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7. Devlok Par Asuron Ka Aakraman

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श्री राम Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त Voiceover Artist : Ramesh Mudgal
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श्री राम बहुत सात इस दूध की हत्या के उपरांत रावण की सभा में इस करते गी प्रतिक्रिया पर विचार होने लगा । राष्ट्र का कहना था, महाराज देवता इसका प्रतिशोध लेंगे । वे नपुंसक मेरा कुछ नहीं बिगाड सकते हैं । वे लंका पर आक्रमण तो कर सकते हैं । अब उनमें विष्णु जैसा छोरे वाला कोई नहीं । महाराज मेरा ये कहना है कि युद्ध अपने राज्य में नहीं होना चाहिए । छत्रों के घर में जाकर लडना ठीक है । इस कारण देव लोग पर आक्रमण कर देना चाहिए । युद्ध तो अब होगा । इस कारण मेरी सम्मति यह है कि एक का एक देव लोग पर आक्रमण कर दिया जाएगा । यह तो रावण के मन की बात थी तो उसने कहा तो तैयारी कर लो । बस फिर क्या था रणभेरी बजा दी गई और काले बादलों की बाटी ऍम की अपार सेना देव लोग की ओर तो हडबडी धवन अपने लडके मेघनाथ को सेना ना एक बनाकर दो मास में देव लोग जाता हूँ । सबसे पहले अलकापुरी पर ही आक्रमण कर दिया । नल कुंवर ने डटकर आक्रमण का विरोध किया परंतु रावण की सेना बहुत अधिक थी और लडने का अब ध्यान सकती थी । अल्कापुरी की सेना को लडने का अभ्यास नहीं था । जब से कुबेर ने राज्य स्थापित किया था । लोग शांति और सुख का जीवन व्यतीत करते रहते थे । उसकी सेना सेना के सामने टिक नहीं सकी । नलकू और ऍम लडने के लिए आया परंतु घायल हो अच्छे हुआ तो उसके सेवक उसे उठाकर ले गए । रावन ने पूर्ण नगर को लूटा । वहाँ के स्त्रीवर्ग को अपने सैनिकों के हवाले कर दिया और वो वेयर के पुष्पक विमान को अपने अधिकार में ले दिया । अल्कापुरी के उपरांत कैलाश पर आक्रमण किया गया । यह महादेव शिव का देश था । शिव जी के गण लडने के लिए निकल आए । घमासान युद्ध होने लगा तो रावण को समझ में आ गया कि वह शिव जी पर विजय प्राप्त नहीं कर सकेगा । इस कारण रावण नहीं संधि का प्रस्ताव किया । सचिन जी ने भी सोचा कि और अधिक रक्त बात की क्या हो सकता है । देवी पार्वती को भी सुकेश के वंशज पर दया आ गई । साथ ही शिव जी को देवताओं पर भी रोज था कि वे युद्ध में उनके सहयोग के लिए नहीं आए । हत्या संधि कर शांत हो गए । इस का बारी बारी से भिन्न दिन देव राज्यों को व्यवस्था करता हुआ यम, वरुण और अन्य देवताओं पर विजय प्राप्त कर दस ग्रीव ने अमरावती पर धावा बोल दिया । केंद्र किसी अन्य देवता की सहायता के लिए नहीं निकला था । अतः अन्य किसी देवता ने भी अपनी सेना इन लोग की रक्षा के लिए नहीं भेजी । इस पर भी अति भयंकर संग्राम हुआ । राक्षस सेना की अपार क्षति हुई और यदि युद्ध उस दिन ओर चल जाता तो मैं पराजित हो जाते हैं । परंतु मेघनाथ ने धोखे से इंद्र को बंदी बना लिया । केन्द्र के बंदी बना लेने पर जहाँ राक्षसों के नेता लास्ट नास्कर परस्पर गले मिलने लगे, वहाँ देवताओं में मुर्दनी छा गई । पूरन देव लोग के विजय करने पर भी रावण अपना राज्य वह स्थापित नहीं कर सका । देव लोग चीत प्रदान देश था । केंद्र दिव्याग नहीं का रहस्य जानता था और उसने ऐसा प्रबंध किया था, जिससे अमरावती के निवासी नगरों और मकानों को रहने के योग्य गरम रखते थे । इसका रहस्य रावण नहीं जानता था । केन्द्र के बंदी होने पर संपूर्ण देव लोग चीज से फिट होने लगा । सागर के मध्य में एक टापू पर रहने वाले राक्षसों को इतनी भीषण शीत का अभ्यास नहीं था । अधिकतर सैनिकों को तो चीज लोगों ने जगह लिया था और वे छुट्टी लेकर लोटने लगे । रावण ने अपनी सेना के सेनापति मेघनाथ से सम्मति की तो वह भी वहाँ से लोट चलने के लिए कहने लगा । बंदी इंद्रा को साथ लेना लोटने की सोच ही रहा था कि ब्रह्मा समाचार पाकर वहाँ चले आए और रावण तथा इन्द्र में संधि करवा दी । परस्पर मैत्री रखने के वर्ष हो गए और इंद्र ने अपनी मुक्ति के मूल्य में कई दिव्यास्त्र मैं एक दिन शक्ति भी मेघनाथ को दी । यह दिव्यशक्ति जब छोडी जाती थी तो जो सामने वाले समीर हो तो तुरंत उनकी मृत्यु हो जाती थी । अंतर पर होने पर मुर्छित हो जाते थे और यदि शीघ्र ही चिकित्सा न हो तो भी उनकी मृत्यु हो जाती थी । अमरावती पर आक्रमण में रावण की सेना कि बहुत हानि हुई थी । कॅश बहुत अधिक संख्या में मारे गए थे । देव लोग का पार धन लूटकर रावण लंका को चल पडा ।

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श्री राम Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त Voiceover Artist : Ramesh Mudgal
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