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PART 3 (B) in Hindi

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AuthorAditya Bajpai
एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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और मिस्टर संजय चन्दानी ने बैंक से का तो मुझे आप से नहीं धकेला । पडताल तो आपके पास है और निहायत शराफत के साथ साथ आप उसे अपने साथ लाए भी नहीं है । मिस्टर संजय आप समझते हैं कि मैं ना बेस को हूँ कि आपकी यह बात माल लूंगा । उसका स्वारी का एक बहुत कठोर हो गया । मैं उसे ये नहीं बता सकता था की मैं ताली क्यों भूल गया । जिंदगी की छोटी छोटी आम बातों पर कभी कोई यकीन नहीं करता । अत्यंत सहज मानवीय बातों के पीछे भी लोग नोटिस देखते हैं । कपडे बदलने के कारण मैं खाली अपने साथ नहीं ला सका । ये मैं उसे समझा नहीं सकता था । उसकी बात पर मैंने कहा आप मेरा विश्वास करें या ना करें लेकिन मुझे ताली में कोई दिलचस्पी नहीं है ना मैं उसे अपने पास रखना चाहता हूँ, रखना नहीं चाहते हैं । चन्दानी का चेहरा चिपके हुये गुब्बारे की तरह हो गया । उसने जो कुछ भी समझाओ उसे ये आशा नहीं थी कि मैं ताली अपने पास नहीं रखना चाहता था । शायद समझता था की मुझे ताले का रहस्य मालूम है और उसके लिए मैं अपनी बातें रखूंगा । सौदेबाजी करूंगा । जो जैसा होता है वैसा ही दूसरे को भी समझता है जितना मक्का और कहीं हाँ, बैक होता तो नहीं मुझे भी समझ रहा था लेकिन जिसका कोई स्वार्थ ना हूँ उसके आगे बडे बडे मक्कार भी मार खा जाते हैं । जैसे इस वक्त चंदा नहीं खा गया था । हत्प्रभ होकर उसने कहा, आप खाली नहीं रखना चाहते हैं तो कल आपने जगन को क्यों नहीं देती? कल मुझे उस वक्त पता नहीं था कि ताली मेरे पास है नहीं तो दे देता हूँ । मुझे बाद में पता चला फिर आज क्यों नहीं लाया । आज मैं घर में रखकर बोल दिया उसे सच उसमे रूप से कहा आपका मतलब है आप डाली मुझे दे देंगे । अगर मैं अपना आदमी आपके साथ भेज दूँ उसे दे रही है । चन्दानी मेरे हाथ में खेल रहा था । मैंने अपनी ओर से इसके लिए प्रयास नहीं किया । वो अपनी ही मक्कारी का शिकार हो गया था । मैंने कहा चन्दानी साहब, मैं उसे अपने पास नहीं रखना चाहता । लेकिन पहले मैं ये इत्मिनान कर लेना चाहता हूँ कि उसका असली मालिक कौन है । असली वाले क्या अभी अभी मैंने आपको जो कुछ बताया उस पर आपको यकीन नहीं । यकीन मैंने जो कुछ आपको बताया था उस पर आपने यकीन किया था । अगर आप देश को नहीं है कि मेरा यकीन कर सके तो क्या मैं बेस को हूँ कि आप के किस्से को सही मान लोग खडे याने आपने मान सिंह के बारे में जो कुछ बताया वो आपकी ही चरित्र हूँ और ताली के लिए आप ही उसकी जान कि ग्राहक बन गए हूँ । दोबारा जैसे कुछ और चिपक गया । बैठ कोछड तक मुझे गौर से देखता रहा । फिर उसका चेहरा सख्त हो गया । कमरे की मध्यम रोशनी में कुछ फैसले पर इस तरह खडा हुआ है । कुछ खौफनाक सा लगा । फिर मैंने देखा कि उसका हाँ धीरे धीरे जेब की ओर बढ रहा था । उसकी जी एम में पिस्तौल थी इसका मुझे पक्का यकीन था । मुझे घबराहट होने लगी लेकिन फिर उसने अपने आप को संभाल लिया । जेब तक जाता हांड बीच में हीरो क्या? अपनी नाराजगी दबाने की कोशिश करते हुए उसने कहा जो लोग मेरी बातों पर शक करते हैं, मुझे पसंद नहीं है । आपको पसंद हो या ना हो लेकिन आज ही मुझसे मान सिंह के भाई ने भी ताली मांगी थी । मान सिंह के भाई चांदनी का चेहरा ऐसा लगने लगा जैसे किसी ने गुब्बारे को जल्दी से घर से छोड दिया हूँ और फिर से उसकी सारी हवा निकल जाए । मान सिंह के भाई यानि शैतान सिंह ने । मैं नहीं जानता कि वह कौन है । पर आज उसने दफ्तर में ताली के लिए मुझे फोन किया था । उसे आपका पता कैसे चला? अरे मैंने इस पर अभी तक सोचा नहीं था । पर कल जब मैं घर के पास था तो मेरे पास एक मोटर साइकिल और एक कार गुजरी थी । कार पर जगह था, ये मुझे मात्र ने बता दिया था । मोटर साइकिल पर मान सिंह का भाई रहा होगा । मैंने निश्चय करने के लिए पूछा क्या मैं मोटा साइकिल चलाता है? हाँ चलता तो है पर आपको कैसे पता चला? चलता ही नहीं है । मोटर साइकिल का आवाज है यानी मोटर साइकिल पर बैठे बैठे ही अपने शिकार पर निशाना चाह सकता है । मैं तो सोच रहा था । वही बात हो गई । लेकिन मेरे सामने गुत्थी कुछ और वो बच गई । स्पष्ट था कि जघन्य मेरा पीछा किया था और जगन का पीछा मान सिंह के भाई ने । लेकिन क्यों आखिर क्या रहता था तभी चलानी नहीं कहा । मिस्टर संजय आप ताली मुझे ही दे । मैं आपको ताली के लिए सात अंकों में रुपए दे सकता हूँ । सात अंक अब मेरे चक्कर में पडने की बनी थी । मैं बेईमानी से एक पैसा भी नहीं जाता, पर इतना आशीर्वाद भी नहीं की । सात अंकों का कोई असर मुझ पर ना हूँ । फिर भी मैंने यही दिखाने की कोशिश की कि मुझ पर रुपयों के आप बाहर का कोई असर नहीं हुआ है । चन्दानी ने कहा, मिस्टर संजय सात अंकों में रुपए कम नहीं होते हैं । अगर मैं आपकी जगह होता तो ये ऑफर मान लेता हूँ । लेकिन मान सिंह का भाई इतनी कमजोर आवाज में कहा, मैं उसे क्या जवाब दूंगा । आप उस की चिंता ना करें । उससे जगह निपट लेगा कैसे? क्या खत्म करके मैं किसी के कत्ल की कीमत पर सात अंकों की रकम नहीं चाहता हूँ । आप अपनी गर्दन की फिक्र करें, मिस्टर आपसे ताली मिलेगा और आपकी गर्दन भी दे देगा । ये रुपये भी आपकी तरफ नहीं करेगा । क्या आप मेरी इफाजत करेंगे? ऍसे कहा, मैं आपको मुगालते में नहीं रखना चाहता है । उस ने अपने होटल होटल, मुस्कान लाकर कहा, मिस्टर संजय, मैं अपनी गर्दन बचाने में यकीन रखता हूँ, दूसरों की नहीं । लेकिन अगर उससे दूसरों की भी बज जाए था, मेरा क्या पडता है और हम तो आपको मेरा ऑफर मंजूर है नहीं क्योंकि आपने इंकार नहीं किया । इसलिए मैं क्या समझो, क्या मंजूर है? मैं चुप रहा हूँ और मौन से बढकर स्वीकृति का कोई और लक्षण आज तक याद नहीं हुआ । चन्दानी भी जानता था । मैं सोच रहा था अगर दो बीवियाँ लडते हैं तो लडें । लेकिन मेरा ये सोचना गला था । यह मुझे बाद में मालूम हुआ । चंदा नहीं उठकर बाहर गया और कुछ देर बाद लौटा । उसके साथ एक आदमी और था । अंदर आ गया तो मैंने उसे पहचाना जगह था । चन्दानी ने कहा जगह आपके साथ जाएगा । इसी को ताली दे दें जरूर दे रहे हैं । पुलिस के सिपाहियों की तरह जगह मेरे एकदम बगल में आकर खडा हो गया जैसे मैं कोई अपराधी हूँ । फिर मेरे कंधे पर हाथ मारकर बोला चलो चंदानी नहीं रुपए के बारे में ना मुझ से कुछ कहा और न जगन से । शायद में कमरे से बाहर जगन को रुपया चक्की देने गया था । मैं पूछना चाहता था पर संकोच भी हो रहा था तो शराफत में मुझे ऐसा आदमी ही मारा जाता है । तब तक जघन्य फिर मेरे कंधे पर हाथ मारा चलो चलते क्यों नहीं? मैं उलझन में पढा हुआ कमरे के बाहर निकल आया । मेरे ठीक पीछे पीछे जगह था । शायद धान की तरह खूंखार बाहर पोर्टिको में कार तैयार खडी थी । कार का पिछला दरवाजा खोलकर जगह ने मुझे अंदर धकेल दिया तो फिर खुद भी मेरे बगल में आकर बैठ गया । बैठने के तुरंत बाद ही उसने अपने लोहे का दस्ताना जिसके बारे में मान सिंह के भाई ने बताया था निकालकर पहन लिया । इस बात का संकेत था कि मैं जरा भी गाय बडी नाम अच्छा हूँ नहीं तो मेरा भरकस बना दिया जाएगा । लगता था कल मैं उसे जो चकमा देकर निकल गया था वैसा ही चकमा फिरना देता हूँ । इसलिए मैं पहले से ही ओशिया रहना चाहता था । पर मेरा गडबडी करने का जरा भी इरादा नहीं था । रुपए मिले ना मिले इसको रक डंडे से छुटकारा पाने का खयाल करके ही मैं इत्मीनान महसूस कर रहा था । जगन ने कहा अगर कल ही तुम्हें ये ताली दे दी होती तो ये परेशानी होती है । उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया । मैं काफी थक चुका था और बात करने की मेरी जरा भी इच्छा नहीं हो रही थी । फिर जा गाना है तो बिलकुल भी नहीं । कहा कि गद्देदार सीट पर बैठा हुआ मैं अपने थके शरीर को आराम देने की कोशिश कर रहा था । जघन्य अपनी कडी निगाहों से दो एक बार मेरी ओर देखा हूँ । फिर भी चुपचाप बैठ गया । कारबात दी जा रही थी । करीब सवा घंटे बाद हम नोएडा पहुंच गए । जब मेरा घर थोडी दूर रह गया तो जघन्य कार रुकवा दी और मुझसे कहा आप तुम जल्दी जाओ और ताली लेकर तुरंत मेरे हवाले करूँ । मैं इंतजार कर रहा हूँ । मैं उतर कर घर की ओर चल पडा हूँ । करीब तीन बजे थे । दिन के इस वक्त लोग अपने अपने काम पर रहते हैं इसलिए वस्ती वीरान से लग रही थी । तेज कदम बढाता हुआ मैं घर की ओर चल पडा । घर पहुंचकर मैंने कॉलबेल का बटन दबाया और दरवाजा खोलने का इंतजार करता खडा रहा । पर कर ये दो मिनट भेज गए । फिर भी दरवाजा नहीं खुला । अपनी को स्कूल भेजकर शायद पुष्पक हो गई होगी । यह सोचकर मैंने फिर बटन दबाया लेकिन फिर कोई आहट नहीं । तब मेरा ध्यान दरवाजे पर गया । सिटकनी बाहर से बंदी मतलब कि पुष्पा घर में नहीं थी और लगता था कि मैं कहीं दूर नहीं गई थी । क्यूकि दरवाजे पर ताला नहीं लगा था तो मैंने सोचा उसे देखो पास पडोस में और एक तो मुझे पता नहीं था कि वह कहाँ है । दूसरे मुझे देर होती देखकर कहीं जगह मारपीट पर नहीं उतार हो जाए । इसलिए मैंने सोचा कि पहले उससे ताली दिया हूँ । चटकनी खोलकर मैं भीतर गया । कल वाला कोट हैंगर पर करीने से टंगा हुआ था । फिर आप दिल था कहा था लगभग मैंने उसकी छह में हाथ डाला, लेकिन तालिबान नहीं थी । पुष्पा को ताली हिफाजत से रख देने की दागी दी थी । उसी ने जेब से निकालकर रिद्धि होगी इफाजत के नाम पर मैं हर चीज अपनी डॅाल की एक दराज में रन देती है तो खाली भी वहीं होगी । यह सोचकर मैंने दराज खोली । उसका कोना कोना देख डाला । बढ ताली उसमें भी नहीं थी । आखिर नहीं कहा हूँ मैंने अपनी किताबों की अलमारी, पुष्पा के चेस्टर की जाॅन रसोई घर के डिब्बे डिब्बियां जिनमें कभी कभी पुष्पा रेजगारी रख दिया करती थी, सब कुछ देख डाला । हडताली कहीं नहीं थी आप मेहफिल फिर से जोरों से धडकने लगा । आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा । अभी तक मैं जो इत्मिनान महसूस कर रहा था, अब फिर से खत्म हो गया । सारा है सारी घबराहट एक बार ही जैसे लौटाई, सोचने लगा की जगह इंतजार करते करते हो जाएगा और फिर यहाँ से चला जाएगा । सिर्फ इतना ही होकर रह जाए तो भी गनीमत पर बेहतर गुस्से में आकर झगडा हो सक्कर बैठा । मेरा कोई भी बहाना नहीं नहीं सुनेगा । अच्छा होगा की नहीं । उसे बताया हूँ कि ताली नहीं मिल रही है । मिलते ही दे दूंगा । फिर भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की जगह को मेरा यकीन होगा । मैं तेज कदमों से चलता हुआ उस जगह पर पहुंचा जहां जगन कार रोककर मेरे इंतजार कर रहा था । सचमुच अधीर हो रहा था । घर से बाहर निकलकर मैं मेरी बेचैनी से चहलकदमी कर रहा था । मुझे देखकर उसे घाटा हुआ लेकिन मैंने सारी बात बताई तो उसका चेहरा गुस्से से तमतमा उठा । गलत कर उसने कहा तो मैं फिर चार चलने शुरू कर दे । मैं सडक पर कोई तमाशा नहीं खडा करना चाहता था । कहा झगडा बचाने के लिए उसके तेज आवाज का मैंने भी धीरे से जवाब दिया । नहीं ऐसी बात नहीं है । लगता है मेरी पत्नी कहीं उसे रख कर चली गई है । आ जाए तो तुरंत मिल जाएगी तो में ही रुके । राहुल मिलते ही तो मैं दे दूंगा रुखाई से । उसने कहा मैं भी चलो खोजने में तुम्हारे मदद करूँगा तो मेरा विश्वास नहीं हो रहा है । मैं विश्वास वगैरह कुछ नहीं जानता । हूँ । मुझे ताली चाहिए । मैं कहाँ कहता हूँ कि ताली तो मैं नहीं दूंगा लेकिन मैं अपनी पत्नी का इंतजार कर रहा हूँ । उसके आते ही दे दूंगा । उससे पहले नहीं । मुझे चालबाजी कटाई पैसा नहीं है । उसमें थोडा कर कहा चालबाजों की खबर में इससे लेता हूँ और उसने अपना पंजाब मेरी और बढा दिया । उसके दस्ताने में लोहे की छोटी छोटी कीलें उभरी हुई थी । मैं भीतर ही भीतर बिहार उठा । उसे समझाने की कोशिश करते हुए मैंने कहा तुम बेकार ठीक चला रहे हो । आधा घंटे में मेरी पत्नी आ जाएगी । तभी तो मैं ताली मिलेगी लाने से नहीं । उसके जवाब का इंतजार किए बिना ही नहीं घर को लौट पडा । जघन्य आगे बढकर मेरा हाथ पकड लिया । उसके दस्ताने की छोटी छोटी कीलें मुझे छोडने लगी । तब तक उसके दूसरे हाथ का एक हल्का सा घुसा में छुट्टी पर लगा दूसरे हाथ की भी दस्ताने की खेले की वजह से वही छुट्टी छिल दी गई और खून चूस वहाँ आया । फिर उसने कहा तो मैं इस तरह मुझे चकमा देखा नहीं जा सकते । मेरी है मैं तो नहीं हो रही थी पर मैंने भी एक खान बढाकर उसका कॉलर पकड लिया । फिर कहा अगर तो मिताली चाहते हो तो ये ऐसा भरकर बंद कर हूँ, नहीं तो मैं चकमा नहीं दे रहा हूँ । अडतालीस तभी मेले की जब मेरी पत्नी आ जाएगी । उसने झटके से अपना कॉलर मेरी पकडते छुडा लिया पर हर कोई हरकत नहीं की । घोषणा भी नहीं चलाया । लेकिन कडक कर पूछा हूँ कब आएगी तुम्हारी बात नहीं । मुझे कुछ नहीं पता लेकिन आ जाएगी । तारीख तभी मिलेगी उसके पहले नहीं । शायद कोई सुनसान जगह होती तो और झगडा करता । या शायद मेरा मूड गुस्से का देखकर उसने मारपीट करना ठीक नहीं समझा रहे । कुछ झंड तक मेरी ओर घूरकर देखता रहा । फिर बोला मुझे ऐसा पैसा नहीं लेकिन तुम्हारे कहने से एक मौका तो मैं और दे रहा हूँ । अभी मैं जा रहा हूँ एक घंटे बाद लौटूंगा । लेकिन ताली दया रहे और कुछ नहीं सुनूंगा । मैंने राहत की सांस ली । ठीक है तो यही मुझसे मिलना एक घंटे बाद मेहताजी लेकर यहाँ जाऊंगा नहीं । इस बार मैं तुम्हारे घर पर आऊंगा । उसने कहा और कार में बैठकर ड्राइवर को गाडी स्टार्ट करने का हुक्म दिया । मैं घर की ओर चलता हूँ

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