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क़त्ल और देशद्रोह के इलज़ाम में सीक्रेट सर्विस का देशभक्त जासूस जावेद खान जेल की सलाखों के पीछे पहुँचता है. इस गुत्थी को सुलझाने निकले अमर और जॉन के सामने आती है एक ऐसी साजिश जो भारत के नक़्शे को बदलने की क्षमता रखती है. क्या थी वो साजिश? और कौन था उसका...मास्टरमाइंड? writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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हेलो जावेद मुस्कुराकर बोला । साहनी की आंखें आश्चर्य से फैल गई । अपने नए रूम पार्टनर को हाई भी नहीं करोगे । जावेद ने बैठ पर बैठते हुए पूछा, साहनी पलकें झपकाना भी भूल चुका था? बैठना जावेद नहीं सहनी की तरफ देखते हुए बोला, कसरत करने के कारण साहनी पहले से ही पसीने में था और अब जावेद के आगमन के बाद उसमें और बढोतरी हो गई थी । साहनी जावेद को देखता रहा । फिर उसने अपनी शर्ट उठाई और पहले तो क्यों मेरे गले पड रहे हो? वो टुकडे हुए स्वर में बोला है । जावेद ने शांति से उसे देखते हुए कहा तो हमने तो मेरे गले में फांसी का फंदा डालने का पूरा इंतजाम कर दिया और मैं तुम्हारे गले भी नहीं पड सकता है । तो कौन सी जुबान समझते हो मैं उसमें ही बोल देता हूँ । मैंने तुम्हें फंसाने के लिए कुछ भी नहीं किया है । तुम बोलो तुम कौनसी जुबान समझते हैं । मैं उसमें समझाता हूँ । जब तक तो मुझे अपने राज नहीं बता देते । मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोडने वाला । कौन सा राज कैसा राज? तुम समझते क्यों नहीं और क्या कर लोगे तुम तो मुझे यहाँ टॉर्चर करोगे । धूनों मत, तुम भी एक कैदी हो तो मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा करोगे तो मैं तुम्हारी रिपोर्ट कर दूंगा । फिर ये लोग तुम्हें कालकोठरी में डाल देंगे । जावेद दैनिक भी विचलित नहीं हुआ । वो उसी तरह मुस्कुराता हुआ आराम से बैठा साहनी को देखता रहा । उसने पीछे खिसककर दीवार पर टेक लगा ली और हाथ आराम से अपने सर के पीछे रख लीजिए । फिर बोला कितने साल हुए तो मैं इस पेशे में आए हुए हैं । कौन सा पेशा पेशेवर मुजरिमों से मैं आठ साल से जूझता रहा हूँ । उससे पहले पांच साल में आर्मी में दुश्मनों से जूझता था तो मैं डर है । मैं तो मैं यहाँ मारूंगा पीटूंगा, टॉर्चर करूंगा । तुम देखना । मैं तुम्हें छोडूंगा भी नहीं और तुम अपनी जुबान खोल लोगे । बहुत घमंड है ना! तो मैं अपने ऊपर । साहनी ने आंखे फैलाकर पूछा हाँ, बहुत ज्यादा । जावेद इत्मीनान के साथ बोला । सहनीय आराम से अपने बैठ पर बैठ गया और फिर किताब पढने लगा और इस तरह बर्ताव करने लगा जैसे जावेद की वहाँ उपस् थिति ही ना हो । अचानक जावे बैठ पर लेते हुए बोला चिंता मत करो, आज पहला देने हैं, कुछ नहीं करूंगा । आज तो मैं पूरी छूट है । पर कल से साहनी ने एक बार चुपके से किताब पढते नजर उठाकर जावेद की तरफ देखा और फिर किताब में झांकने लगा । हालांकि किताब के शब्द उसके भेजे में नहीं जा रहे थे । उसके दिमाग में सिर्फ ये विचार कौन रहा था कि अब क्या होगा । अगली सुबह पांच बजे के करीब साहनी नींद में कुनमुनाने लगा । उसे लगा जैसे उसके शरीर पर कुछ दिन रहा है । नींद खुलते खुलते जैसे उसे थोडा होश आया तो उसे अहसास हुआ । वाकई उसके शरीर पर कुछ दिन रहा था । वो झटके के साथ उठ कर बैठ गया और उस चीज को उसने अपने शरीर से तेजी से झाडा वाह जी वाह उछलकर दूर जा गिरा । जो उसके शरीर पर रिंग रहा था वह छिपकली थी । साहनी उसे इस तरह देख रहा था जैसे जहरीला कोबरा साहब उसके शरीर पर देख गया । उसे छिपकलियों से बहुत डर लगता था । छिपकली कहीं गायब हो गई थी । साहनी कमन पूरी तरह से घिन से भर गया । उसने अपने कपडे उतार दिए और पीने का पानी लेकर अपने सीने और हाथ पैरों में डाल लिया और फिर तौलिये से पूछने लगा । जब वो कुछ सामान्य हुआ तो उसके दिमाग में ख्याल आया कि ये छिपकली अपने आप आई या फिर उसने जावेद की तरफ देखा वह गहरी नींद में प्रतीत हो रहा था । जावेद के चेहरे पर चादर थी, उसमें चादर खींच ली और चीफ पडा है । ये हरकत तुम्हारी थी ना । जावेद ने एकदम से आंखें खोली । साफ प्रतीत हो रहा था कि जावेद नींद में नहीं था । उसने उसी तरह लेटे लेटे पूछा, कौन सी हरकत? छिपकली तुम्हारे ऊपर रखने वाली हाँ मैंने रखी थी क्योंकि मुझे पता चला है कि तुम छिपकलियों से बहुत डरते हो । अब ये ना पूछना मुझे किस तरह पता चला । जिस तरह तो हम अपने दुश्मन की सब जानकारी रखते हो । ऐसे ही कुछ आदत मेरी भी मेरे तो ना जाने इस दुनिया में कितने दुश्मन है । कहकर जावेद मुस्कुरा दिया । साहनी उसे एक तब देखता रहा । जावेद बोला, ऐसा और सुबह होने की उम्मीद कर सकते हो । छिपकली में कहाँ से लाऊंगा? उसकी चिंता तो मत करना । मैं आज ही तुम्हारी शिकायत जगह से करूंगा । सहनीय गुस्से से बोला जरूर करो, कहकर जावेद मुस्कुराया और फिर उसने उसकी तरफ पीठ दिखाकर करवट लेंगे । साहनी कुछ पल उसे घूमता रहा । फिर आपने बैठ पर जाता था । नींद गायब हो चुकी थी । कुछ देर लेटकर वो यही सोचता रहा । छह बजे जेल में असेंबली का टाइम होता था उस से पंद्रह मिनट पहले जावेद उठ गया और नित्य कार्यों से निपटने लगा । साहनी उसे देखता रहा । असेंबली के बाद साहनी ने जेल के गार्ड को अप्रोच किया । जेलर तो आया नहीं, उसे लगा शायद इस कार्ड से काम चल जाएगा जो की कुछ ऊंचे पद पर लगता था । साहनी ने उसके पास जाकर कहा कि वह उससे कुछ बात करना चाहता है । उसने रूखे स्वर में पूछा क्या हो गया मेरा नया सेल? मेट मुझे परेशान कर रहा है । क्या नाम है उसका? जावेद खान नाम सुनकर उसके चेहरे के भाव पर ले । या तो मैं मारपीट रहा है नहीं फिर मुझे परेशान कर रहा है । तो क्या दूध पीते? बच्चे हो तो मैं परेशान करेंगे तो मुझे परेशान कर दो । बच्चों जैसे यहाँ पर शिकायत मत करना । वाकई में कुछ हो तो बताना कहकर वह एक तरफ बढ गया । साहनी के चेहरे पर निराशा भरे भाव आ गए । फिर उसकी नजर जावेद पर पडी जो एक कोने में आराम से खडा होकर उसकी तरफ ही देख रहा था । साहनी वहाँ से हट गया और नाश्ते की लाइन में लग गया । अभी वो लाइन में लगा ही था की उस की बगल में फिर से वही हिजडे जैसा आदमी खडा हुआ और उसे बडी अश्लीलता के साथ ऊपर नीचे देखते हुए धीरे से बोला, आॅन, ऐसा है कितनी बढिया बॉडी बनाई है तुम्हें? साहनी ने जवाब नहीं दिया । वो चुपचाप खडा रहा । उसे याद आया किसी ने उसका नाम मोनू बताया था । साहनी ने रूखे रवैये से कुछ चढकर मोनू से अपना लहजा बदला और धमकाते हुए बोला, सुनाई नहीं देता क्या चिकने कहानी में तेल डाला हुआ है? जवाब दे क्या चाहिए तो मैं सहानी त्रस्त होकर बोला ये चाहिए । वो अश्लीलता के साथ नीचे देखते हुए बोला । साहनी को गुस्सा आ गया । उसने उसे एक तरफ धकेल दिया । मोनू साहनी के सामने जिस्मानी ताकत में कहीं नहीं ठहरता था । वो एक तरफ जा गिरा । कुछ लोग हंसने लगे । मोनू के चेहरे से ही पता चल रहा था कि वो कितना अपमानित महसूस कर रहा था । वो उठते हुए बोला साले बहुत भाव कर रहे हैं । बताऊंगा तो फिर वो तेजी से एक तरफ चला गया । साहनी ने लाइन में लगकर चाहे और डबल रोटी हासिल की और फिर एक कोने में बैठ कर खाने लगा । आठ बजे तक सभी अपने अपने सेल में वापस पहुंच गए । अब जावेद ने एक नई हरकत शुरू की । सेल में पहुंचते ही जावेद आपने बैठ पर बैठ गया और साहनी को घूमने लगा । कुछ देर तो साहनी उसे अनदेखा करता रहा पर फिर उसने महसूस किया जब भी वह जावेद की तरफ देखता है वो उसे वैसे ही घूम रहा होता था । इस तरह एक घंटा बीता, दो घंटे बीते और फिर बारह बज गए । जावेद अभी भी उसे देख रहा था तो फिर साहनी ने कह दिया अपनी फोटो खींच कर दे तो देखते रहना । जावेद कुछ बोला नहीं । वो उसे उसी तरह देखता रहा । साहनी उसे अनदेखा करने लगा । वो कभी किताब पडता तो कभी कसरत करने लगता है । पर उसे हर वक्त जावेद की नजरें अपने ऊपर तीर की तरह चुकी हुई महसूस होती रही । हालांकि उसका इतना ज्यादा असर नहीं हो रहा था इसलिए वो उससे चिढाते हुए बोला तो ये तुम्हारी नायाब टॉर्चर टेकनिक है । इससे तो बच्चे भी परेशान ना हो । जावेद अभी भी कुछ नहीं बोला । बीच बीच में वह कुछ अपना काम भी करता हूँ । पर उस वक्त भी वह साहनी पर नजर रखे रहता था । रात हो गई । साहनी बेड पर लेट गया । उस वक्त भी जावेद उसे घूम रहा था । साहनी अचानक उठा और फिर जावेद को देखते हुए बच्चे की तरह जीत निकालकर हाथ हिलाते हुए चढाने लगाना । मैं तो आज बहुत बढिया नहीं होने वाला हूँ तो मुझे खोलते रहा हूँ और सुबह अगर मेरे ऊपर छिपकली रखी तो मैं उसे उठाकर वापस तुम्हारे ऊपर डाल दूंगा । जावेद अभी भी कुछ नहीं बोला । नहीं उसके चेहरे पर किसी तरह की कोई भावनाएं । लेटने के । करीब एक घंटे बाद साहनी ने चुपके से हल्की आंखें खोलकर देखा तो पाया जावेद लेटे लेटे अभी भी उसे घूम रहा था । हराम ज्यादा वो मन ही मन बुदबुदाया और फिर आंखें बंद कर ली । सुबह पांच बजे एक बार फिर साहनी को अपने ऊपर गिली गिली चीज के होने का अहसास हुआ । एक बार फिर वो चौक कर उठा । हालांकि इस बार पिछली बार की तरह बदहवासी नहीं थी पर क्योंकि उसे बचपन से ही छिपकलियों का भाई था इसलिए छिपकली के खुद पर होने की सोच मात्र से उसके रोंगटे खडे हो जाती थी । पर इस बार उसका मन गेंद से और भी ज्यादा भर गया जब उसने पाया कि इस बार उसके ऊपर मरी हुई छिपकली पडी थी । उसे उपकारी आने लगी । वो सन्यास की तरफ भागा बोलती कि फिर मोहा दो कर वापस आया वो नफरत के साथ । जावेद को देखने लगा जो इस बार सोने का नाटक नहीं कर रहा था बल्कि उसे उसी प्रकार घूरे जा रहा था । अब इस बात का साहनी अनुमान नहीं लगा पाया कि वह रात भर सोया ही नहीं या फिर अभी उठकर बैठा है । साहनी ने तौलिया उठाया और खुद को साफ करते हुए जावेद को भद्दी भद्दी गालियां देने लगा । जावेद दैनिक भी विचलित नहीं हुआ । उसके चेहरे का कोई भाव नहीं बदला । वो उसे देखता रहा । बोलता क्यों कुछ नहीं ऍम साहनी ला रहा था । मैंने कुछ नहीं किया तेरे साथ और मेरे साथ ऐसी जलील हरकतें कर रहा हैं । हर एक मर्द का बच्चा है तो हाथ उठा मुझे फिर मैं तुझे जवाब दूंगा । जावेद को कुछ भी ना बोलते देख उसे उसी प्रकार घुटने की प्रतिक्रिया से साहनी का गुस्सा और भी ज्यादा बढ गया । उसने जावेद के चेहरे पर तेजी से मुक्का घुमाया । जावेद आराम से एक तरफ हट गया । सानी ने दूसरा प्रहार किया जिससे जावेद ने बडे आराम से अपनी हथेली पर रोक लिया । साहनी गुस्से की जाती के कारण जोर जोर से हाथ नहीं लगा । फिर उसने जावेद पर प्रहार करने का इरादा त्याग और पीछे हट जाना बेहतर समझा । वो अपने पलंग पर बैठ गया । जावेद अभी भी उसी की तरफ देख रहा था । साहनी को नफरत के साथ उलझन भी हो रही थी । कल तक उसे जावेद की हरकतें बचकानी लग रही थी । उससे विश्वास नहीं हो रहा था की अब उसके मन पर इनका प्रभाव पडने लगा था । लंच टाइम तक दिन किसी तरह निकला जावे । दूसरे उसी तरह घूरता रहा नाश्ते के दौरान और सुबह असेंबली के वक्त उसे जरूर थोडी राहत मिली । नहीं लंच टाइम में नया बखेडा खडा होगी । जब प्लेट रखकर आगे बढा तो अचानक मोनो उसके पास पहुंचा । उसने कोई चीज साहनी के पेट से सजा दी और फुसफुसाकर बोला हैं चुपचाप बातों की तरफ वरना ऐसा काटूंगा आती दिखाई देने लगेंगे । साहनी ने महसूस किया कि उसके पेट पर मोनू ने कोई खतरनाक नौ केला हथियार रखा हुआ था । वो इस कदर चोट खाना नहीं चाहता था तो बाथरूम की तरफ चलने के लिए तैयार हो गया । वहाँ पर कॉमन बाथरूम था । साहनी को खुद पर यकीन था कि मोनू नहीं अगर उसके साथ कुछ गडबड करने की कोशिश की तो वो आसानी से उस पर काबू पा सकता था । हालांकि जे लाकर उसे पता चल ही गया था कि यहाँ पर लोग गुड बनाकर रहते हैं और ऐसा होने की पूरी संभावना थी कि मोनू के साथ कुछ और लोग भी हूँ । इसलिए वह सतर्कता के साथ उसके साथ चल रहा था । जैसा कि उसने सोचा था वैसा ही हुआ । मोनू उसे अपने साथ लेकर बाथरूम में पहुंचा । वहाँ पर दो लोग पहले से मौजूद थे । उन्होंने उसे एक बाथरूम के अंदर बंद कर दिया और फिर मोनू बोला, जज आपने कभी होता है । साहनी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया । वो उन्हें देखता रहा । उनके साथ एक हट्टा कट्टा विधान उसने सहानी के पेट में घूंसा मार दिया । साहनी टस से मस नहीं हुआ और बोला ऍम! इस तरफ भी खुजली हो रही है । करोगे । मोनो बोला जानेमानी क्यों पंगा ले रहा है मेरा देख आ गया तो उस पर मेरे से दोस्ती बनाकर रख । हम दोनों का फायदा होगा । ठीक है पर तुम करना क्या चाहते हो? साहनी ने अनजान बनते हुए पूछा । बदले में मोनू और बाकी दोनों कैदी भी कह कहा लगा बैठेंगे ऍम अब इतना भी बोला नबल मोनू हसते हुए बोला । साहनी ने अचानक ही मोनू के चेहरे पर वार करने के लिए हाथ घुमाया । हालांकि सहानी के पास ताकत जबरदस्त थी । पर्व मोनू जैसे मुजरिमों की तरह लडाई के दांवपेच नहीं जानता था । मोनू उसके बार से साफ बच गया और उसने अपने हाथ में बांधा हुआ चाकू साहनी की जांघ पर दे मारा है । साहने की चीज दूसरे आदमी के हाथ के नीचे दबकर रह गई । उसके बाद भी सहनी पूरा दमखम दिखाते हुए एक साथ तीनों पर हाथ पांव घुमाने लगा । मोनू ने चालाक लोमडी की तरह होते हुए इस बार चाकू साहनी के बाजू में देख पा रहा हूँ । ऍम बहुत ही कह रही है पूरे शरीर में छेद कर दूंगा । वो कमीनेपन के साथ बोला । तभी बाथरूम के दरवाजे पर जोरदार प्रहार हुआ और दरवाजा खुल गया । चिटकनी टूटकर एक तरफ गिर गयी । वो तीनों पलटे सामने जावेद खाया था । जावेद को देखकर मोनू तो कुछ खास नहीं डरा पर बाकी दोनों कैदियों ने जोरों से ठोक निकला । वो लोग जावेद के बैकग्राउंड से भलीभांति परिचित थे । ऊपर से जावेद का बाहर जैसा शरीर जिसे देखकर ही उनके रोंगटे खडे हो गए । मोनू साहस दिखाते हुए बोला हूँ तो ये गद्दार आया तेरी मदद करने के लिए दो ही रातों में ऐसा क्या जादू कर दिया तो उन्हें इस पर मेरी जान । तो हम तीनों अगर अभी चुप का बाहर निकल गए तो ये तुम्हारी खुशकिस्मती होगी । जावेद सर्द लहजे में बोला, बाद में तुम्हारी टूटी हड्डियों के लिए तुम खुद जिम्मेदार हो गए । जावेद के स्वर में छिपी हिंसा को भागते हुए मोनू के दोनों साथ ही उसे वहीं छोडकर तेजी से जावेद के बगल से होते हुए भाग निकले । मोनू स्तब्ध सा उन्हें जाते देखता रहा । अब उसके सामने जावेद खडा था और पीछे साहनी जो पहले ही दो बार खाने के कारण उसकी गर्दन दबाने के लिए आतुर था । हालात बदलते देख मोनू ने तुरंत रंग बदला और जावेद से खुशामद करते हुए बोला, बारिश जावे सर, गलती हो गई । वो तो जेल में हर कोई बोलता है इसलिए मुझे भी ऐसा बोलना पड गया । आप बहुत बढिया ऑफिसर हूँ । हर कोई जानता है आप पर झूठा इल्जाम । जावेद ने उसे चुप रहकर बाहर जाने का इशारा किया । मोनो तेजी से बाथरूम से बाहर निकल गया । साहनी पीछे से उसपर झपटा पर जावेद ने उसे रोक लिया । अब जावेद और साहनी वहाँ खडे थे । दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी । फिर साहनी कृतज्ञ भाव से बोला हूँ । जावेद कुछ बोला नहीं । उसने सहानी को घूरकर देखा और फिर बाहर निकल गया । इस बीच साहनी का वकील जब उससे मिलने जेल आया तो साहनी ने उसे बताया कि उसे यहाँ जान का खतरा है । इसलिए वह कोशिश करे कि उसे किसी दूसरी जेल में ट्रांसफर कर दिया जाए । वकील ने कहा कि वह जरूर कोशिश करेगा । इसके अलावा वह साहनी की कस्टडी में नब्बे दिन होने के बाद सुनवाई की पूरी जोर शोर से तैयारी कर रहा है । पर कहा नहीं जा सकता अगर पुलिस यह सीक्रेट सर्विस इन्वेस्टिगेशन के लिए और समय मांग ले । जज उनका ही पक्ष लेने वाला है । कितना वक्त और बढा सकते हैं । साहनी ने पूछा दो से तीन महीने वकील बोला तीन महीने और तीन और तीन यानी आधा साल साहनी के चेहरे का रंग फीका पड गया तो फिर कम से कम मुझे अकेले का सेल दिलवा दूँ । मुझे और भी सुविधाएं अंदर चाहिए जिस को पटाना है, पढा हूँ, पैसा देना है दे दो पर मैं अंदर किसी मुजरिम की तरह नहीं रह सकता । वकील ने सहमती में सिर हिलाया और बोला मैं पता करवाता हूँ और ये सारा अरेंजमेंट करता हूँ । मैंने पहले ही काफी कोशिश करके आपको सेल दिलवाया था जिसमें दो ही लोग हैं । बाकी आप ने तो देखा ही होगा । वहाँ कितने लोग एक साथ डोरमेट्री में रहते हैं । मुझे पता है सब पैसे का खेल है । मैंने देखा है अंदर तुम जल्दी जल्दी काम करो । सही बोला । वकील उसे आश्वासन देकर विदा हुआ । साहनी वापस वार्ड में पहुंचा । सभी कैदियों के सेल खुले हुए थे । शाम का वक्त था इसलिए सब टहल रहे थे । तभी एक आदमी उसके पास आया और उसके कान में कुछ बोलने लगा । वो बोल कर निकल गया । फिर साहनी ने पलट कर पीछे देखा । उधर अजय सिंह अजुका स्पेशल सेल था । साहनी इत्मीनान से टहलता हुआ अजय सिंह के सेल की तरफ पहुंचा । अजय ने उसे देखा तो उसने इशारे से उसे अंदर बुलाया । साहनी ने उसकी सेल में कदम रखा । उसने देखा अजय सिंह बढिया कुर्सी पर बैठा आराम से अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था । उसके कमरे में चौडा प्लंक, मोटा गद्दा और बढिया तकिया उपलब्ध था । एक तरफ कूलर भी रखा था । एक छोटी सी अलमारी भी थी, जिसमें शायद कपडे थे । टेलीविजन था । कमरे में कोने में ठंडा पानी और शराब की कुछ बोतलें भी रखी दिखाई दे रही थी । आओ बैठो । अजय बोला सहानी उसके सामने बैठ गया और बताइए है साहनी साहब ऐसा लग रहा जेल में यहाँ कैसा लग सकता है । हाँ, मैं समझ सकता हूँ । अज्जु बोला आप जैसा करोडपति इंसान जो हमेशा है तो आराम मिल रहा है । उसे तो यहाँ बहुत दिक्कत आएगी । साहनी ने सहमती में सिर हिलाया । आप किसी मॉडर के इस के सिलसिले में अंदर है ना? हाँ और मुझ पर झूठा इल्जाम है । ठीक हो जाता है । सुना है वो आपकी गर्लफ्रेंड थी । साहनी ने सहमती में सिर हिलाया । अरे कोई नहीं हो जाता है । कभी कभी गुस्से में जोश में गलत फैसले कर बैठते हैं । उसमें क्या है और मेरे साथ ऐसी कोई बात नहीं हुई थी । मेरे खिलाफ साजिश हुई है तो और भी अच्छा है तो आप जल्दी ही बाहर निकल जाओगे । कुछ सोचते हुए साहनी ने पूछा आपने मुझे कैसे याद किया? मैंने सुना है आपको? वो जो आपका सेल मेंटेना, गद्दार जावेद वो आपको परेशान कर रहे हैं । साथ में दोनों से भी आपकी तकरार हुई । हाँ, वह जबरदस्ती मेरे पीछे पडा है । कहते हुए स्वतः ही साहनी का हाथ उसके बाजू पर चला गया । जहाँ अभी भी जख्म था । उसने किसी को सेल में उस बारे में नहीं बताया था । वो तो मैं जानता हूँ वो साला किए हैं । अज्जु बोला बाल मुझे ये नहीं समझ आ रहा है जावेद से आपका क्या लेना देना है? सहानी कुछ पल रुका । वो सोच रहा था कि इसको क्या बताया जाए । मुझे भी नहीं पता । सही बोला न जाने मुझसे क्या उगलवाना चाहता है । उसे लगता है मैंने कोई साजिश की है उसके खिलाफ । जबकि ऐसा कुछ भी नहीं । पर वो मेरी बात सुनने को तैयार नहीं है तो ये बात है । अजय सिर हिलाते हुए बोला देखो साहनी साहब, आप जेल में नहीं हो, आपका केस मैंने सुना है । मर्डर केस है तो आप इतनी जल्दी बाहर भी नहीं निकलने वाले । इसलिए आपको यहाँ रहने की तैयारी कर लेनी चाहिए । आपको अपने तौर तरीके से यहाँ रहना है तभी आप कुछ रहोगे । ये बात तो आप भी समझ रहे हो गया कि दो कौडी के मुझे नाम की तरह से जेल में रहने से आपका मनोबल टूट जाएगा । आपके पास पैसा है लेकिन जेल में सुविधा हासिल करने के लिए पैसे के साथ जुगाड भी चाहिए होता है । अब आप देख लो मेरे पास पैसा नहीं है । फिर भी मुझे यहाँ सब सुविधाएं उपलब्ध है । क्या तो मेरी मदद कर सकते हो । मुझे खुशी होगी आपकी मदद करके और बदले में तो मैं मुझ से क्या हासिल होगा? जो मुस्कुराया बन गया । पूरे बिजनेस में है । सीधे मुद्दे की बात पर आते हैं । देखिए आप के पास पैसा है और हमें चुनाव के दौरान पैसों की जरूरत पडती है । जेल में जैसी सुविधाएं मुझे मैं आपको वैसी ही सुविधाएं मुहैया करवा दूंगा । बदले में बस आप मुझे चुनाव के दौरान कुछ मदद कर देना । मैं नहीं कह रहा कि मुझे करोडों रुपये चाहिए और जो भी आपको ठीक लगे मदद कर देना, आप रकम बोलो । साहनी ने कहा आजी ऐसी कोई रकम मेरे दिमाग में नहीं है । मैं तो बस नहीं हम अभी डिसाइड कर लेते हैं । बाद में मैं कोई बहस नहीं चाहता । ठीक है ऐसे ही सही मेरी कोई डिमांड नहीं । आप बोलो आप कितनी रकम दे सकते हो? पच्चीस लाख साहनी बोला ये तो बहुत कम है । ठीक है तीस लाख उससे ज्यादा मैं नहीं निकाल सकता । मुझे भी शेयर होल्डर्स को जवाब देना पडता है । चलिए ठीक है तो फिर हाथ बढाइए । अजय ने मुस्कुराते हुए हाथ आगे बढाया । साहनी ने कुछ सोचते हुए उस से हाथ मिला लिया । बस अब आप फिक्र करना छोड दो । उस उनकी तरफ से तो पूरी तरह से बेफिक्र रहना बल्कि मैं बोलूंगा । वहाँ आपसे माफी मांगने आएगा । ये जावे थोडा टेढी कि है पर इसको भी लाइन पर ले आएंगे । चिंता मत करिए ऐसे अफसरों को हम लोग उंगलियों पर ना चाहते हैं । अगर हो सके तो आप मेरा सेल जल्द से जल्द बदलवा दो । ठीक है आज ही बात करता हूँ । इन चार दिन के अंदर हो जाना चाहिए । तीन चार दिन साहनी के दिमाग में ये शब्द बिजली की तरह बरसे । उसे अपने सीने पर छिपकली के रेंगने के एहसास ने हिला कर रख दिया । शुक्रवार की शाम का वक्त था । सभी कैदी अपने अपने सेल के अंदर थे । जावेद और साहनी भी आपने सेल में थे । जावेद अभी अभी नमाज पढकर उठा था । साहनी कोई किताब पढ रहा था । उसके चेहरे से प्रतीत हो रहा था जैसे उसकी कोई बडी समस्या हल हो गई होगी । जावेद बोला आज बहुत खुश देख रहे हो । साहनी ने नजदीक किताब से उठाई और उसकी तरफ देखा क्या बात है आज तुम्हारा मन भर गया क्या मुझे छोडने से जो बोल पडे या फिर तो मैं समझ में आ गया है कि ये घुटने बोलने से कुछ नहीं होने वाला । जावेद उसे उसी प्रकार देखता रहा तो हम खुश देख रहे हो । कल तक तुम परेशान थे पर आज नहीं सहनी मुस्कुरा दिया लगता है तो मैं मुझ से छुटकारा पाने का कोई तरीका मिल गया है । बुद्धिमान होने का नाटक मत करो । सही बोला शायद तुम्हें कहीं से पता चल ही गया है और मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पडता । पता चले तो चलता रहेगा । क्या पता चल गया है । जावेद ने पूछा मुझे बोलने की जरूरत नहीं है । मत बोलो, मुझे जाना भी नहीं है । मुझे तो तुमसे मुद्दे की बात जाननी हैं और वह मैं तुमसे सेल से निकलने से पहले गलवा ही लूंगा । साहनी ने अचानक ही किताब एक तरफ की और गुस्से से बोला अगर तुम्हें जरा भी अकल होती तो अब तक समझ चुके होते हैं कि मेरा तुम से कोई लेना देना नहीं है । चिंता मत करो । दूध का दूध और पानी का पानी होने में अब ज्यादा वक्त नहीं है । साहनी उठकर सेल के दरवाजे पर आ गया और उसकी सलाह है पकडकर बाहर देखने लगा । दूसरे से और वॉट से बातों की आवाज आ रही थी । गार्ड चहलकदमी कर रहे थे । कुछ सोचते हुए एकदम से साहनी के चेहरे के भाव बदले । झल्लाहट की जगह चमक में अपना घर बना लिया । फिर वो अपनी वहाँ पर घूंसे मारने लगा । और फिर जांग पर भी जावेद उसकी हरकत को गौर से देखने लगा । देखते ही देखते साहनी ने खुद के ऊपर प्रहारों की बरसात कर दी । साथ में वो चिल्लाने लगा । शोर सुनकर गार्ड उस तरफ दौडते हुए आए । जब पहुंचे साहनी सलाखें पकडे घबराए स्वर में बोला हूँ, बच्चा हूँ मुझे जो शोर मचा रहे हो । गार्ड ने पूछा ये मुझे मारना चाहता हूँ । उसने जावेद की तरफ इशारा किया कौन जावे साहब, वो तो आराम से बैठे हैं । वो तुम्हारा साहब सानी रोष भरे स्वर में बोला । वो गार्ड जावेद को जानता था और उसके कौशल का कायल था । वो उस की बहुत इज्जत करता था । उसे पूरा यकीन था कि जावेद आतंकवादी नहीं है और झूठे इल्जाम में फंसा हुआ है । साफ साफ बोलो क्या हुआ वो सख्त स्वर में बोला हंगामा करने वालों को डंडे पडते हैं । यहाँ ये देखो सहनी अपनी बहुत दिखाते हुए बोला । और फिर उसने जांग दिखाई और बोला इसमें मेरे ऊपर हमला किया है । देखो जख्म हो गया तो निकल रहा है । तो मैं कब विश्वास होगा जब मेरी गर्दन काट देगा । गार्ड ने एक नजर जावेद की तरफ डाली जो अभी भी आराम से बैठ पर बैठा था । फिर उसने फौरन सेल का ताला खोला । अंदर आकर उसने साहनी को एक तरफ खडे होने का निर्देश देकर जावेद से कहा, साहब आप भी इधर आ जाइए । जावेद लापरवाही के साथ उठकर आ गया । किस बात पर मारपीट हुई? गार्ड ने पूछा ये मेरे पीछे पडा हुआ है । सही बोला किसी से पूछो कहाँ कहाँ चोट आई है तो मैं जावेद सहानुभूति दिखाते हुए बोला ये देखो । साहनी ने जोश में अपनी शर्ट उतार दी और अपनी वहाँ के जख्म को दिखाने लगा । वहाँ से खून निकल रहा था । ये तो कटेगा निशान हैं । बहार पिटाई में कटे का निशान कहाँ से बना? गार्ड ने पूछा मुझे नहीं पता इसमें कौन कौन से हथियार छुपाकर रखे । अपने पास आपसे करिए देखो तुम्हारी ये चाल काम आने वाली नहीं । जावेद बोला जेल का डॉक्टर जब ये जख्म चेक करेगा तो उसे पता चल जाएगा । ये ताजी जख्म नहीं हो सकता है । पुराने हो पर तुम ने मुझ पर हमला किया इसलिए मुझे छोटे आई हैं । मामले की गंभीरता को देखते हुए गार्ड के पास कोई और चारा नहीं था । उसने जेलर को इतना करने का फैसला लिया । बाहर निकलकर उसने दूसरे गार्ड को बुलाया और वहाँ रुकने को कहा और खुद जेलर को फोन करने चला गया । जेलर ने फोन पर निर्देश दिया कि सहानी को रात के लिए दूसरे किसी सेल में रख दिया जाए । सुबह वह खुद इस मामले को देखेगा । सेल से निकलते वक्त साहनी ने जावेद की तरफ विजयी मुस्कान के साथ देखा । जावेद उसे जाते देखता रहा । दूसरे दिन सुबह सुबह जेलर जावेद के सेल में पहुंचा । जावेद उसके लिए तैयार था । जावेद ये क्या सुन रहा है? मैंने आपके और सीक्रेट सर्विस के चीफ के कहने पर इतना तो कर दिया कि आपको साहनी के सिल में पहुंचा दिया और मैंने पहले ही कहा था कि जेल में कुछ भी गडबड नहीं की जा सकती है । मेरी नौकरी का सवाल है आप चिंता मत करिए । वो नाटक करता है । मैं उस पर हाथ नहीं उठाया बल्कि दो दिन पहले मोनू के गैंग ने उस पर हमला किया था । मैंने तो उसे उनसे बचाया था । फिर वो क्यों वहाँ पर झूठा इल्जाम लगा रहा है । मैं उसके पीछे जो पढा हूँ आपको बताई है मेरा उसके साथ आपको पता ही है । मेरा उसके साथ रहने का एक ही उद्देश्य उससे इन्फॉर्मेशन निकालना । उसमें कुछ सफलता मिली नहीं, पर कामयाबी मिलने ही वाली है । आप उसको वापस फिल्में भेज दीजिए । एक दो दिन में कम हो जाएगा । जेलर ने नकारात्मक ढंग से सिर हिलाया और बोला नहीं अब ये संभव नहीं । उसने बडा जुगाड लगाया है । जेल सुपरिटेंडेंट उसे अकेला सिल दिलवाने वाला है तो जावेद ना खुश होते हुए बोला हाँ मेरे खयाल से आज शाम तक लिखित आदेश भी आ जाएगा । जावेद सोच में पड गया हूँ, अब मैं चलता हूँ । जेलर बाहर निकलते हुए बोला अभी तक उसने कोई फॉर्मल कंप्लेंट नहीं की है आप के खिलाफ । पर अगर ऐसा कुछ हुआ तो एक्शन लेना मेरे लिए भी मजबूरी बन जाएगी । मैं समझ सकता हूँ जावे बोला जेलर चला गया । जावेद का प्लान बेकार हो गया था । टॉर्चर अपने चरम सीमा पर पहुंचने ही वाला था । पर इस बदलाव के कारण पूरी स्कीम फेल हो गई थी । अब उसे नए सिरे से कुछ सोचना था ।

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क़त्ल और देशद्रोह के इलज़ाम में सीक्रेट सर्विस का देशभक्त जासूस जावेद खान जेल की सलाखों के पीछे पहुँचता है. इस गुत्थी को सुलझाने निकले अमर और जॉन के सामने आती है एक ऐसी साजिश जो भारत के नक़्शे को बदलने की क्षमता रखती है. क्या थी वो साजिश? और कौन था उसका...मास्टरमाइंड? writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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