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प्यार तो होना ही था - Part 13

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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नहीं हेलो मेरा नाम नाम क्या है और मैं अब रोहन की यादों का हिस्सा हूँ । मैं उसके बारे में बुरा लिखना चाहती हूँ पर अभी भी मैं उससे प्यार करती हूँ । हो सकता है जिंदगी की आखिरी सांस पर मैं उसे उसकी मासूमियत के कारण प्यार करूँ । मैं सबसे पहले स्कूल में मिली थी । मुझे नहीं पता था कि मैं उससे प्यार करने लग जाएंगी । पहले हमेशा की तरह उसकी आंखों में प्यार ही देखा था तो हर रोज स्कूल आता था । यहाँ तक कि जब उसके साथ पार्टियों ने भी आना छोड दिया था पर वो हर रोज मुझसे मिलने आता था । पर उसने ये भी नोटिस नहीं किया कि मैं भी स्कूल हर रोज सिर्फ उस से मिल नहीं आती थी । मुझे हमेशा से ये पता था कि वो सिर्फ मेरी आवाज सुनने के लिए फोन करता है और फिर फोन नीचे रख देता है । पर उसे तो पता ही नहीं था कि मेरे फोन पर कॉलर आईडी इंस्टॉल की हुई थी और जब भी फोन करता तो फिर मैं उस फोन को क्यों उठाते थे । जबलपुर जाने से पहले अंतिम बार मैंने जब उसे देखा था तब विक्रम के साथ स्कूल के बाहर खडा था । मैं चाहती थी कि वो मेरे पास आये और मुझे प्रपोज करें पर उसने ऐसा कभी नहीं किया । जब उसने मुझे अपनी होस्टल से फोन किया तब मैं बहुत आशावान थी कि अब वो मुझे प्रपोज करेगा और उस दिन भी उसने ऐसा कुछ नहीं किया । हो सकता है कि ये सब किस्मत में लिखा हो जिस कारण मैंने भी उसे प्रपोज करने से रोका । पर किस्मत नहीं । उसे मुझे प्रपोज करने के लिए हमेशा के लिए रोक दिया रखते । हमेशा स्वर्ग में ही बन जाते हैं और ये बात साबित भी हो गई । मैं उसे प्यार करती थी और वो मुझे प्यार करता था । फिर भी हम जिंदगी में कभी साफ नहीं रह । पहले मुझे याद है स्कूल में एक बार उसने अपनी फिजिक्स के पुस्तक मुझे पडने के लिए थी थी और उसमें उसमें कविता भी लिखकर रखते थे । उसने अगले दिन स्कूल में मुझे बताया कि उसने वो कविता गलती से रखती थी पर उसे ये नहीं पता था कि मुझे उसकी कविता कितनी अच्छी लगी थी । वो हमेशा वही देखता था जो वह देखना चाहता था । उसने हमेशा अपने लिए नियम बनाए, उसके बिना जाने हमेशा अपनी ही कहानी लिखी । पर उसमें ये पता नहीं था कि मैं हमेशा से ही उसकी कहानी का हिस्सा थी । मैं उसकी जिंदगी में फिर कभी नहीं आ पाउंगी । पर वो मेरे साथ बिताया हुआ समय और यादें कभी चाहकर भी अपनी यादों से छोटा नहीं कर पाएगा । मैं प्रार्थना करती हूँ के बैठे ही और वो हमेशा सात मिलजुलकर खुशी से रहे । एक दिन जब मैं उन से मिलूँ तो मैं उन दोनों को वैसे ही मुस्कुराते हुए देखना चाहूंगी जैसे मैंने उन्हें आज देखा है । मैंने उन दोनों को बहुत उदास मन से देखा था, पर मन की गहराइयों से मैं अपने दोस्त रोहन के लिए बहुत खुश थी । उसे अपने लिए कोई बहुत अच्छा इंसान मिल चुका था । भगवान मुझे भी ऐसा ही अच्छा जीवन साथी तलाशने में मदद करें । इंतजार करने वालों के लिए समय की गति धीमी है । डरने वालों के लिए बहुत जल्दी है । समय की कर दी । रोने वालों का समय काटे नहीं करता । आनंद से भरे लोगों का समय है, कम पडता है पर प्यार करने वालों के लिए समय सास्वत है तो मैं हमेशा प्यार करती रहूंगी । मैं रोहन तुम्हारी अधूरी कल फिर नब्बे आधी रात हो चुकी थी और शादी की नीतियां चल रही थी । मैं अपने कॉलेज के दोस्तों और वैदेही के साथ वहां बैठा हुआ था । पापा और मां सुरभि दे दी के पीछे बैठे हुए थे जो यज्ञ की अग्नि के सामने अनुज के साथ बैठकर शादी से जुडे संस्कारों में रह सकते हैं । हम लोग जोर जोर से हंस रहे थे और बातें कर रहे थे । मैं उनके यहाँ आने के कारण उनका खत्म हो गया । अनुराग अपने चाचा के बारे में कहानियां सुनाकर हम सबको हंसा रहा था । बैठे ही हम सब लोगों के बीच में से उठकर एक शाम तक सी जगह पर जाने के लिए उठ गई और मुझे इशारा किया कि मैं भी उसके साथ आकार बैठो । मैंने अपने दोस्तों से उसके पास जाने की अनुमति नहीं । मैं उठा अपना ब्लेजर अपने कंधे पर डाला और उसके पास चला गया । वो मुख्य द्वार के पास घूमती रही और मैं उसके पीछे पीछे चलता रहा हूँ । बाहर एकदम शाम तो ऐसा माहौल था और मैं उसके पास पहुंचकर उसके पीछे चलने लगा । उसने मुझे देखकर का रोहन तुमने मुझसे कुछ वादा किया था । मैंने परेशान होकर उससे पूछा क्या मैं कुछ भूल गया हूँ? उसने कहा, तुम ने मुझसे कहा था कि तुम मुझे तो सारी जगह दिखा हो गए जहाँ तुम नब्बे से मिले थे । मैंने साल से भरकर उससे कहा हाँ मुझे याद है पहले शादी की असर को देख कर एक बार के लिए ये सुझाव क्या मैं कुछ देर के लिए उनके रीति रिवाजों के बीच से उठकर कहीं जा सकता हूँ? मैंने अपनी स्कूटी की चाबी निकाली और कहा अच्छा आप चलते उसने मुझसे पूछा पक्का उस समय तक मैंने स्कूटी भी बाहर निकाल ली थी । मैंने उससे कम शर्मा आइए ड्राइवर आपका इंतजार करता है । वो मुस्कुराई और स्कूटी की पिछली सीट पर कूदकर बैठ गई । मैं मुस्कुराया और थोडे छेडने के अंदाज से उससे कहा मैं बार बार ब्रेक का प्रयोग करता हूँ । उसने मेरे सिर पर एक थप्पड मार रहा हूँ । उसने भी अपने चेहरे पर दोस्तों से हँसी लाकर का ड्राइवर आगे देखो और ट्राई करो । खाली सडक, खुबसूरत मौसम, प्यार की खामोशी और आसमान में चमकते सितारे मेरी उस ड्राइवन को बहुत खुबसूरत बना रहे थे । मैंने स्कूटी के स्पेशल से देखा तो वैदेही पीछे बैठ कर मेरे कंधे पकडे हुई थी हो सुंदर भी लग रही थी । हम जैसे ही अपनी स्कूल के पास पहुंचने वाले थे तभी मैं थोडा पीछे की ओर चुका और मैंने उससे कहा ऍम, वो शरमाकर मुस्कुराई । इस बार तो उसने मुझे बातों में ही भर लिया और अपना बाया काल मेरे कंधे पर रख दिया । अगले पंद्रह मिनट में हमें स्कूल के मुख्यद्वार में पहुंच गए । मुख्यद्वार से स्कूल के बिल्डिंग तक पचास मीटर लंबी लेन है । हम गेट में एक छोर से रास्ते से होकर उस लेन की ओर चलने लगे जिस के दोनों किनारों की ओर कतारों में पेड खडे थे । ये मेरे स्कूल का सबसे याद का रास्ता था तो क्योंकि हम अपने स्कूल के लिए इसी रास्ते से हर पहुँचते थे । मैंने पहले ही जगह के बारे में बताया कि ये वो याद कारलेन है जहाँ से मैं हर रोज स्कूल खत्म होने के बाद चलकर अपनी बसों तक पहुंचने के लिए नव्या का पीछा करता था । उसने मुझे बडी गंभीरता से देखा । हम आगे बढ हैं पर अब मुझे आगे जाने के लिए गई । लंबे लंबे डग घटने लगीं और बिना पीछे मुडे उसने मुझसे कहा, इस लेन में पहले तुम नव्या का पीछा करते थे और अब मेरा पीछा करूँगा । वो दुष्टता भरी मुस्कान के साथ तेज चलने लगी और मैं उसका पीछा करने लगा । लेन पार करने के बाद हम मुख्य प्रशासक ये बिल्डिंग की ओर आए । वहाँ ईसा मसीह की एक बडी सी मूर्ति थी । वो उस मूर्ति के सामने खडी हो गई और पंद्रह आंखों से कुछ प्रार्थना करने रखी । मैंने उससे कहा, प्रशासकीय बिल्डिंग के साथ ही सिस्टर्स और ननका हॉस्टल था जो वहाँ रहती हैं तो यहाँ से जल्दी चलो । अगर किसी को पता चल गया तो हम लोग रात में स्कूल में घुस है तो हमे धक्के मारकर निकाल दिया जाएगा । रात में वो स्कूल कुछ अलग ही लग रहा था और वहाँ सब कुछ शांत भी था । हम एसेंबली वाली जगह पर पहुंचे । मैं उसका हाथ पकडकर स्टेज के किनारे गया । ये वो स्टेज है जहाँ हर सुबह हम लोग प्रार्थना करते थे और वो उस तरफ से आती थी । मैं उसकी ओर मुड कर उंगली के इशारे से दिखाने लगा हूँ कि वो इस तरफ से आती थी । वो फिर गम्भीरता से मुझे सुनने लगी और फिर उसने कहा हूँ रोहन क्या तुम उसी जगह पर फिर से खडे हो सकते हैं जहाँ तुम उस दिन खडे थे । सवालों से घेरा चेहरा बना । मैं उसे सुनता रहा और इस स्टेज पर चढ गया और वह मुझे देखती रही । मैंने उससे कहा मैं उस दिन यहाँ खडा हुआ था । अपनी वही मुस्कुराहट के साथ वो उस तरफ नहीं जहाँ से नब्बे आती थी । वो उस जगह पहुंच गए और फिर एक सांस लेकर पीछे मुडी और वही रास्ता लेकर आई जो बरसों पहले नब्बे लिया था । वो मेरी तरफ आई जबकि मेरी आंखें उसके कदमों पर थी । वो बडी बेफिक्र में चलती है । उतनी ही सुंदर दिखती हुई मेरे पास आई और मुझसे पूछा क्या वो ऐसे ही आती थी? मैं उसकी आंखों में खो गया और कुछ कह नहीं पाया । उसने मुझे फिर पूछा, क्या वो स्टेज पर ऐसे ही आती थी? पहले बडबडाते हुए का हो सकता है वो मुस्कुराई और फिर उसने कहा मुझे अब और जगह भी ले चलो । मैंने उससे कहा हाँ चलो दूसरी जगह चले । मैं उसे बिल्डिंग के दूसरी ओर ले गया । चाहे बडा सा ऑडिटोरियम था । हम कॉरिडोर की ओर चल पडे और अंतर था । वहाँ पहुंच गए तो मैंने उसे कहा वैदेही यहाँ से आओ लगता ये दरवाजा खुला है । ऑडिटोरियम बहुत पडा था । उसमें एक साथ करीब करीब दो हजार लोग बैठ सकते थे । मैंने लाइटें चलाती हूँ । वो ऑडिटोरियम की खूबसूरती को निहारते के लिए एक बार पूरा घूमी । ऑडिटोरियम के आगे इस तेज था । मैं उसके सामने खडा हो गया और उससे कहा, ये वो तेज है जहाँ मैंने नव्या के साथ एक प्रस्तुति दी थी । कुछ कदम चलकर वो हाथ जोडे हुए आई और अपने चेहरे पर प्यारी मुस्कान लिए स्टेज को देखने लगी । उसकी आंखों से पता चल रहा था कि वह गहरी सोच में नहीं । वो स्टेज के बीच में गई । उसने अपना बैग खुला जो उसने अपने कंधे पर लटकाया हुआ था और उसमें से एक बॅाल निकाला । उसने अपना बैंक ऑडिटोरियम में एक तरफ शक्तियां और मुझे आने को कहा । मैं भी आ गया । उसने वॉक उनमें से एक कैसेट खुलाई और अपने यहाँ फोन लगा लीजिए । मैं जैसे ही उसके पास पहुंचा तो उसने मुझे शातिर मुस्कान के साथ मेरे बाय कान में एयर प्लस लगती है और अपने दायरे में चुकी है । मतलब बहुत लंबा नहीं था इसलिए हम पास पास ही रहे । इतने पास के मैं उसके सांसों को महसूस कर सकता था । मैं थोडा खोया सा उसकी आंखों में झांक रहा था । उससे मेरा दायां हाथ अपनी कमर पे रखा और मेरा पाया हाथ पकड लिया । उसने धीरे धीरे पैर चलाने शुरू किए । वो मेरे साथ धीरे धीरे डांस करने की कोशिश कर रही थी । चारों तरफ डालती थी और हमारे कानों में सबसे रोमेंटिक गाना खुल रहा था । हम एक दूसरे को महसूस करते हुए उसे धुन में नाश्ते रहे हैं । वो आत्मविश्वास से भरी हुई थी पर थोडा शर्म आ रही थी । पर मैं घबराया हुआ था और जैसे ही मुझे उसके कोमल बाल मेरे चेहरे कुछ हो गए हमारे हाथ खेलते रहे और पैर थे रखते हैं । उसने फिर अपना सिर ऊपर करके गाना बंद कर मेरे हाथ पकडकर मुझे अजीब से चेहरा बनाकर पूछा । भविष्य में तुम अपने स्कूल की कौन सी आर रखोगे? मैंने थोडा रुककर उसकी आंखों में देखकर जवाब दिया, मैं जिंदगी भर इस रात को हमेशा यात्रा होंगा । वो थोडा सहसी लग गए और मुस्कुराई मैंने उसकी तरफ देखा और उसकी हथेली को छूते हुए तो क्या करना चाह रही थी । उसका चेहरा चमक रहा था और मुस्कुराते हुए उसने अपना बैग उठाया और कहा आज के बाद तुम जब भी अपने स्कूल को याद कर हो गए तो तो सिर्फ मैं ही आता हूँ । मैं उसे सुनता रहा है । उसने आगे कहा, मैं तुम्हारी यादों को नब्बे के साथ नहीं बैठ सकती हूँ । मैं जिसमें पूर्व उसे देखता रहा हूँ और उसे गले लगा लिया । कभी किसी ने ऑडिटोरियम का दरवाजा खुला और आवास है । कौन है वहाँ? मैं पीछे मुडा और देखा के स्कूल प्रशासन की एक सिस्टर अपने हाथ में टॉर्च लिए हुए आई नहीं मैंने बैठे ही का हाथ पकडकर का भगवान रहते ही अब हमें भागना होगा । उसे हाथ खींचते हुए हम ऑडिटोरियम की दूसरी ओर से भागने लगे । हम खाते रहे और टॉर्च लाइट के मध्यम रोशनी हमारा पीछा करती रहीं । हमें स्टेज के दरवाजे के दूसरी ओर भाग के और भाग के वर्ष वो दरवाजा खुला हुआ था । हम हस्ते हुए भागते रहे हैं । वही सिस्टर हमें रोकने के लिए चिल्लाती रही । मैंने कहा पहले ही तो हम रुक नहीं सकते हैं । हम कॉरिडोर की ओर दौडे और हमारे बच्चा वों की आवाज हमारे स्कूल के चारों और कोशिश नहीं नहीं । सिस्टर ने पीछे से चिल्लाकर का गार्ड खाओ तो इन घुसपैठियों को पकडो । पर हम एक दूसरे का हाथ पकडे मुख्यद्वार के लेन में पहुंच गए तो मैंने देखा कि गार्ड हमारे पीछे भागते हुए आ रहे हैं । हम और चलती भाग गए । वैदेही जोरों से हाँ से जा रही थी । वही साँस मिचौली के खेल में मजे ले रही थी । हम गेट से बाहर आ गए और स्कूटी की ओर भाग गई । जब तक हमें स्कूटी को चाबी से शुरू करते हैं । गार्ड भी हमारी ओर भागे आ रहे थे । वैसे ही नहीं मेरे कंधे को जोर से दबाकर का फोन जल्दी करो । वो लोग आ रहे हैं जब तक कार्ड वहाँ पहुंचे तब तक हमारे स्कूल भी शुरू हो चुकी थी और फिर हम भाग लिए । उस रात हमने जो कुछ किया उसे सोच हम बहुत हंसे जा रहे थे । वो भी पीछे से हँसी जा रही थीं । पर उसने कहा सब बहुत जबरदस्त रहा । कुछ देर के बाद मैं पीछे मुडकर ये देखने के लिए रुका की कोई हमारा पीछा तो नहीं कर रहा है । जब मैं इस बात से आश्वस्त हो गया की आस पास कोई नहीं है तब मैंने स्कूटी रोकी । वो भी एक किनारे खडी हो गई और हम लोग अपना पेट पकडकर खून हस्ते रहे । हमने हंसी रोकने की कोशिश की पर फिर एक दूसरे का चेहरा देखकर दाक निकालकर हंसने लगे । अचानक मैंने हसना बंद कर दिया और उसके पास जाकर उसका हाथ पकडा । पहले उसकी आंखों में देखा जो अभी भी मुस्कुरा रही थी । उस खामोश शहर में मैंने उससे कहा हम दोनों के भीतर जिंदगी जीने का एक चलता है और हमारी कोशिश रहती है कि हम एक मुझे के पि ऍफ पे को सिंधारा है तो तुम मेरा एक जस्ट हो रहते हैं और मेरे चलते को कभी हल्का मत पढ नहीं देता हूँ । उसने भी हसना बंद कर दिया और जवाब दिया प्यार विश्वास का दूसरा नाम हैं और हंसी प्रार्थना की शुरुआत है । मैं जहाँ भी रहूँ तो मेरे दवाओं में हमेशा साथ होगे । हम दोनों एक दूसरे की आंखों में खोये रहे और सफेद रुई के फाहों से ही बादल कह रहे आसमान से गायब हो गए । आकाश अचानक गहरा भरा हुआ साहब बोझिल बादलों से भटने लगा । अब वो खाली आसमान खाली बारिश होने का संकेत दे रहे थे । बादल वो भी काले बादल आकाश में भरे अच्छे संकेत दे रहे थे और अचानक बारिश शुरू हो गई । वैदेही ने प्रसिद्ध और पास कर लिया । मैं मंगा ऑर्डर दोनों से ही भारत चला गया था । वो मेरी तरफ छुप गई और अपना माथा मेरे ऊपर रख दिया तो हमने अपनी आंखें बंद कर ली । पानी की बूंदें मेरे बाल को पर कितने लगीं? उसने बुदबुदाते हुए कहा तो भरा धन्यवाद । मैंने धीमी पर रोक ही आवास में पूछा हूँ । फॅसने से लबरेज आवाज में उसने कहा तुम्हारा इस तरह का होने के लिए हम एक दूसरे से अलग हो गए और धीरे धीरे कह रहे काफी छोडने लगे । अपने आप पर काबू न रखते हुए मैंने उसका सिर्फ अपने हाथ में ले लिया और उसे समर्थन तरीके से छीन लिया । उसके हाथ मेरे शरीर के हर भाग को छोटे थे । फिर हम अलग हो गए और अपनी आंखें खोली । हमें एक दूसरे खोलना जाते हुए देखते रखें । मैंने उससे कहा अब तेरी हो रही है और हम लोग भी भी चुके हैं । उसने भी चमकदार मुस्कान के साथ मेरी हाँ में हाँ मिलाई । मैंने स्कूटी शुरू की और शादी असल में वापस जाने लगे । जहाँ शादी की सारे दसवीं लगभग खत्म होने को थी और मेरे बहन के विदाई का समय आ गया था । मैंने अपनी माँ को दे दी के सामने होते तो ये कहते सुना देता भगवान के सामने क्या जाने वाला? क्या किसी पेपर में हस्ताक्षर किए जाने वाला कोई संस्कार नहीं है? ये दो दिलों के एक साथ धडकने का संगम है जिसमें दोनों एक दूसरे की खुशी और संपन्नता के लिए त्याग करते हैं । शादी एक आशीर्वाद है तो हम एक दूजे को दो जन एक कारण बनने हित देते हैं । ऐसा सुन मेरी आखिर गहराई अनुराग ठाकुर प्यार में डूबी दो जानो के लिए दस से ज्यादा अच्छी बात और क्या हो सकती है कि उन्हें इस बात की तसल्ली तो है कि वे एक दूसरे के दुख में एक दूजे के साथ खडे रहे हैं । रोहन मेरा सबसे अच्छा दोस्त रहा क्या? यूँ कहें तो वह मेरे लिए मेरे दूसरे परिवार जैसा था । मेरे भाई जैसा हम सबसे पहले कॉलेज में मिले थे और उसी समय दोस्त बन गए थे तो उस जिनके बीच ना कोई न वहाँ ना कोई उम्मीद भी रहा है । रोन एक ऐसा लडका रहा तो बहुत ही सिंह जमी शाम और सुलझा हुआ लाख था । वो बिना कोई रागद्वेष के अपने दोस्तों को हमेशा से ही समझता था और यही उस की सबसे बडी खासियत रही । पैसे तो एक मौका किस्म का लडका था । मैं समझता हूँ मुंबई हर एक लडका मुर्ख होता है । उसने मुझे एक बार कहा था कि वह नव्या नाम की एक लडकी को स्कूल में बहुत चाहता था । पर जब वैदेही के प्यार में पडा उसे तब जाकर नब्बे के बारे में अपने भावनाओं का पता चला की वो प्यार नहीं सिर्फ आकर्षण था पर उसने वैदेही को कभी धोखा नहीं दिया । मुझे याद है ठीक बार की बात है । हम लोग गोरखपुर में कहीं किनारे पर बैठकर चाय पीते थे उसने तब अपने हॉस्टल के दोस्तों के बारे में आपने पाल की बात नहीं है । ये वही दोस्त थे जो वैदेही के साथ उसके रिश्ते का मजाक उडाते थे । हालांकि उसे पता था कि वैसे ही एक मैं एक लडकी है और वह समझती है कि उसके दोस्त उसे चीज आ रहे हैं पर हूँ । वैदेही को बदनाम से बजाये रखना चाहता था । वो एक ऊर्जा बाल लडका था और अपने अभिभावकों से बहुत प्यार करता था तो उनके मासी के विरुद्ध कभी नहीं जा सकता । किए बात की पक्की थी तो उसके माँ बाप ऐसी कोई स्थिति ही पैदा नहीं होने देंगे जिससे वो उनके विरुद्ध कुछ करें । जब मैं उसके हाँ सागर में उस की दीदी की शादी में गया तो ये देखकर हैरान हो गया कि उसके माता पिता कितने खुले विचारों वाले उन्होंने कभी लडकियों के बारे में बात करने से नहीं होगा । इतनी आजादी के बाद भी वो एक ही लडकी को आपको कर रहा हूँ । अब तो रहते ही पर वापस आते हैं । मैं वैदेही को पिछले चार सालों से जानता हूँ । वह जबलपुर की सबसे खुबसूरत लडकी है । फिर भी तेज तरार, प्रतिमान, खुले विचारों वाली और बहुत ही खूबसूरत लडकी जबलपुर के सबसे नामी इस कुल्लू में क्राइस्टचर्च का नाम आता है और वहाँ से ही शहर की सबसे तेज खूबसूरत देखने वाले और टेलेंटेड लडकियां निकल कर आते हैं और वेदेही जैसी लडकी को कौन छिपाकर रख सकता था । वो जबलपुर के हर स्कूल के लडकों के सपनों की रानी थी । पर इसके अलावा वो अपने रवैये और अखंड स्वभाव के लिए भी प्रसिद्ध थी । पर मैं नहीं मानता कि अगर कोई लडकी आपकी बात नहीं मानता है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह जिद्दी या अखंड हूँ । रोहन और वैदेही दो अलग प्रवृत्ति के लोग थे, पर इतिहास में भी यह सिद्ध हो चुका है कि विपरीत स्वाभाव वालों में आकर्षण इसलिए वह दोनों साथ थी । मैं हमेशा से ही रोहन के लिए चिंतित रहता था क्योंकि अगर उसने रोहन को छोड दिया तो वह बुरी तरह से टूट जाएगा । मैं खुद को रोहन का सच्चा दोस्त मानता था, पर सच्चाई यही थी के बगैर कॉलेज के टाइम में उसके साथ कभी नहीं होता था । वैदेही उस पर अपना अधिकार बनाए रखती थी । कॉलेज के दिनों में रोहन उसी के बगल में बैठा करता था वो उसी का टिफिन उसके साथ खाता था तो उसके साथ प्रैक्टिकल कक्षाओं में जाता था । वो खाली समय में उसी से बात किया करता था और फिर शाम को उसको घर में छोडने जाता था । रोहन को ये समझ नहीं आ रहा था कि उसके दोस्त उससे दूर छूटते जा रहे हैं कि हम जून कैसे कि वह कोई दोस्त बना ही नहीं रहा था । मुझे लगा कि मुझे उसका दोस्त नहीं रहना चाहिए क्योंकि उसे किसी की जरूरत ही नहीं है ।

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यह प्रेमकथा उन सारे युगल प्रेमियों को समर्पित है, जिनकी प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई... writer: हिमांशु राय Author : Himanshu Rai Script Writer : Shreekant Sinha
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