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भाग - 03

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भाग - 03 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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राजकुमार सुलतान को अजीबो-गरीब सपने आते हैं। जिससे सुलतान परेशान है। साये की तरह हरदम साथ रहनेवाला सुलतान का दोस्‍त सुलेमान, वफ़ादार और हवा से भी तेज घोड़ा ‘फ़तेह’, नटखट और जादुई कारनामों वाली ‘भूरी’ बिल्‍ली सुलतान के साथ हमेशा रहते हैं। सात रहस्यमयी चेहरे और उन चेहरों की तलाश में एक रोमांचक सफर पर निकले सुलतान और सुलेमान ने कभी नहीं सोचा था कि उनका सामना होगा जादुई जंगल, जिन्न और नाग मानवों से। क्या वे अपनी मंज़िल को ढूंढकर वापस अपने देश लौट पाएंगे? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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हूँ । ऍम हूँ हमारा नाम की लू और तीन हैं । आज तुम्हारे शहर के कारण ही हम अपना असली रूप वापस आ चुके बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता कर सकते हैं? उन्नीस पीले रंग वाला बोला भूरी बिल्ली चिल्लाई ऍम यह सुन कर खेलो और पीलो हंस पडे और धीरे धीरे अपना आकाश खा जाते हुए आदमकद हो गए । खेलूं जो लाल रंग का दिखाई दे रहा था उसको रहते हुए बोला बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता करें तो क्या तुम सुल्तान की हमशक्ल नहीं हो सुनी? मानने हैरानी से पूछा क्या हम तो मैं तुम्हारे मित्र की शक्ल की नजर आते हैं । हम तो खुद आपस में भी जुडवा नहीं । पीलू ने खेलों की तरफ देख कर कहा । सुल्तान ने मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखा और कहा था बिलकुल मेरी शक्ल सूरत की नहीं हो मित्र । बात ये हैं कि यहाँ से कोई रास्ता पाताललोक की ओर जाता है । क्या तुम हमें वहाँ तक पहुंचा सकती हूँ? पाकिस्तान लोग भरना तुम पांच लोग क्यों जाना चाहती हूँ? पीलू ने हैरानी से पूछा मैं फॅमिली तो दोनों के हो के हम तुम्हारी फॅमिली है तो फॅमिली हुआ पूरी नहीं चेते हुएकहा हाॅल, बात ये है कि हम मेरी से देखने वाले सात चेहरों की तलाश में निकले हैं । किसी तरह की मुसीबत में हैं और बीवी सहायता चाहते हैं । हम बहुत दूर से आए हैं और जब तक हम मेरी जैसी दूसरी शक्ल वाले आदमी को ढूंढ कर उसकी सहायता नहीं करते तब तक तब हमारी साथ हूँ । हमें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुमने इरादों के साथ इतनी दूर हूँ और किसी की मदद के लिए पाकिस्तान लोग जाना चाहती हूँ । हमें इस बात की खुशी हुई कि संसार में अब तक आप कैसे लोग मौजूद हैं जो दूसरों की मदद के लिए इतनी दूर यात्रा करके आते हैं । शुक्रिया दो उन की मदद के लिए तुम से हमारी इतनी मदद करो कि हमें पाकिस्तान लोगों तक पहुंचा तो इतनी सी बात हम चलते हैं ना साथ थी तुम हमारे कंधी पर मैं अच्छा हूँ ऍम भूरी बिल्ली हमेशा की तरह बोले बिना ना रहे सकी तीलू और खेल हूँ उस की ये बात सुनकर जोर से हंस पर फतेह तब हमारा यही इंतजार करना हम जल्दी लौट कर आएंगे के कल सुल्तान ने फतह को उसी पेड के नीचे रुकने का इशारा किया । पर रहने से रहना का होना जैसी वह सुल्तान की बात समझ गया था । पीलो खेलों ने अपना आकार बढा लिया । सुल्तान पीलू के और सुलेमान खेलों की कंधे पर बैठ क्या दूरी सुलेमानकी? कंधी बच्ची पत्थर सभी जंगल से और चलेंगे जंगल की गहराई में जहां से पाताल जाने का रास्ता अचानक खेलो बोला सब लोग अपनी आंखे बंद कर लो तो बार बार लगेगा कि कोई तुम्हें आंखे खोलने को कह रहा है । ऍम पर बिल्कुल भी ध्यान मत देना । अपनी आंख ही तब तक मत खोलना जब तक हमारा हवा में छोडना बंद हो जाएगा पर ना सब के सब ऊपर आसमान में चले जाओ की फिर वहां पर धरती पर कभी नहीं लौट सकोगे । फॅमिली नहीं हूँ आपके पिता होगा ना । उन लोगों के बीच में पूरी बडी याद आ सी बोली हूँ । हाँ हाँ क्यों नहीं हर जब आपन करोड जाएंगे ना तब तुम भी उनके साथ जोडकर किसी समंदर में ले जाना, हर जिंदगी भर तैसी रहना । पीलू हसते हुए बोला कि सुनकर दूरी टूट गई और उसने सुलेमान को कसकर पकड लिया । सुल्तानी देखकर मुस्कुराए और इतनी सबके साथ अपनी आंखे बंद कर दिया । उन्हें ऐसा लग रहा था जैसी भी लोग नीचे की ओर बहुत तेजी से बढते जा रहे हैं । सुल्तान और सुलेमान को ऐसा लग रहा था जैसे बहुत सारे हाथ उन्हें उडनी से रोकने की कोशिश कर रही थी और उनके शरीर से टकराकर आर पांच निकाले जा रही थी । पूरी को तो गुदगुदी भी हो रही थी पर इस बार वही बिल्कुल चुप की समंदर में रहने वाली पांच उसकी दिमाग से अभी पूरी तरह से उतरी नहीं थी । तब ही सुल्तान के कान में पीलू की आवासा आंखें खोलो । सुल्तान आंखे खोलने ही वाला था कि पीलू की आवाज दुबारा कोई भी यहाँ के मत खोलना । ये आवाजें तुम्हें हमारी भी लग सकती हैं । ये सुनकर सुल्तान सावधान हो गया और उसने चोरसिया की भी चाहिए । तभी अचानक उन लोगों को लगता कि उनके पैर मुलायम खास पर पर ठंडी हवा की इच्छा हूँ कि उन्हें चारों ओर से छू रहे हैं । अब जैसे एक नई ताजगी और स्फूर्ति से भरो थे तभी खेलू तो हम पाता लोग पहुंच गई । अब तुम सब अपनी आंखें खोल सकते हो, दूरी नहीं सुन कर अपनी आंखें और जोर से बंद कर ली और कहाँ पता ऍम बोल रही हूँ और मुझे ऍम ये सुनकर पीलो जोरों से हंसा और बोला देखो अब हमारा नीचे की तरफ उतरना बंद हो गया है क्योंकि इस समय हम पाताललोक दिखा रहे हैं । ये सुनकर अपनी अपनी आंखें खोली । सामने का दृश्य देखते हैं जिससे सबको अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ । सामने एक में ही था नहीं हुई का बना हुआ था अंधावा के साथ बडी ही आराम से हिंसा ऍफ है जा रहा था महल मेहरन विरंगे नगीने जडे हुए थे जिस चमकीली धूम के कारण हम चक मैं कह रही थी विमान थोडा रूई की इस महल में लोग क्या सहारा समय हिलते डुलते नहीं होंगे । हिलाना तो छोडू क्या ये मैं टूट नहीं जाता होगा । आखिर हुई कितनी लोगों का बहुत संभाल सकती हैं हरी रुई के इसमें हेल्थ से तो हल्की हल्की नीली रोशनी भी निकल रही है । सुल्तान में हैरान होते हुए कहा हाँ मुझे लगता है जैसे किसी का ऍम तो उठकर गिर गया है और जैसे ही देखेंगे हनीशा की तरह भूरी खुश होते हुए बोल । उसके बाद सुनकर पीलू और किलों ने ऐसा जोर से कहाँ काला जाए कि वहाँ खडी पेड भी हल्के से कम थी । सुलेमान इधर उधर गौर से देखते हुए पूरा करिए जी पार्टी ना हमें तो कोई इंसान या जानवर यहाँ पर दिखाई नहीं दे रहा हूँ । चलो अंदर चल कर देखती है । संता ने जवाब दिया जैसी जैसी भी लोग महल की पास जा रहे थे उन्हें ठंड लग रही थी । आपने हेल के पास पहुंचते ही नहीं लगा कि ठंड के मारे सब अगर जाएंगे सुल्तान थोडा भरी तो बस काम है दूरी तुरंत सुलेमानकी कंधे से को दी मेरी तो दूध का ही नहीं है । मैं क्या झटकर देखो था क्या जाओ तुम्हारी सुबह नगर हमेशा के लिए महल से चिपक जाये तो हम ले लेंगे और तो गूंगी होगी तो हम सबको मजा ही आ जाएगा । सुल्तान मुस्कुराते हुए बोला तो फॅमिली नहीं हूँ । ऍम बोरी ने घबराते हुए कहा । तीलू बुरी से बोला अब अगर तुम्हारी बागपत बंद हो गई हो तो क्या हम अंदर चले ऍम ऍम बडी गुस्से से बोल और पूछ कर वहाँ पर सुलीमान की कंधे पर चढ के आस पास में हैं । इसके सिवा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था । तीनों ने धीमी कदमों से आगे बढते हुए महल के अंदर प्रवेश किया । जब भी लोग अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर अचंभित रहेंगे हूँ करके सामने एक बहुत बडा सिंहासन था जिसपर सुलतान का हमशक्ल बैठक उसकी सर पर बर्फ के नुकीले तीनों का मुकुट था जिससे उसकी नाथ ही पर सिंह क्यों हो गए और उन से खून टपक रहा था तो सभी को यह देखकर जैसे साठ मार्क सुलीमान हकलाता हुआ फॅमिली सामने बैठी हूँ । सुल्तान सुलीमान की बातों को अनसुना करते हुए आगे बढा और अचानक ही उसे लगा कि वह हवा में कह रहा है और देखते ही देखते वह तो बारी साहब हवा में उन्हें लगा ये देखकर जैसे ही सुलीमान आगे बढा सुल्तान जोर से चिल्लाया आगे कदम मत बनाना क्या तुम मेरी तरह हवा में उडने कमाना है । उसकी चिल्लाने की आवाज सुनकर सुल्तान के हमशक्ल ने बडी ही मुश्किल से अपनी करतन उठाई जो पर तीनों की भाग के कारण नीचे चुकी जा रही थी । सुल्तान को देखकर उसकी तरफ भरे चेहरे पर एक सी की मुस्काना थे और वह बोला हूॅं जो अभी भी हवा में उड रहा था । अश्चर्यचकित रह गया आंदोलन क्या तुम जानती थी कि मैं आऊंगा । आप ना चाहते हुए भी सुल्तान बार बार दीवार में लड रहा था जिससे उसके पैरों में भी इन्तहां दर्द होने लगा । नीचे खडे सुलेमान दूरी और पीलू खेलू सुल्तान की मदद चाहकर भी जैसी नहीं कर पा रही थी । नहीं ऐसा महसूस हो रहा था जैसी ठंड सी चल चुकी संस्थान अपने आपको उत्पादनों से छुडाने की काफी कोशिश कर रहा था आपने मैं तो नहीं बचाने आया था लेकिन लेकिन अब खुद में यहाँ पर क्या हूँ? तभी सुलतान का हमशक्ल राजा बोला हूॅं हो हो हो हो । सुल्तान को यह सुनते ही फतेह किया था होता मेरी मेरी सुलेमान, मुझे तुम्हारी जादुई वस्तुओं की आवश्यकता होगी । क्या तुम किसी तरह पाते तो जंगल से यहाँ पाता लोग नहीं ला सकते हो तुम चिंता मत करो मैंने मामा जान द्वारा दिया हुआ जादुई मोदी पहले ही पता की गले में बांध दिया है । बस तो मुझे आवाज दे दो । मैं भूल आपसे पाता लोग तक भी पहुंच जाएगा । सुलेमान ने सुल्तान की तरफ देख कर कहा उसने जोर से आवाज लगाई मेरे दो पाते हैं मुझे तुम्हारी जरूरत है । मैं यहाँ पाता लोग नहीं हूँ । जल्दी मेरे भाषाओ पाते जो मीलों दूर की आवाज को भी बडे आराम से सुन सकता था । पलक झपकते ही वह सुल्तान के आवाज की दिशा में दौड पडा । सुलेमान के दिए हुए जादुई मोतियों की मदद से फॅस की दिशा में होता है । तब वो लोग से पाता । लोग पहुंच गया तो उसे खुद पता नहीं चला । वहाँ लोगों में पहुंचते हैं जैसे ही फतेह महल के अंदर पहुंचा तो सुल्तान का चेहरा खुशी से खेलो था । मैं जोर से चिल्लाया मेरे भाई जल्दी से इस बार दल के टुकडे को मुझ से अलग और ये क्या? सुल्तान की बात का फतेह ने कोई जवाब नहीं दिया । नहीं वहाँ पर चुपचाप खडा रहा ये देखकर सुल्तान थोडा और जोर से बोला ॅ जल्दी ऍम और इस बार ऍम पर पाते ना तो हिला और न ही बोला बिल्कुल सुनना खडा था । सुल्तान गुस्से से तमतमाता हुआ बोला पता है मैंने तुझे सबसे बढकर मना है और तो मेरी बात नहीं होना है क्या हो गया है । तो ये सुनकर उसका हमशक्ल राजा बडी मुश्किल से अपना सिर्फ धीरे से उठाता हुआ बोला हूँ हूँ हूँ सुल्तान हैरत से बोला मुझे तुम्हारी बात समझ में नहीं आ रही हमशक्ल राजा पूरा तो हो गया है हूँ हूँ हूँ सुल्तान नहीं सुनते ही पता है कि पहरों की तरफ देखा जितनी लंबी और काली बहुत सारी जो चिपक के उसका खून पी रही थी । सुल्तान यहाॅ उठा । उसने मदद के लिए सुलेमान को पुकारना चाहा । पच्चीसी उसकी आवासी बन्दों कहीं तभी हमशक्ल राजा कराहते हुए पूरा हो हूँ पर मैं तो मर जाऊंगा उसमें गिरकर मैं तो सूखा हुआ है । सुल्तान घबराता हुआ बोला उसकी आवाज सेवायोजना जा की कोई नहीं सुन रहा था । सुलीमान किसी तेल इसमें सम्मोहन की वजह से कुछ भी समझ नहीं पा रहा था । नहीं नहीं हूँ चीज मिलती ही नहीं है । समझ ने यहाँ ताकि मैं हमारी बातों पर विश्वास करो या नहीं । लेकिन मेरे पास कोई और चारा नहीं है । में तो सिर्फ तुम्हारी मदद करने आया हूँ । अब तुम कहते हो तो चलो । मैं अपनी जान का जोखिम भी उठाने को तैयार हूँ । अगर मुझे कुछ हो जाता है तो मेरे दोस्तों को यहाँ से जरूर आजाद कर देना हूँ हूँ सुल्तान ये सुनकर थोडा सा डरते हुई कोई के अंदर क्या क्या तर्राष् चल रही है उसके खेलते ही वहाँ पर बहुत मोटी और मुलायम मखमली करते हैं । हाँ, जिसके कारण उसी तरह साफ ही तट नहीं हुआ

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राजकुमार सुलतान को अजीबो-गरीब सपने आते हैं। जिससे सुलतान परेशान है। साये की तरह हरदम साथ रहनेवाला सुलतान का दोस्‍त सुलेमान, वफ़ादार और हवा से भी तेज घोड़ा ‘फ़तेह’, नटखट और जादुई कारनामों वाली ‘भूरी’ बिल्‍ली सुलतान के साथ हमेशा रहते हैं। सात रहस्यमयी चेहरे और उन चेहरों की तलाश में एक रोमांचक सफर पर निकले सुलतान और सुलेमान ने कभी नहीं सोचा था कि उनका सामना होगा जादुई जंगल, जिन्न और नाग मानवों से। क्या वे अपनी मंज़िल को ढूंढकर वापस अपने देश लौट पाएंगे? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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