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पांजलि के पंखों से हवा के कटने की ध्वनि ने सभी को सावधान किया । आंचलिक प्रमुख जी के समीप पहुंचा और उसने अपनी सांकेतिक भाषा में प्रमुख सी को सब बता दिया । प्रमुख जी सब जानकर प्रसन्न थे और उन्होंने आंचलिक को एक पत्र दिया । अंजली गोश सिंगा । पूरा से कुछ ही समय में प्रभु के समय पहुंच गया । प्रभु ने पत्र पढा और प्रभु मुस्कुराए प्रभु का पत्र लेकर आंचलिक पुरा गोश्त इनका पूरा पहुंचा पत्र पढकर प्रमुख जी ने प्रभु के युद्ध कौशल वह पूर्वानुमान को प्रणाम किया । प्रभु ने रात्री को ही सभा आमंत्रित की और कहना प्रारम्भ किया कल प्रातों से युद्ध प्रारंभ हो जाएगा । मालिक शोल ने अपना सबसे श्रेष्ठ वैज्ञानिक खो दिया । उसने उसे स्वता ही मार डाला । प्रभु जब मालिक सोन ने स्वतः ही उसे मार डाला तो आपने क्यों कहा कि उसमें खो दिया? दंडा था बाल एक्सोन हमारे बनाए चाल में फंस गया बल्कि वो अपने ही बनाए जाल में फंस गया हूँ । मैं कुछ समझ नहीं सका । जब मुझे पता चला कि उसके पास एक वैज्ञानिक आया है तो निश्चित ही श्रेष्ठ होगा । उसके अनुसंधान ही उसको श्रेष्ठ बनाते हैं । मैंने विचार किया कि इसकी मूल शक्ति उसी वैज्ञानिक के कारण सभी ने हाथ में हम सभी जानते थे कि मालिक के खाओ स्वतः ही भर जा रहे हैं । उनमें बहुत से विशिष्ट क्षमताएं थी, जो सामान्यता प्राणियों में नहीं होती है । ये संपूर्ण अक्षमताएं वैज्ञानिक प्रयोगों के कारण की थी । तब प्रभु ने पूरा कहना प्रारंभ हो, मैंने जब सुना केबल एक महिलाओं के प्रति विशेष प्रयोग से एक सप्ताह वही मालिक सिर्फ उनको जनमत देंगे । तब मैंने विचार किया केस वैज्ञानिक को समाप्त करना प्रथम कार्य होना चाहिए । मेरे प्रमुख से कहा वे कुछ इस प्रकार का प्रयोग करेंगे कि उसके प्रयोग से गर्भधारण हो सके । प्रमुख मैंने एक ही दिन में इस प्रकार की औषधि तैयार यदि उसके पास तो कोई स्टोरी एक बार सुन ले तो वह गर्भधारण न कर सकेगी । अब भ्रष्ट था कि बहुत साडी कैसे प्रत्येक स्तर तक पहुंचे । इसके लिए मैंने करों को लगाया और उन्होंने वेश बदलकर कुछ ही समय में प्रत्येक स्त्री के कक्ष नहीं उस औषधि की पूर्व को पहुंचा दिया । तो औषधि धीरे धीरे पूर्ण से वास्तव में परिवर्तित हो गई और स्वसन द्वारा इस तरीके शरीर में पहुंच गई । इस प्रकार जब मालिक वैज्ञानिक अपने अनुसंधान द्वारा बाल एक्शन शिशुओं को जन्म देना चाहता हूँ तो वो सफल हो गया और मेरा अनुमान सत्य हो गया । प्रभु आपका कौन सा अनुमान सकते हो गया? भुजंगेशाय स्वाती किसी भी व्यक्ति को बहुत बडा स्वच्छता नहीं दिखाना चाहिए क्योंकि जब वो स्वतंत्र बोरडा नहीं होता है तो उसका आघात भी बहुत ही होता है । जब मुझे ज्ञात हुआ केबल एक शिप नहीं, शाम में पचास हजार बाल एक शो की सेना तैयार करने की योजना तैयार की है तो मेरे मस्तिष्क में ये विचार आया कि यदि यह योजना सफल हुई तो दो लाख होंगे । प्रथम वाले फोन अपने वैज्ञानिक से इतना क्रोधित हो जाएगा तो उसे निश्चित ही मार डाला । क्रोध से व्यक्ति का अलग होता है । मेरा उद्देश् कल एक शेप को समाप्त करना था जिससे भविष्य में इस प्रकार की संभावनाएं समाप्त हो जाएगा के साथ मैं दिन ही होगा क्योंकि तब तक तो सभी प्रतीक्षा करेंगे । इसी कारण मैंने कहा था कि सात वे दिन जब प्रारंभ होगा । पत्र द्वारा प्रभु की इसकी सूचना को श्रृंगा पूरा भेज दी गई जिससे प्रमुख जी को संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई थी । रात्रि को ही प्रभु ने ध्यान क्यों गतिविधि से जल्दी हो अभी मंत्रित करेंगे । इस चल के प्रयोग से सभी सैनिक वरिष्ठ सेनापति मलिक शो द्वारा सुरक्षित हो गए मालिक शो का सामान्य व्यक्ति को भोजन बना लेना साधारण प्रक्रिया थी । अपने पिछले युद्ध की भावी युद्ध तो कर सकेंगे, साथ ही मालिक शोका ग्राॅस नहीं बनेंगे । सभी वीर योद्धा युद्ध के लिए तत्पर थे और मालिक सौ का मनोबल रसातल था । मैं प्रभु अंत में प्रभु आशुतोष इंद्रा नहीं, मूल रहस्य को खोला है, जिसे पत्र द्वारा प्रमुख अच्छी नहीं प्रभु को सूचित किया था, जिसे आंचलिक ने एक ही दिन पूर्व ही देखा था । प्रभु ने अंतिम संबोधन में कहा, आप सभी ध्यान से समझे बाल एक शो के गाओ अपने आप स्वता ही भर जाते हैं । ब्रह्मा की कृपा से आंचलिक ने वो रहस्य देख लिया है । सभी अत्यंत उत्सुकता के साथ प्रभु को देख वसूल रहे थे । कारण भी स्पष्ट था कि प्रभु बोल रहे हूँ और साथ ही मालिक श्यों का वो रहस्य जो अभी तक अनसुलझा था । आप सभी को मालिक सैनिकों के बाद खान पर आक्रमण करना होगा । आक्रमण के पश्चात एक रंगीन जब कान से बाहर निकले का डब्बे के बहते ही उसमें स्वता घाव भरने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएंगे और वे मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे हूँ । अब आप युद्ध की आप क्या देंगे? आज मालिक का अंतर निश्चित है । प्रभु वहाँ की आज्ञा पाकर जैसे ही युद्ध का शंखनाद किया गया कुछ ही क्षणों में बाॅक्स चौकन्ने भी हो गए । मालिक सोने जैसे ही आंसू तो सेंध नीलकंठ का जाय को सुगुना वे समझ है कि आशुतोष इंद्रा ही नीलकंठ है और उन पर आप खबर हो गया है । मालिक सोलह युद्ध में सामना करने का निश्चय किया । कुछ समय में सारे वाले मैच श्री नदी के दोनों तरफ दिखाई पडने लगेंगे । तब उन्होंने देश दिया की अपनी रणनीति के अनुसार हमें मैच भी नदी के एक तरफ ही रहना है । तब उन्हें मुख्य सेना प्रमुखों को सेना के आगे वसेना के सबसे पीछे व्यवस्थित किया । प्रभु माँ एक रस्ते पर सबसे आगे और उनके साथ हैं । कुमार ऍफ इंगी वतन था । इसके अतिरिक्त शेष सभी मुख्य सेनापति सबसे पीछे रखे गए गोलप जल में छुपा हुआ है । आंचलिक अपनी अस्त्रों व्यवस्थाओं के साथ हवा में जब तक दोनों सेनाएं आमने सामने ऍम फोन भी रथ पर सवार था । उसके पास कुम्भ हापुर की संपूर्ण ऍम युद्ध के लिए भी वह पूर्ण रुपये तैयार था । आज उसने अपने मन में विषय क्या मृत्यु दोनों को अस्थान दे रखा था । समूह खाते ही प्रथम वक्ता कलेक्शन शो नहीं पढा हूँ । मैं स्वतः ही तुम्हारे स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहा था अन्यथा तुम्हारे राष्ट्र को समाप्त करने में । मुझे तो चार घडी बिना लगती हमने एक अच्छा सुअवसर खो दिया । अब इस प्रकार का सुअवसर बोला ना मिलेगा लाइक मैं तो मैं पराजित करना चाहता था । एन सैनिकों को मारकर मुझे क्या मान प्राप्त होता हूँ । अब हम स्वस्थ हो । अब युद्धक आनंद ही कुछ और होगा । मैं तो मैं जीवन दान दे सकता हूँ ऍम अस स्थानांतरण । विज्ञान का रहस्य और ये तेरी दे दो तो हाँ । इतना सुनने के पश्चात प्रभु आशुतोष, इंद्रा नीलकंठ ने अपनी दोनों आंखें ऍम और ऐसा प्रतीत हुआ कि उनकी आंखों का प्रकाश स्रोत के रूप में उनके मस्तिष्क पर भरा है । इतना कूद के उसको रोज से बहुत से मालिक भी हो गए । वहाँ भी अत्यंत कूद में थी । उन्होंने सारथी को हटा दिया और उसके स्थान पर जा रहे थे । एक बार उन्होंने प्रभु को प्रणाम किया और रात को एक का एक दिन प्रकृति से आगे बढाते । अब बहुत मालिक सोन के करीब बहुत चुका था । माँ ने रत रोक दिया । प्रभु ने बाढ को धनुष प्रसंज्ञान कर मालिक सोम को लक्ष्य बनाया । पांच मालिक ससून के वक्त पार करके चारों तरफ योद्धा युद्धरत हो गए । मात्र वस्तुओं का कोलाहल सुनाई पड रहा था । जैसा कि निश्चित सभी ने मालिक शो के बारे कान पर आक्रमण किया और रंगीन तरफ निकल नहीं लगा । उसके उपरांत में सामान्य शरीर के होंगे, जिनके खाओ भरने बंद हो गए और वे पीस गति को प्राप्त हुए । चारों तरफ दोनों पक्षों के योद्धा घायल हो कर रहे हो कर रहे हैं । मालिक भोजन नहीं बना पा रहे थे । उनके खाओ भी नहीं भर रहे थे । वे आतिश िक्र हतोत्साहित होने लगे । इसको देखकर वाले क्षेत्रम ने नदी के पार मालिक शोको आक्रमण करने को कहा परंतु अच्छे ही वे नदी बार करने के लिए नदी में उतरे है । न जाने कहाँ से नदी के भीतर से करों नहीं निकलना प्रारंभ कर दिया । ये सभी गन अभी स्थानांतरण विधि से गोश सिंगपुरा से गोल आपके भीतर आए और संकेत प्राप्त होते ही चल में उतर गए । संपूर्ण युद्ध का चलचित्र आंचलिक की सहायता से प्रमुख जी को सिंगपुरा से देख रहे थे । बाल एक्शन चल से प्रकट हुए कपडों का सामना न कर सके । गडों में अलग ऊर्जा शक्ति भरी थी । उन्होंने कुछ ही क्षणों में सभी को मार डाला । अब मालिक नदी पार करने का सामर्थ्य नहीं जुटा पा रहे थे । इस प्रकार मालिक शिवसेना कमजोर पड गई है । जैसा की अपेक्षित था कलेक्शन सोन ने अपने शरीर का पानी निकाला और वह पुनः स्वस्थ था । उसका भाव भर चुका ना उससे भी प्रभु पर तोमर से प्रहार किया परंतु प्रभु ने उसे मार्क में ही समाप्त कर दिया । प्रभु ने उसके बाद कान को अपना लक्ष्य बनाया परंतु खाओ कुछ ही समय में भर गया । प्रभु समझ गए कि इसका मर्मस्थान सर्वथा बनना है जिससे इसे बाल एक्शन भी न मार सकें । वो प्रभु से बाल में कमजोर पड रहा था परन्तु बार बार पुणे उठ खडा हो रहा था । ऐसा प्रतीत हो रहा था कि प्रभु अपना खेल खेल रहे हैं । इधर ठंड आधार नहीं मालिक शतम् का काम समाप्त करता था । मालिक शब्द होता को नंदेश्वर ने मार डाला । एका एक जब मालिक सोन ने देखा कि उसकी सेना समाप्त होने के लगभग है तो उसने एक अस्त्र का प्रयोग ना जिससे चारों तरफ धुआं छा गया । कुछ पल के उपरांत जब हुआ झगडा तो देखा वाले शुरू वहाँ नहीं था । वो भाग चुका था परन्तु उसे नहीं पता था कि भागने के सभी मार्ग बंद हो चुके हैं । एक का एक आंचलिक अत्यंत तीव्रता से नीचे आया और प्रभु के रख के सभी अगर एक विशेष दिशा में वो चला बहाने रत उसके पीछे तीव्र गति से लगा दिया । रख की विषेशता थी । एक विशेष गति के उपरांत वो भूमि से उठ जाता था । रत को चलने में कोई समस्या नहीं थी । कुछ समय में मालिक सोंग सामने भागता हुआ दिखा माने रत से उसको पार किया और पार करते समय न जाने कितने फल में वे रस्से, भूमि मजबूती और एक भीषण पर प्रहार किया । पैर के प्रहार से वो बहुत दूर तक लो बढता चला गया । पुनः खडा हुआ तब ततमा चलते हुए रखने पुनः अपने स्थान पर आपको अच्छी थी । वो अपनी फूल झाड रहा था । प्रभु आपने रख से उतरे और अब मालिक होगा । तब वो जान चुके थे कि सर्वप्रथम उसका पर्व स्थान क्या करना होगा । अब प्रभु नहीं उस को उठा उठाकर पटकना प्रारम्भ किया और इस बात का ध्यान रखा कि कब इसको दर्द का भाई हो रहा है । प्रभु ने लगभग शरीर के प्रत्येक अंग पर प्रहार किया परंतु मुक्के पहाडों से ये स्पष्ट था कि उसको आघात का प्रभाव नहीं हो रहा था । एका एक प्रभु के मन में विचार आया कि कौन सा स्थान शेष है जहाँ आघात तक किया हूँ । सब जगह तो आघात कर चुका हूँ । तब उन्होंने बात की तरफ देखा माफी । इतने समय से मालिक सुकून को पराजित होते देख रही थी । एकाएक उन्होंने अपना पाया हाथ खाया और कहाँ के स्थान पर त्यौहार करने को कहा । क्योंकि वही एक स्थान अब शेष था जहाँ प्रभु नेता हाथ नहीं किया था । इतने समय में लगभग सभी बडे सेनापति भी वहाँ आ चुके थे । मालिक समाप्त हो चुके थे । अब प्रभु आशुतोष, इंद्रा, नीलकंठ नहीं, उसका बायां हाथ पकडा और उसे उठाकर भूमि पर पटक दिया और अपने कमर में बंधी तलवार । उसके आँख में कार्ड बाहर होते ही नीलवर्ण द्रविड बहन एक और उसे भारी पीडा का आभास हुआ । इसके पहले प्रभु उस पर अपना प्रहार करते हैं । हाँ, न जाने कितनी तीव्रता के साथ सबसे त्रिशूल लेकर उसके एक रीवा पर कार्ड चुकी थी । उसके प्राण उड चुके थे । चारों तरफ नीलकंड वहाँ की चाय जाकार हो रही थी । महाने प्रभु को प्रणाम किया तो प्रभु ने माँ को गले से लगाया । अब चार हूँ । जय खोज के अतिरिक्त कुछ सुनाई नहीं पड रहा था । युद्ध समाप्त हो चुका था प्रभु ने सभी को बधाई थी । साथ ही कुंभ हापुर निवासियों को मुक्त करने, उनके स्त्रियों को स्वस्थ करने की अतिशिक्षित व्यवस्था करते को कहा । यहाँ के निवास से मुक्त होकर अपने घर गए और प्रमुख सीखी । औषधि से वहां की महिलाएं पुणे स्वस्थ होकर जीवन छीनने लगी । अब सभी को श्रृंगा पूरा बहुत चुके थे । पूरी पृथ्वी से संकट के बादल आ गए थे । कुछ साल के उपरांत प्रभु नीलकंठन ने सभी को सभा में आमंत्रित किया और कहा क्या आप मुझे अपने कष्ट निवारण है तो कुछ करना होगा । इतना सुनने के उपरांत प्रमुख जी खडे हुए और उन्होंने का प्रभु मैं क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मेरी सारी औषधियां आपके किसी बाकी चलन को समाप्त नहीं कर पा रही है । आप यदि कुछ आप सरवत हैं आप आदेश दे । तब्बू आंख बंद करके बैठे हुए थे । उन्होंने अपनी आंखें खुली आंखों से प्रेम, करुणा बताया, प्रवाहित हो रही थी । सभी अभिभूत थे । तब प्रभु नीलकंठ ने का एस चलन से मुक्ति का उपाय जब गंगा मेरी चटाक से प्रवाहित तो उसके क्षेत्र था मुझे चलन से मुक्ति । सभी के मुख से निकला गंगा ये गूंगा कहाँ से आएगी? इसी कौन लाएगा अभी गंगा का है । ये कोई चंद न सका । कंदाड दूसरे लोग से आएगी । इतना कहकर प्रभु ने जो कहा किसी को भी अनुमान नहीं था । अब ये काल समाप्त हो गया है । कब हूँ ये काल समाप्त हो गया है । मैं कुछ समझा नहीं । अभी सृष्टि का समय समाप्त हो गया है । कुछ ही पल में अगले सृष्टि के निर्माण हेतु सभी को पर मोर्चा में समाना होगा । कब तूने अपनी माया को इस प्रकार प्रसारित किया की कुछ पलों में सभी प्रभु मैं हो गए । सभी को अनुभव हुआ कि प्रभु का आगाज बढता जा रहा है । बढते बढते वो वासी मोर्चा के रूप में प्रचलित हो गया । सभी के इस स्कूल काया ने कार्य करना बंद कर दिया । सभी की जीवात्मा कर्मों में लिप्त होकर प्रभु में सामान्य लगी । हाँ फिरते भाग में दोनों पुत्र नेत्र भाग में समा गयी । इसी प्रकार रोम रोम में संपूर्ण प्रभान डर समा गया । प्रकाश की परिसीमा इतनी अधिक हो गई कि प्रकाश के अतिरिक्त कुछ भी शीर्ष था । कुछ क्षणों के उपरांत प्रकाश क्षेत्र संकुचित होने लगा और संकुचन के उपरांत एक छोटा अंडाकार प्रकाश प्रतीत हो नहीं वो उनका बनी के साथ वो अंडाकार प्रकाश अंधकार में अगले युग के प्रारंभ ही तो हो गया । शिव के अद्भुत चरित्र की कुछ बूंदें जो आपको अगले खंड में प्राप्त होंगे हूँ । क्या पूरा सृष्टी में ही नया जीवन का प्रारंभ शिव करेंगे? शिव का क्या नाम होगा? शिव के ग्रीवा चालन से मुक्ति प्राप्त होगी अथवा नहीं शर्तों की प्राप्ति होगी कि नहीं शिव का प्रभूराम से संबंध कैसे बना शिव रहस्य जान में है तो सुनी अगला खडे पीना की हूँ हूँ ।

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