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रात्रि का दूसरा प्रहर समाप्त होने को है । अब दोनों में पारस्परिक सहमति हुई कि रात्रि में ही इस विशाल कक्ष में प्रवेश किया जाए । इसके लिए उनके पास हो रहे वह चंद्र दोनों से आवश्यक होने वाला प्रकाश यंत्र था । ये प्रकाश यंत्र सोधी अथवा चंद्र दोनों से ही ऊर्जा अवशोषित करने के उपरांत उस ऊर्जा को प्रकाश में परिवर्तित करने की क्षमता रखता था । उसका प्रयोग करना प्रातकाल की प्रतीक्षा करने से उत्तम समझा गया । इसका एक कारण और भी था क्योंकि कक्ष के भीतर प्रातकाल कितना प्रकाश पहुंचेगा, कहना संभावना था । तब दोनों ने प्रकाश यंत्र की सहायता से अंदर प्रवेश करने का निश्चय किया । अंदर प्रवेश करने से पल भर पूर्व कार्तिक केंद्र ने कहा, लटकेंगे जी, आपका क्या विचार है? क्या हम दोनों को एक ही सात प्रवेश करना चाहिए अथवा इतना सुनने के पश्चात लटकेंगे को भी लगा की दोनों को एक साथ प्रवेश नहीं करना चाहिए । उन्होंने अपनी दोनों आंखों को गोल गोल घुमाकर अपने मस्तिष्क पर दबाव देकर विचार प्रेषित करने का प्रयास किया । वित्तीय समय में कुमार कार्तिक केन्द्र के मन में एक विचार आया और उन्होंने लट्ठ रहेंगी से कहा, लाइट भरेंगे जी, तभी हम लोग द्वार पर कुछ फंसा दी तब सम्भवता द्वार बंद होने की संभावना न रहेगी । इस व्यवस्था में हम दोनों एक साथ ही प्रवेश कर सकते हैं । लव फिरेंगे ने कुछ भी उत्तर नहीं दिया । उनके मन में कुमार कार्तिक केंद्र की सुरक्षा को लेकर प्रश्न उठ रहा था । वो विचार कर रहे थे कि यदि वे अंदर गए और यदि वे किसी प्रकार फंस गए तो बाहर कुमार की सुरक्षा का क्या होगा और यदि कुमार को बेहतर भेजा और स्वयं बाहर रहे तो यदि कुमार अंदर फंस गए तो क्या होगा । सुरक्षा की भावना उनके कार्य परिणाम की भावना से इस समय बडी हो रही थी । इस बात को वह कहना नहीं चाह रहे थे और साथ ही यह भी सोच रहे थे कि को बार उनका मन तब कहना चाहता सकें । यहाँ तो वही विचित्र बात हो गई की कठपुतली ये विचार कर रही है । क्यों उसे चलाने वाले को उसे सुरक्षा दे दी है? क्या कठपुतलियों से सुरक्षित कर सकती है जिसकी ऊर्जा से वो चल रही है जिसकी उंगलियों पर वो नृत्य कर रही है । इसी प्रकार हम भी कई बार उसकी सुरक्षा करते का प्रयास करते हैं जिसकी हम कठपुतली काफी समय व्यतीत होने पर कुमार ने लाॅन्ड्रिंग जी से पुणे कहा आपने क्या विचार किया प्रभु मेरे विचार से हम दोनों को ही एक साथ जाना चाहिए । लाॅन्ड्रिंग का मंतव्य कार्ति केंद्र जान चुके थे परंतु जिस प्रकार भक्त के तले में प्रभु बंद हो जाते हैं उसे प्रकार भारतीय केंद्र ने प्रेम के धागे के कारण लटकेंगे की ही बात मान ली और दोनों ने एक साथ शस्त्रों व अन्य सामान के साथ प्रवेश दिया । अंदर प्रवेश करते समय उन्होंने उसके द्वार को एक चौडे पत्थर से फसा दिया जिससे वह पुनः बंद करना होगा । ये पत्थर इस प्रकार द्वार पर चौखट में फंस गया की जब तक पत्थर नहीं हटेगा द्वार पंद्रह नहीं हो सकता । अंदर अंधकार में प्रकाश यंत्र की सहायता से देखा एक बहुत विशाल मथाडी नुमा यंत्र रखा है उसके साथ बहुत ही मजबूत प्रतीत होने वाली रस्सी रखी है । अब इसके बाद की जानकारी लड भरेंगे के पास थी । उसने विशाल मथानी नुमा यंत्र को बाहर निकाला । उसके साथ वहाँ बहुत सारी खातों की मोटी छडे रखी थी । कुछ ही समय में पूरा सामान बाहर निकाल लिया गया । अब रस्सी को बाहर निकालना शीर्ष था । रस्सी को जैसे ही बाहर निकालने के लिए उठाया तो क्या हुआ कि रस्सी भूमि के भीतर से आ रही है । दोनों ने रस्सी को सूचना प्रारम्भ किया परन्तु क्या वो तो निकलते ही जा रही थी । लग पडेंगे । जिस प्रकार से खींच रहा था उससे स्पष्ट था कि उसे उस के विषय में जानकारी थी । कुछ समय उपरांत रस्सी का निकलना रुक गया और वो इस प्रकार रूप गए जैसे की वो कहीं फस गए हो । तब लड फेंकी नहीं । सामने की दीवार में बनी एक घंटी में उसे बांध और कुमार से कहना प्रारम्भ किया प्रभु अब हमको इस रस्सी के सहारे काल विश्व को निकालना होगा । इतना सुनने के बाद कार्तिक केंद्र की दृष्टि फिफ्टी के बगल वाली दीवार पर पडेगी । उन्हें विद्युत का झटका जैसा लगा और वे कुछ समझ गए । उन्होंने लगता हिंदी से कहा लड पडेंगे जिससे कृता से हूँ । मैं कुछ समझा नहीं । समझाने का समय नहीं है । आप बिना समय गवाएं ही अब का कार्य प्रारंभ कीजिए क्योंकि काल विश्वासपात्र को आपने अपने स्थान से अनजाने में विस्थापित कर दिया है । अब जो मैं समझ सकता हूँ उसके अनुसार हमें शीघ्रता से ही उसे प्राप्त कर लेना चाहिए । प्रभु मैं अभी लम्बे ही कार्य प्रारंभ करता हूँ । इसके उपरांत कार्तिक केंद्र वर्ल्ड पडेंगी दोनों ने विशाल बथानी वक्त हाथों छडों को बाहर रखा । उन्होंने देखा के विशाल कक्ष के बगल वाले पर्वत पर इस प्रकार की व्यवस्था की गई थी कि पर्वत शिखर वह पर्वत के आधार पर मधानी फंस जायेंगे । उन्होंने बधार्इ में धातु छडों को जोडना प्रारम्भ किया । मथानी को चल में डालने के उपरांत लगातार खाते उछालों को जोडते जा रहे थे । इस कार्य के समाप्त होते ही उन्होंने मथानी को विशाल रस्सी से लपेट दिया । मधानी के ऊपरी भाग को पर्वत के ऊपरी हिस्से से वह मध्यभाग को पर्वत के आधार में फंसा दिया गया और शेष आधा भाग जल में टूट गया । पर्वत में मथानी फंसाने की व्यवस्था पहले से ही की गई थी । अब रस्सी के एक सिरे पर कार्तिक केंद्र दूसरे सिरे पर लडकी रहेंगी पहुंच चुके थे । दोनों ने ही निश्चित किया । पहले कल कार्ति केंद्र लगाएंगे और जब वह घूम जाएगी तब लगा फिरंगी बाल लगाएंगे । अब जब कार्तिक केंद्र ने बाल लगना प्रारम्भ किया तो रस्सी वर्मा थानी का भार अत्यंत अधिक होने के कारण रस्सी नहीं भेज सकते हैं । अब कार्तिक केंद्र ने अपने पिता और जगह पिता आशुतोष इंद्रा को प्रणाम किया । साथ ही अपनी माता को भी मन में परिणाम क्या । जवाब जगत पिता पर जगत चलाने से सहायता मानते हैं तो आप को कौन रोक सकता है की आप सफल लाखों मात्र आप तक सहायता तक नहीं पहुंचती है । जवाब स्वास्थ्य अथवा लोग लालच हेतु सहायता मानते हैं । इसे माता पिता के आशीर्वाद का बाल कहे अथवा ईश्वर की कृपादृष्टि की । कार्तिक केंद्र दोबारा बाल लगा ही रहे थे कि मत हानि नहीं घूमना प्रारम्भ क्या अब क्या था एक बार मखानी घूमी तो फिर उसको संबेध प्राप्त हो गया । अब दोनों ही छोड के बाल लगने के कारण मथानी तीव्रता से घूमने लगी । उसके घूमने से जल में धीरे धीरे हलचल बढने लगी । इस बात खाने की घूमने का कारण दोनों के बल के अतिरिक्त कुछ और भी था । क्या था वो कारण दोनों अभी पूर्ण तैयार समझ नहीं पाया । धीरे धीरे चल में हलचल बहुत हो गई । जलाशय के भीतर से चल उछल उछलकर बाहर निकलने लगा । कुछ समय पर सात एक प्रतिशत उत्प्रेरक वस्तु जल के भीतर से ही बाहर आती हुई प्रतीत हुई । धीरे धीरे वह वस्तु ऊपर की तरफ आ रही थी । साथ ही उसकी प्रतिभूति भी बढती जा रही थी । इस समय ये प्रतीत हो रहा था कि एक साथ तीन तीन चन्द्रमा उतार हो गए । देश नीलगगन में और तो चल रही है चल में दो एक का प्रतिबिंब और एक बढती हुई प्रदीप नहीं । जब कोलाकात प्रतिपदा ऊपर सतह से कुछ ही दूर गए तो कार्तिक केंद्र नहीं जल में छलांग लगाते हैं । संभव है इसके लिए लड देंगी तैयार नहीं थी । जब तक वे कुछ समझते कार्तिक केंद्र उस चमक तार गोलाकार वस्तु के पास पहुंच गए । तभी लड करेंगी नहीं । बहुत तेईस आवाज में पुकारा प्रभु प्रभु से मत छूरा नहीं होता हूँ । इतना कहने के उपरांत लड भेंडी दें । अब के हाथ में कुछ हजार जैसी वस्तु उठाई जो वो अपने साथ लाए थे । अत्यंत झूट गति के साथ वो भी जल में उतर गए और कुछ ही पल में कुमार के पास पहुंच गए । अब तक वो गोलाकार चमकदार वस्तु लगभग सादा पर पहुंच चुकी थी । वो एक विशेष वायु गैस से निर्मित गोलाकार आकृति थी । उस वायु की मुख्य विशेषता ये थी कि उसका बलपुरा चल में डूबा रहता था । इसका कारण था उस वायु का खडक चलके घनत् तो से अधिक था । उसको ओला कार आकार में वायु के बत्तीस स्थित था । काल विश जो वायु काल देश के ऊपर गोलाकार आवरण नुमा थी वो अत्यंत विषैली थी । हटाना अब उसे ध्यानपूर्वक हटाना था । तब लाॅन्ड्रिंग कुमार से कहा प्रभु इस गोलाकार वायु आवरण को आसानी से भेजा जा सकता है परंतु इतना कहते लटकेंगे शांत हो गए और कुमार शानू अशांत होना स्वाभाविक ही है जब हम किसी कार्य के अंत तक सफलतापूर्वक पहुंचाते फिर असफलता प्राप्त होने की दैनिक संभावना भी हमारे धैर्य को दिखा देती है । इसी प्रकार इतने संघर्ष के उपरांत अब जब काल विश्व पात्र सबका है तो असफलता का काम ही धैर्य को दिखाने के लिए पर्याप्त रहें । परन्तु क्या कुछ तो बहुत देशना के साथ ऍफ ने कहा कब उ इसके वायु सामान्य वायु से भरी और विषैली तुम्हारी वैभवशाली शप्त सुनते ही पार्टी केंद्र ने अपनी स्वास्थ्य को तीन प्रगति से छोडा और अपनी दोनों आंखों को बंद किया । इसके साथ ही उनके मस्त दस पर सिकुडन भी दिखाई थी । देर का विश्वास के साथ ही उनका खून बहुत तेज ना उनके शरीर से बाहर निकल गए । अब कार्तिक केंद्र स्वता ही समझ गए थे की भारी वायु ऊपर ना आउट कर नीचे सतह पर ही रह सकती है । सतर पर रहने के कारण विषैली वायु प्राणघातक भी हो सकती है । अच्छा दोनों नहीं निर्णय लिया । केशव हकदार गोलाकार वायु आकृति को झलके भीतर रखते हुए किनारे की ओर ले चला जाएगा । धीरे धीरे जल के बहाव को दिशा देते हुए किनारे की तरफ बढे । जब वे किनारे पहुंचने वाले थे तब लड भेंगी तेजी के साथ बाहर आ गया । बाहर आते उसने मथानी नुमा यंत्र के घाटों छडों को बाहर की दिशा में निकालना प्रारंभ किया । कार्तिक केंद्र चलते रहकर पात्र अकोला का रात कृति को चल प्रवाह के द्वारा न तो डूबने दे रहे थे और नहीं चल की सत्ता से बाहर आने दे रहे थे । कुछ ही समय में लड भृंगी ने मथानी नुमा यंत्र को ठीक गोलाकार आकृति के नीचे स्थापित करने में सफलता प्राप्त होगा । नहीं अब कार टिकेंद्र भी चल से बाहर आ गए । बाहर आते ही उन्होंने रस्सी के द्वारा गोलाकार आकृति को बाहर निकाला । बाहर निकालते ही वो वायु आवरण खूब गया । इस समय पात्र मधानी नुमायां यंत्र में फंसा हुआ था । दोनों लोग पर्याप्त दूरी पर थे । उसी समय में पहले वाली पवन के साथ विषैली वायु बह गई और काल विश्व पात्र को प्राप्त कर लिया गया । कल विश पात्र में उस प्रकार की प्रतिभूति नहीं थी जिस प्रकार वो जल के भीतर प्रकाशमान था । अब कुछ प्रश्न कार्तिक केन्द्र के पास थे । और कुछ प्रश्न लटकेंगे के पास सर्वप्रथम लड करेंगे ने कार्य केंद्र को प्रणाम किया और कहना प्रारम्भ किया प्रभु आप के बिना यह असंभव कार्य संभावना था । एक भ्रष्ट मन में आ रहा है । यदि आप प्रश्न तो मेरे मन में भी हैं परंतु पहले आप पूछ लीजिए आप कैसे जन गए कि रस्सी के हटने से विश्वास पात्र अपने स्थान से विस्थापित हो चुका है, अलर्ट करेंगी थी । आपने संभावना ध्यान नहीं दिया परंतु दीवार पर स्पष्ट चित्रांकन किया गया था । क्षेत्र में स्पष्ट था कि रस्सी से ताल विश्वास इस प्रकार फंसा हुआ है कि जवाब दे । रस्सी को खींचा तो मैं समझ गया कि पात्र अपने स्थान से स्थापित हो गया होगा । बहन समझ के आप प्रभु बेरा प्रश्न है कि पात्र में अब चमक नहीं है जबकि जल के भीतर गोलाकार चमकदार वस्तु प्रतीत हो रही थी । प्रभु वायु जो विश्वासपात्र का आवरण थी उसमें गिरने वाली प्रकाश के निर्णय बोरडा आंतरिक परावर्तित होने के कारण प्रकाश उत्पन्न कर रही नहीं । देवा श्री ने मुझे बताया था कि जैसे पात्र ऊपर की ओर आएगा प्रकाशित होने लगेगा । जल के बहुत भीतर प्रकाश नहीं पहुंचने के कारण वो प्रकाश नहीं होगा । इतना सुनने के उपरांत कार्तिक केंद्र शांत थी परन्तु मन व बुद्धि कुछ विचार कर रही थी । वे विचार कर रहे थे कि यदि सब कुछ बताने के उपरांत अभी पात्र प्राप्त करना बुद्धिमानी का ही कार्य था । इसका क्या कारण है कि लटकेंगे लगभग सब जानते हुए भी प्राप्त न कर पाता? अर्थात पात्र प्राप्त करने वाला तंत्र बुद्धिशाली होना चाहिए । इसका अर्थ यह वहाँ की पात्र को यथास्थान पहुंचाने के लिए बहुत थी । वहाँ विवेक की आवश्यकता हूँ । उन्होंने अपने माता पिता को मन ही मन में परिणाम क्या और शिखर सम्मेलन की प्रार्थना ब्रह्मसिंह

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