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हम हैं राही प्यार के - Part 16

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मैं पहली क्लास छोड़कर रिया से मिलने आई.एम.टी. जाना चाहता था। लेकिन इनसान जो करना चाहता है और जो करने की उससे अपेक्षा की जाती है, उसमें हमेशा अंतर होता है। मैंने सोचा कि मैं कक्षाओं के बीच मिलनेवाले दस-दस मिनट के अंतरालों में से एक में अपनी किस्मत आजमाऊँगा और उसके कॉलेज जाने की कोशिश करूँगा, सुनिए आखिर क्या है पूरी कहानी| writer: पार्थ सारथी सेन शर्मा Voiceover Artist : Shreekant Sinha Author : Parth sarthi Sen Sharma
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अच्छा था । आप वो स्टीव को ग्रामीण दस्तकारों का काम और कलाकारों का प्रदर्शन पसंद आया है । हम मिल सकते हैं लेकिन शायद मेरे साथ स्टीम भी होगा । मैं उसे अकेला नहीं छोड सकती क्योंकि वह मेरे जोर देने पर ही इतनी दूर आया है । उस की ये पहली भारत यात्रा है और वो इस जगह से बिल्कुल अनजान है जैसा कि तुम समझ सकते हो । उसने कहा, ये बात मेरे लिए बहुत हैरानी भरी थी और हालांकि मैं दिया के सुपरवाइजर के बारे में कुछ नहीं जानता था । मुझे लगा कि वो उन क्षेत्रों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है जहां उसका कोई काम नहीं है । लेकिन मुझे दिया से बात भी करनी थी और खुद को उदासीन भी दिखाना था । बेशक यह तो स्वाभाविक है लेकिन तब हम कॉफी पर मिलते हैं और फिर हम दोनों चल कर उसे लंच के लिए ले आएंगे । जहाँ भी वो रुका है वहाँ से अगर हमें ठीक लगे तो मैं दिया के साथ कुछ समय अकेले भी जाना चाहता था और बिना अपने छेड दिखाया । ऐसा कर पाने का यही एक तरीका था ओके ये ठीक रहेगा । हम चाणक्यपुरी में फॅसने मिल सकते हैं । चलो फिर मैं कल तुम से मिलती हूँ । मुझे थोडी थकान महसूस हो रही है । आज का दिन बहुत व्यस्त था । कॅरियर ने जब हाई रोकते हुए कहा और तुरंत ही मेरे कानों में रिसीवर नीचे रखने की आवाजाही । धुंध ने अब बर्फ का रूप ले लिया था और मैं अपने सीने पर उसका बोझ महसूस कर सकता था । उसकी बात का प्यार से कोई लेना देना नहीं लग रहा था । उस रात में सोच रहा था कि काश ऍम से बात करना । फिर गौतम लेकिन मैं अकेला था या फिर खुद को अकेला महसूस कर रहा था । अपने ही घर में मैं सुबह जल्दी ही निरुलाज पहुंच गया था और पहले कुछ ग्राहकों में से एक था । मैं सोच रहा था कि कुछ ही देर में ये अस्थान भारत के अतिरिक्त युवाओं के भेज से इस तरह हट जाएगा कि लोग परेशान होकर कुर्सियों के पीछे खडे नजर आएंगे । उस पर बैठे ग्राहक के खाता खत्म करके उठने के इंतजार हो, लेकिन इतनी सुबह वहाँ का माहौल शांत और सुकून था जैसे तूफान के आने की तैयारी कर रहा हूँ । कुछ ही देर में मैंने दिया को रेस्टोरेंट के कांच के दरवाजे से अंदर आते देखा । उसने टखनों तथा सफेद काली पोल्का डॉट्स वाला एक उस कार्ड और उस से मेल खाता ताला सुन देखता हूँ, पहना था और साथ में चमडे की एक चौडी बेड । मुझे उसके बालों में फिर एक बदलाव दिखाई दिया । इस बार वे खुद डाले और कर्म किये हुए थे । वो अच्छे स्वास्थ्य से भरपूर लग रही थी । मैं निश्चित रूप से उसके चेहरे पर एक चमक देख सकता था । लेकिन जब वो अपने क्षेत्र परिचित हल्की सी मुस्कान के साथ मेरे बगल की कुर्सी पर बैठे तो मुझे महसूस हुआ कि दिया आपने सामान्य साझ हूँ, नहीं तो शांत लेकिन अकेली लग रही थी । उस खोई खोई सी और कुछ तो हमने काउंटर पर कुछ खाने का ऑर्डर देने के बाद अपनी बात शुरू की । ये अच्छी बात है कि हम आज बना रहे हैं । मैं तुम से कुछ बात करना चाहती हूँ । मैं पहले ही तो मैं बताना चाहती थी लेकिन मैं ये सब पत्र में नहीं लिखना चाहती थी क्योंकि मैं उसमें तुम्हें अच्छी तरह समझा नहीं पाते । रिया ने कहा उस की शुरूआती अनिश्चितता गायब हो चुकी थी और वो जानबूझकर बातचीत को उस विषय की ओर ले जा रही थी जिसका शायद उसने अकेले में कई बार अभ्यास किया होगा । ऐसा लग रहा था कि उसने हमारी मुलाकात के बारे में पहले से सोच रखा था और उसके मन में कुछ चल रहा था । मैं उसकी आंखों में देखता हुआ इंतजार कर रहा था । हालांकि मैं बहुत कुछ कहना चाहता था लेकिन उस समय तक मैंने कुछ नहीं कहा था । तुम जानते हो कि मैंने तुम्हें अमेरिका आने के लिए कितनी मिलना थे, की थी असर तो नहीं जानते होगी तुमने किन कारणों से मना कर दिया । उस ने कहा, बेशक मैं जानता था पेस मुझे गलत, मैं समझता हूँ प्लीज इस सच के बावजूद की हम एक दूसरे से प्यार करते थे और एक तरह से अभी भी करते हैं । मैं तुम्हें या खुद इस निराधार विश्वास के साथ धोखा नहीं दे सकते हैं कि मैं भविष्य के किसी अनिश्चित तारीख को भारत लौट हूँ । मुझे लगता है कि मेरा काम और मेरा जीवन वहाँ स्थापित हो चुके हैं और कम से कम में इस समय मैं उसे भारत द्वारा प्रस्तावित किसी भी चीज से बताने के लिए तैयार नहीं । इसलिए हमें अपरिहार्य को स्वीकार कर लेना चाहिए और उस चीज को पकडकर नहीं बैठना चाहिए जिसका कोई भविष्य नहीं है । उसने कहा, उसके मुंह से निकले ये सब इतनी संरचित और सटीक थे, उनमें स्वाभाविकता बिल्कुल नजर नहीं आ रही थी । साहब पता चल रहा था कि उसने इस वार्ता लाभ के बारे में बहुत सोचा था । संयोग क्या टैलीपैथी के एक अजीब भेज से उसने उस मुश्किल विषय की शुरुआत करती थी, जिसके बारे में मैंने बात करने का सोचा था और इस प्रकार मैं बच गया था । पता नहीं मैं किसी और के लिए वैसा महसूस कर पाऊंगा या नहीं, जैसा तुम्हारे बारे में करती हूँ । जीवन में प्यार और भावनाओं का बहुत महत्व होता है, लेकिन उन के अलावा भी बहुत कुछ होता है । अगर तुम ने उस समय अमेरिका आने का निर्णय ले लिया होता । जब मैंने कहा था तो बात अलग होती, लेकिन वह तबकी बात थी । उसने कहा, उसकी आवाज में हल्के से निराशा और शिकायत का भाव था । उसके नजदीक खाली टेबल पर टिकी थी । बैठने शो का समय पास आने से निरुलाज अब धीरे धीरे बात नहीं लगा था । हम सिर्फ सर्विस काउंटरों पर कुछ ऑर्डर करना भूल गए थे । हमारे बीच एक वो झील सा सन्नाटा पसर गया था । जाहिर तौर पर रिया जो कहना चाहते थे वो कह चुकी थी और अब उसके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं बचा था । मुझे लग रहा था कि वह हम दोनों की ओर से बोल चुकी थी और अब मेरे पास भी कुछ कहने को नहीं था । ऑपरेशन पूरा हो चुका था बहुत कम समय में और तब कर रहे थे कम से कम अभी के लिए । मैं जानता था कि उस समय की मांग थी । मुझ से जो कहा गया था उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर । लेकिन मैं कुछ कह नहीं पाया । और क्या कहता मैं हम दोनों चुपचाप बैठे रहे हैं । एक दूसरे के अलावा हर चीज को देखते हुए हैं तो मैं कुछ कहना नहीं है । कुछ देर बाद रिया ने मुझसे पूछा उसकी आंखें मुझ से कह रही थी कि वह चाहती थी मैं भी थोडा अपराध भाव और मन का बोझ पार्ट वो तो तुम्हारा मतलब हमारे भी सबका शायद तुम सही कह रही हूँ । पिछले कुछ सालों में हम अलग अलग देशों में बढ गए हैं । मैं तो मेरे दोस्त दे सकता हूँ ना खुद को हालत अलग हो सकते थे । लेकिन नहीं मैं तो भारत निर्णय स्वीकार करता हूँ । हमारे जीवन में बदलाव आएगा लेकिन मुझे उम्मीद है कि वो अच्छे हूँ । मैंने कहा छत्तीस हुआ था, मेरे मुंह से निकलने लगे जैसे कोई और बोल रहा था और मैं दूर से देखता था । सुबह से पहली बार या के चेहरे पर एक छोटे से मुस्कान आई । शायद उसके निर्णय को मैंने स्वीकार कर लेने से उसे राहत महसूस हो रही थी । हालांकि हम दोनों जानते थे कि मेरे पास स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था लेकिन मैं एक बार हिट गाना था । वो अपने सुपरवाइजर को देखकर मुस्कुरा रहे हैं जिसने अभी अभी ऍम ने उसे होटल से लाने की परेशानी उठाने से हमें मना किया था और कहा था वो टैक्सी ड्राइवरों की बातों से निरुलाज खुद तलाश कर लेगा । साफ दिखाई दे रहा था कि उसे कामयाबी मिल गई थी । हालांकि मैं अनुमान लगा चुका था फिर स्टेप कीजिए बात पर सबसे पहले मेरा ध्यान गया क्या? मैं कहूँ कि मैं ध्यान देने से खुद को रोक नहीं पाया । वो थी स्टीव गोरा था । उसकी पहचान के बारे में बाकी सब बातें कौन थी और भले ही मैं इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहता था लेकिन यह संस्था की मेरे लिए उसकी पहचान उसके रंग से ही थी । कम से कम जब तक मैं उसे बेहतर ढंग से जान नहीं लेता लेकिन मेरे पास ना इस को अधिक जाने की इच्छा थी न समय मुझे लगा कि शायद प्रिया के सुपरवाइजर से ये मेरे पहली और आखिरी मुलाकात होगी । अचानक मेरे मन में खयाल आया कि कहीं रिया से भी तो मेरी ये आखिरी मुलाकात नहीं है तो मैं उससे पूछना चाहता था, लेकिन इस्तीफा हमारे पास आ चुका था और बातचीत साधारण परिचय भारत की गर्मी खाने के लिए क्या आर्डर घटना है और भारत अमेरिका से कितना अलग है? जैसे विषयों की ओर मोड चुकी थी । कैसा भी बात में मुझे एहसास हुआ रिया से वास्तव में मेरी तो अंतिम मुलाकात थी, लेकिन जब तक हम दोनों जीवित हैं इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता । हो सकता है किसी दिन किसी एयरपोर्ट टर्मिनल पर मैं उससे लगना चाहिए । हालांकि एक बार मेरे मन में विचार आया था की अपनी छुट्टियों में कटौती करके गौतम के साथ अगले सोमवार को ही वापस चला जाऊँ । लेकिन फिर मुझे लगा कि ऐसा करना मेरे परिवार के साथ विशेष रूप से मेरी माँ किसान अनावश्यक अन्याय होगा जो सबसे मेरे आने का इंतजार कर रही थी और योजनाएं बना रही थी । जब से मैं दिल्ली आने के बारे में उन्हें लिखा था, मैंने सुबह ॅ में रिया से हुई बातचीत अपने तक ही रखी । अब मैं न तो उस बात को छुपाकर रखना चाहता था नहीं, अपने घर वालों से उसके बारे में चर्चा करना चाहता था । वैसे भी मुझे विश्वास था कि जल्दी ही मेरी गतिविधियों से या फिर उन में आई कमी से ये बात उनके सामने स्पष्ट हो जाएगी की हालत बदल गए थे । मैं उनकी प्रतिक्रियाओं का कोई अनुमान नहीं लगा रहा था, लेकिन मुझे विश्वास था कि उनकी प्रतिक्रिया है । मेरी खुशी और मेरे प्रति उनकी चिंता पर आधारित होंगे । जहाँ तक मेरी प्रतिक्रिया की बात थी, मैं तो बिल्कुल टूटा हुआ महसूस कर रहा था और ना ही खुद पत्ता रस खाते हुए तो हो रहा था । मैं बस अपने अंदर एक खालीपन महसूस कर रहा था जैसे मेरे सीने से हिस्सा उखाडकर अलग कर दिया गया हूँ । यदि मेरे पिताजी और माँ मेरी बहन को या फिर बहुत हम को जब रविवार को हमारे घर खाना खाने आया, मुझमें से कोई बदलाव दिखाओ तो किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की । खाने के समय इधर उधर की सामान्य बातें होती रही जिसके दौरान गौतम दरिया दिल्ली से मेरी माँ के बनाये खाने की तारीफ करता रहा । जैसे सुनकर उनके प्रसन्नता साफ दिखाई दे रही थी उसका इंटरव्यू अच्छा किया था । लेकिन ये अनुमान लगाना मुश्किल था की उन गंभीर लोगों के मोटे चश्मों के पीछे उनके दिमाग में क्या चल रहा था । मैं उम्मीद कर रहा था की गौतम ने अपने मूल सिद्धांतों जाकर नहीं किए होंगे जैसा कि मैंने उसे सलाह दी थी । दिल्ली में वह सप्ताह सबसे छोटे सप्ताहों में से था । एक प्रकार से वह सबसे लम्बा था । मैं घर पर ही रहा और अपने संभावित भविष्य और जीवन के बारे में सोचता था लेकिन इस तरह मन में विचार भी नहीं आती । मैं बिना कुछ किये यही घर में आराम करता रहा और मुझे देखकर मेरी माँ बहुत खुश थी । मैंने इतने सालो बाद अपने बेटे को घर में देखने का दुर्लभ अवसर मिल रहा था । अभी उनके मन में ये प्रश्न उठाती होगा तो मैं इस बार की तरह रिया से मिलने क्यों नहीं जा रहा है तो उन्होंने मुझसे पूछा नहीं मेरे माता पिता के बीच मुझे दिख रहे बदलाव को लेकर बात अवश्य हुई होगी और उन्हें चिंता भी हुई होगी । लेकिन उन्होंने अपनी चिंता मन में ही रखे और दूर से देखते हुए किसी ऐसे संकेत का इंतजार करते रहे हैं जिससे उन्हें सच्चाई का पता चल सके । लेकिन उन्होंने कुछ पूछा नहीं । शायद से मुझे मुझसे बेहतर चाहते थे । उस दिन बहुत कर रही थी और सूरज की किरणों से पूरे दिन सूखी धरती पर बेरहमी से अपना आप बस आया था, जिसकी वजह से शहर बिलकुल बेजान हो गया था । मैंने पूरा दिन घर पर आपने खुल्ला से ढंडे हुए कमरे में बिताया, लेकिन शाम होते होते मुझे उस छोटी सी बंद जगह मैं घुटन महसूस होने लगी और मैं ताजा हवा के लिए बेचैन हो गया । खुशकिस्मती से उस समय तक सूरज ढलने लगा था और हवा में हल्की सी ठंडक महसूस हो रही थी । जैसे आस पास कहीं पे मौसम बारिश हुई हूँ । मेरे लिए इतना काफी था और मैं नजदीक ही इससे टी आर पार किरण को तल के लिए निकल पडा । जैसा कि मुझे याद आया मैं बचपन में करता था । दक्षिणी दिल्ली के बीच में वह बार ही एकमात्र स्थान था जो वन्य प्रकृति के सबसे करीब तो शाम के धुंधलके में मिट्टी के टीले पर बैठे हुए धूलभरी धरती और नीचे फैले जंगल को देखते हुए जहाँ कभी दिल्ली के सुल्तानों की फौजों को लूटेरे मंगोलों के छापे की आशंका भेज दिया होगा । मैंने महसूस किया कि मेरे दी बाद में चाय चालीस साफ हो रहे हैं । कभी कभी सबके जीवन में और समाज में भी ऐसे दुर्लभ बल्ला आते हैं, जो चीजों का क्रम बदल देते हैं । मैं अपने सामने मौजूद प्रकृति के विस्तार के साथ शांति और सुकून महसूस कर रहा था और मुझे लालटेन की लाल मिट्टी और खेत याद आ रहे थे । मेरे खाली मन में एक और गोधूलि वेला की क्या आ गई, जो मैंने वहाँ काजल के साथ बिताई थीं । वंदना की मुस्कान, उसके प्रभार, स्कूल के शोर मचाते हुए तो बच्चे अपने बच्चों के लिए कुछ फल भविष्य का सपना देखती, ग्रामीण महिलाओं की प्रत्याशा, निर्मला देखा, शाल वसने भरा, काम भेजे, सबकुछ पुकार रहे थे, उसी लगने लगा जैसे ये सब चीजें मेरी अपनी हैं । वे लोग मेरे अपने हैं । हालांकि मैं उन सबको मुश्किल से एक साल से जानता था । अपनी जानी पहचानी दुनिया से दूर आकर जहाँ मैं बडा हुआ था । मैं अब दूसरों की अपेक्षाओं से बंद कर किसी दूसरे की जिंदगी जीने के लिए तैयार नहीं था । मैं खुद का जीवन जीना चाहता था, अपनी पसंद के काम करना चाहता था और शायद मैंने अनजाने में अपनी पसंद के रास्ते पर कदम रखा था लेकिन मेरे अंदर उसे स्वीकारने का साहस नहीं था । ऐसा कुछ नहीं था जो मुझे वो करने से रोक रहा हूँ जो मैं करना चाहता था । मुझे तुरंत अपनी नौकरी छोडने की आवश्यकता नहीं थी लेकिन फिर भी मैं जीएसएस और निर्मला दी के साथ अपने काम में पूरे दिन से शामिल हो सकता था । बिना किसी और जीवन के किसी और भविष्य के बाद एक जो मेरे मन के किसी अंधेरे कोने में छिपा बैठा हूँ । मैं कल्पना कर रहा था कि निर्मल आती को मेरे इस नए इरादे के बारे में जानकर कितनी खुशी कितनी प्रसन्नता हुई होगी । मैं कल्पना कर रहा था की काजल को भी बहुत खुशियों की लेकिन सबसे ज्यादा मैं कल्पना कर रहा था की मैं खुद अपने आप से अपने वर्तमान से कितना खुश हूँ । मैं अपने मन की बात किसी के साथ बांटना चाहता था लेकिन मेरे आस पास सिर्फ जंगल और उसमें कह रहा था भेजा था जहां पक्षियों के झुंड लौटने लगे थे । मैं वहां बैठा रहा । दिल्ली के उसको धुंधलके में और आकाश कारन बदलते हुए देखता रहा । गुलाबी से बैठ नहीं फिर स्याही के जैसा नहीं मिला खाना और फिर वहाँ से उठकर अपने घर अपने परिवार अपने जीवन क्या चलता था । बाद में मुझे एहसास हुआ कि लगभग उसी समय जब दिल्ली में निरुलाज के बैठ कर दिया । मुझे हमारे भविष्य से संबंधित अपना अंतिम निर्णय सुना रही थी । काजल मकरंद को पत्र लिख रही है । उसने लिखा कि वो इस बात की वास्तव में सराहना करती थी कि मकरंद उसके साथ अपना जीवन बिताना चाहता था और ये भी स्वीकार किया था कि उसने गम्भीरता से इस बारे में सोचा था । बेशक उसने ये नहीं लिखा कि वो मिस्टर कुलकर्णी को उसके भविष्य की चिंता से मुक्त करने के लिए बात महसूस कर रहे नहीं । पहले बाबा के बारे में सोचे बिना भी मकरंद के प्रस्ताव के बारे में गंभीरता से विचार किया था । मैंने उसे हमेशा एक उतार और समझदार व्यक्ति के रूप में देखा है । हालांकि मैं ये भी मानती हूँ कि मैं उसे बहुत अच्छी तरह नहीं जानती हूँ । काजल ने मुझे बताया, हम अपनी कंपनी क्लब के विस्तृत ऊंची छत पालें । डाइनिंग हॉल में बैठे थे । उसी शाम जब मैं जमशेदपुर वापस आया था । फिर हम ने क्या तय किया? तुम्हारे स्वर से तो लग रहा है कि तुम ने उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया । मैंने उसके मुँह से वही जवाब सुनने की आपने उत्सुकता को छुपाते आपने कहा था मैंने अपने बाबा से होगी । मैं सच में भाग्यशाली हूँ की मुझे ऐसे बाबा मिले । किसी से प्यार करना और किसी को समझ था । दो अलग अलग बाते होती हैं और जरूरी नहीं है कि एक बात दूसरी की ओर ले जाए । आखिर में मुझे लगा कि मैं अपने देश से, परिवार से और लोगों से दूर विदेश में रहकर खुश नहीं हूँ । ये बात मकरंद को बताना मुझे ठीक नहीं लगा क्योंकि तब वो शायद मेरे लिए अपना वहाँ का जीवन छोडकर भारत आ जाता और ये मुझे अच्छा नहीं लगता है । मुझे नहीं लगता कि उसके प्रति मेरी भावनाएं इतने बडे त्याग के लायक है । काजल खेती के बाहर गुलमोहर और अमलतास से लदे पेडों की ओर देखते हुए बोली मुझे दिया के बारे में उसे बताने में हिचक हो रही थी । दोस्ती और औपचारिकता के बीच का अनिश्चय हमेशा मेरे मन में रहता था । उस समय तक मैंने दिया के बारे में किसी से बात नहीं की थी लेकिन मुझे लगा की काजल को न बताने का मतलब होगा उससे कोई बात छुपाना । हालांकि उसने मुझसे रिया के बारे में कभी पूछताछ नहीं की थी और हम कभी का बाहर ही उस बारे में बात करते हैं जैसे कि वो हमारे लिए महत्व नहीं सकती है । ये कुछ ऐसा था जैसे मैं प्रिया किसी दूसरे ग्रह से आए थे । उस तरह से अलग जिसमें मैं और काजल रहते थे । लेकिन वह दूसरा ग्रह अब दूर जाकर गायब हो गया था और मैं काजल को ये बात बताने के लिए बाध्यता महसूस कर रहा था । इसलिए क्योंकि मैं जानता था उसे मेरे परिवार हैं और उसने ऐसा प्रकट भी किया था । रिया और मेरा रिश्ता टूट गया है । उसने निर्णय लिया है कि वह भारत नहीं आ सकती । मैंने कहा मैं रिश्ता टूटने का हिसाब किताब मुहावरा प्रयोग नहीं करना चाहता था लेकिन उस पल मुझे कोई और उपयुक्त बा क्या नाम याद नहीं आया । इतना कहते ही मुझे महसूस हुआ हूँ । स्पष्टीकरण नाथपुरा भी था और अनावश्यक नहीं । लेकिन अब वो बाहर आ चुका था और बात खुल चुकी थी । काजल ने चिंतित नजरों से मेरे चेहरे की ओर देखा । शायद तो मेरी भावनाओं को पढने की कोशिश कर रही थी ताकि उसे मेरी मना स्थिति का अंदाजा हो सके । लेकिन मुझे नहीं लगता कि उसे कुछ दिखाई दिया । मेरा चेहरा देखकर उसे राहत के लिए या हैरानी हुई मैं नहीं बता सकता हूँ । हम चुपचाप बैठ कर कंपनी के छिनना वाले कांच के कपडों से अपनी कुनकुनी हो चुकी दुनिया कॉफी पीते रहे हैं तो तो उस बारे में बात करना चाहते हो । कुछ देर बाद काजल ने पूछा कुछ नहीं लग रहा था की कहने के लिए कुछ खास था फिर भी मैं उसे बताने लगा । लेकिन जब मैंने बोलना शुरू किया तो पाया कि मैं निरुलाज की उस सुबह के बारे में बताने के बदले पार्क के उस धुंधलके शाम के बारे में बात कर रहा हूँ । मैं अपने वर्तमान और भविष्य के बारे में बोल रहा था और आपने आगे के जीवन के बारे में भी जैसा मैं उसे देखा था । मुझे पता भी नहीं चला कि कब काजल ने मेरे विचारों की श्रृंखला में बाधा डाले बिना खाने का ऑर्डर भी दे दिया । तो भारत क्या ख्याल है? मैंने कुछ देर बाद उससे पूछा तुमने कुछ कहा नहीं, वो बिना कुछ कहे मुस्कुराती आखिरकार मैंने उसे कुछ कहने का मौका ही कहाँ दिया था । सबसे ज्यादा खुशी निर्मला देखो होगी । वंदना और बाकी गांव वाले भी बहुत खुश होंगे । बाबा को भी खुशी होगी । मुझे विश्वास है तो हमारे घर वाले क्या कहते हैं । उसने अपनी भावनाओं की बात को पर ये रखते हुए मुझसे पूछा, लेकिन शायद मैं जानता था तुम पहली हो, जिसे मैंने ये बात बताई । मैंने जवाब क्या इस बात का कोई खास मतलब था? क्या मैं उसे कोई संकेत देना चाहता था लेकिन मुझे विश्वास है कि मुझे खुश नहीं करोगे भी कुछ होगी । मैंने आगे कहा तो क्या मैं ये मालूम कि वास्तव में तो भारत दिल नहीं होता है? काजल ने पूछा, पर मुझे डर था के तुम टूट जाओगे । मुझे भी ऐसा ही लगता था । तेल मुझे उतना बुरा नहीं लगा जितना मैंने सोचा था । उसे लग रहा है कि मेरे सीने से एक रिपोर्ट उतर गया है और मैं फिर से सांस ले पा रहा हूँ । मैं तो जैसे ताजा स्वच्छ हवा में गहरी सांस लेना ही भूल गया था । मैंने जवाब दिया, ऐसा लग रहा है कि एक आंधी ने आकर आसमान साफ कर दिया है और क्षेत्र में दूर एक रोशनी की किरण नजर आ रही है । मैंने कहा शायद मेरी प्रशस्त मनोदशा मुझे कविता की ओर उन्मुख कर रही थी, लेकिन काजल ने मुझे रोका नहीं । घर कविता कोई बुरी चीज तो है नहीं तो कल एक नहीं कुछ फल सुबह हो गई । चलो हम वादा करते हैं कि कल से हर सुबह नहीं और चमकीली होगी और हम बहादुरी के साथ जीवन का सामना करेंगे । मैं तुम्हारे लिए खुश हूँ और मुझे इस बात की भी खुशी है कि तुम ने ये सब बताते । मेरे साथ बात नहीं । काजल ने सीधे मेरी आंखों में झांकते हुए कहा । उसकी नजरों में ईमानदारी व सच्चाई थी और वो कुछ भी छुपाना नहीं चाहती थी । उसके मन में दोस्ती और औपचारिकता को लेकर कोई अनिश्चय नहीं था । बाहर मिले काले आसपान में लगभग पूरा चार निकल आया था और हम दोनों उस दूर लेकिन सात तुतियां रोशनी को देख पा रहे थे तो छन के चारों ओर फैली हुई थी । आसमान में बादल बिल्कुल नहीं थी और वातावरण में एक मोहन सबकी पूंछ रहा था । रात वास्तव में बहुत खूबसूरत थी लेकिन मुझे शोभा का भी इंतजार था ।

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मैं पहली क्लास छोड़कर रिया से मिलने आई.एम.टी. जाना चाहता था। लेकिन इनसान जो करना चाहता है और जो करने की उससे अपेक्षा की जाती है, उसमें हमेशा अंतर होता है। मैंने सोचा कि मैं कक्षाओं के बीच मिलनेवाले दस-दस मिनट के अंतरालों में से एक में अपनी किस्मत आजमाऊँगा और उसके कॉलेज जाने की कोशिश करूँगा, सुनिए आखिर क्या है पूरी कहानी| writer: पार्थ सारथी सेन शर्मा Voiceover Artist : Shreekant Sinha Author : Parth sarthi Sen Sharma
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