप पर भी दबाव बनाया । राकेश मत, मैं कैसे बताऊँ कि पिछले तीन महीने ऍम कोई बात नहीं लेना । कभी कभी जीवन में ना चाहते हुए भी हम खुद अपने ऊपर तनाव फोड लेते हैं । बहन परेशान था की तीन महीने से जॉब अप्लाई कर रहा हूँ और एक भी कॉल नहीं आएगी । चलो छोडो बातों को ऑफिस में देर हो जाएगी । अब आप इसके लिए चलता हूँ । शुक्र है बाकी का जल्द सामने आ गई वरना हमारी जिंदगी तो ऊपर हो जाती है । पता नहीं लोग बढ चढकर क्यों बोलते हैं । इतना छोटा दिखावा करने की क्या आवश्यकता है सेना ने राकेश का टिफिन पैक करते हुए अपने को दूसरे से अधिक अच्छा साबित करने के लिए लोग झूठ बोलते हैं और दिखावा करते हैं क्योंकि हमारे समाज में धनि व्यक्तियों को सलाम किया जाता है और निर्धनों का तिरस्कार होता है । चाहे निर्धन अधिक बुद्धिमान होगा । पंकज के फोन कॉल के बाद राकेश और रीना ने नई जॉब का तब अपने सिर के ऊपर से उतार देगा । अब दोनों आत्मसंतुष्ट । छह महीने बाद सेना मुझे ऑफिस टूर पर दो दिन के लिए चेन्नई जाना है । सुबह छह बजे की फ्लाइट सुबह चार बजे एयरपोर्ट के लिए निकलना होगा । परसों रात आठ बजे की वापसी की फ्लाइट घर पहुंचते पहुंचते । रात के बारह तो बज जाएंगे । राकेश ने घर आते सुबह कि टूर का कार्यक्रम बताया । दिन में फोन कर देते । मैं आपके कपडों का बैग तैयार रखती हूँ । बस अभी शाम को अचानक से कार्यक्रम बनाएंगे । ऍफ पर सारे काम याद आती हैं । राकेश ने जब चेन्नई एयरपोर्ट पर उतरकर मोबाइल ऑन किया । रमेश की कई मिस कॉल थे । हमेशा कम हो सकता है । बहुत दिन से रमेश से कोई बात ही नहीं हुई । सबसे पहले उसने रीना को फोन किया कि वह चेन्नई पहुंच गया । राकेश ऍम आप को पूछ रहे थे । मोबाइल पर भी बहुत सारे मिस कॉल । कोई जरूरी काम था । मिशन कुछ बताया गया था । राकेश ने रीना से पूछ रहा हूँ कुछ रुपयों की जरूरत थी कह रहे थे एक लाख रुपया चाहिए एक लाख रुपए ताकि चौकिया कह रहे थे । बहुत सख्त जरूरत है । तुम ने क्या कहा मेरे पास कहाँ से आ इतने रुपये घर खर्च के लिए चार हजार है । महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं । मैंने कहा कि आप चले गए हैं ऑफर स्टोर पर अच्छा देना । मैं मेरे से बात करता हूँ । देना से बात करने के बाद राकेश रमेश से फोन पर बात करता है । मैं क्या हुआ? घर भी गए थे । चार एक लाख रुपए की सख्त जरूरत है । मदद करते हैं । मैं भी लाख रुपए मेरी तन्खा है । महीने का आखिर चल रहा है । पहली को तनखा मिलती है । उसमें से होम लोन की किस्त कार्य उनकी किस चली जाती है । बाकी मैं बुरा घर चलता है । मेरे पास का ये मदद करना नहीं है तो उसे हर एक लाख रुपए की रकम तो तेरे लिए मामूली बात है तो हमारी आदमी दो मिनट में जगह हो जाता है । राकेश अपनी स्थिति स्पष्ट राकेश तेरे से ये उम्मीद नहीं दिया । रमेश एकदम नाराज हो गया ऍम हो रहा है । अभी तो स्टोर पर चेन्नई में होते लिया कर बात करते हैं । राकेश ने फोन काट दिया । दो दिन बाद राकेश दिल्ली वापस आता है, लेकिन ऑफिस के काम के कारण रमेश से बात नहीं कर सका । शनिवार छुट्टी वाले दिन राकेश और देना रमेश से मिलने उसकी कोठी जाते हैं । वहां पहुंचकर दोनों हैरान हो जाते हैं । कोठी के बाहर पहुंचा रहे व्यक्ति एकत्रित थे । रमेश के घर से सामान उतारकर ट्रक में रख रहे थे । हमेशा देश में चुपचाप एक कोने में खडे थे । रमेश का होगा । राकेश न हैरानी से पूछा । इतना सुनकर एक सज्जन राकेश से पूछ बैठेगा आपको मैं रमेश का भाई हूँ तो भाईसाहब आपको अपने भाई की करतूत तो पता होगी । फिर ये हुआ क्या? क्या नाटक क्यों कर रहे हैं? उन साॅन्ग आत्मक अंदाज में कहा मैं समझा नहीं । राकेश को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा कि माँ चला गया । पिछले छह महीने से घर का किराया नहीं दिया । इसलिए घर का सामान मैंने जब्त कर लिया । किराया देकर सामान चढा लेना । उन सज्जन ने कहा जो कोठी के मालिक रमेश मैं क्या हूँ? तुम किराय पर रह रहे थे पर तुम तो कहा था कि कोठी तुम्हारी है । सुनकर सचिन कोठी के मालिक है । भडक उठे । क्या? कहा आपने को कोठी का मालिक बताता था और काली होगा । गया तो किराया नहीं देते । ऊपर से अपने आप को टीका मालिक और बताते हैं । कोठी के मालिक ने ट्रक स्टार्ट करवाया । गोदाम में खाली करना मुझे पक्का यकीन हो गया कि इस भक्कर का सामान नीलाम करना पडेगा । रमेश कुछ नहीं बोला परंतु राकेश समझ गया कि किराया देने के लिए रमेश उसे एक लाख रुपए मांग रहा था । रमेश भी छोटी शान और दिखावे का शिकारी निकला । घर में नहीं दाने अम्मा चली बनाने इतनी शांत इसका और किस लिए दिखानी है यह चीजे बहुत खर्चा नहीं करूँगा । बढ चढकर बातों को बनाने का क्या फायदा । पंकज का झूठ भी अधिक दिन छुप नहीं सका और रमेश का भी सच उजागर हो गया । बडे बडे सही कहते हैं की जितनी चादर हो उतने पैर फैलाने चाहिए । राकेश और रीना ने एक दूसरे को देखा, एक दूसरे का हाथ पकडा और घर के लिए रवाना हो गए ।

मस्त मस्त मस्ती 09

मस्त मस्त मस्ती ये जो फिल्मी संवाद है ना बडा मशहूर था । बडी हिट फिल्म का जा सिमरन जी ले तो अपनी जिंदगी ऍम ससुरा ये डायलॉग आज भी सुपरहिट जिंदगी भी क्या चीज है जैसे हर यहाँ अपने ढंग से और अपने अंदाज से जीना चाहता है । अमेरिकल ये बात है अपना जीवन जी रहे थे । क्या हमने किसी और का जीवन दिया जो सिमरन को अपनी जिंदगी जीने की चोट मिल गई तो शायद हमें ना मिली हूँ । अपना जीवन है, वो क्या है जो सिमरन जीना चाहती है । वैसे तो मुझे भी नहीं मालूम कि वह जो जीना चाहती है कि आज जीने लायक है । मैंने जब ये प्रश्न किसी युवा से पूछा तब एक ही जवाब मिला तुम क्या जाना महेश बाबू की ये जो की होती है तो तुमने कभी ची नहीं वो जिंदगी हम जी रहे हैं । मिस्टर महेश सक्सेना हम वैसे तो अंग्रेजों के जमाने के जेलर नहीं है, आजादी के बहुत वर्ष बाद पैदा हुए हैं । फिर भी आज के युवा हमें पुराना बंदा कहकर पुकारते । अब इतने पुराने भी हम नहीं हैं । ऍम हूँ मना हो गया, मुझे तो पता ही नहीं हुई । बतावे ॅ जिंदगी देना चाहती है बहुत संघर्ष करने के बाद एक दिन हमें रोहन और राय माने बधाई दिया कि वह कौन से जिंदगी देना चाहते हैं । मस्त मस्त मस्ती वाली जिंदगी अब इस मस्त मस्त मस्ती वाली डायलॉग नहीं महेश सक्सेना का भेजा फ्राय कर दिया । बहुत दिन सोचते रहे कि ये मस्त मस्त मस्ती वाली जिंदगी आखिर किस चिडिया का नाम है जो उन्होंने आज तक नहीं देखी । अब जब भेजा फ्राई हो ही गया तो महेश ने पत्नी मीना का भी भेजा फ्राय कर दिया । रविवार सुबह चाय की चुस्कियों के बीच महेश सक्सेना ने पत्नी मीना के उठाते हुए कीर्तन बुलाया तेरे मस्त मस्त दो नाॅन आज सुबह श्रीमानजी को क्या हो गया जो रोमेंटिक गीत कौन बना रहे हो आपकी मैं की हुई सल्फ को कहते हैं घाटा । महेश ने एक और रोमांटिक गीत कौन बुलाया? महेश चाहे तो एक ही बनाई है तो पी रहे हो वही मैं भी पीढियों चाय पीते तो मैं आज क्या हो गया? ये मस्त मस्त मस्ती वाली जिंदगी का कमाल है । मीना जो हम नहीं जी सकें मैं आज सुबह सुबह हम कहना क्या चाहते हो हमारी बातें सुनकर मेरा भेजा । सुबह सुबह रही हो जाएगा और मेरा भेजा फ्राई चल रहा उसका क्या वोट पटांग बाते थोडा मुझे बहुत कम है पर हमारी तरह वेल ही नहीं हूँ तो दूसरों का भेजा फ्राय करते हो । अच्छा मीना एक बात पूछनी है तुमने कभी प्यार किया है? ये सुनकर मीना सन में रह रहे हैं कि सुबह सुबह पति देव हो गया गया । इससे पहले कि वह कुछ बोल पाती महेश ने दूसरा प्रश्न क्या क्या तुमने कभी किसी लडके का चुम्बन लिया है? अब यह दूसरा प्रश्न वनकर्मी ना परेशान हो गई । तभी महेश ने तीसरा प्रश्न किया कि तुम कभी किसी लडकी के साथ बाइक पर चिपक के बैठे हो और गाना गाया है भी के होटल तेरे? इस प्रश्न पर मेरा कुछ कहती मैं चौदह प्रश्न दागा तो कभी अपनी वाली जिंदगी जी है । जिस सिमरन ने जी थी अब मीना से नहीं रहा गया झट से महेश के हाथों से चाय का पहला छीनकर गुस्से से कहा है अब तो ठीक है पागलो की तरह ऍम और भडका हुआ देखकर महेश ने उसे समझाते हुए कहा ऐसी कोई बात नहीं है तब भी ठीक है । आजकल के युवा पीढी को देखकर जो प्रश्न मस्तिष्क में उथल पुथल घमासान युद्ध कर रहे हैं सोचा कि तुम से बात करके यदि कुछ समाधान मिलता है तो चित्त शांत हो जाएगा और पंजाबी तो बहुत हो चुका है । शायद नॉर्मल हो जाए और चाय की पहले तो देता हूँ छीन ली तुमने । दो गुट पीने तैयार फिर बात करते हैं ना श्रीमती चाहिए फॅस क्यों हो रही हो बिना से बात करके महेश का जब कुछ शांत हुआ तो मीना खचित अशांत और भेजा फ्राय हो गया । ऍम व्यस्त है । ऊपर से मन अशांत और भेजा फ्राय कर दिया पीना तो मालूम है मेरे आधीन एक युवा जोडा रोहन राहिमा काम करते हैं जो पडे प्रश्न आपने मुझसे पूछे उनका आपके हिसाब से क्या मतलब? अब मुझे उनकी उम्र से क्या मतलब? मीना बहुत लगभग एक महीने पहले की है । शनिवार का दिन था तो मैं मालूम होता है तो मैं घर के सामान के लिए थमा दी थी कि ऑफिस के पीछे वाले मॉल वाले सुपर स्टोर से ले आना । ऑफिस से दो बजे निकलकर । मैं मॉल में खरीदारी कर रहा था । हाँ, मेरे स्टाफ का रोहन और रही बात हाथों में हाथ डाले घूम रहे थे । दोनों अपनी दुनिया में मस्त थे तो उन्होंने मुझे देखा नहीं । मैंने देखा मुस्कुरा दिया । हर घर की ओर रवाना हुआ । सोमवार को लंच के बाद रोहन को काम से कैबिन में बुलाया परंतु भाषा अपनी सीट से लगा रहे थे । घडी देखी पौने तीन बज रहे हैं । ऍम तो दो बजे खत्म हो जाता है तो हंसी पर नहीं । महिमा को बुलाया तो भी सीट से नदारद मुखर्जी बाबू से पूछा तो पता चला कि लंच के बाद से आए ही नहीं । कमाल हो गया । इतना लम्बा लंच । मुझे मीटिंग में जाना । मुखर्जी बाबू को काम समझा कर चला गया । मंगलवार दोपहर लंच के बाद मुझे घर मीटिंग में जाना था । लिफ्ट खराब थी । मैं सीढियों से नीचे उतर नहीं लगा । ऑफिस पांच मंजिल पर है । तीसरे मंजिल पर पहुंचा तो देख कर दंग रह गया । रोहन और राइमा एक कोने में एक दूसरे के साथ आलिंगन में थे और दोनों के वोट बैठे हुए थे । तो मैंने टकला रुक गया तो दोनों प्रेमपाश में बने थे तो मैंने तक उनके चंबल बाजी को देखता रहा तो दोनों तीन दुनिया से अलग किसी और इस दुनिया में विचरण कर रहे थे । उन्हें मेरे वहाँ होने का कोई ऐसा ही नहीं था । उन दोनों को उनकी दुनिया में वही छोडकर मैं नीचे उतर गया । क्या बात कहते हैं? महेश क्या बात कर रहे हो भरी दोपहर में सार्वजनिक स्थान पर प्रेशर में हाँ, तो तले उंगली दबाते हुए मीना हिरानी के साथ बोले ठीक सुना तुमने? मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि दिन में ऑफिस की सीढियों में आलिंगन में बंधा वहाँ छोडा बेशर्मी की सभी हदों को पार कर देगा । अब हमारे का यूरोप में सार्वजनिक प्रेम प्रदर्शन मान्य । हमारे भारत वर्ष में यह खुल्लमखुल्ला प्रेम प्रदर्शन होगा, इसके उम्मीद तो मुझे नहीं । क्या की आपने अगले दिन सुबह ऑफिस में जाकर मैंने सर्कुलर निकाला कि कोई भी अपनी सीट से मुझे बिना पूछे कहीं भी नहीं जाएगा । ऍम जाना हूँ मुझे पूछना होगा जैसे स्कूल में मास्टरजी से पूछा जाता है । लंच आधे घंटे का है, राजस्थान में समय लिख कर जाएगा और वापस आकर फिर से समय देखा जाएगा । मेरे आदेश पर सभी ने विरोध जताया परन्तु मैं तब से मैं नहीं हुआ । मुखर्जी बाबू जो उम्र में मुझसे बडे हैं, उन्होंने एकांत में मुझे इस विषय पर चर्चा की । मुखर्जी बाबू मैं तीन साल से इस कंपनी में काम कर रहा हूँ । आपने देखा होगा कि मैंने कभी किसी को छुट्टी के लिए मना नहीं किया । किसी के देरी से आने पर कभी कोई एक्शन नहीं लिया । के आदेश सिर्फ रोहन और साइमा के लिए जिसके लपेटे सारा साफ आ गया है । आप उनके पिता सामान हैं । आपन पर नजर रखें । मैंने मुखर्जी बाबू को सारी बात बता रही हूँ । सक्सेना उन दोनों की नजदीक यहाँ तो सब जानते हैं लेकिन जो आपने बताया तो अनुचित है । इतना आगे नहीं बढना चाहिए । कुछ हो गया तो फिर दोनों को खामियाजा भुगतना पड सकता है । आपने दुनिया देखी है । मुखर्जी बाबू इसलिए आप से बात कर रहा हूँ । यदि वो प्रेम में है तो निर्णय करें कि विवाह करना है या नहीं । सोचे अपने परिवार से बात करें । प्रेम करना कोई अपराध नहीं । मैं वहाँ से पहले शारीरिक संबंध अनुचित मानता हूँ । उस दिन के बाद ऑफिस में मुखर्जी बाबू ने दोनों पर नजर रखनी शुरू की । ऑफिस में थोडा सतर्क हो गए । एक महीना बीत गया । ये संजोग समझे क्या दोनों का सक्सेना को जताना कि उन पर सेंसर बोर्ड का काम सक्सेना सिर्फ ऑफिस ताकि कर सकता है । ऑफिस के बाद हाथ में हाथ डाले शरीर चिपके हुए, कभी सीढियों में, कभी मॉल में, कभी ऑफिस से पार्किंग में जाते । रास्ते में दोनों देख जाते । सक्सेना देखते हैं और दोनों सक्सेना सर को जानबूझकर दिखा देंगे । सक्सेना अनदेखा कर आगे नीचे करके अपने रास्ते चले जाते हैं । देखते देखते वहाँ क्या खाॅ मेरे प्रश्न अर्थहीन है । आप की बात सुनकर प्रश्नों का महत्व जान गई । इनका उत्तर आसान नहीं है । आप जो खुद का जीवन जीने वाली बात कह रहे हैं । फिल्मों में तो डायलॉग सही लगते हैं, लेकिन जिंदगी ऐसे मस्त मस्त मस्ती के साथ जी नहीं जाती । आप ऐसे मस्ती से कुछ आनंद के पाल जी सकते हैं, लेकिन पूरी जिंदगी ऐसे नहीं जी सकते हैं । ऐसी जिंदगी जीने के घातक परिणाम भी हो सकते हैं । मीना हम अपने अनुभव के आधार पर कह सकते हैं । जिंदगी केवल मस्त मस्त मस्ती के लिए नहीं, सिंदगी को सामाजिक दायरे में जी जाती है । एक लक्ष्मण रेखा तो खींचने की आवश्यकता है ही, तुम अपने विचार व्यक्त करूँगा । महेश कुछ तो पी । डी । का अंतर है जैसे जनरेशन गैप कहते हैं और कुछ आधुनिकता का तक आ जाए । स्टार में करूँ पहला प्रश्न किया था क्या तुमने कभी प्यार किया? प्यार तो सभी करते हैं । परिवार के हर सदस्य से प्यार होता है । जीवन के किसी ना किसी मोड पर अलग अलग जनों से प्यार होता है । माँ बाप से फिर भाई बहन, सहेली, मित्र, फिर पति और बच्चे मैं इस प्यार की बात नहीं कर रहा हूँ । प्यार एक युवक युवती के बीच शादी से पहले वाला उस पर प्रकाश डाला । हालांकि आज से बाईस साल पहले भी प्रेम विवाह होते थे परंतु मैंने नहीं किया । अपनी बताओ कितनों के साथ अफेयर थे ऐसी ऐसी कोई बात होती तो आज तक छुपती । मतलब ही नहीं कॉलेज से निकले दो साल नौकरी की, फिर शादी हो गई यार । बाहर का समय कहा था । महेश अब समय ही समय मिल जाता है । कॉलेज के बाद परसों तक तो लडके लडकियां करियर बनाने पर ध्यान देते हैं । कुदरत ने हर काम का दिया समय तय किया है जो हम भूल जाते हैं । उम्र आने पर जस्ट उनकी मांग होती है । रोहन और राइमा भी इसी दौर से गुजर रहे हैं । करियर बनाने में उम्र अधिक हो जाती है और शादी के बंधन में कोई बंधता है नहीं मेरा तो होते हैं । प्रकृत्यै ही मुख्य कारण है । जिस कारण दोनों इतने समय है बाकी तीन प्रश्नों का भी यही होता है ना महेश ने मीना की ओर देखा बिलकुल ठीक है । फिर इतना परेशान क्यों हूँ? बिना ऍम के लिए चिंता रखता हूँ आप दोनों से बात करो उनके दिल की बात जाना ठीक है । मैं ना मैं उनसे बात करता हूँ । अगले दिन शाम को साढे पांच बजे महेश नहीं रोहन और राइमा से रुकने को कहा के बिना उससे मिले ऑफिस से जाना नहीं । साढे छह बजे सारा साथ चला गया । तब सक्सेना नहीं राइमा को बुलाया हूँ और बिना किसी औपचारिकता के सीधे मुद्दे पर बात करने लगे । सक्सेना ऍम क्या तुम रोहन से प्यार करती हूँ? ऍम हूँ सक्सेना तो मैं उसके साथ जीवन भर साथ निभाने के लिए क्या कुछ सोचा है? टाइम सर मैं कुछ समझी नहीं सकता है । मतलब शादी से क्राइम शादी के बारे में अभी कुछ सोचा नहीं है । सबसे ऍम रोहन से प्रेम करती हो तब वह बंधन में बंद कर सामाजिक स्वीकृति लेकर शारीरिक संबंधों में जा सकती हूँ । क्राइम शादी वो भी रोहन से कभी नहीं । सक्सेना उच्चतम प्रेम करती हो । जहाँ तक मैंने देखा है सीढियों में शारीरिक नजदीक के आते हैं इसलिए मैं तुम से बात कर रहा हूँ । टाइम शादी में उससे करेंगे जिसकी सैलरी फाइव फिर घर में क्या है? रोहन की सैलरी है उत्तर बीस हजार हो, उसमें होता क्या? आज के जमाने में सक्सेना प्यार को पैसों के साथ नहीं बोलते हैं । बिहार अनमोल है उसको पैसों से नहीं खरीदा जा सकता है । प्राइम फिल्मी बातें कर रहे हैं । ये सब सिर्फ फिल्मों में अच्छा लगता है । जीवन में सबकुछ रुपया पैसा है । सारी जरूरतें रुपया पूरा करता है । सक्सेना रास्ते में पैसों से अधिक प्रेम की जरूरत होती है । यदि प्रेम हो तो पैसों का भाव भी नहीं चलता । हस्ते खेलते जीवन की गाडी चलती है । टाइम सर आपकी बातें मुझे ना करें । मैंने भी शादी का नहीं सोचा । पहले करियर है फिर शादी तो ऑफिस की बात हो तो कीजिए । निजी बातों को मत करें कहकर रायमा कुर्सी छोडकर खडी हो गई । सक्सेना चुप हो गया उसका रायमा के ऊपर से नीचे तक ध्यान से शायद पहली बार देखा तक पांच फूट एक पतला शरीर, सांवला रंग चेहरा आकर्षक आॅक्सी कोई भी उस पर पैदा हो सकता है । देख कर रही हो जाने दिया और रोहन को बुला सकते हैं तो हम बैठे हैं । रोहन को उसी पर बैठ गया जी सर । प्रश्न सक्सेना ने राय मुझसे पूछे । वहीं रोहन से पूछे सकता हूँ मोहन क्या तुम राय मुझसे प्यार करते हो? रोहन जी सर सक्सेना तो मैं उसके साथ जीवन भर साथ निभाने के लिए कुछ सोचा है । रोहन सर, मैं कुछ समझा नहीं । सक्सेना मतलब शादी से है तो हम शादी के बारे में अभी कुछ सोचा नहीं है । सक्सेना यदि तब चाइना से प्रेम करते हो तो विवाह बंधन में बंध कर सामाजिक स्वीकृति लेकर शारीरिक संबंधों में जा सकते हो तो हम शादी वो प्राइम से कभी नहीं । सक्सेना उच्चतम प्रेम करते हो । जहाँ तक मैंने देखा है सीढियों में शारीरिक नजदीकी अधिक हैं इसलिए मैं तुम से बात कर रहा हूँ । रोहन जब वो खुद मेरे से प्लेट कर रही हैं । मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने में कोई आपत्ति नहीं । मुझे क्या होता है? बहती गंगा में तो सभी हाथ होते हैं । मेरे साथ संबंध है । क्या पता किसी और के साथ भी हो या फिर कर सकती है शादी में उसे नहीं करूँगा । शादी तो मैं घर वालों की मर्जी से करूंगा । सक्सेना अभी कुछ अनुचित हो गया तब उसके आज तो पर भी आ सकती है । तो हम तब जब लडकी कुछ सोचने को तैयार नहीं है, बिना शादी के शादी के मजे लेना चाहती है । तब आपको भी इस विषय में कुछ सोचना नहीं चाहिए । सर, अब ये बातें मुझे न करें । अभी शादी का सोचा नहीं । पहले करियर है फिर शादी, कोई ऑफिस के बाद तो कीजिए निधि बात ना करें कहकर रोहन कुर्सी छोडकर खडा हो गया । सक्सेना चुप हो गया । उसने रोहन को ऊपर से नीचे तक ध्यान से शायद पहली बार देखा । कद पांच फुट सात इंच गठीला शरीर गोरा रंग, चेहरा आकर्षण कोई भी लडकी उस पर पैदा हो सकती है । देखकर रोहन को जाने दिया । रात में महेश की मीना से बात हुई । बिना भी आश्चर्यचकित हो गए हूँ । प्रेम तो हमारे समय में भी करते थे कॉलेज में कुछ फ्रेंड्स रिश्तेदारों ने भी प्रेम क्या वहाँ भी किया । परंतु दोनों आधुनिकता को कहीं पीछे तो नहीं छोड रहे हैं? महेश आधुनिकता यही है लेकिन रिलेशन सुना है ये तो बिना इलेवन के रिलेशन बनाकर साथ रह रहे हैं । कोई बंधन नहीं हजार दिया जाता है । शायद ऐसे बिना बंधन के मस्त मस्त मस्ती वाली जिंदगी को ही जीना कहते हैं जो आज के युवा कहते हैं । जिले खुद की जिंदगी मीना एक उम्र के बाद जीवन साथी की जरूरत पडती है । जब जवानी चलती है तब ये बातें काम नहीं आती । मैं तुम ठीक कहती हूँ । लेकिन दोनों समझ नहीं रहे तो स्वतंत्र रहना चाहते हैं । विवाह के बाद बंधन होता है अपनी मर्जी काम परिवार के खतर त्याग अधिक करना पडता है । मीना अब मैं तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर देती हूँ मैं क्या तुमने कभी प्यार किया? मिलना था क्या? शादी के बाद? महेश क्या तुमने कभी किसी लडके का चुम्बन लिया मिला खा लिया है तुम्हारा विवाह के बाद मैं क्या तुम कभी किसी लडके के साथ बाइक पर चिपक कर बैठी हूँ और गाना गाया है फीके होते रहे? मीना इसका जवाब नहीं है क्योंकि आपके पास बाइक थी नहीं, कटआॅफ था जिसमें दो अलग अलग सी थी । चिपक ने का मतलब ही नहीं था । झूमता हुआ बस चलता था । मुझे डर लगता था कि कहीं मैं करना चाहूँगा । महेश कभी गया है तो नहीं ना बिना डर तो लगता था मैं ऍम जैसे अपनी खुद की जिंदगी जीने का सपना देखा है । मेरा जिंदगी जो बची रही हूँ उससे अधिक की कभी ख्वाहिश नहीं । सिमरन के बाबू जी ने कहा जैसे इमरान चीजें तो अपनी जिंदगी मेरे मम्मी पापा ने भी डोरी के समय वाले मिलकर कहा था जहाँ मीना जिले तो अपनी जिंदगी मैं तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी जी रहे हैं, किसी और की नहीं । महेश और बिना दोनों एक साथ मुस्कुराए जीवन मौज और मस्त मस्त मस्ती नहीं बल्कि समर्पण अपने से अधिक अपने जीवन साथी का ध्यान रखना है । थोडे में ज्यादा गुजारा समर्पण से ही होता है । मैं आपके मैं की हुई किसी को कहते हैं घाटा आपके मदभरी आंखों को कमाल कहते हैं । मीना मैं तो कुछ भी नहीं, तुमको हसीन लगती हूँ । इसको चाहत भरी नजरों का अमल कहते हैं । महेश और बिना के चीजें को ही मस्त मस्त मस्ती भरी जिंदगी कहते हैं मस्त हाल में बत्ती गुल हो गई महेश का फ्लाइट भेजा नॉर्मल हो गया ।

छमिया 10

छमिया ऑफिस में आते ही विकास ने एक नजर ऋतु पर डाली जो अपनी सीट पर बैठे चाय पीते हुए कुली किसन गप्पे लडा रही थी तो काम तो मैं एक दिन विकास नोएडा क्या ये तो तसल्ली से चाय पीने के बाद विकास के कैबिन में गई और उसके सामने कुर्सी पर बैठकर सिर्फ आंखों के इशारे से पूछा क्या है तो जम्मू से कुछ नहीं कहा । विकास ने भी आंखों से इशारा किया दो मिनट तक आंखों के आंखों से बात होते रहेंगे ऑफिस बॉय चाय के साथ बिस्किट भी लग गया ऑफिस बॉय दोनों का चुपचाप अंखियों से गोली चलाते मुस्करा दिया विकास ने उसे वही होगा और जवानी चल रही है अपने अच्छे मेरे लडे पडा सारी चर्बी उतार हुआ ऍम विकास ऍम का दिया ऑफिस बॉय की मुस्कुराहट रोनी सूरत में बदल गयी कैबिन से बाहर निकलते हैं उनको लाने लगा अखियों से गोली मैं रेट उसके गाने के अंदाज से स्टाफ के दिन के अंदर का माहौल समझ गया । आज तो छमिया बनकर आई है । विकास ने ऋतु के मिनीस्कर्ट को देखते हुए गा ऍम इतना खा जाने वाली आंखों से विकास को देखा तो बहुत भाव खाता है । छमिया बनकर घर से निकली हर किसी ने तो जताना होगा तेरी फॅमिली है क्या? इरादा रहा अभी शाम को विकास मेरे तो के सामने खुला प्रस्ताव रखा । मेरी बॉडी को जो सूट करेगा, वही पहनेंगे । तो आपने फालतू के आइडिया अपने पास रख जितने विकास को छोड दिया तो ज्यादा भाव मत्था । परसों सुबह फ्लाइट साइड जाना है । ईमेल डाल दिया । समझ रहे ना एक सप्ताह रुकना है अब तक क्यों तो इतनी कुर्सी से उठते हुए गा पूछ ले बडे से उसी ने एक हफ्ते का बोला ऍसे था जो उम्र में करीब वर्ष का था । ठीक है परसों एयरपोर्ट पर मिलेंगे कल छुट्टी की । मैं देख रही हूँ तो विकास के कैबिन से बाहर आ गई । ऑफिस में एक साथ काम करते थे । पार्टियों में घनिष्ठता स्वाभाविक है । एक प्रोजेक्ट में पूरे दिन चर्चा और काम में डूबे कर्मचारी ऑफिस को ही घर समझते हैं । आपसे मित्रता बढती है । घर में तो सर सोने के लिए ही जाते हैं । देर रात तक एक साथ काम करते हुए पुरुष और महिला जा पार्टी भी एक दूसरे के नजदीक आ जाते हैं । कुछ ऐसा ही है तो और विकास के बीच हुआ तो इंटीरियर डिजाइन और विकास जी फॅस एक होटल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं । घंटो एक दूसरे से प्रजेंट के सिलसिले पर बातें करना और होटल निर्माण पर निरीक्षण करते हुए दोनों एक दूसरे के बहुत अधिक नजदीक आ रहे हैं । अक्सर होटल निर्माण स्थल पर जाना होता तभी तो एक सप्ताह घोटाले स्थल पर निरीक्षण है तो रुकना पडता है । दिन तो निर्माण स्थल पर गुजरता और रात कंपनी के गेस्ट हाउस में जाती है । विकास और है तो एयरपोर्ट पर मिले तो आज पे खूबसूरत सेक्सी मिनीस्कर्ट पहनी हुई थी । तो फिर आगे तो आज एयर होस्टेस भी पानी भरेगी । विकास ने उसका खूबसूरत सेक्सी शरीर देखते हुए कहा एयर होस्टेस बनने में माँ बाप ने अडंगा डाल दिया । ऍफ होती तो विकास की बोलती बंद कर दी । एयरपोर्ट से सीधा साइट पर जाना है । आज वहाँ कोई काम नहीं करने वाला । सारे तुझे तारे वहाँ लेबर भी ज्यादा तो साइट पर आपने टांगे दिखाकर दंगा करा देना तो अपनी नियत सारा बाकियों का मैं देख लेंगे । एयरपोर्ट से विकास और है तो सीधे होटल निर्माण स्थल पर पहुंचेगा । ऋतू की उत्तेजक पोशाक देकर हर कर्मचारी निगाहें घुमाकर टेढी नजर से रिश्तों को ही तार रहा था । महिला कर्मचारी भी एशिया से जल बन गई की उनकी और कोई तो देख ही नहीं रहा । उन्हें अपने फिकस पर चिंता होने लगी कि किस तरह फिगर को शेप में लाया जाए । आज सभी आगे ऋतु की टांगों पर देखिए । ॅरियर विकास के सामने सबकी जुबान बंद थी पर अब तो आप है बोल रहे थे । शाम के समय मौसम में थोडी करवट ली । काले बादल छाने लगे । बारिश की आशंका पूरी थी । पूरे दिन काम करने के बाद शाम के समय कंपनी गेस्ट हाउस लौटते समय विकास ने रास्ते से पियर की छह बोतलें खरीदी । छह बोतल के अगर हो गए इतने विकास से पूछा मौसम आशिकाना हो गया है । बारिश होने की पूरी उम्मीद है । ऐसे मौसम में आपने छमिया को याद करते करते पीने के लिए खरीद दिया । अच्छा सारी कटक जाओगे । कुछ हम पिएंगे है । कुछ काम भी हो गए । अब हमारी छमिया तो घर है । इस छमिया के साथ बैठकर पियेंगे घबराती क्यों है? जितनी पि ऍफ आदि देरी आधी मेरी ज्यादा पीने की तरह हो तो और ले लो । कैसा उसमें मत करियो की कम हो गए ऍम इसके भी सूटकेस में रखी हुई है । विकास मेरे तो कभी पी नहीं खुला । निमंत्रण दिया और इसके साथ में लेकर चलते हो । कितने विकास से पूछा था । अब मैंने एक हफ्ते के लिए भेजा है । साइट के पास गया था । उस बना रखा है जहां ना बंदा ना बंदे की ज्यादा बिजनेस इसके साथ में लेकर चलता हूँ । मैं जो ब्रांड पीता हूँ, यहाँ जंगल में मिलता नहीं है । पूरा दिन तो साइट पर गुजर जाता है । ब्राॅन लेने दस किलोमीटर दूर जाएगा कौन? अब थकान मिटाने की दवा तो साथ रखनी पडती है । विकास ने ऋतु अपने साथ जिसकी का स्टॉक रखने का करन बताया । गेस्ट हाउस में टीवी पर म्यूजिक चैनल देखते हुए विकास ने व्हिस्की की बोतल खोल, फोन पर पत्नी बिना से बातें करते हुए उसके के जूस क्या ले रहा था तो शाम का क्या और नाइटी पहनकर आएंगे । फोन पर बातें करते हुए विकास नेतृत्व को देखा और देखता ही रह गया तो उस वक्त की सुंदर लग रही थी । पारदर्शी नाइटी में तो तुम आदत लग रही थी । मदहोश करने वाले कहते लाके! विकास के आंखों से लगा दी मौसम बरसात का शाम से बना हुआ था । तेज हवा के साथ तेज बारिश आरंभ हो गई । खबर के तेज फेक से खिडकी खुल गए तो खिडकी बंद करने लगे हैं । हालांकि झोंको से उसकी नाइटी छोटे और घुटनों से ऊपर नहीं होता । कुछ गई तृत्व की नॅान देखकर विकास उत्तेजित हो गया । ऍम हो गया । खिडकी बंद करके तो विकास के सामने कुर्सी पर बैठ गई । तेज बरसात की बौछार ने उसके नाइट होती है । नाइंटी शरीर से चिपक गई और विकास की नजरें ऍम किस से बात कर रहे थे । विकास से पूछा अपनी जान से बात कर रहा था विकास में पत्नी से बात समाप्त कर फोन काट कि आधारित है इस कातिल मौसम में । बस यहाँ भी कर सकते हैं कहकर विकास नाॅट अपने लिए बनाया और दूसरा टाइप बनाकर ऋतु की और पडा है । कितने क्लास फोटो से लगाया विकास और है तो आमने सामने की कुर्सियों पर बैठे थे । कंपनी के गया था उसमें । उन दोनों के अलावा कोई था नहीं । ऍम छुट्टी पर अपने गांव गया हुआ था । विकास ऋतु के समीप आ कर बैठ गया । उसके हाथ में विस्की का पटियाला था और दूसरा हाथ रहे तो के कंधे पर तो कुछ नहीं बोले । व्हिस्की के छोटे छोटे खून, फॅमिली विकास हादसे ऋतु का काम था । सहलाने लगा । अभी तो से हट गया । विकास का हाथ कंधे से कमर पर आ गया और ऋतु को उसने अपनी और की जाएगी ऍम गया विकास ने जिसके कर गिलास मेज पर रखकर मृतक अपनी बाहों में भरकर होठों पर चुंबन जड दिया । बाहर तेज गति से वर्ष रुकने का नाम नहीं ले रही थी और कैसा उसके अंदर विकास और है तो तो जिसमें एक जन हो गए । एक दूसरे में समय दुनिया से भी खबर प्रेमालाप के अंतिम छोर तक पहुंच गए । न खाने की सोता पीने की खबर ऍम का हूँ बस खोया हुआ थोडा जैसे आज परसों बात मिला हूँ । आज तो साडियों का हिसाब चुकता करना है । मदहोश ठक्कर चोर तो उन्होंने एक दूसरे को देखा और लिपट गए । सारी रात तो ना एक दूसरे के जस्ट उनसे खेलते रहे । बारिश पूरी रात होती रही और सुबह भी नहीं तो रुककर बारिश तेज हो जाती । तेज बारिश के साथ तेज हवा भी चल रही थी । होटल स्थल पर चल बदलाव के कारण निर्माण कार्य रोक गया । विकास और है तो केस हाउस में एक दूसरे की बाहों में कहते हैं अगले दिन सुबह कंपनी काॅलर नहीं, विकास रिपोर्ट लेने के लिए फोन किया । एक दूसरे की बाहों में कैद विकास और तो दुनिया से भी खबर हो गए । दोनों के मोबाइल फोन की बैटरी समाप्त हो चुके थे । फॅार का विकास से संपर्क नहीं हुआ । तब होटल साइट पर फोन कर के मैनेजिंग डायरेक्टर ने विकास से बात करवाने को कहा । बारिश के कारण निर्माण कार्य स्थगित हो चुका है इसलिए विकास साइट पर नहीं किया था । मैंने डाॅक्टर के फोन की तामिल करने फॅस पहुंचेगा आप लंच के समय साढे बारह तक । ढाबे से विकास ने खाना मंगवाया । ढाबे वाला खाना देकर गया था । उसका दरवाजा भेड कर चला गया तो आप सर जब कैसा उस पहुंचे तब दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था । दरवाजा खुला देखकर स्टोर अवसर पिलांकर निकट कटाए । डोरबेल बजाए बेधडक अंदर पहुंचे और वहां का दृश्य देखकर अचंभित हो गए । डाइनिंग टेबल पर बे खबर पेस मदहोश विकास और ऋतु अर्धनग्न एक दूसरे को चूमते और चिपकते खाना खा रहे थे । परिषद एक सौरभ सर पे ना संदेश दिए वापस लौट गया । होटल निर्माण स्थल पर विकास और है तो की प्रेमलीला जगजाहिर हो गई । अब हर किसी की जुबान पर विकास और ऋतु के चर्चे थे और नमक मिर्च लगाकर बढ चढकर बताए जा रहे हैं । ऍम फोन किया कि विकास से जरूरी बात करनी है । उसे तुरंत फोन पर बात कर रहा हूँ तो राॅक को भी विकास और ऋतु का प्रेमालाप बता दिया । ऍम लाकर कहा कि उसका संदेश अभी तुरंत दोनों तक पहुंचाओ की कल सुबह दोनों मेरे ऑफिस में होनी चाहिए तो अक्सर एक दम झटपट भागते हुए फिर से कैसा उस पहुंचा वहाँ कोई नहीं था । विकास और है तो वहाँ से जा चुके थे । उन दोनों ने स्टोर अक्सर को देख लिया था और तुरंत कैसा उस छोडकर वापस चले गए तो फॅार को बता दिया की दोनों के था उसमें नहीं है और उन का सामान भी नहीं कि सुनकर मैनेजिंग डायरेक्टर का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ गया । तुरंत एच आर हेड को बुलाकर दोनों को नौकरी से निकालने का आदेश दिया । विकास और है तो वापस लौट आए तो अगले दिन ऑफिस नहीं गई । ईमेल से विकास पर यौन शोषण और उत्पीडन का आरोप लगाकर लंबी छुट्टी मांगी । उसने कंपनी कैसा उसमें विकास द्वारा बलात्कार का आरोप लगाया । विकास ऑफिस पहुंचा तरह उसको अपने कैबिन में बैठने नहीं दिया । कंपनी की सिक्योरिटी ने उसे गैस विजिटिंग रूम में बैठा दिया जहाँ वो मैनेजिंग डायरेक्टर के आने की प्रतीक्षा करने लगा । ऍफ इसमें आने के बाद विकास से नहीं मिले । पूरे प्रकरण पर विचार किया और एच आर हेड से विचार विमर्श किया । बलात्कार के आरोप पर यौन शोषण समिति का गठन किया और दोनों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया । एच आर हेड ने विकास को समिति के सामने उपस्थित होने का समय बता दिया । बलात्कार का आरोप संघर विकास ने मेरे को फोन किया, लेकिन उसका फोन बंद मिला । उसके घर गया लेकिन तूने मिलने से मना कर दिया । घर पर ऋतु के माता पिता के सामने उसने बात करना उचित नहीं समझा । घर की गाली पर ऋतु की प्रतीक्षा करने लगा । लेकिन तो तीन दिन तक घर से बाहर नहीं । तीन दिन बाद ऑफिस में दोनों ने यौन शोषण समिति के सामने पेश होना था तो घर से निकली । तब विकास ने अपनी कार उसकी कार के सामने लगाकर उसका रास्ता रोककर बलात्कार के गलत आरोप लगाने की वजह पूछे । इतने शोर मचाया और कुछ लोग एकत्रित हो गए । विकास किसी लफडे में पढना नहीं चाहता था । इस कारण वो चुपचाप रास्ते से हट गया । ऑफिस में समिति के सामने दोनों एक दूसरे पर बरस पडे । विकास तुमने कलाकार का गलत आरोप क्यों लगाया तो आरोप सही है । ऐसा उसमें मुझे अकेली देखकर तुमने मेरे कपडे फाडे और सफर दस्ती शिवधन क्या विकास मैंने कोई जबरदस्ती नहीं की । तब अपनी मर्जी से क्या है? तुमको बच्ची नहीं हूँ, चालीस साल की हो रही हूँ दोनों ऍम रखें गुलछर्रे उनके साथ फिर मेरे ऊपर मैंने तुझे कौनसा रस्सी से बांध रखा था । फॅसे जबरदस्ती कौन कर सकता है तो नारी कमजोर और अपना होती है तो मेरा फायदा उठाया । व्यक्तिगत लांछन मत लगाओ । मेरा बॉयफ्रेंड है या नहीं इसका कोई आता नहीं । जब तुम ने जबरदस्ती की है, जा रहे हैं, कृपा करके व्यक्तिगत लांछन मत लगाई है । सिर्फ मुद्दे पर बात कीजिए । विकास व्यक्तिगत लांछन नहीं लगा रहा । सिर्फ ये बता रहा हूँ कि जो लडकी तो रख दिया वो दूध की धुली नहीं, उनके साथ क्या करती है । खुद का मतलब मैंने कोई जबरदस्ती नहीं, सिर्फ बहती गंगा में हाथ हुए हैं । सर साहब लगाया खुद शुरू हो गई तो मैं खुद की भी । मैंने गले में तो जबरदस्ती नहीं डाली थी । तो जब भी मुझे समिति से इंसाफ नहीं मिला तो मैं पुलिस में केस दर्ज कर रहा हूँ कि विकास उसे स्टोर से पूछ लो कि मैंने जबरदस्ती की या सबकुछ आपसी रजामंदी से हुआ । उसने सब देखा है । मैंने ॅ दोनों से अलग अलग बात की तो बलात्कार की बात पर अडी हुई थी और विकास आपसी रजामंदी पर खडा हुआ था । अपने अनुभव के आधार पर मैनेजिंग डायरेक्टर ने फैसला सुनाया तो जो भी सचिन सत्यम और विकास जानता हूँ कंपनी में तुम दोनों बदनाम हो चुके हो । तुम अपनी शिकायत वापस लो । इस शिकायत का पूरा रिकॉर्ड तुम दोनों के सामने नष्ट कर देते हैं तो और विकास नंबर इसी समय इस्तीफा दो और ऍम कभी नजर मत आना । पुलिस में जाना चाहूँ और इसके इस को आगे बढा रहा है । आपने सौ में से बाहर जाकर करूँ तो और विकास ने फौरन त्यागपत्र मैनेजिंग डायरेक्टर को दिया जिससे फौरन मंजूर किया गया । पैसे बाहर आकर विकास है तो का हाथ पकडकर रास्ता रोका तेरे मन में क्या है की तो बता दें होटल मुस्कान के साथ तो मैं जवाब दिया ऍम संकर विकास के होश उड गए क्या कह रहे हो तो शादी कर ले अच्छे हैं सिर्फ इतनी छोटी से ख्वाइश है हमारी छमिया विकास मैं शादीशुदा हूँ तो बडे बडे बच्चे हैं तो छोडने उन को आपने छमिया की इतनी छोटी सी बात मानने को तैयार हो जाओ अभी इसी टाइम तेरे साथ चलने को तैयार है तेरी छमिया विकास तो ऍम किसी से भी कर लेंगे मेरी जिंदगी खराब करने पर क्यों तो दिया तो जब बात खुल गई है तब मैं अकेले बदनामी का मूल्य तो देखिए तब तब विकास इतनी गिरी हुई हो सोचा नहीं था मेरे ऊपर इल्जाम लगाकर क्या मिला? तुमको तो तो सर ने देख लिया और खबर आग की तरह फैली है । तब लडकी होकर चुपचाप क्यों चुप रहती तो मेरा गलत फायदा उठाते हैं क्या नहीं हो सकता हूँ वो कितना तो मैं पडेगा । विकास तिलमिलाकर रह गया और ऍम अस गान के साथ कार स्टार्ट के इकलौटे चौहारी की तरह है तो की कार को दूर ज्यादा हुआ । वो देखता रहा जमिया उसे चित करके चली गई तब ।

राम नाम सत्य हैं 11

राम नाम सत्य है । राज्य में चुनाव की घोषणा हो गए । इसके साथ ही चुनाव सहिंता लागू हो गए । सत्तारूढ दल ने आंतरिक सर्वेक्षण करवाया था जिसमें चीज बताई गई राज्य के मुख्यमंत्री अभिलाष लेकिन पार्टी के मसीहा उनके पिता और राजनीति की एक लंबी पारी खेल चुके छत्तरसिंह हैं । पिछले चुनाव में सफलता से जीत के बाद स्वयं मुख्यमंत्री नहीं बने । अपने पुत्र अभिलाष को मुख्यमंत्री बनाकर राजनीति के गलियारे में सबको चौंका दिया था और अपने पुत्र को राजनीति में अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया । समय के साथ राजनीति के दांवपेच भी बदल गए । परंपरागत तरीके अब हाईटैक हो गए । अभिलाष ने राजनीतिक सलाहकार किशोरीलाल को पार्टी की चुनावी रणनीति तय करने की जिम्मेदारी सौंपी । अभिलाष के इस निर्णय से छत्तरसिंह नाखुश थे । परंतु पुत्र की जिद और पढते काट के सामने छिहत्तर रन की कुछ नहीं चली । मीडिया में विपक्षी दल की जीत के कयास लगाए जा रहे थे । कोई कांटे की टक्कर बता रहा था और कोई विपक्ष की शानदार जीत अभिलाष पता को सुनिश्चित जीत का भरोसा दिला रहा था । मीडिया में अपनी कमजोर स्थिति देखकर छत्तरसिंह ने मीडिया को अपने आवास पर बुलाया । नमस्कार सर नमस्कार जाए तरह चुनाव में आप अपनी पार्टी की कितनी सीट पर जी देख रहे हैं चयन हमारी पार्टी राज्य में नंबर एक है और चुनाव के बाद भी नंबर एक ही रहेगी और अगली सरकार हमारी ही बनेगी । यदि आपकी पार्टी चुनाव जीतती है तब मुख्यमंत्री आप बनेंगे या बिना चीज रहेंगे? जयंत पार्टी को अविनाश पर पूरा भरोसा है । अगले मुख्यमंत्री अभिलाष के रहेंगे सर यही गठबंधन की सरकार बनती है । तब मुख्यमंत्री के पद पर आप किसको देखना पसंद करेंगे जब हमारी पार्टी को संपूर्ण बहुमत मिलेगा और मुख्यमंत्री के दावेदार सिर्फ अभिलाष है । किसी अन्य का मुख्यमंत्री बनने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है । हमने राज्य का विकास किया है । जनता विकास पसंद करती है, हमारी जीत होगी और अविनाश ही मुख्यमंत्री बनेंगे । आपने सत्तारूढ पार्टी के मसीहा श्री सिंह से सुना पे संपूर्ण रूप से आश्वस्त हैं । चुनाव में उनके दल को संपूर्ण बहुमत मिलेगा । मैं क्लाइविंग टीवी से जयंतकुमार बलोच कैमरापर्सन मिथलेश गुप्ता के साथ चुनाव की गर्मी पडने लगी । विपक्ष का पलडा हर रोज भारी होने लगा । अभिलाष को चुनाव विशेषज्ञ किशोरीलाल की रणनीति पर पूरा भरोसा और विश्वास है । जनता को पांच वर्ष में एक बार अपने प्रतिनिधि चलने का अवसर मिलता है । जनता ने बटन विपक्ष पर दबा दिया सत्तारूढ दल चुनाव में पूरी तरह से हार गया । इतनी बुरी हार की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी । दल के मुझे अच्छा अंतरसिंह हार से पूरी तरह बौखला गए । चुनावों से पहले अभिलाष, किशोरीलाल और दूसरे पदाधिकारियों ने दल की स्थिति काफी मजबूत बनाई थी । सौ सदस्यों की विधानसभा में सिर्फ पंद्रह सीट मिली । मुख्यमंत्री अभिलाष के छोटे भाई की पत्नी यानी के मसिया छत्तरसिंह की पुत्रवधू चुनाव हार गई । पुत्रवधुओं की हार को छह सिंह बर्दाश्त नहीं कर सके । परिवार का सदस्य कैसे हार गया । दल के सदस्यों ने धोखा दिया । उसको छोटी रिपोर्ट दे की जीत पक्की है । हार के बाद मीडिया को विनम्रता से बयान दे दिया की जनता का आदेश सिर आंखों पर और राज्यपाल को इस्तीफा दे दिया । जो जहाँ डूब गया उसमें कौन सवारी करेगा । जहां छिहत्तर सिंह के निवास पर लोगों का जमावडा होता था अब वहां सन्नाटा छाया हुआ था । छत्तरसिंह ने सरकारी बंगला छोड दिया और शहर से दूर गांव में पुश्तैनी मकान में रहे चलेगा । अकेले में हार का अवलोकन करने लगे । क्यों उसको झूठी रिपोर्ट देकर दिलासा दिलाया । हार जीत तो होती रहती है । अगला चुनाव पांच वर्ष बाद होगा । उस में फिर मौका मिल सकता है परन्तु विश्वासघातियों को छोडना नहीं, सही रिपोर्ट देते, तब कम से कम अपने परिवार की प्रतिष्ठा और साहब को मिट्टी में मिलाने से बचा लेते हैं । पुत्रबधू की हार हर था । पूरी प्रतिष्ठा ही पानी में बह गए । पुत्रवधू के चुनाव में हार पर हर आदमी उनके ऊपर धोखा है । छत्तरसिंह गांव में मीडिया से दूर सिर्फ अपनी पत्तियाँ तो विश्वास पात्र व्यक्तियों के साथ खामोशी से रह रहे थे । एक महीना बीत क्या क्षेत्र सिंह बस सोचते ही रहते । कुछ संवाद पत्नी से करते हैं और फिर काम सन से बैठ जाते हैं । एक दिन सुबह टहलते हुए छत्तरसिंह ने अपने दोनों विश्वासपात्रों मुसद्दीलाल और चुन्नी लाल को बुलाया तो कुछ तो बोलिए । हमें आपके खामोशी से डर लगता है । आपको इतना खामोश और अकेला कभी नहीं देखा । मुसद्दीलाल ने बहुत धीमी आवाज में कहाँ मुसद्दीऑफिस चल नहीं तुम दोनों मेरे सबसे अधिक विश्वासपात्र । मैं तुम्हें अपने परिवार का हिस्सा मानता हूँ । छत्तरसिंह ने पत्थर की बेंच पर बैठे हुए कहा, और इसमें कोई दो राय नहीं । आप हमारे माँ बाप है । आप के अलावा हमारा इस दुनिया में कोई और नहीं तो उन्होंने एक सफर में कहा । छत्तरसिंह ने उन दोनों को बैठने को कहा । दोनों जमीन पर बैठकर छत्तरसिंह कुर्सी पर बैठने को कहा । दोनों कुर्सी पर बैठ गए । ऍम तो एकदम सट कर बैठ गए । सुना पुत्रवधू के चुनाव क्षेत्र का प्रभारी कौन था? कुसूर बनना था और दल की रणनीति किसकी जिम में थी? किशोरी लालकुॅआ ध्यान से हूँ । मुन्ना को यहाँ लाओ । चुनाव के बाद वह एक बार भी मुझे नहीं मिला । बडा आदमी बन गया है उसके पास मिलने का समय भी नहीं ठीक है । आपके कदमों में पडा होगा । अभी का सीट कर लाते हैं । सुनो उसको अकेले लाना उसके साथ और कोई नहीं होना चाहिए और या नहीं सीधा हमारी स्टील रोलिंग मिल मिलेगा ना । दो तीन बाद नहीं मालूम ना दो दिन बाद मुसद्दीलाल और चंदीला मुन्ना काॅलिंग मिल पहुंच गए और ऍम हम मिल में हैं । चुन्नीलाल छत्तरसिंह को फोन पर सूचना दीजिए बनना कि कुछ हजार करो । हमारा मेहमान है जो उसको पसंद खिलाफ और खिलाओ । बकरे को मोटा करूँ मैं थोडी देर में पहुँचता हूँ । छत्तरसिंह के बाद शंकर मौसम चलने नहीं मुन्ना के अगर खाने का ढेर लगा दिया दो घंटे बाद छत्तरसिंह मिल पहुंचे मुन्ना कैसे हो बस आप की कृपा है । मनाने उठकर छत्तरसिंह के पैर छुए छत्तरसिंह उसके कमीज का कॉलर पकडकर पेट में दो लाख जमा मुन्ना मुझसे खरीददारी क्योंकि मुझे और चलने छत्तरसिंह का इशारा समझ गए और दोनों बनना के ऊपर फिल कर दे । दनादन लात और घूंसों से जमकर पिटाई की । नाथ भरा हो गया सब्जी माफी मांगता हूं, छोड दीजिए । मैंने कुछ नहीं किया । चुनाव मेरा काम पानी की तरह बाहर ही थी । पिछले विधानसभा में पैसा सीट थी और इस बार सिर्फ पंद्रह कोई बात बार करेंगे । मेरी पुत्रवधु हार गई दो नहीं आ रही है । मैं हारा मेरी इज्जत प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल गई और दो मुझसे झूठ बोला की जीत हमारी कहकर । फिर तो लाख मनना के ऊपर जमादि मुझे माफ करो । वोटरों का मूड नहीं । भाप से का छूट क्यों बोल रहा है? पांच चुनावों का अनुभव है । मीडिया को कुछ भी बोले पर अंदर के बाद हमें मालूम होती है की कितनी सीट मिलेंगी । बता कितने पैसे खाए हैं विरोधियों से मेरे तो पूरे डकारकर अब सजा मिलेगी हूँ काम हो जो मूॅग सर में बोले ऍम नहीं की एक चीज निकले और बेहाल मुन्ना को मुसद्दी और चुन्नी ने दो और मजदूरों की मदद से उठाया और भट्टी में डाल दिया । राम नाम सत्य है, सत्य है, सत्य है, सत्य बोलो सत्य है कहकर छत्तरसिंह मिल से बाहर आ गए । ऍम ना की हड्डियाँ राख में बदल गए । काम नाम सकते हैं । सत्य बोल तो सबके बोलते बोलते मुसद्दीलाल और चुन्नीलाल भी रोलिंग मिल से बाहर आ गए । होना के कार को नहर में थे तो छत्तरसिंह कहकर अपने घर पहुंचे । थोडी देर बाद मतलब और चुनने भी छिहत्तर सिंह के पास आ गए हूँ । काम संपन्न हुआ । ठीक है टाॅक मुन्ना की हड्डी तक नहीं बचे हैं सत्तारूढ दल को ढूंढने तो मुन्ना किस दुनिया में है और आपके होते हमें कोई जानता नहीं है । अब किशोरी लाल की बारी है । लडके को समझाया था कि विदेशी दावपेच भारत में काम नहीं आती । मति मारी गई थी के चुनाव रणनीति किशोरीलाल के हवाले कर दी । इतना पे अगर कभी नहीं हुआ था, तीर नहीं करनी कल परसों में उसको यही ठिकाने लगा दो नहीं तो सब सावधान हो जाएंगे । कुटिल मुस्कान के साथ । मुसद्दीलाल और चंदेला एक स्वर में बोल हैं । काम नाम सत्य है, साॅस सकते हैं ।

इगो 12

ईको अब ये जो ईगो नाम के चिडिया है और अहंकार नाम का कबूतर है बहुत ही कुत्ती चीज क्या का? एक ही चिडिया कबूतर नहीं कोई बात नहीं आप कुछ भी चीज बडी होती है भाई साहब और बहन जी ये जिसको काट लेंगे तब ना तो को इंजेक्शन काम करता है और ना इसका इलाज हकीम लुकमान के पास है किस्सा सुना देता हूँ लडके का नाम राजन उम्र चौंतीस वर्ष पे शाॅल वेतन तो लाख रुपए महीना जैसा नाम वैसा रंगरूप गोरा चिट्टा खूबसूरत स्मार्ट ऍम बढिया जीवन शैली घर समाज में इज्जत सब कुछ मिल गया इस छोटी सी उम्र में और क्या चाहिए है? एक कमी है जीवन साथी लडकी का नाम हर्षकुमार उम्र उसके भी चौंतीस वर्ष । कॅरियर वेतन ढाई लाख रुपए महीना जैसा नाम वैसा रंगरूप फंस की तरह गोरी चिट्टी खूबसूरत ब्यूटीफुल, बढिया जीवन शैली हम समाज में इज्जत और क्या चाहिए? क्या कमी है जीवन में कमी तो सिर्फ एक जीवन साथी क्या जब करियर पर जीवन का सारा लक्ष्य समझ जाता है तब ये जो शादी पे आना उसका कोई मतलब नहीं होता है । कौन बंधन में बंध है जब आजादी के कीडे ने काट रखा है प्रबंधन के कीडे के आगे अपना बदन क्यों रखें आप? कल मुझे बात नहीं बना तो आपने अपनी कंपनी में इस छोटी उम्र में शीर्ष पद पर पहुंच गए । समय से पहले काम समाप्त करने का जुनून दोनों में है नहीं सुनने की आदत तो बिल्कुल ही नहीं । इंग्लिश का एक और हिंदी का अहंकार दोनों में कूट कूटकर भरा हुआ है । दोनों अविवाहित परिवार का दबाव दोनों पर व्यवहार करने के लिए बहुत था किन्तु परन्तु करियर के खातिर दोनों चौंतीस तक विवाह के बंधन में नहीं बने । महत्वकांशा और अहंकार कोर्ट कोर्ट का दोनों के चश्में और दिमाग में भरे हुए थे । अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता । उनके फितरत बन चुकी थी तो स्वाभाविक ऐसे जब बिन मांगे मोदी मिल जाएगा । इस इस वहाँ के कारण रिश्तेदारी और कंपनी के सहपाठियों में विवाह के बाद पानी नहीं । हम तो खैर ऑफिस तक सीमित होते हैं परन्तु ये हमारी आदत है और हमारा बहुत होता है । उन की गति बहुत तीव्र होती हैं । दूर दूर तक बिना टिकट के पहुंच जाती है । राजस् बेंगलुरु में और हर्षा कुमारी हैदराबाद में कार्यरत । आप काम देखने खल का सब कुछ बान चला गया और एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से दोनों का पिता हूँ । क्या चट मंगनी और पट दोनों परिवार खुश के । आखिर दोनों को पसंद का जीवन साथी मिला है । वहाँ से पहले तो उन्होंने सिर्फ एक चीज देखी । वेतन और कंपनी में पोस्ट । दोनों विभाग प्रमुख है । उनके ऊपर सिर्फ मुख्य कार्यकारी अधिकारी । दोनों के परिवार दिल्ली में रहते हैं । पिछले विभाग दिल्ली में संपन्न हुआ । पंचतारा होटल में शानदार व्यवहार संपन्न हुआ । दोनों परिवारों ने तेल खोलकर अपने आह्वान पूरे किए । सारे इंतजाम परिवार वालों ने कर रखे थे । दोनों तरफ से वहाँ से तीन दिन पहले ये आए और विवाह के तुरंत बाद हनीमून के लिए श्रीनगर के लिए रवाना हो गए । दो दिन श्रीनगर, पहलगाम और समीप की हसीन वादियों में राजहंस और हर्षा कुमारी डूब गए । राज्य भाग गई । धरती का स्वर्ग नही है । सात के समय बिस्तर पर हर्ष आने का बिल्कुल सही है । जाने का मन ही नहीं कर रहा है । जाना तो है, ड्यूटी भी करनी है वहाँ बहुत कम ताकी पढाई फिर हैदराबाद कब शिफ्ट हो रहे हो । दर्शाने राज्य से पूछा नहीं तो मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ कि बंगलौर कब चल रही हो । घर बनाना है । हर्षा के प्रश्न पर राज ने हर्षा से प्रश्न किया, आज तुम क्या कर रहे हो । हर शाह से बाहर हो गया है । बैंगलोर में अपना घर है, वही रहेंगे तो बंगलुरु में नौकरी ढूंढनें । मैं बंगलौर में रहूँ । तुम हैदराबाद में नौकरी तो विवाह के बाद पत्नी पति के घर रहती है । राजन की बात काटती हुई हर्षा ने का तुम कौन से युग में जी रहे हो? मेरा वेतन ढाई लाख रुपए और तुम्हारा सर दो लाख रुपए तुम्हें मेरे साथ रहना होगा तो मैं मालूम है ना कि मैं विभाग प्रमुखों । मैं नौकरी नहीं छोड सकती तो हैदराबाद रहना होगा । हर्षा ने तो कह दिया तो मैं भी तो विभाग प्रमुखों । मैं नौकरी छोड तो मैं बेंगलुरु में मनचाही नौकरी मिल जाएगी । आज की आवाज तेज हो गए । आवाज तेज मत करो, मैं भी उनकी आवाज कर सकती हूँ । मुझे नहीं सुनने की आदत है । मैं हैदराबादी होंगे । मुझे भी ऊंची आवाज पसंद नहीं । आशा मैं बैंगलोर में रहूंगा तो राहुल बेंगलुरु में । मैं तो हैदराबाद में रहेंगे । फिर विवाह क्यों? क्या मेरी मति भ्रष्ट हो गई थी । कहकर झट से हर्षा होटल के कमरे से बाहर आई और होटल प्रबंधक से दूसरा कमरा लिया हूँ तो उन्होंने अलग कमरे में बताई । होटल प्रबंधक हैरान हो गया कि हनीमून छोडे को क्या हो गया हुआ कुछ नहीं तो अहंकार टकरा गए हैं कि जो नाम की चिडिया होती है कहीं बंद कर रही रहती है । मैं क्यों दूसरों की बात मान जब घर और ऑफिस में एक साम्राज्य चलता है गृहस्ती में तो मिल जुल कर चलना पडता है । अपना जीवन परिवार को पूरा समर्पित करना पडता है । सफल वैवाहिक जीवन की यही कुंजी है जिसके बारे में दोनों अंजाम थे हूँ । दोनों को चुकने की आदत नहीं थे । अपनी मर्जी पर अब तक से लगी थी अहंकार के टकराव के बीच अगले दिन दोनों हवाई मार्ग से दिल्ली वापस दोनों अलग अलग से पर बैठे और कोई बात नहीं । एयरपोर्ट उतरकर दोनों अपने परिवार से मिलने घर भी नहीं गए । एयरपोर्ट से ही हर्षा कुमारी ने हैदराबाद की टिकट बुक करवाई और राज हंसने बेंगलुरु के लिए और दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे हैदराबाद और बेंगलुरु के लिए रवाना हो गए । थोडे दिनों बाद आपसी रजामंदी से तलाक संपन्न हो गया । मैंने कहा था ना कमबख्त इसे अहंकार का कोई इलाज फिर भी नहीं । शायद शायद क्या एंट्रिक् पैसे नहीं है

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