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रहस्मय टापू - 25

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रहस्मय टापू - 25 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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प्रस्तुत उपन्यास "रहस्यमय टापू" अंग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक रॉबर्ट लुईस स्टीवेंसन के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यास "ट्रेजर आइलैंड" का हिंदी रूपांतरण है। उपन्यास का नायक जिम जिस प्रकार समुद्र के बीच खजाने की खोज में निकलता है वो इसे और रोमांचक बना देता है। कहानी में जिम एक निर्जन टापू पर खूंखार डाकुओं का सामना करता है और कदम कदम पर कई कठिनाइयों का सामना भी करता है। इस बालक के कारनामों को सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सुनें रमेश नैयर द्वारा रूपांतरित ये पुस्तक हिंदी में आपके अपने Kuku FM पर। सुनें जो मन चाहे।
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जब मेरी नींद खुली तो उजाला हो चुका था । नाव को लहरों के थपेडों ने आप के दक्षिण पश्चिम की ओर धकेल दिया था । सामने दिखाई दे रही थी वह पहाडी जिसमें खजाना छुपाया गया था । उसके दोनों एक लगभग चालीस पचास फीट ऊंची दो और चोटियां आकाश की ओर सिर उठाए खडी थी । पहले तो मैंने सोचा पैडल मारकर अपनी नौका को किनारे तक ले जाऊँ । तत्काल मैंने विचार त्याग दिया । डर इस बात का था कि समुद्र के किनारे चारों और फैली चिकनी चट्टानों से टकराकर कहीं मेरी नौ का टूटना जाए । खतरा इस बात का भी था की उन चट्टानों से फिसलकर यदि में पानी में गिरता हूँ तो विशाल आकार के गोंगो के झुंड वहाँ दे रहे हैं । समुद्र के सीधे कहे जाने वाले होंगे । यू तो मनुष्य को कुछ नहीं कहते हैं और उन्हें देख कर मैं बहुत बहुत हो गया था । मैंने सोचा उनके पास जाने से बेहतर है कि इस नौका में पडे पडे भूखों मर जाना । एकाएक समुद्र की लहरें ऊपर उठते हुई प्रतीत हुई परन्तु लहरें उग्र नहीं थी । हवा भी धीमी और शाम मैं चुप चाप लहरों पर डगमगाती छोटी सी नौका में पढा रहा । खजाने वाली चट्टानें रह रहकर मेरी नजरों के सामने खुल जाती है । धीरे धीरे मुझमें परिस्थितियों का सामना करने का साहस आता जा रहा था । मैं पूरे साहस के साथ पैदल चलाने लगा परन्तु नौका रह रहकर मेरे नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी । ऍम पर उतर गई । मैं बुरी तरह घबरा गया । लहरों की बौछारों से भी गया था । मेरी नाक में भी पानी भर गया था । मैंने अपनी समुद्री टोपी से नौका का पानी उलीच ना शुरू कर दिया । इसके साथ ही में ना को बडी लहरों और बहुत से बचाने की चेष्टा भी करता रहा । कुछ देर बाद नाव समुद्र के उस भाग में पहुंच गई जो अपेक्षाकृत शांत था । मैं कुछ निश्चित हो गया था । बीच बीच में मैं नौकाओं को समुद्र के किनारे की ओर हल्का सा धकेल देता और फिर शांत होकर बैठ जाता हूँ । बहुत देर तक यही क्रम चलता है । ये सब बहुत उबाऊ और थका देने वाला था । जैसे जैसे नौका किनारे की ओर बढ रही थी, पूछे ऊंचे क्योंकि हरी हरी टोपियां ऊपर उठती दिखाई दे रही थी । मैं प्रतीक्षा करने लगा, किसी सुरक्षित और समर्थन स्थान पर पहुंच जाने की ताकि वहाँ जाकर नाव को किनारे लगाया जाए । धूप बढती जा रही थी कुछ गलती हुई । लहरों के कारण मेरे हूँ बार बार भीग रहे थे । समुद्र के पानी से हो खा रहे हो गए थे । मुझे प्याज भी लग रही थी । प्यास निरंतर बढती जा रही थी । प्याज से मेरा गला सिखने लगा । मेरा सिर में दर्द हो रहा था । इसी बीच बडी सी लहर में मेरी नौका को समुद्र में दूर तक खेल दिया । मैंने देखा की दाल और मुझसे लगभग आधा मील की दूरी पर राजहंस लहरों पर हल्के हल्के हिचकोले खा रहा था । जहाज पश्चिम की और बढ रहा था फिर अचानक हवा थम गयी और जहाज स्थिर हो गया । मैंने सोचा लगता है ये लोग फिर शराब पीने में जुड गए हैं और जहाज की किसी को भी सूट नहीं है । उन्हें शायद ये भी नहीं मालूम की जहाज की लंगर की रस्सी कार्ड दी गई है । बीच बीच में जब हवा चलती तो राजस्व जरूर थोडा खिसक जाता है । उसके बाद फिर शांत हो जाता । स्पष्ट हो गया था की जहाज पर किसी भी चालक का नियंत्रण नहीं है । मेरे मन में प्रश्न उठ रहा था कि वे लोग कहाँ है? या तो मैं सब शराब के नशे में धूत है या जहाँ छोड कर चले गए हैं । मैं सोचने लगा काश मुझे जहाँ से लगा था और मैं उस तक पहुंचकर उसे समुद्र के किनारे लकडी के किले के पास नहीं जाता और उसे कप्तान सोमनाथ के हवाले कर देगा । समुद्र का बहाव जहाज और मौका दोनों को लगभग एक ही गति से दक्षिण की ओर ले जा रहा था और उनको स्पष्ट दिखाई दे रहा था की जहाज दिशाहीन होकर केवल बहाव की ओर बढ रहा है । उस पर भीतर से किसी का नियंत्रण भी नहीं है । मुझे लगा यदि मैं पूरी शक्ति के साथ पैडल मारकर आगे बढो तो जहाज को पकड सकता हूँ । मेरी नौका जहाज के निकट पहुंच दी जा रही थी । मुझे जहाज पर कोई भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था । मुझे अब पूरा विश्वास हो गया था कि या तो उस पर सवार लोग शराब के नशे में नहीं ऑन नहीं पढे हैं अथवा उसे छोड कर भाग गए हैं । मेरे भाग्य ने साथ दिया और हवा हम गई । जहाज एक स्थान पर फिर फिर हो गया । ये मेरे लिए अच्छा हो सकता है । तेजी से पैदल मारता हुआ मैं नौका को जहाज की ओर बढाने लगा । नौका जैसी जहाज के पास पहुंची । मैंने उसके पिछले हिस्से को पकडा और फूर्ति के साथ ऊपर चढ गया । के दिन की खिडकी खुली हुई थी । वहाँ टेबल पर रखा लाइन चल रहा था । सुबह का उजाला हो जाने के बाद भी उसे किसी ने नहीं बुलाया था । जहाज के मस्तूल में बंदी एक रस्सी नीचे झूल रही थी । उसे पकडकर में ऊपर चढने लगा । इसी बीच विपरीत दिशा से लहरों ने जहाज को एक झटका दिया । जहाज उस नहीं नौका से टकराया । नौका के लिए ये टक्कर बहुत घातक सिद्ध हुई । नौका तत्काल समुद्र में डूब गए । अब जहाज पर बने रहना मेरी भी वशता उसे छोडकर में कहीं नहीं जा सकता था ।

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प्रस्तुत उपन्यास "रहस्यमय टापू" अंग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक रॉबर्ट लुईस स्टीवेंसन के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यास "ट्रेजर आइलैंड" का हिंदी रूपांतरण है। उपन्यास का नायक जिम जिस प्रकार समुद्र के बीच खजाने की खोज में निकलता है वो इसे और रोमांचक बना देता है। कहानी में जिम एक निर्जन टापू पर खूंखार डाकुओं का सामना करता है और कदम कदम पर कई कठिनाइयों का सामना भी करता है। इस बालक के कारनामों को सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सुनें रमेश नैयर द्वारा रूपांतरित ये पुस्तक हिंदी में आपके अपने Kuku FM पर। सुनें जो मन चाहे।
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