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किसी भी लड़की के लिए बहुत जरूरी होता है कि शादी के बाद उसे एक अच्छा वर और एक अच्छा घर दोनों मिलें। Script Writer : Mohil Author : Umesh Pandit "Utpal"
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भारत दो सुनील वक्त आ गया अरे गूंगा हटाओ ऍम एक अपने आप को क्या देख रही हो? वो समझा भला मेरी चंदा से तुम कैसे तुलना कर सकती और कहाँ वो स्वर्ग की पारी हूँ तो धरती की पकडी सुनील वक्त आ गया । उसकी मस्तिष्क पर शराब का नशा छाया हुआ था । बोझ है, बदबू आ रही थीं । नीलों को कुछ भी समझ नहीं आना था । हम तो है प्रेम का बीच बोले ही वाली थी, पर ये उसके भाग्य दाता किसान को क्या हो गया? सहसा उसके दिमाग में एक सवाल खटका । झंडा से उसका क्या संबंध हैं? क्या मैं चंदासी प्यार करता है तो आग रात में भी कोई पति शराब पीकर नशे में अपने पत्नी के पास आता है । उसे क्या सोचा? क्या विधाता उसके साथ कोई छल तो नहीं कर रहा है? क्या उसके पिता ऐसे वर्क की तलाश में थे? क्या वह जानबूझ कर अपनी बेटी की जिंदगी को नरक में डालना चाहते थे? बारी बारी से कई सवाल नीलू के मानस पटल पर चक्कर काटने लगे । हीरो बेचैन हो गई । उसकी आत्मा कर हाउथी किस जन्म के पाप ने उसे शादी की पहली रात ही गंदी बातों को सुनने के लिए मजबूर कर दिया । कोई भी पत्नी अपने पति के अत्याचार को सहन कर सकती है, लेकिन वह अपने पति से किसी गैर नानी का नाम सुना नहीं चाहती है । नीलू रो पडी । उसका दिल भविष्य की समस्या का आभास कर धडाक उठा । उसकी स्थिति ऐसी हो गई । धनु काटो तो खून नहीं, वो साली होती है । ऐसा लगता है कि बाप मर गया । अगर माँ बाप की याद आती है तो वही जिंदगी बिता देती । सुनील उसके रोने की आवाज उनका रुखे स्वर में बोलता गया । अरे साले! बुड्ढे चौदह बाजी करने आया था । भेंटी के लिए झोली फैलाने आया था । अरे बोल बोलना क्या हो गया? हरामजादी की बच्ची लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे? जांच भर नहीं होती रहेगी । आपकी लाल हो गई । आसोज है । वजन भी गया । फिर भी मन को शांति ना मिली । करवटें बदलती रही । फिर भी नींद नहीं । सुनील कमरे से बाहर हो गया था । पक्षी छह जाने लगे । वसंत की मादकता में कोयल कूकू करने लगी । अच्छा सूर्य अभी पूरा उदय नहीं हुआ था । आकाश में कुछ फॅस नहीं लूट बैठी । उसकी पालकियां बहुत हो गई थी । गर्दन में दर्द हो रहा था । आखिर सूची हुई लग रही थी अकेले रहे कमरे में अपने भविष्य के बारे में सोच रही थी । राहत की घटना से पूरी तरह भयभीत हो गई थी । कभी मन करता की मैं लौट जाएगा । लेकिन दिल धडकने लगता घर में माँ पिताजी पूछेंगे तो क्या जवाब होंगी? कैसे कहूं की सुनील शराब पीते हैं, रुखे स्वर में बातें करते हैं लेकिन अब तो यही मेरा अपना घर है । इसी घर में मुझे जिंदगी गुजारनी । अनेक परिस्थितियों से टक्कर लेना है । उस से अच्छा तो यह है कि आत्महत्या कर लू पर क्या इसका पता नहीं लग जाएगा । अगर पता लग गया तो लोग यही सोचेंगे ना की लडकी बदचलन थी ये अपने पाप को छिपाने के लिए उसने ऐसा किया । हो सकता है कि सुनील ने नशे में मुझे भला बुरा क्या दिया । उसे भी तो सुधारा जा सकता है । उसकी आदत का भी अंत किया जा सकता है । अब तो मैं उसकी पत्नी हूँ । किसी गैर लडकी की उपेक्षा उस पर मेरा पूरा अधिकार है । उसे सही रास्ते तो मैं दिखाई सकती हूँ । लोग कहते हैं कि जब पति गलत रास्ता अपनाते हैं तो पत्नी उसे सही रास्ते का मार्ग दिखाती है । अपने प्यार और सेवा के बल पर उसका दिल जीत सकती हूँ जिसे इतना प्यार होंगी की मेरे साथ किसी तरह का नैतिक काम नहीं करेगा । नारी तो प्यार से ही किसी का दिल जीत लेती है । पुरुष के दिन में अपना प्यार वर्ष लेती है । अपने आदर्श पर चलकर असंभव काम को भी संभव बना देती है । क्या वह मुझ से इसी तरह रोज दिन रात बातें करेंगे? क्या मैं रोज दिन उसकी अश्लील बातें होंगी? अगर वैसी तरह पेश आएंगे तो मैं क्या करूंगी? क्या घर वाले ये सहन कर सकेंगे? हो सकता है कि उसकी निगाहों में मैं अच्छी नहीं, लेकिन साथ ससुर तो मेरे साथ ऐसा बर्ताव नहीं करेंगे । पिताजी तो कहते थे कि उनका स्वभाव बहुत अच्छा है । अगर मैं उन्हें पसंद नहीं होती तो बिना तिलक के वो शादी नहीं करते । आप भारतीय दरवाजा खटखटाते हुए हैं । लीला बोली, नीलू का तेल थोडा को था । बच्चा होगा । पलंग पर से धीरे से उठकर ड्रेसिंग टेबल के पास चली गई । क्षमता दर्पण में अपने चेहरे को देखते ही उसका दिल दौड । आप उठा आंखें काफी लाल हो गई थीं । देखेंगे तो क्या सोचेंगे । झटपट अपना अच्छा संभाली । लगभग कर दरवाजे की ओर बडी । अरे वो भी दरवाजा तो होना कब तक सोती होगी । नींद पूरी नहीं हुई क्या एक ही सांस न लीला ने कई सवाल उससे कर बैठे । उन दोनों के बीच बंद दरवाजे दीवार का काम कर रहे हैं । नीलू दरवाजे के पास खामोश खडी थी । दरवाजे खुले लीला बाबी को अपनी बाहों में समेट ऐसा उसके दृष्टि उसके चेहरे पर पडी । लगता था कि घूंघट के बीच एक बुझा हुआ दीपक रखा हो । आंखों में नमी थी, फोटो पर न लाली थी । चेहरे पर ना को चमक था । भागे तो हरी तब तो ठीक है ना । लीला ने पूछा तो नीलू बहुत सी खडी रही निरुत्तर वो फिर ली क्या? मुझसे रूठी हो । फिर लीला ने पूछा लीला को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था । नारे की दर्जा बिगडी हुई है । आप ही बताओ ना कुछ तो मैं क्या हो गया? सुनील भाई है, राज में नहीं थे क्या? जित करती हुई लीला ने लगातार दो सवाल पूछे । नीलू रोने लगी । लीला ने झट अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया । फिर भी रेसेस क्या भरने लगी? मेरी किस्मत होती है भर्राए स्वर में नीलू बोली लीला को समझते हैं, कुछ भी देर ना लगे । हाल में जरूर कुछ काला है । बोलो ना आखिर बात क्या है । उसके बाहों को थामते हुए लीला ने पूछा कल की खिलाडी तो फॅमिली हैं । पुलिस जाकर पूछता हूँ तो उनका क्या ब्लॅक ऍफ का बल्कि पाटकर कमरे से बाहर हो गए । फिर भी मैंने जो उन्हें गले में नीलू ने रुक रुककर का पूरा बोल भी नहीं आ सकी थी की लीला उसके गले से लिपट गई । धुनार्इ का तेल एक हो गया । अखिल नानी की गति नारी न जाने की तो कौन जाने का । पुरुषों के बंधन को तोडने की शक्ति नारी में कहा है । रहे तो अपनी सहनशीलता के बल पर ही मुक्त जीवन व्यतीत कर सकती है । उसे तो जन्म से ही सब कुछ सहन करना पडता है । भाभी तुम चुप रहूं मैं भैया से बात कर के आती हूँ ये कहकर लीला तेजी से सुनील के कमरे की ओर बढे ऍम ऐसा नीलू चिल्लाओ थी । लीला के बढते पांच हो गए । मैं पीछे मुडकर बेबस पत्नी नीलू को देखती है लेकिन यह है उसकी स्थिति को पहले ही समझ चुकी थी इसलिए उसकी आवाज पैर वैर रोकना उचित ना समझे । भैया दरवाजा खोलो । दरवाजा खटखटाते हुए लीला बोली कमरे में छुट्टी छाई हुई थी । साढे सात बज रहे थे फिर भी सुनील ना उठाता । मैं कहती हूँ दरवाजा खोलो भैया । जोर से दरवाजा खटखटाते हुए लीला फिर से बोलिये । ऐसा उसकी नींद टूटी लेकिन हालात के कारण है । उतना नहीं चाहता था और आदेश होने दो । ये कहकर सुनील अच्छे लेता रहा । अरे बाबा, पहले दरवाजा तो सारा खोल दो । बाद में लेते रहना । लीला फिर चलाई अच्छा खोलता हूँ । सुनील ने कहा । दरवाजे के सिटकनी को जल्दी से खोलकर तेजी से पलंग पर जाकर लेट गया । उसे समझ में नहीं आ रहा था । आज नीलू इतना सवेरे कौन सा सवाल लेकर उसके पास आई है । जांच वाली घटना को मैं भूल गया था । अपनी पत्नी के साथ उसने जो कुछ दो व्यवहार किया, इसके बारे में उसे कुछ भी ना पता था, क्योंकि वह नशे में था । लीला तेजी से कमरे में प्रवेश करती है और उसके पलंग के निकट आकर बैठ गई । ऐसा उसके दिमाग पर एक झटका लगा । उसे शराब की खानदान महसूस हो रही थी । भाभी की कही हुई बातें उसे याद आ गई । उसने कभी भी अपने भाई के मुख से शराब की बदबू का आभास नहीं किया था । वह अनजान थी कि अखिल भाई ने यह काम जानबूझ कर क्योंकि क्या नहीं मालूम हैं, उसे नफरत है? नहीं, नहीं नहीं ऐसा तो नहीं हो सकता है ऍम आखिर उसकी बागी ने क्या दोष है । यह तो पवित्रा नहीं हैं । देखने में भोली भाली हैं । चाल चलन भी बहुत अच्छा है । उसका कुछ भी दोष नहीं । सारा दोष उसके भाई का ही तो है । शादी की पहली राहत शराब पीकर अपने पत्नी के समक्ष नहीं आना चाहिए था । तरह तरह की भावनाओं में उलझी रही, कुछ पूछने का नहीं । उसे साहस नहीं हो रहा था । फिर भी उसे कुछ कह रहा था भैया एक बात पूछूं हिम्मत करके लीला बोली हाँ कौन सी बात है? आंखें मलते हुए सुनील ने पूछा आप रात में कहाँ हुए थे? देखना नहीं हूँ । मेरे कहने का मतलब है कि आप रात में भारी की कमरे हम समझ गया । यही कहना चाहती हो ना की जांच में मैं नीलू की कमरे में गया था या नहीं । धान अरे आज आज में मैं देर लौटा था इसलिए जाना उचित नहीं समझा । लेकिन आप ने ये सोचा किए रात वह कैसे गुजारेगी? आप जानते हैं कि पति और पत्नी के प्रेम का बीच सुहागरात में ही अंकुरित होता है । उसका जरा भी ख्याल नहीं रखा आपने । जब आप उसके पास गए थे तो इसमें झूठ बोलने से आपको क्या फायदा है तो उनका तो मैं मैं सबको जानती है भैया आपने को धोखा दे सकते हैं लेकिन मुझे नहीं । नीलू अभी नवेली डॉलर है हैं इसलिए उसे झूठा बाना कर सकते हैं । उसे भली बुरी कह सकते हैं । शराब का नशा उस पर उतार सकते हैं । तुम कहाँ जा रही हो? बंद करो अपनी जवान मैया शराब का नशा भावी बर्दाश्त कर सकती हैं लेकिन मैं नहीं । मैं इतना कह देती हूँ कि अगर नीलों का भविष्य खराब होगा तो उसकी जिम्मेदार आप होंगे, हमारे घर वाले नहीं । यह कहकर डीलों तेजी से कमरे से बाहर हो गई ।

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किसी भी लड़की के लिए बहुत जरूरी होता है कि शादी के बाद उसे एक अच्छा वर और एक अच्छा घर दोनों मिलें। Script Writer : Mohil Author : Umesh Pandit "Utpal"
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