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PART 10 (B) in Hindi

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AuthorAditya Bajpai
एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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पूरे दफ्तर में चंदानी और मानसिंह के सेवा और कोई नहीं था । बॅूद उसके कमरे, महंगाई और उसकी जेब से पर्स निकाल लिया और उसमें कुछ रुपयों के अलावा कुछ भी नहीं था । फिर उन्होंने उसकी दूसरी जेबों की तलाशी ली हो । एक जेब में एक छोटी सी डायरी रखी थी, जिसमें कुछ बातें नोट लिखे हुए थे । चन्दानी ने वह डायरी अपनी जेब के हवाले कर दी और दवे वहाँ अपने कमरे में लौट आए । मैं समझ नहीं पाया की डायरी में कोई काम की बात है या नहीं, पर उसे और इससे पहले उन्हें जो रजिस्टर और चिट्ठियां मिली थी, उन सबको उन्होंने दूसरे दिन बैंक के एक घर में रख दिया । उससे सुरक्षित और कोई जगह नहीं थी । वहाँ कोई भी पहुंच नहीं सकता था क्या हम में से किसी ने पूछा? उस करने में कागजात थे? जी हां, ब्लॉक कर में वही का एक साथ थे । पर अभी मान सिंह के खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं मिला था । उन्हें मिलने की उम्मीद भी नहीं थीं । मैं जासूसी आप पुलिस के तरीके नहीं जानते थे, लिहाजा उन्होंने खुफिया पुलिस से मदद लेने की सोची । जिस दिन उन्होंने सारे कागजात लाकर मेज पर रखें, उसी दिन उन्होंने स्पेशल क्राइम ब्रांच को एक चिट्ठी लिखी । ये सब्जियों में आप लोगों को बता रहा हूँ । उसके बाद की गई जांचों से मालूम हुआ है । वह है उसके बाद की गई जांचों से मालूम हुआ है । लेकिन इससे हमें ये पता नहीं चला था कि मान सिंह जी चंदानी बन गया था क्योंकि एक तो ऐसा उस चिट्ठी के लिखे जाने के बाद हुआ । दूसरे शुरू में ही हम एक बडी भयानक चालबाजी के शिकार हो । हम इतने बुद्धू कभी नहीं बने थे । किस किस से मैं यहाँ से माधुरी ने एक खास भूमिका अदा की । वह चंदानी की प्राइवेट सेक्रेटरी थीं । लेकिन सच पूछिए तो मेहमान सिंह की कठपुतली थी । उसे मान सिंह ने धीरे धीरे एलएसटी की आदत लगा दी थी और उसके बाल पर वह माधुरी को खिलौने की तरह इस्तेमाल करता हूँ । बता चुका हूँ कि जिसे इसकी आदत लग जाए तो मैं उस गोली के लिए कोई भी कीमत अदा करेगा । माधुरी अपने तन के सेवा और कोई कीमत नहीं अदा कर सकती थी और मानसिंह ने कीमत वसूल भी की पर वह एक और कीमत भी वसूलता था । माधुरी से चंदानी के खिलाफ जासूसी कराकर इसी माधुरी से चंदानी मेरे चिट्टी टाइप कराई जो उसने हमें लिखी थी । उसके और मानसिंह के बीच क्या व्यापार चल रहा था इससे भी खबर थे । दुनिया का सारा काम विश्वास पानी चलता है और वह भला क्यों अपनी सैकेट्री पर विश्वास नहीं करता । उन्होंने अपनी चिट्ठी में मान सिंह का नाम नहीं लगता पर अपनी कंपनी की छाया में नशे के धंधे के चलने व फलने फूलने का शब्द जाहिर किया था और यह भी लिखाया की खुफिया सबूत मिले हैं जिन्हें उसने बहुत ही हिफाजत से रख दिया और जांच के वक्त निकालेंगे । मोहन सिंह को इसकी खबर मिल नहीं थी । हमने कार्रवाई करने में कोई देर नहीं की । ये कार्ड ऐसी गोले किस रफ्तार में दौडते हैं इसकी चर्चा रोज की असेंबलियों और अखबारों में हुआ करती हैं । खनापूर्ति इतनी लम्बी चौडी होती है कि जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती है वारदात अक्सर पुरानी पड चुकी होती है । फॅमिली में क्या था ऍम छूरेबाजी की बात महज शख्स लेकिन क्योंकि वह कंपनी काफी बडी थी और चंदानी साहब की पहुंच ऊपर तक हो सकती थी इसीलिए हमने तुरंत कार्रवाई की लेकिन जैसे खता था उसने जरा सी भी देरी नहीं हूँ । ये चिट्टी हमें शाम की डाक से मिली थी और उसे दिन रात आठ बजे मैं जांच के लिए चंदानी साहब से मिलने चल दिया लेकिन मान सिंह इसके पहले ही कार्रवाई कर चुका था । चन्दानी साहब अपने कैबिन में बैठे कुछ काम कर रहे थे तो हो सकता है हमारा भी इंतजार कर रहे हूँ । तभी मोहन सिंह हाथ में पिस्तौल लेकर उसके सामने जा खडा हुआ जगह भी साथ था । गोली मार देने की धमकी देकर दोनों उन्हें दफ्तर के बाहर ले गए तो वहाँ कार पहले से तैयार खडी थी । उसमें माधुरी भी पहले से ही बैठी थीं । चन्दानी के कार में बैठते ही उसने उन्हें क्लोरोफॉर्म सुंघाकर बेहोश कर दिया । फिर जगह भी उसी कार में जा बैठा और उन्हें मान सिंह के घर के पास एक खाली मकान में ले गए । वहाँ चलानी साहब को एक कमरे में कैद कर दिया गया । मान सिंह डॉक्टर में ही रह गया और चंदा ने साहब के कैबिन में जिस चंदानी से मैं मिला वे चंदानी नहीं, यही मान सिंह था । उसने अपना परिचय मुझे चंदानी के रूप में दिया । मैंने कभी चंदा नहीं तो इस से पहले नहीं देखा था इसलिए मुझे उसकी बातों पर शक करने की गुंजाइश ही नहीं थी । मैं मुझसे बडी इस और शराफत के साथ भी हराया, चंदानी नहीं । जो कुछ लिखा था उसे रे सीधे सीधे झूठा नहीं कह सकता था क्योंकि उस हालत में सवाल होता की फिर उन्होंने क्राइम ब्रांच को रैप खाते लिखा ही क्यों? मुझे गुमराह करने की कोशिश नहीं जरूर कि उसने मेरे मन में यह बात बैठाने की कोशिश की कि खत की बातें महक शक है ताकि हम उसे मामूली सी बात मान का मत बच्ची ना करें और जांच बन करते हैं । लेकिन उस की इस बात ने मेरे अंदर मामले के बारे में ज्यादा दिलचस्पी पैदा कर दी । फिर एक बात और थी मैं यही नहीं बता सकता हूँ की चंदानी ने जो सबूत इकट्ठा किए थे उन्हें कहाँ रखा है । इस बारे में मेरे सवालों को मैं टालता रहा और जब मैंने सीधे सीधे उनके बारे में पूछा तो कहने लगा कि वक्त आने पर ही उन्हें पेश करेगा और उससे भी मैं किसी तरह सही नतीजे पर नहीं पहुंचा । उस वक्त मैंने ये सोचा कि या तो चंदानी बहुत डरे हुए हैं या चिट्ठी लिख देने के बाद उन्होंने अपना विचार बदल दिया है और किसी वजह से यह नहीं चाहते कि सच्चाई सामने आए और नहीं चाहते तो क्यों इस की उनके उत्तर की तलाश नहीं, मेरे अंदर सडक गर्मी पैदा की वो मैंने जब उस नकली चंदानी से मान सिंह का पूछा तो उसने उसी मकान का पता बता दिया जहां उसने चंदानी को कैद करके रखा था । लेकिन यह बता देते हुए उसके मन में भयानक योजना काम कर रही थी । यह मुझे नहीं मालूम था उसने एक परफेक्ट मर्डर की योजना बनाई थी । एक ऐसी योजना की हत्या भी हो जाए और किसी को शक्ति ना हो की हत्या हुई है । लेकिन इससे पहले उसने डाली हथिया लेने की सोच मुझे ठीक ठीक नहीं पता था कि उसने ये कैसे जान लिया कि चंदानी ने जिन सबूतों के बारे में लिखा था जाकर में रखे थे । चन्दानी ने अपनी चिट्ठी में ये भी नहीं लिखा था कि वह लॉकर में रखे थे । हो सकता है उसने ये अनुमान लगा लिया हूँ । फिर बैंक में फोन करके किसी बहाने यह पूछा कि चंदानी वहाँ गए थे या नहीं । ऍम था और बैंक के लोगों से जानते थे इसलिए बैंक को इतनी सूचना देने में कोई हिचक ना होती हूँ । ये भी हो सकता है कि उसने जोर जबरदस्ती की हूँ । उसकी एक डायरी गायब हो गई थी । उसी के बारे में पूछने के लिए उस ने उन पर दबाव डाला होगा । लेकिन पहली बात ही ज्यादा सही मालूम होती है क्योंकि है मालूम होने के बाद भी की चंदानी बहन गए थे । वे निश्चय के साथ नहीं जानता था की उन्होंने वह कागजात वही रखे हैं कि नहीं । अगर चंदानी ने दवाब में पढकर बता दिया होता की डायरी और दूसरे कागजात लॉकर में है तो मैं किसी भी तरह पहले उस नौकर को ही खुलवाने की कोशिश करता हूँ । मैं डायरी चंदानी के समझ में कोई बहुत तक का प्रमाण नहीं था लेकिन उसमें जरूर ऐसी बातें रही होंगी जिससे उसके लिए उस डायरी को पाना जिंदगी और मौत का सवाल बन गया हूँ वरना है ताली पाने के लिए जमीन आसमानी इतना कर देता हूँ । उसके लिए कत्ल टक्कर देने में उसे हिचक नहीं हुई । चन्दानी का कत्ल करके तो मैं एक ही पहले से दो शिकार कर सकता था । एक तो यह है कि उसे चंदानी से फिर कोई खतरा नहीं रह जाता है । दूसरे यह है कि उन लोगों की मौत हो जाने के बाद उसे लाकर की ताली की जरूरत ना रह जाती है । उसकी मौत की हालत में वह चंदानी के बाद नंबर दो होने के नाते बैंक के अफसरों से डॉक्टर खुलवा सकता था । अगर ये नहीं होता तो उनके परिवार वालों को सामने पेश करके लॉकर खुलवा लेता । उन्हें कुछ बताना होता की है । कागजाद कैसे हैं और उनका आजाद को कंपनी का बताकर उन्हें हथियार लेता । लेकिन उसने ये नहीं सोचा था कि चंदानी अपनी मौत के पहले चैताली आपको दे देंगे । आप देखिए कि उसकी परफेक्ट मर्डर की योजना क्या थी? छह टन सिंह ने नाटकीय आवाज में और हाव भाव से कहा । उसने कहा कि मैं जांच के सिलसिले में मान सिंह जो वास्तव में चंदानी थे, से दफ्तर में ना मिलूँ क्योंकि इससे बेटा ही दफ्तर में घबराहट फैलेगी और काम का ही होगा । कंपनी की बदनामी होगी सवालाख इसलिए अच्छा होगा कि मैं मान सिंह से उसके घर पर ही मिलो । उसने मुझे ये भी सुझाव दे दिया कि मान सिंह से किस वक्त मिलना ठीक होगा । उसने मुझे मानसिंह से अगले दिन शाम को मिलने का सुझाव दिया । मैंने उसे मान लिया क्योंकि जांच के शुरूआती दौर मैं यही तरीका ठीक होता है । जब तक जुर्म कायम नहीं हो जाता तब डाक किस बात का हक नहीं होता हूँ कि मुफ्त में किसी को बदनाम किया जाए । था । पक्के सबूत हूँ तो बात और है । फिर मैं यह भी नहीं जानता था कि वह सुझाव के पीछे था क्या? इसलिए उसी वक्त वहां पहुंचा जो वक्त उसने बताया था । उधर वहाँ से उसी वक्त उन्हें भाग निकलने का मौका दे दिया । मैं उस घर पर अभी पहुंचाई था कि चंदानी, जिन्हें मैं उस वक्त मानसिंह समझता था, घर से बडी सावधानी से बाहर निकलते दिखाई दी है । तो मैं आगे पीछे बडी सतर्कता से देख रहे थे कि कोई पहरेदार वगैरह तो नहीं है या कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा है । मैंने यही समझा कि मान सिंह ही कहीं जा रहा है और किसी अच्छे मकसद से नहीं जा रहा है । इसीलिए नहीं सावधानी बरत रहा है । वहाँ पहले से ही एक टैक्सी मौजूद थी वो अब मैं पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि वह टैक्सी असली मान सिंह ने पहले से वहाँ तैयार रखा छोडी थी और उसी का कोई आठ दिनों से चला भी रहा था । पर उस वक्त में ये सब नहीं जानता था । मैंने उस टैक्सी का पीछा करना शुरू किया । मुझे खुशी हो रही थीं कि बैठे बिठाए मान सिंह के बारे में पक्के तौर पर कुछ जानने का मौका मिल जाए । अगर मैं अपने किसी गुप्ता दे पड जा रहा है या अपने कालेधन ने वाले कुछ साथियों से मिलने जा रहा है तो अवश्य मैं को जानने में सफल हो जाऊंगा वो तो इसलिए मैंने बडी होशियारी से अपनी मोटर साइकिल से उस टैक्सी का पीछा करना शुरू किया तो मुझे क्या पता था कि मेरी एजबेस् कोफी पर असली मानसिंह हस रहा होगा । टैक्सी उन्हें लेकर मेट्रो स्टेशन की ओर बढ चलीं । नोएडा जाने के लिए उधर से ही जाना पडता है । मैं उस टैक्सी के पीछे था, एकदम पीछे नहीं लेकिन तीन चार गाडी छोडकर टैक्सी का नंबर मैंने याद कर लिया था । इसलिए उसके थोडा आगे रहने पर भी मुझे उसका पीछा करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी । लेकिन नोएडा के पास पहुंचकर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि उस टैक्सी का पीछा एक और टैक्सी कर रही थी । सेक्टर अठारह तक पहुंचते पहुंचते हैं । मेरा शर्ट विश्वास में बदल गया क्योंकि कडी पाँच किलोमीटर का फैसला एक दूसरे टैक्सी ने पहले वाले टैक्सी से बराबर दूरी बनाते हुए तय किया । पहली टैक्सी ने उसे आगे निकलने का मौका दिया तब भी वे आगे नहीं निकला । जब की और बसें निकाल कर लूँ मैं उस वक्त ये नहीं समझ पाया कि आखिर है दूसरी टैक्सी क्यों पीछा कर रही थी । फ्लाईओवर पार करते करते एक का एक टैक्सी जिस पर चल नानी बैठे थे, खराब हो गई । ड्राइवर ने बाहर आकर बोनेट उठाकर इंजन वगैरा की जांच की । दो एक रही गानों से टैक्सी को धक्का भी लगाया । फॅमिली नहीं चलेगा क्योंकि वह चलने वाली थी ही नहीं । यकीनन है टैक्सी जानबूझकर खराब हुई थी । तंग आकर चंदानी टैक्सी से उधर पडे । टैक्सी चलाने वाले पर बिगडते हुए उन्होंने वहाँ तक का किराया अदा किया और फिर अपनी कलाई घडी पर नजर डालते हुए तेज कदमों से मेट्रो की ओर बढ चलें जो वहाँ से मुश्किल से एक किलोमीटर पडता है हूँ । मैंने अभी तक नहीं देखा था कि चंदानी की टैक्सी का पीछे करने वाली टैक्सी भी आगे जाकर रुक गई थी । चन्दानी के कुछ कदम आगे बढते ही उसमें से लगभग करेगा । आदमी बाहर आया हूँ है जगह था जिससे मैं उस वक्त नहीं पहचानता था । उसमें चंदानी को रोककर से कुछ कहा जमदानी छह बार के लिए झटके फिर मालूम होता है चंदानी डर के आगे केवल भागे उन्हीं के पीछे आदमी भी तेज कदमों से आगे बढ गया तो जरा सोचिए कैसी अजीब बात है । मेरे सामने ही एक हत्या की भूमिका बन रही थी । पर मैंने क्या सोचा मैंने यही सोचा कि टैक्सी मान सिंह का नहीं मेरा पीछा कर रही थी और मेट्रो स्टेशन के पास मान सिंह को रोककर उसने मेरे ही बारे में बताया था । भागते हुए चंदानी मेट्रो में दाखिल हुए । उनके पीछे जगह था और जगन के पीछे मैं मेट्रो स्टेशन पर आ रही थी । चन्दानी लगाते हुए उसी की ओर बढ रहे थे । फिर एक डब्बे के पास उन्होंने एक आदमी कहाँ पकड लिया वो जो संजय बाबू आप हैं उसी के कुछ बार गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई । ऍम मैंने कहा ये कभी नहीं हो सकता । मैं बिलकुल पास ही खडा था उनके अगर कोई गोली मारता तो मैं जरूर देख लेता । गोली चलने की आवाज तो मैंने सुनी होती । संजय बाबू उस वक्त मैंने किसी को गोली चलाते नहीं देखा था । ना ही गोली चलने की आवाज मैंने सुनी । कल्पना कीजिए आप स्टेशन पर हैं, वहाँ असंख्य लोग हैं । मेट्रो आ रही है । साइलेंसर लगी पिस्तौल की आवास गाडी की आवाज से बहुत भिन्न नहीं होती । आप उसी चीज की कल्पना करते हैं जो आपके आस पास होती हैं । अगर कोई पिस्तौल चले भी और आप उसकी आवाज भी लें तो आप उस आवाज को पिस्तौल छूटने की नहीं बल्कि शोर गोल से बारिश स्टेशन की ही आवाज कहेंगे । इसलिए आपने उसे नहीं सुना तो स्टॉल का निशाना क्योंकि ब्रिस्टॉल पर रोमान लपेटकर साधा गया था इसलिए उसे किसी ने भी नहीं देखा । फॅस तौल की गोली चलने से पहले चंदानी ने उसे देख लिया था । बता रहे बदहवास होकर आगे केवल भागा और गोली लगने से लडखडाकर चलती मेट्रो के नीचे आ गया । देखने वाले उसे दुर्घटना ही समझेंगे । ऐसा भी इतनी टेस्टी और चतुराई से होगा की आप उसे अगर नहीं समझ सके तो कोई ताज्जुब नहीं । फिर इसे मैं सिर्फ एक तर्क के आधार पर ही हत्या नहीं कर रहा हूँ का लाश का पोस्टमार्टम हुआ । पोस्टमार्टम में मौत की जाहिर तौर पर तो मजा होती है । डॉक्टर अक्सर उसी की तस्वीर कर देते हैं जिसमें कम रहे । ऐसा जहाँ गोली लगी थी मेट्रो के पहियों के नीचे पेश किया था । लेकिन डॉक्टर की निगाह कपडों पर गई हूँ । एक जगह उसमें छेद था और मैं खेद जैसे जल जाने की वजह से हुआ हो । सुनने पर उससे बारूद की गणनाएं डॉक्टर ने तब ब्लाॅस्ट किया तो कार तो से हुई मौत पर किसी दूसरी वजह से हुई मौत का पता खून की जांच से चल जाता है । इसमें भी इस बात का पता आसानी से चल गया की मौत मेट्रो से कट कर नहीं बल्कि गोली करने से हुई हूँ । फिर लाश की शिनाख् सर्दी हो गई । दो दिन से चंदानी के घर वालों को उनकी कोई खबर नहीं थीं । दफ्तर में कोई कुछ ठीक बताता नहीं था इसलिए उनके घर वालों ने पुलिस में रिपोर्ट कर दी । पुलिस ने चंदानी का हुलिया हेड क्वार्टर में भेजा और उसके वाहक लाश के बारे में शक हुआ । फिर चंदानी के घर वालों को खबर की गई । उन लोगों ने लाश की शिनाखत की । हम लोग सारा मामला समझ गए लेकिन फिलहाल इसे कुत्ते रखा गया ताकि मानसिंह भागना निकले । उन लोगों के सामने जो से नहीं जानते थे अपने आपको चंदानी के रूप में पेश करने के पीछे उसकी यही योजना थी । फिर इससे पहले ताली पा लेना भी जरूरी था ताकि मान सिंह के खिलाफ पक्के तौर पर कार्रवाई की जा सकें । आपको तालिका पता कैसे लगा? मैंने पूछा और फिर आपको कैसे मालूम हुआ कि है ताली नौकर की है ये मुझे पता बिल्कुल भी नहीं था कि गैर ताली लॉकर की है । आती चोरी की मैसेज दिया जानता था कि आपके पास डाली है क्योंकि मैंने भी चंदानी को आपकी जेब में ताली डालते हुए देखा था । फॅमिली उन्होंने मुझे क्यों नहीं? मैंने पूछा । उन्होंने ऐसा सोचा कि मुझे तली दे देने से उनका मकसद पूरा होगा । आपने खुद बताया है कि मैं जब आप से मिले तो बहुत घबराए हुए थे । उन्हें पटा था की उनका पीछा किया जा रहा है । आपको उन्होंने शरीफ नौजवान समझा जो आप है भी और चुपचाप आपकी जेब में ताली डालकर आपसे कहा मेरी मदद कीजिए । ये मदद उन्होंने ट्रेन पर चढने के लिए नहीं मांगी थी । वो ज्यादा बात करने का वक्त उनके पास नहीं था । आप भी उसी मेट्रो से जाना चाहते थे और चंदानी भी । मेरा अनुमान है हूँ की हिफाजत के लिए उन्होंने आपकी जेब में ताली रख दी और आगे चलकर आपको अपने परेशानी के बारे में बताकर आपसे डाली मांग लेते ना भी मानते तो बाद में जेब से एक अनजान ताली पाकर आप उसे पुलिस के हवाले कर देते । आप ताली पुलिस के हवाले ना भी करते हैं तो भी उसे आपके पास ताली होने का पता चल जाता । पुलिस के पास उन की छुट्टी थी, उसके आधार पर जगह डाली का जिक्र करते हैं तो पुलिस डेढ सवेरे रात को खोज लेती हूँ । या फिर अगर आप डाली पुलिस के हवाले कर चुके होते हैं तो ऍम नानी को मिल जाती है । लेकिन वही है नहीं । जानते थे कि अगले ही क्षण मौत उनका इंतजार कर रहे थे । फिर आप मेरे साथ किसी गुंडे या बदमाश की तरह ऍम हूँ । इसीलिए की जिस वक्त चंदानी ने आपकी जेब में ताली गिराई तो उस वक्त मैंने उन्हें पहचाना नहीं था और मानसिंह ही समझा था । नहीं । ये भी समझता था कि मान सिंह ने आपकी जेब में डाली आपकी जानकारी में गिराई है । यानी मैं समझता था कि आप मान सिंह के हीरो के आदमी है । अपने ऊपर शक हो जाने पर मान सिंह ने उसे वह जगह थी जहां उसने गोलियां छुपाकर रखी होंगी । डाली आपके हवाले कर दी । लेकिन ताली मिलने के बाद जब वह मेट्रो के नीचे आ गया तो आप ने ताली को हथियार लिया । कल मैंने आपको टेलीफोन किया था तो उस वक्त बोल टनाटन की रिपोर्ट तो आ गई थी पर लाश की शिनाख्त नहीं हुई थी । बोल टनाटन रिपोर्ट सही है । जन का ही उस आदमी की हत्या हुई है । मेरा शक आप पर और बढ गया । मैंने सोचा कि होना होगा आपने ही किसी तरह गोली मारकर हत्या कर दी होगी । वो लाश की शिनाख्त हो गई तो भी आप पर मेरा शक झुका क्यों बना रहा है? तब मैंने आपको निश्चिंत ही मान सिंह का आदमी मान लिया और ये विश्वास कर बैठा हूँ कि आप नहीं चंदा नहीं की हत्या फॅमिली के लिए की है । इसलिए आप से उस तरह पेश आया क्योंकि आम तौर पर लोग पुलिस को अपने भेज नहीं बताते । कुछ होता भी है तो छुपा लेते हैं । मैंने सोचा घाट ऐसे घाटा निकलता है । हाँ हूँ अगर सचमुच कांदा हो तो आपको एक निहायत शरीफ आदमी निकले जो गुंडों के चक्कर में फंस गए थे । मेरे उस तरह के व्यवहार से आपको जो तकलीफ पहुंची है, उसके लिए मुझे बेहद अफसोस है । अपनी लंबी कहानी खत्म करके शैतानसिंह चुप हो गए । फिर उन्होंने खुद के इटली से आपने कप में चाय डाली । जब आप चूस किया लेते रहे, लेकिन एक सवाल तो अब भी रह गया । वकील साहब ने चुप्पी तोडी हो यहाँ मैं समझ गया । ऍम सिंह ने मुस्कुराते हुए ये सवाल है कि आखिर डाली गई कहाँ हो? हाँ इस किससे में हम ये तो भूल ही गए कि अखिल तालिका हुआ क्या? शैलो बाबू ने कहा मेरा ख्याल है मैं जानता हूँ और शायद पुष्पा ही भी जानती हैं वो । शैतान सिंह ने कहा गा आपको पता हैं कहाँ है? आश्चर्य से एक साथ कई लोग बोल पडे लेकिन ये मेरे खयाल ही है । इसके लिए मुझे प्रयोग करना पडेगा रही हो । जी हाँ । शैतान सिंह ने कहा और पीतल की एक ताली हवा में उछाल दी । वो झंडे की आवाज करती । पुष्पा के सामने फर्श पर गिरी पुश ताकि गोद में पम्मी बैठी थी । उसे लगते लगते । बच्ची खुश पानी डाली उठाकर पम्मी को देते हैं । फिर शैतानसिंह बच्चों की तरह उसे लेने के लिए लडके और रूखाई से ताली उसके हाथ से छीन लिए । मैं कुछ समझना सका तो मम्मी रोने लगी । ऍम सिंह ने उसे गोद में उठा लिया । फिर कुछ करते हुए कहा ना बेटा, ये मेरी डाली है नहीं नहीं मिली नहीं बेटा या मेरी है क्या? तुम्हारे पास भी है ऐसी ताली हो? ऍम नहीं निकलती नहीं निकलती नहीं कहाँ फॅमिली देंगे? नहीं करो ना हम चला था ऍम बताओ तो कहा है मैं निकाल दूंगा । मम्मी शैतान सिंह की गोद से मचलती हुई उतर पडी और दौड घर वही गुड डाले आई जो उसे माधुरी ने दिया था । उस से भी जोर जोर से हिलाने लगी । गी प्लास्टिक के खोखले गुंडे के अंदर कोई चीज खटखट कर रही थी । उसे शैतान सिंह को थमाते हुए हमने कहा बॅाजीरॅाव निकाल तो निकाल दो । शैतान सिंह ने कहा लेकिन पहले ये बताऊँ, यही इसमें कैसे गए? तो फिर होने लगी और सहन कर पुष्पा की ओर देखने लगी । नहीं बेटा, मम्मी नहीं मारेंगे, मुझे बताओ । ऍसे पूछ कारण वो फिर अपनी तोतली बोली में । पम्मी ने बताया कि मम्मी ने ताली टेबल पर रहती थी । उसे उसने उठाकर अपनी स्कूल ड्रेस की जय में रख लिया था । दो बुआ जी यानी माधुरी नजर गुड डाल दिया । उसमें खाने के लिए जम्मू में छेड नहीं था । उस ताली से मैं दे के मुंबई छेद बना रही थी कि ताली हाथ से छोडकर गुड्डे के पेट में चली गई । दुनिया बहुत दुखता टाली लिखा गया । डर के मारे उसने बुआ जी को नहीं बताया, क्योंकि वह मम्मी से कह देंगी तो नहीं मम्मी मारे ना । इसी बीच गुड्डे के उसी वहाँ वाले छेद में उंगली फसाकर शैतान सिंह ने एक जब टी पीतल की थाली निकाल ली थी, उस से हम लोगों को दिखाते हुए उसने कहा ये रही साहबान बेहता ली । मुझे खुशी है कि मेरा प्रयोग सफल रहा । ढाई साल बच्चे से जिला नहीं की जा सकती थी । उसने ताली लिया नहीं, यह जानने के लिए जरूरी था की उस की याददाश्त उकसाया जाए । इसलिए मैंने ये नाटक किया । हाँ, मेरा खयाल या तो था कि हो सकता है बच्ची ने ताली नहीं हूँ । पर ये तो मैंने सोचा तक ना था कि ताली गुड्डे में थी और सारे समय मान सिंह और माधुरी की नाक की नहीं चाहिए थी । सभी लोग आवाक होकर कुछ श्रद्धान सिंह की ओर हथेली पर पडी उस थाली की ओर देख दे रहे हैं तो यही थी मनहूस डाली जिसके लिए मैंने इतनी मुसीबतें झेली । पर बमनी की मेरी वक्त पुष्पा की जान पर बनाई थी । शहरों बाबू, वकील साहब और मोदी ने हाथ में लेकर उलट पुलट कर देखा । हालांकि उसमें देखने की ऐसी कोई बात नहीं थी । मैंने उस ताली को छुआ भी नहीं । इतना सब हो जाने के बाद मेरे अंदर उसे हाथ में लेने की भी हिम्मत नहीं रह गई थी । ना अच्छा वो शैतान सिंह ने बडी चतुराई से वह ताली झेल में रख ली और जो ताली उठा ली थी उसे पन्नी को थमा दिया । पानियों से लेकर खुशी खुशी किलकारियां मारती है । फिर पूछताछ की खोज में चाह रही थी । हम लोग कुछ देर और बैठे रहे हैं । चाय का एक और दौरा चला । फिर एक एक करके सारे मेहमान उठने लगे । शैतानसिंह भी उठे । मैंने पूछा जगन और माधुरी का क्या हुआ? दोनों हिरासत में है । माधुरी मिजोरम में अपना हिस्सा इकबाल कर लिया है । वह बदमाशों के चंगुल में फंस गई थी । गन्ना उसमें ऐसी कोई खराब बात नहीं । जुर्म का इकबाल कर लेने से उसे सजा में कुछ रियायत मिल जाएगी । रहा जगन चंदानी के ऊपर स्टेशन पर गोली उसी ने चलाई थी । पर ये साबित करना मुश्किल होगा क्योंकि वो उस पिस्तौल का अभी तक पता नहीं चला है जिस से गोली चलाई गई थी । अगर आप पता चल भी जाए तो उस पर हाथियां क्योंकि निशान नहीं होंगे । लेकिन जुर्म में उसके पूरी तरह शरीफ होने के काफी सबूत हैं और लम्बी जेल से उसका बचना नामुमकिन है । मेरे ऊपर उसने जो छोटे मारी हैं है, मैं बोला नहीं हो था । जहाँ तक खास मुस्लिम का सवाल है, अर्थपूर्ण ढंग से छुट होगा । शैतान सिंह ने पुष्प की ओर देखते हुए कहा, उसे तो आपने क्या की सजा मिल चुकी है । हम घर में अकेले रह गए । मम्मी हो गई थी । अच्छी बेटी की तरह उसने शैतानसिंह वाली ताली पुष्पा को दे दी थी । माधुरी वाला गुडडा उसकी खट्टो लिया के नीचे पडा था । कुछ भी सिर तक लिहाज थोडे थी पर मुझे पता था मैं लगी हुई थी । मैंने कहा पुष्पा यहाँ मेरे पास । पुष्पा ने चेहरे पर से लिहाज हटाते हुए कहा ऍम बात बताऊँ क्या वो मेरे हाथ में एक आदमी का खून लगा है तो मुझे खुद ही तो नहीं समझेंगे । उसने पूछा हो तुम क्या कह रहे हो? ये नहीं कहती कि तुमने दो आदमियों की जान बचाई है तो मैं कौन को नहीं कह सकता है । तोषण पुष्पा खामोश रही । उसके बाद फिर उसने कहा अच्छा एक और पद पता हूँ आप क्या? तो तुम्हारे ऊपर उसका ही का कहना में उसका ज्यादा चल गया था ना सच बता ना मैं तुरंत कुछ नहीं कैसा का अब तुम सबकी हो गए । पुष्पा ने फिर से कहा सच बता दूँ । झूठ मुझे तो के में नहीं रख सकता । मैं आदमियों पूछता और आदमी की कमजोरियाँ मुझे भी हैं । नहीं नहीं सच बात बता दी नहीं, ये मार्ग की कमजोरियाँ है । पुष्पाणि उठकर बैठे हुए कहा, लेकिन मुझे खुशी है कि तुम हो । तुम झूठ बोलते तो मेरी नजरों में गिर जाते हैं आप मुझे तुम्हारा यकीन है । उसने उठकर बत्ती बुझा नहीं । तभी रसोई घर में कोई बर्तन झनझना करनी चाहिए । फिर जैसे नंगे पाँव ऊपर से जमीन पर कोटा । यह करीब करीब रोजगारी उधम मचाने वाली मिली थी । पर आज मुझे कल की तरह कोई डर नहीं लगा । मैं पुष्पा को अपने पास महसूस कर सकता था और वह होस्ट डाली । अब मेरे पास नहीं थी ।

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