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फ़लक तलक - Part 15

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बाइक पर सवार एक आदमी हेलमेट से अपना चेहरा छुपाए जंगल में शरीर के टुकड़े फेंकते जा रहा है। दूर खड़े काले लिबास में 12 लोग यह सब देख रहे हैं लेकिन कुछ कर नहीं रहे हैं। कौन हैं ये बारह काले लिबासी? काले लिबासी मरने का रहस्‍य ढूंढ रहे हैं, ऐसा क्‍यों? दूसरी ओर एक आदमी अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखाने आया था। पुलिस और काले लिबासी आपस में टकराते हैं, तो अब क्‍या होगा? रहस्‍य और हैरतअंगेज घटनाओं से भरी इस कहानी को सुनें बिना आप नहीं रह पाएंगे।
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तो बेडरूम का दरवाजा खोलकर साक्षी मेरा हाथ पकडे दाखिल हुए । खुद बैठ पर जाकर बैठ गई । मैं जैसे ही दरवाजा बंद करने के लिए मुडा सामने फल थी । आंखों में गुस्सा और ढेरों सवाल शायद वो ये पूछना चाह रही थी कि अंदर क्या होने वाला है? मैं उसे जवाब क्या देता हूँ । मैं खुद अनजान था । दरवाजा बंद करके मुझे रोक पाओगे राइटर साहब, उसके बोलने के बाद भी मैंने दरवाजा बंद कर दिया । पालता तो हैरान क्योंकि फलक अंदर थी । बिल्कुल मेरे सामने क्यों नजर नहीं मिल पा रही । आप गलत के सवालों का जवाब में देना ही नहीं चाहता था । उसकी इन हरकतों से मुझे भी अब गुस्सा आ रहा था । मेरी कहानी होकर मुझे विश्वास ही नहीं उल्टे बदतमीजी कर रही थी । अरे आओ यार, जल्दी तुमसे बातें करने का तो मैं छोडने का मन कर रहा है । साक्षी ने कहा चुडैल मेरा मन पता है क्या कर रहा है? मेरा मन कर रहा है कि अभी तरह गला पकडे और दबा दूँगी । ऐसा दबाव की तेरी आवाज बंद हो जाए । इस साली पलक ने गुस्से में साक्षी को देखते हुए कहा था, बडी तेज लडकी थी वो बैठ की तरह मैं संथा पालक की भाषा और उसकी गाली से मैं साक्षी के बगल में जा बैठा था । तुम्हें पता है जब से तुम को मिली हो ना बस तुम्हारे बारे में ही सोच की । साक्षी ने मेरा हाथ थामकर का इस से कह दो तुम्हारा बार बार हाथ ना पकडे नहीं तो मैं इसका हाथ तोड दूंगी । फलक सामने ही खडी थी, उसे तो सिर्फ मैं ही देख पा रहा था तो बोला साक्षी क्या रियेक्ट करती? पालक के कहते ही मैंने खुद साक्षी के हाथ से अपना हाथ उठा लिया । मैंने तुम्हारे लिए एक शर्ट मॉल से खरीद कर लाया है । सोचा था कि जब तो मेरे घर फिर लंच पता होगी तब तो मैं करूंगी । साक्षी ने मेरे चेहरे को हाथों में ले लिया । बिना तो मैं टच की ये तुम से बात नहीं कर सकती क्या फलक फिरसे गुलाई साक्षी मेरी आंखों में अपनी लस्ट भरी निगाहों से देख रही थी तुम मैं और ये तन्हाई कितना अच्छा है ना? इस से कह दो ही जहाँ गलत भी है और पालक को ये सब पसंद नहीं आ रहा । तुम परेशान दिख रहे हो । क्या हुआ पांच करोड और बात न करने का मन हो तो कुछ भी करो साक्षी नहीं । फिर से मेरा हाथ पकडा । बहुत एडवांस है लडकी राइटर साहब इसे इस कमरे से निकालो । फलत बेचैन थी । फलक को डर था कि कहीं साक्षी वो ना कर गुजरे जो साक्षी के मन में चल रहा है तो उन को गले लगाने का दिल कर रहा है । साक्षी गले से लगाते हुए हो मैं और साक्षी गले लगे हुए थे । पालक मेरे सामने मेरी आंखों में आंखें डाले हुए गुस्से में मर्द नॉर्मल इंसान हो या कोई राइटर, अपनी औकात दिखाई देता है । बडा मजा रहा है, बिहार से इनकार है और ये सब सही है । तेजी से वो दूसरी तरफ फलक के सामने क्या पागल लडकी तो शर्म नहीं आ रही है । सब करते हुए दूसरी मुलाकात नहीं चिपक रहे । छिपकली साक्षी पालक को कहाँ सुन पाने वाली थी । जितनी असहज फलक ये सब देखकर हो रही थी, उससे कहीं ज्यादा असहज मैं था । साक्षी ने अचानक से मुझे खुद से अलग किया और तेजी से उसने मेरा सर पकडा । दोनों हाथों से मेरा सर पकडकर मुझे किस करने के लिए अपनी ओर खींचता । ये ये क्या कर रही है? तो पलक ने तेजी से चला रहे हैं लेकिन तब तक साक्षी के लिप्स मेरे लिप्स को लॉक कर चुके हैं । वो मुझे स्मूच कर रही थी । खुद मेरी आंखें भी फलक की तरह बडी हो चुकी थी । फल तो हैरान थी । मेरी भी हैरत का ठिकाना नहीं था । हमें परेशान था और उस परेशानी में साक्षी की नियत पर ध्यान नहीं दे सकता हूँ । नतीजा मैं उसकी बाहों में था । वो पूरी तरह लास्ट में थे । लेकिन मैं मैं ये सब बिलकुल नहीं चाहता हूँ । मैंने जबरन उसको खुद से अलग किया । क्या हुआ? साक्षी ने पूछा मुझे सब अच्छा नहीं लगता है । मेरा मतलब टोमॅटो फलक चौकी हुई थी एक पल के लिए । मेरा साक्षी को खुद से तेजी से अलग करना अच्छा लगता है । ओवर्ट अगर मैं उसकी गर्लफ्रेंड हो तो क्या मैं उसकी प्रॉपर्टी हो गई? कमाल लडकी नहीं, अजीब सा तर्क दे रही थी । गर्लफ्रेंड जिसकी है तो उसके साथ वो मारना मेरे बॉयफ्रेंड में मुख्य डाल रही है । इसको पूछो कुशल । इसने सुबह ब्रश भी किया था कि नहीं दारू पी थी । बेवली फलक गुस्से में बड बड कर रही थी । वह जस्ट साक्षी के पीछे ही खडी थी मेरे दिल में जो आएगा वो मैं करूंगी । कुशल तो मुझे बहुत अच्छे लगते हो प्लीज ऍम वहाँ पहला कर साक्षी ने फिर से मुझे अपनी बाहों में आने का इशारा क्या टाइम निकाल के ये मर क्यों नहीं जाती? फलक पर क्या गुजर रही थी इसका अंदाजा उसके गुस्से में निकलते संवाद से लगाया जा सकता था । सारी साक्षी प्लीज मैं ये सब नहीं कर सकता हूँ । मैं अरुण सर को चीट नहीं कर सकता । ये चीज नहीं है यार और उसे कैसे पता चलेगा कि हम ने ये किया । हम दोनों की सिवा कोई नहीं है । यहाँ ऐसा तुम्हें लगता है । ये तुम सोचती हूँ कि हम कोई नहीं है । बदहवासी में मैंने बोल दिया सकपका भी । साक्षी फलत के चेहरे पर मुस्कान आ गई । अब उठाया पहाड के नीचे । फलक खुश होते हुए बोली साक्षी पूरे कमरे में नजर दौडा नहीं नहीं उसे मेरे सिवा कोई नहीं दिख रहा था । लेकिन वह हर तरफ देख कर चेक और कन्फर्म करना चाहती थी । कोई कैमरा तो नहीं है ना? कमरे में नहीं, कोई कैमरा नहीं है । फिर कौन अलग है और वो तुम्हारे पीछे खडी साक्षी चौकी और डर भी गई । तेजी से वह पलटी लेकिन उससे पालक देखने वाली कहा था ऍम यहाँ तो कोई नहीं मेरी कहानी फलक । उस दिन मैंने कॉफी शॉप में जिस कहानी का जिक्र किया था जो पालक साक्षी हैरान और पूरी तरह कन्फ्यूज थी, उसका पूरा लास्ट वाला थॉट उड गया था क्योंकि उसके होश उड गए । तुम क्या बोल रहे हो? मुझे समझ नहीं आ रहा । दिल तो कर रहा है, तुझे दर्शन दे ही दूंगा । लेकिन तरीका नहीं पता कि कुशल के अलावा दूसरों के सामने कैसे हो । फलक गुस्से में अपने दोनों हाथ कमर पर रखकर खडी थी । अब मैं रह रहकर फलक को देखने भी लगा था । मेरी नजर जब भी फलक की तरफ जाती, साक्षी भी एक बार उस तरफ जरूर देखती हैं । लेकिन उसे कोई दिख नहीं रहा था । तुम्हारा मोबाइल चक्करों कॉलेज में जाओ और देखो कि मैंने तुम्हारे नंबर पर कितनी दफा कॉल किया । साक्षी ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और कॉल हिस्ट्री चेक करने लगी । तीन बार साक्षी ने कहा और तुम से बात कितनी बार हुई? एक बार कॉल रिसीव है या मिस कॉल है । तीनों को कॉल रिसीव किया हुआ है । जब तुम से एक बार बात हुई तो दो बार किससे बात हुई? अलग तुम्हारे घर पर गई थी । अब साक्षी कंफ्यूज नहीं बल्कि परेशान हो गई थी । जब अपनी कहानियों में से कहानी फलक को मैंने गायब पाया तो पता चला कि फलक तुम्हारे फ्लैट पर गई । कौन लगाया तो पहले और दूसरे कॉल में फलक नहीं कॉल किया । फल थोडी खुश थी क्योंकि राष्ट्रीय ला रुके थे और अब बात फलक की ही हो रही थी । फलक बैड पर जस्ट मेरे बगल में बैठी थी । लेकिन ये मुमकिन कैसे कोई कहानी है? सब कैसे कर सकती हैं कि सब क्या है? क्यों है? मुझे पता नहीं । लेकिन ये सब मेरे साथ हो रहा है । मेरी कहानियां इंसानी शक्ल में मेरे साथ रहती हैं । वो मुझसे और मैं उनसे बात करता हूँ । मैं कभी अकेला नहीं होता । इस वक्त मेरे जस्ट बगल में बैठे हैं । तुम जब से आई हो वो हम दोनों के साथ हॉल में भी मेरी दूसरी कहानियों ने तो नहीं देखा । और जब से हम इस कमरे में हैं, पलक तब से इसी कमरे में है । उसने दो तीन बार तो गाली भी दिए हैं । देखो प्लीज कुशल मुझे डराओ मत । मुझे पता है तो मैं एक अच्छे राइटर हो । लेकिन इस तरह हॉरर बातें मत करो । वो कोई आत्मा, भूत प्रेत नहीं, वो मेरी कहानियाँ हैं । मुझे यकीन नहीं हो रहा । अभी तुमने मोबाइल कहाँ रखा है? जरा चेक करो । साक्षी ने फिर से अपना मोबाइल निकालना चाहिए । लेकिन अब मोबाइल पहले वाले स्थान पर नहीं था । मोबाइल बैठ पर नहीं था । कहाँ गया? उधर उस टेबल पर फलक अब उस टेबल के पास खडी थी और साक्षी का मोबाइल बैठ के बगल में रखे उस टेबल पर था । साक्षी ने जैसे ही देखा और तेज लक्की मोबाइल लेते हुए साक्षी डरकर खडी हो गई । फल अपने लिया था मोबाइल ताकि तुम्हें विश्वास हो सके । साक्षी डर के मारे यहाँ वहाँ देखने लगी थी । देखो डरो मत, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था की तो मैं हूँ । मैं इसी जरूरी बात को तुमसे शहर करना चाहता था । फलक मुझसे प्यार करती है । फल अपने इमोशनल लोग मुझे दिया मेरी और फलक की नजर टकराई । बहुत प्यार करती हो तुम से । फलक ने कहा मैं घर जाना चाहती हूँ और प्लीज फलक से कह देना वो तुम्हारे साथ रहे । मेरे घर ना साक्षी तेज कदमों से बेड रूम से बाहर निकल गई । मेरी सांस में सांस आई । फलक मुस्कुरा रही थी । साक्षी जब हॉल में पहुंची तो उसने एक बार हॉल में भी यहाँ वहाँ देखा । हवा में वो मेरी बाकी कहानियों को देखने की कोशिश कर रहे हैं । दरवाजा खोलकर वो तेजी से बाहर चली गई । उसके डर को हम सब महसूस कर रहे थे । तरुण के फ्लैट में आज दूसरी रात थी । दिन में चार एपिसोड लिखकर चैनल को मैंने मेल कर दिए थे । एपिसोड लिखने में मुझे टाइम नहीं जाता क्योंकि आज भी मैं चाहता तो अपनी कहानियों से ही एपिसोड लिखवा लेता क्योंकि सुबह से तरुण बाहर ही था । वो अब तक लौटा नहीं था । वो छूट पडता था । दो एपिसोड मैंने लिखे और दो मेरी कहानियाँ हैं । राइटिंग वक्त की एक टीम से बन गई थी और कमाल ये था कि मेरी स्टोरी ही मेरी टीम थी । दिन की थकान नहीं । मुझे अच्छी नींद पक्षी थी । मैं गहरी नींद में सोया हुआ था और तभी मुझे कुछ महसूस हुआ । पहले तो मुझे लगा कि ये कोई सपना है । मैंने कुछ देर तक कोई रिएक्ट नहीं किया । फलक मेरे बगल में लेटी हुई थी । धीरे धीरे उसके हाथ मेरे बालों को सहलाने लगे थे और फिर उसकी उंगलियां मेरे माथे से मेरे होटों तक सर रखते हुए आई । मेरे होठों को अपनी उंगलियों से छूकर मुस्कुरा रही थी और फिर फल अपने कुछ सोचा उसकी आंखों में चमक सी आ गई और वो मेरे चेहरे की तरह अपना चेहरा लेकर पडी । बिलकुल पास ही काम पासा देगा । उसके होट मेरे होठों तक आ गए । बस सास आने जाने भर की दूरी पालक के दिल की धडकन तेज थी । दिन हाँ उसके पास पता नहीं अचानक से उसने अपने वोट मेरे होठों पर रखती है । आंखें बंद थी और मेरे डिप्स मेरी कहानी फलक के लिप्स में थे । मुझे सोच कर रही थी । अभी दस सेकंड भी नहीं कुछ रहे थे कि मैंने आंखें खोल दिया । मेरी नींद टूटी और मैंने देखा ये सपना नहीं हकीकत था, ये क्या कर रही थी तो वही जो साक्षी कर रही थी । तुम लोग इसे ही प्यार करते हो ना? प्यार दोनों तरफ जरूरी है । पलक मुझे क्या कमी है? तुम इंसान नहीं हो, एक कहानी हो । हम जिस से प्यार करते हैं, उससे आगे चलकर शादी करते हैं । घर बताते हैं लाइफ सेट करते हैं । तुम तो खानी हो कल किसी प्रोड्यूसर ने तुम्हें सिलेक्ट कर लिया तो फिर फिर तुम किसी पर्दे पर नजर होगी किसी एक्ट्रेस की शक्ल में । शायद फिर तो मुझे दिखाई भी ना तो मुझे फिल्म बन नहीं मत देना । हमेशा अपने साथ रखना तो तुम अब स्वार्थी और खुदगर्ज बनना भी सीख गई हूँ । आज जो ये लिपलॉक तुमने सीखा साक्षी को देखकर सीखाना फलक रोने लगी थी । वह सर झुकाए खडी थी मेरी कहानी का मैंने दिल दुखाया था होके देखो रोना बंद करो । मैंने कहा था कि मुझे समय दो । मैं इनकार नहीं कर रहा लेकिन प्लीज सोचने का मौका दो । कुछ दिन फल अपने रोना बंद किया । मुस्कुराकर अपने आंसू पहुंचे । अजीब कहानी थी । वो मेरी हस्ती मुस्कुराती और कभी रोती । सोच कर ही अजीब लगता कि उसने गाली भी सीख ली थी । उसने आज दिन में साक्षी को चुडैल कहा था । सोच कर मुझे हंसी आ गई थी । हसते हुए मैं फिर से बैठ कर ले गया । मोहम्मद करना वो जो अभी कर रही थी ना में फल अपने सिर हिलाकर जवाब दिया और मैं चादर तानकर हो गया । मेरे बगल में साबुन, समाज और जंगल सो रहे थे । आकाश, गुडिया, कुबडी और बाकी स्टोरीज हॉल में यहाँ वहाँ सोई हुई थी । कमाल है ना मेरी कहानियां सोती भी थी । उस दिन संडे था । मैं फिल्म सिटी से शूट से लौट रहा था । फल आपने कहा था हम पैदल ही चलते हैं । कुछ बात भी हो जाएगी और सफर भी कट जाएगा । पलक ने बताया था कि उसकी आकाश बात हो गई और अब वह फलक को भूल जाएगा । दो कहानियों ने आपस में मिलकर अपने अपने प्यार के लिए डील कर ली थी । कितना बडा दिल था आकाश का जो फलक के कहने पर फलक को भूल जाने का वादा कर चुका हूँ । बिल्कुल मेरी तरह था का दिशा के कहने पर मैंने उसे भूल जाने का वादा किया था । और ये बात थी आज भी वो मेरे सीने में थी और जब भी याद करता दिल बनके धडकने लगती थी । हम सब पैदल ही चल रहे हैं । तरुण ने शूट पर सीन करेक्शन के लिए भेजा था । शाम को मुझे पांच बजे ही छोड दिया गया । रास्ते में कच्ची सडक पडती थी । आजु बाजु जंगल था । उस कच्ची सडक पर काफी सन्नाटा रहता था और इस सन्नाटे में तेरह लोग चल रहे थे । एक मैं और दूसरे मेरी बारह कहानियाँ ये मेरी गिनती थी । जबकि सच यह था कि एक और शख्स था जो मेरे पीछे थोडी दूर मेरा पीछा करता हुआ आ रहा था । ये पुलिस वाला था, कोई हमारे पीछे आ रहा है । फलस्तीनी सावधान क्या अब सडक है हमारी तरह वो भी चल रहा है । फलक सही कह रही है शायद वो पीछा कर रहा है । आकाश ने कहा मैं चौंक गया मेरी स्टोरीज जासूसी स्टाइल में बातें कर रही है । मैंने पलट कर देखा । देखा वो एक पुलिस वाला था । मुंबई पुलिस की वर्दी में मुझे ही घूमते हुए आधार मेरे पलटते ही वह यहाँ वहाँ देखने लगा । मैं गया, हम रुके क्या हैं हमें जल्दी चलना चाहिए । बडी आने का बात करते हैं उसे लेकिन उससे बात क्या करेंगे? समाज ने कहा जो वो बात करना चाहता है लेकिन वो भी रुक गया है । जंगल ने कहा क्या हुआ सर, पीछा कर रहे हो क्या? मैंने हिम्मत करके ऊंचे स्वर में पूछ लिया और जैसे ही मैंने पूछा उस पुलिस वाले को जाने क्या हुआ? उसने अपनी गन निकाल नहीं और मेरी ओर तानते हुए तेज कदमों से बढने लगा । मैं हैरान मानव किसी ने जमीन खींचती हूँ मेरे पैरों से आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया था जो एक पुलिस वाला, मेरी जान का दुश्मन बन के मेरी और बढ रहा है । उसके हाथ में क्या है? फलक ने पूछा बंदूक है मैं एक बार चला चुका हूँ । साबुन नहीं जवाब दिया इससे क्या होता है? बुढिया ने पूछा हूँ इससे कोई भी मार सकता है, ये पुलिस वाला भी मार सकता है । मैंने को मारा है फिर से साबुन ने बुढिया की बात का जवाब दिया वाह! पुलिस वाला निरंतर मेरी तरफ पड रहा था । मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ? कौन है ये और मुझ पर बंदूक क्यों डाल रखा है? क्या वो मुझे मार देना चाहता है या बस घर आने के लिए वो ऐसा कर रहा है? सवाल दिमाग में आ रहे थे और पैर मेरे काम रहे हैं । हमको भागना चाहिए । साबुन ने का साबुन सही कह रहा है । अगर वह एकदम पास आया तो भागना भी मुश्किल होगा । देशद्रोही का नायक आकाश बोल पडा । अब वह पुलिस वाला मुझ से बस दस कदम की दूरी पर था । मैंने उसकी शर्ट पर नहीं मैच देखा । टू स्टार का इंस्पेक्टर था । नाम था पगाडे ।

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बाइक पर सवार एक आदमी हेलमेट से अपना चेहरा छुपाए जंगल में शरीर के टुकड़े फेंकते जा रहा है। दूर खड़े काले लिबास में 12 लोग यह सब देख रहे हैं लेकिन कुछ कर नहीं रहे हैं। कौन हैं ये बारह काले लिबासी? काले लिबासी मरने का रहस्‍य ढूंढ रहे हैं, ऐसा क्‍यों? दूसरी ओर एक आदमी अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखाने आया था। पुलिस और काले लिबासी आपस में टकराते हैं, तो अब क्‍या होगा? रहस्‍य और हैरतअंगेज घटनाओं से भरी इस कहानी को सुनें बिना आप नहीं रह पाएंगे।
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