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Ep 5: विपदा का संहार - Part 4

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ब्योमकेश बक्शी की रहस्यमयी कहानियाँ writer: सारदेंदु बंद्योपाध्याय Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma Script Writer : Sardendu Bandopadhyay
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साधारण ताया कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति की हत्या तब तक नहीं करना चाहेगा जब तक की उसका बर्दाश्त का पैमाना भर नहीं जाता । देवकुमार बाबू का पैमाना भी भर चुका था और यही वहाँ समय था जब यह घातक जहर उनके हाथ लग गया । उन्होंने दिमाग में सोचा, यही मौका है कि वे अपनी पत्नी से हमेशा के लिए छुट्टी पा जाए । उन्होंने भीतर ही भीतर अपनी योजना पर काम करना शुरू कर दिया और तब उन्होंने बीमा कंपनी का वहाँ विज्ञापन देखा जिसमें कहा गया था पति पत्नी संयुक्त रूप से जीवन बीमा कर सकते हैं और यदि दोनों में से कोई एक उस दौरान मर जाता है तो पूरी रकम दूसरे को मिल जाएगी । इसको पढकर उनके सभी प्रकार के संदेह दूर हो गए । ऐसा अवसर उन्हें फिर कहाँ मिलेगा? वे दोनों का संयुक्त बीमा करने के बाद अपने ही आविष्कार से उससे हमेशा के लिए छुट्टी पालेंगे । एक तीर से दो निशाने पैसा भी मिलेगा और उससे छुट्टी भी मिल जाएगी और किसी को कोई संदेह नहीं ना होगा । देवकुमार बाबू ने पहला काम बीमा करवाया और फिर अवसर की तलाश में समय गुजारने लगे । जल्दबाजी करने से बीमा कंपनी को संदेह का निमंत्रण देना था । इसी प्रकार एक वर्ष बीत गया । अंततः उन्होंने क्रिसमस की छुट्टियों में अपने प्रोजेक्ट को अंजाम देने का निर्णय लिया । जो जहर उन्होंने आविष्कार किया था, उसमें विस्फोटक तो थे, जब तक उन तत्वों को नहीं छोडा जाता, वहाँ सामान्य ही रहेगा । लेकिन जैसे ही उसका संपर्क अग्नि से होगा, उसके विस्फोटक तत्वों से जहरीली गैस निकलेगी, जिसे मात्र सूम लेने पर तत्काल मृत्यु निश्चित है । अब देवकुमार बाबू ने अपनी योजना के कार्यान्वयन के लिए एक बहुत ही नायाब तरकीब निकाली । ऐसी तरकीब एक वैज्ञानिक के मस्तिष्क में ही पैदा हो सकती है । उन्होंने माचिस की कुछ तीलियों के मसालों पर इस जहर का लेप कर दिया । मैं नहीं कह सकता है कि लेट चढाने का तरीका उन्होंने क्या अपनाया होगा । तो इसका परिणाम यहाँ निकला है कि जो भी व्यक्ति उस बिल्ली को मार चीज पर लडेगा तो गैस सूंघते ही तुरन्त मर जाएगा । इन तेलियों को बना लेने के बाद देवकुमार बाबू ने दिल्ली में होने वाली साइंस कॉन्फ्रेंस में जाने की तैयारी शुरू कर दी । धीरे धीरे जाने का दिन आ गया । उन्होंने प्रस्थान के पूर्व रेखा के कमरे में रखी माचिस की तीलियों में उसे जहर की एक थैली को रख दिया और चले गए । उन है । मालूम था कि उनकी पत्नी रोजाना लैंप जलाने के लिए माचिस जलाता है । इस माचिस का प्रयोग कहीं और नहीं होता । पहले या कभी भी माचिस जलाने में वहाँ दिल्ली उसके हाथ लगी जाएगी । उस समय देवकुमार बाबू बहुत दूर दिल्ली में होंगे । कोई शक भी ना कर पायेगा की वहाँ उनका काम हो सकता है । साहब कोच योजना के अनुसार हो रहा था किंतु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था । रेखा चूल्हा जलाने गए । वहाँ उसे मार चीज नहीं मिली । माँ के कमरे से मार्च लेकर गए । माचिस जलाने को हुई तो उसका हाथ उसी जहरीली दिल्ली पर पडा और देवकुमार बाबू ने दिल्ली से लौटकर जब यहाँ विभत्स घटना देखी तो उनके प्रदाय में पत्नी के लिए नफरत की आग और भी तेज हो गई । वे गम में डूब गए क्योंकि उनकी बेटी मर चुकी थी । इसलिए अब उनकी पत्नी को मारना ही था । कुछ दिन और बीते उन्होंने फिर एक जहरीली तीली को माचिस में रखा और पटना जाने को तैयार हो गए । लेकिन विपदा ने देवकुमार बाबू के जाने के पहले ही अपना तांडव दिखा दिया । हाँ, उनको सिगरेट पीने ये आदत थी । उस की माचिस संभव खाली हो गई थी । इसलिए उसने अपनी माँ की माँ जिससे कुछ पीलिया निकालकर अपनी माँ जिसमें रखी और घूमने निकल गया और देवकुमार बाबू ने विज्ञान के महासमुद्र में मंथन कर बडे यत्न से जो रतन बनाया था, उन्हें लगा कि वहाँ उनके जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि होगी । उन्हें जराबी संकेत न मिला कि वास्तव में उनकी उपलब्धि इतनी जहरीली और विनाश में घातक साबित होगी । उनके द्वारा निर्मित जहर की चिंगारी उस सबको स्वाह कर देगी जो उन्हें जीवन में प्यारा था क्योंकि इसने गहरी सांस ली और चुप हो गया । कुछ क्षण मौन रहकर मैंने पूछा अच्छा या बताओ तो मैं कब शक हुआ कि देवकुमार बाबू ही अपराधी है । जिस समय मुझे पता लगा कि उन्होंने पचास हजार रुपये की बीमा पॉलिसी ली है, उससे पहले तो यह भी नहीं सोचा था कि रेखा की हत्या के पीछे कोई उद्देश्य भी हो सकता है क्योंकि उसकी हत्या से किसी को क्या फायदा होना था और किसी के मार्ग में वहाँ कोई बाधा भी नहीं पहुंचा रही थी और यह भी सोच न पाएगी । रेखा हत्यारे का लक्ष्य क्यों हो सकती है? लेकिन बहुत ही छोटा सा सूत्र मुझे अन्यत्र मिल गया । जब रेखा के पोस्टमार्टम में कुछ तथ्य नहीं मिला तो मेरे सामने एक ही संभावना रह गए और बहुत ही की जिस शहर से रेखा की मृत्यु हुई उसकी जानकारी अभी तक वैज्ञानिक जगत को नहीं हो पाई है । अर्थात यहाँ कोई नया अविष्कार है तुम्हें याद है देवकुमार बाबू का दिल्ली का भाषण वो समय हम लोगों ने उसे एक सफल वैज्ञानिक का प्रलाप कहकर मजाक बनाया था । हमें क्या पता था कि वहाँ एक कर्मठ वैज्ञानिक की विलक्षण खोज का संकेत है क्योंकि उनके भाषण में अविष्कार से संबंध कुछ संकेतों का जिक्र भी शामिल था । जो भी हो सवाल यह है कि यहाँ आविष्कार किसके हाथों हुआ? द्रश्य में दो ही वैज्ञानिक थे पहले डॉक्टर रुद्रा, दूसरे देवकुमार बाबू । इसमें डॉक्टर रुद्रा चूंकि डॉक्टर थे इसलिए शक उन पर जाता है क्योंकि किसी जहर के लिए उन की पहुंच आसान थी । दूसरे आविष्कारकर्ता यदि देवकुमार बाबू है तो क्यों में अपनी ही पुत्री को जहर देंगे? इसलिए शक डॉक्टर रुद्रा पर टिकता था । फिर भी मेरा मैंने इस धारणा पर स्थिर नहीं हो पा रहा था । डॉक्टर रुद्रा एक नीच व्यक्ति थे किन्तु क्या वे केवल इसलिए रेखा की हत्या कर सकते थे क्योंकि उनके लिए उनका बेटा उन से विमुख हो गया था और मान भी लें । कि वे चाहते भी रहे हो पर वे रेखा तक कैसे पहुंच सकते थे । वे किसी के घर में वहाँ जहर कैसे ले जा सकते थे । रेखा और मन मत आपस में मिला करते थे । छत पर एक दूसरे को चिट्ठियां का करते थे । लेकिन इस की जानकारी डॉक्टर रुद्रा को कहा थी । दिमाग के किसी कोने में यही धारणा पड रही थी की हत्या किसी जहरीली गैस से हुई है । जरा सोचो रेखा के हाथ की उंगली में जली हुई थी, ली थी और दूसरी मुट्ठी में माचिस की डिबिया । इसका सीधा सा अर्थ है कि मृत्यु उसके माचिस जलाते ही हुई है । यहाँ मात्र इत्तेफाक हो सकता है या फिर मार्च जिसके जिसने और उसके बाद की घटना में कोई लिंक हो सकता है । देवकुमार बाबू ने भी बहुत सतर्कता बरती थी । उन्होंने मैच बॉक्स में केवल एक ही जहरीली दिल्ली रखी थी जिससे कि यदि शेष तेलियों की जांच की जाए तो कोई सबूत नहीं मिल पाया । मैं जो माचिस लाया था, उसमें मैंने अन्य तीलियों की जांच की तो कुछ नहीं मिला । आबुल के केस में भी मार्च इसमें केवल एक जहर की तीली थी, लेकिन भाग्य की क्रूरता देखो पहले ही तीली को उठाया और वही जहर की निकली अजीत तुम लेखक हो, तुम है, इसमें कुछ सीखने का कोई पार्ट नहीं दिखाई देता । जिस दिन मनुष्य ने दूसरे के संहार के लिए जिन शस्त्रों का आविष्कार किया, उसे दिन उसने उन्हें शस्त्रों द्वारा स्वयं के विनाश की भारत भी लिख ली । जिस प्रकार दुनिया में चोरी छिपे जिन विनाशकारी शस्त्रों का आविष्कार किया जा रहा है, वही एक दिन पूरी मानव जाति का ही नाश कर देंगे । उस राक्षस की तरह जो ब्रह्मा की कल्पना से ही पैदा हो गया था, जैसे फ्रेंड्स दिन जो अपने ही जन्मदाता को खा गया । क्या तो ऐसा नहीं सोचते हैं । रात के अंधेरे में मैं क्योंकि इसको ठीक से नहीं देख पाया, लेकिन यह जरूर लगा कि उसके विचार वास्तव में आने वाले कल के लिए भविष्यवाणी है तो

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ब्योमकेश बक्शी की रहस्यमयी कहानियाँ writer: सारदेंदु बंद्योपाध्याय Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma Script Writer : Sardendu Bandopadhyay
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