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प्यार तो होना ही था - Part 8

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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जब हम शाम को कॉलेज पहुंचे तो वह मुझे किनारे ले गई और फिर मुझे अच्छा क्या तो मुझसे प्यार नहीं करते हैं । मैंने चुप रहने की ठानी और उसे देख मुस्कुराता रहा हूँ । मैंने उससे कहा कि मैं उसे घर के आधे रास्ते तक छोडा था । वो मर गई । हम दोनों ने सडक पार की ओके तभी विनीत ने मुझे पीछे से आवाज थी और मुझे उसके साथ एक दुकान तक चलने को कहा । मैं नेट के साथ खडा रहा और वो अपने घर के रास्ते चल रही है । पता नहीं क्यूँ मेरा दिल के कह रहा था कि वो चाहते थे कि मैं उसके साथ चलूँ । मैं उसे अकेला चाहते देखता रहा हूँ । शाम लगभग हो चुकी थी और मौसम भी ठंडा हो चला था । मैं उसे देखता रहा और ये सोचता रहा कि वह मुझे देखने के लिए मेरी तरफ बोलेगी । पर वो चलते रही और दो मिनट के बाद वो बडे हैं और रुकी और मुझे उसके साथ चलने को कहा । मैंने विनित से कहा क्या तुम आगे बढ हो गए और मैं ही की तरह बहरा जो किनारे पर खडी होकर मेरा इंतजार कर रही थी । विनीत चिल्लाकर कहा अरे यार तुम अपने दोस्त को एक लडकी के लिए छोड रहे हूँ ना इस बात की परवाह किए बिना उसकी तरफ दौड कर चला गया कहाँ मैंने उसके पास पहुंचकर खाता बंद किया और उससे कहा हूँ पैदल चले मैं तो मैं घर तक छोड दूंगा । उसमें अपना सिर्फ नहीं लेकर के कहा तो मेरे लिए क्यों आ गया? उसके चांदी की बालियां चमक रही थी । मैंने उसकी तरफ देखा और उस समय हत्या को भूल गया । मैंने उसे छेडते हुए कहा मैं तो मैं अकेले जाने नहीं दे सकता हूँ । हमने चौथा ब्रेश पार किया और गोरखपुर रोड की तरफ चलने लगते हैं । मैंने देखा कि वह अपने हाथ में पुस्तकों को अच्छे तरीके से पकडा नहीं पा रही थी । मैंने शिष्टाचार वर्ष उससे पूछा कि क्या मैं तुम्हारी कुछ पुस्तकें उठालो? उसने कहा नहीं नहीं, कोई बात नहीं । मैं चलते हुए ये सोचने लगा कि पता नहीं लडकियां इतनी फॉर बल्कि होती है । अगर वह एक लडका होती तो न सिर्फ अपनी पुस्तकें नहीं देती बल्कि बैंक भी दे देती हूँ । मैंने उसे रोका और पुस्तकें उसके हाथ से ले लेंगे । उसने मुझे रोकना चाहा पर मैंने उसकी एक भी नहीं सुनी और चलता रहा । उस ने मेरा मजाक उडाते हुए मुस्कुराकर कहा अगर तुम बाहर उठाना ही चाहते हो तो तुम्हारी मान सिंह हम जब सात चल रहे थे तो उसने मुझसे पूछा तो तुमने उसे प्रपोज कैसे? क्या मैं नहीं उससे सवाल किया । किसी उसने कहा तो भी नहीं पता मैं किसके बारे में बात कर रही हूँ । हो नव्या के बारे में उसमें फिर सवाल किया तो क्या तुम्हारी उसके अलावा भी और कई कल फ्रेंड्स है? मैंने उससे हसते हुए कहा क्या तो मेरे साथ सवाल सवाल खेल रही हो? उसने मेरी आंखों में देखा और सीधे का मैंने जो पूछना उसका जवाब तो मैं थोडी सी देर रुका और उससे कहा मैंने उसे प्रपोज नहीं किया है । वो रुकी और उसने हैरान हो कर कहा क्या? और फिर वो लगातार बोलते रही । मुझे समझ में नहीं आया कि तुम्हारी कल फ्रेंड है तो मुझसे प्यार करते हूँ और तुमने उसे अभी तक पहुँच नहीं किया है । तो तुम ये कैसे कर सकती हूँ कि वो भी तुमसे प्यार करते हैं? मैं उसके सवालों का जवाब न देते हुए आगे बढते रहा और वो भी मेरे साथ इस आस में चलती रही कि मैं उसके प्रश्नों का जवाब तो मैं समझ नहीं पा रहा था की ये क्या चल रहा है । एक तरफ तो मैं बेलते ही की और खींचा चला जा रहा था और दूसरी ओर मैं नब्बे के बारे में थोडा कंफ्यूज था और ये बहुत ही मुझे और कंफ्यूज कर रही थी । उसके बारे में सवाल पूछ पूछकर मैंने उसे कहा । शिक्षक दिवस का दिन था और कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के बच्चों ने मिलकर अपनी सारे शिक्षकों के लिए पार्टी का आयोजन किया था । वो बहुत ध्यान से सुन रही थी । ऑफिस प्लेयर सोने के कारण हम लोग इंतजाम आधे देखने के लिए व्यस्त थे और हम सब ने सबसे अंत में लंच किया । मैं खुद के लिए खाना लगा रहा था कि तभी नब्बे आ गई और मैंने उससे पूछा क्या मैं उसके लिए कुछ मिठाइयाँ लगात हूँ? मैं उसे मिठाई देने में मदद कर ही रहा था कि मेरा एक साइड पार्टी आ गया और उसने बीच में टोकते हुए कहा तुम्हें से अपनी चम्मच से ही क्यों नहीं खिलाते थे । उसने हमें छेडते हुए कहा कि सब जानते हैं कि पिछले साल से हम लोगों के बीच क्या चल रहा है । मैंने उसकी बातों को नजर अंदाज करने की कोशिश की और नब्बे को भी उस की अनदेखी करने को कहा तो मुस्कुराई और हाल के दूसरी तरफ चली गई । फिर वहां पहुंचकर मोडकर मेरी तरफ देखा और फिर मुस्कुराई । मैं उसे ये कहानी बताकर छुट हो गया । हम लोग उसके घर के पास पहुंच गए थे । उसने रोड की एक तरफ रुककर का की । तुमने उसे प्रोपोज क्यों नहीं किया? ऐसा लगता है कि वह भी तुमसे प्यार करती है । मैंने धीरे से कहा बता रहे हैं पर कोई तो ऐसे चीज थी तो मुझे रोके हुए थे । उसने कहा कि तुम सही समय पर सही बात कही नहीं सकते हो । मेरे हाथों से पुस्तकें खींचने के बाद वह जल्दी से अपने घर की ओर भाग गई । मैं वहीं खडा होकर उसे देखता रहा । उसने फाटक बंद किया और मुझे बाय कहा । उसका ये कहने का क्या पता होगा? वो किस सही बात की बात कर रहे थे जो मुझे इसे और कब कहनी चाहिए थी । मेरे दिल और दिमाग में चलता है । इन सवालों का मेरे पास कोई जवाब नहीं था । मेरे दिल और आत्मा में कुछ छोड कर नहीं हो पा रहा था । वो मेरी आंख्या के बिना ही अपनी मर्जी से काम कर रहे थे । पर मेरे पास उन को स्वतंत्रता से अपना निर्णय स्वयं लेने के लिए छोडने के अलावा कोई विकल्प नहीं था । वो क्या बात कर रही थी? नदिया के बारे में या खुद के बारे में? मुझे ऐसा क्यों लग रहा था कि वह मुझे पसंद करने लगी हैं? क्या वो ये चाहती है कि मैं उनसे प्रपोस करूँ । पर क्या मैं उसे प्रपोज करने के लिए तैयार हूँ क्या क्या मैं अभी भी नब्बे से प्यार करता हूँ? कॉलेज में पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने वाली थी । अब गंभीरता से पढाई करने का समय आ चुका था । जिन इंजीनियर्स ने पूरे सत्र पढाई की थी पर असल में वे इंजीनियर्स नहीं थी । पर हम लोग ने परीक्षा के ठीक पहले ही पढाई थी । उन दिनों हॉस्टल में रात घर लाइट्स चली रहती थी । लडकों को ग्रुप में पढाई करते देखना एक आम बात थी । वहीं कुछ लडके अकेले छत पर पढते थे और कुछ खुद को कपडों में बंद कर लेते थे । मेरे ऍन वाले रूम खाली पडे रहते थे । परीक्षा होने से ठीक पहले हमने कॉलेज जाना बंद कर दिया था क्योंकि हम सब अपना एक मिनट भी तैयारी करने के अलावा कहीं और पर बात नहीं करना चाहते थे । स्कूल के दौरान मेरा डिसाइड कोई बहुत अच्छा नहीं रहता था । इसलिए मैं इस बाबत थोडा ज्यादा ही सतत का था । उन दिनों नव्या और मैंने ही दोनों ही मेरे दिमाग से दूर थे । मैं सिर्फ अपनी पढाई पर ध्यान केंद्रित किया था । नवंबर का महीना चुका था और जबलपुर हैं । ठंड शुरू होने लगी थी । जबलपुर में जाने में ज्यादा ठंड पडती थी क्योंकि वहाँ चारों तरफ संगमरमर है । मुझे सेमिस्टर की छुट्टियों पर भी जाना पड सकता था आपने गर्म कपडे लाने के लिए । वैसे भी हमने आने वाले रविवार को सिविक सेंटर जाने की सोची थी कि कुछ नए स्वेटर ले लें । जबलपुर में सिविक सेंटर अपनी फैशनेबल दुकानों के लिए प्रसिद्ध है । हॉस्टल में उस शाम काफी शांति थी । सीनियर्स की परीक्षा खत्म हो गई थी और कुछ तो अपने घर के लिए भी निकल पडे थे और कुछ वहीं रहकर मजे कर रहे थे । उनमें से कई लोग तो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फिल्में देखने गए थे । मैं अपने पहला पेपर के खत्म होने का इंतजार कर रहा था की मैं भी वह फिल्म देखा हूँ । मैंने पढा था की फिल्म अच्छी चल रही है और सलमान इसमें कुछ अलग दिखाते हैं पर मुझे अगले तीन दिनों तक इंतजार करता होगा । हमारे सबसे पहले परीक्षा गणित की थी और मैं अपने कमरे में आकाश के साथ पढने में व्यस्त था जो बिस्तर में बैठकर पढ रहा था । आकाश अपने हाथों में एक पुस्तक लेकर लेटा हुआ था । मैंने अपने स्टडी टेबल पर ही बैठकर पढना चाहता हूँ हूँ जहाँ मैंने भगवान श्री गणेश की मूर्ति रखी थी । ना सिर्फ आशीर्वाद लेने के लिए बल्कि अपनी इमेज को गंदे कपडों और बेकार की चीजों से दूर रखने के लिए भी । छोटू अचानक कमरे की ओर भागता हुआ आया और उसने मुझे बताया कि एक लडकी सिंधियों के नीचे मेरा इंतजार कर रही है । मैं सुन कर हैरान था की एक लडकी मुझसे मिलने के लिए होस्टल में आई हुई है । आकाशवाणी मेरी और आज शादी से देखा यहाँ तक कि मेरे रिश्तेदार भी मुझे बताए बिना ऐसे कभी नहीं आती हूँ । ये खून है । आशा करता हूँ की सीनियर्स या विनय इतने मेरे साथ कोई मजाक किया हो जिन्हें अमूमन ऐसा करने में मजा आता है । मैं उठा और कुर्सी में लडकी अपनी टी शर्ट को उठाकर पहन लिया । मैं बाहर कॉरिडोर में गया पर वहीं मुझे आकाश के कमरा छोडकर हमारे बगल वाले कमरे में जाने की आवाज आई । हालांकि मैं नीचे उतर गया । मुझे अभी भी यकीन नहीं था के कौन मेरा बाहर इंतजार कर रहा होगा और मेरे सीनियर्स ने मुझे ऐसा क्यों का? मैं जल्दी से नीचे पहुंचा । हॉस्टल अटेंडेंट भी मुझे देख मुस्कुराने लगा । मेरे सीनियर्स सोफे में बैठकर सिगरेट पी रहे थे । मैंने उनका अभिवादन किया और बाहर चला गया । मैं देख कर हैरान था कि बैठे ही स्कूटी में बैठी हॉस्टल के बाहर मेरा इंतजार कर रही थी । मेरे अधिकतर सीनियर्स लॉबी में बैठे हुए थे और उनकी आंखें आते ही की ओर थी । उसके पास पहुंचते हुए मैंने सोचा उसे इस तरह मेरे हॉस्टल में नहीं आना चाहिए था । अब यहाँ हर लडका हमारे बारे में ही बात करेगा । मुझे कोई भी सिखाने में कोई कसर नहीं छोडेगा । मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा खाया है तुम यहाँ कैसे आई? उसने मेरे से भी बडी मुस्कुराहट भरे । चेहरे के साथ कहा, क्या मैं तुमसे मिलने नहीं आ सकती? मैंने जवाब दिया, खरीद नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है । पर तुम्हें पता है ये लडकों का हॉस्टल है । वो और मुस्कुराई और अपने दोनों हाथों से स्कूटी का हैंडल्स ओरसे पकडे रही । वो छोटी जिन्स और हल्के हरे टॉप में खुले पालों के साथ बेहद खूबसूरत लग रही थी । उसके पैरों की पेंसिल ही उसे अलग ही लुक दे रहे थे । मैंने उसे ऐसे कपडों में पहले कभी नहीं देखा था । मैं उसके लडकों के होस्टल के बाहर खडे होने के कारण चिंतित था । उसने मुझे देखा और मुस्कुराकर जवाब दिया मुझे पता है ये लडकों का हॉस्टल है । ये पहले फ्लोर की सबसे ऊंची फिर की देख करे समझ आता है । ऐसा सुनकर मैंने ऊपर देखा तो मेरे दस दोस्त उसी खिडकी से नीचे झांक रहे थे जिसमें आकाशवाणी और अन्ना भी शामिल थे । पर वो बहुत आराम से थी और उसने उन सब को नजर अंदाज दिया । मैंने सेफ नहीं थे करके का मेरे दोस्तों के ऐसे व्यवहार के कारण उन की तरफ से सौरभ उसने कहा कोई बात नहीं पर वो सब ऐसे क्यों देख रहे हैं । मैंने धीमे सोच से कहा मुझे लगता है की तो मैं पता तो होगा ही कि वह लोग तुम्हें देख रहे हैं । ऐसा सुनकर वह थोडी सजग हो गई और उसने कहा अच्छा अब क्या तुम हमारे प्रोजेक्ट के काम के लिए इंजीनियर ड्राइंग फिर दे सकते हो? मुझे उसे कॉफी करना है । मैंने जवाब दिया अच्छा ठीक है मुझे दो मिनट तो मैं पीछे मुडा और खिडकी की तरफ आकाश को देखकर चिल्लाया जो वहाँ से खडे होकर झांक रहा था । आकाश अरे क्या तो मेरी इंजीनियरिंग टाइपिंग प्रोजेक्ट नीचे ला सकते हो । प्लेज वैदेही को चाहिए । मैं इसलिए भी वहाँ से चिल्लाया की सभी को पता लग सके कि वो वहाँ पर काम के लिए खडे हैं ना कि मुझे देखने के लिए । आकाश थोडा सकपकाते हुए बोला हाँ अरे मैं आ रहा हूँ । मैंने उस से पूछा कि उसकी तैयारी कैसी चल रही है । वो थोडा चिंतित थी क्योंकि अभी तक रिवीजन नहीं हुआ था । वहीं पहली बार परीक्षा से पहले मैं अपना सिलेबस खत्म करके खुश था । मैंने देखा कि मेरे को सीनियर दूसरी तरफ से उसकी नजरों से दूर मुझे इशारे कर रहे थे । पर मैंने उनकी तरफ नहीं देखा । तभी आकाश दौडते हुए अपने हाथों में इंजीनियरिंग ड्राइंग शीट लेकर आया और उसने कहा हाईवे रही तुम कैसी हो ये लोग तो भारी शी उसने जवाब दिया चलने वाला आकाश । उसने फिर आकाश कही व्यंग करते हुए कहा अच्छा ये तुम लोग फिर से जाकर के आ देख रहे थे । आकाश को समझ नहीं आया कि क्या चलाते हैं वो पढाते लगा और हाँ कल आते हुए कहने लगा अगर वो कुछ नहीं मैं मैं तो रोहन का इंतजार कर रहा था कि वह मुझे बहुत बताए तो उसका जवाब सुनकर मुस्कुराई और शीट लेकर उसे स्कूटी में रख दिया । उसने मुझे धन्यवाद दिया और मुस्कुराकर कहा ऑल द बेस्ट । हमें दायक कहकर उसने अपने स्कूटी स्टार्ट की । वह चली गई । मैं खडा होकर उसे देखता रहा पर उसने अपनी स्कूटी फिर से रोक दी । मैंने लम्बे लम्बे का धरें और उस तक वापस पहुंचकर पूछा क्या हुआ? उसने मेरी तरफ देखा और जवाब दिया तुम गाडी में बहुत अच्छे लग रहे हो, पढाई में ध्यान देने के कारण होगा ही । छोटी छोटी दादी को देखकर उसने ऐसा कहा । उसने अपना एक्सलेटर बढाया और जल्दी चली गई । पर इस पर पीछे मुझे मिला । मैं मुस्कुराकर उसे देखता रहा जब तक उसने किनारा पारसनाथ कर लिया । मैंने देखा कि मेरे सीनियर्स मेरी तरफ दौडे चले आ रहे हैं । उन सब ने मुझे काफी छह आया और मैंने उसे मजे में ही लिया । इस तरह एक सुंदर से लडकी के मुझे होस्टल में आकर मिलने से मैं तो हॉस्टल का हीरो बन गया । मेरे सीनियर्स मुझे रोहन के बदले वैदेही नाम से बुलाने लग गए थे । मैं भी इसमें इतना हो गया कि वे जब भी मुझे बहुत ही कहते तो मैं उन्हें जवाब देते थे हाथ में मुझे ऐसा लगा की मुझे उसके ही नाम से बुलाया जाना चाहिए । उसके नाम के साथ ही मेरे आस पास की सारे चीजें बदलने लगते हैं । हॉस्टल में सभी को लगने लगा कि वह मेरी कल फ्रेंड है । मैं देखने लगा था कि नब्बे या तो कहीं पीछे ही छूट गई और वैसे ही मेरे कितने करीब आ गई । मुझे लगने लगा था कि वह जबलपुर के संगम पर पर पर पडने वाली चाहे की धूप से भी ज्यादा सुंदर है । वो बसंत में नहीं कोमल खास पर पडने वाली धूप से भी ज्यादा तेज है । वो नीचे गिरी पत्तियों से भी ज्यादा मनमोहक है । मेरे लिए वो हर तरीके से गर्मी का मौसम थे तो क्योंकि वो नीले आसमान और हवा में फैलते प्यार के कारण परफेक्ट लगने लगी थी । मैं उसके प्रतिशत इसलिए आकर्षित नहीं हो रहा था क्योंकि वह बेहद सुंदर थी बल्कि इसके लिए भी कि वह भीतर से भी उतनी ही सुंदर इंसान हूँ । परीक्षाएं समाप्त हो चुकी थी और मैं पंद्रह दिनों के लिए घर जाने को उत्साहित था । हम में से अधिकतर लोग अपना बैग बांध चुके थे और उस दिन चला रहे थे और कहा रहे हूँ । शाम के साथ बच्चे थे और अंधेरा भी हो चला था । मैंने भी अपना बैग संभाला और आकाश को गले लगाया जो अगले दिन जाने वाला था । ठाकुर मेरा इंतजार कर रहा था क्योंकि वह मुझे दमोह नाके तक छोडने वाला था । जहाँ से मैं बस पकड लेता । मैं उस लोगों के हर कमरे में जाकर अपने दोस्तों को गले लगाया और उनको छुट्टियों की शुभकामनाएं । हर किसी ने एक दूसरे को वापसी में अपने घर का सर्वोत्तम भोज्य पदार्थ लाने को कहा था । मैं नीचे उतरकर आया तो ठाकुर बाहर अपने स्कूटर पर मेरा इंतजार कर रहा था । मैंने अपने दोस्तों और ग्राउंड फ्लोर में अपनी सीनियर्स का वो गुड बाय कहा और बाहर निकल गया । ठाकुर ने मुस्कुराकर मुझे कहा मैं चलती बैठो क्योंकि मुझे छोडकर वो अपने चाचा कहाँ जाएगा । मैं खुशी में जोर जोर से गाया जा रहा था । वही ठाकुर उदास लग रहा था क्योंकि इन पंद्रह दिनों के लिए वो अकेला हो जाएगा । तब तक ठंडा बढ चुकी थी । मैंने अपने दोनों हाथ मोडकर ठाकुर के पीछे छिपा लगे कि मैं ठंडी हवा से बच्चा ठाकुर भी गाडी चलती बगाई और भारी ट्रैफिक को पार कर लिया और मुझे जल्दी से दमोह नाका पहुंचा दिया, जहां से मुझे बच पकडी थी । दमोहनाका पर भीड थी । लोग अपने कंधे पर बैग टांगे हुए बसों को खोज रहे थे । कई सारे बस अंदर आ जा रही थी जिससे लोगों में अफरा तफरी थी । मैंने ठाकुर को धन्यवाद दिया कि उसने मुझे यहाँ तक पहुंचा दिया और मैंने उसे जाने के लिए कहा । मैंने उससे कहा कि जब रिजल्ट आ जाएगा तो मुझे बता देना भाई । मैंने उसे अपना रोल नंबर भी दे दिया था । उसने मुझे गले लगाते हुए कहा चलो जल्दी मिलते हैं बाय अपना ध्यान रखा हूँ और फिर वो चला गया । मैंने अपने कंधे पर अपना बैठ घर से रखा । बैग बहुत भारी था क्योंकि मैं उसमें अपने कपडे ले जा रहा था । उसमें मम्मी पापा सुबेदी के लिए कुछ उपहार भी थे । पहले सामने देखा तो एक सफेद बस रोड के किनारे खडी थी जिस पर लिखा था सागर मैं समझ गया कि ये एक प्राइवेट बस हैं और सागर के लिए कभी भी चल सकती है । मैं बस के अंदर बैठ गया और अपने लिए एक सीट ले लें । विंडो की तरफ झुककर मैं सोचती हूँ । मैं अपने शहर अगले सुबह छह बजे पहुंच गया । मैं कैसे नींद से जागा । मैंने खिडकी से बाहर झांकते हुए अपनी आखिर वाले बाहर कोहरा छाया हुआ था । मैं बाहर निकला और शाह हो तरफ देखा । बस स्टैंड खाली हो चुका था । आसमान हर पीते मिनट में साफ हो रहा था । एक चाय के खोमचे के बगल में पीपल के पेड पर चिडियों ने कलरव करना शुरू कर दिया था । चुकी बाहर ठंडा मौसम था इसलिए मैंने अपनी जैकेट की तो उससे ऊपर करके मैं अपने घर तक पैदल चलकर आ गया जो वहाँ से बहुत ही पास था । मैंने वही जाने पहचाने जगह देखें जिसे मैं पिछले कई महीनों से मिस कर रहा था । मुझे बैठे ही की याद आई और उसे और उसके हावभाव याद करके मैं मुस्कुराने लगा । मैं नव्या से भी मिलने की सोच रहा था पर थोडा समझ नहीं पा रहा था क्योंकि मेरा चुका हूँ वैदेही के लिए बढता जा रहा था । क्या मुझे नब्बे से मिलना चाहिए और उसे प्रोपोज कर देना चाहिए या मुझे बैदेही को प्रपोस करना चाहिए? कभी कभी मुझे ऐसा लगता है कि मैं दोनों से बराबर प्यार करता हूँ पर इससे मैं कहीं का भी नहीं रहूंगा । मुझे निर्णय तो लेना ही होगा । जब तक मैं पहुंचता आसमान साफ हो चुका था । मेरे घर के सामने की दुकानें अभी तक बंद थी और बच्चे स्कूल बस के आने का इंतजार कर रहे थे । समय कितनी जल्दी भागता है । कुछ दिन पहले तक मैं भी एक स्कूल जाने वाला बच्चा था । ऐसे ही बस में बैठकर अपने दोस्तों और अपने चचेरे भाई बहनों के साथ स्कूल जाता था । मैं घर पहुंचा और घंटी बजाई हूँ । किसी को भी पता नहीं था कि मैं आने वाला हूँ और उनके लिए ये किसी सरप्राइज से कम नहीं था । दरवाजा खुला और मैंने पापा को देखा जो अंदर ये समझते हैं कि कोशिश कर रहे थे कि बाहर कौन आया है । मुझे देखते हुए चौके और दरवाजा खोल कई उन्होंने मेरा स्वागत किया । मैंने उनके पैर हुए और उन्होंने मुझे गले लगा लिया । उन्होंने मुझे गले लगाते हुए कहा तो तो हमें चौका दिया और वही मम्मी मेरी आवाज सुनकर चली आई और मुझे देखते ही गले लगा लिया । मैं अपने कमरे में गया और देखा सुरु हो रही हैं । मैं उनके गालों को दबाया और मुझे देखकर बहुत शौक कर उठी । उन्होंने मुझे गले लगाते हुए कहा, भाई मैंने तुम्हें बहुत मिस किया । मैंने उसे चिढाते हुए कहा और मनोज कैसा है । मम्मी मुझे देख कर खुश थी और उन्होंने पहले से ही सोच लिया था कि वे मेरे लिए क्या बनाएंगे । मैं थोडा पतला हो गया था और को इस बात से खुश नहीं थी । सुवेदी बिस्तर से उठे और मुझे खींचकर स्टडी रूम में मेरा हाथ किस कर ली गई । वह मुझे कुछ दिखाने की जल्दी में थी । मैंने कहा मुझे कहाँ खींच कर ले जा रही होती थी । उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे लिए कुछ लाइन, अपनी आंखें मत करूँ । उन्होंने जैसे कहा मैंने वैसे ही किया था पर मुझे लगा कि मैं अपनी स्टडी रूम में घूम रहा हूँ । उन्होंने लाइट उनकी और मुझे आंखे खोलने के लिए कहा । मैंने जैसे ही अपनी आंखें खोलें, मैंने देखा कि उन्होंने मेरी और नव्या की फोटो फ्रेम करवाकर रखे हुए थे । मैंने पहले फोटो को हत्प्रभ होकर देखा फिर अपनी बहन को देखा था जो मुझे मुस्कुराकर देखना चाहती थी ।

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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