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Part 25

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लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
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रात्रि के उत्तरार्ध में आलू को सपना आया । जैसे कोई देर से आत्माओं से हरे फलों से भरी टोकरी भेंट कर रही थी । एक सजीधजी हथनी केले के हरे हरे पत्ते ली है । उसके घर में प्रवेश कर रही थी और साथ में आपने घोडे पर सवार झांसी की रानी लक्ष्मी भाई भी आ रही थीं । सजीधजी हथिनी और झांसी की रानी का बेहद आनंदित भाव से स्वागत करने शालू खडी हुई । उसकी नींद खुल रही । उसने देखा वहाँ कोई नहीं था । सुबह के सवा चार बज रहे थे । होना सोई नहीं । उसने अपनी भाषा स्वन रखा था कि शुभ स्वप्न देखने के बाद सोना नहीं चाहिए । बटाहन नेत्री क्रमसे निर्वत होगा । मंत्र जब बार ध्यान में बैठ गई ऐसी बहुत बात कर ली । बाकि माँ अपने आप को धन्य समझती थी । सुन्दर सुघड, शिक्षित दिनेश ई, समयबद्धता के साथ सारे गए कार्य निष्पादित करना साथ ससुर के हर काम को तक पडता से पूरा करना, पूरे आदर सम्मान के साथ शिवा के प्रत्येक कार्य में आवश्यक सहयोग देना । इस प्रकार उनकी गृहस्थी की गाडी माल से चल रही थी । एक दिन शालू को अर्थव्यवस्था का अनुभव हुआ । सास के साथ महिला चिकित्सक के पास गई । वहाँ क्या हुआ? घर में नया मेहमान आने वाला था । शिवा की खुशियों का पानी नहीं था । सैनिटरी ने शालू को अच्छी संतान प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण उपयोगी सुझाव बताते हुए कहा तुम्हारे चलने फिरने, उठने बैठने, सोचने समझने, सुनने, बोलने तथा खाने पीने का घर वास्तव जीव पर बहुत असर पडेगा । पिछले सबसे पहले जरूरी है जाग्रत, छेडना, कटाह प्रति पल जागरूक रहते हुए तो मैं सकारात्मक चिंतन करना है । रास्ता जल्दी उठकर मंत्र जब ध्यान, माला, योग, प्राणायाम आदि सातवें क्रियाएं करनी । भोजन का प्रथम ग्रास सफेद भोजन पदार्थ जैसे बादाम नही । दू द्वारा इसको लादी लेने से संतान का वंश वेट होता है । धरी नारियल का प्रतिदिन उपयोग करने से आंखें बडी बडी होती हैं । बताता भोजन में उपयुक्त सावधानियां रखना । शालू इतनी दोस्ताना साहस करो पाकर बेहर निश्चिंत थीं । उस दिन हमको शिवा महाराणा प्रताप का कैलेंडर लाया था । उसने अपने शयन कक्ष में लगा दिया । राम को सास बहु खाली बैठी होती तो राम की मर्यादा, कृष्ण का गीता का उपदेश, तकलीफ, राज चौहान की धीरटा एवं मीरा की भक्ति भावना जैसे विषयों पर चर्चा करती । नियत समय पर ख्यालों ने अतिसुंदर तेज कन्या से कोमल पर्रिकर जन्म दिया । शुभ दिन देखकर कन्या का नामकरण संस्कार हुआ । पंडित जी ने श्रेष्ठ गुण वाली इसका नया का नाम रखा आलिया । डाटा दादी को एक प्यारा सा खिलाना मिल गया था । शिवा भी अपनी फूल से पुत्री का पार कर प्रसन्न था । किसी ना किसी तरह समय निकालकर उसके संग खेलता उसकी नहीं ऍम किलकारियों से शिवा को अपूर्वा आनंद की अनुभूति होती हैं । सुबह सुंदर पत्नी वो प्यारी सी बेटी के साथ शिवा स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझता हूँ । खुशी के दिन पंख लगाकर रखते हैं । आने आप पांच वर्ष के हो गई थी । सावित्री प्रयास सालों से बोलती थी । अब एक और होता करले परिवार को हरा हो जाएगा । इधर बढते बढते शिवा टीज इंडिया प्रोग्राम का मैनेजर बन गया था । चालू नृत्य वार्ड के ट्यूशनों में बहुत मेहनत कर रही थीं । कुल मिलाकर जीवन में जीवंतता का रसास्वादन करके ॅ

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लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
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