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Part 17

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लंबे कोमा से जागने के बाद दमन को पता चलता है कि वह एक जबरदस्त कार हादसे का शिकार हुआ था, जब उसके साथ एक लड़की भी थी, जो उसे मरा हुआ समझकर हादसे के फौरन बाद वहां से गायब हो गई। अजीब बात है कि उस लड़की का धुंधला चेहरा, सम्मोहित करनेवाली आंखें और उसका नाम श्रेयसी दमन को अब तक याद है, जबकि उसकी याददाश्‍त जा चुकी है। उसने सपने में देखी अपनी और श्रेयसी की कहानियों को जोड़ना शुरू किया, और फिर उसे अपने जबरदस्त लोकप्रिय ब्लॉग में ढाल दिया। कुछ समय बाद दमन अपने ब्लॉग को एक उपन्यास के तौर पर प्रकाशित करने का फैसला करता है। तब एक खूबसूरत लड़की, जो श्रेयसी होने का दावा करती थी, दमन का पीछा करने लगी और धमकाया कि दमन को अपना जमीर बेचने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तथा अपना बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी। दमन उससे निपटता, इससे पहले उसे मालूम करना था : क्या वह सच में वही है, जैसा दावा कर रही है? उसे अब उससे क्या चाहिए? अगर उस लड़की की बात नहीं मानी तो उसके साथ क्या होगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी। Author - Durjoy Dutta
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भाग सकता हूँ तो तुम कहाँ जाना चाहती हूँ? समझ हाउस कैसे को छोडकर कहीं भी दमन की पसंदीदा जगह को दरकिनार करते हुए अपनी बोली मैंने सुना है कि बहुत ऑफिस जाने के बाद तो में किसी लडकी ने रोक लिया था । ऍम दमन को कोहनी मारते हुए उसने कहा क्या वे सेक्सी थी और क्या? उसने तो उनसे अपनी पक्ष स्थानों पर हस्ताक्षर देने को कहा । हाँ, मैं अपने पति के साथ ही दामन ने स्पष्ट किया । मैं मजाक मजाक में अवनी को श्रेयसी के बारे में बताना चाह रहा था । क्या उसके वापस आने के बारे में बताना चाह रहा था? किन्तु से डर था कि यह राहत उसके परिवार और समय तक पहुंच जाएगी और दही वजह हंगामा खडा हो जाएगा । उसमें थोडा और इंतजार करने का निर्णय लिया । पहले मैं उसके साथ बात करना, बैठना और मिलना जा रहा था ताकि में पता लगा सके कि ये असली माजरा क्या है । तीस मिनट बाद दमन और अवनी पहुंॅच विलेज के पार्किंग एरिया में प्लास्टिक कमरों में गरम बोर्ड का और को पी रहे थे । तब तक धवन ने सिर्फ एक पैट दिया था और से गाडी भी चलानी है । उसने कहा और अपनी के साथ ही पुस्तक के लोकार्पण की तस्वीरें देगी । थोडी देर बाद अपनी ने कहा, मैंने अपनी माँ को तुम्हारी किताब दिए । इससे उन्हें मेरे प्रति बिहार नहीं पडेगा । कौन जाने धवन ने अपनी आंखें घुमाई, अपना मोहम्मद करा करो । आज तो भारत दिन है । अवनी ने कहा ठीक है तो हम अपने बारे में बताओ । कैसा रहा तो मारा देना । तुमने कितने पैसे कमा ये प्रश्न दमन उससे हमेशा पूछता था । अवनी ने झूठ बोल दिया और उसे अपनी कंपनी द्वारा किए जा रहे विलय की कहानी सुना दी । सच बात तो ये थी कि अपनी बार्कले कंपनी के एक सीनियर एक्सिक्यूटिव के साथ दोपहर के खाने पर गई थी । बार करेगा वो एग्जिक्यूटिव उसे कंपनी में भर्ती करना चाहता था । उसके लिए ये एक बडी तरह की साबित होने वाली थी । इससे मैं कई साल आगे हो जाएगी । दमन की कार के बोनट पर बैठे हुए उसने दमन को इस बारे में अभी कुछ न बताने का निर्णय लिया । काफी समय के बाद उसके जीवन में अच्छी खबर आई थी । नहीं क्या मैं जल्दी ही तुम्हारे माता पिता से मिलने जा रही हूँ? उसने पूछा वहाँ ने अगले अनुबंध पर हस्ताक्षर कर लू । उसे मेरी चिंता रहती है । पहले में अपने जीवन यापन की ठीक ठाक व्यवस्था कर लूँ । उसके बाद हम दोनों के लिए बात करूंगा । पिछले दो महा बडे भारी रहे हैं । मेरे पास पैसों की कुछ करनी भी है । क्या तुमने अपनी क्रेडिट कार्ड का भुगतान कर दिया? क्या मैं भुगतान कर तो नहीं सबसे कर दूंगा । मेरे कुछ लेखों से चेक प्राप्त होने वाले हैं । मैंने उन्हें क्या आज नहीं कराया है । पर वह ठीक ठाक राशि होगी । अगले तीन वहाँ का खर्च निकल जाएगा । मैं दोनों कार में बैठकर बात करने लगे । तभी उसकी कार की खिडकी पर दस्तक हुई । देख अब रह गए खेल की पर दिल्ली पुलिस के दो हवलदार खडे थे महाराजा में लडके । उनमें से एक ने कहा दमन ने अवनी को कहार में ही रुकने को कहा और खट बाहर आ गया । हवलदार दमन को एक कोने में ले गए और उस पर सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाकर जेल में बंद करने की धमकी देने लगे । पर जल्दी वह पैसों के लेनदेन के बारे में बात करने लगे और धवन ने अपना पडोस बाहर निकाल लिया । उसने उन्हें अपने पास मौजूद पंद्रह सौ रुपये देने का प्रस्ताव दिया परन्तु हवलदार और अधिक धन जाते थे । अपनी लाचारी से उसे देख रही थी क्योंकि दमन ने उनसे ठीक तरह से लेन देन की बातचीत नहीं की थी । बेकार के पास वापस आए अग्नि से खिडकी का कांच नीचे करने को कहा गया । अपनी ने भी उन्हें पंद्रह सौ रुपये दिए और उनसे पीछा छोटा अग्नि के घर की ओर वापस जाते समय दमन ने सिर्फ एक ही वाक्य बोला तो उन्होंने अपनी ओर से कुछ भी देने की जरूरत नहीं थी । मैं थाने जाकर मामला निपटा लेता । उसने अपनी को उसके घर छोडा और अपने घर की ओर लौटा । अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद उसने गलियारे की लाइट जलाई और अपनी जेब में चाभी तलाशना लगा ऍफ करेगी । उसने पाया कि ताला बदल गया था । धवन के मकान मालिक शर्माजी अपार्टमेंट के दूसरे छोर पर छठी मंजिल पर रहते थे । जब दमन ने दिल थामकर अपने मकान मालिक का दरवाजा खटखटाया उस वक्त राजकीय ग्यारह बज रहे थे । कहते हुए मकान मालिक ने दरवाजा खोला । ताला बदल गया है । मुझे चाबी चाहिए । अंकल आज दिन भर में बहुत व्यस्त रहा । बेटा तुम्हारा चैक फिर बाउंस हो गया । पहले मुझे अपना किराया और जैसा की तुमने वादा किया था पोस्ट डेटेड चेक चाहिए । मैं तुम्हारे पिताजी से बात कर सकता हूँ, कल पक्का कल दे दूंगा । ंकर अभी काफी देर चुकी है कि आप मुझे अभी चाय भी नहीं देंगे । एक बेटा तुमने कहा था मैं तुम्हारे माता पिता से पैसों के बारे में बात न करूँ और मैंने इसका ध्यान रखा है । लेकिन तो में किराया समय पर देना होगा । मकान मालिक ने का उसने दरवाजे के पांच तंगी चाबियों के गुच्छे से एक चाभी निकालकर दमन को दे दी । नतिनि और मुझे तुम्हारे माता पिता से बात करनी पडेगी । मैं चेतावनी दे रहा हूँ धन्यवाद । धवन ने कहा और वहाँ से जाने के लिए मुडा बेटा जी एम कल तुम अपनी पुरानी जॉब फिर से क्यों नहीं जॉइन कर लेते हैं? अरे तुम जैसे नौजवानों के लिए लेखन का कार्य ठीक नहीं है । नहीं इस बारे में सोचूंगा । धवन ने कहा और सीढियों से उतरने लगा । आपने पहले से अधिक गुस्से में था । कमरे में पहुंचते ही उसने जयंती का नंबर डायल किया । अगर इस व्रत बनाए रखने के लिए किताब लिखना जरूरी है तो यही सही हर कोई पैसे के लिए काम करता है तो मैं क्यों नहीं । लेकिन जैसे ही उसने जयंती का नंबर डायल किया ए । सी की अनकही धमकी उसके खानों में गुजने लगी । आशा करती हूँ कि ऐसी गलती तो तो नहीं करोगे । कुछ इंतजार रहेगा । कुछ देखना ये पहली किताब जैसी न हो ।

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लंबे कोमा से जागने के बाद दमन को पता चलता है कि वह एक जबरदस्त कार हादसे का शिकार हुआ था, जब उसके साथ एक लड़की भी थी, जो उसे मरा हुआ समझकर हादसे के फौरन बाद वहां से गायब हो गई। अजीब बात है कि उस लड़की का धुंधला चेहरा, सम्मोहित करनेवाली आंखें और उसका नाम श्रेयसी दमन को अब तक याद है, जबकि उसकी याददाश्‍त जा चुकी है। उसने सपने में देखी अपनी और श्रेयसी की कहानियों को जोड़ना शुरू किया, और फिर उसे अपने जबरदस्त लोकप्रिय ब्लॉग में ढाल दिया। कुछ समय बाद दमन अपने ब्लॉग को एक उपन्यास के तौर पर प्रकाशित करने का फैसला करता है। तब एक खूबसूरत लड़की, जो श्रेयसी होने का दावा करती थी, दमन का पीछा करने लगी और धमकाया कि दमन को अपना जमीर बेचने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तथा अपना बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी। दमन उससे निपटता, इससे पहले उसे मालूम करना था : क्या वह सच में वही है, जैसा दावा कर रही है? उसे अब उससे क्या चाहिए? अगर उस लड़की की बात नहीं मानी तो उसके साथ क्या होगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी। Author - Durjoy Dutta
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