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15. Bimari ka Pata Lagna

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यह कहानी एक ऐसे पात्र के जीवन पर आधारित है जो हकलाहट कि समस्या से पीड़ित है और अपनी इस समस्या के कारण उसे कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है । और साथ ही यह बताने की कोशिश कि है की कैसे उसने अपनी इस समस्या के साथ संघर्ष करते हुए अपनी ज़िन्दगी व्यतीत की और कैसे उसने अपनी इस समस्या से छुटकारा पाया । Voiceover Artist : Raghav Dutt Author : Rohit Verma Rimpu Producer : Theremin Studios
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चैप्टर नाइनटीन बीमारी का पता लगना हमारे स्टैमरिंग सेंटर को खोले हुए लगभग पांच साल के आस पास का समय हो गया था । इस पांच साल के दौरान हमने कई बडी बडी उपलब्धियां हासिल कर ली थी । इस दौरान हमने समाज को हकलाहट की समस्या से अवगत कराया । उन्हें बताया कि ये समस्या कैसे पैदा होती है, कैसे बढती है । हमने हकलाहट की समस्या से जूझ रहे हैं । कई लोगों की सहायता की । इन पांच सालों के समय में जी को ने हकलाहट के विषय पर लेकर कई किताबें भी लिख डाली जिसके लिए उसे साहित्यकार संबंधी एक पुरस्कार भी मिला । मजे की बात तो ये है कि जिस डिग्री को ना होने से आपकी स्टैंडिंग सेंटर नहीं खोल सकते थे आज लोगों को वही डिग्री प्राप्त करने के लिए चीज को द्वारा लिखे किताबों का सहारा लेना पडता है । कुल मिलाकर जैसा हमने चाहा वैसा ही हो रहा था । हम अपने मकसद में कामयाब हो रहे थे परन्तु विधि का विधान कुछ कौन था? यानी परमात्मा को कुछ और ही मंजूर था । हुआ यूं एक दिन चीजों के दोस्त विकास की अचानक सडक दुर्घटना हो जाती है । जब किसी को को इसके बारे में पता चलता है तो तुरंत विकास का पता लेने अस्पताल पहुंचाता है तो विकास की माँ से बात करता है और कहता है फॅमिली हूँ कुछ पता नहीं बेटा मेरे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है । विकास की माँ रोते होगा । फॅमिली सब ठीक हो जाएगा ठीक होने का । कुछ समय के बाद एक नर्स वहाँ दौडी दौडी आई और उसने आते हैं । वहाँ खडे सभी से कहा हूँ आपके मरीज की तबीयत अब खतरे से बाहर है लेकिन खून की सख्त जरूरत है । आप में से जो जो चाह्वान खून देना चाहता है वहाँ लैबरेटरी में जाकर सैंपल दिया । वहाँ करीब दस के आस पास लोग खडे थे । सभी ने जाकर अपने खून के सेंटर जमा करवा दिए जिन्होंने भी अपने नाम के साथ अपने फोन का सेंटर जमा करवा दिया । कुछ समय के बाद अगर दोबारा आई और उसने कहा अनिल जी को किसका नाम है जी मेरा नाम है जिन्होंने कहा आपको डॉक्टर साहब ने बुलाया है । डाॅक्टर के पास गया । डॉक्टर ने कहा वो तो आपका नाम अनिल है । फॅमिली क्या आपके परिवार में यहाँ आ सकता है? डॉक्टर ने कहा क्यूँ क्या? उॅची को ने कहा नहीं कुछ नहीं करते है । तुम जल्दी से अपने पिता या फिर किसी और बडे पारिवारिक सदस्य को बुला लो । मुझे उन से कुछ काम है । डॉक्टर ने कहा डॉक्टर कोई बात हो गई है क्या? तो आप मुझसे छुपा रहे । जिन्होंने कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । डॉक्टर ने कहा डॉक्टर साहब, आप जानते हैं कि मैं कौन हूँ, ऍम टीचर हूँ और मैं अपने विद्यार्थियों को पहली बातचीत पर बता देता हूँ कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है । तो आप मुझे को छुपा नहीं सकते । वही तो बात है । जो आप मुझे नहीं बता रहे हैं उन्हें कुछ गुस्से से कहा कि अगर आप जिद करते हैं तो मैं आपको बता देता हूँ कि आपके खून की प्राथमिक जांच में आपको ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई है । डॉक्टर ऍम नाम सुनते ही चीजों के पैरों तले जमीन खिसक गई । वो एकदम चुप हो जाता है । उसकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगता है । उसे कुछ समझ में नहीं आता कि वह क्या बोलूँ । कुछ देर के बाद डॉक्टर ने उसे बोला देखिए आपकी मानसिक दशा समझ सकता हूँ । मुझे सिर्फ इस बात कश्यप है कि आपको ब्लॅक । इसकी पुष्टि करने के लिए आप किसी ऍम डॉक्टर से जांच करवा सकते हैं । जी डॉक्टर की कही बातों को अनदेखा कर रहा था । वो अपनी सोच में डूबा हुआ था । उसकी आंखों में आंसू थे । वो कुछ और ही सोच रहा था । डॉक्टर ने उसकी मानवदर्शन को भाग लिया और उससे अपने पिताजी को बुलाने के लिए कहा जिन्होंने फोन करके अपने पिताजी को तुरंत वहाँ आने के लिए कहा । डॉक्टर साथ कितना समय मेरे पास जिन्होंने डॉक्टर से का क्या मतलब? डॉक्टर ने काम मेरे कहने का मतलब है कि मेरा जीवन कितना बाकी बचा है । उन्होंने कहा, जी आप मेरी बात को समझ नहीं रहे हैं । मैंने सिर्फ कैंसर होने की पुष्टि की है । ये सब बातें आपको ऍफ बता सकता है । वैसे अगर आप की रिपोर्ट के अनुसार देखा जाए तो आपके पास बहुत ही कम समय बचा है । डॉक्टर ने कहा इसका कोई इलाज है जी को ने पूछा जिसका कोई इलाज नहीं क्योंकि ये आखिरी स्टेज के करीब है । हाँ अगर पहले पकड में आ जाता तो शायद हम कुछ कर सकते थे । डॉक्टर ने कहा आपके अनुसार किसी बडे डॉक्टर को दिखाने से कोई लाभ हो सकता है क्या? जिन्होंने कहा आप अपनी तसल्ली के लिए किसी को भी दिखा सकते हैं । हाँ, दिल्ली में कैंसर एक्सपर्ट अस्पताल है । जहाँ का पता मैं आपको दे सकता हूँ । डॉक्टर ने कहा जी को डॉक्टर आपस में बातें कर रहे थे कि तभी ठीक ओके पिताजी वहाँ आ गए और डॉक्टर से उन्हें बुलाने का कारण पूछने लगे और जब डॉक्टर ने उन्हें चीजों के कैंसर होने के बारे में बताया तो सुन रहे हैं वो बेसुध हो गए और वहीं पर गिर गए । जी को नहीं । जैसे तैसे उन्हें संभाला और उन्हें होश में लाने का प्रयास करने लगा । ठीक ओके पिता होश में आए और उन्होंने डॉक्टर से कहा डॉक्टर साहब आप क्या कह रहे हैं? कहीं आपको कोई गलत हो तो नहीं हुई है? जीत गलत फैमी वाली कोई बात नहीं । हम ने दो बार इसके खून का टेस्ट किया है । फिर भी आप अपनी तसल्ली के लिए किसी बडे कैंसर स्पेशल अस्पताल में इसकी जांच करवा सकता । डॉक्टर निकले । इसके बाद जी को और पिताजी घर आ गए । कराते हैं पिताजी कुछ खुद कर होने लगे । मैंने और मैंने उनको चुप करवाया और उनके यू रोने का कारण पूछा तो उन्होंने चीजों की बीमारी के बारे में बताया । जी को की बीमारी के बारे में सुनते ही हमारे तो होश उड गए । उस समय मैंने अपने आप को कैसे संभाला । इससे मैं नहीं जानता हूँ । कुछ समय के बाद जैसे ही सब सामान्य हुआ तो मैंने चीकू से इस बारे में बात की । सब क्या हुआ? मेरे कहने का मतलब है कि आपको कैंसर होने के बारे में कैसे पता चला । कुछ नहीं । आज तो विकास का पता लेने के लिए जब मैं अस्पताल गया तो वहाँ पर डॉक्टर ने विकास के लिए खून की मांग की । मुझे मिलाकर कुल दस के आस पास लोगों ने अपना खून देने की पेशकश की । जिसके लिए हम सबको अपने अपने खून का एक नमूना जांच के लिए जमा करवाना था । उस वक्त मेरे खून के नमूने की जांच करने पर डॉक्टर को मेरी बीमारी के बारे में पता चला है । जी को ने बताया डॉक्टर ने क्या कहा? मैंने पूछा कहना क्या है? वहीं जो मेरे गुरु स्टीव जॉब को कहा था डॉक्टर ने जिन्होंने कहा क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं । मैंने हैरानी से कम यार इसमें समझने वाली क्या बात है? तो मैं उन के एक मशहूर किसी के बारे में पता नहीं क्या बोलने का नहीं । क्या है वो? मैंने उत्सुकतावश पूछा या नहीं पता था? सुनो ऍम यूनिवर्सिटी में दिए अपने मजबूत भाषण में एक बात बताइए । एक बार उनकी सेहत संबंधित कुछ समस्या हुई तो अस्पताल में अपनी जांच करवाने के लिए गए । उस जांच में उनको कैंसर होने की पुष्टि हूँ । जब उन्होंने डॉक्टर से पूछा कि आप क्या करना है तो पता है डॉक्टर ने क्या कहा जिन्होंने कहा नहीं क्या था? डॉक्टर ने मैंने पूछा । डॉक्टर ने उनसे कहा कि आपके पास समय बहुत हूँ । आपके पास मुश्किल से पांच छे महीने का समय है । इस समय सीमा में आप अपने जरूरी काम निपटा लें । अपने प्रियजनों से मिल । कुल मिलाकर डॉक्टरों ने अप्रत्यक्ष तौर पर ये कहना चाह रहा था आप अपने निकट संबंधियों से अलविदा कह दे और उन्हें मानसिक तौर पर सच का सामना करने के लिए तैयार ही लेकर यानी बहुत इस दुनिया में ज्यादा देर का मेहमान नहीं, इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा । परन्तु उनके शरीर की गहन जांच करने के बाद जो बात सामने आई उसने उसकी दुनिया ही बदलते ठीक होने का क्या बात थी? वो मैंने पूछा । उनके शरीर की जांच करने के बाद पता चला कि उनके कैंसर का जो ट्यूमर था, बहुत ही दुर्लभ प्रकार का टीम था । इसका इलाज संभव था । यानी स्टीव जॉब्स के कैंसर का इलाज था । काफी अजीब बात है ना होने का अजीब बात । ऐसी अच्छी बात मैंने पूछा । अजीब बात है कि पहले उन को जब पता चला होगा कि अब मरने वाले हैं और डॉक्टर ने भी कह दिया होगा कि वह अपने जरूरी सब काम निपटा लें, उस वक्त उनके दिल में क्या बिता होगा और कुछ समय के बाद जब उनको पता चला होगा कि उनके कैंसर का इलाज है यानी वो बच सकते हैं । कितना हसी बंदर होगा हूँ जिन्होंने कहा हसीन मंजर मतलब? मैंने पूछा यार, कल्पना करूँगी तो मरने वाली तो समझो । तुम ऐसे जहाज पर सवार हो जो डूबने वाला है तो तुम्हारे दिल पर क्या बीतेगी? जी को ने कहा मुझे तो ऐसी कल्पना से ही डर लगने लगा । मैंने कहा लगता है ना और उसके बाद सोचो अगर कुछ पैसे समय बाद तो पता चले कि तुम्हारा जहाज डूबने से बच गया है जिससे तुम्हारी जान बच गई है । यानी अब तुम करोगी नहीं तो मैं कैसा महसूस होगा जिन्होंने पूछता हूँ तो सबसे अलग अहसास होगा । अगर सच में ऐसा होता है फॅस को बयां कर पाना बहुत मुश्किल है । मैंने कहा ठीक है । ऐसे ही ऐसा स्टीव जॉब को भी हुआ था जब शाम को डॉक्टर उन्होंने बताया कि उनके एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है इसका इलाज संभव । परन्तु मेरा मामला से बहुत अलग होने का मतलब मैं हैरानी से पूछा मतलब यही ऍम संभव नहीं और डॉक्टर ने मुझसे कहा है कि मेरे पास पांच छह महीने का समय है । यानी अब मेरे पास पांच छह महीने की जिंदगी शेष बची है । घूमने का । जी को की बात सुनकर मैं रोने लगे और अपने आप को पोस्ट लगी है । साथ ही भगवान को बुरा भला कहने लगी कि तुम्हारे साथ ही क्यों? अगर होना ही था तो परमात्मा मेरे साथ करता हूँ । तुम्हारी जगह मुझे ये बीमारी हो जाती है । ऐसा भारतों की बातें मत करूँ । इस समय फालतू की बातें करने का नहीं है बल्कि दिमाग से और धीरज से काम लेने का है । अब हमें सच्चाई को स्वीकार करके भविष्य के बारे में सोचना होगा । जी को नहीं कहा लेकिन लेकिन वगैरह कुछ नहीं । बहन लोग किसी दुर्घटना में मेरी अचानक मृत्यु हो जाती है तो फिर भी तो मैं सफर करना ही था ना तो क्या करना था कभी सोचा है परमात्मा जो करता है अच्छा ही करता है । अब मैं एक योजना बद्ध तरीके से दुनिया को अलविदा करूँ । मेरे पास जितना भी समय उसका एक योजना बद्ध तरीके से इस्तेमाल करूँगा तो मैं सच्चाई को स्वीकार करके अपने दिल को मजबूत बनाना होगा । तो मैं अपने आप को मानसिक तौर पर भविष्य के लिए तैयार करना हूँ ठीक होने का । बच्चे को के मान के हालत समझ सकती थी । उसे इस बात का दुख जरूर हो रहा था परन्तु किसी पर जाहिर नहीं होने देना चाहता है । मुझे अपने दिल को मजबूत करना था । बच्ची को का साथ देना समय बहुत कम था और ये समय ऐसी नकारात्मक बाते करने का नहीं था । कुछ दिनों के बाद हमने चीजों की जांच दिल्ली में सबसे बडे अस्पताल में करवाई जिससे उसे कैंसर होने की बात सही हूँ । वहाँ के डॉक्टर ने भी आँखों के पास समय कम होने की बात कही जिसके बाद मैंने फैसला किया किसी को के पास इतना समय बचा है । मुझे उस समय को गर्व की बात में नहीं करवाना चाहिए । मुझे जी को को हर हाल में कुछ रखना होगा और अपने आप को मानसिक तौर पर तैयार करना होगा । एक बार बच्ची को नहीं रही थी तो बिल्कुल सही थी कि अगर उसकी मृत्यु बचाना किसी दुर्घटना में हो जाती है तो भी मुझे सच्चाई को स्वीकार करना था । परमात्मा जो करता है अच्छा ही करता है । अब मेरे पास जी से बात करने का अभिषेक, योजनाएं बनाने का समय, कुछ दिनों में चीजों की बीमारी के बारे में हमारे ज्यादातर, इसके बाद आपको पता चाहिए । बस अभी बारी बारी जी को का हालचाल पूछने के लिए आने लगे । जब तरह तरह के लोग आएंगे तो बातें भी तरह तरह की होगी । कुछ चीजों का हौसला बढाता तो कोई मुझे दिलासा देने के बहाने, आँखों के सामने नकारात्मक बातें करके वो सम्मान से तौर पर तोडने की कोशिश करना है । परंतु जी को पर इन सब बातों का कोई असर नहीं होता है । वह सब बातों को सुना अनसुना कर देता हूँ । उनकी कही बातों में जवाब में वो यही कहता मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं आपके फिजूल की बातों को समझा नहीं । मेरे सामने अगर ऐसी नकारात्मक बातें करनी है तो मेरे पास आने की कोई जरूरत नहीं है । बाकी बचे जिंदगी मेरी है । अब मैं फैसला करूंगा कि इससे कैसे बताना है । ऐसी बातों को सुनकर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता हूँ । जी को ब्लड कैंसर है, ये बहुत अब साफ हो गई थी । हमने कई बडे डॉक्टरों से संपर्क किया और सबका एक ही कहना था किसी को के पास अब ज्यादा समय नहीं । मेरी तो जैसे दुनिया ही लूट गई थी । मैं पहले से ज्यादा ऍम में रहने लगे लेकिन जीजू का रवैया हम सबसे विपरीत था जहाँ हमें उस की इस बीमारी को लेकर चिंतित थे । बच्ची को ऐसे बर्ताव कर रहा था जैसे उसे कुछ हुआ ही नहीं । मौका पाकर जी से बात करना चाहती थी और एक दिन मुझे चीजों से बात करने का मौका मिल ही गया । वो यू एक दिन घर में कोई नहीं था । अच्छी को जब शाम को क्लिनिक से घर आया तो मैंने उससे पूछा क्या कैसा रहा आज करेंगे बहुत बढिया । आज खाने में क्या है जी? उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा अभी तो मैंने कुछ बनाया नहीं क्यूँ उन्होंने पूछा क्योंकि घर में आज कोई नहीं है और जिस वजह से फिर आज बाहर खाना खाने का है । मैंने कहा क्यों? घरवाले कहाँ गया? जिन्होंने पूछा घरवाले सब शादी में गए हैं, वो सब रात को देरी से आएंगे । फिर तो बहुत बढिया है । आज तो मैं एक लगाऊंगा, बाहर खाना । हम फिर कभी आएंगे ठीक होने का । लेकिन मैंने कुछ सोच कर कहा लेकिन क्या और तुम डॉक्टर के बारे में सोच रहे हैं । अरे डॉक्टर ने तो मुझे खुद बोला है कि कभी गवार दिन में दो तीन बार शराब भी लिया करूँ जी को ने मजाकिया लहजे से का दिन में दो तीन बार ये कौन सा डॉक्टर हैं? किसने तो मैं ऐसी सलाह दी मैंने का अरे मजाक कर रहा हूँ । उसने दिन में नहीं बल्कि हफ्ते में दो तीन बार कहा है । जी खोलेगा तो मजाक तो नहीं कर रहा हूँ । मैंने पूछा नहीं मैं मजाक क्यों करूंगा? वैसे भी कितने दिन हो गए मुझे खराब दिए हुए आज मेरा बहुत मन कर रहे हैं । जिन्होंने कहा ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी । मैंने कहा । इसके बाद मैं चीजों का पैर लगाने का इंतजाम करने लगी । जी को शराब पीने का आदी नहीं है तो शराब कभी कबार ही पीता है । कुछ देर के बाद उसने पैड लगाना शुरू कर दिया । मैं उसके साथ बैठी थी और चुप थी । उसने मुझे सब देखकर मुझे कहा क्या हुआ चुका हूँ? कुछ नहीं कोई बात नहीं । मैंने कहा नहीं कोई बात तो है । ठीक होने का कोई बात नही । मैंने कहा पर अब तो मेरी आंखों की नमी को पहचान गया और उसके बार बार चुप रहने का कारण पूछने लगा तो मैंने उससे कहा तो मैं तो बताई है चुप क्यों? क्या यार तुम बिना जी को ने दराज कि जाहिर करते हुए गा नहीं है । इतना कहने के बाद अपने आप को रोक नहीं पाई और होने लगे । अगर तुम ऐसे रोकी तो मुझे और तक लगाना पडेगा । अच्छा जी को ने मुझे चुप करवाते हुए मजाकिया लहजे में कहा, नहीं चुकता हूँ ये देखो मैंने का वैसे बात किया । ऍम से पूछा बात कुछ नहीं है । मैं तो बस अपने आपको पोस रही थी कि मैं दुनिया की सबसे बडी बदनसीब औरत हो । मेरे पिता की मृत्यु मेरी वजह से हुई थी । उनकी मृत्यु का पश्चताप करने के लिए अनेक मकसद रखा । और अब अगर मैं अपने मकसद में कामयाब हो रही हूँ मेरे मकसद में मेरा साथ देने वाला यानि तुम मेरा साहब छोड । मैंने का ऐसे नकारात्मक प्रचार अपने मन में नहीं लाते हैं । तो मैं इसी बात की कमी है । मकसद हमारा पूरा हो गया है । हमने जो हकलाहट की समस्या को काबू पाने के लिए सेंटर होना था वो सफलता पूर्वक चल रहा है । बस अगर मेरे हिसाब से सोचो तो तुम तो दुनिया की सबसे खुशनसीब औरत हूँ । सिखों ने कहा वो कैसे? मैंने हैरानी से पूछा क्या तुम है या किसी को पता है कि उसकी मृत्यु काम हो? नहीं नहीं ना तो इस मामले में तुम बहुत खुशनसीब हो क्योंकि तुम्हारे पति यानी मुझे इतना तो पता है कि मेरी मृत्यु कब हुआ नहीं है । जिन्होंने कहा इसमें खुशनसीबी वाली क्या बात आ गई? मैंने काम है ये बात तो है ऍम पीते होगा वो कैसे? मैंने पूछा तो सर कुदरत का एक नियम है कि जो दुनिया में आया है उसे जाना ही होगा । चाहे वो राजा हो या कुछ गरीब हो कोई भी हो लेकिन किसी को ये नहीं पता कि उसको जाना कब हैं । तो मुझे जैसे कुछ खुशनसीब लोग होते हैं जिन्हें ये पता होता है कि जाना कम है । यानी मेरी मृत्यु कब बोली है । तो इस मामले में तुम खुशनसीब ही तो हूँ कि तुम्हारे पति को ये तो पता है कि उसकी मृत्यु कम होनी है । जी को ने कहा जी को की बात सुनकर मैं चुप थी और कुछ बोल नहीं पा रहे हैं । मुझे चुप देखकर उसने मुझे कहा एक बात बताऊँ बोलो । मैंने कहा अगर मेरी अचानक है इसे दुर्घटना में मच्छी हो जाती तो ऐसा मत बोलो । ये कहने के बाद मैं जोर जोर से रोने लगी । उसने मुझे बाहों में ले लिया और चुप कराने लगा और कहा चुप हो जाऊँ अगर होने से मैं कैंसर हो सकता है तो हम दोनों आज रात को खूब होते हैं और हम तो ऐसा संभव नहीं । हम दोनों को सच स्वीकार करना होगा । मेरे पास समय बहुत कम है और ये तो मैं तय करना होगा कि मेरा ये समय होते हुए भी इतना चाहिए कि हसते हुए दुखी मैं भी हूँ । लेकिन मेरे तो साहिर करने का समय नहीं है । कुछ महीने के बाद में अस्पताल में चला जाऊंगा जहाँ मैं अपने आखिरी दिन गुजारूंगा वहाँ पे अपना इलाज करने नहीं हूँ बल्कि इसलिए जाऊंगा कि मेरा अंतिम समय जानी । मेरी मृत्यु के वक्त मुझे कोई कष्ट हूँ । जानी मैं अलग तरह का नाम और उस समय मुझे तुम्हारा साथ चाहिए । मैं अपने अंतिम समय तक तो तुम्हारे परिवार के बाकी सदस्यों के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहता हूँ । एक बात और जिन्होंने कहा को क्या मैंने पूछा मैं वापस आऊंगा । होने का मतलब मैंने हैरानी से पूछ लूँ मतलब ये मैं दोबारा जन्म लूंगा और इस दुनिया में वापस आऊंगा जी होने का तो मैं कैसे कह सकते हो । मेरे कहने का मतलब है कि तुम्हें किसने कहा । ऐसा मैंने चेक उसका मेरी आस्था नहीं, मेरी श्रद्धा नहीं । मेरे भगवान ने मुझसे कहा है कि मैं वापस जरूर आऊंगा । चीज होने का देखो सात बहुत हो गई है पर मुझे नहीं आ गई है । अब ये सब बंद करो और चल सोचा हूँ । मैंने बात को पलटते हुए कहा तो मेरी बात को मजाक समझ रही हूँ । मैं वापस आऊंगा । मैं वापस आऊंगा । मैं बातें आऊंगा । जी हूँ ये बात दोहराते हुए वही हो गया और मैं धीरे धीरे उसके आस पास पडे बच्चों को उठाने लगे । बाद में वही उसके ऊपर चादर देकर उसे वही सुना दिया । मैंने भी कमरे की लाइट बंद की होगी परंतु चीजों की कहीं बातें, मेरे दिमाग में सुनामी की जैसे हालात पैदा करना चाहिए । मैं इस बारे में सोचने लगी । बच्ची को उन्हें सच ही कहा है कि वो सबसे खुशकिस्मत इंसान है क्योंकि उसे अपने बढने का समय पता है । यहाँ हम जैसे लोगों को तो ये तक नहीं पता कि आने वाले समय उनके लिए कैसा होगा । उसके बाद मैंने ये निश्चित किया की चीजों के इस समय के दौरान उसे खुश ही कोशिश करते हैं क्योंकि उसके पास समय बहुत कम है तो उससे जो कहा की मैं वापस आऊंगा । इसका क्या मतलब हुआ? जी को तो इन सब बातों को मानता ही नहीं । फिर उसने ऐसा क्यों का?

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यह कहानी एक ऐसे पात्र के जीवन पर आधारित है जो हकलाहट कि समस्या से पीड़ित है और अपनी इस समस्या के कारण उसे कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है । और साथ ही यह बताने की कोशिश कि है की कैसे उसने अपनी इस समस्या के साथ संघर्ष करते हुए अपनी ज़िन्दगी व्यतीत की और कैसे उसने अपनी इस समस्या से छुटकारा पाया । Voiceover Artist : Raghav Dutt Author : Rohit Verma Rimpu Producer : Theremin Studios
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