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Part 14 in Hindi

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Authorउमेश पंडित 'उत्पल'
Maa ke Aansoo एक सामाजिक उपन्यास है Author : Umesh Pandit "Utpal" Voiceover Artist : Sikha Singh
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मधुलिका सोफे पर लेटी हुई थी । सिर्फ हानि की ओर को नीचे कर उपन्यास पढ रही थी । रूम का वातावरण शांत था । ब्रजकिशोर उसके घर पहुंचा, कुंडी खटखटाई । देखो मधुलिका कुंडी को कौन खटखटा रहा है । आदेश उसके पिता का था । मधुलिका उठकर बाहर आई । दरवाजे को खोला । ब्रजकिशोर को देखकर सहम गई । अंदर आ जाइए सभ्यता से उसने कहा । ब्रजकिशोर ने अंदर प्रवेश किया । उसने दरवाजे को बंद कर दिया । प्रणाम चाचा जी । सिर झुकाते हुए ब्रजकिशोर बोला आओ बैठो आदर के साथ । उसके पिता ने कहा । ब्रिज किशोर उनके निकट वाली कुर्सी पर बैठ गया । चाय लाओ । बेटी उसमें मधुलिका से कहा । मधुलिका चाय की ट्रे लेकर आई । उसके समीप बैठ के सभी चाय की चुस्की लेने लगे । मधुलिका पान लगती हुई आई । एक बीडा अपने पिता को और दूसरा ब्रजकिशोर को दिया । ब्रजकिशोर के पान में रंग था । ये मधुलिका की चालाकी थी । मजाक के वास्ते उसने ऐसा किया था । ब्रजकिशोर वोट रंग से लाल हो गए, पान से नहीं । मधूलिका कहाँ लगाया? उसके पिता की नजर भी उस पर जा पडी । वे भी कहाँ कहाँ लगाने लगे ब्रिज किशोर मधुलिका की चालाकी को समझ गया । मधुलिका की हसी में प्यार भरी बात थी । ब्रजकिशोर पॉकेट से रूमाल निकाला । उनको साफ किया काफी देर हो गयी । चाचा जी अब हम चलते हैं । ब्रजकिशोर उठते हुए बोला अच्छा तो जाओ हसते हुए स्वर में मधुलिका के पिता ने आदेश दिया । मधुलिका और ब्रजकिशोर में आग मिचौनी हुई । ब्रजकिशोर वहां से चल दिया । मधुलिका पीछे से उसका पीछा किया । वो मोटर साइकिल को बडी तेजी से ड्राइव कर रही थी । ब्रजकिशोर घडी दूर निकल गया था । धाएं वृक्ष की ओट होकर किसी गुंडे ने फायर किया । रास्ता जंगल होकर था । अब क्या पंचर हो गई? गाडी रुक गई । मधुलिका इधर उधर देखने लगी । कोई दिखलाई ना पडा । गुंडा उसके निकट आ रहा था । ब्रजकिशोर ब्रजकिशोर मधुलिका चिल्लाई । गुंडे ने उसकी बाहों को पकड लिया था तो कितनी भोली हो तेरे दिल में प्यार भरा है । प्यारभरे शब्दों में उसने कहा कमीना गुंडा शरारत करने के लिए आया हूँ । मधुलिका हर बढाते हुए बोली और अपनी बाहों को से छुडा लिया । पर उसने फिर से उसकी बहु को दबोच लिया । छोड दो मधुलिका चिल्लाई । जाल में फंसी हुई चिडिया को छोड दो । मुस्कुराते हुए उसने कहा झट से उसे गोद में उठा ली और तेजी से भागने लगा । मधूलिका चिल्ला रही थी पर उस निर्जन में उसकी कौन सुनने वाला था । ब्रजकिशोर उसी ओर हो कर आ रहा था । मधूलिका की आवाजों से सुनाई थी ऐसा उसकी दृष्टि मधुलिका पर पडी । एक गुंडा उसे लेकर भाग रहा था । वाॅर्ड पडा ब्रिज किशोर को देखकर गुंडे ने उसे छोड दिया । जिस प्रकार डाकू को देखकर मुसाफिर अपना सब कुछ दे देता है । झट से ब्रजकिशोर की ओर फायर किया पर निशाना चूक गया । गोली गाज से टकरा गई जो दूसरी गोली भर रहा था कि ब्रजकिशोर ने उसकी कलाई को पीछे से पकड लिया । तमंचा नीचे गिर पडा । गुंडे में पीछे से उस पर एक लाख जमाती । ब्रजकिशोर गिरने को था पर संभल गया । दोनों में जोरों से मुठभेड हुई । ब्रजकिशोर लहूलुहान हो चुका था । गुंडा भी जीर्णशीर्ण अवस्था में पृथ्वी पर गिर चुका था । ब्रजकिशोर ने मधुलिका को देखकर उसे उठाया । ब्रजकिशोर ऐसा मधुलिका रूठी उसके गले से लिपट गई । पहला मिला था ब्रिज किशोर ने उसके आंसू पोंछती उसमें उसे सुरक्षित घर तक पहुंचा दिया । पूरा अपने घर वापस आ गया । दूसरे दिन मधुलिका अपने सहेलियों के साथ गंगा स्नान करने जा रही थी । खेतों में हरियाली छाई हुई थी । रास्ता खेत होकर ही था । सभी के हाथ में वस्त्र ढोनेवाला फैला था । ठंडी हवा बह रही थी । हवा के झोंकों से उनके केश बिखर रहे थे । वह बच्चियों से अटखेलियां खेलती जा रही थी । गंगा जिस प्रकार पवित्र है उसी प्रकार माँ भी है । माँ के आंसू गंगा के निर्मल जल से भी पवित्रा बातचीत के सिलसिले में मधुलिका बोली क्या कैसे प्रश्नवाचक चिन्ह लगती हुई दूसरी सकी बोली माही बच्चों का एकमात्र सहारा होती है । बच्चा जीवन भर माँ की छत्रछाया में पडता है । माँ का आँचल उसे जीने की राह बताता है । कर्म की भूमि बच जाता है । मधुलिका ने कहा यह तो ठीक कहती है लेकिन इस पृथ्वी की सभी नारियां तो माता के तुल्य हैं । दूसरी सकी बोली यह सही है पर सच्ची माँ होती है जो अपने बच्चों को आंसू द्वारा प्याज पूछ आती है । मधुलिका बोली उनकी आंखें गीली हो गई पर आंसू पालक पर अटक गए थे । उसे ब्रजकिशोर कि दुःख दर्द भरी जिंदगी याद आ गई थी । गंगा का तट समीप आ गया था । सभी किनारे पहुंचे सभी ने अपने अपने वस्त्र को पत्थर की छोटे छोटे टुकडों पर रखा । गंगा की शोभा अनुपम है । उसमें जीवन का सौंदर्य गम को भुला देने वाली दवा है । कॉलेज का समय हो गया था । सभी ने शीघ्र ही स्नानकर वस्त्र पहली और घर की ओर चल पडी । शीला पर ब्रजकिशोर बैठा था । अचानक मधुलिका की दृष्टि उन पर पडी सहेलियाँ आगे बढ गई । मधुलिका उसके समीप आई आप यहाँ पीछे से मधुलिका बोली हाँ ब्रजकिशोर बोला कि आप नदी की शोभा का चित्र खींच रहे हैं जी नहीं देख रहा हूँ तो मैं गलत फहमी में पड गई । अफसोस ना कीजिए । नदी की शोभा सुंदर है तेरी जैसी मधुलिका सहम गई । ब्रजकिशोर ने उसकी बाहों को पकड लिया । कलाई को पकडते हुए आगे बढा प्यार दीवानों को पागल बना देता है । ब्रजकिशोर बोला क्या बोले थे यार? मधुलिका बोली हाँ क्या झूठ बात है? ब्रजकिशोर ने कहा मधूलिका सहम गई । आंखे चार हुई । अब कॉलेज जाने का समय हो गया । हम चली । मधुलिका बोली दोनों अपने अपने घर की ओर चल दिए हैं ।

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Maa ke Aansoo एक सामाजिक उपन्यास है Author : Umesh Pandit "Utpal" Voiceover Artist : Sikha Singh
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