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Ep 4: वसीयत का जंजाल - Part 2

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ब्योमकेश बक्शी की रहस्यमयी कहानियाँ writer: सारदेंदु बंद्योपाध्याय Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma Script Writer : Sardendu Bandopadhyay
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सुकुमार ने गला साफ करते हुए कहा बेटी बैठे ना? ब्योमकेश उसकी मेज के सामने बैठ गया । उसने मेरे पर रखी पुस्तक ग्रेज एनाटोमी को उठाया और उसके प्रश्न पलटते हुए बोला, काल आधी रात को आप कहाँ से आए थे? सुकुमार बाबू सुकुमार चौक पडा । फिर धीमी लडती । आवाज में बोला मैं राहत को फिल्म देखने गया था । पृष्टों को उलटते हुए बिना सिर उठाए ही ब्योमकेश ने पूछा कौन से सिनेमा हॉल में चित्र वीडियो बाबू ने नाराजगी भरे स्वर में कहा आपको यहाँ मुझे पहले बताना चाहिए था । क्यों नहीं बताया आपने सब? मैंने सोचा था कि यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है । इसलिए विधु बाबू ने और भी तेज आवाज में कहा यहाँ हम तय करेंगे कि वहाँ महत्वपूर्ण है नहीं की आप के बाद कोई सबूत है कि आप चित्र सिनेमा गए थे । सुकुमार ने कुछ शरण सिर्फ गायब हो जा । फिर उठकर रॅाक उडता के पॉकेट से गुलाबी रंग की एक चिट्ठी निकालकर विदुआ बुकी और बढा दी । वहाँ सिनेमा के टिकट का आधा भाग था । वीडियो बाबू ने उसे ठीक से जाता और आपने डायरी खोलकर रख लिया । कुछ और रिश्तों को पलटते हुए ब्योमकेश ने पूछा, शाम के शो के बजाय नौ बजे के शो में जाने का आपके पास कोई विशेष कारण था । सुकुमार का चेहरा सफेद पड गया फिर भी उसने धीरे से कहा, नहीं, ऐसा कोई कारण नहीं था । ऐसा कुछ भी नहीं था । ब्योमकेश बोला, निश्चित रूप से आपको मालूम था कि कराली बाबू को रात में किसी का देर से आना पसंद नहीं था । शिव कुमार के पास कोई उत्तर नहीं था । वह चुप चाप मलिन मुख लिए खडा रहा । एक का एक ब्योमकेश नेसू कुमार को अपनी आंखें खोलकर देखा और पूछा, आपने अंतिम मार कराली बाबू को कब देखा था? सुकुमाल ने मु में ठीक से करते हुए कहा, कल शाम करीब पांच बजे क्या आप उनके कमरे में गए थे? वहाँ क्यों? सुकुमार ने अपनी आवाज को नियंत्रित करने का प्रयास किया और धीमे स्वर में कहा, मैं काका से उनकी वसीयत के बारे में कुछ कहने के लिए गया था । उन्होंने अपनी वसीयत में मोटी दा आपको बेदखल कर के सारी संपत्ति मेरे नाम कर दी थी । इसको लेकर दोपहर में उनकी और मोदी दा के बीच झडप भी हुई थी । मैं काका के पास यह कहने गया था कि मैं नहीं चाहता की सारी संपत्ति केवल मेरे नाम की जाए बल्कि हम सबको बराबर हिस्से में विभाजित कर दी जाए फेल जब उन्होंने मेरी पूरी बात सुनी तो क्रोध में उन्होंने मुझे कमरे से निकल जाने का आदेश दिया । आप निकल आए हाँ, उसके बाद मैं फनी के कमरे में गया । बात करते करते काफी देर हो गयी थी । मेरा मन बडा विचलित हो रहा था तो सोचा क्यों न कोई फिल्म देख लू फडी ने भी मेरे प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया । इसलिए मैं चुपचाप निकल गया यह सोचकर कि काका को पता भी नहीं चलेगा । प्रत्यक्षतः था विडियो बाबू सु कुमार की दलील पर पूर्णतः संतुष्ट दिखाई दी है । लेकिन ब्योमकेश के चेहरे पर अब भी शिकन मौजूद थी, जिसे देखकर विदु बाबू ने कुछ टुकडे स्वर में कहा ब्योमकेश बाबू, आप अपनी मंशा क्यों नहीं बताते हैं? क्या आप सुकुमार बाबू पर हत्यारा होने का शक कर रहे हैं? ब्योमकेश उठ खडा हुआ और बोला आ रहे हैं, नहीं नहीं, बिल्कुल नहीं । चलिए हम लोग अब सुकुमार बाबू की बहन के कमरे में चलते हैं । विडियो बाबू ने अब रुकी आवाज में कहा, ठीक है चलिए लेकिन वहाँ बेचारे कुछ नहीं जानती और दरअसल में उस बेचारी लडकी को बेवजह क्या इस सब में घसीटना जरूरी है । मैंने पहले ही उसका बयान ले लिया है । ब्लॅक स्वर में उत्तर दिया जी हाँ जरूर जरूर । फिर भी बस एक बार यदि मैं लडकी का कमरा गलियारे से दूसरे छोर पर था, विदु बाबू ने दरवाजा खटखटाया । लगभग आधे मिनट बाद एक सत्रह अठारह वर्ष की लडकी ने दरवाजा खोला और हमें देखकर एक और हो गई । कुछ संकोच के साथ हम लोग कमरे के अन्दर प्रविष्ट हुए । हमारे पीछे सुकुमार जो हमारे पीछे पीछे आ रहा था, कमरे में घबराया हुआ आया और पलंग पर लेट गया । प्रवेश करते समय मैंने लडकी को देख लिया था । वहाँ कद में ऊंची दुबली और सावली लडकी थी । बार बार होने से उसकी आंखें सूज आई थी इसलिए यह कहना मुश्किल है कि वह सुंदर कही जाएगी या नहीं । उसके बाल उलझे और इधर भी दर्द है । शोक में डूबी एक लडकी से यू पूछताछ मेरे लिए भी क्रूरता से कम नहीं थी और इसके लिए मन ही मन में भी उनके से नाराज भी हो रहा था । लेकिन फिर मैंने ब्योमकेश की आंखों में संकोच के बावजूद एक प्रकार की मजबूरी की झलक भी देखी । ब्यू उनके इसने विनम्रता से हाथ जोडकर अभिवादन करते हुए कहा, शमा करें, मैं आपको थोडा कष्ट दूंगा । मैं समझता हूँ आपको कोई परेशानी नहीं होगी । घर में जब ऐसी दुख भरी घटना घटती है तो आपने कठिनाइयों के साथ साथ पुलिस की तस्तीर जैसी छोटी मोटी दिक्कतें बर्दाश्त करने पड जाती है । विधु बाबू ने फौरन विरोध प्रकट किया । बोखला आकर घर जाए पुलिस को क्यों बदनाम करते हैं? आप पुलिस में नहीं है । ब्योमकेश ने विडियो बाबू की आवाज को अनसुना करते हुए अपने उसी लहजे में कहा, अधिक कुछ नहीं वही कुछ नियमित प्रश्न दबाया बैठ जाए और उसने कुर्सी की और संकेत क्या? लडकी ने ब्योमकेश को तिरस्कृत नजरों से देखा और शोक ग्रस्त टूटी आवाज में बोली आपको जो पूछना पूछिए, मैं बैठे बिना ही जवाब दे सकती हूँ । आप बैठना नहीं चाहती तो ठीक है । मैं ही बैठ जाता हूँ क्योंकि इसने बैठकर एक नजर कमरे के अन्दर डाली । सुकुमार के कमरे की तरह यह भी साधारण रूप से सजा कमरा दिखाई दिया । कहीं किसी प्रकार का नंबर नहीं, साधारण पलंग, मेस, कुर्सी, एक बुक सेल, एक अतिरिक्त वस्तु केवल दराज वाली ड्रेसिंग टेबल थी । ध्यान लगाने के लिए ब्योमकेश ने कमरे की छत में लगे बीमों को देखते हुए कहा, आप ही है जो रोजाना करालु बाबू को सुबह की चाय पहुंचाती थी । लडकी ने स्वीकारोक्ति मैं अपने सिर को हिला दिया । ब्योमकेश बोला तो आज सुबह जवाब चाहे लेकर कराली बाबू के पास गई थी । तब आपको उनकी मृत्यु का पता लगा । लडकी ने फिर स्वीकारोक्ति में सिर हिलाया आपको यहाँ पहले पता नहीं था विधु बाबू फिर बडबडाए बेकार । प्रश्न बिल्कुल व्यर्थ और मूर्खों वाला प्रश्न है । ब्योमकेश ने फिर अनसुना करते हुए अपनी बात जारी रखी । क्या करा ले बाबू अपने कमरे का दरवाजा रात में खुला ही रखते थे । हाँ, घर में किसी को भी दरवाजा बंद करने की अनुमति नहीं थी का कभी रात में सोते समय दरवाजा खुल्ला ही रखते थे । अच्छा फिर जैसे अब ठहरे का पैमाना छूट गया हो । विधु बाबू दिलाए बास बहुत हुआ अब चलिये आज है ऐसे फिजूल सवालों से बेचारी लडकी को परेशान करने की कोई जरूरत नहीं । आपको पता ही नहीं राॅबिन कैसे किया जाता है । इस घटना ने ब्योमकेश के जहर एसे विनम्रता के आवरण को उतार फेंका । एक घायल बात की तरह विधु बाबू पर टूट पडा । उसने कडती सभी आवाज में कहा यदि आप इसी तरह मेरा काम में बाधा पहुंचाते रहे तो मुझे कमिश्नर से शिकायत करनी पडेगी कि आप मेरे जांच पडताल में बाधा पहुंचा रहे हैं । क्या आप जानते हैं कि ऐसे के पुलिस के कार्यक्षेत्र में नहीं पढते हैं, बल्कि सीआईडी के होते हैं? विधु बाबू एकदम सन्न रह गए । आश्चर्यचकित इतना कि कोई उन्हें थप्पड भी मार देता तो नहीं होते वे कुछ शहर आग्रह नेत्रों से ब्योमकेश को घूमते रहे । कुछ बोलने को उतावले दिखे, पर अपने आप को जब्त कर लिया और क्रोध में पैर फटकारते हुए कमरे से बाहर निकल गए । ब्योमकेश दोबारा ध्यान केंद्रित करके फिर पूछा, आपको करा ले बाबू की मृत्यु का पहले पता नहीं लगा । सावधानी से सोच कर उत्तर दीजिए । मैंने सोच लिया है । मुझे पहले पता नहीं लगा । उसकी आवाज में एक प्रकार की जिद का ऐसा था । ब्योमकेश कुछ देर शांति से बैठा रहा, पर उसकी भृकुटी तनी हुई थी । वहाँ फिर बोला, चलिए अब मुझे यहाँ बताई है कि कराली बाबू चाय में कितनी चीनी पीते थे । लडकी बडी बडी आंखों से ताकती रही । फिर आहिस्ता से बोली सीरी काका! अपनी चाहे मैं काफी जी नहीं पीते थे । तीन चार चम्मच चीनी दूसरा प्रश्न बंदूक से निकला बुलेट जैसा था । तब आप ने सुबह के चाय में चीनी क्यों नहीं डाली? यह सुनते ही लडकी का चेहरा सूख गया । उसने चारों और भय से देखा । फिर आपने होटों को काटते हुए अपने पर नियंत्रण किया और बोली शायद मैं भूल गयी । कल से मेरी तबियत ठीक नहीं थी क्या आप कला आप कॉलेज गई थी? हाँ भर्राई आवाज में अब भी जीत थी । कुर्सी से उठते हुए ब्योमकेश बहुत आहिस्ता से बोला यदि आप सब कुछ मुझे बता रहे हैं तो हमें बहुत लाभ होगा । आप का भी फायदा होगा । लडकी वैसे ही हूँ । दवाई खडी रही । बोली कुछ नहीं । ब्योमकेश ने दोहराया बताने के करवा करेंगी । लडकी ने धीरे से एक एक शब्द नापते हुए कहा । इसके बाद आगे मुझे कुछ नहीं मालूम । ब्योमकेश के मुंह से एक निश्वास निकल गया । बातचीत के दौरान इसकी निगम मेज पर रखी सिलाई की टोकरी पर पड रही थी । वहाँ उठकर उसके पास पहुंच गया । उसने पूछा मुझे लगता है यहाँ आपकी है हाँ ब्योन के इसने टोकरी को खोलकर देखा । अंदर एक अधूरे मेजपोश के साथ रंगीन धागों के गुच्छे पडे हैं । ब्योमकेश ने उन बच्चों को हाथ में उठाया और मन ही मन बडबडाते हुए गिनने लगा । लाल नीला, काला, अच्छा काला भी । उसने धागों को टोकरी में रखते हुए कुछ और भी थोडा उसने तहत ये मेजपोश को भी खोल कर देगा और लडकी को देखते हुए पूछा सोई कहाँ नहीं? लडकी तब तक पत्थर की मूर्ति बन चुकी थी । उसके मुंह से केवल एक शब्द निकला सुई । ब्योमकेश ने कहा हाथ हुई जिससे आप सिलाई करती है, वह कहाँ गई? लडकी कुछ कहना चाहती थी, लेकिन कह नहीं पाई । एकाएक वहाँ मुडी और ज्यादा शब्द बडबडाती हुई पलंग पर बैठे सुकुमार की और दौडी और उसकी गोद में सिर रखकर फूट फूटकर रोने लगी । शिवकुमार घबरा गया । उसका सिर ऊपर करके कोशिश करते हुए कहता रहा सत्य सत्य । सत्यवती ने सिर्फ ऊपर नहीं उठाया । वह होती रही बी उनके उन लोगों के पास जाकर धीरे से बोला, आपने ठीक नहीं । क्या जानती है आपको? मुझे सब कुछ बता देना चाहिए था । मैं पुलिस का आदमी नहीं हो । यदि आप मुझे सब कुछ बता देंगे तो आपको ही फायदा होता है । चलवा जीत हम लोग चलते हैं । कमरे से बाहर निकलकर ब्योमकेश ने सावधानी से दरवाजा बंद कर दिया । कुछ क्षण के लिए वहाँ खडा सोचता रहा । फिर बोला, हाँ बडे बाबू के कमरे में चले हैं । मेरे ख्याल से उनका कमरा उधर है । हम लोग गलियारे में करा ली । बाबू के कमरे को पार कर होने वाले कमरे के सामने पहुंचे बे उनके इसने दरवाजा खटखटाया । एक इक्कीस बाईस वर्ष के युवक ने दरवाजा खोला । ब्योमकेश ने पूछा आप ये फडे बाबू है? उसने स्वीकारोक्ति में सिर हिलाया जी, कृपया अंदर आ जाइए । उसकी आकृति से यहाँ होता था कि उसके शरीर में कहीं दोष है । पर वहाँ कहाँ है यह तुरंत पता नहीं चलता था । उसका शरीर काफी गठा हुआ था किन्तु ऊपर कस्ट रहने से पैदा होने वाली सिलवटे साफ दिखाई देती थी । जैसे ही हम कमरे में उसे उसने आगे बढकर कुर्सी की और इशारा किया, कृपया बैठे उसकी चाल से पता चल गया कि दोस्त उसके दायें पैर में है । वहाँ बहुत ही पतला कटे हुए अन्य जैसा था इसलिए चलते समय उसकी चाल में लॉन्च आता था । मैं पलंग के एक और बैठ गया और ब्योमकेश दूसरी और ब्योमकेश को देखकर लगा जैसे उचित शब्दों को ढूंढ रहा हूँ । फिर जरा अन्यमनस्कता होकर बोला मैं समझता हूँ आप यह जान गए होंगे । पुलिस आपके भाई मोतीलाल पर शक कर रही है । मैं जानता हूँ बडे बोला पर अपनी ओर से निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि ज्यादा बेकसूर है । वह गुस्सैल और झगडालू जरूर है पर काका की हत्या करने की क्षमता नहीं रखते हैं । वसीयत से अपना नाम बेदखल किए जाने के बाद भी यह संस्कार केवल मोदी दा पर ही नहीं हम सब पर लागू होता है तो मोदी दा पर ही शक क्यों किया जाए? ब्योमकेश ने उसके प्रश्न पर ध्यान न देकर कहा, मैं समझता हूँ कि आपने पुलिस को अपना बयान दे दिया होगा । फिर भी मैं कुछ प्रश्न पूछना, बडे कुछ असमंजस में दिखाई दिए । आप पुलिस में नहीं है तो मैंने सोचा शायद सीआईडी के होंगे बी उनके इसने हसकर का नहीं । मैं केवल सत्य का खोजी हूँ । सत्यान्वेषी पडी ने सुना तो आश्चर्य में उसकी आगे बडी हो गयी । वहाँ बोला सत्यान्वेषी भी उनके बाबू तो क्योंकि इस बक्शी है । ब्योमकेश ने सिर हिलाया और बोला अब मुझे यहाँ बताइए कि कराली बाबू का संबंध सब लोगों से कैसे थे? दूसरे शब्दों में किसी भी पसंद करते थे और किसे ना पसंद यहाँ सब कुछ विस्तार में बताएंगे । बडे कुछ देर अपने हाथों में सिर्फ छिपाए बैठा रहा । फिर थी कि मुस्कान के साथ बोला, देखिए मैं लंगडा आदमी हूँ, भगवान का शाहब है । इसलिए मैं इन सब लोगों से ज्यादा मेल मुलाकात नहीं रखता था । मैं और मेरी ये पुस्तक मेरे अब तक के जीवन में मेरी साथ ही रही है । लेकिन मैं ठीक से नहीं बता पाऊंगा कि काका की हम लोगों में से किस पर कपा थी और किस पर नाराजगी । काका को समझना आसान नहीं था और न ही वे अपनी मंशा जाहिर करते थे । लेकिन उनकी बातों और बताओं से मैं यही जान पाया हूँ कि वे सत्यवती की परवाह अधिक करते थे और आप की मेरी संभव है । मैं लगता हूँ इसलिए उनके मन में भीतर कहीं दया का भाव हो । पर इससे अधिक मैं उनकी आत्मा का अनादर नहीं करना चाहता । विशेष रूप से ऐसे व्यक्ति का जिसमें हम सबको शरण नदी होती तो हम लोग अब तक भूख से मर गए होते । लेकिन यह भी सही है कि वे नहीं जानते थे कि प्यार क्या होता है । ब्योमकेश बोला शायद आपको मालूम हो कि उन्होंने अपनी वसीयत में सारी संपत्ति सुकुमार के नाम की है । बडी थोडा मुस्कुराकर बोला, मैंने सुना है और इसमें कोई संदेह भी नहीं होना चाहिए कि हम सब में सु कुमार ही योग्य व्यक्ति है । लेकिन इस से यह नहीं कहा जा सकता कि काका के रजय में क्या है । वे सैनिक आवेश के व्यक्ति थे । जरा सी बात पर बिगड जाते हैं और टाइपराइटर पर तब तब करके अपनी वसीयत बदल देते थे । इस पर शायद ही कोई बच्चा हो जिसके नाम इन्होंने कभी ना कभी वसीयत न की हो । ब्यूंह के इसने कहा क्योंकि अंतिम वसीयत सुकुमार के नाम है इसलिए संपत्ति उसे ही मिलेगी । बडी बोला अच्छा मुझे कानून की इतनी जानकारी नहीं है । कानून तो यही कहता है बे । उनके सैनिक हिचकिचाहट के बाद बोला ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे? क्या आपने सोचा है पढने? निराशा में अपने बालों पर हाथ फेरा और खिडकी से बाहर देखते हुए बोला मुझे नहीं मालूम मैं क्या करूंगा कहाँ जाऊंगा? मैं कुछ पढा लिखा नहीं हूँ इसलिए नौकरी नहीं कर सकता । यदि सुकुमार मुझे शरण देता है तो उसके पास रहूंगा या फिर मेरा अंत सडकों पर होगा । उसके आंखों में आंसू आ गए । मैंने जल्दी से अपना मूड फिर लिया । ब्योमकेश ने ध्यान दिए बिना ही कह दिया । सुकुमार बाबू कल आधी रात को लौटे थे । बडे बाबू ने चौंककर पूछा आधी रात अरे हाँ वह कल रात सिनेमा देखने गया था क्योंकि इसमें बोझा क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि कराली बाबू की हत्या कब हुई? क्या आपको कोई आवाज या कुछ और सुनाई दिया था कुछ नहीं । शायद सुबह तडके नहीं । उनकी हत्या आधी रात को हुई । फॅसने उठकर अपनी घडी देखी और बोला वो ढाई बज गया, अब काफी है । चलो अजीत मुझे बहुत भूख लगी है । हम लोगों ने सुबह से कुछ खाया भी नहीं है । अच्छा नमस्कार । ठीक उसी समय नीचे शोरगुल सुनाई दिया । दूसरे ही क्षण एक व्यक्ति हफ्ता हुआ । दरवाजा खोलकर गुस्सा और बोला भडे पुलिस मोदी को पकडना है किन्तु हमें देखते ही रुक गया । ब्यूरो किसने कहा क्या आप ही माखन बाबू है? माखन भय से पीला बढ गया और मैं कुछ नहीं जानता । कहते हुए तेजी से बाहर निकल गया । हम लोगों ने नीचे अगर देखा । ड्राइंग रूम में बहुत अफरा तफरी मची हुई थी । वीडियो बाबू नहीं थे । उनकी जगह स्थानीय चौकी का इंस्पेक्टर कुर्सी पर बैठा हुआ था । उसके सामने दो सिपाही एक व्यक्ति को पकडे खडे थे जिसके ऊपर हवाइयां उड रही थी । वहाँ चला रहा था । कल की हत्या हो गई । देखिए सर मैं कुछ नहीं जानता हूँ । मैं किसी की भी कसम खा सकता हूँ । मैं मूर्ति शराबी हूँ और मैंने रात दल इनके यहाँ गुजारा है, वह गवाही दे देगी । इंस्पेक्टर अपना काम जानता था । वह इस सब के बीच चुका बैठा था । उसने जब हमें आते देखा तो बोला भी उन के बाबू ये है मोतीलाल विधु बाबू का मुजरिम आपको यदि कुछ पूछना है तो पूछ ले । ब्योमकेश बोला इन्हें कहाँ पकडा? सब इंस्पेक्टर जिसने उसे पकडा था । वो बोला बदनाम इलाके में एक वेश्या के खोते से मोतीलाल ने फिर भर याद शुरू कर दी । मैं दल इनके कोठे पर सो रहा था कौन? बहुदा कहता है ब्योमकेश ने हाथ के इशारे से उसे चुप क्या? आप तो रोजाना तडके सुबह लौटा करते हैं । आज क्या हो गया? मोतीलाल ने खूंखार लाल आंखों से चारों ओर देखा और बोला क्या हो गया मैं जैसे मैं मजबूत था । मैंने रात में विस्की की दो बोतल खाली कर दी थी, इसलिए सुबह उठ नहीं पाया । ब्योमकेश ने इंस्पेक्टर को देखकर सिला दिया । इस बेटर बोला इसे ले जाओ और बंद कर दो । जैसे ही सिपाही मोतीलाल को ले जाने लगे, उसने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया । ब्यू उनके इस ने पूछा विधु बाबू का है? वे करीब घंटा भर पहले चले गए और बोल कर गए हैं कि शाम को चार बजे के लगभग आएंगे तो ठीक है । हम लोग भी अब चलते हैं । हम लोग कल सुबह आई है और यहाँ यहाँ तो बताइए कि क्या सभी कमरों की तलाशी हो गई है । कराली बाबू और मोटी बाबू के कमरे की तलाशी हो चुकी है । विधु बाबू ने और किसी कमरे की तलाशी को जरूरी नहीं समझा । मोतीलाल के कमरे से कुछ मिला कुछ नहीं । मैं वसीयत को नहीं पढ पाया हूँ । मेरे ख्याल से विदु बाबू ने उन्हें सील कर दिया है । खैर कल तक देख लूंगा तो ठीक है फिर मिलते हैं । इस बीच कोई नई घटना कटे तो कृपया खबर करेंगे और हम लोग घर वापस आ गए । राहत में ब्यू उनके इसने कराली बाबू के घर गया है कि मैं ऐसा बनाया और उसे मुझे दिखाने लगा । यह देखो कराली बाबू के कमरे के ठीक नीचे मोतीलाल का कमरा है । हाँ, माखन उसके बगल वाले कमरे में रहता है । पानी के कमरे के नीचे ड्रॉइंग रूम है जिसमें पुलिस ने अपनी दुकान लगाई है । सत्यवती का कमरा रसोई घर के ऊपर है और खानसामा आँसू कुमार के कमरे के नीचे होता है । मैंने पूछा ऍफ उपयोग किया है कुछ नहीं क्योंकि इसने कहा और नक्शे के अध्यन में लग गया । मैंने पूछा तो मैं क्या लगता है? मोतीलाल ने हत्या नहीं की है । यही ना नहीं उसने नहीं है । यहाँ तो निश्चित है तो कौन हो सकता है, यहाँ कहना मुश्किल है । यदि मोतीलाल को अलग कर दिया जाए तो रहते हैं भडी, माखन, सुकुमार और सत्यवती । इनमें से कोई भी हो सकता है । इन सबका उद्देश्य एक ही रहेगा । मैंने चकित होकर कहा, सत्यवती भी क्यों नहीं? लेकिन वहाँ इस तरह है यदि कोई स्त्री किसी को प्यार करती हो तो वहाँ उसके लिए कुछ भी कर सकती है । लेकिन इसमें उसका व्यक्ति कथित किया था । वह तो उसके भाई को मिलने वाली थी तो वहाँ तक समझे नहीं । जब एक व्यक्ति किसी भी क्षण में अपनी वसीयत बदल लेता हूँ । यदि उसे ही हटा दिया जाए तो उसके वसीयत बदलने का पैसा नहीं नहीं रहे जाता । मैं किंकर्तव्यविमूढ बना बैठा ही रह गया ।

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ब्योमकेश बक्शी की रहस्यमयी कहानियाँ writer: सारदेंदु बंद्योपाध्याय Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma Script Writer : Sardendu Bandopadhyay
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