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भाग 13

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‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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बहुत तेरह । अंततः यूपीएससी सिविल सर्विसेज दो हजार दस की मुख्य परीक्षा का समय आ गया था प्रेसिडेंसी गर्ल्स हाईस्कूल के बाहर, जहाँ विष्णु को अपने मुख्य परीक्षा लिखनी थी, भारी भीड जमा हो रही थी । विनोद, अशोक, नीना, दीप्ति और मदन को भी वहीं आना था । पूरे शहर में केवल तीन या चार नामित केंद्र थे । विश्व में दोस्तों के साथ अभिवादन का आदान प्रदान किया । एक पेड के नीचे आपने बाइक खडी की और अपने हॉल, टिकट ऍम और अन्य सामग्री की जांच करने लगा । वहाँ देख सकता था की विनोद और नहीं ना एक ही पार्टी पुस्तक से पढ रहे थे । दीप्ती घबराई हुई आपने टेबलेट से पढ रही थी और मदद अभी अभी परिभाषाओं को रेखांकित और कंठस्थ कर रहा था । तो आज ही है वह दिन अशोक ने पीछे से विष्णु की पीठ थपथपाई । निश्चित रूप से है । विष्णु बोला मुझे बहुत घबराहट हो रही है । साथ ही बोरियत भी । कोई दिलचस्प बात बताओ । हम दोनों के पास दस मिनट बचे हैं । अशोक ने कहा अब मैं क्या करूंगा? मैंने तो अपने डेट की कहानी भी तुम्हें रात को तुरंत ही बता दी थी । अच्छा रुको याद है मैंने तो मैं कहा था कि प्रिलिम्स लेना टेस्ट क्रिकेट में बैटिंग करने जैसा था । हाँ हाँ याद है । अशोक ने उसे विश्वास दिलाया । उसी तरह मेन एग्जाम वनडे क्रिकेट मैच की तरह है । एक दिवसीय क्रिकेट में टीमों को बैटिंग करने के लिए केवल पचास ओवर मिलते हैं । उन्हें उन ओवरों के दौरान अधिक से अधिक रन बनाने की आवश्यकता होती है । उसी तरह हमें तीन घंटों में तीन सौ अंकों के लिए लिखना होगा । जवाब प्रत्येक प्रश्न के लिए निर्धारित शब्दों की संख्या की गणना करते हैं तो एक सौ बीस मिनट में लगभग चार हजार दो सौ पचास शब्द लिखने होंगे । इसका मतलब है कि प्रतिमिनिट टीवी दशमलव इकसठ सब लिखे जाने हैं । यहाँ हमारा रनरेट हैं । विष्णु बोला वह यह तो बहुत बढिया अंतर्दृष्टि है और बहुत ताजी भी । क्रिकेट सदस्य के साथ भाई अशोक ने कहा, क्रिकेट में जीवन की सबसे जटिल समस्याओं का समाधान है । भाई विष्णु ने उत्तर दिया, एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि एक दिवसीय क्रिकेट में कुछ टीमें अपने ओवरो का पूरा कोटा भी नहीं खेल पाती है तो वो अपने विकेट खो देती है और अपने निर्धारित ओवरों को पूरा किए बिना ही आल आउट हो जाती है । इसी तरह मुख्य परीक्षा में लोग उन प्रश्नों पर अधिक समय व्यतीत करते हैं जो उन्हें अच्छी तरह से आते हैं और उनके पास उन प्रश्नों को पूरा करने के लिए समय नहीं बचता जो उन्हें अच्छी तरह नहीं आती और इस तरह से बहुत सारे अनुत्तरित प्रश्न छोड देते हैं । ऐसे छोडे हुए प्रश्नों के इधर या उधर एक दो अंक भी अंतिम परिणामों में बहुत अंतर पैदा कर देते हैं । सच भाई बहुत सही कहा मैं इसका ध्यान रखूंगा । अशोक अपना वाक्य पूरा करवाता उसके पहले घंटे बच गए और परीक्षा अधिकारिक रूप से आरंभ हो गई । मैं मुश्किल से आधा दे पर लिख पाई । डिप्टी रोते हुए किसी से फोन पर कह रही थी, विष्णु चारों ओर लटके हुए चेहरे देख रहा था । प्रश्न पत्र असाधारण रूप से लम्बा था जिसे अधिकांश लोग पूरा नहीं कर पाए थे । वहाँ वास्तव में भगवान का दिया संदेश था कि तुमने एग्जाम से पहले मुझे वनडे क्रिकेट के बारे में बताया । उसके बावजूद मैं बीस अंक के प्रश्न पूरे नहीं करवाया । फिर भी यहाँ लोगों की प्रतिक्रिया देखकर लग रहा है कि मैंने अच्छा गया है । अशोक ने थोडे प्रसन्न स्वर में कहा, यहाँ भी वही हाल है । मैंने किसी तरह पचास ओवरों का सामना किया और जितने रन बना सकता था । बना लिए कुछ अच्छे चौके । कुछ खूबसूरत छक्के कुछ एक या दो रन यहाँ वहाँ कुछ सच में खतरनाक । कल कुल मिलाकर अच्छा लग रहा है । देखते हैं विष्णु ने आशा से परिपूर्ण सफर में कहा विनोद और नहीं ना पूरी तरह उदासी से भरे थे । विष्णु सांत्वना के नाम पर उनसे इतना ही कह सका की चिंता मत करो । यह तो पहली परीक्षा थी । अभी आठ हो । परीक्षाएं बाकी है । ध्यान से भटकना मत । मदन इस बात से अधिक चिंतित था कि विष्णु ने सारे प्रश्नों के उत्तर दिए थे । बजाय इस बात की उसने खुद लगभग चालीस अंकों के प्रश्न छोड दिए थे । तो तुमने फॅमिली के लिए क्या लिखा? वहाँ विष्णु के पीछे पडा हुआ था । देखो मदन मुझे जितना भी आता था, मैंने हर प्रश्न के लिए लिखा है लेकिन क्रमबद्ध तरीके से बस विष्णु ने शांत स्वर में उत्तर दिया । यूपीएससी के मुख्य परीक्षा केन्द्र में वहाँ दिन ऐसा ही था । भावनाएँ स्थितम् पर थी और उनमें ऊंची उम्मीदों का इंडियन था । परीक्षा के बाकी दिन सामने आए तो हालत और भावनापूर्ण हो गए । इस दौरान अभ्यार्थियों पर बहुत सारी आशाएं हताश आएँ । भविष्यवाणियां, खुशी, निराशाएं और अप्रत्याशित चुनौतियां डाली गई । उनमें से प्रत्येक ने जिस तरह उनका सामना किया, उसने बात के दिनों में उन्हें वहाँ बनाया जो हुए थे । काश इन दो हफ्ते की मेन परीक्षा के लिए मेरे पास पांच फॉर्वर्ड का बटन होता । अशोक ने परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते हुए टिप्पणी सही बात है, मैं नहीं ना से किसी और चीज के बारे में बात भी नहीं कर पाया । खैर शुक्र है अब सब हो गया । विनोद ने राहत की सांस ली । विष्णु खुशी से गाना गाते हुए अपना सामान बाइक में रख रहा था और जाने की तैयारी कर रहा था । सर, हमारे चेयरमेन आपसे बात करना चाहते हैं । सफार्इ सूट पहने एक अधेड व्यक्ति ने विष्णु से कहा कौन है आपके ऍम? मुझसे क्यों मिलना जाते हैं? विष्णु ने हैरानी से पूछा । वे ग्लोबल आईएस कोचिंग ट्रस्ट चलाते हैं । सर, वे आपके यूपीएससी साक्षात्कार के लिए आपका मार्गदर्शन करना चाहते हैं और साक्षात्कार के लिए दिल्ली की आपकी यात्रा को प्रायोजित भी करना चाहते हैं । उस व्यक्ति ने कहा, हरे नहीं, माफ कीजिए, मुझे दिलचस्पी नहीं है । मैं तो यह भी नहीं जानता है कि मैं करता प्राप्त करूंगा या नहीं । आपने हमें ढूँढना भी कैसे? विष्णु ने पूछा, हम सब जानते हैं सर, हम हर साल यही करते हैं । उत्तर प्रदेश से सभी टॉपर्स का मार्गदर्शन हमारे चेयर में नहीं करते हैं । उधर देखिए उन्हें भविष्य के आईएएस और आईपीएस अफसरों के साथ तस्वीरें भी कह रहे हैं । आप भी आकर खडे हो जाइए । उसने विष्णु से कहा, मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है । आपको आपके चेयरमेन को और ट्रस्ट को मेरी शुभकामनाएं । विष्णु दोस्तों को गर्माहट भरे मुस्कराहट दे देते हैं । उन्हें देख कर हाथ हिलाते संतुष्ट भाव से परीक्षा केंद्र से निकला । वहाँ अपने प्रदर्शन से काफी खुश था, लेकिन फिर भी सफलता को लेकर पूरी तरह निश्चित नहीं था । मुख्य परीक्षाओं की समाप्ति और अगले साल की प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए कक्षाओं की शुरुआत के बीच की अवधि लोहियानगर, अध्यन क्षेत्रों के लिए कैलेंडर में सबसे सुस्त समय होता था । ऐसे कुछ ही लोग थे, जिन्होंने अगले प्रिलिम्स की तैयारी शुरू कर दी थी । जिन लोगों ने मुख्य परीक्षा दी थी, वे अभी भी परिणामों का इंतजार कर रहे थे तो वेज दुविधा का सामना कर रहे थे कि उन्हें साक्षात्कार के लिए तैयार है, शुरू कर देनी चाहिए । यह मानते हुए कि वे मुख्य परीक्षा में सफल हो जाएंगे या बुरे परिणाम के लिए तैयार रहना चाहिए और अगले साल के प्रिलिम्स के लिए नए सिरे से तैयारी शुरू करनी चाहिए । कुछ लोग अपने भविष्य के बारे में बडा फैसला लेने के लिए इंतजार कर रहे थे, जो उन के परिणामों पर आधारित होने वाला था । तैयारी जारी रखना है या छोड देना है, काम करना है या नौकरी छोडनी है? शादी करनी है? नहीं । इतने सारे विचारों और आकांक्षाओं के साथ घर कोई केवल एक चीज की प्रतीक्षा कर रहा था । अपने मुख्य परीक्षा परिणाम की शमा करें । आपका नंबर सफल उम्मीदवारों की सूची में मौजूद नहीं है । विष्णु ने अपना रोल नंबर टाइप किया तो स्क्रीन पर लिखा आया उसका दिल तेजी से धडक रहा था । वहाँ पसीने से नहीं आया हुआ था । डाॅ । क्या हो रहा है? वहाँ चिल्लाया, किसी ने उत्तर नहीं दिया । उसने पागलो की तरह अपना पसीना पोछा । भूप अंधेरे में अपने बिस्तर से उठा और बत्ती जलाई । विष्णु ने अभी अभी एक बुरा सपना देखा था, जो उसे बहुत वास्तविक लग रहा था । ठीक वही भावनाएं जिन्होंने एक साल पहले उसके दिल की धडकने बढाई थी । लौट आई थी आत्म संदेह, आत्म संदेह और आत्मसम्मान देह विष्णु ने दक्षिण अफ्रीका में चल रहा चैंपियंस लीग टी ट्वेंटी देखने के लिए टेलीविजन चालू कर दिया था कि उसका दिमाग शांत हो जाए और वहाँ सही ढंग से सोच पाए । उस रात चेन्नई सुपर किंग्स और विक्टोरिया बुशरेंजर्स के बीच खेल चल रहा था और मैच एक सुपर ओवर पर पहुंच गया था । सीरीज के जो पूरे मैच के दौरान हावित् है, अचानक हार गए । क्रिकेट में नकारात्मकता ने विष्णु को और हतोत्साहित कर दिया । वहाँ निरुद्देश्य साथ दीवार को देखते हुए सोचता रहा और अंततः हो गया । अगले दिन विष्णु अशोक स्पाॅट गया । यूपीएससी के गणेश की मूर्ति सजाकर उम्मीदवारों के लिए तैयार कर दी गई थी । अधिकांश लोग भूतल में यूपी घूम रहे थे । वास्तव में वो कुछ पढ भी नहीं रहे थे । कुछ लोग टेलीविजन हॉल में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल देख रहे थे । विष्णु सीढियां चढकर अशोक पैराडाइस पहुंच गया । सामान्य अध्ययन से तीन प्रश्न उनके पूरे ज्ञान और नाटक के बाद अशोक वहाँ बैठे कुछ लोगों से बात करते हुए जोर से हंस रहा था तो मिस्टर यादव की सामान्य अध्ययन की भविष्यवाणी के मजे ले रहे हो ना? विश्व में पूछा हाँ उस उनकी ने कहा था कि पिछले साल अडतालीस प्रश्न आए थे । अपने पूरे समय का उपयोग करो और करंट अफेयर्स पडो बस जैसा मैं कहता हूँ ऐसा करो और अब क्या । अशोक अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा था । हमेशा की तरह अनिश्चित पब्लिक सर्विस कमीशन कोई भी यकीन के साथ कुछ नहीं कह सकता हूँ । विष्णु बोला इससे पहले की तुम पूछो । विनोद और मीना फिल्म देखने गए हैं । अशोक बोला मैंने अंदाजा लगा लिया था । तभी विष्णु का फोन बजा शालिनी थी । बधाई हो । तुम इंटरव्यू तक पहुंच गए । उसने कहा वह दूसरी ओर खुशी से उछल रही थी । तुम्हें पक्का पता है । विष्णु से बार बार पूछने लगा मैं यकीन से कह रही हूँ यार जाओ खुद देख लो । मैं जिन्हें भी जानती हूँ सबको बता रही हूँ । उस ने घोषणा की अशोक साली नहीं कह रही है । रिजल्ट आ गए हैं और मैं पास हो गया हूँ । चलो चेक करते हैं । विष्णु ने कहा वो वह शानदार खबर है । विष्णु तुम कुछ और । ये वो बहुत खास मैं हमेशा से जानता था । अशोक ने अपने दोस्त के लिए सच्ची खुशी के साथ कहा ओके चलो खुद रिजल्ट देखते हैं । पहले अपना देखो । विश्व बोला मुझे बहुत घबराहट हो रही है । तुम देख कर बताओ । अशोक ने अपना लेपटॉप उसकी ओर खिसकाते हुए कहा । अपना नंबर दो तो वाॅलेट नंबर टाइप करने के बाद विष्णु ने एंटर का बटन दबा दिया । अशोक का दिल इतनी जोर से धक्का की वहाँ उसे अपने मुंह में महसूस कर रहा था । पास हो गए वो विष्णु ने खुशी से भाव विभोर होकर अशोक को करने लगा लिया । विष्णु से गले मिलते हुए अशोक की खुशी का ठिकाना नहीं था । कुछ अन्य लडकी है जो उनके साथ खडे थे और अगले साल परीक्षा देने वाले थे और शो और विष्णु को देखकर उम्मीद से भर गए । आखिरकार मैंने खुद यूपीएससी का एक सफल परिणाम चेक कर ही लिया । अपने पिछले सभी प्रयासों को याद करते हुए विष्णु ने कहा, अरे यार, विनोद और नीना दोनों ने गए । दीप्ति भी फेल हो गए । मदन पास हो गया । अशोक ने एक के बाद एक देखते हुए कहा, अरे ऐसा हो । विष्णु ने हैरत से कहा । वैसे भी विनोद का परिवार चाहता है कि वह गांव वापस जाकर खेती का काम संभाले । मैं उसकी प्रतिक्रिया की कल्पना भी नहीं कर सकता हूँ और नीना उनकी रिश्तेदार क्या होगा? ये भगवान अशोक है और चिंता केमिस्ट्री में बोला । विष्णु एक विरोधावासी के मूड में था । उसके माता पिता और साली नहीं उसका परिणाम देखने के बाद से सातवे आसमान पर थे । लेकिन वहाँ इस तथ्य को पचा नहीं पा रहा था की यहाँ उसके कुछ अच्छे दोस्तों के लिए यात्रा का अंतर था । वास्तविकता के साथ समझौता करना उसके लिए बहुत कठिन था । विनोद बहुत गमगीन था । विष्णु से कुछ नहीं रह पाया । बस उस ने अगले कुछ घंटों तक होने के लिए उसे अपना कन्धा दे दिया । फिर अशोक शराब लेकर आया तो विनोद उठ गया । कुछ देर में दोनों शराब पीने लगे । मैं जानता हूँ या तुम्हारे लिए कितना मुश्किल होगा । मेरे लिए केवल एक साल ऐसी विफलता का अनुभव करना कल्पनीय रूप से कठिन था तो तुम लगातार तीसरे साल इसे अनुभव कर रहे हो । यहाँ बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है । अपनी ताकत को कभी जाने मत देना । भाई अपनी प्रतिभा को कभी मत छोडना । मजबूत बने रहना । कुछ दिनों के लिए ये बातें अपने दिमाग से हटा दूर एक हफ्ते बाद एक हफ्ते बाद हम बैठ कर चर्चा करते हैं कि इस बार कहाँ गलती हुई । विष्णु विनोद से बस इतना कर पाया । विनोद ने हल्के से सिर हिलाकर विष्णु की बात पर प्रतिक्रिया दी । विष्णु एक बार फिर मिश्रित भावनाओं के साथ अशोक हरियाणा से निकल आया । बधाई हो विश्वनाथ! मैं जानती थी तुम सफल होंगे । श्रीमती गीता ने कहा मैं तो मैं कुछ बुनियादी चीजें बताउंगी । इंटरव्यू में क्या करना और क्या नहीं करना है के संदर्भ में बस उन्हें दिमाग में रखना । उन्होंने कहा जरूर मैं विश्व में सिर हिलाया । मैंने अभी वहाँ आवेदन पत्र देखा । जो तुमने इंटरव्यू के लिए जमा किया है । उसे बहुत मूर्खता से भरा गया है । तो मैंने अपने हो भी क्रिकेट देखना लिखिए । यहाँ कोई होता है ये सब चीजें छोडो इंटरव्यू में बस वही कहना जो मैं तो मैं बताऊंगा तुम पास हो जाओगे । मिस्टर यादव ने हमेशा की तरह डिंग मारी । विष्णु वहीं खडा रहा जब तक अशोक ने उसे खींचकर बाहर नहीं निकाल लिया । शुक्र है उसने मेरी हो भी नहीं देखी । अशोक बोला तो नहीं लिखा है । विष्णु ने उत्सुकता से पूछा म्यूजिक वीडियोस देखना और टेनिस बॉल क्रिकेट खेलना यहाँ आदमी निश्चित रूप से मुझ पर भी ऐसा होता । पिछले साल एक लडके में अपनी हॉबी में लिखा था साहब को वर्ष में करना । इस यादव ने उसकी बहुत तारीफ की थी । अशोक बोला, शुक्र है मैंने बादलों में गाना नहीं लिखा । उसने मुस्कुराकर आगे कहा सीढियों पर वे आई श्रीवास्तव से टकरा गए अशोक मैंने सुना मदन तुम और तुम्हारा दोस्त फॅमिली अहर्ता प्राप्त कर चुके हो । बदायूं लडकों असल में वहाँ मैं ही था जिसने इंटरव्यू के लिए सबसे पहले इसको रिंग की तैयारी की थी और यूपीएससी को उसके बारे में लिखा था । उन्होंने अपने मैं की धुन शुरू कर दी । यूपीएससी ने क्या जवाब दिया सर विष्णु ने मासूमियत कर्नाटक करते हुए पूछा मैं भी उनके जवाब का इंतजार कर रहा हूँ । आइस्ले वास्तव में बेशर्मी से कहा वो धन्यवाद सर । यहाँ उनका विनम्र तरीका था यह कहने का कि यूपीएससी ने मेरे पत्र पर ध्यान ही नहीं दिया । अशोक ने कहा और दोनों हसते हुए ग्रेड माइंड से बाहर निकल आए हैं ।

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‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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