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Chhoti Sarpanch - Part 5

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शहर में पढ़ी लिखी लड़की, पिछड़े गांव के माहौल को किस तरह आधुनिक बनाती है। किस तरह वो गांव पर राज कर रहे, सरपंच का सच गांव के सामने लेकर आती है। Author : Prateek Saxena Voiceover Artist : Shrikant Sinha
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सरपंच का सच लेखा देखती है । एक आदमी उसके घर के पास बनी दुकान पर खडा सब देख रहा है । जहाँ सभी आग बुझाने की कोशिश कर रहे नहीं वहाँ वो आदमी तमाशबीन बना हुआ था । देखा नहीं । ध्यान दिया तो उससे याद आया कि ये ही आती है जो पिछले दिनों सरपंच के घर उसे धमका रहा था । नेत्रा के पास अभी सोचने का समय नहीं था । वो उस हॉस्पिटल की तरफ चाहती है जहाँ ग्रुप एवं उसके भाई को लेकर गए । नेता के साथ उसके अंकल आपा एवं रूद्र के अंकल आंटी पीने । हॉस्पिटल में गांव के लोग इकट्ठा होकर खडे थे । चौथान सरपंच भी आपसे साथियों के साथ वहाँ खडा था । सरपंच नेत्रा और उसके पारिवारिक लोगों से मिलता है और दिलासा देता है । वहाँ पर मौके पर दारों का भी पहुंच जाते हैं । इस घटना के बारे में सब से पूछते हैं दारोगा सरपंच को अपने पिता सामान मानता था । सभी बात कर रहे थे कि डॉक्टर आकर बताते हैं की दोनों खतरे से बाहर है । दोनों के घावों को भरने में अभी समय लगेगा । आप दोनों कल शाम को यहाँ से लेकर जा सकते हैं । नेत्रा गांव वालों को वापस जाने को कहती है परंतु गांव वाले जाने से इंकार करते थे । उसी समय सरपंच को एक कॉल आता है । उसे सुनते ही वो एक दम से हॉस्पिटल से निकल जाता है । पता लगता है कि सरपंची चुनाव की तारीख खाने वाली है इसलिए हाई कमान नहीं उसे अपने तब तक बुलाया है । नेतरा मौका जाने नहीं देना चाहती थी इसलिए उसने गांव के लोगों को हास्पिटल के बाहर एक बात में इकट्ठा किया और उनसे कहा कि आप पिछले पचास सालों से गुलामी कर रहे हो । आपके साथ वाले गांव इतने विकसित हो चुके हैं कि वहाँ आए दिन कोई खेल कोई प्रोग्राम हो रहा होता है । हमें मिलकर एक खेल का हिस्सा बनना चाहिए । आपने गुलामी की जंजीरों को तोडकर खेल के मैदान में उतरने के लिए तैयार हो जाएगा । नेतरा ने ये घोषणा तो करती है परंतु खेल के लिए तो मैदान गांव में जिसका पता लगाने पर गांव वाले एक साथ काम करने का आश्वासन दिया और कहा कि गांव कि पंजाब जमीन इस काम आएगी । आज ही उस बंजर जमीन को पूरा गांव मिलकर खेल वाली जमीन में पकडने का प्रयास करेंगे । गांव वाले भी नेत्रा की बातों से प्रभावित होते है और गांव वापिस चले जाते हैं । नेत्र हॉस्पिटल रहने का निर्णय लेती है एवं सभी को जाने को कहती है । सभी नेता की बात को समझते हुए वहाँ से चले जाते हैं । नेत्रा बार बार अपने भाई एवं भूत को देख रही थी । उसने कभी नहीं सोचा था कि रोज तो उसके भाई के लिए जान की बाजी लगा देगा । लेता रूद्र से काफी प्रभावित हो चुकी थी । डॉक्टर उसे आकर बताते हैं कि रूद्र को होश आ चुका है । आप उन्हें मिल सकते हैं । इतना जब उसे मिलती है तो खुद को रोक नहीं बात और अपने गले लगा लेती है । दोनों एक दूसरे दिन काफी देर तक ही गले लगाकर बैठे हुए थे । रूद्र निकला को संभालता है और हसते हुए कहता है अभी एक हाथ के कारण मुझे इतनी खुशी मिल रही है तो दोनों खातों के कारण कितने मिलते हैं । दोनों एक दूसरे से बातें करने लगते हैं । नेत्रा का भाई भी अब ठीक था । कभी एक बुजुर्ग उनके पास आता है तो दोनों हो तो मैं कुछ नहीं पता । उसमें आज तो भारत घर चलाया है । कल तो भी चलाएगा । तुम क्या सोचते हो तो मुझे हरा दोगे । मेरा पेट का उसे नहीं हरा सकता हूँ । तब क्या चीज हो? पूछने पर पता लगता है कि पिछले चुनाव में इसका बेटा खडा हुआ था । परंतु चौहान ने अपनी हार देखते हुए उसको जोर के बेटे को रास्ते से ही साफ करवा दिया । इसका बेटा भी शहर से बढकर आया था । परंतु सरपंच की चालों को समझता सका नेता नोटिस करते हैं । एक आदमी उन सब की बातें सुन रहा है । उसके पीछा करने पर भी उसके बारे में पता नहीं चला । नेत्र के भाई नेता के भाई को भी अब उस आ चुका था । नहीं था । उसके पास जाती है और उसे हंसाने की कोशिश करती है । रूद्र भी उसे नई नहीं कहानी सुनने लगता है । रात का समय था । नेत्रा के पिता वहाँ पहुंच चाहते हैं और हॉस्पिटल में उन सभी के साथ रात निकालते हैं । सुबह होते ही डॉक्टर उन दोनों को देखने आते हैं और घर जाने की सलाह देते हैं । सभी एक गाडी मंगवाकर घर के लिए रवाना हो जाते हैं । नेता अभी तक उस लडकी के बारे में सोच रही थी इसे जिसे सरपंच ने मारा था । गांव पहुंचने हुई सभी देखते हैं । गांव वालों नहीं बन ज्यादा जमीन को एक मैदान में बदल दिया है । नेता और रूद्र गाडी से उतरकर गांव वालों के बीच चले जाते हैं । नेत्रा कहती है, हम अगले सप्ताह एक खेल का आयोजन करेंगे और सभी मजदूर हाई को काम की जगह पहुंचने के लिए कहते हैं । उसकी बात सुनकर सभी वहाँ पहुंच जाते हैं । नेता उन्हें कम समझाती है जिसे सुनकर सभी अपने अपने काम में लग जाते हैं । नेतरा अपने वायदे से पीछे नहीं रहने वाली थी । उसमें एक सरकारी बैंक से बात कर गांव वालों के खाते खुलवाने के लिए निवेदन किया । एक सात पूरे गांव के लोगों के खाते खोलने पर बैंक अधिकारी खुश हो जाते हैं । एक घंटे बाद सात आठ बैंक अधिकारी बन बहुत चाहते हैं । नेतरा सभी गांव वालों को उनसे मिल जाती है और सरकार द्वारा लाए गए जन धन योजना तहत सभी का खाता है । वो सभी को समझाती है कि हर व्यक्ति का बैंक में खाता होना चाहिए नहीं तो सरकार द्वारा भूल लाभ आपको नहीं मिल पाएगा । लोगों का नेत्रा पर विश्वास बढ रहा था क्या देखता का सपना पूरा हो पाएगा ।

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शहर में पढ़ी लिखी लड़की, पिछड़े गांव के माहौल को किस तरह आधुनिक बनाती है। किस तरह वो गांव पर राज कर रहे, सरपंच का सच गांव के सामने लेकर आती है। Author : Prateek Saxena Voiceover Artist : Shrikant Sinha
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