Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

Part 16

Share Kukufm
Part 16 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
2 KListens
लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
Read More
Transcript
View transcript

देश सेवा है तो कुछ राजनेता जनादेश के आधार पर संसद में पहुंचते हैं, जन आकांक्षाओं को समझते हैं । उन्हें पूरा करने का संकल्प समझौते हैं और संकल्प पूर्ति के लिए निरंतर पुरूषार्थ में संगठन रहते हैं । जहाँ ऐसे राजनेताओं की जागृति देश को स्वर्ण भविष्य देख सकती है वहीं कुछ निष्क्रिय राजनेताओं की सुषुप्ति देश को सैकडों साल पीछे ढकेल सकती है । जातिवाद स्वार्थ गार्ड और अर्थवाद से संस्कृत होकर राजनीति वर्तमान को बदनाम कर देती है और राष्ट्र को विनाश के गर्त में डाल देती है । मास्टरमाइंड की योजनाओं से और राजा मजूमदार मुखिया प्रधान के क्रियान्वयन से माओवादियों का प्रभाव लगातार बढ रहा था और नक्सलवादियों की इस भर्ती ताकत से स्थानीय राजनेता परीक्षित थे । प्रतिष्ठन ने रूप में व्यक्ति और सत्ता के लिए नक्सलवादियों की मदद लेते बदले में उन्हें सुरक्षावाद धन मुहैया करवाते हैं । कुछ राज्यों के वर्तमान बाद याने वर्तमान मुख्यमंत्री तक नक्सलियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया प्रदर्शित करते हैं । राजनीतिक दलों के नेता एवं नक्सली नेताओं की बैठकों की खबरें भी आए दिन सुनने को मिलती थी । यहाँ के प्राकृतिक संस्थानों से समृद्ध खनिज संपाद वाले इलाकों में मास्टरमाइंड ने माफिया के संग मिलकर योजना बद्ध तरीके से नक्सलियों को बढा दिया ताकि ये अठारह डालत सरकार की पहुंच से दूर उनके गिरफ्तार में रहे । पुलिस कार्यवाही होती । कुछ लोग मारे भी चाहते हो लेकिन वास्तविकता कुछ और होती । किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुंचने के उद्देश्य से ही कार्यवाही होती । नेताओं के फायदे के लिए आदिवासियों को मरवाना भी बडी बात नहीं थी । हर संघर्ष में अंतर ऍम हार स्थानीय निवासियों की ही होती है । उधर अब नक्सली संगठनों में भी एकता नहीं नहीं । एक संगठन सशस्त्र गोरिल्ला बाल बन गया । पूरी तरह से हथियारों से लैस कारण हिंसा इसका खेल था । दूसरा संगठन शस्त्रशक्ति के बजाय सत्ता बाल को पाने को प्रमुखता देता । मास्टरमाइंड इन सारी स्थितियों को देख रहा था । परिस्थितियों को भाग रहा था । उसकी पकड मजबूत थी, जिससे वह थानांतरित नहीं होने देना चाहता था । निरंतर उसका चिंतन चल रहा था । कार्यकर्ता उसने राजा को स्पष्टता समझा दिया था कि सत्ता का केंद्र विकेंद्रित नहीं होगा, वही रहेगा हटा । जो नक्सली सरदार इसमें समाहित होने है तो तैयार है उन्हें समय दे दो, जो चुनौती पुलिस समाप्त कर दो । इस प्रकार आंतरिक संघर्ष में विजय के पश्चात राजा मजूमदार और उनके परामर्शक मास्टरमाइंड की ताकत और ज्यादा बढ गई थीं । परामर्शक का चेहरा किसी ने नहीं देखा था । दोनों से पहचानता नहीं था । उधर शिक्षित ऍन शील व्यवसाई सोमेश समाजसेवी के रूप में बहुत लोकप्रिय हो गया था । ब्राॅन ढंग थे । सर्वदास समाज सेवा हेतु तत्पर रहता हूँ । पहुँचता सबको पता था कि उस की राजनीतिक क्षेत्र में भी बहुत अच्छी पहुंच नहीं । मैं आदिवासियों से बहुत सहानुभूति रखता था । एक बार इस मामले में उसे जेल भी हो चुकी थी । फिर कोर्ट ने ये कहते हुए रिहाई प्रदान की थी किसी नक्सली सहित रखने से कोई नक्सली नहीं बन जाता हूँ । ठीक उसी प्रकार जैसे गांधीवादी सहित रखने से कोई महात्मा गांधी नहीं हो जाता हूँ ।

Details
लक्ष्य की ओर चलने वाले को बीच में विश्राम कहा? सिर्फ चलते जाना है चलते जाना है कहीं भी शिथिलता या आलस्य नहीं ज़रूर सुने, शिखर तक चलो बहुत ही प्रेरणादायक कहनी है। writer: डॉ. कुसुम लूनिया Voiceover Artist : mohil Author : Dr. Kusun Loonia
share-icon

00:00
00:00