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शक कर तू कि सितारों में आग है, शक कर कि सूरज घूमता भी है, शक कर कि सच भी झूठा है, मगर मेरे प्यार पर कभी शक न करना। writer: अरविंद पाराशर Voiceover Artist : Mohil Author : Arvind Parashar
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अगले दिन पुलिस हेड क्वार्टर में माहौल बहुत गरम था । पुलिस वाले नाराज थे कि आखिर उन के अवसर की पत्नी एक भीडभाड वाले छोटे से अपहरण कैसे हो गई । इसे बेहतर सामंजस्य के साथ अंजाम देना था क्योंकि सोमेश दिल्ली में कार्यस् था और इस घटना को गुडगांव में जाम दिया गया था । फिर भी दिल्ली और गुडगांव दोनों जगह की पुलिस का ध्यान इसी केस में था । इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा था । पुलिस इस मामले को हर नजरिये से देखने की कोशिश कर रही थी । चाहे फिरौती हो या शत्रुता हो या फिर कोई अन्य कारण कुछ लोग जिन पर संध्या था उन्हें पकड लिया गया था । आस पास के छुटभैया गुंडों से कौन तंग किया जा रहा था । खबर ही हर जगह पर लगा दिए गए थे । हर जगह पर चेकिंग चल रही थी । बॉर्डर बंद कर दिए गए थे । समाचार पत्रों में इस अपहरण की कपडे मुख्य तौर पर छपी थीं । यही बडी घटना थीं । सोमेश ऑफिस में चिंताग्रस्त मुद्रा में बैठा हुआ था । वे अपने और दृष्टि के वीडियो देखने लगा रहे हैं । खोखला महसूस कर रहा था है । उसके लिए चुनौतीपूर्ण वक्त था । उसने दृष्टि के माता पिता को बुलाया और उन्हें सुनिश्चित किया कि वह दृष्टि को बिना किसी छती के ढूंढ लाएगा तो क्रोधित था । तभी एक पैकेट उसके नाम पर पहुंचा । उसने उसे खोलकर देखा तो उसमें एक सीडी थी । कोई पत्र नहीं था । ये उसके लिए आश्चर्यचकित करने वाला था । उसने उस सीडी को बडे ध्यानपूर्वक देखा । इसमें दृष्टि के साथ उसके झगडे के वीडियो से मैं स्तब्ध था । मैं समझ क्या कोई उसे फंसाना चाहता है । एक तो नहीं कम से कम एक दर्जन वीडियो पडे होंगे । कोई उस पर नजर रख रहा था की जैसे हो सकता है कोई कैसे इतनी बारीकी से इस घटना को अंजाम देकर मुझे फंसाने की कोशिश कर सकता है और मुझे तनिक भी आवाज तक ना हुआ । कोई ऐसा क्यों करेगा? ये सारे खयाल उसके दिमाग में चल रहे थे और मैं ऑफिस में इधर उधर भटक रहा था । मैं जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता था । इस मामले को वैसे भी मीडिया ने बढा चढा दिया था । अखिरकार दृष्टि उस मीडिया का अभिन्न अंग थी । उसके कई दोस्त जानते थे । उन दोनों की बन नहीं रही थी । अगर उन तक वीडियो पहुंच गए तो सारी होंगी उसके ऊपर उठाई जाएगी । इससे फर्क नहीं पडता कि बाद में क्या परिणाम निकल कराता नहीं । किसी से गुप्त रूप से इस विषय पर चर्चा करना चाहता था । मैं अपने बॉस के ऑफिस की तरफ दौडा । जैसे ही उसने पहुँच के ऑफिस में प्रवेश किया, उसके बॉस ने कहा, मैं तो नहीं कॉल करने ही वाला था तुमने खबर देखिए बिना हमसे पूछे । उन्होंने इसे भी चैनल में चला दिया है । इससे तो बदनामी हो जाएगी । पर जो टीवी में दिखाया जा रहा है वह सही नहीं है । सुबह फिर से यदि कर अचंभित हुआ कि उसके वीडियो राष्ट्रीय न्यूज चैनल में चल रहे थे, वे हताश और निराश हो गया । उसने बताया कि वह उनसे क्यों मिलने आया था । उसने उन्हें सीडी दिखाई । बॉस को अपने प्रतिष्ठित अवसर पर विश्वास था । सोमेश ने उन्हें विश्वास दिलाया कि नहीं, इन सब की जड तक जाएगा और ये पता लगाकर मानेगा की इन सब के पीछे आखिर किसका हाथ हैं । उसे पता था क्या इतना आसान नहीं है और उसके पास कोई और विकल्प भी नहीं था । उस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी । गुस्से मेरे ऑफिस से बाहर निकालकर ऍम हाईवे की तरफ निकल पडा । उसने अपनी है गुप्तचरों की टीम बना ली । निगरानी बढाकर अधिक बुद्धिमान अवसर को लगाना चाहता था । उसके क्वार्टर में कई लोग इस राष्ट्रीय सेवा में लग गए । वहीं मीडिया पुलिस को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड रहा था । हर तरफ से दबाव था पर दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं मिला । दोपहर होनी थी टेस्टी एकदम जगह चलाने लगे । अंतर आॅटो मैं तो छोड कर उसके कमरे में पहुंचा । कुछ ही क्षणों में उसने पहचान लिया । ये जाना पहचाना कमरा नहीं । उसने कहा मॉर्निंग नील ये सीन में है । लिए ठीक वैसा ही था जैसे डीडीएलजे फिल्म में राहत और सिमरन पीकर एक कमरे में पडे रहते हैं । ठीक उसी लहजे में मेरे मुँह से निकला फॅस बहस पडी और बताने लगी कि ऐसा कुछ ही उसने कल रात में भी सोचा था । उसने बात करना जारी रखा और सोमेश के बारे में मुझे शीघ्र पता करने के लिए जोड दिया । इसी बीच पता नहीं दृष्टि को क्या हुआ । उसने मुझे देखते हुए अदा भरी मुस्कुराहट टिकेट दी । उसने बताया कि वह मुझ पर फिदा हो गई हैं । मैंने उसे चेताया पर वह किसी की सुनने वाली कहाँ थी? फिर उसने मुझसे पूछ लिया क्या मैं उसे तनिक की पसंद करता हूँ? मैंने सहमती में हामी भरती उसने मेरे कान के पास आकर बताया, मैं मुझे प्यार करती थी । मैं वहीं खडा रहा । करता भी तो क्या मैं उसे ठेस नहीं पहुंचाना चाहता हूँ । मुझे पता था हम दोनों ने एक दूसरे को पहले से ही कई बार ठेंस पहुंचाई है । इसलिए मैं इस बात को तवज्जों में लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता था । मैं मुस्कुराया और उसके लिए अंदर से कॉफी ले आया । जब मैं रसोई में था मैं जोर से चिल्लाई सो पेश ने कभी मुझे प्यार नहीं किया जहाँ तक उसने कभी इसकी परवाह ही नहीं की । मुझे सिर्फ एक ही चीज की कमी थी । प्यार । ये मत सोचो कि मैं तो मैं आकर्षित करने के लिए अपने सारी सीक्रेट बता दे रही हूँ । मैं तो मैं भी बना मोहब्बत करना चाहती हूँ । मैं बोलती रही, मैं सुनता रहा । मैं उसकी प्रेमभरी बातों को एक कान से सुनता और दूसरे से निकाल देता । मैं उसके लिए कॉफी ले आया । तब हम लोगों ने समाचार लगाया । कुछ वीडियो दिखाया जा रहे थे जिसमें दृष्टि और सोमेश की बहस होती दिखाई गई । कभी मॉल में, कभी कार्य में, कभी सिनेमा में लगभग हर जगह वीडियो भरते थे । पढ जैसे ही दृष्टि नहीं देखा होने लगी फिर डर के मारे कांपने लगी । मैं उसे इस अवस्था में नहीं देख सकता था । मैंने उसे गले लगा लिया तो एक शब्द नहीं बोली । तकरीबन तीस मिनट तक रोती रही । तब एकदम से उठकर पूछने लगी मील कहीं इन सब के पीछे तुम तो नहीं तो क्या थोडा क्या मतलब तो ये सब इतना सटीक समय पर क्यों रहे? मैं समझ नहीं पा रहा समाचार देखूँ बताया जा रहा है कि मेरे और सुमेश के बीच में कुछ गडबड थी और इसके पीछे सोमेश का हाथ बताया जा रहा है । तो पर मुझे पता है तो मुझे यहाँ लेकर आए हूँ और वही गलती थी । इतना बडा सहयोग । तो फिर ये वीडियो सोमेश को किसने भी जी टेस्टी मुझे कुछ नहीं पता था । मैं ठीक तुम्हारी तरह यहीं पर बैठा हूँ । आखिर में ऐसा क्यों करूंगा? तोहरे पति पुलिस अफसर है जरूर किसी ने मौके का फायदा उठाया होगा? हाँ, मुझे भी लगता है मुझे तुम पर शक नहीं करना चाहिए था । मेरे पास हूँ, उसके पास पहुँच गया और वह मुझे प्यार करने लगी । नहीं रुकनी का नाम ही नहीं ले रही थी और बोले जा रही थी कॅश मुझे तुम्हारे साथ चाहिए । मैंने उसे विश्वास दिलाया कि इस बुरे वक्त में भी मैं उसके साथ हूं और भविष्य में भी रहूंगा । अगले चौबीस घंटें हमारे यहाँ किसी के आने की उम्मीद नहीं थी । जेरी अपने काम से दिन का बडा वक्त बाहर ही गुजारने जा रहा था । फिर हमें सोमेश के बारे में पता लगाना था । इस बीच मुझे गौरी से बात करने का बहुत मन कर रहा था । मैंने संयम बनाए रखा । ये कोई बहुत अच्छा विचार नहीं था । यहाँ तक कि उसने भी पिछले चार दिनों में मुझे फोन नहीं किया था । अब मेरी बारी थी । मैं दृष्टि को वह पता लगाने में मदद करूँ जब मैं चाहती थी । जैरी और मैंने अपनी साधारण सी रणनीति बनाई । हमें भाडे की कार से घूमना चाहते थे । हमने हर टेस्ट कार भाडे पर ले ली । हमारे एक वकील दोस्त ने बताया, सोमेश ने पहाडगंज में एक ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया था । उस व्यक्ति है माना जाता था । उसके टीम में एक महिला भी थी । उसने अपने पुलिस अफसरों से उसे एक सरकारी प्रोसीक्यूटर से मैं लाया था । इस जानकारी ने हमारी मदद की पर हम उसके बारे में और अधिक जानना चाहते थे । फिर हमारे दोस्तों ने पुलिस के खबरी के बारे में बताया जो हमारी मदद कर सकता था । पर उन्होंने उससे सावधान रहने के लिए भी चेताया । अच्छा खुस ने उस मुकाबेल का रेट भी बताया और हमें इससे कोई तकलीफ नहीं थीं । हमने अपनी कार रेलवे स्टेशन पर खडी की और रिक्शा से पहाडगंज गए । एक चाय की दुकान पर रह हमें मिल गया । उसने जानकारी देने के हम से पंद्रह हजार रुपए लिए और अपना मौत चुप रखने की हिदायत दी । ये हमारे लिए बिल्कुल नया अनुभव था । हमें बताया गया । सुकन्या एक जर्मन लडकी थी और उसका असली नाम रीना था । वह सोमेश के साथ जासूस के तौर पर काम कर चुकी है । उनकी सबसे बडी उपलब्धि ड्रग रैकेट पकडना था । इस मुखाबिर ने अधिक जानकारी देने के लिए हम से पांच हजार रुपये की और मांग करती । हमने बिना देर किए उसे पैसे पकडा दी है हूँ । उसने उस होटल की डिटेल दे दी जहाँ पर सुकन्या और सुमेश उस रैकेट को पकडने की रणनीति के दौरान जयपुर में एक साथ रुके थे । हम तुरंत लेट गए और वहाँ से जयपुर के लिए निकल पडे । हमने जस्टि को कार्य प्रगति पर है के बारे में बताया । उसने हमें सुरक्षित रहने की सलाह दी । आपके सभी अवसर पूरे जोर शोर से इस केस में जांच पडताल में लगे थे । वहीं दृष्टि के पति सोमेश ने पिछले कुछ दिनों की उसकी कॉल की । रिकॉर्ड निकल वाली पर फिर भी उन कॉल से कोई सुराग नहीं मिला । जांच पडताल के दौरान उसके टैक्सी बुकिंग, क्रेडिट कार्ड इत्यादि चीजों की जानकारी भी निकलवा ली गई । उसमें अंतर इक्षा से बात की जिस नहीं है । बताया कि वे बाहर काम से गई हुई थी और उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है । यहाँ तक कि उसने कोई समाचार भी नहीं सुना । इंडस्ट्री के बारे में सुनते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और उसने जल्दी से वापस आने का वादा किया । सोमेश ने उससे दोस्ती के बारे में कोई भी खबर मिलते ही उसे बताने के लिए कहा । यही सबसे बडी चिंता का विषय था की अभी तक कोई फिरौती की कौन नहीं आई थी । इस अपहरण का उद्देश्य ही नहीं समझा रहा था । इस तरफ हम गाडी चला रहे थे । जैसे ही हमने जयपुर हाइवे पकडा मेरे फोन की बेल बजने लगी । ये तो दृष्टि की कौन थी? उसने मुझसे गाडियाँ आराम से चलाने और जल्दी वापस लौटने के लिए का । जेरी ने मेरी तरफ इस अंदाज में देखा जैसे पूछ रहा हूँ कि तुम लोगों के बीच में क्या खिचडी पक रही है? मैंने उसकी बात यह कहते हुए नकार दिया कि ऐसा कुछ भी नहीं है । श्रृष्टि अपनी शादी से खुश नहीं है और हम लोगों ने जो किया है उससे मैं परेशान है । इसलिए मैं उसे लेकर सचेत हूँ । ऐसे मुस्कुराया जैसे मैं उसे बेस को बनाने की कोशिश कर रहा हूँ । इससे पहले हमें कैसे पकडते हैं? हमने गाडी किनारे खडी की और एक एक बियर भी फिर अपने काम पर निकल लिए । ये वीकडे था तो अधिक भीड होने की उम्मीद नहीं थी । हम मात्र तीन घंटे में जयपुर पहुंच गए । बिना समय बर्बाद किए हम सीधे होटल पहुंचे और उनसे डिटेल मांगी । पर दुर्भाग्य वर्ष हमें कुछ भी ना मिला । मैंने आसपास देखा हर जगह सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था इसलिए रिश्वत देना भी सही नहीं लगा । ये फोर स्टार होटल था । मुझे पक्के तौर पर ये एहसास हुआ कि सोमेश और सुकन्या दोनों भेज बदल कर यहाँ आये होंगे और भिन्न भिन्न नाम रजिस्टर करवाकर ठहरे होंगे । पर हम अपने हर हथियार लेकर तैयार से मैंने तुरंत सोमेश और करीना की फोटो दिखाई और लॉबी में खडे महिंद्रा से पूछा मैं समझदार व्यक्ति था । उसने बाहर जाकर फव्वारे के पास इंतजार करने के लिए कहा । हमारी उम्मीदें चल गई । उसने गौर से फोटो देखी और फिर हंसते हुए बोला हूँ । आज पहली बार कोई व्यक्ति पुलिस वालों की जासूसी करने आया है । मैं भी उस की इस बात पर मैंने उसे बताया । सिर्फ निजी कारणों की वजह से है जानकारी चाहिए । उसने बताया, अगर ये मामला टीवी समाचार के लिए हो तो कोई जानकारी नहीं दे सकता हूँ । मैंने उसे वह लिफाफा दिया जिसमें पच्चीस हजार रुपये थे । ये सब हमारे वकील दोस्त ने सिखाया था । उसने हमें सभी के बता दिए थे । मैंने उस वक्त ये महसूस किया की जिंदगी में एक वकील दोस्त होना जरूरी है । आपको धन खर्च करना पड सकता है पर सब नहीं जाएगा जो आप चाहते हैं । वरना आपको यह तक नहीं पता होगा कि धान कहाँ खर्च करना है । ऍम रुपये मिलते ही गिरगिट की तरह रंग बदल लिया । इस मैनेजर ने हमें वह सब जानकारी दे दी जो हमें चाहिए थी । उसने हमें सुनिश्चित किया । एरीना और सुमेश के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था । वास्तव में कुछ और पुलिस वाले थे जो उसके होटल पर ठहरा करते थे । वापसी करने के बाद जेरी ने मेरी तरफ स्टार्ट निगाहों से देखा उसने मुझे पूछा आखिर तुमने ना अच्छे से मैनेज कैसे कर दिया? जगह बहुत साधारण था । आत्मविश्वास और अच्छा बर्ताव । आपके कई काम आ सकता है । हम बहुत भाग्यशाली थे जैसा कि वहाँ बहुत अधिक भीड नहीं थी । मैं इन सब बारे में सोचता हुआ वापस आ गया । हो सकता है दृष्टि सोमेश को प्यार नहीं करती हूँ क्या? फिर उल्टा दृष्टि को सोमेश की निष्ठा पर संदेह था । अब उसने मुझसे यही बता दिया है कि वह मुझसे प्यार करती थी । मैं समझ सकता था मैंने उसे सौहार्द दिया । पर इतनी जल्दी शायद यही जिंदगी है । आपको पूरी जिंदगी लग सकती है और हो सकता है आपको अमुक शख्स है प्यार ही ना हो । ऍम कभी कभी बस एक कप कॉफी काफी होती है । यहाँ तो ऍम से ही प्यार हो गया । दृष्टि जैसे सुकन्या के नाम से जानती थी । इरीना और सुमेश के बीच कुछ नहीं था । जब रात में हम पहुंचे तो हमने फ्लैट का दरवाजा खोला । दृष्टि हो चुकी थी । वाइन का गिलास उसके बगल में रखा हुआ था । एसी कमरे को बहुत ठंडा किए हुए था । जब की बाहर इतनी गर्मी नहीं थी । मैंने ये अनुमान लगाया । वाइन की वजह से उसका शरीर का तापमान बढ गया होगा । शायद उसको मेरी महक मिल गई थी । उसने मेरी उंगली पकड ली और वहीं ठहरने के लिए निवेदन किया । जेरी के पैरों तले जमीन खिसक गई । जैसे ही उसकी नजर जैरी पर पडी मैं सचेत हो गई । तुरंत उसने अपनी टोन बदल ली और पूछने लगे तुम दोनों ही पर हूँ ताकि तुम लोगों से कुछ बात हो सके । जैरी हम दोनों को अकेला छोडकर जाना चाहता था पर हम ने जोर दिया तो मैं कुछ देर बैठ गया । मैं दृष्टि के चेहरे के भाव पड रहा था । एक बार वो सही है । जानकार अचंभा हुआ । उसने मुझे कहा मील हो सकता है । मैं इन सब के लिए तैयार हूँ । मुझे ऐसा विश्वास था कि तुम कुछ तो बताओ की की उन दोनों के बीच में दाल में कुछ तो काला है । मुझे इस बात का पक्का विश्वास था । मैंने इस बात को अंतर से भी नहीं बताया था । बस अंदर पाली हुई थी । आज तुमने जब मुझे ऐसा बताया तो मैं कुछ भी प्रतिक्रिया देने की हालत में नहीं थी । हार चुकी हूँ । मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है । मैं क्या करूँ । शायद बहुत देर हो चुकी है । लौट पाना मुश्किल है । सच कहूँ मैं उसे पसंद नहीं करती हूँ । हम वहीं खडे रहे । सच कहते हैं इंसानी भावनाओं की तीव्र शक्ति और किसी संबंध का बदसूरत सत्य खानी । फांसी चहारदिवारी के अंदर ही होता है । जरा सोची है । अगर दुनिया देखें तो सोमेश और दृष्टि ने ऐसा कुछ भी गलत नहीं किया है । पर अगर दृष्टि की नजरिये से देखें, उसने जिस दुनिया की कल्पना की थी, उसके जीवन में उसका कभी अस्तित्व ही नहीं रहा । मैं सिर्फ उम्मीदों में जीती रही । जब उसने सोचा कि उसे प्रतिक्रिया देने का कुछ मौका मिला तब खोदा पहाड निकली चुहिया की तर्ज पर कुछ नहीं निकला । जिस दिन से खुश होना चाहिए था, मैं निष्क्रिय थी । यही तो किसी संबंध का जटिल भाग है । इसकी शुरूआत सिर्फ प्यार से होती है और जब प्रेम को ढंग से संभाला ना जाए तो वह जटिल बन जाता है । बिहार में छोटी छोटी बातें बहुत महत्वपूर्ण होती है । मुझे अपने दांपत्य जीवन का डर सता रहा था । इस वक्त मैंने दृष्टि से अपना हाल ए दिल पर क्या खुश नहीं मुझे साफ ना दी की मैं परेशान ना हो फिर मेरी सारी इच्छाओं की पूर्ति करेगी । ये तो और भी जटिल बनता जा रहा था । मैंने उसे चेताया कि हम दोनों का कोई भविष्य नहीं है । उसने मुझसे धैर्य रखने के लिए कुछ ऐसा कहा, कोई जल्दी नहीं है तो अपना समय ने लोग मेरा इंतजार करेगी । मैंने फिर से उसे समझाने की कोशिश की और उसने फिर से वही जवाब दिया । ऍम है उसने मुझे कहा है मुझसे प्यार करती है, ये है, उसकी इच्छा है और मैं कौन होता हूं उसकी इच्छा पर पाबंदी लगाने वाला भी सही थी है । जैरी तब तक कमरे से बाहर निकल गया था । मैं कोई टीनेजर नहीं । सुनील ही तुम कोई कॉलेज में पढने वाले लडकी हम समझता रहे हैं । मुझे पता है कि प्यार क्या होता है तो तुम्हारे साथ मैं इसे महसूस करती हूँ । हूँ ठीक ऍम मैंने कई बार तो मैं बातें बता नहीं आप बाहर बार उसी बात को दौराने से कोई फायदा नहीं । मैं सच में गौरी से बेपनाह इश्क करता हूँ और हम दोनों के बीच में जो हुआ था शायद इसे सिर्फ आकर्षण कह सकते हैं । ये तुम्हारे लिए आकर्षण होगा नहीं मेरे लिए प्यार है । मैं तुम्हारी धडकनों को महसूस करती हूँ । ये तो बादल पाॅवर हाँ ये हिंदी फिल्मों की लाइनें अच्छी थी तो तुम्हारे प्यार में पागल हो गई हूँ । अब ये प्यारभरी लाइन तुम्हारे लिए तो निकलेंगी । मैं हसना चाहता था यह मोहब्बत थी ही नहीं । मुझे पता था अगर मोहब्बत होती तो मुझे भी महसूस होती है । इस से पहले हम सोते इससे पहले हम सोते जैरी को हमने फिर से कमरे में बुलाया और दृष्टि को अगली सुबह भिवाडी छोडने का प्लान करने लगे । अगले दिन की कहानी बोली गई थी । अगले सुबह छह बजे हमने उसे भी गाडी के एक चाय वाले की दुकान के पास छोड दिया । ये बात हमें पक्के तौर पर पता थी । यह सुरक्षा जगह

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शक कर तू कि सितारों में आग है, शक कर कि सूरज घूमता भी है, शक कर कि सच भी झूठा है, मगर मेरे प्यार पर कभी शक न करना। writer: अरविंद पाराशर Voiceover Artist : Mohil Author : Arvind Parashar
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