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भाग 16

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‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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भाग सोलह आज पंद्रह तारीख हो गयी तो तुम्हारा रिजल्ट कब तक आएगा? शालिनी ने पूछा पता नहीं ऑनलाइन सूत्र कह रहे हैं कि एक आद हफ्ता और लग सकता है । विष्णु बोला उसे अंदरूनी जानकारी ऑनलाइन मिलने पर खुशी और विशेषाधिकार महसूस हो रहा था कि अब हम कहाँ जाएंगे । काॅस्ट मुझे भूख लगी है । विश्व में शिकायत की दोपहर के लगभग तीन बजे थे । विष्णु और शालिनी करार पैलेस में ब्लॉक के प्रथम तल पर स्थित एक नए रेस्टोरेंट में चले गए । मेरे लिए मसाला डोसा तुम क्या लोगी? विष्णु ने पूछा हमने सिर्फ दो घंटे पहले खाया है । याद है मैं केवल कॉफी लूंगी । शालिनी बोली ऐसा नहीं चलेगा । अगर तुम्हें केवल पीने के लिए कुछ चाहिए तो मैं तुम्हारे लिए ऑर्डर करता हूँ । तो हाँ ये भी गए फॅस मोदी यहाँ और मेरी तरह कुछ जंग कैलोरी पाओ । विश्व में हसते हुए कहा ओके, कुछ भी मंगा लो, मैं तुम्हारे लिए बहुत खुश हूँ । मुझे खुशी है कि तुमने जो एग्जाम में अच्छा किया है, पूरा चक्र एक मुस्कराहट के साथ बिना किसी बडी निराशा के साथ पूरा किया है । अगर तुम पास हो जाओगे तो मैं जानती हूँ हम सब कितने खुश होंगे और अगर तुम सफल नहीं हुए । मैं अभी से महसूस कर सकती हूँ कि तुम्हारा रवैया क्या होगा । मुझे लगता है इसी जगह पर तुमने पहले से लडाई जीत ली है । शालिनी ने साथ साथ कहा, हाँ, एक सीमा तक यह सच है । यहाँ परीक्षा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह कई कारकों द्वारा नियंत्रित होती है जिनमें से कुछ हमारे बस में नहीं है । हम बस अपनी पूरी क्षमता के अनुसार काम कर सकते हैं । तुम ने बचपन में छोटे से पत्थर से अंदर या बाहर का खेल खेला है । उसने शालिनी से पूछा, वहाँ खेला है क्यों? शालिनी ने पूछा, हम पत्थर को पकडते हैं और अपने कंधों को घुमाते हैं । बस इतना ही हमारे नियंत्रण में होता है । अचानक जब हम सोचते हैं कि सब कुछ हमारे नियंत्रण में है, तेज हवा चलने लगती है या हमारी अमूल्य जवाब दे जाती है और पत्थर किसी तरह हमारे हाथ से निकल कर हमारे नियंत्रण से बाहर चला जाता है । ये परीक्षा की तैयारी अभी ऐसे ही होती है । हम सोच सकते हैं कि चीजें नियंत्रण में है लेकिन अचानक कुछ ऐसी बहारी चीजें हो सकती है जो सब कुछ डावाडोल कर देती है और हमारी योजना को बर्बाद कर देती है । विष्णु ने कहा, वाह! तुमने वास्तव में पत्थर की खेल का सर आदर्श कितने अच्छी तरह से इस्तेमाल किया । बहुत बढिया शालिनी ने कहा । और तभी वेटर विष्णु का मसाला डोसा लेकर आ गया । विष्णु का खाना आया तब भी वहाँ अपने फोन से छेडछाड कर रहा था । बहुत हो गया । फोन से खेलना अब खाओ । शालिनी ने उसके आज से फोन ले लिया और प्लेट उसकी और सरकार नहीं है । वैसे तुम क्या देख रहे थे? शालिनी ने पूछा और क्या ऍम सकते हैं? इस पर अंदरूनी सूचना विष्णु ने झेलते हुए कहा, शालिनी विष्णु के फोन से खेलने लगी और विष्णु मसाला डोसा खाने में व्यस्त हो गया । कुछ देर में शालिनी की आंखों से आंसू बहने लगे । पहले तो विष्णु का ध्यान नहीं गया, लेकिन जल्दी ही वह अनियंत्रित हो गए । उसने बोलने की कोशिश की, लेकिन एक शब्द भी नहीं बोल पाई । क्या हुआ बताओ मुझे विष्णु से बार बार पूछ रहा था । उसने विष्णु को फोन दे दिया । विष्णु ने फोन उठाया और स्क्रीन पर उसका रिजल्ट था । यूपीएससी ने अभी अभी परिणाम घोषित किए थे और विष्णु न केवल पास हो गया था बल्कि उसने ऑल इंडिया रैंक टॉवल प्राप्त की थी । उसने दोबारा पीडीएफ चेक किया और दोबारा चेक करने के लिए साइट को रिफ्रेश किया । वह मैं पास हो गया । बहुत बढिया विष्णु और किसी चीज से अधिक राहत महसूस कर रहा था । उसने फोन उठाया और तुरंत घर पर कॉल किया । बाबा मैंने बारवी रैंक के साथ एक्जाम पास कर लिया है । ऑनलाइन रिजल्ट चेक कर लीजिए । विष्णु खुशी से बोला को बहुत बढिया माँ से बात करो । उसके पिता ने कहा असल में पापा ने अस्पताल से छुट्टी मार ली है और घर में बैठे हैं । विष्णु मन की छुट्टी ली । आवाज ने कहा सूपर बेहता! मैं जानती थी तुम कर लोगे, जल्दी घर आओ, हम सेलिब्रेट करेंगे । उसकी माँ खुशी से पूरी तरह भीगे स्वर में कहा । उनकी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था । विष्णु देख सकता था कि शालिनी अभी भी खुशी से रोज जा रहे थे । वह अगर उसके पास बैठ गई और दोनों एक दूसरे के गले लग गए और बार बार गले लगाते हैं । बेइंतहां खुशी किसान देखा यहाँ हमेशा से तुम्हारी किस्मत में था । शालिनी ने अत्यंत भावुकता के साथ उसको जाकर कहा । विष्णु के घर पर उसके माता पिता एक दूसरे से गले मिल रहे थे । बार बार अत्यधिक खुशी और पशुओं के साथ उसकी किस्मत में यहाँ हमेशा से लिखा था । उसकी माँ ने भावुक होकर कहा

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‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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