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Part 26

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लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
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पिछले कई दिनों से शिवा लगातार व्यस्त रहा । आज उसे कुछ अवकाश था तो पिछले तमाम समाचार पत्र लेकर तसल्ली से पढने बैठ गया । एक त्रासदी के समाचार को विशेष ध्यान से पडने लगा । पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले से सटा गौरीपुर गांव प्रकृति का अनुपम उपहार था । यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य का पान करने । देशी ही नहीं सैकडों विदेशी पर्यटक भी प्रतिवर्ष आते थे । बहुत ऊंची पहाडी पर स्थित होने के बावजूद यहां विकास की रफ्तार बहुत अच्छी थी । स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सरकारी कार्यालय सब कुछ व्यवस्था था । हाल ही में अचानक इस गांव का आसमान है । आप तो पडी यहाँ के संकरे पहाडी क्षेत्र में धूप के बादलों ने अत्यधिक नमी के कारण सघन रूप ले लिया । ऐसा भयंकर तेज आवाज के साथ ये बादल फट पडे । पहाडों में जबर्दस्त भूस्खलन प्रारंभ हो गया । घर, कार्यालय, विद्यालय, सरकारी इमारतें एवं अस्पताल तक मटियामेट हो गया । जहूर विनाशी विनाश सिर्फ मलबा ही मलबा । ये मलबा मौत बनकर पसारता जा रहा था । हूँ चारों ओर भयंकर चीखपुकार जिधर देखो उधर बस तबाही तबाही । जहाँ थोडी देर पहले डर गांव पडता था, वहाँ अब सिर्फ खंड है ही थे । प्रकृति के इस तांडव से सैकडों लोग कालकवलित हो गए । अंडे नेट लापता हो गए । इस कहने पूरे के पूरे गांव को लिया । शिवानी दूसरे समाचार पत्र में देखा । इस पूरे देश में विषाद की रेखाएं फैल गई । प्रधानमंत्री राहत कोष मृतकों के परिजनों, घायलों को मुआवजा देने की पहल हुई । अनेक समाजसेवी संगठन इसका आपको पुनः जिंदा करने के मकसद से आप जा रहा था । पुनर्निमित आपदा पीडितों की सहायता के लिए आगे आए । मुझे पानी तुरंत अनुव्रत सेवाभारती फोन किया हूँ । अब्दुल्ला साहब ने आपातकालीन बैठक बुलाई । राष्ट्रीय आपदा की इस घडी में सहयोग है तो महत्वपूर्ण योजना बनाई गई । उन्होंने दो रूपों में सहयोग देने की सोची । पहला राहत सामग्री पहुंचाना, दूसरा वहां पहुंचकर सेवा कार्य करना । सारे सदस्यों ने एक स्वर से योजना को पास कर दिया । राहत सामग्री इकट्ठी करने का जिम्मा पाठक जीने संभाला और कार्यकर्ताओं की टीम एकत्रित करने का दायित्व वो शिवा को सौंप गया । इस गांव के आसपास के क्षेत्रों के विद्यालयों के अध्यापकों को प्रशिक्षण भी नहीं । सेवा यहाँ पहले भी पीच इंडिया टीम के साथ आया था । थाउसे इलाके की जानकारी थी । अब्दुल्ला साहब ने कहा परसों कराता हम रवाना होंगे । हमारे पास समय बहुत कम है । सब युद्धस्तर पर तैयारी करें । अपने साथ नौ और समझदार, मजबूत, होशियार, मेहनती, युवा कार्यकर्ताओं को तैयार कर देररात शिवा घर पहुंचा । माँ पिताजी शालू सब इंतजार कर रहे हैं । शिवा को भी भूख लगी नहीं भोजन करके वहीं पांच दस चक्कर लगाए और सब सोने चलेगा । दूसरे दिन ट्राॅमा आपातकालीन आकस्मिक अवकाश है तो वो अपने ऑफिस में प्रार्थना पत्र आया । रास्ते में उसकी ससुराल थी । कई दिनों से हरी सेवक जी से मुलाकात नहीं हुई थी तो थोडी देर वहाँ गया । दूसरे दिन गौरीपुर जाने का कार्यक्रम बताकर सास ससुर को प्रणाम करके रवाना हुआ । शिवा का अभिन्न मित्र हो जाए और सुजाता भी विवाह के पश्चात यही रहते थे । उनका घर भी उसकी ससुराल के पास था । शिवा पांच मिनट उनसे भी मिलता हुआ निकला हूँ । घर पहुंचा तो माँ सामने ही बैठी थी । ईरानी माँ को बताया कल प्रातः आपदा राहत कार्य गौरीपुर जा रहा हूँ । ये सुनते ही मां के कलेजे में लाॅरी उठने लगीं । उनका डाॅन हो गया । गला रूंध गया । बोली है बेटा तुम ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा को समर्पित कर दिया है । नहीं नहीं तुझे कभी नहीं रोका । आज न जाने क्यों मेरा दिल बैठा जा रहा है । मजा बेटा इस बार तो मुझे वहाँ पता सफल होने लगी । शिवा माँ के पास जाकर आँसू पोछने लगा और बोला मेरी शेरनी माने हमेशा मुझे प्रोत्साहन दिया था । हाँ, अचानक क्या हो गया वहाँ सिर्फ हफ्ता दस दिन की बात है । बहुत जल्दी लौटाऊंगा । न जाने क्यों शिवा की बातों से भी माँ को दिलासा नहीं मिली । उसका दिल बुरी तरह तरह के जा रहा था । सेवा अपने कक्ष में गया तो देखा शालू आर्या से खेल रही थी । सेवा भी माँ बेटी के उस बच्ची का पकडम पकडाई खेल में शरीक हो गया । डाॅ । मिनट बात आ गया । थक गई तो शायद हूँ । आर्यन को माँ के पास छोडा ही और शिवानी कमरे में आते ही शालू को पकडकर केंजी लिया । कुछ अवसर देकर उसने बताया कल सेवाभारती के सदस्यों को लेकर गौरीपुर जा रहा हूँ । कहाँ तो इतनी प्रफुल्ल थी कहाँ एकदम गमगीन हो गई । उसे लगा उसके पैरों कि नीचे से धरती की सब रही थीं । उसे अपना दिल बैठता सा महसूस हुआ । धीरे धीरे वैसे रखने लगी और बोली तो इसमें जाओ । उसकी हालत देखकर शिवानी उसे सीने से लगा लिया और बोला मेरी बहादुर पत्नी जिसने इससे भी बडे बडे मिशन में मेरा साथ दिया था । हाँ, जिसका मन क्यों का क्या हो रहा है? किसकी लेटे लेटे शालू बोली मुझे आज एक सुबह सुबह बाॅधना सपना आया था । एक खूंखार दे थी आपको जबरदस्ती मुझसे दूर किए जा रहा है । ऍम अंधकार में आपको बेरहमी से खींच जाए । कुछ बहुत डर लग रहा है । आप किसी और को भेज तो बीस मचा हूँ और होने लगी शिवा जो क्या उसकी भी ठप बता रहा हूँ? पांच सात मिनट बात है थोडी शांत हुई । तब उसे समझाते हुए बोला सपना है ऍम कभी सच नहीं होते तो मत घबराओ, मैं जल्दी वापस आ जाऊंगा । नहीं तो शीला बोल रहा था लेकिन मैं नहीं माना । आज उसका दिल भी घबरा रहा था । शालू थोडा समझ नहीं । फिर बोली आप वक्त बेवक्त यहाँ इतना सेवा कार्य करते हैं । मैंने आपको कभी नहीं रोका । टीम इंडिया ऑफिस आपको देश के कोने कोने में बेचती है । मेरे दिल कभी नहीं मिला । आज मेरा मन उदास है । अनजानी आशंकाओं से मेरा हिरदय काम रहा है । उसके सब्र का बांध तोड दिया । वो बच्चों की तरह मिला । छोटी एक झड के लिए शिवा के मन में आ गया । गौरीपुर जाने का विचार त्याग दें । हाँ एवं चटनी सब की बात रह जाएगी । बीमारी का बहाना बना लेगा लेकिन फिर दिल पर दिमाग खराब हो गया । पारिवारिक दायित्व पर सामाजिक दायित्व की जीत हुई । समझाते हुए बोला हूँ हूँ ऐसे कमजोर पडने से कैसे काम चलेगा । अगर कभी अनोहनी हो भी जाए तो तो मैं हिम्मत से काम लेना होगा । माँ, पिताजी, आर्या और घर सब की जिम्मेदारी तुम पर होगी । तुम्हारे कमजोर होने से कैसे होगा? फिर कौन संभालेगा सबको प्लीज मत रो । मुझे खुशी खुशी भेजने की तैयारी करो । स्पीडी अच्छी शालू डायन में सामान पैक कर दो । ठीक चालू का दाल पति को भेजने के लिए गवाही नहीं दे रहा था, लेकिन शिवा रुकने को तैयार नहीं था । उसे जाना ही था । रात रह हूँ । जब पैदा बेला आई तो शिवानी पिता जी के चरण हुए हैं । पिताजी ने कहा यशस्वी भव माँ के पैर छुए तो सजल नेत्रों से बोली चिरंजीवी हो आर्या को शिवानी दुलार क्या आंखों ही आंखों में शालू से इजाजत चाहिए तो भरे दिल से शालू इतना ही कह पाई जल्दी आना । अगर अनुव्रत सेवाभारती के कार्यालय पहुंच चुके थे । नियमित समय पर ट्रक भरकर राहत सामग्री के साथ नौ कार्यकर्ताओं की टीम जीत में गौरीपुर के लिए रवाना हो गई । सब ने अपने अपने इस को याद किया और भारत माता के जयघोष के साथ यात्रा प्रारंभ हुए हैं हूँ

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लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
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