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कलम से हत्या - 20

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लवली सरल तुम दोनों एक साथ नीरज को आश्चर्य हुआ । हाँ भैया सरल आपसे मिलने आ रहा था तो मैं भी साथ आ गई । लवली ने जवाब दिया, अब कैसी तबीयत है आपकी सर । सरल ने गुलदस्ता बीट करते हुए पूछा, ठीक हो रहा हूँ? नीरज ने आगे कहा, तुम चुनाव काम कैसा चल रहा है? काम की चिंता मत कीजिए सर मैं होना आप निश्चिंत रहिए और स्वास्थ्य लाभ लीजिए । सरल नहीं कहा यही तो समस्या है । सरल की मैं निश्चित नहीं हो पा रहा हूँ । ध्यान रहे सरल मेरे चैनल के समाचारों में या मेरे अखबार जुगनू में कोई झूठी खबर नहीं आनी चाहिए । नीरज ने कहा बिल्कुल नहीं सर, आपने पहले ही जिस तरह के आदेश आपको दे रखे हैं, सब वैसे ही काम कर रहे हैं । सरल ने कहा मैं स्टाफ की नहीं तुम्हारी बात कर रहा हूँ । नीरज ने कहा ये आप क्या कह रहे हैं सर । सरल ने कहा आपको सरल पर विश्वास नहीं भैया । लवली ने पूछा मैं सरल से बात कर रहा हूँ । फॅमिली तो बीच में मत बोलो क्यों बोलू भैया । अब एक ओर तो आपने टीवी चैनल और अखबार की जिम्मेदारी देकर सरल को अपना बनाते हैं और दूसरी ओर अविश्वास जताकर उन्हें अपमानित भी करते हैं । ऐसी बातें मुझे अच्छी नहीं लगती है । लवली ने कहा, तुम्हें क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं, इस बात से हमारी पत्रकारिता प्रभावित नहीं होगी । लवली हमने समाज सेवा के लिए अखबार और प्रिंट मीडिया को माध्यम बनाया है तो जिम्मेदारी भी बडी है और जिस उद्देश्य को लेकर हम इस क्षेत्र में कदम रखे हैं, उस उद्देश्य पर खरा उतरना भी जरूरी है । इसलिए हमें सजग रहना है । मुझसे कोई गलती हो गई है । कैसा सरल, घबरा गया, देखो सरल मैं ये सब बातें तो डराने के लिए नहीं कह रहा हूँ बल्कि सचेत कर रहा हूँ क्योंकि तुम पहले भी मैं गलती कर चुके हो भाई, आप फिर से । मैंने तो मैं बीच में बोलने से माना कि अलग ली । नीरज ने आगे कहा, परिवार चलाना और अखबार चलाने में फर्क होता है । इसलिए हम एक दूसरे से जब अपने चैनल या अखबार में चलने वाले समाचारों पर चर्चा करेंगे तो हमें ध्यान रखना होगा कि हमारा मूल उद्देश्य पारिवारिक रिश्तों या भावनाओं के कारण प्रभावित न हो । नीरज ने कहा, मैं आपकी इस बात से सहमत हो गया, पर प्रोफेसर माथुर की खबर को ध्यान में रखकर आप सरल पर बार बार अविश्वास करते हैं तो मैं चुप नहीं रह सकती क्योंकि मैं जानती हूँ की मात्र सर वाली खबर को लेकर आपकी सोच पहले से ग्रसित है । वो कैसे लवली नीरज में पूछा किरण के आस पास होने के कारण उसकी बातों और उसकी सोच के असर के बारे में कह रही हूँ मैं । लवली ने कहा फिर तुमने किरण को बीच में ला दिया । नीरज ने नाराजगी प्रकट करते हुए आगे कहा, मैं इस समय काम की बात करना चाहता हूँ । बहस नहीं लवली प्लीज तुम चुप रहूं । सरल ने आगे कहा सर हमने अपने चैनल पर मुख्यमंत्री से भेंट कार्यक्रम की जो योजना बनाई थी उस पर क्या करना है थोडा आगे बढा देते हैं क्योंकि उस कार्यक्रम में सवाल ही नहीं रहना चाहता हूँ । नीरज ने कहा लेकिन सर आपके दुर्घटना से पहले हम लोगों ने उस कार्यक्रम के लिए विज्ञापन समय अगर निश्चित कर लिए हैं तो ये बात तो है । नीरज ने कुछ सोचते हुए आगे कहा, दरअसल मैं चाहता हूँ की अन्य चैनलों की तरह हम सिर्फ सरकारी विज्ञापन या टीआरपी की उम्मीद में अपने उद्देश्य से ना भटके । हमारा काम है सरकार और जनता के मध्य सामंजस्य बनाना । इसीलिए तो आपके आदेशानुसार इस कार्यक्रम में आम लोगों के पत्रों को अधिक से अधिक शामिल करना है जिससे उनकी समस्याओं से शासन को अवगत कराया जा सकते हैं और समाधान की ओर अग्रसर हो सके । सरल ने कहा वो तो ठीक है पर विशेष ध्यान इस बात पर देना कि किसी भी परिस्थिति में हम अपने उद्देश्य से भटक न जाएं । नीरज ने कहा, पर सवाल यदि जटिल हुआ या मुख्यमंत्री जी की पसंद का ना हुआ तो हमें दिया हुआ समय वापस भी ले सकते हैं । सर और फिर सरकारी विज्ञापनों से पैसा भी अच्छा आता है । सरल ने कहा, मैंने तुमसे पहले भी कहा इस तरह की हमें खबरों में, ग्लैमर पर उसका टीआरपी की दौड में शामिल होकर पत्रकारिता के मूल उद्देश्य को नहीं छोडना है और ना ही विज्ञापन के पीछे भागना है । लेकिन भैया पापा ने तो कहा कि लवली ने कहा पापा एक उद्योगपति हैं इसलिए उनके लिए लाभ हानि ही सर्वोपरि है, पर मेरी सोच थोडी अलग है । तुम जानती हो लवली कि मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने के बाद भी अपने व्यवसाय को भी साथ साथ क्यों चला रहा हूँ । जानती हूँ कि समाज सेवा करने के लिए आप ने मीडिया को जो अपना माध्यम बनाया है उसके लिए जरूरत पडने पर अपने अन्य व्यवसाय से पैसा लगा सके । लवली ने कहा फिर पापा के लाभ हानि की नीति मुझे क्या सिखाने लगे? नीरज ने कहा कि भैया अब से पापा की बातों के लिए माध्यम नहीं बनाऊं । ये वादा रहा आप से पर आप भी मुझ से वादा कीजिए । लवली ने कहा कैसा वाला? नीरज ने पूछा अपनी व्यस्तता थोडा काम करें । आपको इतने व्यस्त हो गए की खुद को भूल गए । हर शादी करने के लिए भी समय नहीं । लवली हसने लगी । हमारा काम है सरकार की कमियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित करना, चमचागिरी करना नहीं । लवली की बातों को ध्यान नहीं देते हुए नीरज ने आगे गा मैं जब तक अस्पताल में हूँ सरल तुम्हें फिर से आगाह करता हूँ कि मेरे उद््देश्यों एवं आदर्शों से किसी के भी कहने पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए । रही बात लाभ हानि की तो मुझे विश्वास है कि आज के दर्शक उस चैनल को खोजते रहते हैं जहाँ सच दिखाया जाता हूँ और जिनका आम जनता से वास्तविक सरोकार होगा । आज लोग जब मेरे पास आकर कहते हैं कि नेताओं और पत्रकारों से भरोसा उठ चुका है फिर भी आप के पास बडी उम्मीद लेकर आए हैं तो मेरी ताकत बढती है और दबे कुचले लोगों को साथ लेकर चलने की मेरी मुहिम को बल मिलता हैं । मैंने आपके पास आकर ही पत्रकारिता के सही मायने को जाना है । ऐसा मैं मानता हूँ कि पहले अनुभव के अनुसार काम करने के कारण मुझ से कुछ गलतियां हुई होंगे । पर अब मैं आप के अनुसार ही चलना चाहता हूँ । आपने मेरी गलतियों की ओर मेरा ध्यान आकर्षित करने के साथ ही मुझ पर विश्वास भी किया है । इसके लिए मैं सदैव आभारी रहूंगा । सरल ने कहा ठीक है सर फिर मैं तुम्हें अनुमति देता हूँ । मुख्यमंत्री से मिलिए कार्यक्रम को निर्धारित समयानुसार कल की पहली कडी की शुरुआत कर दूँ पर ध्यान रहे हैं सरकार के पास अपने कार्यक्रम के प्रचार हेतु हूँ । अपनी व्यवस्था होती है उसमें हमें उतना ही योगदान देना है जो आम लोगों के लिए जरूरी है । लोकप्रियता की अंधी दौड में शामिल होने से अच्छा है कि हम आंख कान खोलकर रखें और कार्यक्रम की मौलिकता और उत्कृष्टता के साथ कोई समझौता न करें । नीरज ने कहा जी सर, मैं चलता हूँ और तुम भी चल रही हूँ । लबली की तरफ रुख कर के सरल ने कहा तुम चलो पीछे आ रही हूँ । लवली ने कहा, आपने सरल को कुछ ज्यादा ही उपदेश नहीं नहीं दिया है । भैया लवली सरल के जाते ही नीरज पर टूट पडी । मैं जानता हूँ कि तुम्हारे लिए सरल दुनिया का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति है और इसीलिए उस पर सख्ती करके उसे सही दिशा देने की कोशिश कर रहा हूँ । वरना सरल को तो कब का बाहर का रास्ता दिखा देता है । ये आप क्या क्या है भैया की आपको सरल की योग्यता पर शक है । योग्यता पर नहीं । लवली उसकी नियत ठीक नहीं है । ऐसा क्या कर दिया सरल ने लवली ने पूछा पत्रकारिता की मर्यादा का उल्लंघन किया है उसने । नीरज ने कहा, और आप जो कर रहे हैं वो ठीक है भैया क्या किया है मैंने । नीरज ने पूछा पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने नाम का रौब दिखाकर अपने साथियों को सच्चा अपने से मना किया है आपने । लवली ने आखिर ही दिया कौन सा सच? किरण के द्वारा बदमाशों को पकडने के बारे में अखबारों में वही छपा है जैसा आपने जहाँ है और किरण वाहवाही लूट रही है । लवली ने कहा इसमें छूट गया है । नीरज ने कहा पूरी खबर झूठी है भैया । आज को विख्यात बदमाश को पुलिस गिरफ्तार कर पाई है तो उसका कारण आप हैं वो किरण नहीं । लवली ने कहा, हाँ मैंने पत्रकारों को अपनी उपस्थिति दर्शाने से रोका है क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि सरल जैसे पत्रकार मेरी उपस् थिति को प्रॉपगैंडा बनाकर प्रस्तुत करें । नीरज ने कहा, आपने फिल्म सरल पर आरोप लगाया है भैया ये ठीक नहीं है । लवली ने कहा मुझे पता है कि सरल के बारे में तुम कुछ भी नहीं सुन सकती हैं और मैं तुम्हारी भावनाओं को आहत करना भी नहीं चाहता हूँ । पर तुम्हारा भाई होने के कारण ये चाहता हूँ की प्रेम के वशीभूत होकर सरल की कमजोरियों को अनदेखा मत करो । अपनी बात आप मुझ पर थोप रहे भैया किरन आपकी कमजोरी का फायदा उठा रही है । आपको प्रेमजाल में फंसाकर मौत के मुंह तकलीफ गई थी । उसकी योजना अनुसार काम नहीं हो पाने के कारण आखिरी समय पर उसने आपको अस्पताल पहुंचाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की और अभी आप उसे हरिश्चंद्र की औलाद मानते हुए सरल कोई दोष दे रहे हैं । मातोंडकर की खबर चाहते समय भी सरल सही था और अभी भी वो कुछ गलत नहीं करेगा । लवली ने दृढतापूर्वक कहा ये तो वही बात हुई कि औरों की तरह हम भी अपनी सुविधानुसार पत्रकारिता को स्वरूप प्रदान करने में लगे हुए हैं । नीरज ने कहा, मैं तो पत्रकार हो नहीं इसलिए आपके द्वारा कही गई बातें आप पर ही लागू होती है । भैया लवली ने अभी भी मैदान नहीं छोडा था । रहने दो लवली इस संबंध में मुझे तुमसे बात ही नहीं करनी चाहिए थी । नीरज ने इस बात को यहीं पर खत्म करने के लिए कहा । यही तो मुश्किल है भैया की जहाँ किरण की बात आती है आप सच्चाई से मुंह फेर लेते हैं । आपको समझना होगा भैया की किरण आपकी भावनाओं के साथ खेल रही है और नाजायज फायदा उठा रही लवली ने कहा अच्छा तो क्या फायदा उठा रही है ये भी बता दूँ । ये तो आप भी जानते हैं कि माथुर सर की जिस बेटी को पत्रकारों में ब्लैकमेलर और अपराध दिखता रहा है आज उसी पत्रकार से मेलजोल बढा रही है जिसका परिणाम भी उसके सामने हैं । लवली ने कहा वही तो पूछ रहा हूँ, कैसा फायदा कौनसा परिणाम नीरज गुंजाया मात्र सर की जिस इंस्पेक्टर बेटी पर आज तक पत्रकारों को निकम्मापन, घमंड और रमन सत्ता दिखती है उन्हें पत्रकारों द्वारा आज किरण की मेहनत, लगन और कर्तव्य परायण होने की बात कहते हुए पुलिस पदक दिए जाने की बात नहीं की गई है । ये परिवर्तन आपके आस पास होने के कारण ही तो आया है । किरण के बारे में आज जो बातें अखबारों में लिखी गयी हैं, उसका कारण खुद किरण है । उसने लगन और मेहनत से अपनी पहचान बनाई है । उसकी चर्चा होनी चाहिए जो की हो रही है । पर मुझे तो ऐसा नहीं लगता । लवली ने कहा, ऐसा है लवली की । हम जिस रंग का चश्मा पहनते हैं, सामने स्थित प्रत्येक चीज हमें उसी रंग की दिखाई देती है । तुम भी किरण को शत्रु की बात ही मत देखो । फिर तो मैं भी उसके अच्छाइयाँ नजर आएंगे । नीरज ने का मेरा नजरिया किरण के लिए कभी नहीं बदलेगा भैया क्यों? नीरज ने पूछा क्योंकि वो माथुर घर की बेटी है उस व्यक्ति की जिससे अपने स्वार्थ के लिए मनीषा मैडम के अकेलेपन का फायदा उठाया और मौत के मुंह में धकेल दिया । चलो मान भी लेते हैं लवली की माथुर सर के बारे में तुम सच कह रही हूँ तो फिर इसमें किरण का क्या दोष? नीरज ने कहा दोस्त तो है ही भैया । जब हम अपने माता पिता की अच्छाई का प्रतिफल मिलता है तो उनके कुकर्मों की सजा भी भुगतनी होगी । लवली ने कहा, अच्छा तो ये भी बता दूँ कि किरण के लिए तुमने या तुम जैसे लोगों ने कौनसी सजा तय की है । नीरज ने बेमन पूछा, सामाजिक चेतना का शोध बनने मात्र सर के झूठे परिवार पर उसके परिवार को कोई क्या सजा देंगे ये तो मैं नहीं बता सकती । पर हाँ इतना अवश्य कहूँगी कि उस कलंकित परिवार की लडकी हमारे खानदान की बहू नहीं बन सकती । पहली बात तो ये किरण को तुम्हारे खानदान में कोई दिलचस्पी नहीं है, पर तुम्हें हमारे खानदान की इज्जत का इतना ही ख्याल है तो किरण पर उनकी उठाने के बदले खुद की पसंद पर पुनर्विचार कर लो । नीरज ने कहा, मैं जानती हूँ भैया की सरल चाहे कितना भी अच्छा काम कर ले, पर आप उसे पसंद नहीं करेंगे । पर मैंने पहले ही कह दिया है कि सरल के विरुद्ध मुझे कुछ नहीं सुनना है । आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी सरल में ईमानदारी और सच्चाई कूट कूट कर भरी हुई है और आपको तो खुश होना चाहिए कि वह आपकी तरह ही पत्रकारिता के माध्यम से समाज और देश की सेवा करना चाहता हूँ और ये क्या हो रहा है? लवली दुनिया बीमार को देखने आई हूँ या फिर अपने मन की भडास निकालने उसकी माँ ने कमरे में आते ही कहा लोग माँ भी आदि अबकी के दोनों माँ बेटे बैठकर किरण नाम करजात करूँ मैं चलती हूँ कहते हुए लवली चली गई । तुम दोनों भाई बहन का इस तरह से तकरार कब तक चलता रहेगा? बिता माने चिंता व्यक्त की आप का चिंतित होना स्वाभाविक है । पर मैं क्या करूँ? लवली समझने की कोशिश नहीं करती है । उसकी आंख पर तो सरल के प्रेम की पत्ती बनी हुई है और लवली ने सरल की । पत्रकारिता के उसी स्वरूप को जाना है जो उसने अपने आस पास देखा है । अर्थात मेरी पत्रकारिता के उगली रूप से ही वो परिचित है जबकि सरल नहीं । अब तक पत्रकारिता को सिर्फ धनोपार्जन का जरिया ही मना है । ऊपर से अधिकारिक धन कमाना चाहता है, चाहे उसके लिए कुछ भी करना पडे । सरल इस तरह का लडका है । मान ने पूछा हाँ नीरज ने जवाब दिया मुझे भी सरल की कुछ बाते अच्छी नहीं लगी पर क्या कर सकते हैं लबली कि जिसको तो तुम जानते ही हूँ, पापा की बेटी है । जिस चीज पर उंगली रख दी मतलब वहीं सबसे अच्छा है । आप चिंतित न हो । मैं कोशिश कर रहा हूँ कि सरल को अपनी गलतियों का एहसास होगा । मैं उसे समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि पत्रकारिता को चमकाने के लिए मानवता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए । अपनी छोटी बहन के लिए तो मैं ये करना ही होगा । नीरज माने सहमती जताई, मैंने सरल को करीब से जानने की कोशिश की है और मुझे लगता है कि सरल ने वही सीखा है जो उसने अपने आस पास देखा है । पहले उसके कार्यस्थल ने उसे पत्रकारिता कम और ब्लैकमेलिंग ज्यादा सिखाया है । पत्रकारिता उसका उद्देश्य नहीं बल्कि मजबूरी रही है । तुम क्या कह रहे हो? मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है । बेटा सरल ने पत्रकारिता को सिर्फ रोजगार के रूप में स्वीकारा था । दो तीन कामों में असफल होने के बाद उसके ही जैसे किसी पत्रकार साथी की नजदीकी नहीं, उसे भी पत्रकार बनने के लिए प्रेरित किया और इस तरह सरल ने पत्रकारिता को ऐसे रोजगार के रूप में अपनाया जिससे शीघ्रतापूर्वक धन और लोकप्रियता दोनों कमा सकें और प्रारंभ में उसे सफलता भी मिली । पर हमारे साथ जुडने के बाद अब शायद उसे इस बात का एहसास होने लगा है कि अब तक जो बुक कर रहा था, वो तो पत्रकारिता थी ही नहीं, सरल किया था मुझे उससे मतलब नहीं है । मैं तो बस ये चाहती हूँ । बेटा की सरल को तुम सही रास्ता दिखा हूँ । मैं इसी प्रयास में होगा और जिस तेजी से सरल मेरी बातों को समझ रहा है, मुझे उम्मीद है कि उसका भविष्य उज्ज्वल है । पर इससे पहले यदि कोई गलती हुई होगी तो उसकी सजा तो उसे भुगतनी ही होगी । ऐसी कोई गलती सरल ने की है । क्या माँ का मन घबराया ये तो समय के साथ ही मालूम होगा और प्रकृति का नियम है कि यदि हम किसी को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाएंगे तो उसका प्रतिफल मिलेगा ही । यदि सरल के लिए ऐसी स्थिति बनती है तो क्या तुम भी ऐसी स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं हो? नीरज अब परेशान ना हो ना जो होगा देखा जाएगा । नीरज ने कहा

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