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जिनी पुलिस भाग 15

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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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भाग पंद्रह है । सडक पर एक घंटे के सफर के बाद लोहित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचा । कार की डिक्की से अपना छोटा सा बैग निकालकर उसने ड्राइवर को अलविदा किया और एयरपोर्ट के अंदर चला गया । लोह इतने ज्यादा सामान कैरी नहीं किया था ताकि उठाने में उसे सहूलियत हो । उसका मानना था कि अमेरिका की सडकों में धूल कम होगी तो कपडे भी कम गंदे होंगे । लोग इतने डिस्प्ले बोर्ड में हांगकांग एयरलाइंस की उडान संख्या ऍम फाइव पेट की तलाश की फ्लाइट के प्रस्थान का समय रात बारह बजकर दस मिनट का था और फ्लायर्स को दो घंटे पहले ही बुला लिया गया था । त्रिशा का कोई मैसेज पाने की उम्मीद में लोहित हर पांच मिनट में अपना फोन देख रहा था । सुरक्षाकर्मी ने लोहित के पासपोर्ट में लगी फोटो के साथ उसके चेहरे को मिलाया । टेक्नोलॉजी के इतने विकसित होने के बाद भी हर आदमी का चेहरा देखकर पता लगाना की वो सही है या नहीं बडा ही उबाऊ कम है । क्यों ना हम फेस रेटिना फिंगर प्रिंट को स्कैन कर लें और अगर सभी कुछ पासपोर्ट और आधार कार्ड के डेटा बेस से मैच हो जाए तो यात्री को जाने दे और बाहर निकलते समय उनके रेटिना और फिंगरप्रिंट को फिर से स्कैन किया जाए । प्लायर उनका सामान तुरंत देते । ये तेज भी होगा और इससे सुरक्षा भी बढेगी । आपने काल्पनिक दुनिया में ये सब सोचते हुए लोग इतने प्लेन में एंट्री ली । दरवाजे पर खडी छह महिलाओं और दो पुरुषों कैबिन क्रू ने लोहित का स्वागत किया । कैबिन क्रू की वर्दी पर उनके नाम लिखे हुए बिल्ले और विंक इनके साथ प्रावधानित किया गया था । रोलर डाइट में गोल घूमते डेरू सामान में से अपने सामान को ढूंढने कि परेशानी से बचने के लिए लोग इतने अपना सामान जमा नहीं किया । उस पर कैबिन बैगेज का टैग लगवाकर अपने साथ ले गया । ट्रेन में हम अपने सामान को चेन से बांधकर रखते हैं और फिर भी हर स्टेशन के बाद चेक करते हैं । लेकिन हवाई जहाज में हम सभी पर भरोसा करके अपने सामान को यूँ ही छोड देते हैं । अगर ये एयरपोर्ट पर लगे कैमरों की वजह से है तो हम हर रेलवे स्टेशन और यहाँ तक कि ट्रेन के दरवाजे के पास भी कैमरे क्यों नहीं लगा सकते लोगी । तब की सीट पर बैठकर खिडकी से बाहर लगे विशालकाय एजेंट को देखकर इसके पीछे की फिजिक्स को समझने की कोशिश कर रहा था । उसके आस पास बहुत विज्ञान था । फ्लाइट अटेंडेंट ने सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद करने की मांग की । बस एक मिनट ये बहुत जरूरी है । लोग इतने निवेदन किया और तृषा को फोन किया । लोहित उस लंबी उडान पर जाने से पहले एक बार त्रिशा की सुरीली आवाज सुनना चाहता था । त्रिशा का फोन कुछ मिनटों तक बचता रहा, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया । रोहित ने सोचा कि त्रिशा घर पहुंचकर हो गई होगी । तभी उसे याद आया कि उसकी जेब में तृषा का रुमाल था । रोहित ने अपनी जेब से रुमाल निकाला । उसे आहिस्ते से जुमा और अपनी जेब में वापस रख लिया । उसके खुशबू से लोहित का दिल भर गया । कृपया अपने सेलफोन को बंद करते हैं । एक और एयर होस्टेस से थोडा झुककर लोहित के कान में कहा लोहित उससे पूछा, टिक ऑफ के समय फोन ऑफ क्यों करना पडता है? शायद लोहित सच में जानना चाहता था या उससे कुछ और देर बातें करने का बहाना बना रहा था । एयर होस्टेस ने अपने सीमित ज्ञान को टटोलते हुए बताया, क्योंकि मोबाइल नेटवर्क हवाई जहाज के ग्राउंड नेटवर्क को बाधित कर सकता है । अगर वैज्ञानिक इस विशाल विमान को बना सकते हैं तो क्या एक ऐसा नेटवर्क नहीं बना सकते जो मोबाइल नेटवर्क से बाद इतना हूँ । एक सुस्त मुस्कान देते हुए वो आगे बढ गयी । उसकी मुस्कान का मतलब था कि उसे समझने आया लोहित ने क्या कहा और वह समझना चाहती भी नहीं थी । उसके जाने के बाद लोहित के बगल में बैठे यात्री ने कहा, ये रियल नहीं लगता । क्या उसके स्तन कुछ ज्यादा ही बडे हैं? लोहित ने आश्चर्यचकित होकर पूछा हाँ लेकिन वो ऐसा क्यों करेगी? आकर्षित दिखने के लिए हाँ और क्या बडी जोर से हसते हुए रोहित ने कहा तुम शायद यकीन न करों लेकिन मैं भी एक बाढ लडकी बना था । नकली स्तन पहनकर उसने लोहित को ऐसी हराने से देखा जैसे लोग इतने प्लेन को हाईजैक करने की घोषणा कर दी हो तो तुम ने क्यों किया? ऐसा जो मैं स्कूल में था तो मुझे कृष्णा नाम की लडकी से प्यार हो गया था । उसके साथ स्कूल पिकनिक पर जाने के लिए मैंने लडकी का भेज बनाया था और ये एक लंबी कहानी है । उस यात्री ने मुस्कुराते हुए कहा, मुझे लगता है कि आपकी लंबी कहानी सुनने के लिए मेरे पास काफी समय है । लोहित ने मुस्कुराते हुए कहानी सुनानी शुरू की । क्लासरूम में एंट्री करते ही हमारी बायलॉजी की टीचर जया मैंने अनाउंसमेंट की क्लास मेरे पास से खुश खबरी है । इस संडे हम खंडाला लोनावला पिकनिक मनाने जा रहे हैं । जो भी जाना चाहता है हाथ उठाए । बहुत सारे बच्चों ने एक्साइटेड होकर हाथ उठाया । तृशा पहले तो हिचक रही थी लेकिन उसके सहेलियों की जोर देने पर उसने भी हाथ उठा लिया । उसे देख कर लो हितने भी झट से हाथ खडा किया लेकिन इस ट्रिप में केवल लडकियाँ ही जाएगी । लडकी नहीं । लडकों को ठेंगा दिखाते हुए लडकियों ने हूटिंग की । लोहित लगभग चलाया । लडकी क्यों नहीं जा सकते हैं? लडके एक हफ्ते के बाद चौधरी सर के साथ जाएंगे । ये सुनकर लोहित अपने ख्यालों में ही डिप्रेशन में चला गया । उसने गाडी बडाली शराब पीना शुरू कर दिया । उसे कैंसर हो गया तो समाज के द्वारा त्याग दिया गया और लास्ट में आपने कल्पना में ही वो मर गया । रोहित ने अमन से साफ कह दिया, मैं किसी भी तरह इसी संडे को जाना चाहता हूँ । उसकी आंखों में जुनून था, थोडा धैर्य रखो । हम अगले रविवार को चले जाएंगे । क्या तुम पागल हो? मैं अपने प्यार के बिना रोमेंटिक जगह में क्या करूंगा? मैंने जाने से पहले कहा इस ट्रिप के लिए आप अपने दोस्तों को दूसरे स्कूल से भी इनवाइट कर सकते हैं लेकिन ध्यान रहे कि वह लडकियाँ हो । लोग इतने अफसोस के साथ कहा कि भगवान उसे लडका क्यों बनाया? अमन ने टिप्पणी की अगर तुम लडकी होते तो फिर लडकों के साथ जाना चाहते हैं । हाँ तुम सही कह रहे हो मुझे कोई तरकीब सुझाव जिससे कि मैं त्रिशा की सात जा सकूँ । उसके साथ जाने के लिए मैं लडकी बनने को भी तैयार हूँ । अमन ने लोहित की खिल्ली उडाते हुए कहा क्या सिर्फ एक ट्रक के लिए तुम लिंग परिवर्तन करवाओगे? नहीं बाबा । लोग इतने चालाक मुस्कान के साथ कहा मेरे चचेरे भाई का दोस्त बॉलीवुड में मेकअप आर्टिस्ट है । अमन ने डरते हुए कहा तुम्हारी शैतानी दिमाग में जो चल रहा है ना, वो होना नामुमकिन है । वे एक मिनट में हमें पहचान जाएंगे । में पहले अपना मेकप करवाऊंगा । अगर तुमने मुझे उस गेट अप में पहचान लिया तो हम नहीं जाएंगे और अगर नहीं पहचान पाए तो हम दोनों लडकियाँ बनकर उस पिकनिक पर जाएंगे । लगी शर्त लगी उन दोनों ने हाथ मिलाया । अमन भी लडकियों के साथ जाना तो चाहता था बस थोडा डर रहा था वो दोनों सुबह जल्दी मेकअप आर्टिस्ट के पास पहुंच गए और वो जगह देखने में किसी आम ॅरियर की तरह ही थी । एक दुबले पतले व्यक्ति ने लोहित और अमन से पूछा कहो क्या काम है? उसके बाल ऐसे अस्त व्यस्त थे । जैसे ही एक उम्र के बाद उसने गंगी को हाथ नहीं लगाया हूँ । लोग इतने बेसब्री से कहा सर, हमें लडकी बना दो । क्या उसके लिए तो मैं थाईलैंड जाना होगा । दोस्ती गंदा काम यानी होता है । रोहित ने कहा मेरा मतलब है हमारा मेकप करके हमें लडकियों की शक्ल दे दीजिए । उस ने इंकार करते हुए कहा मैं ये केवल फिल्मों या थिएटर के कलाकारों के लिए करता हूँ । दूसरों के लिए ऐसा करना अनैतिक है । रोहित ने भावुक होकर पूछा भैया क्या आपको कभी किसी से सच्चा प्यार हुआ है? वह खामोश हो गया । मैं एक लडकी से बहुत प्यार करता हूँ । लडकी के गेटअप में मैं सिर्फ उसके साथ कुछ समय बिताना चाहता हूँ । मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं कुछ गलत काम नहीं करूंगा । क्या आप अपने प्यार के घाटे अपने छोटे भाई की मदद नहीं करेंगे? लोहित का ड्रामा देखकर वह पिघल गया । हरबोला ठीक है बताओ पहले कौन करवाना चाहता है । लोहित ने हाथ खडा किया वे लोहित को भीतर के कमरे में ले गए और कमरे में कई मेल और फीमेल वे कई तरह के कि डाॅ और भी बहुत कुछ था । अमन बाहर सोफे पर बैठ गया और टेबल पर रखे मैग्जीन देखने लगा जिसके कवर अर्धनग्न मॉडल्स की तस्वीर छपी थी । उन्होंने लोहित के गालों को शेयर किया और उसके शरीर के देखने वाले अंगों में वीट क्रीम लगाकर सारे बाल हटा दिए । योगी की त्वचा मुलायम महसूस हुई । उसके बाद उन्होंने लोहित के चेहरे भी फाउंडेशन लगाया और उसके चेहरे का रंग बदल गया । उन्होंने इसे गाल की हड्डी माथे और नाक पर लगाकर मिला दिया । लास्ट में उन्होंने लोहित को आगाह किया कि ये मैं कब वाटर प्रूफ नहीं है । आज पानी से मुहम्मद होना लोहित सोचा होना तो दूर मैं आज पानी पीऊंगा भी नहीं । लोहित के चेहरे पे काम करने के बाद उन्होंने उसकी कृतिम पलकों को कॉल किया । बहू के पास अनचाहे पाल उखाड दिए और काले रंग के आई लाइनर से बहुत को सुंदर आकार दिया । उन्होंने काजल पेंसिल से लोहित के दाहिने गाल पर एक काला तिल बना दिया और होठों पर लिपस्टिक लगा दी । लास्ट में उन्होंने लोहित के करने तक लम्बे और थोडे घुंघराले बालों का एक विक उसके सर पर लगा दिया । लोहित ने स्पोर्ट गार्ड भी पहन दिया ताकि अगर लडकियों को देखकर वह ज्यादा उत्साही हो जाएगी तो उन्हें इसका पता ना चले । अब बारी थी सबसे अंतरंगी पोशाक यानी की ब्राह पहनने की । उन्होंने लोहित से पूछा कौनसी साइट्स कब रादू? रोहित ने पूछा क्या साइज अवेलेबल है? अट्ठाईस, तीस, बत्तीस, चौंतीस और फिर कब साइज? जैसे कि ए बी सी मुझे लगता है कि आपकी हेल्थ के अनुसार तीस भी ठीक रहेगा । उसके उसे ब्रा पहनने को दी । लोहित को इस बात का अंदाजा तो था कि इसे उतारते कैसे हैं लेकिन उसने कभी किसी को पहनते हुए नहीं देखा था । वो हर बडा गया । ये कैसे पहनते हैं तीनों मेकप आर्टिस्ट पहले तो लोहित पर हंसी बहुत फिर उसे ब्राह पहनाकर पीछे से खुद लगा दिया । लोह इतने काला घुटनों तक की लंबाई वाला वन पीस ड्रेस पहना हूँ और वो लडकी के रूप में बाहरी दुनिया से मिलने को तैयार था । लोहित ने खुद को आईने में देखा तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि वह खुद को ही देख रहा है । वो इतना सुन्दर दिखाई दे रहा था अगर रिश्ता उससे शादी करने से इंकार करती है तो वह खुद से शादी करने पर विचार कर सकता था । उन्होंने लोहित के ड्रेस से मैचिंग ऊंची हील वाली सैंडल भी । लेकिन लोग इतने फ्लाइट खेल ही पसंद की । अपने पैरों के नीचे दो पहाड लेकर चलने की आदत उसे नहीं थी ।

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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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