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Part 9

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हमारी अधूरी कहनी एक ऐसे इश्क़ की कहानी है जो इश्क़ चाह कर भी पूरा न हो पाया, पर अफसोस कुछ कहानियों वहीं से शुरू होती है जहां उनका अंत होता है writer: अर्पित वगेरिया Voiceover Artist : Mohil Author : Arpit Vageriya
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मई के मध्य का समय था जब सूरज ने अपना पूरा प्रताप दिखाने और भारत को अपनी क्षमता भरतपाल लेने का फैसला किया । हाँ, एक दिन सुबह की बारिश ने मुंबईवासियों की वह शाम तो आज सुंदर और खुश अखबार बना दी । उस समय अपनी छोटी सी बालकनी में खडे खडे अरमान को समझ आ गया क्या आज उसका विशेष देने मुख्य था? तीन कारणों से पहला सैंडी की माँ के स्वास्थ्य में कुछ सुधार के लक्षण नजर आने लगे थे । दूसरा उसका शो छोटी आरती के मामले में कुछ समय से पिछड रहा था । फिर नंबर वन पर आ गया था और चैनल ने उसे एक और शो करने का मौका दिया जो पूरी तरह उसके सुझावों पर होगा तथा जिसकी कार्यकारी निर्माता सारा होगी और तीसरा सारा से मुलाकात के लिए उसका इंतजार खत्म होगा क्योंकि मिलने का कार्यक्रम पिछले तीन सप्ताह में तीन बार रद्द होने के बाद अंतत था । फिर अपने फ्लैट में सारा की मेजबानी करने जा रहा था । चीजें बदलती हैं, योग बदल जाते हैं और वह भी बदलता है । मैं केवल खुद ही नहीं बल्कि उसकी प्राथमिकताएं भी । उसने अपने को विश्वास दिलाया कि वह अभी जो कुछ भी कर रहा है, मैं उसके लिए धीर तत्काल में सबसे सही साबित होगा । उसने अपने लिए जो रास्ता चुना है, खुद को और अपने परिवार को ऐशोआराम भरी जिंदगी देने के लिए उसने जो भी रास्ता अपनाया है, उस तक पहुंचने में अब ज्यादा समय नहीं है । एक और शो स्वीकार कर लेना अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में भडकता एक और कदम था पच्चीस साल । यही उम्र है उसकी । इन सालों में अरमान ने काफी कुछ देखा और अनुभव किया तो चीजों का उसने आनंद लिया और कुछ अन्य कार्य करने में उसने दुख नहीं व्यक्त किया । हालांकि अब इन सब के कुछ खास मायने नहीं रह रहे हैं । उसकी उम्र को देखते हुए उसकी उपलब्धियां काफी अधिक थी और उसे बहुत अच्छी तरह पता था कि इसका क्या अर्थ है । उसे ये भी पता था कि उसके माता पिता के समर्थन से ही यह संभव हो पाया था । है । इंदौर के उनकी ने चुने लेखों में था, जिन्होंने इतना कुछ हासिल किया था और इससे स्थानीय मीडिया ने उसे काफी प्रमुखता दी । ऐसी स्थिति थी कि अब युवा वर्ग में वह एक जाना माना नाम था । उसे पहचानने वाला हर व्यक्ति या तो उसका सम्मान करता था या उसकी उपलब्धियों के कारण उसे चलता था । उसके पिता ने पहली बाहर जब अपने पुत्र की खबर मीडिया में देखी तो बहुत प्रसन्न हुए थे । उसके पिता ये देख कर बहुत संतुष्ट होते थे कि उनका बेटा इतनी मेहनत कर रहे हैं और अपना नाम कमा रहा है । जब भी बस होने लगता है अरमान को उसके पिता ही मत बांधते । उन दोनों के बीच ऐसा ही तालमेल था जिससे उन्होंने सालों से बना रखा था और दोनों का मानना था की ये हमेशा इसी तरह बना रहेगा । उसे अपने माता पिता की हमेशा बहुत ज्यादा दी थी । लेकिन पिछले पांच सालों में उसे इसकी आदत हो गई थी । हवा के थपेडों के साथ बारिश की बूंदों के उसके चेहरे पर पडने से ठीक पहले बालकनी में खडे होकर मैं सोच रहा था कि क्या जिंदगी वैसे ही गुजर रही हैं जैसे की उस योजना बनाई थी । जवाब था, एक दिल भी नहीं । उसने अपनी चाय खत्म की और वहाँ और देर तक खडा रहा । उसे पता था कि उसकी जिंदगी अब वैसी नहीं रहेगी लेकिन उसने ऐसा ही चयन किया था । इसे और बेहतर बनाने के लिए उसने अपने चरित्रों के लिए बहुत सी लाइनें लिखी थी । एक दूसरे को प्रणय निवेदन करते हुए एक दूसरे से बिहार जताते हुए वास्तव में मैं हमेशा बहुत स्पष्ट लाइनों का प्रयोग करता था । लेकिन आज जब है अपने लिए एक अच्छे से प्रस्ताव के बारे में सोच रहा है तो उसकी हालत खराब हुई जा रही है । डर के मारे उसकी सांस रुक रही है और जितनी जल्दी हो सके वहाँ इससे छुटकारा पाना चाहता था । नहीं चाहता था कि वह रात सही तरीके से बीच है तो ये भी चाहता था कि जितनी जल्दी हो सके रहे अपना प्रस्ताव रखते हैं । उसने कुछ पल के लिए अपनी आंखे बंद कर ली । उसका दिल तब भी तेज सडक रहा था । अस्वीकृति कटर उसकी आंखों में झलकने लगा था । उसकी आंखें सारा के पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं । हालांकि उसे अच्छी तरह पता था कि उसके आने में अभी भी एक घंटा बाकी है, उसकी धडकन नहीं । किसी भी तरह काम नहीं हो पा रही नहीं और कोई भी उपाय कारगर नहीं हो पा रहा था । गंभीर चेहरा बनाकर उसने अपने दोनों हार जमीन पर रखें और फिर एक हाथ से कुछ शब्द करने लगा । उसने अपने आप से कहा कि अगर वह बिना रुके पचास पुशअप्स कर सका तो यह पृथ्वी उसे और सारा को मिलने के लिए आकाश पता एक कर देंगी । उसने शीशे के सामने पोशाक करना शुरू कर दिया ताकि वे अपनी आंखों से आंखें मिला सकें । लेकिन फिर भी पचास के उस जादुई अंक तक पहुंचने के लिए अंदर ही अंदर एक ऐसा संघर्ष चल रहा था जैसा कि उसने पहले कभी भी महसूस नहीं किया था । उसने शीर्ष से अपनी आंखें हटाई और अपने काम खुद करने से पहले क्लाॅक । ये सिलसिला कुछ लंबा चला और उसने महसूस किया कि उसकी आंखें लाल गेहरीलाल डॅडी होती जा रही है । अडतालीस उनचास बच्चा फॅमिली किया पर तेज देश सांसे लेने लेगा तो बुरी तरह थक गया था भाई उसने वह क्या जो उसे करना चाहिए था । कुछ देर आराम करने के बाद मैं उठ खडा हुआ और घर के इधर उधर पडी चीजों को संभालने लगा तथा नाश्ते की तैयारी करने लगा । उसने उसके पास रखी रेडवाइन देखी और सोचा काफी है । उसने टकीला और नाश्ते की खोज शुरू की । दोनों घर में नहीं थे । उसने शराब की दुकान पर फोन किया और उससे वह सब जल्दी से जल्दी भेज देने को कहा । अचानक से इस बात का दुख होने लगा कि उसने कुछ देर से तैयारी शुरू की । उसने सैंडी की कमरे में टंगी प्यार इसी गुलाबी रंगी घडी की और देखा । साढे सात बजे और सारा सवा आठ बजे के बाद कभी भी आ सकती थी तो उसने सोचा कि उसे अपने को पंद्रह मिनट पहले तक एपिसोड लिखने में व्यस्त नहीं रखना चाहिए था । उसने अपने हाथों को दबा आया । मैं कुछ घबराया हुआ लग रहा था । जैसे ही उसे समझ आया कि कुछ निराशावादी विचार उसके मन में आ रहे हैं, उस ने उन्हें हादसे पर मनाते हुए तुरंत हटा दिया । अधिकतर समय उस की तैयारियां बहुत ही नहीं होती थी । धीमी गति के साथ बिल्कुल सही ढंग से काम की बात उसके मामलों में सही बैठती थी क्योंकि उसने तय किया कि पहले एक चीज सही हो, फिर आगे बढा जाए । उसने सोफा ठीक किया, चादर, खुशबू वाली मोमबत्तियां एवं धीरे स्वर्ग में संगीत की व्यवस्था की । इन सब से उसका समर्पण साहब चला कराया था, जिससे उसमें उस शाम के लिए कुछ और आत्मविश्वास पैदा हो रहा था । हाल के कुछ महीनों में उसकी गतिविधियां, उसकी अपनी ये सीमा हर तरह से उस की अपनी क्षमता को पार करने का प्रयास जैसे लगी और गैर कुछ हद तक उसमें सफल भी हुआ है । आज जारी की बात है कि हरा भरा कबाब का मिश्रण और पनीर नाचो पंद्रह मिनट के अन्दर उसके पास पहुंच गए थे । शराब की दुकान से पैकेट मिलते ही उसने शाम की पूरी तैयारियों को दोबारा ध्यान से देखा । उसे लगा कि इसके साथ ही अचानक उसके अंदर संतोष का भाव आ गया । सारा से आज शाम सकारात्मक उत्तर मिलने की आशा करना उसके लिए सही था । कुछ तो था कि उस शाम उसने इतने कम समय में इतनी शांति से सब कुछ तय कर लिया । उसने बताया था कि अगर बाद किसी और की होती तो बीच में ही सबको छोड देता हूँ । उसने मिश्रण और पनीर नाचो । चक्कर देखा भी पहुँच बारिश था । एक एक चीज से ही उसका विश्वास बढ गया । अरे इतना उत्साहित हो गया जितना पहले कभी नहीं हुआ होगा । ऐसा लग रहा था कि इससे अरमान ने ऊर्जा का कोई ऐसा स्त्रोत खोल दिया जिसका पहले कभी उपयोगी नहीं किया गया हूँ । उसने हाथ बढाया और गीजर ऑन गड्डियाँ शाम के लिए तैयार होने से पहले मैं जल्दी से नहीं लेना चाहता था । उसने अपने को देखा और उसे समझाया कि उसे अपनी ओवर खबर दाडी भी ठीक करनी होगी । अंतिम क्षणों में आइस ख्याल से कमरे का तापमान तेजी से बढ गया । ऍम घंटे बजे और अंडमान की गतिविधियां अचानक से बीच में ही रुक गई । ये कौन हो सकता है? तभी शाम के आठ बजने में दस मिनट बाकी हुए हैं । उसने सोचा लडकियाँ तो कभी समय पर नहीं आती । उसने आखिरी बार रखने को शीशे में देखा और एक अस्त व्यस्त अरमान को घूमते हुए पाया । पुश अप्स के बाद उसके वजह से पसीने की बदबू आ रही थी और कमरे में फैली खुशबू भी उसे छुपा नहीं पा रही थी । उसकी धडकन बहुत तेज हो गई और वह उसे सामान्य करने के लिए दरवाजा खोलने की ओर बढा ।

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हमारी अधूरी कहनी एक ऐसे इश्क़ की कहानी है जो इश्क़ चाह कर भी पूरा न हो पाया, पर अफसोस कुछ कहानियों वहीं से शुरू होती है जहां उनका अंत होता है writer: अर्पित वगेरिया Voiceover Artist : Mohil Author : Arpit Vageriya
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