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जिनी पुलिस भाग 17

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जिनी पुलिस भाग 17 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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भाग सत्रह है । फ्लाइट में लोहित के बगल में बैठे व्यक्ति ने कहा, वह आपने तो वास्तव में बहुत शैतानियां की है । हाँ और मेरी हर शैतानी में मेरा साथ दिया । मेरे दोस्त अमान में उन्होंने एयरलाइंस द्वारा परोसा गया खाना खाया और कुछ घंटों के लिए हो गए । जब भी जागे तो विमान अमेरिका में उतरने वाला था । उतरते समय विमान के अंदर की रोशनी मंदी हो गयी । लोहित ने अपनी आदत अनुसार स्मार्ट बनने की कोशिश करते हुए पूछा तो मैं पता है लैंडिंग के दौरान विमान के अंदर की रोशनी मंदिर क्यों करते हैं । काफी सोचकर उसने कहा, शायद ऊर्जा बचाने के लिए ताकि वे इंजन को अधिक ऊर्जा प्रदान कर सके । नहीं या और इन छोटे छोटे एलइडी लाइट से बचाई गई बिजली उस विशाल इंजन की भला क्या मदद करेगी । फिर अगर विमान लैंडिंग के समय क्रैश हो जाए और यात्रियों को अंधेरे में विमान से बाहर निकलना पडे तो उनकी आंखें पहले से ही कम रोशनी में देखने के लिए तैयार रहे । अरे बाप बडी अच्छी तरह की है तो लोहित के सपनों के देश में विमान लैंड हो गया । कप्तान ने घोषणा की कि बाहर का तापमान नई दिल्ली की तुलना में ठंडा है । रोहित ने अपने बैग से नया लॉन्ग कोट निकाला जो उसने खास रूप से अमरीकी दौरे के लिए दिया था । अपनी उंगली पर कोर्ट को घुमाते हुए हवाई अड्डे पर लोहित खुशी से ऐसे घूमने लगा जैसे कोई बच्चा खिलोनों की दुकान में घूम रहा हूँ । अमेरिका में दोपहर के ढाई बजे थे, लेकिन भारत में रात के बारह बजे थे । जैसे ही एयरपोर्ट के वाईफाई से कनेक्ट हुआ, लोह इतने तृषा को इंटरनेट कॉल किया । वो उसे बताने के लिए एक्साइटेड था कि वो सब कुशल हमारी का पहुंच गया है । मगर तृषा ने फोन नहीं उठाया । एक पल तो लोहित के जहन में आया कि त्रिशा हो गई होगी इसलिए फोन नहीं उठा रही । मगर दूसरे ही पलों से ये विचार भी आया कि कहीं अमेरिका में रहने की बात को लेकर प्रिशा उससे नाराज तो नहीं है । रोहित ने उसे अपनी आवाज में रिकॉर्ड करके मैसेज भेजा । जाने बाद मैं तुम्हें बहुत मिस कर रहा हूँ तो नहीं जानती मैं तुम से कितना प्यार करता हूँ । प्लीज एक बार मुझसे बात करूँ, मुझे मौका तो तुम्हें मनाने का वैसे भी दोस्त रूठा करते हैं । ऐसी दोस्ती नहीं । लोग इतने फिर अपने मम्मी पापा को वीडियो कॉल किया । मम्मी ने आंख रगडते हुए कहा पहुंच गए एयरपोर्ट से निकलने से पहले अपना सामान लेना मत भूलना । हाँ में पहुंच गया और सामान भी ले लिया है । मैंने पूछा आधी रात है होटल जाने के लिए टैक्सी मिल जाएगी ना? मैं यहाँ पर रात नहीं बल्कि दिन है । क्या वहाँ अलग अलग देशों में अलग अलग समय होता है । भारत में रात होती है तब यहाँ दिन होता है । लेकिन ऐसा जो बेटा पापा ने बीच में टोकते हुए कहा अरे और कितनी फिजूल की बातें कर होगी । उसके फोन के इंटरनेशनल रोमिंग लग रहा होगा । मैं वॉट्सऐप से कॉल कर रहा हूँ । पापा इसमें रोमिंग नहीं लगती तो माँ पृथ्वी निरंतर घूम रही है । पृथ्वी का कुछ हिस्सा कभी सूरज के समीप होता है । कुछ हिस्सा दूर होता है तो जो हिस्सा सामने होता है वहाँ सूरज का प्रकाश पडता है । जिसे हम दिन कहते हैं और जहाँ नहीं पडता वहाँ अंधेरा होता है जिसे हम रात कहते हैं । तो इसलिए हर देश में सूरज की किरणों के हिसाब से समय निर्धारित होता है । इसका मतलब है अगर मैं अमेरिका जाऊंगी तो यहाँ की टीवी सीरियल्स देखने के लिए मुझे रात में जानना होगा । मासूमियत से भरी माँ को एक ना एक दिन तो अमेरिका में रहने की चिंता सता ही रही थी । नहीं मावे इस देश में यहाँ के समय के अनुसार प्रसारित करते हैं । पापा ने माँ से फोन छीनकर कहा अच्छा बेटा डॉलर को संभाल के रखना । अंदर की जेब में हो के पापा लव यू लोहित ने मुस्कुराकर फोन काट दिया । इमीग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रोहित ने एयरपोर्ट में ही अपने कपडे बदले और बाहर चला गया । उसने गोबर क्या बुक की और लगभग पंद्रह मिनट में ही पचास किलोमीटर का रास्ता तय करके सीधे फेसबुक हेडक्वॉर्टर मेनलो पार्क पहुंच गया । वो भी बिना नहाये । इतने लंबे सफर के बाद उसे थोडा आराम करना चाहिए था । मगर मार्क जुकरबर्ग से मिलने की उत्सुकता के कारण वो बिल्कुल तरोताजा और काफी अलग महसूस कर रहा था । फेसबुक हेडक्वार्टर के मेन गेट पर सुरक्षा गार्ड ने उसे रोकते हुए कहा, मुझे अपना पासपोर्ट और फॅार दिखाइए । सुरक्षा गार्ड का चेहरा ऐसे उतरा हुआ था जैसे कई जन्मों से वह ऐसा ही ना हूँ । सिक्योरिटी गार्ड पूरी दुनिया में एक जैसे ही होते हैं । डॉक्यूमेंट शेख करने के बाद गार्ड ने लोहित को अंदर जाने की परमिशन दे लोहित निर्धारित समय से दो घंटे पहले पहुंच गया था । फेसबुक दुनिया की सबसे बडी कंपनी में से एक है और इसका कार्यालय अपने कद के अनुरूप ही भव्य और विशाल है । ये एक कर्मचारी हितेषी परिसर है जहाँ कर्मचारी खुले विचारों के साथ काम करते हैं । लोहित मांग कि पोस्टल सेक्रेटरी अनेक रिकॉर्ड के पास पहुंचा । उसकी आंखे आईपैड की स्क्रीन पर टिकी थी । वो किसी काम में बिजी लग रही थी । हाई ॅ रोहित ने जाने से पहले कई बार जिन्हें की मदद से उनका नाम उच्चारण करने का अभ्यास किया था । हाँ, युवा मिस्टर बंसल फ्रॉम इंडिया उसने कहा, जैसे ही उसने लोहित की गर्दन पर लटका हुआ विजिटर आईकार्ड देखा, आपकी जर्नी कैसी रही? मिस्टर बंसल उसने पूछा । एयर होस्टेस को याद करते हुए लोहित ने मुस्कुराते हुए कहा, यात्रा सुखद थी, आप कॉफी लेंगे । उस ने फिर पूछा और जवाब का इंतजार किए बिना ही लोहित को ब्रेकआउट एरिया ली गई । वहाँ लगी कॉफी मशीन से लोहित ने खुद ही एक कप कॉफी निकली । आप उस कॉन्फ्रेंस रूम में बैठकर इंतजार कीजिए । मैं आपको आपकी उपस् थिति के बारे में सूचित कर देती हूँ । वहाँ हर किसी को उनके नाम से बुलाया जाता है । भले ही वो कंपनी का मालिक ही क्यों ना हो किसी को भी वह सर या मैडम नहीं कहते । फेसबुक के अन्य कर्मचारियों के साथ माँग की बैठने की जगह खुले क्यूबिकल में थी । अनेका के जाने के बाद एक कप कॉफी और पीकर लोहित कॉन्फ्रेंस रूम में बैठ गया और माँ का इंतजार करने लगा । फेसबुक की टीम मजाक में मांग के कॉन्फ्रेंस रूम को एक्वेरियम कहती है क्योंकि इसकी सभी दीवार काज की है । हर कोई देख सकता है कि उनके कंपनी का फाउंडर क्या काम कर रहा है । लोग इधर किसी को आस पास के क्यूबिकल्स में बैठा देख सकता था और विलोहित को लोहित देखा की एक लडकी अपने हाथों में कुछ कागजात लिए ऐसे भाग रही थी जैसे अगर वह जल्दी ना जाए तो फेसबुक के शेयर गिर जाएंगे । रामजाने इस मीटिंग रूम में कितने इंपॉर्टेंट मुँह लिए गए होंगे जिसमें फेसबुक को इतनी बडी कंपनी बनने में मदद की । आखिर हम जो फैसले लेते हैं उसी से हमारी जीत या हार तय होती है । एक आई पी फोन और एक प्रोजेक्टर आयताकार आकार के मेज पर रखा हुआ था जिसके चारों और दस कुर्सिया थी । दीवार के एक तरफ एक मार्कर बोर्ड को लगाया गया था जिसमें कुछ नंबर और उनके बारे में लिखा हुआ था वो संख्या डिफरेंट दिया डेवलपमेंट के मॉड्यूल नंबर हो सकते हैं । एक कोने में फुटबॉल और छोटे डंबल रखे थे और दूसरे कोने में एक गृह रंग का कॉर्नर । सोफा छत पर लकडी का शानदार काम किया हुआ था । लगभग बीस मिनट के इंतजार के बाद लोह इतने मार्क को हाथों में एप्पल का लेपटॉप लिए आते देखा । ये उसके लिए बहुत ही खुशी का पल था । उसकी जिंदगी का आदर्श व्यक्ति उसके सामने योगी चला रहा था । मांगने मेले डेनिम के साथ एक ढीली हाफ स्लीव्स ग्रे टीशर्ट पहनी हुई थी । वो हर दिन इसी तरह की साधारण कपडे पहनते हैं । ढेर सारे पैसे होने का मतलब ये नहीं है कि आप हमेशा महंगी कोट पहने । तो जब इंटरव्यू में पूछा गया कि वह ज्यादातर एक ही रंग की टीशर्ट क्यों पहनते हैं तो उन्होंने बडा ही सरल और प्रभावशाली जवाब दिया । उन्होंने कहा कि मैं इतना भाग्यशाली हूँ की मैं हर दिन सुबह उठकर दुनिया भर के अरबों लोगों के लिए काम करता हूँ और मैं ये नहीं चाहता कि मैं कुछ भी ऐसा करने में अपना टाइम वेस्ट करो जो गैर जरूरी हूँ । दूसरे सभी कामों में मैं अपने आप को कम से कम बिजी रखना चाहता हूँ और सिर्फ इस पर ध्यान देना चाहता हूँ की कैसे में लोगों की सेवा अच्छे ढंग से कर सकता हूँ जो आपको दुनिया के सबसे सफल उद्यमी बनने में मदद करती है । लोहित ने खडे होकर उनसे हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया । फिर बैठकर उन्होंने चर्चा शुरू की । मेरी टीम ने मुझे आपके स्टार्ट अप के बारे में बताया । हमें आपका आइडिया पसंद आया । मैं फेसबुक को और बेहतर बनाने के लिए आपकी टेक्नीक का यूज करना चाहता हूँ । मेरी कानूनी टीम आपको अनुबंध भेजेगी और आपके हस्ताक्षर करने के एक सप्ताह के भीतर आपके खाते में पैसे भेज दिए जाएंगे । मैं अपनी कंपनी को बेचना नहीं चाहता हूँ सर मुझे पता है कि अगर मैं अपने आइडिया पर काम करता रहूँगा तो मैं भी आपकी तरह चमत्कार कर सकता हूँ । अगर बेचना नहीं चाहते तो यहाँ जो आए हो आप मेरे आदर्श है सर, मैं आपसे मिलने का मौका गवाना नहीं चाहता था । मैं अपने बस कराकर कहा आपसे मिलकर खुशी हुई । यदि कभी भी आपका इरादा बदले और आप अपनी टेक्नोलॉजी बेचना चाहो तो चले आइयेगा मार्केट लोहित को समझाने या बहलाने की कोशिश नहीं की । बस अपना लेपटॉप लेकर वहाँ से चले गए । आप जितना कम बोलते हैं उतना ही लोग आप की बात सुनते हैं । रोहित ने मांग के साथ मुश्किल से तीन मिनट बताए होंगे लेकिन ये उसकी जिंदगी कि सबसे बेहतरीन तीन मिनट थी । लोहित के पहले किससे भी बेहतर माँ की शख्सियत कमाल की थी । उस से मिलकर लोहित का खुद के प्रति आत्मविश्वास और भी ज्यादा बढ गया । बडा आदमी असल में वही होता है जिस से मिलकर अब छोटा महसूस ना करें । मार्ग से मिलने के बाद भूख और नींद जैसी मानवीय जरूर थी । लोहित के शरीर पे हावी होने लगी रोहित ने फेसबुक के कैंपस से बाहर निकलकर अपने मोबाइल में भारतीय रेस्तरां की खोज की और मिनी भारत डाॅट माउंटेन व्यू दिए जाने के लिए निर्देश प्राप्त किया । जब रोहित ने वहां पहुंचकर मैंने खोला तो देखा कि एक साथ ही नान की कीमत तीन डॉलर थी जिसका मतलब लगभग दो सौ दस भारतीय रुपए । भारत में दो सौ दस रुपये में हम किसी अच्छी जगह पर स्पेशल अनलिमिटेड थाली खा सकते हैं और यहाँ उतने में सिर्फ एक रोटी आती है । मैंने में खाने के दाम को देखते हुए कुछ भी ऑर्डर करना लोहित के लिए बहुत ही मुश्किल हो रहा था । आधे घंटे पहले लोग इतने बेशुमार दौलत को ठुकरा दिया और अब भरपेट खाना खाना भी मुश्किल लग रहा था । उसे कीमतें अदा करनी होती है अपने जुनून के लिए बडे हो ही नहीं बनते साहब तीनी आज पर पकडना पडता है । लोहित फिर त्रिशा को इंटरनेट कॉल किया लेकिन परेशानी कोई जवाब नहीं दिया । जब से वो मेरी का आया था, निशाने उसे एक बार भी बात नहीं की थी । लोहित के दिमाग में बहुत सारे थर्ड चल रहे थे । मैंने शादी के बाद अमेरिका में रहने की जिद क्योंकि ये सोचकर लोहित खुद को कोसने लगा । उसे इतना बुरा लग रहा था कि अमेरिका में हो । कहीं घूमने भी नहीं गया । खाना खाकर सीधे होटल चला गया और वहाँ एकांत में तृषा को याद करने लगा । रात को उसकी इंडिया वापस लौटने की फ्लाइट थी । हाँ,

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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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