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कामना जैसा कि नाम से ही विदित होता है यह गुरुदत्त जी का पूर्ण रूप में सामाजिक उपन्यास है इस उपन्यास में इन्होंने मानव मन में उठने वाली कामनाओं का वर्णन किया है और सिद्ध किया है कि मानव एक ऐसा जीव है जो कामनाओं पर नियंत्रण रख सकता है Voiceover Artist : Suresh Mudgal Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त
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ऍम के सोता हूँ वो सुरेश मुदगलकर नमस्कार आज हम आपके लिए लेकर आए हैं गुरूदत्त लिखित काम ना फॅस सुने जो मन चाहे वैदुष्य संस्कृति तो राजनीति की त्रिवेणी श्री गुरु दत्त का जीवन परिचय आठ दिसंबर अठारह सौ चौरानवे को गुरूदत्त का जन्म लाहौर में हुआ । मुख्य क्रीडा भूमि बनी वर्तमान भारत भूख नश्वर से किया गया । आठ अप्रैल उन्नीस सौ नवासी को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भारत की राजधानी दिल्ली में आधुनिक विज्ञान के छात्र । तत्पश्चात पेशे में वैध लेकिन साहित्य सृजन में की अनूठी साधना एमएससी किया । रसायन विज्ञान में व्याख्याता बने । वैदिक साहित्य, उपन्यास संस्मरण और जीवन साहित्य के महान सर्जक बने । ज्ञान राज और सब शिल्प के संगम के साथ साथ विज्ञान और साहित्य के सेतु थे । रिजिजू व्यक्तित्व और सच लिस्ट चिंतन के स्वामी थे । विद्या और विनय के संसदीय थे तो व्यक्तित्व की दृष्टि से स्थित प्रज्ञप्ति, सदाचार, संकल्प, निर्मल मैत्री और पारस्परिक समझदारी उनके अलंकरण थे । हिंदुत्व के दृढ अस्तम थे तो रग रग हिंदू उनका परिचय था । हमारे समाज उनका प्राण था । उपन्यास जगत के बेताज बादशाह थे । स्वाधीनता के पद पर से पालम हुआ । उनका उपन्यास जगत का सफल लगभग दो सौ उपन्यासों से माँ भारती के अंक को सुशोभित सुगंधित करते हुए अस्ताचल की ओर पर समाप्त करने से पूर्व सिद्ध कर गया कि वे हिंदी साहित्य की एक देदीप्यमान नक्षत्र है । सूर्यकांत त्रिपाठी की तरह कोटि कोटि पाठकों के हर देश सम्राट होते हुए भी साहित्यिक मैं राजनीतिक अलंकरणों से वंचित रहे । धर्म, संस्कृति और राज्य से लेकर वेदमंत्रों के देवता तक हिंदू वांग में व्याख्याता बने । किंतु चापलूसों से गिरी सांस्कृतिक संस्थाओं में से किसी ने भी उस निर्भीक ऋषि के चरणों पर पूछ नहीं चढाए । गीता पर उनके विचार और भाषा मूल्य नहीं दी हैं तो भारत विभाजन पर देश की हत्या, उनका ऐतिहासिक दस्तावेज भारत गांधी नेहरू की छाया में उनके प्रखर चिंतन द्वारा राजनीति की कल उस करता है उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व को हमारा नमन सुनते रहे हैं । आपको कोई एफएम सुने जो मन चाहे

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कामना जैसा कि नाम से ही विदित होता है यह गुरुदत्त जी का पूर्ण रूप में सामाजिक उपन्यास है इस उपन्यास में इन्होंने मानव मन में उठने वाली कामनाओं का वर्णन किया है और सिद्ध किया है कि मानव एक ऐसा जीव है जो कामनाओं पर नियंत्रण रख सकता है Voiceover Artist : Suresh Mudgal Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त
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