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Chapter 17

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औरत कभी उधार नहीं रखती। मौहब्बत,इज्ज़त,नफ़रत,वफ़ा सब दोगुना करके लौटाती है। ऐसी ही रीटा सान्याल थी। वह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही खतरनाक भी। अपनी माँ की तबाह हो चुकी ज़िन्दगी का बदला लेने के लिए उसने अपने दिमाग की बदौलत कई सारे ऐसे मर्डर की प्लानिंग रच डाली कि पोस्टमार्टम तक में साबित न हो पाया कि वह मर्डर है। कानून ने भी उन्हें साधारण मौत समझा। आखिर मैडिकल साइंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स और पुलिस इन्वेस्टीगेशन को कैसे चकमा दिया उसने? आपने सोचा भी न होगा कि किसी के मर्डर की इस तरह भी प्लानिंग रची जा सकती है। दिमाग का ज़बरदस्त चक्रव्यूह। यह बेहद शानदार थ्रिलर है, जिसे आप बार-बार सुनना चाहेंगे।
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अध्याय सत्रह चौबीस घंटे पूरे होते ही जूलिया के ऊपर से हेरोइन का नशा उतरना शुरू हो गया तो फिर धीरे धीरे होश में आने लगी । बेचैनी पूर्वक जोर जोर से अपनी मुठ्ठियां खोल बंद कर रही थी और एडियां रगड रही थी । वहाँ से तमाम शीर्ष है इसीलिए हटाए जा चुके थे ताकि होश में आने के बाद भी जूलिया को ये राज बताना चलेगी । उसका चेहरा बदला जा चुका है । इसी हो जा रहा है सचिन देवडा उसकी बेचैनी देख कर खुश पता है फॅमिली या उसके पास आकर खडी हो गई । उसी क्षण जो लिया ने बहुत धीरे धीरे अपनी आंखें खुली तथा फिर हैरानी सपने आस पास के वातावरण को देख के लगी मैं मैं मैं हूँ उसकी मुझसे बहुत बिखरी बिखरी शाम तक निकले तो मैं इस समय मेरे तो उसके घर में हूँ । दस या उसकी सिरहाने बैठते हुए बोली इनसे मिले । ये मेरे दोस्त है । मिस्टर सचिन हूँ । सचिन देवडा जूलिया की तरफ देख कर मुस्कुरा लेकिन चाहते हुए भी उस क्षण जूलिया के चेहरे पर मुस्कान नहीं आ सके । मैं यहाँ कैसे आ गई । यूलिया के स्वर में अभी भी हैरानी कूट कूट कर भरी थी । मैं तो शायद होटल में थी हाँ मैं मैं होटल में थी । कॅश तुमने शॅपिंग के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड रखें । फॅमिली मुस्कुराकर कहा जानती हूँ तुमने होटल के अंदर भी हंगामा बरपा करके रख दिया तो होटल में ऐसी रियल और लाजवाब एक्टिंग की की । वहां मौजूद तमाम लोग यही समझने लगे कि तुम सच में डाॅॅ तो बल्कि वहाँ तो एक भयंकर आफत और भी आ गई । किसी आफत होटेल वाले पुलिस को बुलाने लगे । छुट्टियाँ डाली दस बडी मुश्किल से । हम तो मैं वहाँ से लेकर भागे । अगर कहीं वहाँ पुलिस आ जाती तब तो न जाने क्या हो जाता ही चीज जूनियर के चेहरे पर दहशत के निशानों के इतना बडा हंगामा मच गया और मुझे पता तक नहीं मुझे कुछ याद तक नहीं । इस बात की हैरानी तो हमें भी अभी भी फंसे बोली की तो मैं कुछ पता नहीं है । बाकी ये तो कमाल ही हो गया हूँ । एक का एक जूलिया ने अपनी चेहरे कुछ हुआ और मेरा ये ऍम क्यों लग रहा है? तो मुझे ऐसा लग रहा जैसे एक दूसरे का चेहरा तुरंत ही जूलिया अपने चेहरे को टटोल टटोलकर देखने लगी । जबकि जूलिया के शब्द सुनकर उन तीनों के दिमाग में विस्फोट हुए और ऍम तुम तो तुम हजार एक लडकी के आर्थिक करते करते ना सीढियों से गिर पडी थी । इसीलिए तुम्हारे चेहरे पर कुछ मामूली खरोच आ गयी । बीटा सानिया तुरंत बोली ईज अपने चहरे को ज्यादा मच्छू वरना खरोंचे और भी बढ जाएगी । डीटा सान्याल ने जो लिया के हाथ उसके चेहरे से हटा दिए । लेकिन जूलिया के आंखों में हिरानी की चिंता तब भी बरकरार रहे, उसे न जाने की ऐसा लग रहा था जैसे उसके साथ कोई अनोखी घटना घट चुकी हूँ । किरपाराम मूलचंदानी ने खूब भरपेट खाना खाने के बाद एक ग्लास भरकर पानी दिया तथा फिर वहीं कुर्सी पर बैठे बैठे तो लिए से हाथ पूछे पेट भर गया की पर हम उषा हस्ती में बोली, बडी मेरा पेट तो भर गया यानी के पराठा मूलचंदानी भी उसको है । लेकिन लगता है तेरा पेट अभी तक नहीं भरा जो पेट इतनी जल्दी भाषाएँ तो पे थी । क्या हुआ वो बात कहकर उषा फिर हसी बढिया आहिस्ता हस आहिस्ता अगर कोई बाहर तेरी आवाज सुन लेगा तो हंगामा हो जाएगा । कोई सूचिका घर के दरवाजे पर तो ताला लगाए लेकिन अंदर से हँसी थकते की आवाज आ रही हैं । पूछा ने तुरंत अपना मुंह बंद कर लिया । तब तक वो भी खाना खा चुकी थी । वाणी बात बोलूँ तुम दो बात बोलू । किरपाराम जब तुम खाना बना रही थी कितना? मूलचंदानी ने कहा तो मैं उस तीसरी लडकी के बारे में बडी सीरियस सोच रहा था जिसका बकरी ने चेहरा बदल डाला है । फिर किस नतीजे पर पहुंचे? बडी किरपाराम ओ चंदा ने आगे कुछ हो गया तथा बडी सस्पेंस कूल अंदाज में बोला मेरे को तो ऐसा लगता है कि ये तीसरे लडकी उसी लेते आना । गुंजाल दस की बेटी है जो गोवा की बहुत बडी बिजनेस टाइकून है, फिल्म थी, रिच है और वहीं जिसकी करोडों की दौलत ये शैतान मंडलीय खराब करना चाहती है नहीं । फिर बारामूल चलाने की बात सुनकर ऊषा सकपकाई उसने बडे अचंभि से उसकी तरफ देखा क्यूँ नहीं? क्या मैं कुछ गलत बोला? नहीं ही काम बिल्कुल ठीक हो लेकिन पर हम ऊषा का विस्मयकारी स्वरूप था । वहाँ कई तुमने बडी मौके की बहुत सोची है । लेकिन एक बात मैं नहीं समझ पा रही क्या अगर ये सचमुच सेलेरिया आना चाहिए जिसकी बेटी है तो भी इसे यहाँ लेकर क्यों है और ये मैं कुछ कुछ दिन की प्लानिंग समझता हूँ । फिर बारामूल चलाने बेहद उत्साहित होकर बोला मेरे को तो लगता ही नहीं अब ये जरूर इस लडकी कम ऑर्डर करेंगे । होटल पूछा कि मुझे सिसकारी छोटे आम ऑर्डर । लेकिन यहाँ एक और सवाल जान मिली रहा । पूछा बोले अगर ये नहीं इस लडकी का मुंडन कराना था तो फिर उन्होंने इसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी क्योंकि इसका चेहरा है क्यों? मतलब? अब किरपाराम ओलचना ने भी उलझ गया । बडी कुछ समझ नहीं आ रहा । एक आई को पूरी तरह झुंझलाकर बोला आखिर क्या माया जाल नहीं क्या आ रहा है? नहीं लेकिन एक बात तो तय है क्या ऍम सेवी पर्दा उठेगा । जल्दी तमाम गुत्थियां सोचेंगे ये तो है ऊषा धीरे धीरे कर डर नहीं लाने लगे लेकिन वो अभी भी बीच है । बहुत थी । इस बात में उसकी बेचैनी काफी बढा दी थी कि वो लडकी मेरे आना गुंजाल जिसकी बेटी भी हो सकती है । वक्त गुजर रहा था । बहुत धीरे धीरे अपनी रफ्तार से वो दो दिन भी बंक लगाते हुए छोडकर एस बी जूलिया के चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी बिलकुल पक्की हो चुकी थी । सबसे बडी बात ये थी कि जूलिया को उन दो दिनों में ये राहत पता नहीं चल पाया कि उसका चेहरा बदला जा चुका है । अलबत्ता तो अपने चेहरे पर खिंचाव की शिकायत लगातार करते रहे । उधर किरपाराम मूलचंदानी और उषा ने भी अपना काम रहे गिला किया । उन्होंने उनकी बातचीत के कुछ और भी तैयार किए तथा जूलिया के नए चेहरे के साथ उन सब की तस्वीर खींची । कुल मिलाकर वो अपने पास पुख्ता सबूत इकट्ठे करते जा रहे थे जो आने वाले दिनों में उनके बहुत काम आने वाले थे । फॅमिली अभी भी एक दिन रात के नौ बजे ठीक आसानी से बोली आज हम कहीं घूम कर आते हैं । जैसे भी हमें यहाँ पडे पडे दो दिन हो गए अब बिलकुल ही बात है । सचिन थोडा भी फौरन बोला वाकई आज तो मैं कहीं घूम आना चाहिए । बाहर की थोडी बहुत हवा लगेगी तो दिल भी पहले गा तंदरुस्ती भी ठीक होगी । जूलिया जो समय कुर्सी पर बैठी धीरे धीरे चाय की चुस्कियां भर रही थी । उन दोनों की बात सुनकर उसके अंदर कोई उत्साह नहीं जाएगा । निरंतर ड्रग लेते रहने के कारण वह उत्साह जैसी चीजों से मिल और दूर हो चुकी थी । अब वो सिर्फ हाड मांस की एक निर्जीव सी गुडिया थी । क्या बात है जो लिया भी भी रसिया बोली तुमने रीता के बाद का जवाब नहीं दिया लेकिन हम घूमने के लिए कहाँ चाहेंगे? जूलिया ने चाय का मीटिंग खून भरा तथा फिर कपडे टेबल पर रखते हुए कहा हम ड्राॅप में चलते हैं । रीता सानिया तत्काल बोली भला हमारे वास्ते घूमने के लिए उससे बढिया जगह क्या होगी? वैसे भी अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं है । सुविधा जब तुम्हें सुभाष चोपडा जी के सामने स्क्रीनटेस्ट देना और उन्हें अपनी आतंकी महारत दिखा नहीं । इसलिए जितनी ज्यादा से ज्यादा रिहर्सल तुम कर लो वो तुम्हारी फायदे में रहेगी । नहीं था । बिल्कुल ठीक कह रही ॅ उसकी हाँ में हाँ मिलाई । फॅमिली घूमने जाना चाहिए । ठीक है जो क्या बोलते हैं ऐसा तो मुनासिब समझना हो गई । तुम बहुत अच्छे ऍम । बेहद उत्साहित होकर उसके गांव का चुम्बन लिया था । तो फिर चल चलती हूँ मिस्टर सचिन क्या आज तुम भी मेरे साथ चल रहे नहीं भाई, मैं तो यही ठीक सचिनदेव ना बोला । पैसे भी यहाँ कोई ना कोई एक जना तो रुकना चाहिए । पूरे घर को इस तरह अकेला छोड कर जाना मुनासिब नहीं होगा । ठीक है तो ये रहो हम तीनों सहेलियां चली जाएंगी । फिर तीन खूब सज धज कर वहाँ से बाहर निकली किरपाराम, मूलचंदानी और उषा उस क्षण भी उन पर नजर रख रहे थे । वो समझ नहीं सके इतनी रात को ये तीनों लडकियां ब्राॅक के क्लब में किस लिए जा रही है । नजदीक के पाकिस्तान से उन तीनों ने पकडा था । फिर ड्राइवर को अंधेरी वेस्ट की तरफ चलने के लिए कहा । तभी एक छोटी सी घटना घटी । उस टैक्सी के शीर्षक काले रंग की थी । जूलिया जब दरवाजा खोलकर उस टैक्सी में बैठने जाहीर रही थी, तभी बिल्कुल अनायास ही उसकी नजर शीशे की तरह फट गई है । शीशे में अपना चेहरा देखते जूलिया, क्योंकि उसे मान लो बिजली का नंगा तार छूट गया है । ये ऍम जूनियर के मुझे ठीक नहीं । आप कोई भी फॅमिली को शीशे के सामने से हटाया आओ अंदर टैक्सी में बैठ कर चलते हैं । लेकिन मैंने अभी किसी आज भी लडकी की परछाई सामने शीशे में देखो । फॅमिली मुझे ऐसा लगा था । मेरा चेहरा बदल गया तो वही तुम्हारा है मैं सुविधा । दरअसल आजकल की ये कंपनियां अच्छी क्वालिटी के शीर्ष नहीं बनाती । इसलिए इन शिशु में तेरे मेरे चेहरे नजर आते हैं । इसलिए अब इतनी मामूली सी बात को लेकर अपना दिमाग खराब मत करो । बेबी फॅसा खोल दिया । चलो अंदर बैठो । जूलिया किंकर्तव्यविमूढ से अवस्था में अंदर दाखिल हो गए । उसके बराबर में रीता सान्याल बैठे । फिर रसिया रजिया ने अंदर बैठे टैक्सी का पिछला दरवाजा बडा सिंपल था । उसी पंजाब से तूफानी गति से अंधेरी वेस्ट की तरफ दौड पडे हमारा हम टैक्सी ड्राइवर विंडो स्क्रीन के पार देखता हुआ बोला अंधेरे में किधर जाने का रॉयल सलूट बार । वहीं टैक्सी तूफान मेल की तरह दुगर्ति ताकि जब शाहना रॉयल ब्लू बाढ के सामने जाकर रुकी तो समय रात के दस बज चुके थे । रॉयल सलूट बार क्योंकि थोडे से निर्जन से क्षेत्र में बना था । इसलिए वहाँ आसपास सन्नाटा ही सन्नाटा था । अलबत्ता बाद की इमारत खूब जगमगा रही थी । खास तौर पर उसका जलता बुझता न्यूरॉन साइन तो एक किलोमीटर दूर से ही नजर आता था । टैक्सी से उतर कर मुझ तीनों सहेलियां ट्रॉयल्स लूट बाहर के अंदर घुसने की बजाय एक अंधेरे कोने में पहुंची । क्या बात है जो हैरान हुई, आज इधर क्यों आई हो? दरअसल अभी अभी आज मैंने एक अनोखा फैसला किया है । वे भी फॅस टाइम से चुटकी बजाकर बोली, कैसा फैसला? मैंने सोचा क्यों ना आज काम पहले अकेले ही ड्रॅाप । इससे तुम्हारा आत्मविश्वास बढेगा और तुम्हें ऐसा लगेगा जैसे तुम अब सच में डाॅट बन गई हूँ । तो मैं इस समय डॅडी लाजवाब कर रही हूँ । फिर में घबराने की जरूरत इसलिए भी नहीं है क्योंकि हम बस तुम्हारे पीछे पीछे ही क्लब के अंदर आ रही हैं । गरेडिया रीटर सान्याल का प्लान सुनकर रजिया खुशी खुशी चाहेंगी वाकई जिले अभी भी आज तुम अकेले एक लाख के अंदर जहाँ मजा आ जाएगा बल्कि मैं तो एक बात और होंगी क्या तुम बिल्कुल ब्लॅक की तरह झूमते हुए अंदर जाओ फॅमिली और और तुम अपने मुंह से कोई बडा प्यारा सा गाना भी निकालना जैसे पी सडकों पर गाते हुए घूमते अगर तुम ऐसा करो कि फिर तो तुम ॅ होगी क्यों ॅ फॅमिली सचमुच अगर अपनी जो लिया भी भी ऐसा करेगी, फिर तो इसकी एक्टिंग में और दिखा रहा जाएगा । उन दोनों की बात सुनकर जूलिया की बेजान होठों पर भी हल्की सी मुस्कान दौड गए । ठीक है जो मैं बोली आज में इसी तरह का कोई गाना गुनगुनाते हुए क्लब में जाउंगी । बहुत अच्छे है तो ऐसा करोगी मीठा तो फिर देखना तो कितने नौजवान लडकियाँ लडकियाँ तुम्हारी तरफ आकर्षित होते हैं और ये लोग ट्विटर सानिया ने फौरन उसे अपनी जेब में से भरा हुआ इंजेक्शन निकाल कर दिया । क्लब में अंदर जाते ही तुम सब ग्राॅस के सामने बडे गर्व से अपने बाजू में यह इंजेक्शन लगा लेना तो मालूम है कि इस इंजेक्शन कॅाटन है । बाकी कुछ नहीं ऍम मुस्कुराते हुई वो इंजेक्शन पर रहिए । ठीक है तो फिर मैं जाती हूँ लेकिन तुम तो जरा जल्दी आना बार सांप हमारे पीछे पीछे आ रहे हैं आॅल उन दोनों ने मुस्कुराते हुए जूलिया की तरफ अपने हाथ खिला यूलिया भी मुस्कुराते हुए रॉयल सिलोर बाहर की तरफ बढ गए । बाहर के नजदीक पहुंचते ही वो बिल्कुल ट्राॅफी की तरह झूमने लगी थी और उसने आपने मुझसे किशोर कुमार का एक बडा फेमस दर्द भरा गाना भी निकालना शुरू कर दिया । ऍसे उसकी हरकतें देखकर मुस्कराई वाकई हमारी आठ लाख जवाब है आज हमारी यही फॅमिली डूबे की तो मैं मालूम नहीं लाया गया । आज महीने जो इंजेक्शन तुम्हें दिया है उसमें हीरोइन की इतनी हैवी न्यूज है कि अगर दारा सिंह जैसा पहलवान आदमी भी इतनी हैवी डोज ले लें तो उसकी भी वहीं आॅफ हो जाए । फिर तुम तो आज की तारीख में बिल्कुल भी जान गुडिया की तरह हूँ जिसमें अगर कोई ढंग का आदमी भूख भी मारते तो छोड जाए हूँ । पुलिस ये शायद कहकर राॅकी सन्नाटे में बहुत जोर से खिलखिलाकर हंसी जबकि रसिया गंभीरता की प्रतिमूर्ति बनी खडी रही थी और खामोशी से जूलिया को जाते देखती रही । शीघ्र ही जूलिया रॉयल्स फ्लोर बार के अंदर जाकर लोग हो गई । एक बात मैं अभी तक नहीं समझ सके । रजिया कौतूहल सफर में बोले क्या जब तुमने इसे ऐसी मौत दे नहीं थी तो फिर इसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी क्यों कराएं? इसका चेहरा क्यों मतलब? तुम में कमाल और रस्सियां फॅमिली मेरी प्लानिंग के इतने मामूली पॉइंट तो नहीं समझ सके । मामूली पोइट बिल्कुल । ये तो बहुत मामूली पॉइंट है । तरह सोचो अगर जूलिया अपने असली रूप में मरती और मुंबई पुलिस को रॉयल फ्लूट बार के अंदर से ही उसकी लाश बरामद होती है तो कुछ ही दिन के अंदर पुलिस ये खोज निकालती कि उस लडकी का नाम क्या था? वो कहाँ रहती थी, क्या करती थी? कुल मिलाकर फुलपहाडी था । पुलिस को मालूम हो जाता है क्योंकि लाश बरामद होते ही पुलिस ने जो लिया की लाश की तस्वीरें अखबारों में छपा नहीं थी । अखबार कस्तूरबानगर हॉस्टल तक भी पहुंच गए थे और हॉस्टल की लडकिया या वार्डन जैसे लाश की तस्वीर अखबार में छपी देखती उतरन पहचान जाती की लाख जो लिया के हैं । फिर ये खबर उठते उठते पहले मुंबई पुलिस तक पहुंचती और फिर गोवा में लेरी अन्ना गुंजाल तक भी पहुंच जाती की उनकी बेटी जूलिया मारी गई । कॉलेज आना गोंजाल्वेस तक खबर पहुंचने हमारी पूरी प्लानिंग का बेडा गर्ग हो जाना था क्योंकि फिर तुम जो लिया बन कर रहा नहीं पहुंच सकती थी । क्योंकि हमारी असली प्लानिंग ॅ की आंखें छमा कोठी वह प्रशंसनीय नेत्रों से रीता सानिया को देखने लगे । वाकई गजब का दिमाग पाये रीता तुम्हारे दिमाग कर जवाब नहीं तुम आने वाले कल की बातें भी पहले ही सोच लेती हूँ । अगर इंसान दूरदृष्टा ना होना बेबी तो फिर उसकी प्लानिंग का ढेर होते समय नहीं लगता । ट्वीटर सान्याल बोली मेरी प्लानिंग अभी तक हम यहाँ भी इसलिए है क्योंकि बिहार आने वाले खतरे को भांपकर इस फाॅगिंग का निर्माण किया था । अब तो मैं बताती हूँ आगे क्या होने वाला है, क्या क्या होने वाला है क्योंकि जूलिया का चेहरा पूरी तरह बदला जा चुका है । इसलिए अखबार में उसकी लाश की तस्वीर छपने के बावजूद भी उसे कोई नहीं पहचान सकेगा । हर इस तरह जूलिया मारे की एक लाख बारिस माॅस्को । ये राज कभी पता नहीं चल सकेगा की उसकी बेटी मर गए और फिर तुम चाहोगी गोवा में जो लिया बन करके उसकी सौ करोड की प्रॉपर्टी की मालिक बनकर ऍम खुशी से चल रहा है । ये अभी इतनी ज्यादा खुश मैं तो बीवी पीता सान्याल मुस्कुराकर बोली अभी मैंने अपने तो का एक पत्र और फेंकना है । एक और तुरुप का पत्ता था आप को पता भी मैं तो मैं दिखाती हूँ । रॉयल सलूर बाहर के नजदीक के काफी बडा कहाँ का बॉक्स बना हुआ था क्योंकि वास्तव में कैसे फोन था? रीता, सानिया और रसिया इस समय उसी बूथ के अंदर थी । पहले फोन का रिसीवर उस क्षण वीटा सान्याल ने अपने काम से लगा रखा था और उसकी उन्हें काफी तेजी से कुछ नंबर डाल कर रही थी । जल्द ही दूसरी तरफ रिंग बजने लगी । अलाऊ फिर पीस पर आवाज उपरी मुंबई पुलिस रिपोर्टर मुझे कमिश्नर साहब से बात करनी है । रीटर सान्याल के आवास में उस क्षण दृढता कूट कूट कर भरी थी । कमिश्नर साहब टेलीफोन पर बात कर रहा हूँ । बुरी तरह चौंका लेकिन तुम कौन हो? मेरा परिचय सिर्फ इतना ही काफी है । मीरा सान्याल एक एक शब्द चबाकर बोलती चली गई कि मैं मुंबई शहर के ड्राइक्लीन सिटीजन हो । खबरदार शहरी और इस समय भी मुझे कमिश्नर साहब को एक बडी खास इन्फॉर्मेशन देने हैं । मेरी अर्जेंट उनसे बात करा जल्दी वो शव ग्रीटा सान्याल ने कुछ इस तरह का है कि टेलीफोन पर बात कर रहा आदमी भी हर बढा उठा और थी । ठीक है फॅमिली मैं अभी कमिश्नर साहब से आप की बात कर रहा था । लाइन पर सन्नाटा छा गया । फॅमिली नहीं थी कि इतनी रात को उसकी पुलिस कमिश्नर जैसे हस्ती से भी बात हो जाएगी । लेकिन किस्मत उसका भरपूर साहब दे रही थी । उच्चतर भी अपना दांव चलती थी । उधर ये उसे कामयाबी हासिल होती थी । प्यास शीघ्र ही एक भारी भरकम आवास टेलीफोन लाइन पर उसी पुलिस कमिश्नर स्टेकिंग कमिश्नर साहब मुझे कोई बहुत ही डेंजर न्यूज देनी है । डेंजर न्यूज कमिश्नर जैसे अवसर के आवाज में भी भाई की लहर दौड गई । आपने अंधेरी वेस्ट के इलाके में रॉयल्स लूट बार का नाम तो सुना ही होगा । कमिश्नर बिल्कुल सुनाई पुलिस कमिश्नर ने तक पर जैसे में कहा न सिर्फ नाम सुना है बल्कि रॉॅकीज देखा भी हैं । गुड टाॅलीवुड बाहर के बारे में बहुत डेंजर न्यूज आपको देना चाहती हूँ । बाकी है कि उस बार की आड में ड्रग्स का एक काफी बडा क्लब चलता है तो जाना शाम को वहाँ ग्राॅस के काफी बडी भीड जुटी है । और वह सब लोग वहाँ नशीले पदार्थों का खुलेआम सेवन करते हैं । ये ये तो क्या कह रही हूँ पुलिस कमिश्नर के मुझसे हत्प्रभ स्वार्थ निकला बच्चों का ऍम लेकिन तो मैं कैसे मालूम फॅमिली इस तरह खिलखिलाकर हंसी जैसे पर भटकती आत्मा हसी हो हूँ कुछ बातों के ऊपर अगर पडता ही पडा रहने में काम रचना तो बेहतर है । पीटर सान्याल के आवाज आंदोलित होती थी आप सिर्फ इतना याद रखें रोल सलूट बाहर पर रेट डालने का ये एक बेहतरीन मौका है क्योंकि इस समय भी यहाँ काफी सारे ड्राॅ जमा है । तुम्हारा नाम क्या है? रीता सान्याल फिर हसी तुम जवाब क्यों नहीं देती? पुलिस कमिश्नर चलना रीता सान्याल ने हसते हुए ही टेलीफोन का रिसीवर हूॅं गया ऍम उसके गले में बाहें डाले किसी नागिन की तरह लहराते हुए बूथ से बाहर की एक हम भी हो गया किरपाराम, मूलचंदानी तथा ऊषा भी उस समय रॉयल्स लूट बार के सामने ही मौजूद थे और एक मारुति कांड के पीछे छिपी खडी उन दोनों की एक एक एक्टिविटी वाच कर रहे थे और ही कुछ समझ नहीं आ रहा है । किरपाराम मूलचंदानी के चेहरे पर गहन दुविधा के चिन्ह थे । आखिर ये दोनों लडकियाँ क्या खेल खेल रहे हैं । यानी पानी पहले उस भोली सी लडकी को अकेले बार के अंदर भेज दियानी फिर कहीं फोन गुमा मॉर्निंग लगता है पटरी ये दोनों जरूर कोई घूल गपाडा कर रही है । लगता है तो यही है किरपाराम । ऊषा के आंखों में भी उस समय थोडी थोडी बेचैनी थी । ऐसा महसूस होता है जैसे यहाँ कुछ होने वाला कुछ बडा हंगामा होने वाला है । पानी भी पता चले नहीं चाह हंगामा होने वाला एक काम करते हैं उसका बोली क्या हाँ पहाड के अन्दर चलते हैं । वहीं चल कर कुछ पता चलेगा कि वह तीसरी अकेले अंदर क्या कर रही है । ठीक है हिरवारा मूलचंदानी दृढ वैसे में बोला अगर ये बहुत है नहीं तो चलो बंदा है । फिर दोनों रॉयल सलूट बाहर की तरफ पडता है । मुश्किल से दस मिनट बाद ही अंधेरी वेस्ट का वो सारा इलाका पुलिस पैट्रोलिंग कारों की भीषण सायरन की आवाज से गूंज उठा । एक के बाद एक पुलिस की असम के पेट्रोलिंग करेंगे । रॉयल ब्लू द्वार के सामने आकर रुपये तथा फिर देखते ही देखते कार । उनके उस काफिले ने बाढ को चारों तरफ से घेर लिया । पूरी अंधेरी के इलाके में हडकंप मच चुका था । वो एक बेहद विहंगम कारी दृश्य था । पुलिस सायरन की आवाजें पूरे इलाके को दहला रही थी । खुद पुलिस कमिश्नर उस पूरे काफिले की अगुवाई करता हुआ वहाँ आया था । जैसे ही कारों के काफिले ने बार कुछ चारों तरफ से घेरा, तुरंत ढेर सारे हथियारबंद पुलिस कर्मी धराधर कारों में से निकल कर खोलते । पुलिस कमिश्नर भी अपनी कार से नीचे उतारा । फिर पूरे दलबल के साथ फॅमिली बार के अंदर फंसा । बार में भी अफरा तफरी मच चुकी थी । तुरंत छत्रपति राहुल दौडा दौडा आया कि क्या हुआ? छत्रपति रामबोला किस की क्या बात हो गई? कमिश्नर साहब हमें अभी अभी गुमनाम टिप मिली है । पुलिस कमिश्नर कर्ज कर बोला की तो मैं इस बार की आड में ड्राॅ चलाते हो, नारकॉटिक्स का धंदा करते हो । छक्के छूटकर छत्रपति रहा हूँ कि वो बुरी तरह बॉक्स आया । ये ये ये आपकी क्या कह रहे कमिश्नर साहब वह आतंकित मुद्रा में बोला ऍम ऍफ का धंदा फॅार । किसी ने आपको गलत रिपोर्ट दिए जरूर किसी में आपको बेवकूफ बनाया कमिश्नर साहब लेकिन ये भी हो सकता है मिस्टर छत्रपति राहुल पुलिस कमिश्नर सख्ती से उसकी आंखों में छापता हुआ बोला कि तुम ही हमें बेवकूफ बना रहे हैं । क्या मतलब मतलब बिल्कुल साफ है पुलिस कमिश्नर विश्व भर की तरह खूब कारकर बोला । टोमॅटो उसका धंदा करते हो । तुम नशे के कारोबार में इन वॉर्ड हो लेकिन मुझे अब तुम्हारी कोई बकवास नहीं सुनी । जवानों, आप फौरन सब चारों तरफ है जाओ । पूरे बार की अच्छी तरह तलाशी । लोग ड्राॅ, उसके क्लब तक पहुंचने का रास्ता भी जरूर इसी बार के अंदर से होगा । तुरंत तमाम हथियारबंद पुलिस कर्मी धर धर आते हुए बाढ में चारों तरफ फैल गया है । छत्रपति राव ने फिर ठीक कर कुछ कहना चाहा, उन्हें रोकना चाहते हैं । लेकिन उसकी बात सुनने के लिए आप पुलिस कमिश्नर भी वहाँ नहीं रहा था । तो भी लंबे लंबे डर भरता हुआ बार में दाई तरफ पड गया । अगले कुछ सेकेंड तूफानी थे । बेहद हंगामे से भरे हुए हथियारबंद पुलिस कर्मियों ने रॉयल सल्यूट बार का सारा सामान अस्त व्यस्त कर डाला । जो भी चीज उनके हाथ लगी उसे उन्होंने बेदर्दी से फेंका तोडा । मुश्किल से पांच मिनट ही वो तलाशी अभियान चलाया था कि तभी उन्हें ड्राॅप का दरवाजा नजर आ गया । वो दरवाजा बाढ के बिल्कुल पीछे की तरह बना हुआ था जिसके ऊपर स्टोर लिखा हुआ था । इसलिए कोई भी अनजान आदमी उस दरवाजे को खोलने की हिम्मत नहीं करता था । जैसे ही हथियारबंद पुलिस कर्मी धर धर आते हुए ऍप्स के क्लब में घुसे वहां नशेडियों के बीच दहशत फैल गई । सब ने वहाँ से निकल निकल कर भागना चाहा । कोई अपने स्थान से ना हिले । फौरन पुलिस कमिश्नर आपने होल्स्टर से रिवॉल्वर निकालकर उनकी तरफ तानता । हाँ खर्चा जो जहाँ है वहीं खडे रहे । तत्कान सब अपनी अपनी जगह फीस होगा । छत्रपति राव भी उनके पीछे पीछे ही वहाँ तक आ गया था और वह अब बेहद आतंकी व्यवस्था में चुप चाप एक तरफ खडा था । लेकिन उसके चेहरे पर हर कोन से यह बात नमूदार हो रही थी कि वह बहुत घबराया हुआ है । क्यों पुलिस कमिश्नर छत्रपति राव को भस्म कर देने वाली नजरों से घूरता हुआ उसकी तरह पडा? तुम तो कह रहे थे कि तुम्हारा कोई ड्राॅ मतलब नहीं, कोई नशे का कार्यवाही नहीं है । अब ये सब क्या है? छत्रपति रह के ऊपर ताला झूल गया उसे उससे जवाब दे देना बना किरपाराम मूलचंदानी और अच्छा भी उस समय ऍम क्लब में ही थे । दरअसल थोडी देर पहले ही मुझे रॉयल सलूट बार में दाखिल हुए थे तो तभी उन्होंने एक हैप्पी को स्टोर वाले दरवाजे की मार्फत कहीं घुसते देखा । उसके पीछे पीछे ही वो भी वहाँ घुस गए । लेकिन इस समय उन दोनों को एहसास हो रहा था कि वहाँ आकर उनसे भयंकर गलती हो चुकी है । उनके ऊपर सिर मुंडाते ही ओले पडे वाली कहावत खूब चरितार्थ हुई थी । सब लाइन लगाकर खडे हो जाओ । अभी एक पुलिस इंस्पेक्टर ने चीखते हुए आदेश दिया और ऍम लाइन लगाकर खडे होने लगे । हालांकि उन सभी में तगडा नशा किया हुआ था लेकिन पुलिस को देखते ही उन सबका नशा उडान शुरू हो चुका था । इस समय वह सम तारीख हुए थे । किरपाराम मूलचंदानी और उषा भी नशेडियों की उसी लाइन में खडे होकर है । उसी क्षण एक और बडी अजीब घटना घटी जहां तमाम नशीली लाइन लगाकर खडे हो चुके थे । वहीं हॉल के अंदर एक ब्लाॅक लडकिया भी भी ऐसी थी जो एक कोने में बडी खामोशी के साथ बैठी थी और जिसके ऊपर उस सारे हंगामे की कोई प्रतिक्रिया न थी । उसने अपने दोनों घुटने सिकोडे हुए थे । चेहरा दोनों जांघों के बीच में दे रखा था और उसके हाथ गोद में रखी थी । लडकी पुलिस कमिश्नर दूर से खर्चा तो फॅमिली गाडी हो जाता । एक लडकी पर उस कर्जन की भी कोई प्रतिक्रिया ना हुई । पूर्व की भांति निश्चल बैठी रही । क्या तुम्हारे कारण में आवाज नहीं आई? लडके तभी एक हथियारबंद कांस्टेबल भी तीखा खडे हो जाओ । लडकी पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं नहीं ऐसे पकडकर उठाता हूँ पुलिस इंस्पेक्टर अपनी एमिनेशन ब्लाक दूध से फर्श को रोता हुआ तेजी के साथ उस लडकी की तरह पढा । फिर उसने झटके से उस लडकी का हाथ पकडकर उसे खडी कर देना चाहिए । लेकिन जैसे उसका उस लडकी कहाँ पकडा । तभी एकाएक उल्टी रेत के ढेर की तरह नीचे लुढक गए । अरे एक साथ कई आदमियों के मुझ से ही प्रस्फुटित हुई ये तो मर गई तुरंत पुलिस कमिश्नर और छत्रपति राव के साथ कई सारे पुलिस कर्मी उस लडकी की तरफ छापते । हॉल में एक नई सनसनी का जन्म हो चुका था । नई और हंगामा की सनसनी का चल रहा है । वहीं ग्राॅस की लाइन में खडे के पर आ मूलचंदानी और ऊषा के दिमाग में भी धमाके पर थमा के और विस्फोट पर विस्फोट हो रहे थे । लेकिन ये मारी के से पुलिस कमिश्नर के मुझसे आचरज स्पोर्ट्स वर्णिक छत्रपति राव जो इस समय लडकी की लाश को काफी ध्यानपूर्वक देखा था, बेहद धीमी स्वर में बोला ये की हाय तो उसके कारण मारे हैं । यानी नशीने इस की जान ले ली है । कमिश्नर के मुझसे सिसकारी छुट्टी हाँ! माॅस् जिसने भी वो बात सुनी उसी के दिल दिमाग पर बिजली सिंकर गढा करके जबकि छत्रपति राओ अमृत लडकी के ऊपर कुछ और झुक गया था था । फिर वो उसके गले में पडी लॉकेट को काफी ध्यान से देखते लगाओ क्या बात है मिस्टर छत्रपति राव उसकी हरकत देखकर पुलिस कमिश्नर के चेहरे पर भी कुछ संख्या के भाव पैदा हुए । तुम लडकी के गले की तरफ इतनी ध्यान से क्या देख रहा हूँ? चौकी देखा ऍम लॉकेट में ऐसी क्या खास बात है? छत्रपति गहरी सांस छोडकर सीधा खडा हुआ तथा फिर उसने पुनः अमृत जूलिया पर एक नजर डाली । दरअसल कुछ ही दिन पहले दो बडी तेज तर्रार लडकियों के साथ एक मासूम सी लडकी यहाँ आए थे । छत्रपति राव कुछ खोई खोई सिसवार में बोला उस लडकी की सूरत मेरी बेटी से काफी मिलती थी । चार इसीलिए मैंने उसे नशीली सिगरेट पीने से भी मना किया था लेकिन उसमें फिर कोई बात नहीं । बात ये है कि उस लडकी के गले में भी एक बिल्कुल ऐसा लॉक था जैसा किस लडकी की गले में है । लेकिन छत्रपति राव आगे कुछ कहते हुए हिचकिचाया लेकिन क्या उस लडकी की शक्ति और इस लडकी की शादी में तो जमीन आसमान का अंतर है? छत्रपति रहा पुनः बुरी तरह चाहूँगा आप क्या हूँ वो? लडकी भी बिल्कुल ऐसा ब्रेसलेट पहनी थी जैसा इस लडकी ने अपने हाथ में पहना हुआ है । लगता है कि तुम पागल हो गए । छत्रपति रहा पुलिस कमिश्नर झंडा उठा हो सकता है की तो अभी थोडी देर बाद ये भी कहने लगी कि इस लडकी की शक्ल उससे जरूर नहीं मिलती लेकिन ये हंड्रेड पर्सेंट वही है । फिर पुलिस कमिश्नर ने छत्रपति राव की बातों की तरफ ध्यान न देकर वहाँ जूलिया के बारे में पूछताछ शुरू की । जैसे वो कौन थी, उसका नाम क्या था या वहाँ वो किसके साथ आई थी । लेकिन कमिश्नर को अपने किसी भी सवाल का जवाब न मिल सका । अंत में पुलिस ने तमाम ग्राॅस को चेतावनी देकर छोड दिया जबकि रॉयल सल्यूट बार को सील करके छत्रपति जहाँ को गिरफ्तार कर लिया । जूलिया के लाश से पहले ही पोस्टमार्टम के वास्ते भेजी जा चुकी थी । फॅमिली के सामने बैठी जल्दी जल्दी रजिया कमी कब कर रही थी? अपनी जो लिया अभी भी तो भगवान को प्यारी हो गई । दो तीन दिन में सरकार ही उसका लावारिसों की तरह दाहसंस्कार भी कर देगी । जाहरी जूलिया कैसी किस्मत चाहिए उसमें सौ करोड की विशाल प्रॉपर्टी की । उन्हें होकर भी वह चाहबार उनकी तरह मारे । कहीं कुछ लोग इस दुनिया में सिर्फ मुसीबत उठाने के लिए पैदा होते हैं । वो शब्द कहकर रजिया खिलखिलाकर हंसी थी । इस समय वो दोनों सहेलियां उसी होटल के अंदर थी जब राजन क्लब के बराबर में बना हुआ था । उस क्षण ट्वीटर सानिया एक और बडी अजीबो गरीब हरकत कर रही थी । वो एक खास किस्म के प्लास्टिक से रजिया के चेहरे पर हूँ । बहु अपना मैं कब कर रही थी मैं समझ नहीं बाहर हूँ । फॅमिली में अपने चेहरे का मेकअप देखकर पूरी तो फिर ये सब क्या कर रही हूँ? मेरे फॅमिली में बदलने की क्या जरूरत है? जरूरत तो कोई नहीं है । सीधा ट्विटर सान्याल व्यग्रता पूर्वक बोली, मैं थोडा आनंद आ जाएगा । ऍम ये समय सिर्फ मनोरंजन के लिए कैरॅल सडक कल्पना करूँ जब तुम्हारे चेहरे पर मेरा में कब होगा तथा मेरे चेहरे पर तुम्हारा मेका और फिर जब हम दोनों उस पाॅप के अंदर जाएंगे तो कितना मजा आएगा । कोई भी हमें नहीं पहचान सकेगा । लोग तो मेरे छोटा समझेंगे और मुझे दिया और उससे भी ज्यादा आनंद तो तब आएगा डालेंगे सब । हम दोनों रिंग में प्रैक्टिस करेंगे । आज तक जस्सियां लिटा को दांवपेच सिखाती थी, लेकिन आज उल्टा होगा । ॅ को दांवपेच सिखाएगी ये बात तो है रजिया के होठों पर भी बडी प्यारी सी मुस्कान गाडी आज अब ऍम क्लब के अंदर लोगे नया तमाशा देखेंगे तो हैरान रह जाएंगे किसी आनंद को लूटने के लिए तो मैं ये सारा नाटक कॅालिंग अबकी इस कुछ चुप बैठी हूँ अगर ज्यादा महिलाओं की तो मुझे कब करने में परेशानी होगी? रजिया ने अपने हूँ इसीलिए लेकिन वह ट्रेसिंग टेबल के आदमकद आ ही नहीं मेरिटर सान्याल को अपना में कब करते साथ साफ देख रही थी । धीरे धीरे तजिया का चेहरा बदलता जा रहा था । फिर एक्शन वो भी आया जब रजिया हो बहू रीता सानिया लगने लगे । ऍम मुक्त कंठ से उसकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकी । वहाँ कहीं तुम्हारे हाथों में तो सचिन देवडा की तरह चाहते है । रीता तुम्हें तो सच में बहुत प्रॉफिट ढंग से मेरा में कपडा डाला । दरअसल थोडी बहुत आठ ना मैंने सचिन बेवडा के साथ रहकर इसी किए था निकाल बोली लेकिन जहाँ तक सचिन देवडा से मेरी तुलना करने का प्रश्न है तो ये ठीक नहीं क्योंकि अभी तो इस मामले में मैं उससे मीलो पीछे । सचिन देवरा प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा इंसान का चेहरा हमेशा हमेशा के लिए बदल डालता है, जबकि मैं सिर्फ में कब कर सकती हूँ । ऐसा मेकप जुमात कुछ दिन तक चल सके । लेकिन फिर भी तुम्हारे हाथों का कमा तो है ही । मैं कब का डालना भी आसानी होता । उस क्षण रीता सान्याल ने सामने टेबल पर रखे छोटी सी शीशी उठा ली, जिसमें दिए सारा तरल पदार्थ भरा था कि ये क्या है? ये एक खास किस्म का केमिकल है, जिसे अब मैं तुम्हारे मीक अक्षदा चेहरे पर लगाऊंगी । उस से क्या फायदा होगा तो बहुत बडा फायदा होगा । वीटा सानिया बोली किसी कैमिकल की बदौलत तुम्हारे चेहरे से मेकप अगले अडतालीस घंटे तक नहीं उतार सकेगा । अगर तुम अपना चेहरा होगी तब भी नहीं । फिर दूसरा केमिकल लगाने के बाद ये मेरा पुत्री का बढिया दूध आप बता रही हूँ क्या विस्मय पूर्वक होली? तभी रीता सान्याल ने उसके चेहरे पर कमतर की परत चढाने शुरू करती है । सचिन दिव्या समय राज्य मतलब के सामने ही बने छोटे से रेस्टोरेंट में बैठा था और बहुत धीरे धीरे कोल्ड्रिंग सिर्फ कर रहा था । सचिन ने उडा की निगाहें इस वक्त ऍम क्लब पर ही टिकी थी और वो कभी कभी कोल्ड ड्रिंक पीते हुए अपनी एक सरसरी सी नजर उस होटल के दरवाजे पर भी डाल लेता था जिसके अंदर रीता सान्याल और रजिया ठहरी थी । उस क्षण अगर सचिन देवडा उस रेस्ट्रॉन्ट के अंदर मौजूद था तो ये भी रीता सान्याल की ही प्लानिंग थी । सचिन देवडा के चेहरे से काफी बेचैनी प्रकट हो रही थी और साफ लग रहा था कि उसे किसी का बहुत में करारी से इंतजार है । हालांकि रीता सान्याल जूलिया का मौदा करने में सफल हो गई थी और आगे भी वह जितने कदम उठा रही थी काफी योजना बद्ध अंदाज में उठा रही थी । लेकिन फिर भी न जाने क्यों सचिन देवता को रह रहकर इस बात का एहसास हो रहा था कि कुछ गडबड होगी । कुछ ऐसा पडा घटना होगा जो लेडी आना । गोंजाल्विस की दौलत उनके हाथों में आते आते रह जाएगी । गडबड क्या होगी ये सचिन देवता को अभी तक नहीं पूछा था लेकिन वो रीता सान्याल की प्लानिंग को लेकर आश्रम के बहुत था । अभी सचिन देवरा ने आंधी से कुछ ज्यादा ही कोल्ड्रिंग भी होगी कि तभी एका एक उसके निकाह सामने वाले होटल के दरवाजे पर जाकर ठिठक गई । जहाँ से अभी अभी मीरा सान्याल और रजिया बाहर निकली थी । इस समय वो दोनों अपने मेकप के द्वारा तमाम दुनिया को धोखा दे सकती थी । लेकिन सचिन मेरा बखूबी जानता था कि उनमें से वास्तविक रीता सान्याल कौन है और रजिया कौन है? सचिन ने थोडा रेस्ट्रॉन्ट के अंदर बैठा बिल्कुल शांत मुद्रा में उनकी एक एक गतिविधि देखता रहा होता से बाहर निकलने के बाद वो दोनों ऍम क्लब में दाखिल हो रही थी । उसी क्षण जाॅन रेस्ट्रॉन्ट की तरफ पलट कर देखा । यही वह क्षण था जब सत्रह देवरा ने अपनी कूलिंग उठाकर उसे दूर से ही विश्व क्या ये सचिन देवडा की तरफ से इस बात का सिग्नल था की सब कुछ योजना अनुसार चल रहा है । रीता, सानिया और तुरंत रजिया के पीछे पीछे क्लब में दाखिल हो गई । शीघ्र ही वो दोनों सचिन देवता को दिखाई पडनी बंद हो गई थी लेकिन वो फिर भी अपनी जगह शांत बैठा रहा । बिल्कुल शांत ऐसे उसे कोई जल्दी नहीं हूँ । पूर्व की भांति बहुत धीरे धीरे कोल्ड्रिंग सिर्फ करता रहा । जब कोरिंग समाप्त हो गई तो उसने बाहरी को बुलाकर बिल चुका है । फिर एक सिगरेट सुलगाकर आहिस्ता आहिस्ता टहलता हुआ वही रेस्ट्रां के अंदर बने पब्लिक टेलीफोन बूथ में पहुंचा मुझे सिगरेट के गोल गोल छलने बनाकर हवा में उछल रहा था और कभी कभी नाक के नखरों से भी दुआओं का पब्लिक टेलीफोन बूथ का दरवाजा । उसने अंदर से अच्छी तरह खासकर बंद कर लिया था तथा फिर एक नंबर ढाई ॅ पुलिस स्टेशन वो अपनी आवाज को थोडा भारी बनाकर बोला फॅस मैं मेरी थाने का इंचार्ज बोल रहा हूँ । आपके लिए एक खुशखबरी है । इंस्पेक्टर आपने रीटर सोनियाल का नाम तो सुना ही होगा । रीता सान्याल एक क्षण के लिए सन्नाटा छा गया घूस वही रीता सानिया जिस पर छह हत्याओं और एक सशस्त्र बैंक डकैती का अभियोग हैं । जी हाँ मैं उसे ऍम की बात कर रहा हूँ । सचिन देवडा धीमी स्वामी बोला अगर आप उस रीता सान्याल को पकडना चाहते हैं तो फौरन ये अपने थाना क्षेत्र के अंतर्गत बने रह अगर क्लब में पहुंचे वो खतरनाक अपराधी बिलकुल अभी अभी उस क्लब के अंदर दाखिल हुई है लेकिन तुम काम बोल रहे हो । सचिन देवरा ने कोई जवाब नहीं दिया । उसने सिगरेट के दो लंबे लंबे कश लगाए तथा फिर इत्मिनान के साथ रिसीवर हो पाँच मिनट का पब्लिक टेलीफोन बूथ से बाहर निकल गया । उसका काम समाप्त हो गया था । वो धीरे धीरे कदमों से ही नजदीक के टैक्सी स्थान की तरफ बढ गया ।

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औरत कभी उधार नहीं रखती। मौहब्बत,इज्ज़त,नफ़रत,वफ़ा सब दोगुना करके लौटाती है। ऐसी ही रीटा सान्याल थी। वह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही खतरनाक भी। अपनी माँ की तबाह हो चुकी ज़िन्दगी का बदला लेने के लिए उसने अपने दिमाग की बदौलत कई सारे ऐसे मर्डर की प्लानिंग रच डाली कि पोस्टमार्टम तक में साबित न हो पाया कि वह मर्डर है। कानून ने भी उन्हें साधारण मौत समझा। आखिर मैडिकल साइंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स और पुलिस इन्वेस्टीगेशन को कैसे चकमा दिया उसने? आपने सोचा भी न होगा कि किसी के मर्डर की इस तरह भी प्लानिंग रची जा सकती है। दिमाग का ज़बरदस्त चक्रव्यूह। यह बेहद शानदार थ्रिलर है, जिसे आप बार-बार सुनना चाहेंगे।
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