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प्यार तो होना ही था - Part 5

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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जब मैं अगली सुबह सोकर उठा तो मैंने देखा केबिनेट ने सारा बिस्तर हथियार रखा था । आकाश दीवार के सहारे सोया हुआ था और मैं तो बिना के हाथ है । हम पावों के पोस्टर बडा ही जा रहा था । मैंने किसी तरह अपने को बाहर निकाला और बिनेट के ऊपर एक थप्पड मारा । वो हो सकता हो कर उठा और सोचने लगा कि कहीं फिर से सीनियर्स तो नहीं आ गए । मैं दोनों पर चिल्लाया, उठो मोटू कॉलेज का समय हो चुका है । हम सब पहले साल वाली आपने नई कॉलेज यूनिफॉर्म पहनकर तैयार हो गए थे जो तीन ऍम और काले फॉर्मल चुके थे । हम ग्राउंड फ्लोर पहुंचे और हॉस्टल से कॉलेज दो किलोमीटर पैदल गए । क्यूरियस कॉलेज में पिछले रात के बातों को याद करते हुए एक ग्रुप में चलते हैं । बीस मिनट बाद हम लोग कॉलेज के गेट पर नहीं, हम सब अपनी अपनी क्लासों के लिए चले गए । विदिन भी इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशंस ली थी और हम दोनों क्लास के लिए एक साथ चल पडेंगे जो पहले चोर पर थी । हम जैसे ही क्लास उनके दरवाजे पर पहुंचे तो मैंने उसे देखा । वो आसमानी नीले रंग का कुर्ता और सफेद मैं जाना नहीं हुई थी । उसके बालों में तेल लगा हुआ था और दो छोटे बनाकर उसने उसे लाल ट्रिपल से बांध रखा था । पैरों में चप्पल पहनी हुई थी और डेस्क पर खडे होकर वो नाच रही थी या आॅटो लगा के ना अच्छे रहे तो सारे लडके उसे घेरे हुए ये गाना गा रहे थे । वो अपने हाथ ऊपर नीचे कर रही थी जैसे रंगीला फिल्म और मिला नहीं किए थे । वो बहुत मजे लेकर ये सब कर रही थी और उसकी आंखों से उसका तो विश्वास अच्छा लग रहा था । बेट दरवाजे पर खडे हो कर अपने चेहरे पर मुस्कान लिए ये सब देख रहा था । ये वही लडकी है जिसने मुझे सेंड चौसठ भिलाई में कंप्यूटर साइंस लेने के मेरे मन को निकाल दिया था । इतने तो आंखें फाडकर उसकी ओर देखा और कहा स्वास्थ्य क्या नजारा है मुझे तो इसे देखते ही पहली नजर में प्यार हो गया है । उसने मुझे अपने हाथों से पीछे धकेला और मैं डांस करता हुआ बिना ये सोचे अंदर चला गया कि वहाँ को सीनियर्स उसे डेस्क में खडा करवाकर नजर आ रहे हैं । मैं अपने हिसाब से नाश्ता गया और सब लोग चुपचाप खडे हो गए । मैं फिर भी उसे देखता रहा है । उसने भी नाचना बंद कर दिया था । पर मुझे देखकर वह मुस्कुरा रही थी । फिर एक आवाज आई तो हीरो क्या तुम नाचना चाहते हो? हमारी एक सीनियर मंजुला रंजन जो टीचर के डेस्क पर तीन अन्य सीनियर्स के साथ बैठी हुई थी । डाॅन नीचे होती तो मेरी तरफ आई और मैंने अपनी आग्रणी चिपकती हूँ तुम क्या पीते हो? दो दूसरे सीनियर्स बहुत जोर से हस्ते रहे । अच्छा अब तुम गांव और वो नाचेगी । ऐसा का कर वो टेस्ट पता चली गयी बस से मैं आप लोगों को बताना भूल गया कि मैं बहुत अच्छा गाता हूँ । मैंने अपना बॅायकॅाट को दिया जो मेरे बगल में खडा था और मंजुला रंजन को देखने में उसका ज्यादा मन लग रहा था । मैंने गीत शुरू किया तो हीरो ऍम तो ही रहे हैं बिना ॅ हूँ । मंजुला ने बीच में मुझे होगा । उन्होंने ड्रेस पर खडे लडके से कहा वो मैडम तो उन्हें नाचना भी है । उसमें अपना चेहरा बनाया और मेरे इस्तीफे और उदास गाने पर नाचने लग गई । मैं फिर से गाने लगा और वह अपने हाथों से कुछ मुद्राएं बनाने लग गई । वो अपने हाथों को ऊपर नीचे करते हुए बहुत ही सुन्दर लग रही थी । मैं बहुत जोर से कह रहा था और मेरी आवाज क्लास के बाहर तक सुनाई दे रहे थे । क्लास में कोई घुसा और सब कोई यहाँ तक कि सीनियर्स भी चुप चाप सीधे खडे हो गए । एक नहीं था जो अकेला जोर जोर से गाया जा रहा था । कडक आवाज में किसी ने मुझे टाइट करता हूँ हूँ तो मैं चुप कराने के लिए कोई विशेष आमंत्रण देना होगा । क्या वो हमारे फिजिक्स के टीचर थी? कॅश सिंगर्स ने उनका अभिवादन किया और क्लास छोड कर चले गए । हम सब ने अपनी सीट ले ली । मैंने विकेट के हाथ से अपना बैग ले लेंगे । प्रकृति मैडम ने देश करके आगे अपनी पुस्तकें रखीं और पहले अपना परिचय कराया हूँ । मेरा नाम प्रीति है और मैं पहले सेमेस्टर में तो भारी फिजिक्स के क्लास रूम नहीं इस विषय में भी होंगे । इसलिए कोई उलझन नहीं होनी चाहिए । उन्होंने हम सबको देखा और फिर का चुके तुमलोग क्लास में नहीं हो इसलिए एक एक कर अपना परिषद हो । उस किनारे से परिचय देना शुरू करो । सबसे पहले दिन इतने का गुड मॉर्निंग । दोस्तो, मेरा नाम विनीत सिन्हा है । मैं के बाद से हूँ । मैं अभी पब्लिक स्कूल से पढा हूँ और यहाँ होस्टल में रह रहा हूँ । खाये मैं हूँ और रेवा से आया हूँ । मैं बाल विद्या मंदिर से पढा हूँ और यहाँ जबलपुर में अपने चाचा के साथ रह रहा हूँ । मैं नीचे देख रहा था और हर परिचय को ध्यान से सुना था । ये वो लोग थे जिनके साथ मैंने अपनी जिंदगी के अगले चार साल गुजार देते । अचानक मैंने जानी पहचानी आवास हो नहीं । उसने कहा ऍम मेरा नाम बैठे ही शर्मा है और मैं जबलपुर से हूँ । मैंने अपनी स्कूलिंग कॅरियर सेकेंडरी स्कूल से की है । मैं उत्साही लडकी हूँ जो चीजों को खोजना और खुलना पसंद करती हूँ । मैंने जैसे ही ये परिचय सुना तो मैंने ध्यान दिया की मैं तो उसी के बगल में बैठा हूँ । जल्दी से सीट लेने के चक्कर में मैं अनजान नहीं उसके पास शॅल । मैंने अपना सिर ऊपर क्या और उस की ओर देखकर का ही छान धाम है । फिर मेरी बारी आई । मैं खडा हुआ और अपना परिचय देने लगा था । मेरा नाम रोहन वर्मा है । मैं सागर से हूँ और मैंने अपनी स्कूली पढाई साॅस कूल लगी है । मैं जैसे ही बैठा उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा और का फॅमिली में कैसे? ये तो लडकियों का स्कूल होता है । मैं उसकी तरफ मुडा और इस तरह जवाब दिया कि मैडम सुन नहीं पाएंगे । मैंने कहा साधर्मी के कोई स्कूल है । अपना परिचय देते हुए मैंने कहा वैसे मैं रोहन और तुम को फिर मुस्कुराई और उसने कहा मैंने अपना परिचय दिया था । तब तो मैं मेरा नाम नहीं सुना । इससे पहले की मैच जवाब दे पाता । मैडम चिल्लाई और उन्होंने काम क्या? तुम दोनों चुप हो गए । क्लास में और लोग भी हैं जो अपना परीक्षा देने का इंतजार कर रहे हैं । हमने बात करने बंद कर दी । इधर साठ बच्चों का परिचय चलता रहा और दूसरी तरफ उसने एक पेन निकाला और मेरे सामने अपनी नोटबुक में कुछ लिखा और लिख कर मेरी तरफ किसका दिया । मैंने उसकी लोरपुर अपनी तरफ खींचे तो अच्छा गाते हो । मैं प्रभावित हुई । मैंने उसकी आंखों में देखा । वो मुस्कुरा रही थी । मैंने अपनी आंखों से ही उसे शुक्रिया कहा और अपना पेन निकालकर उसे जवाब दिया और तुम बहुत सुंदर रखते करती हूँ वो फिर मुस्कराई । फिर कागज पर कुछ लिखकर नोटबुक मेरी तरफ किसका, क्या तो मेरे लिए ब्रेक में गाना गा सकती हूँ । अपने होठों को दबाता हुआ मैं मुस्कुराया और मैंने फिर वापस लिखा था । इसके लिए मुझे कितने रुपये मिलेंगे । उसने पढा और मुफ्त बुला लिया । ज्यादा भाव मत खा । इससे पहले मैं कुछ पडता था । उसने फिर से लोड को खुशी और उस पर कुछ लिखा और मेरी तरफ बढा दिया तो हॉस्टल में रहते हो मैं अपना टिफिन तो मैं हर रोज दे सकती हूँ । मेरी मम्मी बहुत ही लजीज खाना बनाती है । मैं मुस्कुराया और फिर जवाब दिया एक अच्छा उभर है तब तो मैं तीनों टाइम आ सकता हूँ । तेईस लाॅट दोनों लाना तो मुस्कुराई । उसने मेरे कंधे में अपना काम हमारा । जब हम लोग प्रीती मैडम से छुपकर बात कर रहे थे । हम ये भूल ही गए की क्लास में तीस आठ लोग हमें देख रहे थे । वाले तौर वैदेही की करीबी दोस्त शाहरुख भी उनमें से एक थे । एक पर जब कृति बैठम के क्लास खत्म हुई और हम लोग अपनी क्लास से बाहर आ गए तो मैंने उसकी तरफ देखा । मुस्कुराया और कहा तो हमारा नाम बहुत अच्छा है । वैसे ही चारों का हाथ पकड अपनी पुस्तकें उठाते हुए उसने मेरे तरफ लोग बनाकर का मुझे ये उम्मीद मत रखना । मैं भी कहूँ तो भारत नाम बाहर अच्छा है । उसके तेवर देखकर मैं मुस्काया और विनीत की ओर देखने लग गया जो शरारती मुस्कान दे मुझे घूरे जा रहा था । उसने पीठ पर एक हल्का हो का मारते हुए कहा, पहले दिन में सेटिंग ऍसे अपने बहन उठाए और हम बाहर जा ही रहे थे कि एक मजेदार आदमी क्लास में हो सकता है जो अपने बायें हाथ में हेलमेट लिया था । पीछे बैठ और पसीने से पूरी तरह तरबतर भरा पडा था । उसने अपना चश्मा हटाकर उसे पूछते हुए मुझसे का हो क्लास खत्म हो गई । क्या भाई तुम मिस क्लास के लिए काफी लेट हो गए हो या अगले क्लास के लिए बहुत पहले आ गया हूँ । ऍफआईआर मैं फंस गया था । मेरे मामा मुझे ले गए थे और उनके कारण ये हो गया । उसने बडे तेवर के साथ बताया, मेरा नाम अनुराग ठाकुर है । मैंने उसे आश्वस्त किया और कहा आराम से रहो भाई । आज क्लास में परिचय के अलावा कुछ नहीं हुआ । मेरा नाम रोहन है और ये मोटू ऍम । ये विनित है । उसने मुझे पूछने के लिए अपना मोबाइल निकाला । हमने हाथ मिलाया और अगली क्लास शुरू होने से पहले हम सब कैंटीन में कुछ खाने के लिए गए । आगे जाते हुए मैंने अनुराग से पूछा अच्छा क्या तुम जबलपुर से हो या यहाँ जैसे रिश्ते तैयार के घर पर ठहरे हो । उसने कहा, ना रहे और मैं जबलपुर से हूँ और मॉडल्स स्कूल से हूँ । हम सब का एक्टिंग पहुंचे । विनीत चुपचाप बैठा रहा हूँ । मैंने हम तीनों के लिए समूह से ऑर्डर किए और फिर मैंने विदेश से पूछा क्या हुआ वो इतना चुप क्यों करके याद आ रही है? क्या ऐसा लगा कि जैसे भी नहीं बैठा सब कुछ देखता था । मैं ये सुनकर हैरान था और मैंने ये सुनकर तभी समोसा अपने मुंह से निकाल लिया । हम लोग जैसे ही कैंटीन पहुंचे मैंने उसे वहाँ बैठे देखा । उसने अपनी आंखों से मुझे इशारा किया कि मैं अगली क्लास में भी उसके पास आकर बैठ हूँ और मैंने भी अपनी आंखों से इसके लिए हामी भरती । उसमें मुस्कुराते हुए गा । ऐसा कुछ नहीं है । आप और मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया । बस इतना ही मोटू नहीं । अब बडी अकड के साथ अपना चेहरा पीछे की ओर क्या? और मैं देख रहा था कि वो अपनी सहेलियों के साथ हंसी ठठाकर कट रही थी । अच्छा अगली क्लास में तुम मेरे साथ ऍम फिर सब अपने आप साबित हो जाएगा । ठाकुर में भी इस बात पर हामी भरी । हालांकि मैं उसी के साथ बैठना चाहता था । पर मैं इन दोनों दैत्यों को भी गलत साबित करना चाहता था । इसलिए मैंने उन्हीं के साथ बैठने का इरादा क्या? ब्रेक टाइम खत्म हो गया था और हम पहले फ्लोर में अपने क्लास में वापस चले गए । हमारे क्लास में इंजीनियरिंग ड्राइंग के सराय और हम उनके पीछे पीछे क्लास में गए । वैदेही मेरे सामने से अपने दोस्त चारों के साथ जा रही थी । दलित यह देखने का इंतजार कर रहा था कि मैं अब क्या करूंगा? वैदेही पहले पंक्ति की सीट में बैठ गई और पीछे मुडकर मुझे देखने लगी । चार हूँ जो उसके साथ थी, उसके बगल में बैठ गई तो उसने तो क्या और उसे दूसरी तरफ बैठने को कहा । वैदेही पेरेंट्स के अंदर चली गई । उसके मुझे बैठने के लिए बगल की सीट दिखाई हूँ । पर मैं मोटू और ठाकुर को इस बारे में होस्टल में बात बनाने देना नहीं चाहता था । इसलिए मैंने उनसे एक नोट कर दिया और मोटो के साथ उसी पंथी के क्लास के दूसरे कोने में जाकर बैठ गया । उसने मुस्कुराना बंद कर दिया । उसने अपनी कोनसी खींची और आराम से आगे मुंबई के बैठ गई । उससे बेनाम उसको राय पीछे मोडकर मुझे एक बार देखा । गुस्से में अपनी पेन से ढक्कन हटाया और अपनी नोटबुक में कुछ लिखा । ठाकुर जो मेरे बगल में बैठा हुआ था, आपने मोटो को काटा तेरे कारण वो उनसे गुस्सा हो गई । वो लोग जिस तरह से मुझे रहते हैं ये सुनकर मुझे मजा आ रहा था । मैंने फिर उसकी तरफ ये जानने के लिए देखा की क्या क्या पता वो मुझे देख रही हूँ पर वो तो सामने देख रही थी । मैं भी टीचर के इलेक्शन की तरफ ध्यान देने लगेगा जो पढा रहे थे । पर मेरा ध्यान अपने बीते कल पर चला गया । मेरे साथ ठीक ऐसा ही पहले नब्बे के टाइम पर हुआ था । वो समय था जब हमारे स्कूल में वार्षिक उत्सव था । मैंने दो ग्रुप डांस के भाग लिया था जिसमें नव्या ने भी भाग लिया था । मैंने सिर्फ उसके कारण ही भाग लिया था जबकि मेरे सभी दोस्त बारहवीं की परीक्षाओं में व्यस्त थे । हमारे अभिभावक के बम बाहर के लोगों को शो देखने के लिए आमंत्रित किया गया था । शो शाम को पांच बजे शुरू हुआ था और रात में नौ बजे समाप्त हुआ । हम सब विद्यार्थी इस कारण बहुत उत्साहित थे क्योंकि वह दिन था । वो भी एक वही दिन था जब हम स्कूल में कितनी देर तक रुकने का मौका मिला । हमलोग स्टेज के पीछे अपनी परफॉर्मेंस देने का इंतजार कर रहे थे । वह दिसंबर की ठंडी शाम थी । नब्बे परफॉर्मेंस के लिए काली साडी पहनी थी और वह बेहद सुंदर लग रही थी । उसे काली साडी और सुनहरे फूलों के साथ देख कर बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि मैंने उसे सिर्फ स्कूल यूनिफॉर्म में ही देखा था । वो मेकप के साथ तो बहुत ही सुन्दर लग रही थी और उसने बाल भी अलग धर्म से बनाए थे । हम लोग स्टेज की एंट्रेंस के पीछे ही खडे थे । वह बगल में अपने कुछ दोस्तों के साथ खडी थी । सोनल भी उनमें से थी । मैंने उसे दिखाया । चंद कितना सुन्दर लग रहा है । उसने ऊपर देखा और वह मुस्कुराई । उसने बहुत ही धीमे से पूछा तो मैं पसंद आया । हालांकि वो चंद को देख रही थी और मैं उसे पर मैंने कहा हूँ ये सुंदर है । उसे पता था कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ । पर तो अनजान बने रहना चाहते थे । हाँ, सोनल मेरी बातों को सुनकर फस रही थी । नव्या ने परेशान होकर कहा, मैं खडी खडी थक गयी हूँ । अब कितनी देर और इंतजार करना होगा । मैं उसे थका हुआ नहीं देख सकता था । इसलिए मैंने एक उपाय सोचा । मैंने इधर उधर देखा और मुझे सीढियाँ दिखाई थी । मैं वहाँ गया । मैंने अपना मोबाइल निकाला और उन सीढियों को साफ कर दिया । वो बेताबी से मेरी और देखे जा रही थी और सोनल मुस्कुरा रही थी । मैं पहले वहां बैठ गया न । क्या नहीं अपना मुंह सोनल की तरफ घुमाया और उससे बातें करने लग गई । मैंने उससे वहाँ आने को कहा और अगर उसे कोई दिक्कत नहीं है तो उसे मेरे बगल में बैठ जाने को भी कहा । उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई । तब सोनल मेरी तरफ मुस्कुराते हुए आई और उसने कहा शुक्रिया रोहन मैं खडे खडे थम गयी थी । मैं रुपया को देखकर गुस्सा हुआ और वह लम्बे का सहारा लेकर मुस्कुराने लगी । मुझे अभी भी अच्छे से याद है । उस दिन वो बहुत सुन्दर लग रही थी । मैं पीछे खडा हुआ और उसके नजदीक जाकर मैंने कहा अगर तुम खडी हो तो मैं कैसे बैठ सकता हूँ वो पीछे मोरी और इस तेज की तरफ आगे बढते हुए पीछे मुडकर रुककर होनी हमारी परफॉर्मेंस शुरू होने वाली है । क्या तुम पर हो गई या ऐसे ही खडे रहोगे । मैं मुस्कुराया और स्टेज की तरफ भागा । हमने उसके बहुत ही अच्छी प्रस्तुति दी । ठाकुर ने मेरे हाथ पर मारा का रोहन बेटा अरे सोना पंद्रह लाख लगभग खत्म हो गई है । मैं क्लास में सोकर नव्या के सपने देख रहा हूँ । मैं रात के रैगिंग स्टेशन के बाद पूरी तरह से हो चुका था । जैसे ही क्लास खत्म हुई, हम लोग अपनी सीट पर से थके हारे किसी तरह से उठ गए । मैंने देखा कि वैदेही मुझे बिना देखे ही क्लास से निकल रही थी । मैंने अपना बैग ठाकुर के हाथों में दे दिया और उसके पीछे भागा । वो चारों के साथ जल्दी जल्दी जा रही थी और हाथ में पुस्तक पकडे हुई थी । मैंने उसे रोकने के लिए उसका नाम पुकारा । वैदेही अरे रुको, चारो पीछे देखने के लिए रुकी पर वैदेही चलती रही । मैं उन दोनों की तरफ धागा अरे वैदेही, प्लीज सुनो । वो रुकी, मेरी तरफ मुडी और कहा हाँ रोहण मैंने अपनी सांस थामी और का सॉरी । मैं विनीत के साथ बैठ गया था । वो मुझे अच्छी तरह से देखती रही । फिर का तो मैंने हकलाते हुए कहा हो । तुम चाहती थी कि पर भी लेते हैं । मुझे वहाँ जबरदस्ती बैठा लिया । उस ने सफाई देते हुए मुझे कहा तो मुझे गलत समझ रहे हो । ऐसा कहकर वह चारों के साथ चली गई । मुझे पक्का पता था कि वह मुझे अपने पास बिठाना चाहती थी । पर अभी मुझे उसके अलग ही तेवर तीखे ठाकुर मेरे पीछे बैठ लेते हुए आया और कहा अरे ये क्राइसचर्च से बढ रही है । जबलपुर के स्कूलों में ये अपने तेवरों के लिए मशहूर है । मैंने ठाकुर को देखा और उसका काला पकडते हुए कहा तो मैं किसने बताया तो मेरे मामा ने हम दोनों मुस्कुराए । वहाँ से और गेट की तरफ भागे । वो एक हरी गर्मी की दोपहर थी तो हमने कॉलेज के गेट के बाहर आइसक्रीम खाई । मैंने फिर देखा कि कॉलेज के दूसरे तरफ से बैठे ही अपने हाथों में पुस्तक लिया और पीठ पर बैठ लाते आ रही हैं । मैंने ठाकुर से पूछा कहाँ जा रही है वो । उसने जवाब दिया । वह बगल में गोरखपुर कॉलेज में रहती है । गुरूद्वारे के पीछे हो सकता है वहीं जा रही हूँ । कॉलेज में पहला दिन बिताने के बाद ठाकुर ने जो जबलपुर का रहने वाला था, हमें उसके साथ ग्वारीघाट के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर देखने को चलने के लिए कहा । ग्वारीघाट नर्मदा नदी के तट पर बसा है और ये बहुत सारे मंदिरों और तीर्थयात्रा अस्थानों के लिए प्रसिद्ध है । विनीत और मैं ठाकुर के स्कूटी के पीछे बैठे । वैसे तो दो भारी भरकम लोगों के बीच में एडजस्ट होना थोडा मुश्किल है पर मैं खुद को दो डबल रोटियों के बीच पनीर जैसा भाव कर रहा था । पर हम लोगों की यात्रा मस्त रही और हमने जबलपुर में विदाई और शाम की बडी तारीफ की । हम हनुमान मंदिर गए और वहां पूजा की । नदी की लहरों से मिली ठंडी हवाओं के थपेडे हमें घेरे हुए थे । पानी से कल कल की आवाज आ रही थी । घाट में चल रही आर्थिक बेहद सुंदर थी । हम लोगों ने कुछ मूंगफलियां खरीदी और घाट की सीढियों पर बैठ गए । फिर विल इतने अपनी सिगरेट निकली और चलाई । मैंने बहुत धीमे से कहा आज का दिन बहुत अच्छा रहा है ना बाल इतने धुएं में कुछ छल्ले उडाए और फिर वो सिगरेट ठाकुर ने ले लेंगे । दिन सुन्दर था या बैठे ही विनीत नहीं हूँ । मैं कहते नदी को देखता रहा और कहा मैं पहले से ही किसी के साथ हूँ । मेरी पहले से ही एक कल फ्रेंड हैं । विल इतने धोखे जा और ऐसा लगाते उसे झटका लगा हूँ और उसने खास तो क्या वह वा भाई तो भारी पहले से ही एक गर्लफ्रेंड है और तुम यहाँ पर भी एक को चाहते हो । मैंने कहा नहीं आप मैं तो उसके साथ एक दोस्त की तरह पेश आना चाहता था । ठाकुर जो हम लोगों को चुपचाप सुन रहा था । मैंने कहा एक समय मैं भी उसे बहुत प्यार करता था और उसका दोस्त होना भी खतरे से खाली नहीं है । विनीत और मैं उसकी तरफ मुझे और उससे कहा तुम तो कॉलेज भी देरी से आए । फिर तो मैं ये सब कैसे पता हो गया? ठाकुर ने मुह बनाते हुए कहा एक लंबी कहानी है रोज पर मैंने जवाब दिया पर हमारे पास तो सुनने के लिए बहुत समय ठाकुर खडा हुआ । विनीत हमारी तरफ चेहरा करके बोला । मैंने उसे दसवीं में प्रोपोज किया । स्कूल के बाद उसके लिए फ्रेंडशिप कार्ड लेकर उसके स्कूल के सामने उसका इंतजार किया कि उसको तब दूंगा जब वो अपने स्कूल बस में चल रही होगी । वो थोडा रोका पर हम आगे सुनना चाहते थे । उसने कुछ और छल्ले उडाए फिर फिर आगे क्या हुआ? उसने बहुत ही दुखी तरीके से मुझे देखा और बोला अरे कुछ नहीं मैं कार्ड फाड दिया और उस की एक स्कूल टीचर ने मेरे स्कूल में शिकायत भेज दी । मैं बहुत जोर से हंसने लगा हो तो उस नहीं तुम रिजेक्ट कर दिया । बेचारा आठ आपको विनीत भी हंस रहा था पर वो ज्यादा परेशान इसलिए था कि वो उसकी सिगरेट वापस ही नहीं कर रहा था । ठाकुर ने कहा, पर तुम तुम खुश हो रहे हो । एक दिन वो तुम्हें भी इस्तेमाल कर फेंक देगी । ठाकुर उसे मजाक में मारते लगा जबकि विनीत घाट की तरफ भागते लगा । हमने उन पलों को खूब किया और ठाकुर ने हमें वापस होस्टल में छोड दिया । फिर इसने ठाकुर से कहा तुम हमारे कमरे तक क्यों नहीं आती? ठाकुर मान गया और हमने उसे अपने सीनियर्स के बारे में समझाया और कहा कि हम जूनियर्स को उनके नियम कानून मानने पडते हैं । ठाकुर ने कहा कोई बात नहीं मेरी जबलपुर में बहुत जान पहचान है और कोई मुझे छू भी नहीं सकता । ठाकुर बहुत आत्मविश्वास के साथ ये बात कही और अपना स्कूटर स्टैंड में लगाकर सीढियाँ चढने लगा ।

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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