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रहस्मय टापू - 31

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प्रस्तुत उपन्यास "रहस्यमय टापू" अंग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक रॉबर्ट लुईस स्टीवेंसन के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यास "ट्रेजर आइलैंड" का हिंदी रूपांतरण है। उपन्यास का नायक जिम जिस प्रकार समुद्र के बीच खजाने की खोज में निकलता है वो इसे और रोमांचक बना देता है। कहानी में जिम एक निर्जन टापू पर खूंखार डाकुओं का सामना करता है और कदम कदम पर कई कठिनाइयों का सामना भी करता है। इस बालक के कारनामों को सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सुनें रमेश नैयर द्वारा रूपांतरित ये पुस्तक हिंदी में आपके अपने Kuku FM पर। सुनें जो मन चाहे।
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सुबह मेरी नींद भी किले के भीतर सोये हुए अन्य सभी लोगों के साथ ही खुली । मैंने झांककर बाहर की ओर देखा । जंगल की ओर से किले की ओर आ रहे एक व्यक्ति की आवाज में हम सबको जगह दिया था तो वो व्यक्ति कह रहा था किले में सोच हुए लोगों उठो, मैं डॉक्टर हूँ । ये आवाज डॉक्टर की ही नहीं आवाज सुनकर मुझे प्रसन्नता हुई । फिर जब मुझे ख्याल आया कि किस प्रकार मैं डॉक्टर को बताए बिना ही चुप चाप खेले से खिसक गया था । मेरी प्रसन्नता गायब हो गई । फिर में सोचने लगा कि इन लोगों के साथ मुझे यहाँ किले में दिक्कत डॉक्टर के मन पर क्या पूछ रही हूँ । लंबू चांदीराम ने डॉक्टर का स्वागत करते हुए कहा आइए डॉक्टर साहब, आप जब भी आते हैं किसी फरिश्ते की तरह खुशबु का बच्चों का साथ लेकर आते हैं । देखिए ना हूँ आपके आने के साथ मौसम के चुनाव सुहाना हो गया है । कितनी प्यारी हवाएं चल रही है । चिडिया चाहते आ रही है । शब्दों का जाल बोलते हुए चांदीराम ने हमने एक साथ ही वो आदेश दिया कि डॉक्टर साहब को आराम से बिठाने की व्यवस्था करेंगे । फिर वह कहने लगा आज आपको यहाँ देख कर बहुत बडा चर्च हुआ । आपका मरीज तो बहुत अच्छा है । आपको हमारे यहाँ एक धन्ना मेहमान देखकर बडी खुशी हो गई । किसी की नजर नहीं लगेगा । प्रसाद आज तो आप भी बडे जाॅब चला रहे हैं । डॉक्टर अभी किले के द्वार के भीतर कदम रखता हूँ । चांदीराम के नमस्कार के जवाब देते हुए उसने कहा बनने मेहमान से तुम्हारा मतलब जिम से तो नहीं है, यहाँ जीत नहीं है । चांदीराम ने छोटा सा जवाब दिया । डॉक्टर को झटका सा लगा । वह जहां था वहीं खडा रह गया । कुछ देर तक उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला हूँ । फिर अपने आप को संभालते हुए डॉक्टर ने कहा ठीक है चलो तुम्हारे बीमार साथियों को देखो । एक्शन बर्बाद डॉक्टर जिले के भीतर दाखिल हो गया हूँ । मुझ पर एक फॅार डालकर डॉक्टर मरीजों को देखने के लिए आगे बढ गया । मुझे बात बहुत घट की थी कि डॉक्टर मुझे देखकर हल्का सा मुस्काया तक नहीं है । डॉक्टर मरीजों की जांच कर रहा हूँ । मुझे लगा कि डॉक्टर किस तरह अपनी जांच दिल्ली पर लेकर यहाँ आता है । यहाँ हर पल उसके सिर पर खतरे की तलवार लटकी रहती है तो फिर भी डॉक्टर के पेशे के दायित्व से बंधा हुआ वो यहाँ चला आता है । डॉक्टर का व्यवहार उन दक्कित मरीजों के प्रति भी उतना ही सहज था जितना कि सामान्य रुपयों के प्रति रहता है । डॉक्टर तीस व्यवहार के कारण ही वो डाकू भी उसके प्रति सम्मान का भाव रखते हैं । वे सब उसे अपना ही डॉक्टर समझते हैं । सब मरीजों का परीक्षण करने और उन्होंने दवाईयाँ देने के बाद डॉक्टरों में था आज का काम खत्म हुआ हूँ । अब मैं उस लडके से बात करना चाहता हूँ । उनमें से एक व्यक्ति जिसको अभी भी दवा पिलाई गई थी, एकदम गुस्से के साथ मिलता और जीते वो वाला नहीं ये नहीं हो सकता हूँ । देखता हूँ कौन उस छोकरे से डॉक्टर की मुलाकात कराता है । चांदीराम गुस्से में जिला ऍम । इसके बाद चांदीराम मेरी और मूत्र कहने लगा ऍम मैं तो वो एक अच्छा लडका मानता हूँ । मुझे विश्वास है कि तो मुझे धोखा नहीं हो गए तो मुझे बच्चन दो यहाँ से भागने की कोशिश नहीं करोगे । मैंने चांदीराम को वचन दे दिया की मैं भागने की कोशिश नहीं करूंगा । चांदीराम ने डॉक्टर से कहा आपकी लेके चारदीवारी के बाहर पहुंची है तो थोडी देर में जिनको लेकर मैं वहाँ आ जाऊंगा तब आप से बात कर सकते हैं । डॉक्टर के रवाना होने के कुछ मिनट बात चांदीराम और मैं बाहर निकल पडेंगे । चांदीराम मेरे कंधे पर हाथ रखकर चल रहा हूँ । वो मुझसे कहने लगा धीरे जरा धीरे धीरे चलो । यदि हम हर बढाते हुए तेजी के साथ चले तो मुझे इस बात का खतरा है कि वह हम पर टूट पडेंगे । जैसे ही मैं डॉक्टर के पास पहुँच गया यहाँ मैं एक दूसरे की बात सुन सकें । चांदीराम रुक गया और डॉक्टर से कहने लगा डॉक्टर आप इस बात का अवश्य ध्यान रखें । इस लडके का जीवन मैंने बचाया है । इससे बचाकर मैंने अपनी जिंदगी जो मैं डाली है, आपका सब कुछ बता देगा । मैं आप से उम्मीद करूंगा कि आप मेरे साथ पूरा न्याय करेंगे । मैं जिन परिस्थितियों में फस गया हूँ उनमें मैं आप सत्य की उम्मीद करता हूँ । चांदीराम इस समय बिलकुल बदला हुआ इंसान लग रहा हूँ । अपने आदमियों से दूर यहां पहुंचने के साथ बहुत ही विनम्र हो गया था । ऐसे जतारा था जैसे हम लोगों पर उसका बहुत अधिक भरोसा है और उसका जीवन अब भी हमारे हाथों में है । डॉक्टर ने उससे पूछा, क्यों ध्यान दे रहा हूँ, तुम भी तो नहीं हो, डॉक्टर में काया नहीं हूँ । लेकिन मुझे आशंका आवश्यक है कि किसी न किसी दिन फांसी का फंदा मेरी गर्दन को जकड सकता है । आप एक नहीं नुकसान हैं । मुझे उम्मीद है की आप इस बात को नहीं बोलेंगे कि मैंने जिम की जिंदगी बचाई है । अब मैं आपको जिनको यहाँ के लिए छोड कर जा रहा हूँ । चांदीराम ने की व्यवस्था के साथ कहा वो एक और हटकर एक जगह जाकर बैठ गया और बैठे बैठे फोर्ड गोल करके सीटी बजा रहे लगा । डॉक्टर ने मुझसे कहा तो जिम तुम अब यहाँ पहुंच गए । तुम जानते हो तो आप किस हालत में हूँ । जैसा तुमने बोला था वैसा ही काटना पडेगा । मैं तो मैं दोस्तो नहीं देता हूँ और इतना आवश्य कहूंगा की जब कप्तान सोमान सस्ते तो तुम वहाँ से नहीं है । जब भी बार थे तो वहां से खिसक ली है । ये कायर का काम है । डॉक्टर की बात सुनकर मैं होने लगा । मैंने कहा हूँ तो हूँ जो कुछ हुआ उसके लिए मैं स्वयं दोषी । मुझे इसका भारी पश्चाताप बिल्लु मुझे मार डालना चाहते थे लेकिन चांदीराम ने मेरी जान बचाई वो पूरी तरह मेरा साथ हूँ । मरने से मुझे कोई भय नहीं पर डर मुझे इस बात का है कि वो लोग मुझे ये ऍम यदि रूम जी यंत्रणा देने । लेकिन तो मेरी बातों और मेरे आंसू से डॉक्टर का मंत्र सीट क्या कहने लगा ये सब मैं नहीं देखा । चलो उछल कर बाहर निकलो और मेरे साथ बचकर भाग निकलो । यहाँ मैंने कहा नहीं डॉक्टर साहब, मैं चांदीराम को वचन दे चुका हूँ । मैं जानता हूँ कि इस स्थिति में यदि आप से हम भी होते तो ऐसा नहीं करते । वचन का मूल्य आप जानते हैं । आप ही नहीं जमींदार साहब, कप्तान सोमनाथ भी ऐसा नहीं करते हैं । मैं भी आप लोगों में से ही हूँ । मैं भी ऐसा नहीं करूंगा । चांदीराम ने मेरी बात पर विश्वास किया है । मैंने उसे वचन दिया है । वो मुझे यंत्रणा देते तो संभव है उन्हें बता दूँ की जहाज कहाँ पर है । मैंने जहाज पर कब्जा कर लिया । वो उत्तर की ओर सक्रिय सी नदी के पास है । उत्तर में जहाँ पानी कुछ उतना होना शुरू होता है, वहाँ पर टापू की ओर जाने वाली नदी के किनारे डॉक्टर ने विश्व के साथ खाना जहाज का सचमुच जहाज अभी तक सुरक्षित है । मैंने जल्दी जल्दी डॉक्टर को सारी घटना बता दी है तो चुपचाप मेरी बात सुन पा रहा हूँ । मेरी बात समाप्त होने पर डॉक्टर ने कहा, जिन हर कदम पर तुमने हमारा जीवन बचाया है क्या तुम समझती हूँ कि हम इस तरह तो मैं मुसीबत में छोड देंगे । खजाने का नक्शा तुम को मिला था । इन लोगों के षड्यंत्र का पता तुमको चला था । आप ऊपर बेनीमाधव की तलाश तुम ने की थी । बेनीमाधव जैसा उपयोगी कोई व्यक्ति इस यात्रा में हमें अब तक नहीं मिला है । इस बीच चांदीराम को आवाज देकर डॉक्टर ने अपने पास बुलाकर का जानकीराम । मैं तो में सलाह देना चाहता हूँ कि खजाने की तलाश में बहुत ज्यादा बडी मत करूँ । चांदीराम ने जवाब दिया सर खजाने की तलाश के लिए तो मुझे हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि एक हजार हासिल कर के ही तो मैं अपनी और इस लडके की जान बचा सकता हूँ और डॉक्टर साहब आप भी इतनी मुसीबत झेलकर उसका जाने के लिए ही तो यहाँ आए हैं । सारा जोखिम आप भी तो इसीलिए उठा रहे हैं । आपने मुझे जाने का लगता किस लिए दिया था । मैं तो आपकी हर बात बराबर मूंदकर विश्वास कर रहा हूँ । बतायेंगे आप इसलिए कह रहे कि खजाने की तलाश में ज्यादा हडबडी ना करो । डॉक्टर ने चांदीराम के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, इसमें ना तो कोई रहस्य है और नहीं कोई लुका । छुपी की बात मैं तो मैं सब कुछ बता दूंगा । मैं तो मैं विश्वास भी दिला सकता हूँ । तो मैं बहुत कुछ हासिल होगा लेकिन उसी हालत में जब कि तुम और मैं इस टापू से सही सलामत बचकर निकल जाए । मैं तो मैं विश्वास दिलाता हूँ तुमको कानून की कडी सजा से बचाने के लिए भी मैं हरसंभव प्रयास करूंगा । चांदीराम का चेहरा जमा उठा । वह कहने लगा मुझे आप पर पूरा भरोसा है । आपको मैं सबसे बडा है चिंतन मानता हूँ । डॉक्टर ने कहा इसके साथ ही मैं तुमको और सलाह देना चाहता हूँ कि इस लडके को आपने बहुत करीब रखना और चंपी तो मैं मदद की जरूरत पडे । हमको खबर करना । तुम्हें तत्काल सहायता पहुंचाई जाएगी । अच्छा जी पिता डॉक्टर ने मुझसे हाथ मिलाया, चांदीराम को सिर झुकाकर अभिवादन किया और तेज कदमों से चलते हुए जनरल की और बढ गए ।

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प्रस्तुत उपन्यास "रहस्यमय टापू" अंग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक रॉबर्ट लुईस स्टीवेंसन के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यास "ट्रेजर आइलैंड" का हिंदी रूपांतरण है। उपन्यास का नायक जिम जिस प्रकार समुद्र के बीच खजाने की खोज में निकलता है वो इसे और रोमांचक बना देता है। कहानी में जिम एक निर्जन टापू पर खूंखार डाकुओं का सामना करता है और कदम कदम पर कई कठिनाइयों का सामना भी करता है। इस बालक के कारनामों को सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सुनें रमेश नैयर द्वारा रूपांतरित ये पुस्तक हिंदी में आपके अपने Kuku FM पर। सुनें जो मन चाहे।
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