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बीस का भाग एक नया बोर्ड शनिवार का दिन था । हॉस्पिटल मरीजों से भरा पडा था । शहर के पास वाली नदी में बाढ आ जाने से बाढ में घायल लोगों का इलाज वहाँ चल रहा था । तीसरे फ्लोर पर मैंने मोबाइल में देख कर कहा, तीसरे फ्लोर पर हम दोनों पहुंचे । बाहर गुडिया और रक्षा दादी के साथ खडी थी भैया । गुडिया ने भैया को देखा और उसके से ने से जलाती क्या हुआ दादा को? छोटू ने पूछा । पता नहीं गुडिया और जोर से रोने लगीं । सामने से आसिफ चाचा दवाई लिए दौडे चले आ रहे थे । छोटों ने रूम के बाहर लगे कहाँ से देखा? दादा पलंग पर अच्छे पढे थे । ऑक्सीजन नली उनके मूड को घेरे थी । मैं फोन पर बिजी था । रक्षा से संभालो । छोटू बोला रक्षा गुडिया को दूर ले गई । छोटू रूम के सामने बैंच पर बैठ गया । उसने अपना मोबाइल चालू किया । मगर बैटरी बिलकुल भी नहीं बची थी । नर्स आईसीओ से बाहर आई । सिस्टर या चार्जर की व्यवस्था हो सकती है । गया नहीं । मेरे कैबिन में चले जाओ । परी रूम से बाहर आए । घबराओ नहीं तुम्हारे दादा को कुछ नहीं होगा । पर छोटों के पास आकर बैठ गई । छोटू हाथ बांधी बैंच पर बैठा था । उसने नजरे उठाकर पारी को देखा । इस तरह से पारी की बहुत जरूरत थी । आसिफ चर्चा मैंने जो दवाई लिखी थी वो ले आया । आप हाँ बेटियाँ नर्स को दे दी है । आसिफ चर्चा बोले छोटू बैंच पर बैठा नीचे फर्श को घूमे जा रहा था । ऑपरेशन करना होगा झूट हूँ पर इन नजदीक आकर कहा कब करना है जल्द से जल्द सुबह दस बजे के आसपास क्यों आज नहीं हो सकता? गया? नहीं क्यों? डॉक्टर नैनो कल हॉस्पिटल आएंगे । अरे यार क्यों क्या हुआ परिणाम उसका हाथ थामा । खर्चे की चिंता मत करो, वो सब एडजस्ट हो जाएगा? नहीं वो बात नहीं है । तो फिर जब मैंने मोबाइल ऑन किया तब एक नए नंबर से कुछ मिस कॉल पडी थी । मैंने जब कॉल बैक किया तो पता चला कि ये सिमंस कंपनी से कॉल था । मैनेजर ने मुझे कल नौ बजे कंपनी आने के लिए कहा है तो मुझे समझ नहीं आया कि उन्होंने मुझे ही क्यों चुना है । मैंने अपना ईमेल चेक किया । कारण पता चला कि जिसका सिलेक्शन पहले हुआ था उसे अब जॉब नहीं करना । इसलिए वह जगह मुझे मिली है तो इसमें होने वाली क्या बात है । पर इन्हें छोटू की आगे देख कर कहा, अगर कल में वहाँ चला गया तो यहाँ कौन रहेगा? उसकी चिंता तो मत करो । छोटू यहाँ रोहित है, दादी है, गुडिया है, रक्षा है । आसिफ चर्चा है और मैं हूँ । छोटू ने जाने कहाँ हो गया उसे अपने सामने कुछ तस्वीरें स्पष्ट दिख रही थी । क्या सोच रही हूँ? आॅर्डिनेंस के कंधे पर हाथ रखा तो यहाँ की चिंता छोडो कल तो में हर हाल में कंपनी जाना है । छोटू बहुत दिन बाद ही मौका मिला है । इसे खोना मत भडी की आवाज में एक विनती थी मगर दादा को छोडकर कैसे जाऊँ? छोटू फिर बोला उन का खयाल रखने के लिए हम सब है ना । पर इन्हें विश्वास जताया तो मैं याद है तुम्हें अपने आपसे क्या वादा किया था कि तुम्हें उडान भरनी है । बहुत ऊंची उडान परिणय छोटू की आंखों से आंसू पहुंचे मगर मुझ पर विश्वास है । दोनों की आखेटक रहे पहुंचा था । छोटों आगे कुछ नहीं बोल पाया । गहरे सन्नाटे के बाद तुम्हारा एहसान में जिंदगी भर नहीं भूलूंगा । पडी एहसान बताकर पढाया कर दिया एक बात कुछ हूँ, कुछ हूँ साथ रहोगी मेरे यहाँ तरीका जवाब बिना किसी फिल्टर के था । हमेशा जिंदगी भर परी खडी हुई । हमेशा जिंदगी भर उसने जाते जाते छोटू के आंसू पहुंचती हुएकहा मैं उस वक्त भी तुम्हारे साथ रहोगी जब सारी दुनिया तुम्हारे साथ होगी और मैं तब भी तुम्हारे साथ रहेंगे जब तुम्हारे साथ कोई नहीं होगा । रात का समय था, ठंड बढने लगी थी । छोटू खिडकी के पास खडा चांद को निहार रहा था । उसके मन में विचारों का टकराव चल रहा था । एक तरफ एंजल अंकल जी ने में ऐसी हालत में छोडकर आ गया । एक धर्म ज्यादा जिन्हें मैं एक बाल भी छोड कर जाना नहीं चाहता हूँ । एक तरफ नौकरी चुप बडी मुश्किल से मिली हैं । तमाम सवाल भीड में खडे अपने अपने जवाब के इंतजार में थी । तीनों सवाल में से करने के लिए कोई एक चुनना था । धीरे धीरे समय बीत रहा था । उसे नींद के झटके भी आने लगे थे । चंद दिखना बंद हो गया । चारों तरफ अंधेरा छा गया । नीचे देखने पर रास्ते में बनी स्ट्रीट लाइट ही चमक रही थी । कुछ ओस की बूंदे किनारे पर लगे पेडों पर जमा हो गई थी । कुछ बूंदे छोटू की आंखों को भी सहला रही थी । मगर अफसोस यह कि ओस की बूंद नहीं थी कि उसके आंसू थे । अंधेरा बढ रहा था । छोटू की आगे कुछ नहीं देख पा रही थी । अंधेरा सिर्फ ही रहा । घना अंधेरा कुत्तों के भौंकने के आवास आज दूर दूर तक दिखाई सुनाई नहीं दे रही थी अंधेरा अंधेरे का कालाकर एजेंडे अपनी डायरी के पन्नों को पलटा नगर आगे कोरे पन्नों के अलावा कुछ नहीं था । रात के चार बच गए थे । उसने डायरी बंद कर दी । उसके कमरे में उजाला अभी भी फैला था । उसने मुझे मैसेज किया । छोटू ने फिर क्या चुना?

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