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मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 10

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मेरे सपने मेरा गाँव writer: ओमेश्वरी 'नूतन' Voiceover Artist : Ruby Pareek Author : Omeshwari 'Nootan'
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देखना । बहुत गोठान बनाने के लिए जमीन तो मिल गई पर कुछ चरवाहे क्या इतने सारे जानवरों को संभाल पायेंगे? नीरज ने पूछा मैं भी इसी सोच में हूँ कि मेरे मन में बात आई है । ऊर्जा को टोकते हुए सरोज ने कहा बताइए । नीरज ने कहा बात ये है कि नीरज के पूछे जाने पर सरोज झेंप गई हो । अब बता भी तो यार । पूजा ने पूछा भूटान के चारों और यदि हम गड्डे खोदे तो कोई भी जानवर आहता को पार नहीं कर पाएगा । बहुत अच्छी बात कही तुमने? सरोज ये सलाह तो इंजीनियर भाई की तरफ से आना था पर तुमने उसे पीछे छोड दिया । पूजा ने कहा तुम ना पूजा मुझे चलेगी, जहाँ पर मैं चढाओ मैं ऐसे ही थी को वो ही कह रही है । सरोज आप मल्टी टैलेंटेड है । मैं सब समझ रही हो । नीरज सुमित ऊपर सरोज की तारीफ करने का मौका चाहिए । बहुत शुरू हो जाते हो । पूजा ने कहा मैं आप लोगों के लिए चाय बनाती हूँ । इससे पहले की पूजा उस की भी खिंचाई कर दी । सरोज ने वहाँ से जाने का बहाना ढूंढ लिया । देख रही हूँ पूछा जब भी कुछ बात आगे बढाने का मौका मिलता है तो सरोज रास्ता नाम लेती है तो अपने मन की बात किया मेरे सामने गा होगी । पूजा ने कहा तो इसमें बुराई क्या है, आप तो वैसे भी सबको जानती हैं । नीरज ने कहा अरे बुद्धू प्रेम बहुत ही नाजुक चीज होती है जिसमें एकाकीपन का महत्वपूर्ण स्थान होता है । इतना भी नहीं जानती की प्रेम गाली अतिसाहस क्रीज आ मेरे को न समाये ही जी गुरु जी । नीरज ने हाथ जोडकर प्रणाम करने की मुद्रा में मुस्कुराते हुए आगे कहा अब काम की बात कर ले ठीक है अच्छा ये बताओ स्टॉप डेम बरसात से पहले बंद हो जायेगा । नीरज पूजा ने पूछा गांव वाले यदि इसी उत्साह से श्रमदान करते रहे तो अवश्य पूरा हो जाएगा और हाँ, कलेक्टर साहब भी काम की प्रगति के बारे में पूछ रहे थे । नीरज ने कहा, कलेक्टर साहब हमारे काम में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं । सरोजनी चाहिए की प्याली थमाते हुए कहा, मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है । पूजा ने कहा, यदि जिले का मुख्य हमारे काम पर ध्यान दे रहे हैं तो अच्छी बात है, लेकिन मुझे लग रहा है कि कलेक्टर साहब का कुछ तो स्वार्थ होगा । पूजा ने कहा क्या हो सकता है सरोज ने पूछा मुझे कलेक्टर साहब ने भेजा है । पूजा जैसे मिलने जी मैं हूँ पूजा का ये मैं जिला कृषि अधिकारी हूँ । आप कुछ नवाचार कर रही है, उसी संबंध में चर्चा करनी है । आपका स्वागत है । पर शमा चाहते हुए निवेदन है कि हमें हमारे काम में कोई व्यवधान नहीं चाहिए । पूजा ने कहा कि ये आप क्या कह रही है? हम तो आपका सहयोग करना चाहते हैं । धन्यवाद सर पर आप लोगों का काम में देख चुकी हूँ । पीडित किसानों को बीमा का पैसा, सरकार द्वारा प्रस्तावित मेर मरम्मत एवं खेत सुधार का रुपया तो अब तक किसानों को दिलवानी पाई जो उनके हक का था और सहयोग की बात कर रहे हैं । हमने जो लक्ष्य बनाया है उसके हिसाब से हमें शांति से काम करना है । पूजा जी ठीक कह रहे हैं साहब, हमें अपना काम करने दीजिए । सरपंच ने प्रवेश करते हुए आगे कहा, ऑफिस का कई चक्कर काट चुका हूँ । मैं पर हमारी कोई बात सुनी दी गई और जब पूजा हमारा सहयोग करने आई है तब आप किस काम से आए थे । आप कृषि अधिकारी ने पूछा एक काम हो तो बताओ साहब ग्राम पंचायत में पीने के पानी की समस्या जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था के लिए तालाब निर्माण की मांग, अप्रोच रोड और अन्य पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई । पिछली बातों को छोडिये और अब बताइए कि क्या समस्या है । कृषि अधिकारी ने कहा, पूजा जी के साथ मिलकर अब अपनी समस्याओं का हल हम खुद ही ढूंढ रहे हैं । बस आप कोई प्रशासनिक अडचन ना डाले । सरपंच की बातों में कठोरता थी । जैसी आप लोगों की इच्छा कहकर जाने लगे तो सरपंच ने कहा चाय तो पी कर जाइए साहब क्या बात है सर पंजी, आप गुस्से में लग रहे हो । हम किसान है तो की हमें गुस्सा नहीं आएगा । पूजा जी सरकारी अनुदान से मिलने वाले डीजल पंप के लिए कई चक्कर लगाए पर इनके पास समय ही नहीं रहता था । हमारे लिए और उनके कर्मचारी लोग हमें कुछ भी कहने से पहले ही डराते रहे हैं कि साहब का मूड ठीक नहीं है । लीजिए पानी बेहतर गुस्सा ठंडा कर लीजिए । चाय बनाओ नहीं । सरोज मैं भी घर से चाय भी करा रहा हूँ । सरपंच ने कहा अच्छा तो उन्हें चाय की गाली दी जा रही थी । सरोज ने हसते हुए कहा चाय की गाली बात दोहराकर नीरज के साथ पूजा भी हंसी को रोक नहीं पाई । एक तो पहले से ही मेरा दिमाग खराब था, ऊपर से कृषि अधिकारी को यहाँ बैठे देख खुद को रोक नहीं सका । घनशाम ने कहा क्या हुआ सर पंजी? नीरज ने पूछा वही जिसकी आशंका थी, पटवारी आए थे, कह रही थी कि गोठ आने के लिए बाबू साहब की ही जमीन क्यों? तो आपने क्या कहा सर? उसके बाबू जी ने अपना हजार किनारे पर रखते हुए पूछा मैं तो बताऊंगा ही, पर आप पता ये पत्थर जोडाई का काम पूरा हुआ कि नहीं भैया घनशाम ने पूछा लडकों का जोश तो तुम देखी रहे हूँ । आज तो जितनी भी की पत्थर जोडने का काम खत्म ही करना है । आज तो मेरा साथ देते हुए पूरन सिंह भी पत्थर उठा उठा कर रखते हुए पत्थर जुलाई में सहयोग कर रहे थे । बस फिर क्या था बच्चों की जोश में चार चांद लग गए । चलो अच्छा हुआ की मुख्य कार्य संपन्न हुआ । पूजा ने गहरी सांस लेते हुए कहा हाँ पर सर पंजी कुछ जिक्र कर रहे थे । नीरज ने कहा मैंने पटवारी से कह दिया है कि और कोई जमीन हमारे पास है नहीं तो वो ठान तो वहीं पर ही बनेगा । फिर उसने क्या कहा? सरोज के बाबू जी ने पूछा, आप तो जानती है भैया की उस ने क्या कहा होगा? घनशाम ने सवाल के बदले सवाल ही किया तो अब क्या करेंगे? करना क्या है? बहुत से लीजिए । उस पटवारी की ज्यादा थी पर अब और नहीं । आप दोनों की बातों को आप दोनों ही समझ रहे हैं । हमें भी तो बताइए । पूजा ने कहा बाबू साहब का खाता है और उन्हें का उल्टा सीधा काम भी करता है । पटवारी तो पूरे गांव का है पर बात ऐसे करता है जैसे तनख्वा उसे सरकार नहीं बल्कि बाबू साहब भी देते हैं । शाम लाल ने कहा कि ये बाबू साहब है कौन? क्या करता है? नीरज ने पूछा नेतागिरी करता है और शहर में पता नहीं क्या काम करता है पर पैसे वाला है । सरोज ने कहा पर अबकी बार उनकी नेता गिरी नहीं चलने देंगे । घनशाम ने आगे कहा, गांव के विकास में जो भी बाधा डालने की कोशिश करेगा उसकी शिकायत कलेक्टर साहब से करेंगे । हाँ तो गुस्से के साथ साथ बडे जोश में हो सर पंजी । पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा, क्योंकि अब तो कलेक्टर साहब भी है हमारे साथ । घनशाम ने कहा हाँ ये बात तो है । सरोज ने कहा पूजा जी आप कलेक्टर साहब को बताइए कि बाबू साहब हमारे गांव में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं । घनशाम ने कहा ठीक है मैं बात करूंगी । हलो जी पूजा बोल रही हूँ । हाँ हाँ बोलिए । मुझे गोठान की जमीन के बारे में आपसे कुछ बात करनी थी । आप ऑफिस में है क्या? अच्छा? हाँ वो पूजा बोल रही है । सॉरी फोन पर आपकी आवाज पहचान नहीं पाया । इस समय कहाँ पर है आप? मैं भी कलेक्टर ऑफिस से कुछ दूरी पर हो सर, अच्छा किया । आप ने की फोन कर लिया । मैं बस कहीं जाने ही वाला था । अपने दफ्तर आ जाइए जी सर बैठिए! कहते हुए कलेक्टर की घंटी बजाते ही चपरासी सामने आकर खडा हो गया । क्या लेंगे आप चाय या कॉफी? कलेक्टर साहब ने पूछा जी कुछ नहीं ऐसे कैसे कुछ नही पहली बार हमारे ऑफिस आई है । कुछ तो लेना ही होगा । पानी दिलवा दीजिए । बताइए क्या समस्या है सर । बात ये है कि जिस जमीन पर हमने गोठान बनाने का निर्णय लिया है वो कोई बाबू साहब के कब्जे में है और पटवारी के माध्यम से उसने कहलवाया है कि उस जमीन पर गोठान बनने नहीं देंगे । सिर्फ कब्जा है की मालिकाना है कि उसके पास कब जा ही है । सर रसूख के चलते जानता हूँ मैं उन्हें आप निश्चिंत रहिए । मैं उनसे बात कर लूंगा । आपके काम में कोई व्यवधान नहीं आएगा । धन्यवाद सर । पूजा ने हाथ जोडकर कहा और बताइए कैसा चल रहा है आपका काम । आप सब के आशीर्वाद से ठीक चल रहा है सर । उम्मीद है वर्षा से पूर्व बांध का काम पूरा हो जाएगा । बहुत सुन्दर सराहनीय कार्य कर रही हैं । जितनी भी तारीफ की जाए कम होगी । जी धन्यवाद सुना है यहाँ पर आपका मकान बहुत अच्छी जगह पर है । जी यहाँ से पचास मीटर की दूरी पर है । कौन रहता है वहाँ? कलेक्टर ने पूछा खाली पडा है सर किराये पर देना चाहेंगी इस बारे में तो कुछ सोचा ही नहीं है । सर किस के लिए चाहिए? नया जिला बनने के कारण दफ्तर के लिए हमारे पास बिल्डिंग की कमी है । शिक्षा अन्य विभाग को शिफ्ट करना था सोचकर बताओ कि सर पूजा ने कहा ठीक है और जल्दी बताइएगा । ठीक है सर चलती हूँ कहते हुए पूजा दोनों हाथ जोडकर खडी हो गई तो कलेक्टर साहब ने भी वैसा ही क्या । पूजा के जाने के कुछ सेकंड के बाद ध्यान आया कि सामने खडा चपरासी उसे देख रहा है तो मुस्कुराते हुए कलेक्टर साहब भी बाहर निकल गए

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मेरे सपने मेरा गाँव writer: ओमेश्वरी 'नूतन' Voiceover Artist : Ruby Pareek Author : Omeshwari 'Nootan'
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