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प्यार तो होना ही था - Part 21

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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अंकल क्या मैं आपसे प्रार्थना कर सकता हूँ? उन्होंने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा और अपनी बात कहने को कहा । उसने मुझे जो चिट्ठी लिखी थी तो मैंने उन्हें पकडाई । उन्होंने अश्रुपूरित नेत्रों से वो चिट्ठी खोली और पढी । मैं उनसे गिर दिलाते हुए कहने लगा आशा है कि आप समझ गए होंगे की वो मुझे कितना पसंद करते थे । मैं आपसे कुछ प्रार्थना करना चाहता हूँ और आप एस नाम मत कही । उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा प्लीज मुझे बताओ कि मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ । इससे पहले की इसका शरीर यहाँ से विद्यालय क्या वैसे शांति कर सकता हूँ । उनके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा और उन्होंने कम हुई आवाज में रोते हुए मुझसे कहा सोहन बेटा क्या कह रहे हो? अब फोम भर चुकी है और मरे हुए लोग शादी नहीं करते हैं । फॅस समझाते थे हम सब इंसान है और हमें पता है कि शरीर पर चाहता है पर हमारी आत्मा सिंधा रहती है हूँ और स्कूल अब भी हमें कहीं से देख रही है । हाँ पता नही मैं चाहता हूँ कि वो जहाँ भी हूँ तो हाँ वो कर रहे हैं । मैंने रोते हुए उनसे प्रार्थना की तो मुझे देखते रहे और फिर अंदर जाकर उसकी माँ से बात करने चले गए । मैं बाहर खडा उनके निर्णय का इंतजार करता रहा तो कुछ देर में बाहर आया है और मैं उन्हें देखता रहा । उनकी आंखों ने मुझे जवाब दे दिया था । उन्होंने मेरे कंधे पर अपना हाथ रख और मुझे गले लगा लेगा । वहीं रहते ही की माँ दरवाजे पर खडे होकर होती हुई मुझे देखने रखी है । अगली सुबह सभी लोग क्रिया कर्व के लिए एकत्रित हुए । पापा भी तब तक आ गए थे और उन्हें मेरे निर्णय के बारे में पता चला । मुझे पक्का पता था कि वह मेरे निर्णय को नहीं स्वीकारेंगे । वो मेरे पास आया और मुझे किनारे ले जाकर मेरी आंखों में आंखें डालकर पूछते रहेंगे रोहन क्या तुम अपने निर्णय पर अडिग हूँ? मैंने उनसे पूछा पापा आप मुझे एक अधूरे पुरुष के रूप में देखना चाहते हो । वो कुछ देर तक मुझे देखते रहे और फिर उन्होंने मुझे गले लगा लिया । मुझे तुम पर गर्व है, बैठे हैं । आज मुझे तो भारत पिता होने पर गर्व महसूस हो रहा है । उनके शब्दों नहीं मुझे कि सब करने की शक्ति दी । मैं अंदर गया और मैंने बैठते ही के शरीर को लाल लहंगे में और सिर लाल चुनरी से ढके सच्चा हुआ देगा । उसका चेहरा सफेद और पीला पड गया था । बट मेरे दुश्मन आज भी सबसे सुंदर लग रही थी तो भारी माँ हो रही है । मुझे पता है कितने सारे संदर्भ में अब कुछ नहीं हो सकता है । ऍम मैं अपने जीवन की रूपरेखा तैयार कर रहा था । हो सकता था मैं वही सर्वश्रेष्ठ ढंग से कर रहा था । बच्चा उसकी तेल के समीप बैठा था तो उसकी माँ एक प्लेट में सिंधु लेकर मेरे पकल पे आएगी । उन्होंने मुझे मेरे निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा । पद में रहे हैं, अटल था और मुझे पता था कि मैं क्या करता हूँ । मेरे पापा पीछे से आए, मेरे कंधे पर अपना हाथ रख और मुझे मेरा कर्तव्य पूरा करने को कहा । वो तो पूरी मैं नहीं उस लाल शुक्ला को अपनी उंगलियों से पकडा और उसकी सूनी मांग सकती । मैं उसे देखता ही रह गया और उसकी माँ इलाक नहीं लगी । पापा ने मेरा कंधा पीछे से पकडा और रहते ही के पिता ने मेरे पापा क्या पूछिए मेरे यहाँ बहुत पत्ती तो वहीं शास्त्री बुखार हो । मैं खुद के बाल पैट सोच सोच से रोड नहीं रखा । मेरे पापा मुझे पकडे रहे हैं उसी समय अनुराग और विनीत भी पहुंच गए । मुझे जिंदगी भर के लिए खामोश करके छडी कहीं रहते हैं । जैसे ही मैं रोने लगा, अभिनेत्री मुझे गले लगा लिया । उसके बाद क्रियाकर्म की विधि भी शुरू हो गई । उस सीट पर लेटाया गया जिसे मैंने आके से पकडना कैसे वो घर से जाने लगे । उसकी माँ और रिश्ते के भाई बहनें दहाडे मार मार कर तोडने लग गए । मैं जब उसे कॉलेज के जमाने में घर छोडने जाता था, टैलेंट तब भी ऐसा कभी नहीं सोचा था कि ऐसा भी एक दिन आएगा । मैंने जैसे उसके शरीर को अपने कंधे पर उठाया । कुछ पैसे क्या बताया कैसे हम दोनों सुर्खी शादी में उस चौधरी को अपने ऊपर लेकर चाह रहे थे और उसमें किस तरह शांति की उन नीतियों के संबंध में मुझे इशारा किए थे तो हमेशा से ही शादी करना चाहती थी । उससे शादी की सारे भी ध्यान बहुत पसंद थी । पर शादी तो नहीं । उसके पति उसके क्रियाकर्म की बेटियाँ संपन्न नहीं । हम जैसी मशान घाट पहुंचे । मेरे पैर भारी हो गए । मेरा तल रुक गया । मन कटर मेरे मस्तिष्क में बैठा जा रहा था । मैं उनसे हमेशा के लिए खोने के लिए वहाँ खडा था । कुछ ही समय बाद मैं उसे सिर्फ एक स्वीट में ही देख पाऊंगा । मैं उसे जोर से गले लगाकर नहीं छोडना चाहता था । है ना पर उसे विदा करने का समय आ गया था हूँ । उसके चेहरे पर मुस्कान थी जैसे कि वह मुझे शादी करके बहुत खुश थी । वो चंदन की सीरीज पर लेट हुई थी । उसके शरीर को ठीक करने के क्रम में मेरे हाथों ने उसके ऍम बोलिए । मैंने अंतिम बार उसका हाथ उठाया और अपने माथे पर लगाया । अच्छा मुझे मांग करता हूँ । मैं उसकी बंदा आंखे देखता रहा ताकि हमेशा के लिए उसे अपनी नसों में कायक कर लूँ और उन्हें अपनी यादों में संजोए । हम मुस्कुराते हुए दूसरे से मिले थे और खामोश हुए एक दूजे से छोटा हो रहे थे । उसके पापा ने कहा तो ये है उसका अंतिम संस्कार करना होगा क्योंकि तुम तो उसके पति हो । मैंने अपनी जिंदगी का सबसे कठिन काम अपने हाथों में लिया । घंटों पहले बनी अपनी दुल्हन को मैंने मुखाग्नि चौथी दी थी । मुझसे ये काम मत करवाइए, महल नहीं कर पाऊंगा । उसकी बाहों में रोते हुए मैं ऐसा कहने लगा वो भी मुझे पकडकर होने लगते हैं । कोई भी आप अपनी तो जिंदगी में ये दिन नहीं देखना चाहता हूँ । मैंने पिछले चलना मैं कोई पाप किये होंगे तभी ये दिन आज मेरे सामने आया है । मैं सुबह उठता रहा और उन्होंने मेरे हाथों में आप लकी लकी पकडा थी और मैं चंदन की लकडी की सेज पदक थे । उसके मृत शरीर के चारों ओर खून नहीं था । मुझे उसके मुस्कान क्या बता रही थी । मुझे उसके तेवर, उसका दृष्टि, उसका छुन्ना याद आने रखा । मुझे बहुत हाथ इयाॅन जब हम तारो भर्ती रात देख रहे थे और उसका हमारा नाश ना और हसना मुझे पर बस याद आकर आंखों के सामने तहत भेजा था । मुझे उसके साथ बिताया हुई सहारे अच्छे नहीं आता रहे थे । किसकी मेरे प्रति जो खामोशी थी वो मैं पूरी तरह भूल चुका था । वो अभी भी खामोश थी । वो मेरी खामोश प्रेमिका थी और यही उसकी कहानी है । मेरे यहाँ बोस प्रेमिका रहते हैं वैसे ही मैं तुम्हें हमेशा प्यार करता रहूंगा । शक्ति हम अंतिम सांस तक आवाज हूँ । हम सबको उपहार स्वरूप इश्वर सिर्फ तक है । शक्तिदल से निकली किसी बात को सही शब्दों के इस्तेमाल से अच्छे से तैयार किया जाए तो ये बहुत कुछ कह चाहती है । हालांकि मैं खामोश थी पर मेरी आंखें मेरा तेल मेरी आत्मा सभी कुछ तुम से बातें कर रहे थे । रोहन मैं तुमसे अपने शरीर के हर हिस्से से बात कर रही थी । आशा करती हूँ मेरे पास तुम्हारे साथ रहते हैं । बातें करने के लिए लाॅक ही हो तो भारी । खामोश प्रेमिका रहते ही तो शाहरुख का ईमेल हेलो रोहन मैंने रहते ही के बारे में कल रात सुना । मैं यू एस में रह रही हूँ और एक कंपनी के लिए काम कर रही है । मैं कल पूरी रात उसके लिए रोती रही और फिर मैंने सोचा इतने ईमेल करो । मैं स्कूल के दिनों से ही उसके दोस्त रही हूँ और उसे तो उसे ज्यादा जानती हूँ । पर जब से तो हम उसकी जिंदगी में आए वो बदल गई । मुझे हमेशा ही लगा कि तुम गलत रास्ते पर चल गए हो क्योंकि वो तुमसे एक दम अलग स्वभाव की थी । पर तुम्हारे लिए उसने जिस तरीके से खुद को बदला वो काबिले तारीफ था । उसने एक बार मुझे बताया था कि वो तुम से कितना प्यार करती है । उसे सुनकर मुझे लगा तो भारत प्यार के सामने बेदी दोस्ती को कम करके आंका जाएगा पर जब उसने तुमसे बात करना बंद करती थी, मैं हमेशा उसके साथ रहती थी । जब होती थी । मुझे पता था कि तुम से बातचीत बंद करने के पास वो हमेशा दुखी रहती थी । उसने कभी नहीं बताया कि उसने ऐसा क्यों किया । मैं हमेशा उससे पूछती रही । मैं इस बात के लिए भी उससे लडकी रही पर उसने भी स्थित पकड रखी थी कि वो किसी को नहीं बताएगी कि क्या हुआ । जस्टिन तुम कॉलेज के बाहर खडे रहे और उससे कहा कि तुम वहाँ से ही लोग नहीं । उस दिन वो बिना भी खाये पीये तब तक खडी रही जब तक तुम वहाँ से चले नहीं गए । मैं तुम दोनों के बीच कि प्यार को समझ नहीं पाई पर एक बात पक्की है जितना प्यार तुमने उसे क्या है उतना उसे कोई और नहीं कर सकता था । और तुम्हें भी उससे ज्यादा प्यार करने वाला अब कोई मिलने का नहीं । अब जब वो हमेशा के लिए चली गई है तो वो हमारी यादों का हिस्सा बन हमारे चारों ओर अपनी मौजूदगी का एहसास करती रहेगी । अफगान उसकी आत्मा को शांति दे और उसके प्यारे पति को ये सब सहने की ताकत थे । मुझे तुम पर बहुत ज्यादा कर रहे रोहन भारी दोस्त शाहरुख

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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