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Ep14 - Chunav Kshetre

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समाज में व्याप्त हर क्षेत्र के बारे में ज्योतिंद्र नाथ प्रसाद के व्यगात्मक विचार... Author : ज्योतिंद्र प्रसाद Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma
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चुनाव क्षेत्र ज्योतिंद्रनाथ प्रसाद ने कहा, जब घरवाली ने जो तीन दिन से पूछा कि क्या वे मास्टर जी की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहले सुबह वे या तो उन्हें दरवाजे का रास्ता दिखा देंगे या उनकी अच्छी खबर लेंगे । यहाँ आदमी रात बार उनसे जब याता बतियाता रहा है कहाँ की क्षेत्र में सभी राजपूतों को पृथ्वीराज चौहान की सौगंध दिलाकर एक करना है । नहीं तो उनकी बीवियों से कहा जाएगा कि आप सभी मैं चली जाये । मगर आपके जहन में चुनाव लडने का ख्याल कैसे आया? जो तीन दिन में पूछा भाई, पिछले बैसाख में हम चौंसठ के हो गए । कहते हैं साठा सौ पाठा सारी जिंदगी मास्टरी करते करते हुई थी और एमएलए तक नहीं बना । इसलिए इस विधानसभा चुनाव में अंतर प्रेरणा कह रही है कि अब न चुप चौहान आपको विश्वास है अब जी जाएंगे ज्योतिंद्र पूछा मैं जीतने के लिए नहीं खडा हो रहा । मास्टर जी ने स्पष्ट किया बैठने के लिए खडा हो रहा हूँ बास आप नामांकन में मेरा प्रस्ताव करते हैं क्यों कि आपको कोई प्रस्तावक नहीं मिल रहा है । ऐसी बात नहीं है । आप के समर्थन से मेरी स्थिति मजबूत हो जाएगी । मास्टर जी ने दयनीय स्वर में कहा मगर जिस तरह का आपका स्वास्थ्य है उससे तो आप चुनाव रुकवा दीजिए गा । ज्योतिंद्र में कहा इसपर मास्टर जी ने खींसे निपोरते आप किसी पार्टी से क्यों नहीं खडे हो रहे हो? ज्योतिंद्र ने प्रश्न किया ऑन मुझे टिकट देगा । आप जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की तरफ से खडे हो जाए । यहाँ पार्टी क्रांतिकारी है । जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधित है । नामांकन भरने के लिए उसके समर्थन की जरूरत नहीं । ज्योतिंद्र सुझाव दिया मास्टरजी हो कहकर उत्साह में खडे हो गए । ज्योतीन्द्र वृतान्त दिया । अगले दिन मजिस्ट्रेट के दफ्तर में सनसनी मच गई । कहाँ जेकेएलएफ और कहाँ मास्टर जी कहाँ उथल पुथल मचाने वाली पार्टी और कहाँ मरियल मास्टर जी कोई तालमेल नहीं था । बहुत समझाने बुझाने के बाद मास्टर जी निर्दलीय हो गए । चालीस पचास आदमी जुड गए थे उनके पक्ष में नारे लगाने के लिए । मास्टर जी ने सबको राम भरोसे हिंदू होटल में चाय बनी कराई । बिल के भुगतान के बाद जेब में हाथ डालकर उन्होंने घोषणा की कि उनके पास महज पांच रुपए पचास पैसे बचे हैं । वे चुनाव कैसे लडेंगे? जिन लोगों ने उनके चाहे समूह से डकारे थे, वे चंदा करने का वायदा करके खिसक गए । एक हफ्ते बाद उनसे नुक्कड भेंट हो गई । ज्योतिंद्र में पूछा क्या प्रोग्रेस है? मास्टर जी ने बडी मायूसी से कहा नेता जी अब तक मुझसे मिलने नहीं आए क्यो मुझसे यहाँ अनुरोध करने ये मैं बैठ जाऊँ । ज्योतीन्द्र में कहा वो तो आपको ढूंढ रहे हैं कि आप कुछ ले देकर खडे रही है ।

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समाज में व्याप्त हर क्षेत्र के बारे में ज्योतिंद्र नाथ प्रसाद के व्यगात्मक विचार... Author : ज्योतिंद्र प्रसाद Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma
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