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जिनी पुलिस भाग 27

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जिनी पुलिस भाग 27 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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भाग सत्ताईस देखो हम राज्य सरकार से हैं, केंद्र से नहीं । हमारे पास सीमित बजट होता है जिससे हमें अपने राज्य की तरक्की के लिए खर्च करना होता है और ये हमारे पांच वर्षों के कार्यकाल का अंतिम वर्ष है । हमारे पास आपने पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने का यह अंतिम मौका है । मुख्यमंत्री का दायित्व है कि अगला चुनाव घोषित होने से पहले पिछले सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करें अन्यथा हमें मीडिया और जनता के भारी दबाव का सामना करना पडता है और हम अगला चुनाव हार भी सकते हैं । लोहित ने उत्सुकता से इस प्रक्रिया को समझने के लिए पूछा तो आम तौर पर राज्य सरकार के पास पैसों की कमी होने पर क्या होता है? मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से फंड मांगता है, फिर क्या समस्या है? हम प्रधानमंत्री महोदय से मिलकर फंस मांग सकते हैं । अगर उन्हें हमारा प्रोजेक्ट पसंद आया तो वह जरूर सहायता करेंगे । चीजें इतनी आसान नहीं है जितनी दिखाई देती है । रोहित ये राजनीति है । नेता जो कुछ भी करते हैं उसमें राजनीति शामिल होती है । मान लो की उन्हें हमारा प्रस्ताव पसंद भी आया और वो ये मान भी गए कि इससे जनता की भलाई होगी । फिर भी वो हमें फण्ड नहीं देंगे क्योंकि वह विपक्षी दल के नेता है । वो नहीं चाहते कि हमारे शासन के दौरान कुछ भी अच्छा हो जिसका हमें राजनीतिक फायदा मिले । वी जानबूझकर हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई किसी भी अच्छी परियोजना में देरी करवाते हैं ताकि अगले चुनाव में उनकी सरकार बनी । जनता के लिए क्या अच्छा, क्या बुरा, इससे नेताओं को कोई फर्क नहीं पडता । केंद्र सरकार का ध्यान उन राज्यों पर अधिक होता है जहाँ राज्य सरकार भी उन्हीं की पार्टी की है । राजनीति बहुत गंदी है । बेटा जब मैं छोटा था, मैं केवल अच्छे काम करने के लिए ही राजनीति में शामिल हुआ था । गरीबों की मदद करना और भ्रष्टाचार को खत्म करना ही मेरा मकसद था । कई ठेकेदार मेरे पास आकर मुझे रिश्वत देना चाहते थे । जब मैंने कडाई से इसका विरोध किया तो उन्होंने मुझ पर राजनीतिक दबाव डाला । यहाँ तक कि मेरी खुद की पार्टी हाईकमान ने मुझे रिश्वत लेने के लिए मजबूर किया । उन्होंने मुझसे कहा कि थोडा में अपने लिए रखो और बाकी का पार्टी फंड में जमा करवा दूँ । कुछ सालों में मुझे इसकी आदत हो गई । यदि तुम लगातार की चढ में काम करोगे तो कभी ना कभी तो तुम्हारी भी दामन में दाग लगेगा ही । लोहित सोचने लगा, यही प्राथमिक कारण है कि मैं भारत से इतनी नफरत करता हूँ । कोई यहाँ आगे बढना ही नहीं चाहता हूँ । हर कोई सिर्फ एक दूसरे की टांग खींचना जाता है । लोग इतनी याद किया कि कैसे उसने अपनी बेटी को सिर्फ शॉपिंग के लिए दो लाख रुपए दे दिए थे और कहा सर क्या मैं आप से कुछ निवेदन कर सकता हूँ? हाँ बोलो अगर आप के पास इतना सारा पैसा है तो क्यों ना आप अपने पैसों से ही इस परियोजना को शुरू करते हैं । इससे आपको राजनीतिक लाभ भी होगा । दिल्ली के लोग आपको बहुत पसंद करेंगे और हो सकता है कि अब दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री बने मंत्री जी को भी लोहित का विचार पसंद आया । कुछ सेकंड सोचने के बाद उन्होंने एक आई कहा, नहीं लोहित, मैं ऐसा नहीं कर सकता । लेकिन क्यों सर मेरे पास जो पैसे हैं वह सब काला धन है । मैं इसे इस प्रोजेक्ट के लिए खुले आम खर्च नहीं कर सकता । ये मीडिया और आयकर विभाग के नजर में आ जाएगा हूँ । लोग इतने मंत्री जी को जोर देते हुए कहा, सर क्या फायदा ऐसे कालेधन को इकट्ठा करके जिसे आप अपनी मर्जी से खर्च भी नहीं कर सकते । अमन ने लोहित को टोका एक मंत्री के साथ वो कुछ ज्यादा ही बदतमीजी से बात कर रहा था । कॉल पर सन्नाटा पसर गया । अभी अब इस प्रोजेक्ट को लॉन्च नहीं कर सकते । हाँ, अगर अगले कार्यकाल में भी हमारी पार्टी चुनाव जीतती है तो हम निश्चित रूप से से शुरू करेंगे । लेकिन इसमें कुछ साल लगेंगे । मंत्री ने निष्कर्ष निकाला, कुछ सालों में हम इस परियोजना में रूचि ही खो देंगे । हम अपराध को रोकने का हमारा उद्देश्य ही खो देंगे । भारत में अधिकांश परियोजनाओं के असफल होने का यही कारण है क्योंकि इसमें आवश्यकता से कहीं ज्यादा समय लगता है । मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता । मंत्री जी ने कहा और फोन काट दिया । लोहित के फोन रखते ही अमन ने पूछा क्या हुआ सरकार के पास हमारी परियोजना के लिए फंड नहीं है । तरह तरह के घोटाले करके वे अपनी विदेशी खातों में पैसे जमा करते हैं तो हम से सैकडों तरह के कर इकट्ठा करते हैं और अक्षय व्यापारियों को हजारों करोड रुपये का ऋण देते हैं जो अनंत है । पैसे वापस किए बिना भारत छोडकर भाग जाते हैं लेकिन उनके पास एक नेक काम के लिए पैसे नहीं है । अमर ने आश्चर्य से कहा लेकिन वह तो खुद सरकार है । उनके पास नोट छापने की मशीन है । वो तो जितना चाहे नोट छापकर खर्च कर सकते हैं ही । लोहित ने एक घृणित आह भरी शायद ऐसा नहीं होता होगा । मैंने सुना था की नोट छापने से पहले वर्ल्ड बैंक से अनुमति लेनी होती है और मैंने तो ये भी सुना है कि किसी देश के पास जितना सोना होता है वो उसके बराबर ही नोट छाप सकते हैं । ऐसा कुछ भी नहीं है । कोई भी देश जितना चाहे उतने नोट छाप सकता है । कोई अंतरराष्ट्रीय दिशा निर्देश या सोने से इसका कोई ताल्लुक नहीं है । लेकिन मैं खुद ऐसा नहीं करते क्योंकि जिस देश की अर्थव्यवस्था में जितना ज्यादा पैसा होगा, महंगाई उतनी ही ज्यादा बढेगी । अमन ने कहा मैं कुछ समझा नहीं । अगर बाजार में ज्यादा पैसे होंगे तो ये लोगों की चीजों को खरीदने की ताकत को बढाएगा और यदि लोग ज्यादा चीजें खरीदेंगे तो उससे चीजों की मांग में वृद्धि होगी जिससे हर चीज की कीमत खुदबखुद बढ जाएगी । यही कारण है कि एक अर्थव्यवस्था में देश का कुल धन देश में मौजूद कुल वस्तुओं और सेवाओं के बराबर होता है । अमन ने कहा तो अब इस विपदा की घडी में हमें क्या करना चाहिए? क्या हाथ पे हाथ रख के आगामी चुनाव का इंतजार करना चाहिए या केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने का इंतजार करना चाहिए? चुनाव में तो भी कई दिन बचे हैं और हम ये जानते हुए नहीं की कौन सी पार्टी जीतेगी और नई सरकार को हमारा ये प्रोजेक्ट पसंद आएगा भी या नहीं । लोहित को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । इसी बीच लोहित की कंपनी के कर्मचारी ने भीतर प्रवेश क्या? एक फाइल में वह रोहित के हस्ताक्षर लेना चाहता था । रोहित ने गुस्से से उस फाइल को फेंक दिया और चलाने लगा । नहीं करना है मुझे साइन । मैं इस कंपनी को चलाना ही नहीं चाहता । मैं सब कुछ खत्म करके बस मारना चाहता हूँ । अमन के इशारे के बाद वो कर्मचारी ऑफिस से बाहर चला गया । लोहित ने अपना मोबाइल फोन कॉन्फ्रेंस क्योंकि कांच की दीवार पर दे मारा । कांच के टुकडे फर्श पर बिखर गए । ऑफिस में हर किसी ने पहली बार लोहित का ये अवतार देखा । अमन ने लोहित को शांत करने की पूरी कोशिश की मगर सब बेकार था । लोहित जोर से चिल्लाने लगा । अब इस परियोजना को लागू करना ही मेरे जीवन का एकमात्र लक्ष्य है । अगर मुझे अपनी जान भी देनी पडे तो मैं दे दूंगा इसे शुरू करने के लिए । अपनी अगले के घोडे दौडाकर अमन ने कहा अगर तुम सच में ये करना ही चाहते हो तो बीच तो आपने ये कंपनी मार्क जुकरबर्ग को और उन पैसों से शुरू कर लो अपना ये प्रोजेक्ट जीनी । ये सुनते ही लोहित एकदम शांत हो गया । लोहित के कानों में तृषा के शब्द गूंजने लगे । जब तुम्हारा हौसला बुलंद और नियत साफ होगी तो नियति तो में भलाई करने का मौका जरूर देगी । तो महाराज दिल तो में खुद ब खुद बता देगा । जब सही समय आएगा, बशर थी तो अपने दिल की सुनो, अपने दिल की सुनना भी तो बडी हिम्मत का काम है । रोहित को आशा की एक किरण नजर आई । एक ही समय में उसे अपार खुशी और दर्द महसूस हुआ । लोहित से पूछा क्या यह सच में ऐसा संभव है? क्या मैं खुद इस प्रोजेक्ट को फंड कर सकता हूँ? क्यों नहीं कम से कम मंत्री इस इस बारे में पूछ कर तो देखो हिट शानदार आई दिया है । मैं अपने लोगों के लिए अपने सपनों को न्यौछावर करने को तैयार हूँ । रोहित ने तुरंत ही अपने ऑफिस के डेस्क फोन से मंत्री जी के लैंडलाइन नंबर पर कॉल किया क्योंकि उसकी गुस्से के कारण उसका मोबाइल फोन टूट गया था । पीएम ने फिर से फोन उठाया । लोहित ने कहा, सर मैं लोहित बोल रहा हूँ, प्लीज मंत्री जी से मेरी बात करवा दीजिए । कुछ मिनटों तक लाइन होल्ड करने के बाद पीएम ने कहा, मंत्रीजी व्यस्त है, अभी आप से बात नहीं कर सकती है सर ये बहुत जरूरी है । फिर एक बार आप उनसे बात करवा दीजिए । लोहित ने निवेदन किया मंत्री जी ने फोन पर आकर कहा लोगे तो जैसा कि मैंने कम से पहले ही कहा है मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता । मुझे बार बार फोन करने से कुछ नहीं बदलेगा । ऐसा कहकर मंत्री जी फोन रखने ही वाले थे । तभी रोहित ने कहा, सर अगर पूरे पैसे में खर्च करूं तो क्या हम यह प्रोजेक्ट कर सकते हैं? लोहित जी, हम इस परियोजना के लिए करोडों रुपए चाहिए और वो भी पूरा वाइट । हम इसमें काला धन खर्च नहीं कर सकते । बेवकूफ इंसान मेरे पास तेरी तरह हराम का काम आया । वह काला धन नहीं है । एक एक पैसा मैंने कडी मेहनत से कमाया है । तुझे क्या लगता है कि कानूनी ढंग से इतना पैसा कमाना संभव ही नहीं है । लोहित ने मन में सोचा बेशक सर ये सब सफेद धन ही है । लोहित ने कहा एक बार फिर से सोच लो नौजवान ये कोई छोटी रकम नहीं है । मैंने सोच लिया है सर दिल्ली में क्राइम खत्म करने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ । बडी अच्छी बात है । बेटा जैसे ही पैसों का इंतजाम हो जाए हम काम शुरू कर सकते हैं । सर मैं एक हफ्ते में ही फंड की व्यवस्था करता हूँ । मुझसे और इंतजार नहीं हो रहा है । लोहित ने कहा और फोन रखते ही अमन को गले से लगा लिया । वो दोनों वहाँ कॉन्फ्रेंस रूम में ही नाचने लगे । उन्हें उनकी जिंदगी की सबसे बडी प्रॉब्लम का समाधान मिल गया था । खुशी से वो वोटिंग करने लगे जैसे वो अपने स्कूल के दिनों में क्या करते थे । लोहित ने कहा अमल मुझे फिर से अमरीका जाना है । ठीक है । मैं तुम्हारे टिकट की व्यवस्था करता हूँ लेकिन अमेरिकी वीजा का क्या करेंगे? वीजा बनने में तो कई दिन लग जाएंगे । मंत्री जी से कहता हूँ कि वे विदेशी दूतावास की मदद से एक दिन में ही वीजा बनवा दी । आखिरकर मैं सरकारी काम के लिए ही तो जा रहा हूँ ।

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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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