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Shri Krishna (Dwitiya Adhyay) 3.2

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श्री कृष्ण Written by गुरुदत्त Published by हिंदी साहित्य सदन Voiceover Artist : Suresh Mudgal Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त
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हूँ । श्रीकृष्ण द्वितीय अध्याय भाग दो जो दृष्टि इत्यादि पांडवो पांचाल राजधानी में एक कुमार के घर में ठहरे हुए थे तो जी के स्वयंबर को देखने के लिए दूर दूर से ब्राह्मण लोग भी आए हुए थे । वे प्राय धनी मानी लोगों के घरों में अतिथि बन ठहरे थे । पांडव अभी गुप्त रहना चाहते थे । इस कारण वे एक अज्ञात कुमार के घर में आकर ठहरे थे । उसी कुमार के घर में उनकी बेटी पुत्रों के लोटने की प्रतीक्षा कर रही थी । जब अर्जुन और भीम ट्रॉफी सहित धर्मों से गिरे हुए दीजिए । धीरे लौट रहे थे । युनिस्ट नकुल और सहदेव पहले घर लौटे । उन्होंने अर्जुन और भीम के कारण वो जारी वर्णन की तो माने बहुत प्रसन्न होकर कह दिया अर्जुन को द्रोपदी का विवाह सिस्टर से कर देना चाहिए क्यों? नकुल ने पूछा है बडा है समय पाकर राज्य प्राप्त करने वाला है और एक राजकन्या किसी श्रीमान नरेश की पत्नी बंद की सुबह पाएंगे रन तुमा उसके विवाह की सर तो अर्जुन ने पूरी की है और तू कह रहे हो कि भीम ने यह मंडप में मौहर राजाओं से युद्ध किया था परंतु मा युधिष्टर के स्थान पर मेरा होगा । क्यों नहीं इससे कर दिया जाए । सहदेव ने मुस्कराते हुए कह दिया तुम ने क्या किया है? जो भैया यूज सिस्टर ने की है चुपचाप टीम और अर्जुन को लडते देखते रहे हैं । अब चारों हंसने लगे हैं । नकुल ने समाधान उपस् थित कर दिया । उसने कहा हूँ यहाँ इस देश में एक भाई की भारी सब भाइयों की भारीय मानी जाती है और उसकी संतान परिवार की संतान समझती है । इस कारण ये कन्या तुम्हारे सब पुत्रों की भारिया हूँ । हाँ यदि द्रोपदी इसे स्वीकार करें तो हमारी वर्तमान अवस्था में ये भी ठीक होगा । इस समय हम लोगों की भीड से घिरे हुए अर्जुन और भीम वहाँ पहुंचे । रोक दी ने कुश्ती के चरण स्पर्श किए और कहा बहुत अच्छी मुझे आप अपने चरणों में स्थान दीजिए जो भाग्यवती रहो । अभी तुम मेरे साथ रहोगी । कल विधीवत वेदमंत्रों से विभाग कर दिया जाएगा । उस समय तुम्हारे माता पिता और भाई को भी बुलाना होगा । तुरंत उमा नकुल ने अपने सुझाव की बात कर दी । इस पर सहदेव इत्यादि सब फस नहीं लगे । द्रोपदी ने पांचों भाइयों को एक समान ओजस्वी और वर्णनयोग्य देखा तो अपनी सास के निर्णय की प्रतीक्षा करने लगे । कुंती ने कहा ये व्यवस्था इस देश में है । इस कारण कन्या और कन्या के माता पिता तथा उनके पुरोहित की व्यवस्था अनुसार ही हो सकता है । ये कल निश्चित होगा । जब कृष्ण कुमार के घर पहुंचा तो उनकी को पहचान गया । उनकी उसकी बुआ लगती थी । वसुदेव की सगी बहन थी तो महाराज कुंतीभोज के दत्तक पुत्री बनी हुई थी । उसका विवाह पांडु से हुआ था । कृष्ण ने अपनी बुआ को पहचाना तो भीतर उस कमरे में चलाया जहाँ पांचों भाई मार्च से विचार दिन में कर रहे थे । कृशन ने बुआ को प्रणाम किया । अपना परिचय दिया । कुंती कृष्ण से मिलकर बहुत प्रसन्न हुई । ग्रुप जी का विवाह पांचों भाइयों हुआ । विवाह के उपरांत पांडवों को और द्रोपदी को महाराज ने अपनी एक प्रबल सेना के साथ हस्तिनापुर भेज दिया । साथ ही बहुत से व्रत हाथ और भूषणा दी । द्रोपदी के पतियों को भेंटस्वरूप दिए । हस्तिनापुर में पांडवों के जीवित होने का समाचार पहले ही पहुंच गया था । दुर्योधन जो आपने राजा बनने में ये दृष्टियाॅ बाधा को अपने विचार से दूर कर चुका था । इस समाचार पर क्रोध से उबल पडा परंतु जब महर्षि व्यास ने समझाया तो दुर्योधन शांत हो गया । साथ ही घर के सब बडों ने दुर्योधन की भाइयों की हत्या का प्रयास करने की भर सकते भर्त्सना की । इस पर बीस पिता नहीं, ये समाधान उपस् थित कर दिया कि राज्य में से एक क्षेत्र पृथक कर वहाँ पांडवों को राजा बना दिया जाए । इस समाधान को व्यास और धरती वासने मना तो इंद्रप्रस्थ गांव और उसके चारों ओर वन प्रदेश पांडवों को दे दिया गया है और उनकी माँ के साथ वहाँ भेज दिया गया । रिजिस्टर ने इंद्रप्रस्थ राज्य को उन्नत करने के लिए वहाँ अन्याय बुद्धि से राज्य करना आरंभ कर दिया । परिणाम शुरू कुछ ही वर्षों में इंद्रप्रस्थ राज्य एक समृद्ध राज्य हो गया । इंद्रप्रस्थ के समीप खंडों वन था । वहाँ नागू नहीं अपना आधिपत्य स्थापित कर रखा था और समय समय पर वन से निकल नगर में रहने वालों पर छापा मार उनको लूट लिया करते थे । इस कारण कष्ट और अर्जुन ने उस वन को ही जला दिया और खंड वन की जल गई भूमि कृषि कार्य करने के लिए लोगों में बांट देगी । इससे राज्य और भी समृद्ध हो गया । इन दिनों कृष्ण और पांडवों में खेल में बहुत बढ रहा था । कृष्ण रजिस्टर आदि से आयु, ज्ञान और सूझबूझ अधिक रखता था । इस कारण पांडवो कृष्ण का बहुत सम्मान करते थे ।

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श्री कृष्ण Written by गुरुदत्त Published by हिंदी साहित्य सदन Voiceover Artist : Suresh Mudgal Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त
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