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प्यार तो होना ही था - Part 4

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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हम लोग जबलपुर दोपहर में करीब एक बजे पहुंच गए । हमने दमोहनाका के पास एक स्थानीय होटल में दोपहर का खाना खाया । फिर एक रिक्शा लेकर जबलपुर ऍम पहुंचेगी जहां मेरा कॉलेज था । मैं कॉलेज के गेट के पास पहुंचा । जोन इलेवन सफेद धारियों में पेंट किया हुआ था और उसके ऊपर लिखा हुआ था आर के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जबलपुर कॉलेज के गेट के दोनों ओर यूकलिप्टस के प्लेयर थे । काॅपियां होने के कारण वो जगह सुंदर एवं साफ थी । मेरी निगाहें बगल में एक पान के खोखे पर रुक गई जहां कुछ लडके अपने हाथों में सिगरेट लिए हमें देख रहे थे । ये जरूर एक टाइम पास करने की जगह होगी । बहुत तेज गर्मी हो रही थी और और मैंने जेब से नैप्किन निकाल कर अपना चेहरा साफ किया । मैंने काले और भूरे रंग की चेक शर्ट और काली पैंट पहनी थी और अपनी पीठ पर एक छोटा स्कूलबैग डाले रखा था । पापा ने जो बोतल ली थी उस से मैं एक हो पानी पिया और हम कैंपस के अंदर घुस गए । ऍप्स लम्बे पेडों से पटा पडा था जिसकी छाव में विद्यार्थी बैठकर गप्पे मार रहे थे । मुझे पक्का भरोसा था कि वह हमारे से बडी कक्षा का विद्यार्थी होंगे । मेरे बाय में एक शेर वाला कमरा था । हो सकता है भूल लायक हो क्योंकि वहाँ से मुझे मशीनों की आवाज जा रही थी । सामने हल्के पीले रंग की बिल्डिंग थी । मुझे लगा कि वो बिल्डिंग मुख्य होगी और हम उस तरफ चले गए । हम जैसे ही बिल्डिंग के पास पहुंचे हमने देखा कि वहाँ कुछ कक्षाएं चल रही थी । मेरे दायरे में एक बडा सा ग्राउंड था जहाँ सीनियर्स क्रिकेट खेल रहे थे । हम बिल्डिंग के अंदर घुसे तो देखा कि कुछ लडके लडकियां एक कमरे के पास खडे थे । पापा ने कहा सारे फ्रेशर्स लग रहे हैं क्योंकि उन्होंने फॉर्मल्स पहने हैं और वे अपने अभिभावकों के साथ चुपचाप खडे हैं । चलो चलें हूँ । हम कमरे में पहुंचे और मैं एक दीवार के सामने खडा हो गया । पापा वहाँ पूछताछ करने के लिए चले गए । मेरे बगल में एक लंबा लडका था । उसने मुझे देखा और मुस्कुराकर मुझसे पूछा ऍम, मैं भी मुस्कुराये और उससे हाँ कहते हुए पूछा तो प्रेशर हो । उसमें कमरे की ओर देखा और का तो दोबारा से लिया । आज होस्टल में मीटिंग के लिए तैयार रहना । कुछ ही सेकेंड में मेरी तो हालत खराब हो गई । मेरी आंखों और मुंह खुला का खुला रह गया । मैं नहीं थे, देखने लगा । इससे पहले कि वो मेरे से कुछ और पूछे पापा हॉस्टल वार्डन के कमरे से बाहर निकले । ऍन तुम कैसे हो मेरा रामसागडा है और मैं तुम्हारा वार्डन । मैं तो मैं हॉस्टल में ले चलता हूँ । मेरे हॉस्टल वार्डन राणा एक पूर्व सैनिक थे और उत्साह वाममोर्चा से भरे हुए थे । मेरा हॉस्टल कॉलेज के कैंपस में नहीं था । रशेल चौक के पास था, जो कैंपस से दो किलोमीटर की दूरी पर था । एक प्राइवेट कॉलेज होने के कारण वह अभी निर्माणाधीन था । उन्होंने तीन सितारा होटल को हॉस्टल में तब्दील कर दिया था । बॉर्डर ने अपना स्कूटर निकाला और रक्षा वाले को सलाह देखी । उनके पीछे पीछे रशेल चौके मारुती होटल तक आए । मैं मुस्कुराया और आसपास की जगहों को बडे चाव से देखने लगा । ये बहुत जगह है जहाँ मैं अपने जीवन के चार साल बिताऊंगा । ऐसे ही हम लोग होटल के पास पहुंचे । हमने देखा कि एक बॉर्डर वहाँ खडे हैं । पापा ने रिक्शेवाले को पैसे दिए और मैंने अपना सूटकेस एवं अन्य सामान बाहर निकाला । वार्डन ने छोटू नाम के चपरासी को बुलाकर उसे मेरा सामान उठाकर रूम नंबर एक सौ सात में रखने को कहा फिर उन्होंने हमें हॉस्टल घुमाया । वो हमें पहले प्रथम तल पतले गए । उन्होंने कहा, यहाँ पर ऍम ऍम टेबल है । मेरे यहाँ के पुल खेलते हुए एक लंबे से गठीले शरीर वाले एक लडके पर पडेगी । जो हाथ में सिगरेट हुए था उसने भी मुझे देखा पर ऐसे जैसे जीता एक खोले से मेरे को देखता है । फिर वो हमें प्रथम तल पर लकडी की बनी हुई सीढियों से हो कर ले गए । अचानक को छोटों पर चिल्लाए अभी तक यहाँ पर लाइट क्यों नहीं बदली गई है? क्या कितना दे रहा है इसे अभी बदलो । मेरे पापा ये देख कर बहुत खुश हुए हैं कि यहाँ के बॉर्डर बहुत ही अधिक ध्यान रखने वाले हैं । उन्होंने मुझसे कहा ये अच्छा है तो नीचे एसटीडी बूथ से हमें कॉल कर सकते हो । राणा सर हमें प्रथम तल ले गए और घुमाते हुए कहने लगे पहला फ्लोर नए विद्यार्थियों के लिए है और मेरा कमरा भी इसी फ्लोर में हैं । मैं यह सुनिश्चित करता हूँ कि नए लडके राइडिंग से दूर रहें । दूसरा और तीसरा फ्लोर सीनियर्स के लिए है और आरो वाटर प्यूरिफायर दूसरे दल में है जहां से विद्यार्थी पीने का साफ पानी भर सकते हैं । फिर उन्होंने कमरा नंबर एक सौ साठ का दरवाजा खोला । उन्होंने कहा, ये रहा तुम्हारा कमरा । आकाश नाम का एक और लडका तुम्हारे साथ इसी कमरे में रहेगा । वो भी कॉलेज में आ गया है और आपने कुछ काम खत्म कर रहा है । मुझे लगता है कि शाम तक वो तुम्हारे साथ कमरे में आ जाएगा क्योंकि उसका सामान उसका रिश्तेदारों के यहां पडा हुआ है । ये बहुत ही अच्छा कमरा है । उस कमरे के बीच में एक डबल बेड थी । एक फॅमिली था और दो किनारों में दो स्टडी टेबल रखे हुए थे । मेरे पापा चारों ओर देखकर थोडे असहज हुए और मैंने भी सर झुका लिया । बॉर्डर ने मेरे हाथ में कमरे की चाबियां पकडाई और मुझे सहज रहने को कहा और कहा कि जरूरत पडने पर उन्हें बुला लेना तो कुछ नहीं रहे थे । तब तक कोई कॉरिडोर में जोर जोर से गाने लगा । वार्डन ने दरवाजा खुला और उसका नाम लेकर चल है । उन्होंने कहा, ये तुम्हारे सीनियर्स हैं । इनका नाम दमन श्रीवास्तव है । मैंने उन्हें हेलो का कर हाथ मिलाया । डबल ने मेरे पिताजी के पैर छूकर का अंकल । आप परेशान ना हो ये रोहन वर्मा है और मैं श्रीवास्तव हम दोनों कायस्थ है । मैं इसका ध्यान रखूंगा । ये मेरे छोटे भाई जैसा है । पापा ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे शुक्रिया कहा । डबल के घुंगराले वह मुझे पाल थे । वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया और मैं भी । मैं उसे इतना मददगार जानकर खुश हुआ । फिर वो चला गया । वार्डन भी चले गए और हम कमरा संभालने में लग गए । जब सब कमरे से चले गए तो पापा ने मुझे बैठने को कहा । उन्होंने कोर्से खींची और मेरे सामने बैठ गए । उन्होंने कहा, मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा तो मैं एक बडे लडके हो गए हो और हमें तुम से बहुत सारी उम्मीदें हैं । यहाँ से तुम आपने भले पूरे सब के खुद जिम्मेदार हो गए । खुद को सुरक्षित रखना और किसी भी प्रकार के असामाजिक गतिविधियों में शामिल मत होना । बेटा खूब पढाई करना और अपना भविष्य संवारना । फिर उन्होंने मेरा सामान रखने में मेरी मदद की । शाम गई पांच बच गए थे और हमारा सारा काम लगभग पूरा हो गया था । पापा के बस छह बजे की थी और उन्हें निकला था । मैं पापा के साथ नीचे तक उन्हें छोडने गया । वो थोडे उदास थे और मैं भी मैंने उनके पहले हुए और उन्होंने मुझे गले लगा लिया । मैं उनकी आंखों के आंसू देख सकता था । साथ में मैं भी हो रहा था और मेरा मन भी भरी हुआ जा रहा था । मैंने उन्हें फिर से गले लगा लिया और फिर ऑटो में बैठकर चले गए । मैं उन्हें तब तक देखता रहा जब तक ऑटो मेरी नजरों से ओझल ना हो गया हूँ । मैं अपने कमरे में आ गया । उस समय तक सारे सीनियर्स कॉलेज में वापस आ गए थे और बहुत सारी आवाजे आने लग गई थी । मैंने अपनी चाबी निकाल दरवाजा खोला और इससे पहले की मैं कमरे में घुसता । एक मोटा सुनने का मुझे धक्का देकर अंदर घुस गया । उसने पूछा हूँ वो भाई फ्रेसर मुझे राइडिंग गए । कुछ मौलिक नियम तो बता ही थे इसलिए मैंने उनकी आंखों में नहीं देखा । मैंने नीचे देखकर का हाँ सर भाई, मेरा नाम विनित है और मैं देवास से हूँ और मैं भी एक प्रेशर हूँ इसलिए आराम करो । मैंने चैन की सांस ली । वह दो बच्चों का बाप लग रहा था । हम एक दूसरे के गले मिले । एक तुझे को नाम बताया और उस ने मेरा बिस्तर ले लिया । उसने चारों ओर देखकर का तो हमारा कमरा तो बडा अच्छा है । मैं तो कहीं नहीं जाऊंगा । पापा ने मुझसे कहा था इन जैसे लोगों से दूर ही रहना । जल्द ही और लडके मेरे कमरे में आ गए और मेरे कमरे को एक नया नाम मिल गया । ब्यूरो मैं उसके मजाक एवं टांग खिंचाई सुनकर खुश था । कुछ भी मिंटो में ऐसा लगा जैसे हम लोग एक दूसरे को कई सालों से जानते हूँ । जल्दी वार्डन हमारे फ्लोर में आ गए और हमें छत पर ले गए । जहां हमारे कैंटीन थी । उन्होंने हमें कहा कि हम अपना भोजन थोडा जल्दी कर लें क्योंकि रात में सीनियर्स के साथ हमारी औपचारिक मुलाकात होगी । ये सही ही लगा क्योंकि अगर वार्डल सीनियर्स के साथ हमारे मुलाकात कराते हुए तो राइडिंग का कोई मतलब नहीं रहेगा । उस दिन खाना बहुत अच्छा बना था और हम सारे चुनिया हो से बातें की और साथ में हमने खाना भी दिखाया । रात के नौ बच गए थे और मेरा रूम में आकाश अभी तक अपने रिश्तेदार के घर से नहीं आया था । कभी हमारे फ्लोर में वार्डन की आवाज को नहीं लग गई सारे जूनियर्स कृप्या बाहर आ जाए । उन्होंने चिल्लाकर हमें आवाज थी और हमारा दरवाजा खटखटाया । हम जल्दी से अपने कमरे से बाहर आकर कॉरिडोर में जमा हुए । उस लोड में करीब हम बीस जूनियर लोग थे । उस समय कॉरिडोर की लाइट चला दी गई पर फिर भी कुछ कोनों में अंधेरा था क्योंकि कुछ बल्ब फ्यूज थे । उन्होंने कहा, अब समय है कि आप सीनियर से अपना परिचय कर रहे हैं । इन्हें अगले चार सालों के लिए अपना अभिभावक समझे । आपने कल इनसे ही सीखना है और फिर आने वाले समय में तुमने भी सीनियर बन जाना है तो मैं इनकी ऐसी इज्जत करनी है जैसे अपने माँ बाप की करते हो । ये तो मैं उनसे मिलने में मदद देगा । उन्होंने हमें इस बारे में ब्रीफ किया और चौथे फ्लोर गई रिक्रियेशन हॉल में जाना होगा । हम लोग एक लाइन लगाकर राइडिंग के लिए चले गए । विनीत मुस्कुराकर कहा इस दिन का मैं सालों से इंतजार कर रहा हूँ । मैंने डरते हुए उससे कहा, क्या तुम पागल हो? वे हमारी रैगिंग करेंगे? उसने कहा दो यहाँ ऍम कॉलेज में राय देंगे । कम बात है और सब की रायटिंग होती है । अगर तुम ऐसे मजे में लेते हो तो ये तुम्हारे लिए आसान हो जाएगा । इसलिए आराम से रहा हूँ और वह जो कहते करो हम जैसी रिक्रिएशन खून में पहुंचे । वहाँ पहले से ही चालीस सीनियर खडे थे । हम सब एक दीवार के सहारे लाइन लगाकर खडे हो गए । अंदर घुसते ही मैंने उसी लम्बे से सीनियर को देखा जिसे मैं सुबह कॉलेज में मिला था । जाने से पहले बॉर्डर ने सीनियर्स को कहा लडकों अब तुम सब जिम्मेदार लोग हो जो मर्जी हो करो पर ये सुनिश्चित करना किसी को कोई चोट ना लगे । वो ऐसा कहकर कमरा छोड कर चले गए । हमें उन सीनियर्स के हवाले कर के वो जैसे ही गए, सीनियर्स हमारी तरफ आने लगे । दमन सर जिन्हें मैं दोपहर में मिला था मेरी तरफ आने लग गई । मैं थोडा आराम से था तो की उन्होंने पापा को कहा था वो मेरा ध्यान रखेंगे । वो मेरे पास आए और मुझे जोर से थप्पड । वो थप्पड इतनी जोर का था कि कुछ सेकंड के लिए मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया और फिर उन्होंने कहा ये थप्पर दिन में मेरे साथ हाथ मिलाने के लिए था क्या? तो मैं पता नहीं की मैं तुम्हारा सीरियस हूँ और तुम मेरे से भी नहीं मिला सकते । मैंने उन्हें सौरे का पर उन्होंने एक और थप्पड रसीद किया और कहाँ जूनियर्स को कभी बोलना चाहिए जब उनसे बोलने के लिए कहा जाए । पहले गाल पर लगा था पर ज्यादा तेज था । मेरे पापा ने यहाँ तक इतनी जोर से थप्पड नहीं मारा होगा । वो जब तक मेरी तरफ देखते रहे अन्य सीनियर ने आगे मुझसे पूछा अपना नाम बताओ मैं थोडा घबरा रहा था पर मैंने बताया और रोहन सर उन्होंने मुझे फिर से कम आज हमारा क्या? तुम्हारा कोई सपना नहीं है । मेरी आंखों में सुबह रहे पर मैंने उनकी बदतमीजियां खेली और मैंने जवाब दिया मोहन विजय वर्मा । इतना सब सुनकर उन्होंने फिर एक चांटा जडा सर कौन करेगा? पहले जवाब दिया रोहन विजय वर्मा सर फिर एक चांटा पडा और उन्होंने कहा मैंने तो मैं दोहराने को कहा था पर अंत वाला झापड कितने जोर का नहीं था । क्या हो सकता है? मेरे गालों ने महसूस करना बंद कर दिया तो ये थप्पड अगले एक घंटे तक पूंछते रहे । जब तक सारे सीनियर्स ने एक कपडों के बहाने अपना परिचय कराया मुझे तब तक करीब एक सौ बीस थप्पड पढ चुके थे । मेरे काल अब तक सुनना पड चुके थे । रात के साढे दस बज गए थे । तब एक सीनियर ने चिल्लाकर का सब लोग सुनो सारे परिचय हो चुके हैं । हम रिक्रिएशन रूम में वापस आए और एक लाइन में लग गए पर अभी भी दंगे हमारे कीर्ति हमारा अगर अभी एक अनचाहे लडते आम की तरह था । आकाश मेरे बगल में खडा हुआ था । मुझे भी एक मौका मिला । मैंने उसके सीने में उंगली करते हुए कहा और कैसा लग रहा है तो मैं उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया सुबह के लिए माफ करना या मैंने मुस्कुराकर उसे माफ कर दिया । ये सारा किस्सा सुबह के तीन बजे तक चला । हमने कविताएं से थीं, सीनियर्स का विमानन करने के कुछ और तरीके से है और साथ ही खाली खौफ काम भी । पर उन सब में एक चीज जो सबसे अच्छी लगी कि होस्टल के आई कार्ड अपने साथ में रखना था । हमारी ब्रांचों के अनुसार हमें अलग अलग रंग के आई कार्ड मिले थे जिससे हमें अपनी पॉकेट में हमेशा अपने साथ रखना था । अगर मांगने पर हम दिखाना भूल जाएँ तो हमें अपने सीनियर्स के कपडों को पूरे एक सप्ताह होना होगा । मजाकिया क्रम के बाद हम उन तथा आजाद हुए । मुझे असल में पता चल ही गया कि फाॅगिंग क्या होती है । मैंने खुद ने से झेला था और कहूँ तो निरादर झेल ले के बाद ही मैंने इसे मजे में लिया । जब मैं ब्लू रूम में वापस आया तो मैंने देखा आकाश शीशे के सामने खडा था । मैंने उस से पूछा अरे आकाश क्या हुआ? उसने जवाब दिया हूँ, कम से कम दो सौ थप्पड । मैं बिस्तर में बैठ गया और उसने कहा कोई बात नहीं ये तो बस शुरुआत है । अभी तो छह महीनों तक यही सब करना है । उसने जवाब दिया, ये तुम क्या कह रहे हो? मेरा अभिमान ये झटके खाने के लिए नहीं है । फिर हम दोनों जोर से हंसने लगे । वीडियोकाॅॅॅन विनीत ने दरवाजे पर जोर से मारा और अंदर आ गया । बिना कुछ कहे वह बिस्तर पर चढा और हम दोनों के बीच लेट किया । क्या हुआ भी नहीं । ये तुम्हारा कमरा नहीं है । मैंने उसे याद दिलाया । इतने टॉर्चर के बाद मैं यहाँ होना चाहता हूँ । तुम दोनों भी हो जाओ और मुझे भी सोने दो । उसने उनते हुए कहा, कल सुबह साढे आठ बजे के क्लास है । मैं मुस्कुराया और उसे गले लगाया और सोने चला गया । ऐसा था होस्टल का । मेरा पहला दिन जो बहुत अच्छा रहा । हमने मजे किये और जिंदगी भर के लिए दो दोस्त बना लेंगे और आकाश मैं बिस्तर पर जाकर सोचने लगा माँ पापा आशा आपका बेटा बडा हो गया है । चोट लगने के बाद मैं आपके पास होते हुए नहीं आया । आज मैंने तो नहीं तो उस पर है । मैंने सहना सीखा । आज मैंने ये जाना कि दबाव किसे कहते हैं । मैं हत्या के बारे में भी सोच रहा था कि तुम ने मुझे मजबूत बना दिया तो भरे प्यार ने मुझे आज की एक करा ही दिया । मैंने जितने भी तब पड रहे वो मेरे अंदर पनप रहे तुम्हारे प्यार के कारण ही सही । आज समय तुम है और प्यार करने लगा गुड नाइट ।

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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