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भाग - 14

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भाग - 14 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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"विकसित होती टेक्‍नोलॉजी एक दिन इस स्तर पर आ जायेगी कि मनुष्य और रोबोट में अंतर खत्म हो जाएगा। मनुष्य और रोबोट का यह मिलन, भविष्य में सही होगा या गलत, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन‌ दोनों के मिलन को लेकर जो कहानियां रची गयी है वह आप 'रोबोटोपिया' में सुन सकते हैं। इस कहानी संग्रह में कुल नौ कहानियां है। रोजिना एक रोबोट है, क्या एक रोबोट से बलात्कार संभव है? क्या उसके लिए अपराधी को कानूनी सजा दी जा सकती है? मनुष्य और रोबोट के ऐसे संबधों को उजागर करती है 'रोबोटोपिया'। सुनें इस अद्भूत कहानी संग्रह को केवल कुकू एफएम पर।"
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द किलर अभियोजन पक्ष ने अदालत में अभी तक जो भी गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं, मैं ये सिद्ध करने में नाकाम रहे हैं कि मुस्लिम कपिल सिधवानी ने अपनी पत्नी रागनी सिधवानी की हत्या की है । इसलिए ये अदालत मुलजिम को संदेह का लाभ देते हुए बाइज्जत बरी करती है । जज के इस फैसले को सुनकर जहाँ एक और कपिल सिद्धवानी और उसके वकील कमलेश श्रीवास्तव का चेहरा हजार वोट के बल की तरह चमक उठा वहीं अदालत में मौजूद लाइट शोर इंश्योरेंस कंपनी की नुमाइंदगी कर रहे कंपनी के एजीएम महेंद्र माथुर और उसके साथ आए दोनों अधिकारियों का मूल लटक गया जो पिछले एक महीने से अदालत की हर सुनवाई में इसी उम्मीद के साथ हाजिरी लगाए जा रहे थे की कंपनी के प्रेशर में मामले की पडताल करने को मजबूर पुलिस और उसके द्वारा मैनेज किए जा रहा सरकारी वकील सिधवानी को उसकी बीवी का कातिल साबित करने में कामयाब हो जाएंगे और उनकी कंपनी को डेढ सौ करोड रुपये की चपत लगने से बच जाएंगे । ये रकम रागिनी की मौत के बाद इंश्योरेंस क्लेम के रूप में उसके पति यानी कपिल सिधवानी को चुकाने पडते हैं हम आप मेरे क्लाइंट को डेढ सौ करोड रुपये का पेमेंट करने की तैयारी कर लीजिए । मात्र जहाँ श्रीवास्तव ने महेंद्र मात्र को चिढाते हुए कहा, इतनी भी क्या जल्दी है? श्रीवास्तव साहब अभी तब बहुत सारी फॉर मिलते बाकी है । माथुर मुस्कुराया वैसे भी हमारे पास तीस दिन का वक्त है और इसे एक महीने में हम सच को सामने लाकर रहेंगे । क्या ऐसा सच श्रीवास्तव? आंखे सिकोडकर बोला वही सर जो आप और आपका क्लाइंट अच्छी तरह जानते हैं । माथुर ने सिदवानी को खोलते हुए कहा कानून अंधा हो सकता है, लेकिन हम नहीं क्या कहते हैं । सिधवानी साहब यही थी । आपकी नियत में बईमानी आ गई है और आप लोग मुझे फंसाकर मेरे डेढ सौ करोड रुपये हडप लेना चाहते हैं । सिधवानी बिना पलक झपकाए बोला बेईमान कौन है ये तो वक्त ही बताएगा । फिलहाल तो हम जा रहे हैं । जल्दी ही फिर मुलाकात होगी और यकीन माननीय कि वह मुलाकात आपके हक में नहीं होगी । और रियली सिधवानी उसका मजाक उडाने के अंदाज में बोला । माथुर ने उसकी बात का जवाब दिए बिना अपने साथियों को इशारा किया और गुस्से से पहले पटकता हुआ कोर्ट से निकल गया । उसकी हालत देखकर सिधवानी और श्रीवास्तव ने एक साथ वहाँ का लगाया सच सच बताओ से जवानी तुमने सचमुच नागिनी भाविक श्रीवास्तव ने हस्ते हस्ते उसे छेडा तो एक महीना रुक जाइए । श्रीवास्तव साहब मिस्टर मौत हो जब सच को खोदकर अदालत के सामने लाएंगे तो आप भी देख लीजिएगा । सिधवानी आंख मारते हुए बोला और एक बार फिर कोर्ट का खाली होता कमरा सिधवानी और श्री वास्तव के संयुक्त अठारह से गूंज उठा । कपिल सिदवानी अडतीस साल का एक स्मार्ट वर्क था, जो रागिनी से शादी से पहले ही एक मंझे हुए प्लेबॉय के तौर पर जाना जाता था । प्रोफेशनली वो एक स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट था । फिर भी कमर्शल फोटोग्राफी से वो इतना कमा लेता था कि उसका गुजर बसर होता रहेगा । लेकिन उसके रहन सहन को देखकर लोगों को उससे रश होता था और इन रश्क करने वालों का ये मानना था की उसके एडिशनल खर्चे उसकी हाई क्लास महिला मित्र उठाती थी और इन मेहरबानियों के बदले उनकी कुछ जरूरतें सिधवानी पूरी कर दिया करता था । ऐसे ही एक क्लाइंट रागिनी भी थी जिसकी करोडों की दौलत ने सिधवानी के लिए चुंबक का काम किया था और कुछ सालों के लिए सिधवानी उससे ही चिपक कर रहे गया लेकिन सिर्फ कुछ सालों के लिए बाद में उसे रागनी के ना जो नखरे उबाने लगे और वह फिर से अपने पुराने रंग में लौट आया । सिधवानी कि वे अदाएँ जिनसे सम्मोहित होकर कभी रागिनी ने हमेशा हमेशा के लिए उसकी हो जाने का फैसला किया, हम उसके दिल में कांटे की तरह चुभने लगी थी और दूसरी ओर तो में सिद्धवानी की दिलचस्पी को लेकर अक्सर उनमें झगडे होने लगे थे । इन झगडों के चलते रागनी को अक्सर डिप्रेशन के दौरे पडने लगेंगे लेकिन उसे यह देखकर खुशी भी होती और हैरानी भी की जब भी उसकी तबियत बिगडते सिधवानी अपनी सारी रंगीनियत को ताक पर रखकर पूरा दिन घर में रहकर उसकी भरपूर देखभाल करता था । ये एक अलग बात थी कि उसकी इस तमाम दयानंद दारी में रागनी को अपनेपन की कम और औपचारिकता की ज्यादा अनुभूति होती थी । जिसमें प्यार का तो दूर दूर तक कोई अंश नहीं होता था फिर भी उसे इतने से भी काफी सुकून मिल जाता था कि कम से कम वो दूसरी औरतों के बजाय उसके पास मौजूद हैं । डिप्रेशन से बचने के लिए रागिनी टेबलेट लेने लगी थी और डॉक्टर की सलाह का पालन करते हुए वो एक बार में एक से ज्यादा गोली नहीं लेती थी । सिदवानी भी इस बात को लेकर पूरी सावधानी बरतता था की वह ज्यादा गोलियां ना ले पाए इसलिए वो टेबलेट की शीशी अपने ही प्रदर्शन में रखता था । जिस दिन रागिनी की मौत हुई उस दिन उस ने पता नहीं क्यों एक साथ पंद्रह गोलियां निगल ली थी । इस फॅसने रागिनी की जान ले ली थी । इस बात की तस्दीक पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट ने भी करती थी और उसकी मौत को डिप्रेशन बढ जाने के कारण की गई आत्महत्या मान लिया गया था । रागिनी की मौत वाले दिन सिलवानी बिजनेस मीटिंग के सिलसिले में बेंगलुरु गया हुआ था । शायद ही उसके हक में अच्छा ही हुआ था वरना उसे ही अपने बीवी का कातिल मानने वालों की कोई कमी नहीं थी जिनके पास ऐसा मानने के पीछे दो ठोस वजह पहले से ही मौजूद थी । एक सिधवानी कि अय्याश आदतें दूसरी डेढ सौ करोड रुपये की वह जॉइन बीमा पॉलिसी जो सिधवानी दंपत्ति ने अपनी पहली मैरिज एनिवर्सरी के मौके पर एक दूसरे को बतौर गिफ्ट दी थी । पॉलिसी के मुताबिक उनमें से किसी भी एक के मरने की स्थिति में दूसरे को डेढ सौ करोड रुपये मिलने थे । सिधवानी को जब रागनी के मरने की खबर लगी तो वो अपना टूर बीच में ही कैंसिल कर उन्हें लौटाया रागिनी क्लास को देखते ही वह दहाडे मान मारकर रोने लगा । वो शायद आठवें फ्लोर पर मौजूद अपने आलीशान फ्लैट की बालकनी से छलांग लगा देता अगर घर में मौजूद रिश्तेदारों और दोस्तों ने उसे रोकना लिया होता । करीब दो हफ्ते तक वो गम में डूबा रहा और सारा कामकाज छोडकर रागिनी के चले जाने का शोक मनाता है । इस दुख से उबरने के बाद उसे पॉलिसी किया जाए । लेकिन जब उसने लाइफ शोर में इंश्योरेंस क्लेम के लिए पेपर फाइल किए तो उसे ये देखकर हैरानी हुई कि अगले ही दिन पुलिस उसकी गिरफ्तारी का वारंट लेकर उसके घर पर आ धमकी थी । जिससे उस पर रागिनी को दवाई की ओवरडोज देकर उसकी हत्या करने का संदेह प्रकट किया गया था । सिदवानी को समझने में देर नहीं लगी कि ये सब लाइट शोर का किया धरा है । उसने भी अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए ऐसे मामलों के माहिर वकील कमलेश श्रीवास्तव को हायर कर लिया था और वह सिधवानी की पुलिस स्टेशन पहुंचने से पहले ही उसके बेल के पेपर लेकर वहां पहुंच गया था । इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में केस फाइल कर दिया लेकिन सिर्फ शक के बिना पर तो किसी को खातिर करार नहीं दिया जा सकता था । इसलिए तीन महीने और आठ तारीख को के बाद ही कोर्ट ने सिदवानी को बहुत इज्जत बरी कर दिया । लेकिन सिदवानी के सामने खडी चुनौती अभी खत्म नहीं हुई थी । इस वक्त लाइट और इंश्योरेंस कंपनी के ऑफिस में एजीएम महेंद्र माथुर बहाना जायसवाल नामक नाम के ऐसे शख्स के साथ मौजूद थे जो एक प्राइवेट डिटेक्टिव था और खुद को अपने नाम के इनिशियल यानी बात जहाँ से संबोधित किए जाने पर बहुत खुश होता था और अक्सर ये कहते सुना जाता था कि उसने अच्छा छू कब बाजा बजाया है । बजा बाबू, पुलिस और हमारा वकील तूने काम मैं साबित हो चुके हैं आप कंपनी की इज्जत और मेरी नौकरी दोनों आपके हाथ में । माथुर परेशान सफर में बोला अगर कंपनी को डेढ सौ करोड रुपये देने पड गए तो काफी भारी पडेगा । पर माथुर साहब मुझे तो लगता है कि अगर कंपनियों से क्लेम की रकम दे दी थी है तो कंपनी की इज्जत ज्यादा बढेगी । बजा बोला नहीं उल्टे सब हम पर हसेंगे की कैसे कातिल दुनिया की आंखों में धूल झोककर हमें डेढ सौ करोड रुपये का चूना लगा गए । मात्र बोला फिर तो सब अपनी बीवियों का जब पत्तियों का बीमा कराएंगे और किसी जिन्होंने मारकर बीमे की रकम वसूलते जाएंगे । पर जब अदालत उसे बेगुना मानकर बरी कर चुकी है तो आपकी उसे जबरदस्ती कातिल साबित करने पर तुले हुए हैं क्योंकि इसी में कंपनी का फायदा है । माथुर उसे खोलते हुए बोला और आप का भी उसकी बात का मर्म समझकर बजा का चेहरा उतर गया । अगर आप को बुरा लगा हो तो माफी चाहता हूँ । बजा बाबू लेकिन सच तो यही है कि कोई भी कंपनी अपने फायदे के लिए धंदा करती है ना किस तरह पैसा लुटाने के लिए माथुर उसे समझाने लगा । अगर बाद दस पंद्रह लाख की होती तो शायद कंपनी ने बिना किसी हील हुज्जत के उसका क्लेम सेटल कर दिया होता । लेकिन डेढ सौ करोड रुपये बहुत बडी रकम होती है तो बताइए की मुझे आप क्या चाहते हैं? बजा ने पूछा बस इतना ही कि इस पूरे मामले की तह तक जाइए और सबूत जुटाकर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कीजिए कि कहीं वाकई तो रागिनी की हत्या नहीं हुई है और अगर हमारा शक सही है तो फिर सिधवानी को कातिल साबित करने में कोई मुश्किल नहीं होगी । माथुर कुटिलता से मुस्कुरा और इसके बदले आपको भी आपकी रेगुलर फीस से कई गुना ज्यादा अमाउंट पे किया जाएगा । वो तो ठीक है लेकिन अगर थोडा ऍप्स मिल जाता तो मेरे लिए इन्वेस्टिगेशन करना हो जाएगा । बजा मुस्कुराते हुए बोला और मात्र बोला और अपनी ड्रॉर से पांच सौ रुपये के नोटों की एक गड्डी निकालकर बजा की ओर बढाती बाधा उसका शुक्रिया अदा करके वहाँ से निकल गया । बालाजी जायसवाल एक पैंतालीस साल का मझौली कदकाठी वाला इंसान था, जिसका अक्सर नाक पर आठ टिकने वाला मोटे मोटे लैंसों का चश्मा जाऊ से बहुत संजीदा शख्स साबित करता था । वहीं उसके कदकाठी से मिलना खाने वाली कन्हैया लाल नुमा मोटी मोटी मुझे उसे किसी जोकर की तरह पेश कर दी थी । लेकिन आपने लाॅट वो एक काइयां किस्म का जासूस था जो पिछले दस सालों से लाइव शोर को अपनी सेवाएं दे रहा था और फॉल्स क्लेम कर बीमा रकम लेने की कोशिश करने वाले अनगिनत जालसाजों हो सकता है कि कुछ सच्चे भी रहे हूँ को झूठा साबित कर कंपनी का लाखों रुपया बच जा चुका था । लेकिन बाद में अभी तक जिनका बाजा बजाया था वे छोटे मोटे जान साहब थे । सिधवानी बडी मछली था जिससे निपटने के लिए उसे मगर मच की भूमिका अपनानी थी । बजा ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया था । न सिर्फ उन पंद्रह लाख रुपयों की वजह से जो बतौर फीस उसे मिलने वाली थी बल्कि उस शाबाशी की वजह से भी जो उसे सिधवानी को हासिल साबित करके मिलती । उसने बिना सिदवानी को खबर लगे पूरे तीन दिन तक उसकी निगरानी की और उसके पडोसियों से भी पूछताछ की । लेकिन उसे सेवा इसके कोई जानकारी नहीं मिली की वह रागिनी की मौत के एक महीने पहले से बिल्कुल एक आदर्श भारतीय पति की तरह आचरन कर रहा था । समय से काम पर निकल ना और समय से लौटाना उसका ये रूटीन अभी भी जारी था और पडोसी मानने लगे थे कि बेचारी रागनी जीते जी तो नहीं लेकिन मारते मारते उसे बदलने को मजबूर कर गई ।

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