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PART 5

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एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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भाजपा आएंगे । तेरी बुरी हालत हो रही थी । किसी भी शरण जगन की कॉलबेल का इंतजार कर रहा था । मुझे कल्पना करते हुए भी डर लग रहा था कि अगर जगन को मालूम हो गया कि ताली सचमुच गायब हो गई और बहुत मुमकिन है कि उसे मान सिंह का भाई ले गया तो मेरी क्या कट बनाएगा । पुलिस में मैं जा नहीं सकता और जगह से मुकाबला कर नहीं सकता था । दिल जैसे उछलकर अपनी जगह से बाहर निकलकर जाना चाहता था । पसीने से मेरे सारे कपडे भी गए । अब मुझे सिर्फ एक उपाय सोच रहा था, वही है । जगह के आने से पहले ही कहीं भाग चलूँ । लेकिन पुष्पा गो मेरी योजना पसंद आए । उसने कहा अब नहीं घर से बाहर चाहे और भी कुछ बच्चों की डर से मम्मी का क्या होगा? मेरे स्कूल से उसे भी साथ ले नहीं या किसी पडोसी से कह देते हैं कि वह दो चार दिनों से अपनी फॅमिली और हम जाएंगे कहाँ? जो बदमाश तुम्हारा यहाँ तक पता लगा सकते हैं तो क्या कहीं और नहीं बोलेंगे तो मैं हम किसी और शहर में चलेंगे नहीं चलती हूँ । जाना चाहो तो चलने चाहूँ लेकिन मुझे ना पाकर है तो मैं परेशान करेंगे तब कुछ भी हो मैं अपना देखी होंगी तो मैं जाना हो । चले जाओ आखिर हम और कर भी क्या सकते हैं वो तुम बेकारी खबरे आ रहे हो । गुंडे ही तो है तो क्या कर लेंगे? दिनदहाडे क्या किसी का कत्ल कर देंगे? उनके लिए अभी कोई बडी बात नहीं । फिर उनके हाथ में पैसा और ताकत भी है । चन्दानी एक विदेशी कंपनी का हिंदुस्तानी चीज है । हम उसका मुकाबला नहीं कर सकते तो बेकार ही पहुंचाई को डाॅक्टर बना रहे हो तो तुम्हारे पास से डाली है जिसके लिए चंदानी तो मैं सात अंकों की रकम देने का तैयार है । इसका मतलब है कि ये कोई ऐसी वैसी मामूली ताली नहीं है । अब जब तक तो मुझे ताली नहीं देते हैं तब तो फिर तुम्हारा कुछ भी नहीं निकालेंगे तो लेकिन श्रीमती जी ताली है, कहाँ हो तो आपको इस तरह कह रही है जैसे ताली आपके पर नहीं मौजूद हो । फॅमिली पर इसमें नहीं है और मैं चाहती हूँ कि मैं कहा है लेकिन डाली हो गई है । वो तो सिर्फ हमारे तो जानते हैं उन्हें तो इस बात का पता नहीं तो उन्हें बताओ कीमत की तरीक हो गई है । पुष्पा की ओर मैं आशा जैसे देखता रह गया । हमारी शादी को आठ साल हो चुके हो । मैं पढने के लिए अपने पॉलिटिक्स नहीं जाता था तो उसी बस में पुष्पा भी कॉलेज जाती थी । एक दिन मुझे अपनी ओर देखता पाकर वह बहुत धीरे से मुस्कुरा पडी थी । ये हमारा पहला परिचय था । उसके बाद जब हमारा परिचय प्रेम में बदल गया और हम ने शादी कर ली, तब से आज तक में यही समझता रहा कि हमारी अपनी जिंदगी के बीच मेरा ये निर्णय अंतिम होता है, भाषा है, बोलती है पर अच्छे पति की तरह । मेरा निर्णय वही होता है जो पूछना चाहती है । मैंने ये कल्पना भी नहीं की थी कि वहाँ इतनी व्यावहारिक होगी । इस संकट में उसने मुझे सुझाव दिया था । उस से बढकर और कोई हो ही नहीं सकता था । काॅल की आवाज कमरे में पहुंच गयी । जगह आ गया था । मेरा कलेजा जैसे भूमि को आ गया । हम अपनी पूरी योजना पर सोच भी नहीं सके और वे आ धमका । मुझ में खडे होने की भी हिम्मत नहीं थी कि उठकर दरवाजा खोलो । लेकिन पुष्पा के चेहरे पर जैसे भय्या घबराहट का कोई चेन्नई भी नहीं दिखाई दे रहा था । उसने कुछ तो सिर्फ कर्म अच्छे कहा तो अहमद कहना कि ताली नहीं है ताकि बात सिर्फ मैं करूंगी । रेडमी नान से उठकर दरवाजे पर कहीं और दरवाजा खोल दिया । बाहर न्यायिक बत्तमीजी से सिगरेट बेटा हुआ जगह खडा था । वो पुष्पाणि अनजान सी बनकर पूछा तो मैंने आप और कोई जवाब देने के बजाय पुष्पा के ऊपर ही सिगरेट का धुआं छोडते । हुए जगह बेटा उसमें लगा मेरा खून भीतर से कॉल उठा । कहना चाहा कि एक और अच्छे कैसे व्यवहार करना चाहिए इसकी भी तमीज नहीं है । तो मैं पर मेरे खून में मोबाइल जवाया था जो ऊपर नहीं प्रकट हुआ । मैं आया नहीं हूँ । बस एक गुंडे के साथ हाथापाई न करनी पडे । यही सोच कर चल रहा है । लेकिन पुष्पा को जगह से जैसे कोई बहन नहीं लगा तो उसने अपना हाथ बढाकर जगन का रास्ता रोकते हुए उसे डाटा तो दोनों जी पूछती हूँ तो पराठे भी नहीं और चोरों की तरह सीधा घर में घुसे चले आ रहे हो तो मैं ये भी तमिल नहीं की औरतों के साथ कैसे पेश आना चाहिए । बेशरम कहेंगे पुष्पा की आवाज में इतनी खडा थीं कि कलेजा दहल उठा । सोचने लगा कि कहीं जगह नाराज होकर उस पर वार्ना कर बैठे । तो क्या मैं तो जैसे सीधा हो गया और उसने कहा सारी बैन ही में जगह हो । बाबू जी ने आपको मेरे बारे में बता दिया होगा । आप मेरे बाबूजी पुष्पाणि मेरी ओर इशारा कर दिया और खुद भी आकर हमारे पास ये कुर्सी पर बैठ गई । लेकिन देवर उसके अभी तक खडे हुए थे । जाॅब जल्दी मेरे हवाले कर दीजिए । देर ना कीजिए उससे साफ झूठ भी नहीं बोलते । बंदा कहीं जगह मेरा छूट था, अपना ले तो इसलिए मैंने ये भी पुष्पा के ऊपर ही छोड दिया । जगन को जवाब देने की बजाय मैंने पुष्प ऐसे पूछा क्यों है हमारे पास? हाँ है । पुष्पाणि कडे स्वर में छोटा सा उत्तर दिया । जघन्य कुछ परेशानी में बढकर मेरी ओर से ध्यान हटाकर पुष्पा की ओर देखा । फिर कहा बेहद ताली मुझे बाबू साहब से लेनी है । शराफत से बातचीत करने में जगन को काफी मेहनत करनी पड रही थी । पुष्पा ने जैसे पहले रुखाई से कम जानती हूँ तो फिर दे दीजिए । मुझे देर हो रही है । ताली नहीं मिलेगी तो मैं पुष्पा ने कहा जगह जैसे आसमान से गिरा मेरा कलेजा कहाँ रहा था? अगर जगन को जरा सा भी शक हो गया कि हम नाटक कर रहे हैं तो हमारी खैर नहीं और गुस्सा उसे आ रहा था । ये मैं उसका चेहरा देखकर बता सकता था । उसने कडक कर पूछा क्यों डाले मुझे क्यों नहीं मिलेगी? इस तरह नहीं मिलेगी । पुष्पा ने भी उसी तरह का एक जगह बैठे ही बैठे जैसे उछल पडा तो मैं पूछता हूँ क्या मजाक है ऐसे नहीं मिलेगी तक कैसे मिलेगी? चंदानी ने ताली के बदले कुछ फायदा भी किया था । रुपये का रुपये ताली पाकर हम भेज देंगे । इसके पहले नहीं जघन्य नाराज होकर कहा । पुष्पा ने फिर अपनी कठोर आवाज में कहा हमे घास चराने चले हूँ और यह लोग ताली सिर्फ सात अंकों की रकम से नहीं मिलेगी । चंदानी से जाकर कह देना । जगह मेरी ओर मुखातिब हुआ । उसके हाॅल हो रही थी जी कौन है ये हरामजादी तो ऐसे बीच में क्यों ले आए और ताली तुम्हें हमें देनी थी इसे नहीं । इससे पहले कि मैं कुछ जवाब दे पाता । पुष्पा की सैंडल तलाक है । जगह के बारे गाल पर लगे और पलक झपकते रह जगह के सिर पर सवार हो गई । क्यूट को देश कमीने मेरे ही घर में अगर मुझे करता है बोलता हूँ कि पडोसियों को कि तू मेरे घर में घुसकर मेरे साथ बदतमीजी कर रहा है । और जितनी देर पुष्पा ये कहती रही उतनी देर में तलाक और पांच सात फॅमिली जगन के सिर पर और गानों पर पढ रही उसके झाडू उधार मोर्चों की सारी रहना चाहती रही हूँ । अपना लोहे वाला दास थाना भी उसे याद नहीं आया । पहले हमला कर देना बचाव का सबसे अच्छा तरीका है । मेरा दिल बल्लियों जैसा उठा रहा था । डर यही था कि बदला लेने के लिए कहीं रह भी कुछ करना बैठे लेकिन लगता था हल्ला गुल्ला बचाने से वे भी उतना ही बचना चाहता था कितना की मैं सिर्फ धमकियों से कम निकालना चाहता था । पडोसियों के आ जाने से एक औरत के साथ बेअदबी के जुर्म में पडने का डर था । दूसरे एक विदेशी फॉर्म के हिंदुस्तानी चीज जिसने उसे भेजा था, उसकी इज्जत का भी कुछ तो खयाल रखना ही था । दो हल्ला मचने पर चंदानी का नाम आता ही जगन जिस कार में आया था उसका पता लगाया जाता हूँ और तब चंदानी शायद जगन की हरकते पसंद करता हूँ । तो उसने मुझे ये भी बताया था कि जगह के अपराधियों के कई सबूत उसके कब्जे में हो सकता है, चंदा नहीं । बाद में मेरी भी खबर लेता और जगन की हरकत वह कतई पसंद करता है । जगन की है कमजोरी भागकर मेरी भी हिम्मत हुई । मैं भी उठकर उसके पास पहुंच गया और ऍम आया तो अभी थोडी देर पहले उसने मुझे अपने लोहे के दस्ताने वाले हाथ से जो खून सा लगाया था उस की याद दिलाते हुए मैंने कहा थ्रीडी पर घोषणा क्या होता है? पता लगा जगह छोडकर खडा हो गया । उसका चेहरा बिगड गया था । होठ कट गए थे मेरी और आंखे तरेरता हुआ बोला कैसा होता है ये मैं बाद में बताऊंगा पर अभी तो ताली दे दो । मैं खोल जाऊंगा इस रकम में हम ताली नहीं देंगे । जाकर कह तो चंदा नहीं से पुष्पा दर्जी निकल जाओ यहाँ से मैं तुम्हारी शकल भी नहीं देखना चाहती हूँ । कितने रुपए चाहते हो तुम लोग कम से कम पचास लाख उससे कम में हम ताली नहीं देंगे । और चंदानी से कह दो बात करना चाहते हैं तो खुदा यहाँ या किसी शरीफ आदमी को भेजे हैं । तुम आए तो नहीं तुम्हारी पुष्पा नहीं । कडी आवाज में कहा । जगह देर की तरह कमरे से बाहर चला गया । फिर हमें उसकी कार्य स्टार्ट होने की आवाज सुनाई पडेगी । तब खिलखिलाकर हंस पडे । मैंने कसकर पुष्पा को बाहों में भर लिया । वहीं पुष्पा जो भी जगह के सामने देख कठोर हो गई थी मेरे पास आकर मौसी को मिल हो गई । ठक्कर उसने मेरे कंधे परसेंट टिका दिया और हम कुछ देर इसी तरह बैठे रहे । इस परेशानी में पुष्कर की निकटता से बहुत समझना मिल रही थी लेकिन समस्या अभी खत्म नहीं हुई थी । जगन के चले जाने से एक व्यक्ति खतरा टलने में हम सफल रहे और इसका मतलब ये नहीं था कि खतरा पूरी तरह टल गया । इसके विपरीत ताली के लिए अपनी कीमत मांग कर अपनी तरह से ये मान लिया था कि उसके पीछे जो भी रहता था हम उसे जानते थे और उसकी साजिशों में शामिल थे । इस तरह खतरा कम होने के बजाय बढ गया । इसलिए कुछ खास मसलों पर सोचना जरूरी हो गया था । सबसे पहली बात तो ये थी कि ताली के लिए हमने जो भी कीमत मांगी थी उसे अगर चंदानी मान लेता तो हम क्या करेंगे? उसके अलावा अन्य भी बातें थी हाली के लिए हमारी मांगी कीमत न देकर चंदानी ने कोई और राष्ट्र अपना है तो हम क्या करेंगे? जगन के साथ जो कुछ हुआ उससे नाराज होकर उन लोगों ने बदले के लिए कोई कदम उठाया तो क्या करेंगे और जैसा की हमें सकता हूँ अगर ताली मान सिंह का भाई ना ले गया हूँ और वह उसे लेने के लिए आए तो उसे क्या जवाब देंगे । लेकिन हमारे लिए कुछ भी सोच कान आसान नहीं था क्योंकि सच्चाई थीं कि हमें कुछ भी पता नहीं था । हमें ये नहीं पता था कि ताली मान सिंह का भाई ले गया है । नहीं हम ये भी नहीं जानते थे कि ताली है कहाँ? पर हमें इस बात का भी पता नहीं था कि चंदानी और जगह आगे क्या कदम उठाएंगे । तो हम ये भी नहीं जानते की मान सिंह का भाई कैसा है और अगर डाली रहे अब तक नहीं ले गया तो खाली ना पाकर है । हमारे साथ कैसा सलूक करेगा । दुश्मन का पता हूँ और आप ये जानते हो कि वह किसी खास मौके पर क्या कदम उठाएगा तो उसके मुकाबले की योजनाएं बनाना आसान होता है । लेकिन जब दुश्मन का ठीक ठाक पता ना हो तो वहाँ एक बिना चेहरे वाला ब्रिज बना रहता है । आप कुछ भी नहीं कर सकते । यही हमारे साथ भी था । हम सोच नहीं पा रही थी कि क्या करें वो सच तो यह है कि हमारी हालत भी बत्तर थी । इस दुश्मन के वार का इंतजार करते हुए हाथ पर हाथ धरे बैठे भी नहीं रह सकते थे । विचारों में डूबे हुए मैंने खिडकी से बाहर देखा जाए का देना हो रहा था और सांस का अंधेरा घिरने लगा था वो हालांकि अभी साढे चार से ज्यादा नहीं बच्चे थे । अम्मी के आने का वक्त हो गया है । नर्सरी की गाडी आती होगी चलो उसके लिए कुछ दूध वगैरह गरम कर दूँ तुम्हारे लिए अधिक चाहेगा बनाना उनको पुष्पा उठकर खडी हुई और मुझे अपनी समस्याओं में उलझा हुआ खेला छोडकर रसोई किधर चली गई ।

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एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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