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अंकुरित रिश्ता in hindi | undefined हिन्दी मे |  Audio book and podcasts

Story | 10mins

अंकुरित रिश्ता in hindi

Authorसुदर्शन खन्ना
ये रिश्ता क्या कहलाता है जिसमे सबके लिए नेह, चिंता और हर किसी के लिए छोड़ी सी जगह जरूर थी, फिर वह झम्मन हो या नन्हें बच्चें! दिल को चीरती जाती थी शतायु अम्मा की आपबीती! "उफनती नदी की तेज धार की तरह था विभाजन, किसी को लील गया तो किसी को किनारों पर पटकता गया।" हिंदुस्तान के ही नहीं अम्मा के परिवार के भी टुकड़े-टुकड़े हुए थे! टीस सी विभाजन की पीड़ा लिए जी रही थी अम्मा, प्यार बांटते बांटते! एक छाबे पे अंकुरित मूंग बेचता था झुम्मन लेकिन बदले में नए रिश्ते अंकुरित करता था, उन्हें संजोता था, संवारता था, जान से भी ज्यादा संभालता था उन्हेँ! अम्मा के जाने के गम में उसकी दोनों आंखों से एक-एक आंसू लुढ़क कर गालों पर जम गया था मानों ओस की कमलदल पर गिरी पानीदार मोती सी बून्द! झुम्मन भी कितना बड़ा दिलवाला!
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ये रिश्ता क्या कहलाता है जिसमे सबके लिए नेह, चिंता और हर किसी के लिए छोड़ी सी जगह जरूर थी, फिर वह झम्मन हो या नन्हें बच्चें! दिल को चीरती जाती थी शतायु अम्मा की आपबीती! "उफनती नदी की तेज धार की तरह था विभाजन, किसी को लील गया तो किसी को किनारों पर पटकता गया।" हिंदुस्तान के ही नहीं अम्मा के परिवार के भी टुकड़े-टुकड़े हुए थे! टीस सी विभाजन की पीड़ा लिए जी रही थी अम्मा, प्यार बांटते बांटते! एक छाबे पे अंकुरित मूंग बेचता था झुम्मन लेकिन बदले में नए रिश्ते अंकुरित करता था, उन्हें संजोता था, संवारता था, जान से भी ज्यादा संभालता था उन्हेँ! अम्मा के जाने के गम में उसकी दोनों आंखों से एक-एक आंसू लुढ़क कर गालों पर जम गया था मानों ओस की कमलदल पर गिरी पानीदार मोती सी बून्द! झुम्मन भी कितना बड़ा दिलवाला!