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पंद्रह भाग मजा या मजबूरी । एक अप्रैल दो हजार सोलह बेल बजी । एक उम्रदराज महिला ने गेट खोले । उम्र के लिहाज से उनके कुछ बाल सफेद हो चले थे । चेहरे पर झुर्रियाँ साफ दिखाई दे रही थी । नमस्ते यान्ति छोटों ने आंटी के पैर हुए हरी तो चोट ऊॅचे याद करते हुए कहा कि जी मैं कितने बदल गए हो तो यहाँ यहाँ कैसे? आंटी की खुशी उनके चेहरे से टपक रही थी । बस हात की याद आई और चले आए । इतने दिनों में यहाँ याद आई तुम्हें आंटी समझ गयी याद तो बहाना है । बात कुछ और है । अंदर आॅफ कॉफी क्या लोगे तो छोटू अंदर आ गया । घर में कोई नजर नहीं आ रहा था । छोटू की नजरें किसी और को देख रही थी । पर इसे मिलने आए हूँ टीवी की जैसे कहा नहीं । छोटू ने झूठ कहा । वो सोफे पर बैठ गया । दीवार पर कई पेंटिंग सब्जी थी । उन पेंटिंग्स के नीचे बडे अक्सर में ए लिखा था । ये लोग कॉफी आंटी ने काफी कब छोटों को पकडा । आया तो मैं यही बैठो । मैं पारी को बुलाकर लाती हूँ । मेरे दिल का कहा आंटी अच्छे से सुन रही थी । पेंटिंग अद्भुत है । पेंटिंग या प्रिंटिंग बनाने वाली हल्दी की बात में पॉइंट था । दोनों छोटू की वहाँ से निकलने ही वाला था । मगर वो मुस्कुरा दिया छोटू ने काफी की । एक्स इटली महारानी ऊपर अपने कमरे में है कहकर आरडी ने पारी को आवाज लगाई । खैर अब अंकल की तबियत कैसी है? छोटू ने काफी कप नीचे रखा । रोहित ने मुझे सब बता दिया था । वैसी ही बनी है जैसे पहले थी । अंतिम दे सहमे । मन से कहा कोई सुधार नहीं हुआ । छोटों ने पूछा नहीं अभी तक तो कुछ नहीं आंटी की आगे भराई छोडो इस बात को मैं घर के काम करती हूँ । तब तक तो पर इसे मिला । आंटी रसोई में चली गई । छोटों की खडा हो गया । सीढियों से धीरे धीरे ऊपर जाने लगा । कुछ जाने पहचाने तस्वीरें उसके सामने सचिव थी । उसने देखा परी बालकनी में खडी थी हाई छोटू ने नजदीक आकर कहा क्या देख रही हूँ हाई तुम कब आई? परिणय जानबूझ कर अनजान बनने का नाटक किया । अनजान मत बनो । मैंने नीचे से देख लिया था क्या? जब तो मुझे बालकनी से देख रही थी पर ये कुछ नहीं बोली । तुम्हारा बगीचा कितना संदर है । छोटे बोला वहाँ पर इन्हें हामी भरी यही सोच रही थी । मैं कुछ साल पहले हमारा साथ भी इसी वजह से की तरह महक रहा था । अगर एक तूफान ने सारे बाघ को बेजार कर दिया । मजबूरी थी सहमे हुए छोटों की आवाज आई हाँ परी बोली मर्जी को मजबूरी नाम नहीं देना चाहिए । कोई मजे नहीं किए मैंने । छोटू उदास हो गया । जब यहाँ आया हो तब से बता तो रहा हूँ कभी यहाँ तो कभी वहाँ पता नहीं कहा । कहा ऍम चुके सो आज यहाँ का रास्ता कैसे भूल गए? नहीं आज संडे था तो सोचा तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड कर लो तो तुम्हारे लिए कौन सा संडे? करीब टोन कैसी? तो मैं ये सोच कैसे लिया कि मैं तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड कर होंगी । क्यों मुझ में क्या खराबी है? खराबी तुम्हें नहीं, मुझे हैं । आएगा ने गुस्से से देखा और वैसे भी चाचा चाची हॉलिडे पर गए हैं इसलिए मुझे बहुत कम है तो चल रही हो या नहीं । छोडो जाने लगा नहीं परिणय साफ साफ मना कर दिया मैं नीचे तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ तुम रेडी होकर आज छोटों बोला दस मिनट गुजर गए । पारी नीचे आई तो देखा छोटू जा चुका था । कभी कब के नीचे छोटो एक मैसेज छोड गया ना इसका अभियान थी पर इ मुस्कराई

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