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Part 19

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लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
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मंत्री जी ने आज का सच पत्रिका की एक प्रति हाथ में लिए भोजन कक्ष में प्रवेश किया जहां सचित्रा अपनी माँ छोटी बहन के साथ पिता जी का इंतजार कर रही थी । मंत्री जी ने सुचित्रा को पत्रिका देते हुए कहा हो इसमें शिवा काल एक आया है शांति की खोज । मैंने अपने आत्मबल को अंत जल्दी में प्रज्वलित रखने का मंत्र भस्म अच्छा नगनी से लिखा है । सर से विनम्रता हूँ और अभय है जनता मिलती है एकता और समनव्यक के लिए न्यायोजित बलिदान भी कम है । अनुव्रत की आस्था अहिंसा में हिंदुस्तान के पास जब तक हिंसा की संपत्ति सुरक्षित है, भौतिकवादी शक्तियां होने पर आज नहीं कर सकती । कितने उच्च विचार है ना इसके सचित्रा वास्तव में यह कातिल नहीं हो सकता हूँ । तुम्हारी कानूनी प्रक्रिया कहाँ तक आगे बढी । सुचित्रा ने कहा, पिता की हमने सेशन कोर्ट में अपील की तथा अनेक सबूत जुटाए । वकील भी हमारा तेज था किंतु असली अपराधी के ऊपर तक पहुंचे इसीलिए ही हमें अब तक सफलता नहीं मिली है । हमारी वह अपील अमान्य हो गई । हमने हाई कोर्ट में भी अपील की वो भी अस्वीकृत हो गई है । वो लडकी भी गवाही देने सामने आने से घबराती है । उसे धमकियां भी मिल चुकी है । पिता जी अगर गुरु जी की शीघ्र रिहाई नहीं हुई तो उनका ये वरिष्ठ खराब हो जाएगा । ऍम की परीक्षाएं आने वाली है अब तो आप को ही कुछ करना पडेगा । मंत्री ही ने पूछा तुम लोगों ने क्या कदम उठाने का सोचा है? सुचित्रा ने कहा हम बहुत ने आशा हमें कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा है । अभी बताइए हाँ के कैसे बढे? मंत्री जी ने कहा तो चित्र जबसे तुम्हारे शिक्षा के दीवाने आना प्रारंभ किया है तब से मैं उसे जानता हूँ । लडका वाकई निर्दोष है तो मैं कभी गलत का अन्याय का पक्ष नहीं लेता हूँ । कभी किसी की सिफारिश नहीं करता हूँ तो शिवा समाज का भूषण है । उसका जेल में सडना हमारे समाज की व्यवस्था है । तो अब तुम सुप्रीम कोर्ट में अपील करूँ । अपील खारिज हो जाती है तो हम उन अपील करेंगे अगर वह भी अस्वीकृत हो जाती है तो फुलबेंच की अपील करेंगे जिसमें आठ से दस न्यायमूर्तियों के बैंक चिंतन मनन करके अपना फैसला सुनाएंगे । कहाँ बडा मुश्किल है किंतु तुम्हें हिम्मत नहीं हारनी है तो मैं अपने पिता पर भरोसा रखूं जीत सकते की होगी । सुचित्रा को पिताजी की बात से बडा सम्मान मिला । मन ही मन उसका ही अपने पिता जी के प्रति श्रद्धा से झुक गया । खुश होकर वह बोली ॅ कोर्ट में बहुत भीड भाड थी । राजा आलोक कृष्णा सुझाव सुजाता बता कहीं अब्दुल्ला साहब, हरी सेवक जी एवं सत्यवान वो सब मौजूद हैं । थोडी देर में सुचित्रा भी वकील साहब गए । साठ आ गई भी । ग्यारह बजे फुलबेंच की सुनवाई प्रारंभ हो गयी । लगभग दो घंटे बाद उन्होंने अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया । तमाम सुबूत तो वह गवाहों के आधार पर श्री शिवमंगलसिंह को प्रोफेसर कुलकर्णी हत्याकांड में निरापराध पाया गया है । अदालत होक में देती है कि शिवमंगलसिंह को बाइज्जत बरी किया जाए । अदालत पुलिस को प्रोफेसर कुलकर्णी का असली कातिल तलाशने का भी हो काम देती है । सबके चेहरों पर खुशी का पारावार ना था । सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर सब तिहाड जेल पहुंचे । वहाँ पहले से ही खबर पहुंची हुई थी । शिवमंगलसिंह को सभी कैदियों ने बडे दुखी है । वैसे विदाई दी । जेल के अधिकारियों ने शिवमंगल को अपने झेल का वातावरण सुधारने तथा कैदियों का हृदय परिवर्तन करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा भाभी जी कभी कभी हमारे जेल में आकर कैदियों को शिक्षा देते रहेगा । वे स्वयं बाहर तक आएँ और आपके समक्ष और सबके समक्ष बोले । इस जेल में ऐसा कैदी पहली बार आया है जिसके जाने से सारे कैदी वाॅ उदास हो रहे हैं । नए जेलर ने भी शिवा के मंगलमय जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं । सोचने सबसे पहले आगे बढकर अपनी जिगरी यार को गले लगा लिया । वो सचित्रा वास हो जाता । नहीं ऍम हूँ । अब्दुल्ला साहब ने माला पहनाई फिरे के करके अपने माला पहना ही और पुष्पगुच्छ भेंट किया । अब सब शिवा के घर पहुंचे । ऍफ पाल के पसारे अपने प्रिय पुत्र का इंतजार कर रहे थे । महाने शिवा को करे जैसे लगा लिया । अश्रुओं की धारा चली बोली बाॅल को किसकी नजर लग गई । अब दुनिया से बचाकर रखूंगी अब नहीं चाहे क्योंकि कहीं सेवाकार्यों में शिवानी माँ पिताजी को प्रणाम किया । सत्यवान ने शिवा को गले लगा लिया । फिर सब अतिथियों बैठने का आग्रह किया । सचित्र आपने साइन मिठाई के डब्बे लाई थी । उसने सबको मिठाइयाँ खिलाई हूँ । शिवा ने पूरी टीम को धन्यवाद दिया । शिवा के माता पिता जी ने सब का बहुत बहुत धन्यवाद किया । विषेशकर सुचित्रा का सबने शिवा की सलामती की दुआ मांगी और अपने अपने घर को निकल पडे ।

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लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
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