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भाग - 11

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सात वर्षों से चला आ रहा एक तरफा प्‍यार क्‍या दोनों तरफ होगा या अधूरा रह जाएगा? क्‍या दोस्‍ती प्‍यार में बदल सकती है या सिर्फ दोस्‍त ही बना जा सकता है? प्रेम और अंतरंगता के ताने-बाने में बुना बेहद रोचक उपन्‍यास है। Writer - Arvind Parashar
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हूँ । कुछ ही दिनों के बाद मैंने अपनी आंख एक लडकी के बाहर निकाली । पिछले कुछ समय से मैंने ऐसा नहीं किया था । अब मैं ताड के पेडों से बात नहीं करता था । मैंने उनसे गौरी के साथ अपने जीवन को खुशियों से भर देने के लिए कहा था । उसने मुझे निराश किया । वो पूरी तरह विफल हो चुका था । मैं कहा था कि वो ताडका बेड मुझसे आंखें नहीं मिला पा रहा था । बिल्कुल लेती श्रेणी की तरह है । उन दोनों ने मुझे किसी ना किसी रूप में निराश किया था । सुकून दोनों नहीं दिया, ईश्वर ने भी और मैं फिर से एक छेद में था । मैंने गौरी के लिए नाश्ता बनाया और उसे थाली में डाला । सिर्फ एक बार मैंने सारे पढते हटाना हैं क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उनकी ज्यादा सेवी परछाई मेरे खूबसूरत और इसके चेहरे पर पढें । मैंने उसे नाश्ता खत्म करने के लिए मनाया लगता है । उसे भूख ज्यादा नहीं थी । उसने मुझसे कहा कि उसकी परीक्षा चल रही है इसलिए वो थोडी चिंतित हैं । मैंने उसे गले लगाया । पहले उसे उसके जन्मदिन की पार्टी के कार्यक्रम के बारे में बताया । दरवाजे है अगर पहले तो मैं उसे सुन नहीं पाया । मैं प्यार में खोया हुआ था । अगर तुम्हें दस मिनट तो दरवाजे के बाहर ही पिटाई होंगे वो जरूर कोई मेरा बहुत ही करीबी रहा होगा । आजकल कौन आपके लिए इतनी देर प्रतीक्षा करता है कोई भी नहीं करता हूँ । लोग आपको छोड कर चले जाते हैं । लेकिन मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें परेशान नहीं किया है । हाँ, ये गौरिका को सामान है तो उसकी गाडी से मिला है । मैं तुम्हें पैसे देने आई हूँ । नियमों के अनुसार मुझे सामान उसके माता पिता को दे देना चाहिए था । मगर मैंने उनको इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया । अब तुम ये फैसला कर लोग क्या तुम अपने पास रख हो गई या फिर उन्हें देते हो गई थान्या आखिर ये मेरे साथ ही हुआ हूँ । आखिर मैंने क्या गलती की थी । वक्त सारे जख्म आभार देता है । जिंदगी आगे बढती रहती हैं तो खुद को इस तरह से दोषी मानकर प्रताडित नहीं कर सकती हूँ क्योंकि इससे गौरी को और भी दुःख होगा । इस बात को समझो की वो हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी । अब वह तो भारत ही एक हिस्सा बन चुकी है इसलिए अब कर रहे हो उसके डायरी शायद तुम्हारी जान फिर से ले ले । माफी चाहती हूँ मगर मुझे उसे पढना पडा क्योंकि मुझे सुराग ढूंढ रहे थे । मैं सच आर्या को पकडना चाहती थी । गौरी ने लिखा है कि उसे माफ कर देना चाहिए आखिर वो भी तो एक इंसान है । अब क्योंकि यहाँ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है इसके लिए मैं तुम्हारे ऊपर छोडती हूँ सर पहले बहुत कुछ कर लिया अब तुम सुनाओ क्या कहना है ऐसे चुपचाप खडे बताऊँ करते हैं मुझ से बात करो । डेली मैं सब समझ पा रहा हूँ । काफी बात कर रहा हूँ । मेरा मतलब है खाता हूँ । मैं पास हो गया । मुझे पागल पंडित ट्रस्ट लिया है । क्या आपने तेल की धडकन को नियंत्रित कर पाता? हमारे हाथ में होता है ना? या फिर हम सब चाहे उसे चला यार रोक सकते हैं तो मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा है उस पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है । जहाँ प्रकार की बात है अगर गौहरी चाहती है कि उसे माफ कर देना चाहिए तो ऐसा ही होगा । जो कुछ भी कौन ही दे फैसला किया है । सबसे पहले वही होगा । और हाँ एक बात और ठंड ॅ मैं जानता हूँ कि तुम्हे अपनी शादी की तैयारियों पर ध्यान देना है । बस ख्याल रखा हूँ । सब कुछ ठीक ठाक से हो जाए । बसु आएंगे हम शादी का कार्ड लेकर थान्या के भाव से ये बिल्कुल स्पष्ट हो गया । मुझे कितना बुरा लगता है वो एक बैठा की रात थी । वो अपने लेपटॉप पर कुछ बोलो चला रही थी । उसके बचपन की सारी यादें ताजा हो गई । सब कुछ उसकी आंखों के सामने था । लम्बा थे आपने कांपते हुए हाथों से वो इस ट्रेन को छू रही थी । किसी का दिल बिलकुल टूट चुका था । वो एकांतवास में चली गई थी । वो अपने घर से बाहर भी नहीं निकलते थे । थोडा तो इसके लिए क्योंकि वो खुद को गोलाकार मानते थे और उसे लगता था आपकी जो कुछ भी हुआ है वो उसे डाल सकती थी । पिछले पांच दिनों में उसके परिस्थिति और खराब हो गई थी तो किसी से भी बात नहीं कर रही थी । वो उन सारे वीडियो को काम से देख रही थी । कभी बैक बच्चे के तौर पर कौरे के साथ खेलती हुई नजर आती थी । तो अगले वीडियो में कॉलेज में घर अचानक एक वीडियो चलने लगा हूँ जो गौरी नहीं देश के लिए बनाया था । याद आ रही थी जब हम उच्चविद्यालय में पढते थे तब हम अपने प्यार के बारे में बात किया करते थे, मेरे पास नहीं होता था और हम सलमान खान के लिए पागल थी । बिल्कुल पागल । मैंने तो मैं मैंने प्यार किया और आगे फिल्म के पोस्टर उपहार में दिए थे । एक दिन मैं तुमसे जरूर मिलवा हूँ । ये मेरा वादा है और जब मैं और नील शादी कर लेंगे तो किसी दिन हम उसे अपने घर बुलाएंगे । शायद उस दिन सल्लू की जोडी तुम्हारे साथ बन जाए और सुनो जब तुम ले वीडियो देख रही होगी तो पीछे मुडकर देखता हूँ । मैं बिल्कुल तुम्हारे पीछे खडे हो । इतिश्री फौरन पीछे मुड गई । पीछे की दीवार पर उस की बडी सी तस्वीर लगी थी । उसमें वह मुस्कुराते हुए इतिश्री को देख रही थी । इन दोनों लडकियों के बीच की दूरी न कने थे । ऐसा लगता था मानो एक दूसरे के साथ छोडी हुई हूँ । इतने इतने दिन ऐसे ही काटे थे । उसके ही यादव में उसके गौरी की तस्वीरें अपने सोने के कमरे की दीवारों पर चिपका रखी थीं । उसने उसके इतने लगाने शुरू कर दिए थे । वो उसी तरह के कपडे भी पहनने लगी थी । बहुत सारे काम करने की शिकायत कभी गौरी उससे क्या करती थी । उसे करते कि नीचे कुछ वाइन्स भी मिले थे । उसने उन्हें फौरन निकाला और गुस्से में मसल दिया । वे उन्हें उस भयानक रात याद दिलाते थे । नीति श्री ने अपना आपा खो दिया था । उसने गुस्से में आर्या का नाम चलाना शुरू कर दिया । वो गुस्सा जो उसने आज से पहले कभी प्रकट नहीं होने दिया था । तब मेरी बहन को बता तो मैंने उसके चार ले ली । पहले तुमने उसकी मासूमियत को बात की कोशिश की । फिर तुमने उसे गंदी चीज की लत लगती है । छप्पन यहाँ से चार रही थी तो उसे बिल्कुल भी होश नहीं था । इस सब तुम्हारे ही कारण हुआ है कि आज आज वो मेरे साथ नहीं है तो नहीं । जीवन को शुरू होने के पहले ही खत्म कर दिया तो उस सकते को बार डाला जो सख्त बदलने की तैयारी कर रहा था । तुमने उस लडकी को माॅस् पडने वाली थी तो तुम हमको मॉल डाला तो बुझ के बार डाला तो मेरी आत्मा को बात किया तो मैं एक समूह की हत्या हो तो वही तो कपडे में भी जगह नहीं मिलनी चाहिए । मैं भी कितनी बेवकूफी थी । किस समझते ही पाई कि गौरी के साथ क्या हो सकता है । वो तो किसी भीषण अवसाद से ग्रस्त थी और उसे लग रहा था कि मैं तुम्हारे साथ खुश हूँ । आर्या को हवा में कालिया देने के बाद देती । श्री ने दौरे की तस्वीर अपनी हाथ में ले ली और उससे बातें करने लगी । दरवाजे की घंटे से उसका ध्यान भंग हुआ । उस पार्सल में दो कपडे थे जो गौरी नहीं उन दोनों के लिए भिजवाए थे और जिस पार्टी की रात में पहनने वाली थी इतिश्री पूरी दाद उस कपडे को पहनकर बैठी गई और फिर अगले दिन भी उसने वहीं कपडे पहने रहे । वो इस अकेले पर नकारात्मकता और एकांतवास के भाव से बाहर नहीं निकल पा रहे थे तो मुझे यहाँ के नंबर देखने के लिए क्यों छोड गई? मैं तुम्हारे साथ वहाँ क्यों नहीं हो सकती हूँ? जबकि मैं गाडियों की हर रे इसमें तुम्हारे साथ रही तो भरे हर रोमांच पे तो हमारे हर साहसिक कारनामे में मैं तुम्हारे साथ थी ना और फिर तो भारी सभी तो मेरी भी तो उस पर उन्होंने मुझे इस कॉलेज में अकेला छोड दिया है क्या तो भेजता रहता भी अंदाजा है और की बेटी लीजिए कोई भी क्लाॅज क्या कॉलेज में कोई दूसरा काम कर पाना कितना मुश्किल हो गया है क्या? तो ये अंदाजा है की मुझे उस खाली बेंच पर, कैंटीन में या फिर पुस्तकालय में अकेला बैठ तक कैसा लगता है? मैं तो वो ही सब मजबूरी में ही कर रही हूँ । चाहती हूँ ताकि तो भारी आत्मा को ठेस लक्ष्य तो हमेशा कहाँ करती थी की हमें वही करना चाहिए जो हम करना चाहते हैं । जिससे करने से हमें खुशी मिलती है । मैं अभी भी वह समझने की कोशिश कर रही हूँ । फिर उनका वो एकमात्र समय जो मुझे सबसे अच्छा लगता है वो तब होता है अपने ऊपर आकाश की ओर देखकर तुमसे बात करती हूँ वहाँ पर सारे सितारों में सबसे पसंदीदा सितारा तो भी हो । मैं तो उस पर अटक ही कहीं हूँ । इसके अलावा यहाँ कुछ भी अच्छा नहीं लगता है । गौर तो वापस आ हो शहर कृपा करके वापस आ जाओ मैं यहाँ बहुत तकलीफ हो गई । गौरी मैं मैं तो डील को ढूंढती फिर रही हूँ । उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है । मैंने उसके बारे में कॉलेज, पुलिस, उसके परिवार चलो सबसे पूछा मुझे आश्चर्य हो रहा है, कोई भी उसके बारे में कुछ नहीं बताना चाह रहा है । इसका तो एक ही मतलब निकलता है कि कोई उसके बारे में मुझे कुछ भी बताना नहीं चाह रहा है । भला ऐसा कैसे हो सकता है कि नील के माता पिता को भी नहीं मालूम कि वो कहाँ है । उसके मालूम है कि वो एक बहुत ही अच्छा लडका है और इसीलिए उसके बारे में चाहने को उत्सुक । बस तो भारी लिए । बस तुम्हारी जीवन को अपने दिल में संजोये रखने के लिए एक दुर्घटना की वजह से तुम्हारे जिंदगी खत्म नहीं हो सकती । दिल तुम्हें वापस आना ही पडेगा । बेहतर होगा कि तुम जल्दी से बाहर आ जाओ । इस तरह से कहा है हो जाना ठीक बात नहीं । तुम डरकर भाव नहीं सकते हूँ । अगर मैं इसका डटकर सामना कर रही हूँ वो भी अकेले तो तुम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हो? कम से कम गौरी के लिए ही सही तो मैं वापस आना चाहिए । वो तो कभी माफ नहीं करेगी । दी मेल मैं तुमसे कह रही हूँ तो भरे इस रिश्ते में प्रवेश करने से पहले वो मेरी समझे दी थी । मैं उसे बेहतर चलती हूँ और ऐसा करके तुम उसे और दुखी कर रहे हो । काफी तो तेल से क्यों नहीं कहती कि वह बस एक बार सामने आए । मुझे उसे तुम्हारे बारे में कुछ बताना है । वो सब कुछ जिसके बारे में उसे नहीं मालूम वो चीजें जो तुम हमेशा करना चाहती थी । वो सबको जिससे तो मैं बेहद प्यार था कौन? मैं तुम्हें ये भी बताना चाहती हूँ कि मैं वो सब करना चाहती हूँ जो कभी तुम करना चाहती थी जो तो मुझसे भी करवाना चाहती थी । मैं भेजते अंदर पैसा लेना चाहती हूँ और ही उसे पता है तो ये सब बडी आसानी से कर लेती हूँ । वैसे भी तुम्हारा एक हिस्सा तो मेरे अंदर ही बस्ता है । नाम मुझे तुम्हारी कमी खल रही है । मेरी जान मुझे तुम्हारी कमी बहुत महसूस हो रही है । जाने मंद इतिश्री यही सब बातें अपने आपसे तब तक दोहराती रही जब तक की वो थक कर सो नहीं । उसे अस्पताल से एक दिन पहले ही छुट्टी मिल गई थी । उसके बाद अभिताभ उसकी हालत के बारे में बता दिया गया था । मुझे भी आशा था की कोई भी वहाँ नहीं आया । आर्या बिल्कुल अकेली थी । उसका शरीर पीला पड चुका था । उसका ये दुर्बल रूप जरूरत से ज्यादा नशा और उसके शरीर को जो प्रताडना झेलनी पडी थी उसकी वजह से हो गया था । उसके फिर एक प्वाइंट भरी । उसके बाद आईने के सामने बैठ गई है और उसमें खुद से बात करना शुरू कर दिया । पहले तो मैं छोड कर बहुत बडे खलते की है । नहीं मैं चाहते थे कि तुम वापस हूँ । मैं चाहते थे कि तुम मुझसे इस बात के लिए माफी मांगी की मैं तुमसे जितना समय मांग रही थी तो मुझे ना मुझे दे नहीं पा रहे थे । मैं हमेशा यही सोचती रही ऍम शायद ऐसा करो के बगल में खडे थे । मैं तो अपने जीवन में फिर से पाना चाहती हूँ बहुत पूरी तरह से । अब तो भारत यहाँ कहीं भी नहीं है । क्या तुम फिर से मेरे पास वापस सांसद हूँ । मैं ये सच में चाहती हूँ । देखो अब मेरे पास आसपास भी कोई गई है । सब लोग मुझे छोड कर चले गए नहीं है और बस नए हूॅं रोड भी तैयार करो ही । इस तुम्हारी आत्मा को शांति हम भर गई हूँ । बस खतम शांति से क्यों नहीं कर पाई तो मैं इस तरह से बढने की क्या जरूरत थी तो सबकुछ अस्त व्यस्त खाॅ तो तो बाहर रह रहा ही । बेरा हो सका और पूछे इसी बात का सबसे ज्यादा ट्रस्ट था । वो लंबे लंबे कश लगाने लगीं । वो दोबारा आईने के पास वापस लौट आई हो । तब नहीं थी कौन है? हाँ एक बहुत तेज प्रहार के साथ उसने आएंगे को चकनाचूर कर दिया । ऐसा प्रहार वो कई बार करती रही । टोमॅटो कपडों को वह तोडती रही । कांच के टुकडे जमीन पर चारों तरफ फैल गए और रोती रही । चिल्लाती रही और फिर बेहोश हो गई । किसी ने मुझे फोन किया, मैंने फोन नहीं उठाया । जैसा कि मैंने पहले बताया था मुझे उससे बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं । नहीं । ऐसा नहीं था कि मैं ये नहीं चाहता था । ऐसा नहीं था कि मैं उसे माफ नहीं करना चाहता था । मैंने क्या कर दिया था? मगर ये माफी मैं आज तक पहुंचाना नहीं चाहता था । एक तरह से बहनों से शांति देती थी । मुझे नहीं मालूम कि मैं सही था या गलत । मगर उन परिस्थितियों में मैं जिस चीज से गुजर रहा था उसके हिसाब से मैं बहुत ज्यादा सही था । मेरे जख्म बढ रहे थे । उस वक्त मैं बिल्कुल अकेला छोड दिया गया था । तो मुझे मुझे के समय दिया था तो बिल्कुल स्पष्ट था । वो मुझे बहुत अच्छी तरह से जानता था । वो जानता था कि मैं इस बात में यकीन करता हूँ कि वक्त सारे रखना मार देता है । मेरे जत्था भर रहे थे या फिर भरने शुरू हो गए थे । जो भी हो वो हर पल मेरे साथ था । मेरे या अपने विचारों में यासीन जैसे रात कैसे होती गई? मैं अपनी दैनिक क्रिया के अनुसार बालकनी में बाहर आ गया । मैंने सितारों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया और गौरी से नमस्ते करता हूँ । अब मैं ताड के पेडों से बात करने की बजाय सितारों से बात करने लगा था । वो नहीं में कहीं थी । मुझे पक्का यकीन था । मेरे लिए राहत के एकाकार हो जाने का एक ही मतलब था कि मैं उसके साथ रहना चाहता था । मेरे लिए ब्रह्मांड के साथ एकाकार हो जाने का मतलब था कि मैं उसे बहुत चाहता था । सितारों से भरे उस आसमान ने मुझ पर ढेर सारा प्यार बरसाया था । शायद बेरी उम्मीद से भेज जाना क्योंकि ये गौरी की ओर से आया था । मेरे लिए सितारों के साथ होने वाली है । उस लंबी बात चीत का कुछ तो मतलब था मेरे लगे सितारों के साथ होने वाली उस लंबी बात चीत का कुछ तो मतलब था और मेरा साथ कभी नहीं छोडने की चाय यही उसका मकसद था । शायद किसी दिन मैं भी सास मान की गहराई में जाकर उससे मेरी जाऊंगा । मेरे ले के प्रमुख खान से एकाकार होने का मतलब था कि मैं हमेशा उसे ही चाहूंगा । हम मजाक करते थे । जोर जोर से हस्ते थे । काफी समय के बाद मैं इतना खुश था । वो अपने दोस्तों के पीछे छुट रही थी और कभी कभी तो वह पार्टियों के पीछे भी छुप चाहते थे । मुझे बात लोग से नफरत है मगर फिर अचानक वो बाहर निकल आती है । कौन ही तुम शराब भी नहीं पति हूँ । लुका छुपी के खेल में तुम हमेशा जीत चाहती हूँ । मगर इस बार मैं जीत गया हूँ क्योंकि पहले तो मैं एक बार फिर से क्या है? जाने भी तो नहीं । तुम कैसे जीत सकते हूँ । मैं तो तुम्हारी बैंगलोर थी जबकि तुम अपनी दाहिनी ओर देख रहे थे । मैंने गौर इसे खाना खाने के लिए कहा क्योंकि कल का दिन काफी लंबा होने वाला था । वो बहुत सिती है । वो मेरी बात सुनना ही नहीं चाहते थे तो कुछ और शरारत करने लगे । नहीं मैंने उसे वही छोड दिया । मैंने बादलों से कहा कि वह मेरे सामने से हट जाएं क्योंकि मैं वापस लौट कराऊंगा और अपनी गौरी से बात करूंगा । ऊपर हीरो के आसमान में मैं वापस अपने कमरे में गया और खत्म पडने लगा जो उसने होटल में मैं दिल्ली गए लिखे थे । वो मेरे लिए सबसे मुश्किल रात थी और साहब मुझे सब कुछ ऐसा लगा कि मैंने चीनी का कोई कारण ही नहीं की है । या यूं करूँ कि मैं बस गौरी के साथ ही जीवित था । मेरी छाती में सचमुच एक दर्द होने लगा तो मेरे दिल में भी चुप नहीं लगा था । मेरा दिल भारी होने लगा और मेरी आंख बंद होने लगी थी और बैठ कर भी क्या सकता था सिवाय तरफ में? ठीक नहीं । मैंने कौरे की सारी तस्वीरें आपने पलंग पर भी खेलते थे । हालांकि मुझे ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी तो वो तो हमेशा मेरे पास ही रहते थे । फिर भी मैंने उन्हें इस तरह से सजा दिया था । इसका कारण था की उन तस्वीरों से बचपन से लेकर अभी तक की उसकी सारे दसवी दी थी । गौरी बेड कितना बंद हो रहा है कि मैं अभी तुम्हें अपनी बाकू में हूँ । मैंने तो मैं कभी नहीं रोका । नहीं क्रिया मैं ठान ताज की रात मैं तुम्हें अपने ऊपर उठ लेना चाहता हूँ । सरूर ऍम तो भारी आवाज मेरे ऊपर चाहतो कर देती है तो मुझे पागल बनाते थी हो और तो मुझसे प्यार करते हूँ । उस पर उसे बहुत प्यार आता है तो मुझे जो एहसास देते हूँ मेरे लिए वही सबसे ज्यादा होती है । मेरी जान हाँ इतना खास है । उस रात गौरी ने एक पल के लिए भी मेरा हाथ नहीं छोडा था । मैं ज्यादा और हर दिन की तरह उसके लिए नाश्ता बनाया । मगर आज वो मुझे दिखाई देखते रहेंगे । मैंने खिडकी खोली तो देखा कि बाहर तेज धूप चमक रही थी तो मैं उससे केवल रात को ही मिल सकता था । मैं गया हूँ और उससे बात करने लगा । मैं यह कल्पना कर रहा था की वो भी मेरे साथ नाशं कर रही है । यही मैं पिछले एक हफ्ते से कर रहा था । कुछ ही मिनटों में उसका कमरा ठीक हो चुका था । उसकी तस्वीरें साफ हो चुकी थी तो सफाई को लेकर बहुत सजग थी । यही कारण था कि हम नहीं घर को पूरी तरह साफ कर दिया था । फ्रीज पर टंगे ऍम मेरी स्याही में उसके हाथ से लिखी हुई कागजों में बदल चुके थे । मौसम की भविष्यवाणी वहाँ दर्ज हो गए । जिम की फीस भरी जा चुकी थी । इसका मतलब मैं घर से बाहर निकला ना? इसका जवाब है नहीं । मैंने पिज्जा पहुंचाने वाले लडके के हाथों से नकद पैसे भिजवा दिए थे । ऍम अच्छा हो रहा है क्योंकि साथ में पिज्जा खाना हमारे तयशुदा कार्यक्रमों में से था । उसे गौरी अच्छी तरह याद नहीं है । मुझे देखकर वह थोडा भावुक हो गया था । ग्यारह से पहले उसने बस इतना ही कहा, सर करते हैं अपना ख्याल रखूं । असर हम मैडम को बहुत याद करते हैं । टॉम आया था उसे आना पडा । कोई सूचना नहीं कोई फोन नहीं तो भरा मेरा समय खत्म हो गया है । चलो खाना खाने चलते हैं । उसके पिता देख लिया और भाई की तरह सब कुछ एक झटके में समझ गया । ठीक है गौरी, तुम और मैं गाडी में घूमने चलेंगे और ये पैसा हम अपने साथ ले चलेंगे । मैं ये सुनकर बहुत खुश था । वो गाडी चलाते हुए बातें कर रहा था तो उस दिन शायद उसने मुझसे सबसे ज्यादा बात की थी । उसने रास्ते में गाडी रोक दी । हम दोनों बाहर आ गए । मुझे तो मैं ये देना था हूँ । उसने नजर टेढी कर करें । मुझसे कहा क्या है इसमें? मैंने त्वरित प्रक्रिया थी । तब कब से इन चीजों में विश्वास करते लगते हैं । कार से शांति मिलती है इसे अपने पास सबको । मैंने उसे कोई बहस नहीं इसलिए नहीं कि भगवान के साथ मेरा गुस्सा शांत हो चुका था । मगर इसलिए क्योंकि दोस्ती में कुछ चीजें हमेशा अटल रहती हैं । भरोसा, श्रद्धा और अच्छा तो इसलिए क्योंकि आपका दोस्त आपसे कहता है । आर्या ने एक हफ्ते के अंदर गौर से इस हद तक दोस्ती कैसे करनी होगी? इतने दिनों के बाद भी हम दोनों एक दूसरे को लेकर कितने संवेदनशील रहते हैं । अगर वो ढूंढ भी कर रही थी तो भी उसने एक बार भी इसके बारे में नहीं सोचता । प्रार्थना करना शुरू हुआ है । ध्यान लगाना शुरू करूँ तो मैं सारे जवाब खुद मिल जाएंगे । अब तो मैं ज्यादा बातें ब्रम्हाण्ड के साथ करने की जरूरत है । जितना चाहे इसका इस्तेमाल कर था । ये हमेशा याद रखना । भगवान अभी भी मौजूद है और अब गौरी भी एक है । तो हमने उंगली से उस पे की ओर इशारा किया और फिर उसने अपनी उंगली आसपान की ओर उठाती । मैं जानता हूँ मैंने कल रात ही उससे बात की थी तो बहुत खुशी खुशी मेरी कमी महसूस कर रही है । मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त को गले लगाते हुए कहा, उसने मुझे पीछे धकेल दिया । उसने मुझसे एक वादा करने को कहा । मैं जो भी करना चाह रहा था मैं उसे जरूर पार्ट दूंगा । हम नहीं थी । श्री के बारे में कोई बात नहीं की । मुझे लग रहा था कि शायद वो कुछ कहेगा मगर उसने भी कुछ नहीं कहा । इससे एक ही निष्कर्ष निकाला जा सकता था । वो उससे मिल चुका था और इसलिए उसे पता चल गया होगा कि मैं अभी तक उससे नाराज था । अब एक जाग्रत मस्तिष्क में तो और भी ज्यादा । फिर से दोस्ती की वो छोटी सी चीज बहुमत करना जो लोगों को पसंद आए मैंने उससे ज्यादा कर दिया । मेरे ये शाम बिल्कुल पिछली शाम की तरह थी । जैसे जैसे रात कहती होती गई मैं गौरी के साथ अपनी खूबसूरत दुनिया में खो गया । पिछली रात की तरह इस लाख की हम उसी तरह रोमानी लंबू में खोये थे । मुझे नहीं मालूम क्या हुआ था । मगर मैं एक झटके से जांच चुका था । मुझे थोडा अजीब सा महसूस हो रहा था । मैंने पहले कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था । प्यार पाने और अपनी जान से प्यार जताना तो कभी झटके को निमंत्रण नहीं देता हूँ । मैंने बत्ती चालू की उस प्रार्थना के किताब को खोला और कुछ पडने लगा । ये पहले से तय नहीं था या फिर इस की जरूरत नहीं थी या फिर ये मेरा विकल्प नहीं था कि मैं प्रार्थना करते लगा था, स्वता नहीं हुआ था । इसमें कोई दिव्यशक्ति थी । मैंने ये महसूस किया था । इसमें इतनी ताकत थी कि ये मुझे उस किताब तक खींच लाई थी । मुझे आश्चर्य हुआ क्यों? मगर धीरे धीरे ये मेरे मन में एक घर बनाने लगा था । मुझे नहीं लगता कि मैं शारीरिक रूप से गौरी की ओर आकर्षित हो रहा था या फिर मेरी वासना हूँ । मेरे प्यार पर हावी हो रही थी मगर फिर भी इस बार मुझे ऐसा लग रहा था कि जो मैं कर रहा था वो ठीक नहीं था । मैंने पर आपने कहा था शुरू करते नहीं । मेरे कॉलेज से कहा कि उसके लिए मेरा प्यार बिल्कुल पवित्रा था जिसपर वासना के लिए कोई जगह नहीं । मुझे यकीन नहीं हो रहा था की मुझे शारीरिक रूप से उसकी कमी महसूस हो रही थी । उसके बेटे जवाब मिल गए थे । मैं बिलकुल विकसित हो रहा था । मुझे मन की शांति चाहिए । इस वक्त ये सब का अलग था । मुझे यह तय करना था कि मैं अपनी जिंदगी में चाहता हूँ

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सात वर्षों से चला आ रहा एक तरफा प्‍यार क्‍या दोनों तरफ होगा या अधूरा रह जाएगा? क्‍या दोस्‍ती प्‍यार में बदल सकती है या सिर्फ दोस्‍त ही बना जा सकता है? प्रेम और अंतरंगता के ताने-बाने में बुना बेहद रोचक उपन्‍यास है। Writer - Arvind Parashar
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