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रहस्मय टापू - 29

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रहस्मय टापू - 29 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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प्रस्तुत उपन्यास "रहस्यमय टापू" अंग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक रॉबर्ट लुईस स्टीवेंसन के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यास "ट्रेजर आइलैंड" का हिंदी रूपांतरण है। उपन्यास का नायक जिम जिस प्रकार समुद्र के बीच खजाने की खोज में निकलता है वो इसे और रोमांचक बना देता है। कहानी में जिम एक निर्जन टापू पर खूंखार डाकुओं का सामना करता है और कदम कदम पर कई कठिनाइयों का सामना भी करता है। इस बालक के कारनामों को सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सुनें रमेश नैयर द्वारा रूपांतरित ये पुस्तक हिंदी में आपके अपने Kuku FM पर। सुनें जो मन चाहे।
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टॉर्च की चौंधियाने वाली लाल रोशनी में मैंने जो कुछ देखा उससे मेरा दिल बैठ गया । केले पर डाकुओं ने कब्जा कर रखा था । खाने पीने का सारा सामान उनके कब्जे में था । मेरे साथियों में से एक भी यहाँ नजर नहीं आ रहा था । मुझे लगा अपने सारे साथ ही शायद मारे जा चुके हैं । डाकुओं में से भी अब वहाँ केवल छह लोग नजर आ रहे थे । उनमें से एक पूरी तरह जख्मी था । उसके सर पर खून से सनी हुई पट्टी बंधी हुई थी । मुझे याद आया कि ये वही व्यक्ति था जिसे संघर्ष के दौरान गहरी चोट लगी थी । पर्व किसी तरह जंगल की और भाग गया था और लंबू चांदीराम का तोता हूँ । उसके कंधे पर बैठक टुकुर टुकुर मुझे देख रहा था । चांदीराम का चेहरा बुझा हुआ था । वो अपने साथियों से कहने लगा, ये भी अच्छा हुआ कि जब हम लोगों से मिलने के लिए यहाँ पहुंच गया । चांदीराम आपने पाइप में तंबाकू बरकर कष्ट खींचते हुए कहने लगा जो तुम्हारे यहाँ से मुझे बडी प्रसन्नता हुई है हूँ दोहराना बडा सुखद रहा तो बहुत दूर लडके हो बचपन मैं मैं तुम्हारी तरह ही अत्यंत साहसी था । बहुत शुरू से चाहता था कि तो हम लोगों के साथ रहो । अगर जो कुछ हाथ लगता उसका एक के साथ उन को भी मिलता है और तो बला बाल हो जाते हैं । कप्तान सोमनाथ अच्छा नहीं है पर जरूरत से ज्यादा कठोर है । अच्छा हो तो कप्तान से दूर हो तो एक बात और बता दूँ । डॉक्टर भी भीतर ही भीतर दोबारा विरोधी है तो हुआ नहीं । खराब मार्क तक नाम बताता है । सस्ता है तो तुम अपने मित्रों के पास नहीं जा सकते हैं हूँ । मैं तो मैं स्वीकार नहीं करेंगे । इसलिए हमारे साथ जुडने के अलावा अब तुम्हारे पास कोई चारा नहीं रह गया है । मुझे सुनकर थोडी राहत मिली । इसका अर्थ था कि मेरे साथ ही अभी तक जीवित है । ये भी पता चला कि किले से मेरे चुपचाप निकल जाने के कारण वो मुझसे नाराज है । फिर भी कुल मिलाकर मैं पहले से कम चिंतित था । चांदीराम ने अपनी बात आगे बढाते हुए कहा तो इस समय हमारे बंदी हो फिर भी तुम्हारे साथ बंदी और जैसा व्यवहार नहीं करूंगा तो मुझे तारा से जो जो लोग यही तुम हमारे साथ आना चाहो तो हम तो मैं रख सकते हैं । देखना चाहूँ तो इनकार भी कर सकता हूँ । पूरी बातचीत के दौरान चांदीराम यही जताता रहा कि वह चाहे तो मुझे मार सकता है । मेरा चेहरा तमतमा उठा था और दिल जोर जोर से धडक रहा था । मैंने काफी हुई आवाज में कहा, क्या मेरा उत्तर देना जरूरी है? चांदीराम ने कहा, जिन हम मैं कोई तो मैं इस बात के लिए दबाव नहीं डालेगा कि तुम तत्काल हमारी बात का जवाब जो तुम्हारा यहाँ रहना हमें अच्छा लग रहा है । मैंने कुछ साहस बटोरते हुए कहा, यदि मुझे किसी दोनों में से एक का चुनाव करना है तो पहले सारी बातें साफ हो जाना चाहिए । मुझे मालूम होना चाहिए कि आप लोग यहाँ कैसे बोझ और मेरे साथ ही समय कहाँ है । एक डाकू ने अपनी आस्तीन चढाते होता, अब इसे बता ही दो, इसके होती का में लगा दी जानी चाहिए । चांदीराम ने उसे रोकते हुए का तो हम चुप रहो । जब तक तुम से कहा ना जाए तुम अपना मुंह बंद रखो । हाँ जी बात इस तरह की है कि कल सुबह डॉक्टर समझौते के लिए झंडा लहराते हुए यहाँ आया । उसने कहा कप्तान जान दे रहा हूँ । अपने लोगों का जहाज कोई उडा कर ले गया है । इस पर हम लोगों ने बाहर जाकर देखा तो पाया डॉक्टर सही कह रहा था । जहाज के गायब होने पर हमें बडा झटका लगा । डॉक्टर मैं सौदेबाजी की पेशकश की । उस सौदेबाजी के आधार पर ये किला और खाने पीने का सारा सामान हमें मिल गया । वे लोग ये जगह ब्रांडी गोरखपुर जलाओ लग रही है छोड कर चले गए । हमें नहीं मालूम कि समय वो कहाँ है । फिर पाइप से कष्ट खींचने के बाद चांदीराम कहने लगा । डॉक्टर ने बताया कि वह केवल चार लोग बचे हैं । उनमें से भी एक घायल है । तुम्हारे बारे में डॉक्टर का कहना था की तुम आ चाहता कहीं गायब हो गए और उसे तुम्हारी रत्ती भर भी परवाह नहीं है । डॉक्टर ने कहा था उस लडके से हवा पूरी तरह से ऊब चुके हैं । बस उन्होंने इतना ही कहा था । मैंने पूछा हाँ बस इतना ही अब तुम होता है करना है कि तुम क्या जाते हो? चांदीराम ने कहा, मैंने बहुत सोच समझकर जवाब दिया, अब जो होना है वो होता है । मुझे इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है । मैंने इस यात्रा में बहुत सारे लोगों को मारते हुए देखा है लेकिन आपको एक दो बातें बताना जरूरी समझता हूँ । आप लोग भी यहाँ पूरी हालत में हैं । जहाँ जा चुका है । खजाना भी मिलने वाला नहीं है । तुम्हारे बहुत सारे लोग भी खत्म हो चुके हैं । तुम लोगों के पास अब कोई उम्मीद नहीं बची है तो उन सब को शायद मालूम नहीं कि इसके लिए जिम्मेदार कौन था । ये सब मेरी वजह से ही हुआ । मैंने तुम लोगों की उस रात की गुप्त बातचीत सुन लेंगे और उसे अपने साथियों को बता दिया था, जिसके कारण वे सतर्क हो गए थे । उस गुप्त बातचीत में शामिल इस्टाइल अब समुद्र की तलहटी में हैं । रही बात आपने जहाज राजनीति की तो उसकी रस्सी मैंने ही काटी थी । उस पर सवार लोगों को मैंने ही मौत के घाट उतारा था । जहाज को मैंने सुरक्षित स्थान पर लगा दिया है । तुम लोगों में से कोई भी उसे तलाश नहीं कर पाएगा । उसके बारे में केवल मैं नहीं जानता हूँ । इसलिए आप सबकी जान केवल मैं ही बचा सकता हूँ । मुझे तो तुम लोगों की परवाह है और नहीं तुमसे जरा सा बिटर । तुम चाहो तो मेरी जान ले लूँ मैं तुम लोगों को कुछ बताने वाला नहीं है । यही तो मुझे यहाँ से सकुशल निकल जाने देते हो तो मैं वचन देता हूँ की अदालत में जब तुम्हारे खिलाफ मुकदमा चलेगा तो एक महत्वपूर्ण गवाह होने के नाते मैं तुम लोगों को बचाने का यथासंभव प्रयास करूँगा । अब तुम लोगों को तय करना है, चाहो तो मुझे मार दो और उससे तो मैं कुछ हासिल होने वाला नहीं है तो उन लोगों की इच्छा हो तो मुझे जीवित रखो । उस सिटी में मैं तो मैं फांसी के तख्ते से बचाने में मददगार साबित हो सकता हूँ । उत्तेजना में इतना सब कुछ कहे जाने के कारण में हाथ नहीं लगा । मुझे देखकर बडा विस्मय हुआ । मेरी बातों पर उनमें से एक भी व्यक्ति हिला तक नहीं है । सब भेड की तरह बने । मुझे देख रहे थे मेरी हिम्मत कुछ और बडी । मैंने कहा चांदी राम जी, मेरा ख्याल है कि आप सबसे ज्यादा या जिम्मेदार व्यक्ति हैं । यदि बात नहीं बनती है तो शायद आप मुझे मौत के घाट उतार देंगे । रुपया डॉक्टर साहब को बता देना कि मैं एक शायर की मौत नहीं मारा था । चांदीराम ने विचित्र से स्तर में कहा, ठीक है, मैं से ध्यान में रखूंगा । मैं समझ नहीं पाया कि वह मुझ पर हस रहा था या मेरे साहस की प्रशंसा कर रहा था तो ये सब तुम्हारी करामत थी । शुरू से आखिर तक हमारी रह मैं अडंगे पैदा करने वाले तुम जीत है? चांदीराम ने गुस्से से कहा तो फिर इसका काम तमाम ही समझो रहते हुए चांदीराम का एक साथ ही अपने चाकू लहराते मेरी और लपका चांदीराम जोर से जी का जो तुम कौन होते हुए ऐसा भी रहे लेने वाले अब काम नहीं है तो मैं एक कदम भी आगे बढे तो समझ लेना मारे जाओगे तो वही रुक गया । पर सारे लोग मुझे तीखी नजरों से देख रहे थे । चांदीराम ने उन लोगों को चुनौती के स्वर में कहा है तो मैं कोई माई का लाल जो मेरी बात को काट सके तो मैं ऐसे कोई भी ना तो मेरी बराबरी कर सकता है, ना ही मेरे सामने खडा हो सकता है । मैं इस लडके को बहुत पसंद करता हूँ । इससे कोई हाथ नहीं लगाएगा । तो चूहों के बीच यही तो अकेला शेर है । इसके बाद काफी देर तक खामोशी छाई रही । मैं दीवार के साथ सटकर सीधा खडा हो गया । मेरा दिल हथोडे की तरह मेरे सीने के भीतर चोट कर रहा था । चांदीराम भी दीवार के साथ क्या पाइप उसके मूल में लगा था । वो बहुत शाम नजर आ रहा था । उसकी आंखें इधर उधर घूमती हुई अपने साथियों पर पहली नजर रख रही थी । उसमें से एक नजर उठाया । चांदीराम ने तत्काल उससे पूछा तो कुछ कहना चाहते हो, क्षमा कीजिए । आपके बनाए हुए नियम के अनुसार ही हम सब एक साथ एक मुद्दे पर बात कर सकते हैं । आप कप्तान है ये तो सही है पर मुझे भी आपसे कुछ पूछने का अधिकार है । बातचीत के लिए बाहर खडा होता हूँ । ये कहकर व्यक्ति ने चांदीराम को सेल्यूट बजाया और झटके के साथ बाहर निकल गया । एक एक कर सारे लोग बाहर चले गए । चांदीराम ने आपने मुझसे पाई पहला घटाकर कहा, देखो जाए तो मौत के कितना करीब हो । लेकिन मैं पूरी तरह से तुम्हारे साथ हूँ । मेरा मन कहता है कि मुझे तुम्हारा साथ देना चाहिए । बिजली की कैसा हूँ? मैं तुम्हें अपना आदमी मानता हूँ क्योंकि मुझे भरोसा है कि तुम जरूरत पडने पर मेरा साथ हो गए । तुम ही मेरी गर्दन बचा सकते हो । बात मेरी समझ में आने लगी थी । मैंने पूछा तुम्हारा मतलब कि खेल अब खत्म हो रहा है? हाँ और नहीं तो क्या । जहाज गया तो समझ लो गर्दन भी गई । जब मैंने पाया की जहाज नहीं है तो मैं समझ गया खेल अब खत्म हो गया है । जहाँ तक मेरे साथियों का प्रश्न है । वो आपस में बातचीत के लिए बाहर गए हैं । वो नूर और कायर है । मैं उनसे तुम्हारी जिंदगी बचाने का प्रयास करूंगा । उसके बदले तुम्हें भी मुझे फांसी के फंदे से बचाना होगा । मुझे उसकी बात सुनकर बडा विश्वास नहीं है । फिर भी मैंने पूछा मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ? उसने कहा यह तो एक हाथ लेने और दूसरे हाथ देने वाली बात है । मुझे मालूम है तो है जहाज को किसी सुरक्षित स्थान पर छुपा रखा है । तुम और मैं एक साथ मिल जाए तो हम दोनों कोई चमत्कार कर सकते हैं । ये कहते हुए उसने एक डिब्बे से थोडी सी ग्रांडी उडेली । उसने मुझसे फ्यूचर टोमॅटो है मैंने इंकार कर दिया । वहाँ ब्रांडी पीने के बाद मेरी और भेदभरी नजर से देखते हुए कहने लगा मेरी समझ में नहीं आ रहा कि डॉक्टर ने मुझे चार क्यों दे दिया । मेरे चेहरे पर अचरज के भाव घायल गए । मैं मन ही मन कुछ सोच नहीं हूँ ।

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प्रस्तुत उपन्यास "रहस्यमय टापू" अंग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक रॉबर्ट लुईस स्टीवेंसन के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यास "ट्रेजर आइलैंड" का हिंदी रूपांतरण है। उपन्यास का नायक जिम जिस प्रकार समुद्र के बीच खजाने की खोज में निकलता है वो इसे और रोमांचक बना देता है। कहानी में जिम एक निर्जन टापू पर खूंखार डाकुओं का सामना करता है और कदम कदम पर कई कठिनाइयों का सामना भी करता है। इस बालक के कारनामों को सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सुनें रमेश नैयर द्वारा रूपांतरित ये पुस्तक हिंदी में आपके अपने Kuku FM पर। सुनें जो मन चाहे।
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