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Chapter 11

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औरत कभी उधार नहीं रखती। मौहब्बत,इज्ज़त,नफ़रत,वफ़ा सब दोगुना करके लौटाती है। ऐसी ही रीटा सान्याल थी। वह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही खतरनाक भी। अपनी माँ की तबाह हो चुकी ज़िन्दगी का बदला लेने के लिए उसने अपने दिमाग की बदौलत कई सारे ऐसे मर्डर की प्लानिंग रच डाली कि पोस्टमार्टम तक में साबित न हो पाया कि वह मर्डर है। कानून ने भी उन्हें साधारण मौत समझा। आखिर मैडिकल साइंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स और पुलिस इन्वेस्टीगेशन को कैसे चकमा दिया उसने? आपने सोचा भी न होगा कि किसी के मर्डर की इस तरह भी प्लानिंग रची जा सकती है। दिमाग का ज़बरदस्त चक्रव्यूह। यह बेहद शानदार थ्रिलर है, जिसे आप बार-बार सुनना चाहेंगे।
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अध्याय क्या आ रहा है वो एक बडा खूबसूरत काटा था । अगर ध्यान से देखा चाहे तो वह तीनों लडकियां में समय विशाल बर्गर के पीठ के नीचे बैठी थी और उनके बीच वही नाटक चल रहा था भाई, तुम्हें तो मालूम है कि आज मेरी क्लब के अंदर फाइट है । रजिया थोडी बेचैन होकर बोले मुझे तो जल्दी वहां पहुंचना आ जाए, तुम्हारी फाइट है । रजिया डालेंगे तो चिंता के इस बात की फॅमिली हम दोनों सहेलियां भी आज हमारे साथ फाइव देखने चलेंगे । क्यों जो लिया बिल्कुल बिल्कुल जूलियर समय एक सुंदर काफ्तान में दम स्वर्ग की अप्सरा दिखाई पड रही थी लेकिन आप जाने से पहले सर आपने जो लिया फिर भी एक सिगरेट पीने जीटॅाक ढंग से मुस्कराई सिक्रेट ऍम भी तुम तो कहा था कि अब तुम्हें रोजाना खूब ऍम करनी है । जो लिया कुछ कहते उससे पहले ब्लॅक सिगरेट के अंदर से साला तंबाकू निकालकर उसमें ब्राउनशुगर मार दिया तथा फिर वो सीक्रेट जूलिया को पीने के लिए देती । लडकी भी खूब जमकर काश लगा । जूलिया ने बर्गर के पेड के नीचे बैठे बैठे वो सीक्रेट बन रही ऍम धुआ निकालने में भी काफी एक्स्पर्ट । बॅाबी इस बीच यूलियानी सिगरेट की तीन चार कष्ट और लगाए अच्छा । हर ही जिले आनंद भूल होकर बोली आज तो सिगरेट पीने में कुछ और ही मजा रहे । कुछ हमारी मजा आएगा भी दी तो मन में से ये अनुभव करती हूँ जैसे तुम ब्राउनशुगर पी रही हूँ । इसे सामान्य सिगरेट मत समझो । टाली अगर तुम से सामान्य सिगरेट समझोगी तो तुम्हारे चेहरे पर वो हाँ वहाँ पैदा नहीं होंगे जो एक ट्राॅफी लडकी के चेहरे पर पैदा होते हैं । ठीक कह रही हूँ जो लिया झूमते हुए सच में जैसे ब्राउन शुगर की सिक्योरिटी समझ नहीं शाबाश की अब तुम्हारे साथ साथ मैं भी एक सिगरेट पी थी । फिर वास्तव में रेटर सान्याल ने तंबाकू वाली सामान्य सिगरेट सुंकाली तथा उसके कश लगाने लगे । अब मैं ऐसा सोच यहाँ जैसे तुम्हारे अंग अंग से नशा फूट रहा हूँ जैसे तुम आकाश में बोल रही हूँ । बेटा सान्याल ने बडे तजुर्बे कहाँ ढंग से नाक के नखरों से हुई की जुडवा आधार निकली । जब तुम ऐसा अनुभव करोगे तभी तो मैं एक्टिंग करने में और ज्यादा मजा आएगा । हाँ तो मुझे ऐसा ही लग रहा है । जूलिया झूमते हुए बोले जैसे मैं समझ चांस सितारों पर विचरण कर लेती हूँ । ऐसे में आकाश में उड रही हूँ ऍम तो अब हम जूडो कराटे क्लब चलते हैं । वैसे भी रजिया की फाइव का टाइम होने वाला है । फिर तीनों लडकियां अपना अपना स्थान छोडकर खडी हो गई और उस गार्डन से बाहर नहीं की । अगले एक्शन हो तीनों सहेलियां ऍम बैठे क्लब की तरफ थोडी जा रही थी । सचिन देवडा के पास काम तो कुछ था नहीं इसलिए जब अपनी बैठे चौदह के अंदर खाली पडा रहता था तो खाली पडे पडे वो रीता सान्याल की पूरी मॉडल प्लानिंग का अपने दिमाग के अंदर घुमाने लगता था । उसमें खूब अच्छी तरह कमी ढूंढने की कोशिश करता था अगर इसमें कोई शक नहीं पीता । सान्याल नेम ऑर्डर की जब प्लानिंग बनाई थी वो एक मास्टरपीस लानी थी । सचिनदेव खूब दिमाग खपाने के बावजूद उसमें ऐसी कोई कमी नहीं तलाश पाया जिसके बलबूते पर वो ये कह सकता था कि रीटा सान्याल गौहत्याएं करने के बाद पकडी जाएगी । लेकिन फिर भी न जाने क्यों से लगातार ये एहसास हो रहा था कि कुछ न कुछ गडबड तो जरूर होगी । तमाम सावधानियों के बावजूद गडबड होगी मगर वो गडबड किस तरह होगी ये बात फिलहाल खुद सचिन देवता को भी नहीं मालूम थी । उस समय सचिन देवडा बिस्तर पर लेता है किताब पढ रहा था किसी ने उसका दरवाजा जोर जोर से थाप उठाया साॅल्यूशन कर बैठा जैसे उसे चार सौ चालीस पोल्का करन झूठ हूँ किताब उसने एक तरफ उछालते सब कौन हो सकता है? कम से कम ही था तो नहीं हो सकती हैं फिर ऍम नहीं नहीं वो भी नहीं एक साथ बेपनाह सवाल सचिनदेव रह के दिमाग में खलबली मचाते चलेगा । इस बीच दरवाजा फिर थपथपाया गया हूँ । अब सचिन देवडा बिस्तर छोडकर खडा हो गया और लगभग का दवा देके नजदीक पहुंचा । फिर उसने दरवाजे कि झाँसी में से बाहर झांका । ये देखकर उसने राहत की सांस ली की बाहर कोई औरत खडी थी उसने सावधानीपूर्वक दरवाजा खुला है । औरत वाकई बहुत हंगामा के इस किस्म की मालिक थी । उस पर एक नजर पडती सचिन देवडा के जिसमें घंटे घडियाल बच गए और जस्ट उनके जाने किस किस हिस्से में थरथराहट । दौडी तो बहुत खूबसूरत थी, जवान थे उसके होठों का कटाव बडा तोहफा शिखर था । उसकी छाती ऐसी भारी भरकम थी कि उन्हें देखते हैं किसी भी माॅग घुटनों तक तब तक नहीं लगे । उसकी आंखें बहुत मानती थी उसके बहल इतने सीधे और दिलकश थे जैसे किसी में फुटेज थे, लकीरे खींचती हूँ सचिन देवता का फौरन नहीं दिल चाहने लगा कि वो उसके बालों में मुझे पाकर सोचा है । बडी मुश्किल से अपने दिल में पैदा हुए उस साल एम खयाल को अंजाम देने से रोकता है । कई सचिन देवता का शीर्षक स्वरूप था आपको किसी से मिलना है, मेरा नाम रोशन है वह हर राफा औरत पडे । कुत्सित अंदाज में आपने हूँ चलाते हुए बोले मैं आपकी सामने वाली छाल में अपने डैडी के साथ अकेली रहती हूँ । उसने अकेले शब्द पर कुछ ज्यादा ही छोड दिया । जवाब की डायरी आपके साथ रहते हैं तो फिर आप अकेले का हूँ, सचिन देवरा सकता है, वो क्या है? कुछ नहीं ना चाहते हुए अपनी कातिलाना मुस्कान की बिजली उस पर किराए । वो तो सुबह सुबह चले जाते हैं और फिर तेज जात कराते हैं । तो मैं दरअसल अभी अभी अपने कपडों को प्रेस कर रही थी लेकिन एक का एक हमारे प्रेस गायब हो गई । आपके ॅ होगी अगर फॅमिली इस मुझे दे दीजिए । मैं अभी आपको लौटा जाऊंगी हम हाँ क्यों नहीं मैं अभी आपको पैसे तो आइए अंदर आइए पूछा ने अपने गिटार स्कूल हमें खासकर सिंह का काम देते हुए अंदर कदम रखा है । सचिन देवरा का कलेजा मुंह को आने लगा । लडकी की एक एक अदा उसके ऊपर बिजली गिरा रहे थे । वो तुरंत दौडता हुआ दूसरे कमरे में गया और प्रहस् उठाना है । इस बीच पूछा कि चक्कर नहीं निगाहें बडी तेजी से पूरे कमरे में खून गई थी । कमरे में उसने कई खास चीजें देखी, जैसे वहाँ ढेर सारी किताबें थी । जैसे जाहिर होता था कि वह आदमी पढा लिखा है और उसे किताबों के साथ खास लगाव है । इसके अलावा उस आदमी का रहन सहन भी काफी ऊंचे दर्जे का था और कमरे की हालत बता रहे थे कि वह सलीके मान रहे हैं । लेकिन टेबल पर रखे चित्रणी ऊषा को पूरी तरह चौंकाया । उस चित्र में वही आदमी डॉक्टरों वाला सफेद ओवरॉल पहले खडा था और उसके गले में स्थित इसको भी लगा कहा था । क्या आप एक डॉक्टर हैं? उषा है । सबसे उस चित्र को देखते हुए बोले ऍम सचिन डेवलॅप खिसियाने ढंग से हाँ अब मेरा ऐसा भाग्य कहाँ? ऍम आलिया था, मेरा एक डॉक्टर है, ये ऍम उसी का है थे, रहा हूँ आप क्या कहते हैं? मेरे तो बांद्रा के अंदर एक दुकान है । आजकल मेरा छोटा भाई वहाँ बैठता है तो उसका फिर कोई सवाल करती । उससे पहले सचिन देवडा बोल पडा ऍम फॅमिली अब मैं चलती हूँ । फिर ऊषा, बडे तौबा शिकन अंदाज में अपने हम वोट बुलाती हुई जैसे जाने के लिए मुडी । तभी अकस्मात उसकी बडी भयानक चीज निकल गए तो जैसे उसके हाथ से छूटकर ध्यान से नीचे के लिए तो झटके से घूमी और तुरंत सचिन देवडा किसी ने से डाली थी बिल्कुल उसकी सांस तो जोर से फूलने पीछे नहीं लगी । उसी हर कंपनी ऊषा के ब्लाउज का ऊपर का हम भी खुल गया जिससे उसके उन्नत रूस एक काम साफ नजर आने लगे । उसमें नीचे खराबी नहीं पहनी हुई थी । सचिन देवडा के तनबदन में आग लग गए । उसने उषा को कसकर अपने साथ खींचते और उसका आधा जिसमें किस तरह धीरे धीरे होने लगा जैसे किसी लाइन पर थे, रख रहा हूँ । किसी ने ऐसी स्थिति को बाॅक्स प्रश्न हॉरिजॉन्टल डिजायर के खूब संज्ञा दी है । यानि जब कपडों के बावजूद रहती सुख कानून हो । इस समय सचिन देवडा को कुछ ऐसे ये अनुभूति हो रही थी । पूछा जल्दी सचिन देवरा से छिटक करा लक हुई तभी उसकी नजर अपने ब्लाउस के खुले हुए हो पर पडे जिसके अंदर से उसका एक पक्ष तो लगभग सहारा का सारा बाहर झांक रहा था और दूसरे की स्थिति भी कमोबेश ऐसी थी । मानव ब्लाउज हारकर बाहर निकलने को हमारा हूँ । ऊषा के चेहरे पर इलाज की लालिमा दौड गई । उसने जल्दी से अपना वक्तव्य उसके अंदर करके होक लगाया तथा फिर वहाँ से पलट कर भागने को हुई । सुनिए उषा के कदम आप को चिल्लाई क्यों? वो दरअसल एक मेरे सामने छिपकली आ गई थी । मुझे छिपकली से बहुत डर लगता है । सिर्फ इतने से बात पूछा । कुछ ना बोले तो फिर तेजी से दरवाजे की तरफ झपटने को हुई ये ऍम लेती जाइए । सचिन देवरा ने नीचे जमीन पर पडी प्रेस उठाई, पूछा फिर ठंड की । उसने बिना सचिन देवडा की तरफ नजरें उठाए, प्रेस पकडी तथा फिर एकता वहाँ से भाग खडी होगी । सचिन देवडा के होठों पर हल्की सी मुस्कान लेंगे बिना नहीं रह सके । पूछा जा चुकी थी । लेकिन बेहद चालबाज और हाॅट में सचिन देवरा के ऊपर अपनी वो छाप छोड दी थी जो छाप छोडने के लिए वहाँ आई थी । उसके जाने की कितनी देर बाद तक भी सचिन भी होगा । उसी के ख्यालों में घूम रहा । हालांकि सचिनदेव ऍम था सोचने समझने की सारी सलाह थे उसके अंदर थी अगर वो उषा के बारे में जरा भी गंभीरता से सोचना तो तुरंत भाग चाहता की वो उसके चारों तरफ षड्यंत्र का चाहल बोल रही है । लेकिन वो गम्भीरता से सूचना कैसे? अगर वो ऐसे सेक्शन मामले में भी आप कल का इस्तेमाल करने लगता । तब फिर ऊषा पूछा क्या हुई वो औरत औरत क्या हुई चम्मट को पूरी तरह अकेले का अंधाधुन ना बनाते हैं ।

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औरत कभी उधार नहीं रखती। मौहब्बत,इज्ज़त,नफ़रत,वफ़ा सब दोगुना करके लौटाती है। ऐसी ही रीटा सान्याल थी। वह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही खतरनाक भी। अपनी माँ की तबाह हो चुकी ज़िन्दगी का बदला लेने के लिए उसने अपने दिमाग की बदौलत कई सारे ऐसे मर्डर की प्लानिंग रच डाली कि पोस्टमार्टम तक में साबित न हो पाया कि वह मर्डर है। कानून ने भी उन्हें साधारण मौत समझा। आखिर मैडिकल साइंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स और पुलिस इन्वेस्टीगेशन को कैसे चकमा दिया उसने? आपने सोचा भी न होगा कि किसी के मर्डर की इस तरह भी प्लानिंग रची जा सकती है। दिमाग का ज़बरदस्त चक्रव्यूह। यह बेहद शानदार थ्रिलर है, जिसे आप बार-बार सुनना चाहेंगे।
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